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चाईबासा। सहज व सरल आदिवासियों को गुमराह करने के लिए दिल्ली में जनजातीय सांस्कृतिक समागम का आयोजन किया जा रहा। जिससे आदिवासियों को बचने की आवश्यकता है। यह बातें शनिवार को गैर राजनीतिक सामाजिक संगठन झारखंड पुनरुथान अभियान के केंद्रीय अध्यक्ष सन्नी सिंकू ने टाटा कॉलेज के पास आयोजित अभियान की एक बैठक में कही। उन्होंने कहा कि जनजाति सुरक्षा मंच मूल रूप से अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम से संबंधित संगठन है। अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम का मातृ संगठन आरएसएस है। जनजाति सुरक्षा मंच कहने के लिए तो जनजातियों की सुरक्षा करने वाले संगठन के रूप में प्रचारित किया जाता है। लेकिन आरएसएस के गर्भ से निकला यह संगठन आदिवासियों को आदिवासी मानने के लिए भी तैयार नहीं है। अभियान के केंद्रीय महासचिव अमृत मांझी ने कहा कि जनजाति सुरक्षा मंच मूल रूप से वैसे आदिवासियों को टारगेट कर काम करता है, जो ईसाई धर्म से जुड़ गए हैं। उनका डीलिस्टिंग की बात कहती है। जबकि आदिवासियों को धर्म के आधार पर आदिवासी का अधिकार से वंचित नहीं करने का निर्णय उच्चतम न्यायालय का है। बैठक में अभियान के जिला सचिव शैली शैलेन्द्र सिंकू, अभियान के संस्थापक सदस्य पूर्व मुखिया कोलंबस, राजीव गांधी पंचायती राज संगठन कांग्रेस पश्चिमी सिंहभूम के समन्वयक रितेश कुमार तमसोय और अन्य लोग उपस्थित थे।
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