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बिजली की समस्या से तंग आए ग्रामीण, कंधों पर उठाया ट्रांसफार्मर! 3...

Last Updated:June 18, 2026, 18:55 IST राजस्थान की सबसे ऊंची चोटी गुरु शिखर से करीब 4 किलोमीटर की दूरी पर बसा दुर्गम उत्तरज गांव, जहां बिजली के पोल तो लगे हैं, लेकिन सड़क मार्ग नहीं होने से यहां ट्रांसफार्मर नहीं होने की वजह से बार-बार बिजली के कम वोल्टेज और बिजली गुल होने की समस्या बनी रहती थी. बेहतर बिजली व्यवस्था की जिद के चलते ग्रामीणों ने अपने गांव तक ट्रांसफार्मर पहुंचाया. ख़बरें फटाफट सिरोही : जिले के दुर्गम पहाड़ों के बीच बसे उतरज गांव के ग्रामीणों ने बार–बार बिजली गुल होने की समस्या को दूर करने के लिए 3 टन वजनी ट्रांसफार्मर को कंधों पर उठाकर 3 किलोमीटर पैदल चलकर अपने गांव तक पहुंचाया. बिजली विभाग की ओर से सड़क मार्ग गुरुशिखर तक ट्रांसफार्मर पहुंचाया गया था. इसके आगे उतरज गांव तक सड़क मार्ग नहीं होने से ट्रांसफार्मर आगे ले जाना संभव नहीं था. समस्या को देखते हुए ग्रामीणों ने सहयोग करते हुए ट्रांसफार्मर को कंधों पर उठाकर अपने गांव तक लाया. राजस्थान की सबसे ऊंची चोटी गुरु शिखर से करीब 4 किलोमीटर की दूरी पर बसा दुर्गम उत्तरज गांव, जहां बिजली के पोल तो लगे हैं, लेकिन सड़क मार्ग नहीं होने से यहां ट्रांसफार्मर नहीं होने की वजह से बार-बार बिजली के कम वोल्टेज और बिजली गुल होने की समस्या बनी रहती थी. बेहतर बिजली व्यवस्था की जिद के चलते ग्रामीणों ने यह कदम उठाया और अपने गांव तक ट्रांसफार्मर पहुंचाकर ही राहत की सांस ली. स्वदेश फिल्म की तर्ज पर गांव में पहुंचाया ट्रांसफार्मरग्रामीणों ने स्वदेश फिल्म की तर्ज पर गांव में बिजली की समस्या को दूर करने के लिए 3 टन वजनी डीपी को दुर्गम, फिसलन भरी पहाड़ी और पथरीले रास्ते से कंधों पर उठाकर अपने गांव तक लाया. इस कार्य में बड़े बुजुर्ग सबने अपनी भूमिका निभाई. गांव में ट्रांसफार्मर के लगने से ग्रामीणों की बिजली की समस्या दूर हो सकेगी. 1400 मीटर की ऊंचाई पर बसा गांव, आबादी 400 लोगों कीजिले के माउंट आबू उपखंड का उतरज गांव 1400 मीटर की ऊंचाई पर बसा हैं. इस गांव की आबादी वर्ष 2011 में 290 थी जो बढ़कर 400 के करीब हो गई हैं. आज भी ये गांव इंटरनेट सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं. यहां एक मात्र आटा चक्की हैं. जिसे ग्रामीणों ने अपने कंधों पर उठाकर लाया था. गांव का एक मात्र ट्रेक्टर भी पिछले वर्ष ग्रामीण इसी तरह कंधों पर उठाकर लाए थे. गांव के विकास में सबसे बड़ी बाधा गांव तक सड़क मार्ग नहीं होना हैं. दुर्गम पहाड़ों के बीच बसा गांव होने की वजह से यहां सड़क नहीं बन सकती है. नरेगा से गुरुशिखर से कुछ मीटर तक पथरीली पगडंडी बनाई गई है, लेकिन हर वर्ष बारिश में ये पगडंडी भी चलने लायक नहीं रहती है. About the Author Jagriti Dubey Hi, I am Jagriti Dubey, a media professional with 6 years of experience in social media and content creation. I started my career with an internship at Gbn 24 news channel in 2019 and have worked with many repu…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Sirohi,Rajasthan Source link

