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भास्कर न्यूज|लोहरदगा लोहरदगा, जिले के भंडरा प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत अंबेरा और उदरंगी गांवों में जोरदार बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। अचानक बदले मौसम ने खेतों में तैयार खड़ी फसलों को बुरी तरह नुकसान पहुंचाया, जिससे किसानों के सामने आर्थिक संकट गहरा गया है। सबसे अधिक नुकसान सब्जी और नगदी फसलों को हुआ है। किसानों का कहना है कि उन्होंने कर्ज लेकर खेती की थी, लेकिन प्राकृतिक आपदा ने उनकी पूरी उम्मीद तोड़ दी। बारिश और ओलावृष्टि के कारण खेतों में लगी खीरा, तरबूज, मक्का, टमाटर समेत कई अन्य फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गईं। कई खेतों में फसल जमीन पर गिर गई, जबकि कुछ जगहों पर ओलों की मार से पौधे टूट गए। प्रभावित किसानों ने बताया कि इस मौसम में फसल अच्छी होने की उम्मीद थी और बाजार में भी अच्छी कीमत मिलने की संभावना थी, लेकिन अचानक आई आपदा ने सारी योजनाओं पर पानी फेर दिया। फसल नुकसान से प्रभावित किसानों में सोमे उरांव, कृष्णा उरांव, बाबर अंसारी, इमरोज अंसारी, अर्जुन उरांव, बदेश्वर उरांव, फिरोज अंसारी, गुलाम मुस्तफा अंसारी, देवीचरन भगत, राजकुमार साहू, पीर मोहम्मद अंसारी, क्यूंम अंसारी और इस्राफील अंसारी सहित कई अन्य किसान शामिल हैं। किसानों ने बताया कि खेती ही उनके परिवार की आय का मुख्य साधन है। ऐसे में फसल बर्बाद होने से परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। प्रभावित किसानों ने कहा कि बीज, खाद, सिंचाई और मजदूरी पर काफी खर्च किया गया था। कई किसानों ने खेती के लिए उधार लिया था, जिसे चुकाना अब मुश्किल हो गया है। किसानों का कहना है कि यदि सरकार की ओर से तत्काल राहत नहीं मिली तो उनकी स्थिति और गंभीर हो सकती है। उधर, उदरंगी पंचायत के मुखिया परमेश्वर महली ने प्रभावित गांवों का दौरा कर किसानों के खेतों में पहुंचकर नुकसान का जायजा लिया। उन्होंने किसानों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं और प्रशासन से जल्द सर्वे कराकर उचित मुआवजा देने की मांग की। संवेदनशीलता दिखाते हुए तत्काल राहत पहुंचानी चाहिए : मुखिया ने कहा कि प्राकृतिक आपदा से किसानों को भारी नुकसान हुआ है और सरकार को संवेदनशीलता दिखाते हुए तत्काल राहत पहुंचानी चाहिए। मुखिया परमेश्वर महली ने कहा कि किसान दिन-रात मेहनत कर फसल तैयार करते हैं, लेकिन मौसम की मार के सामने उनकी मेहनत बेकार हो जाती है। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की कि प्रभावित किसानों की सूची बनाकर जल्द मुआवजा दिया जाए, ताकि किसान दोबारा खेती के लिए तैयार हो सकें। इधर, गांवों में फसल बर्बादी के बाद मायूसी का माहौल है। किसान अब प्रशासन और सरकार की मदद की उम्मीद लगाए बैठे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय पर सहायता नहीं मिली तो कई किसानों के सामने आर्थिक संकट और गहरा जाएगा।
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