प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन ने वैश्विक चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन और आर्थिक अस्थिरता को लेकर एक संयुक्त लेख लिखा है. इस लेख में दोनों नेताओं ने दुनिया से अपील की है कि मौजूदा दौर में देशों को अलग-थलग होने के बजाय साझेदारी और सहयोग का रास्ता अपनाना चाहिए. दोनों प्रधानमंत्रियों ने कहा कि दुनिया इस समय भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा संकट और आर्थिक अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है. ऐसे समय में अंतरराष्ट्रीय सहयोग और बहुपक्षीय व्यवस्था पहले से ज्यादा जरूरी हो गई है. उन्होंने जोर देकर कहा कि जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौती का समाधान कोई देश अकेले नहीं निकाल सकता.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्वीडन के पीएम ने अपने लेख में कहा, ‘ऐसे वक्त में जब संयुक्त राष्ट्र अपनी 80वीं वर्षगांठ मना रहा है, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और बहुपक्षवाद का महत्व और भी अधिक स्पष्ट हो गया है. साथ ही, वैश्विक शासन संस्थाओं में सुधार की आवश्यकता को अब नज़रअंदाज़ करना असंभव हो गया है.’
‘विकास और पर्यावरण साथ-साथ चल सकते हैं’
दोनों राष्ट्राध्यक्षों ने संयुक्त लेख में लिखा कि क्लाइमेट एक्शन को विकास से अलग नहीं किया जा सकता. दुनिया के करोड़ों लोग अब भी बेहतर जीवन, रोजगार, ऊर्जा और आधुनिक सुविधाओं की उम्मीद रखते हैं. ऐसे में आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण को साथ लेकर चलना ही आज की सबसे बड़ी चुनौती है.
पीएम मोदी ने इस लेख में भारत का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और साथ ही बड़े स्तर पर रिन्यूएबल एनर्जी ट्रांजिशन भी कर रहा है. भारत ने 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने और 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन हासिल करने का लक्ष्य रखा है.
भारत ने दुनिया को दिए कई ग्लोबल प्लेटफॉर्म
पीएम मोदी ने लिखा कि भारत ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए कई अहम पहल शुरू की हैं. इनमें इंटरनेशनल सोलर अलायंस, ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस और मिशन LiFE जैसे प्लेटफॉर्म शामिल हैं. दोनों नेताओं ने कहा कि भारत ग्लोबल साउथ की जिम्मेदार आवाज बनकर उभरा है.
वहीं स्वीडन की तारीफ करते हुए कहा गया कि उसने यूरोप में जलवायु कार्रवाई में अग्रणी भूमिका निभाई है. स्वीडन का बिजली ग्रिड करीब 98 प्रतिशत फॉसिल-फ्यूल फ्री हो चुका है और 1990 के बाद से वहां उत्सर्जन में एक-तिहाई से ज्यादा कमी आई है, जबकि अर्थव्यवस्था लगभग दोगुनी हो गई.
‘LeadIT’ को बताया भारत-स्वीडन साझेदारी का बड़ा उदाहरण
दोनों प्रधानमंत्रियों ने 2019 में भारत और स्वीडन द्वारा संयुक्त राष्ट्र के सहयोग से शुरू किए गए ‘लीडरशिप ग्रुप फॉर इंडस्ट्री ट्रांजिशन’ यानी LeadIT का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि इस पहल ने इंडस्ट्रियल डिकार्बोनाइजेशन और क्लीन इंडस्ट्री को वैश्विक बहस के केंद्र में लाने का काम किया है.
उन्होंने कहा कि अब LeadIT को सिर्फ चर्चा तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि इसे बड़े पैमाने पर लागू करने की जरूरत है. इसके जरिए टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप, क्लीन एनर्जी सप्लाई चेन, इंडस्ट्रियल प्रोजेक्ट्स और सस्टेनेबल फाइनेंस को बढ़ावा दिया जा सकता है.
‘हर देश को तकनीक अपनाने का मौका मिलना चाहिए’
लेख में दोनों नेताओं ने कहा कि हर देश को अपनी जरूरतों के हिसाब से तकनीक अपनाने और उसे बड़े स्तर पर लागू करने का मौका मिलना चाहिए. उन्होंने कहा कि कार्बन उत्सर्जन सीमाओं को नहीं मानता, इसलिए इसके समाधान भी वैश्विक होने चाहिए.
उन्होंने 2030 तक इस वैश्विक गठबंधन को और मजबूत करने की अपील की और नॉर्डिक देशों समेत दूसरे देशों को भी इसमें शामिल होने का न्योता दिया.
‘टकराव नहीं, सहयोग से बनेगा भविष्य’
प्रधानमंत्री मोदी और स्वीडन के प्रधानमंत्री ने अपने संयुक्त लेख के अंत में साफ संदेश दिया कि दुनिया के सामने मौजूद चुनौतियों का समाधान सहयोग में है, टकराव में नहीं. उन्होंने कहा कि भारत और स्वीडन मिलकर एक ऐसे भविष्य की दिशा में काम कर रहे हैं, जहां आर्थिक विकास, पर्यावरण संरक्षण और वैश्विक साझेदारी साथ-साथ आगे बढ़ें.