झारखंड

parimal nathwani and baidyanath Ram wins jharkhand rajya sabha election 2026

Last Updated:June 18, 2026, 18:51 IST Jharkhand Rajya Sabha elections 2026: झारखंड राज्यसभा चुनाव में एनडीए समर्थित निर्दलीय परिमल नथवानी ने 28 वोट पाकर जीत दर्ज की. कांग्रेस के प्रणव झा को 19 वोट मिले. वहीं 3 वोट को अमान्य घोषित किया गया है. इस चुनाव भी महागठबंधन की रणनीति फेल हो गई है. वहीं एक सीट पर जेएमएम के बैद्यानाथ राम जीते हैं. उनको 30 मत मिले. झारखंड राज्यसभा चुनाव: NDA समर्थित परिमल नथवानी और JMM के वैद्यनाथ राम की बड़ी जीत, कांग्रेस को झटका रांची: झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए हुए बेहद हाई-प्रोफाइल मुकाबले में एक बड़ा उलटफेर हुआ है. बीजेपी और एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवानी ने जादुई आंकड़ा छूते हुए राज्यसभा चुनाव जीत लिया है. हालांकि चुनाव आयोग की तरफ से इसकी औपचारिक घोषणा होना अभी बाकी है. लेकिन बीजेपी विधायक प्रदीप यादव ने इस जीत की पुष्टि कर दी है. बता दें की दो सीटों में जेएमएम के बैद्यनाथ राम को 30 वोट, एनडीए प्रत्याशी परिमल नाथवानी को 28 वोट और कांग्रेस उम्मीदवार को प्रणव झा को 19 वोट मिले हैं. तीन मत को अमान्य घोषित किया गया है. नथवानी को मिले 28 वोट, कांग्रेस खेमे में मायूसीबीजेपी खेमे से आ रही जानकारी के अनुसार निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नथवानी को जीत के लिए जरूरी प्रथम वरीयता के पूरे 28 वोट मिले हैं. दूसरी तरफ सत्ताधारी महागठबंधन के बहुमत के दावों के बावजूद कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा को करारा झटका लगा है. प्रणव झा को महज 19 वोटों से ही संतोष करना पड़ा है. इस चुनाव में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब वोटिंग के दौरान 3 वोटों को अमान्य घोषित कर दिया गया. जिसने पूरे सियासी समीकरण को पलट कर रख दिया. महागठबंधन के आंकड़ों का गणित फेल!चुनाव से पहले सत्ताधारी महागठबंधन (झामुमो-कांग्रेस-राजद) के पास 56 विधायकों का प्रचंड बहुमत था. झामुमो के प्रत्याशी बैद्यनाथ राम पहली सीट बेहद आसानी से निकाल रहे थे. जिसके बाद भी कांग्रेस के प्रणव झा के लिए पूरे 28 वोट बचने का दावा किया जा रहा था. लेकिन मतदान के वक्त हुई क्रॉस-वोटिंग और 3 वोटों के अमान्य होने से कांग्रेस की रणनीतियों पर पानी फिर गया. परिमल नथवानी की इस जीत के साथ ही झारखंड की सियासी जमीन पर बीजेपी समर्थित रणनीति एक बार फिर कामयाब साबित हुई है. जबकि सत्ता में होने के बावजूद कांग्रेस को अपनी सीट गंवानी पड़ी है. About the Author Amit ranjan मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Ranchi,Jharkhand Source link

झारखंड

एक्सीलेंस अवार्ड' समारोह 2 को, राज्यपाल होंगे अतिथि

रांची | यूथ हॉस्टल्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया झारखंड राज्य शाखा की बैठक बुधवार को आयोजित की गई। आगामी ‘एक्सीलेंस अवार्ड’ समारोह 2 जुलाई को रांची विश्वविद्यालय परिसर स्थित आर्यभट्ट सभागार में आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। प्रति दो वर्ष के अंतराल पर होने वाले इस प्रतिष्ठित समारोह के माध्यम से शिक्षा, खेल, सामाजिक सेवा, युवा विकास, पर्यावरण संरक्षण और संस्कृति सहित विविध क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली विभूतियों को सम्मानित किया जाएगा। बैठक में समारोह की रूपरेखा और तैयारियों पर चर्चा की गई। इस बार समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में झारखंड के राज्यपाल को आमंत्रित करने का निर्णय लिया गया है। बैठक में राज्य शाखा के अध्यक्ष डॉ. नितिन मदन कुलकर्णी, शिवेंद्र दुबे, चंचल भट्टाचार्य और उदय साहू मुख्य रूप से उपस्थित थे। सदस्यों ने भरोसा जताया कि यह आयोजन युवाओं को प्रेरित करने में मील का पत्थर साबित होगा। Source link

शिक्षा

SBI PO Vacancy 1500 | Govt Jobs MPPSC UPSSSC C-DAC

51 मिनट पहले कॉपी लिंक आज की सरकारी नौकरी में जानकारी एमपीपीएससी ने 949 पदों पर निकाली भर्ती और एसबीआई में 1500 वैकेंसी की। इन जॉब्स के बारे में जानकारी के साथ आवेदन की प्रक्रिया यहां देखिए… 1. एमपीपीएससी ने 949 पदों पर निकाली भर्ती, एज लिमिट 42 साल MPPSC ने असिस्टेंट प्रोफेसर के 949 पदों पर भर्ती निकाली है। उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट mppsc.mp.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकेंगे। एजुकेशनल क्वालिफिकेशन : संबंधित विषय में न्यूनतम 55% अंकों के साथ मास्टर डिग्री पद के अनुसार, मास्टर डिग्री, एम फिल, पीएचडी, NET/SET एज लिमिट : न्यूनतम : 21 साल अधिकतम : 42 साल सैलरी : 57,700 रुपए प्रतिमाह फीस : जनरल / मध्य प्रदेश के बाहर के उम्मीदवार : 540 रुपए मध्य प्रदेश के एससी, एसटी, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस : 290 रुपए सिलेक्शन प्रोसेस : रिटन एग्जाम इंटरव्यू/ डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन ऐसे करें आवेदन : एमपीपीएससी की ऑफिशियल वेबसाइट mppsc.mp.gov.in पर जाएं। “ऑनलाइन आवेदन करें” लिंक पर क्लिक करें। एक नया अकाउंट बनाएं। फॉर्म में जरूरी डॉक्यूमेंट्स अपलोड करें। फीस का भुगतान करें। फॉर्म का प्रिंटआउट लेकर रखें। ऑनलाइन आवेदन लिंक ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक 2. SBI में 1500 पदों पर भर्ती, सैलरी 85 हजार तक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) में प्रोबेशनरी ऑफिसर के पदों पर भर्ती निकली है। उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट sbi.co.in पर जाकर अप्लाई कर सकते हैं। एजुकेशनल क्वालिफिकेशन : ग्रेजुएशन की डिग्री एज लिमिट : न्यूनतम : 21 साल अधिकतम : 30 साल रिजर्व कैटेगरी के उम्मीदवारों को अधिकतम उम्र में छूट दी जाएगी। फीस : जनरल, ईडब्ल्यूएस, ओबीसी : 750 रुपए एससी, एसटी, दिव्यांग : नि:शुल्क सिलेक्शन प्रोसेस : प्रीलिमिनरी एग्जाम मेन्स एग्जाम ग्रुप डिस्कशन, पर्सनल इंटरव्यू सैलरी : 48480 – 85920 रुपए प्रतिमाह ऐसे करें आवेदन : ऑफिशियल वेबसाइट recruitment.sbi.bank.in पर जाएं। न्यू रजिस्ट्रेशन लिंक पर क्लिक करें। नाम, पासवर्ड के साथ लॉग इन करें। फॉर्म में पासपोर्ट साइज फोटो, सिग्नेचर और अन्य डॉक्यूमेंट्स अटैच करें। फीस का भुगतान करें। फॉर्म प्रिव्यू करके सब्मिट करें। इसका प्रिंटआउट निकाल कर रखें। ऑनलाइन आवेदन लिंक ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक ये खबर भी पढ़ें 15 लाख सैलरी वाली प्राइवेट नौकरी से खुश नहीं पिता:बेटे को जॉब छोड़ने के लिए कर रहे मजबूर, सरकारी नौकरी को बताया बेस्ट एक पिता अपने IIM ग्रेजुएट बेटे की 15 लाख सालाना सैलरी वाली जॉब से खुश नहीं है, क्योंकि वो एक प्राइवेट जॉब है। कई यूजर्स पिता के पक्ष में अपनी राय दे रहे हैं तो कई बेटे के फेवर में हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं… Source link

झारखंड

समाज में उत्कृष्ट कार्यों के लिए राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल सम्मानित

रांची| केंद्र सरकार के सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण के 12 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में रांची में आयोजित सम्मान समारोह में समाजसेवा के लिए राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल को सम्मानित किया गया। कांके रोड स्थित भुवालका हाउस में हुए कार्यक्रम में केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने अंगवस्त्र और शॉल ओढ़ाकर उन्हें स्मृति-चिह्न तथा विशेष पुस्तिका भेंट की। राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट और सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम के माध्यम से निराश्रित, दिव्यांग, असहाय और जरूरतमंद लोगों के लिए लगातार काम कर रहे हैं। उनके नेतृत्व और सहयोग से जनकल्याणकारी गतिविधियों का संचालन हो रहा है। Source link

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होमताजा खबरकृषि न मिट्टी की झंझट, न गमले की टेंशन…सिर्फ पानी में उगाएं ये पौधे, घर रहेगा ठंडा Last Updated:June 18, 2026, 17:37 IST How to grow money plant in water: घरों में मिट्टी की झंझट से बचने के लिए लोग पानी में पौधे उगा रहे हैं. अब मनी प्लांट, लकी बैम्बू, स्नेक प्लांट, पीस लिली जैसे पौधे पानी में उगा रहे हैं. ये पौधे कम देखभाल में घर को हरा-भरा और ठंडा रखते हैं. बस हर 4-5 दिन में पानी बदलना जरूरी है. जानिए इसके फायदे और लगाने के टिप्स. ख़बरें फटाफट नई दिल्ली: आजकल लोगों की जिंदगी इतनी भागदौड़ भरी हो गई है कि हर कोई चाहता है कि घर थोड़ा शांत, साफ और हरियाली से भरा दिखे. लेकिन कई बार मिट्टी, गमले और रोज़ की देखभाल की वजह से लोग पौधे लगाने से बचते हैं. ऐसे में अब एक आसान तरीका लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है पानी में पौधे उगाना.ये तरीका न सिर्फ आसान है बल्कि घर को खूबसूरत और फ्रेश रखने का भी अच्छा ऑप्शन है. बस एक कांच का जार, साफ पानी और सही पौधा और आपका छोटा सा ग्रीन कॉर्नर तैयार. ये पौधे बन रहे लोगों की पहली पसंदघरों में सबसे ज्यादा मनी प्लांट को पानी में उगाया जा रहा है. इसकी कटिंग आसानी से जड़ पकड़ लेती है और यह घर की खूबसूरती बढ़ाता है. इसके अलावा लकी बैम्बू भी काफी पसंद किया जा रहा है, जिसे लोग शुभ मानते हैं. वहीं स्नेक प्लांट और पीस लिली भी इस ट्रेंड का हिस्सा हैं. स्नेक प्लांट हवा को साफ करने के लिए जाना जाता है, जबकि पीस लिली अपने सफेद फूलों और सुंदर लुक के लिए मशहूर है.इसके साथ फिलोडेंड्रोन भी पानी में आसानी से उगने वाला पौधा माना जाता है. कम मेहनत, ज्यादा खूबसूरतीपानी में उगने वाले पौधों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इनमें मिट्टी की गंदगी नहीं होती और न ही ज्यादा देखभाल की जरूरत पड़ती है. एक कांच के जार या बोतल में साफ पानी भरकर पौधे की कटिंग डालने से कुछ ही दिनों में उसकी जड़ें निकलने लगती हैं. यही वजह है कि यह तरीका आजकल लोगों के बीच तेजी से फेमस हो रहा है. देखभाल में रखें इन बातों का ध्यानगार्डनिंग एक्सपर्ट पिंटू पांडे के मुताबिक, इन पौधों का पानी हर 4 से 5 दिन में बदलना जरूरी है. पानी गंदा होने पर पौधों की ग्रोथ रुक सकती है. साथ ही इन्हें ऐसी जगह रखना चाहिए जहां हल्की धूप या नेचुरल रोशनी मिलती रहे. About the Author Amit ranjan मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : East Delhi,Delhi Source link

झारखंड

बारिश से हो सकता है गन्ने को भारी नुकसान, कृषि विशेषज्ञ ने...

होमताजा खबरकृषि बारिश से हो सकता है गन्ने को भारी नुकसान, विशेषज्ञ से जानें फसल बचाने का उपाय Last Updated:June 18, 2026, 17:29 IST मानसून के दौरान खेत की मिट्टी नरम हो जाती है और गन्ने के पौधे तेजी से बढ़ने लगते हैं. ऐसे में तेज हवा चलने या लगातार बारिश होने पर पौधे गिरने लगते हैं. जब पौधे जमीन पर गिर जाते हैं तो उनकी बढ़वार प्रभावित होती है और उत्पादन पर भी असर पड़ता है. इसलिए किसानों को चाहिए कि वे समय रहते गन्ने के पौधों के पास मिट्टी चढ़ाकर उन्हें मजबूत सहारा दे. देवघर: झारखंड के देवघर समेत आसपास के क्षेत्रों में गन्ने की खेती करने वाले किसानों के लिए यह समय बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. मानसून ने राज्य में दस्तक तो दे दी है, लेकिन देवघर जिले में अभी तक अच्छी और लगातार बारिश नहीं हुई है. ऐसे में कृषि विशेषज्ञ किसानों को सलाह दे रहे हैं कि वे बारिश का इंतजार करने के बजाय अभी से खेतों में जरूरी तैयारियां पूरी कर लें. समय रहते कुछ महत्वपूर्ण कार्य कर लेने से मानसून के दौरान फसल को नुकसान से बचाया जा सकता है और उत्पादन भी बेहतर मिल सकता है. वहीं लापरवाही बरतने पर तेज हवा और अधिक बारिश की वजह से फसल को नुकसान होने की आशंका बढ़ जाती है. क्या कहते हैं कृषि विशेषज्ञ?देवघर के कृषि विशेषज्ञ अंबिका कुशवाहा ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि इस समय गन्ने की फसल में मिट्टी चढ़ाने का काम अवश्य कर लेना चाहिए. मानसून के दौरान खेत की मिट्टी नरम हो जाती है और गन्ने के पौधे तेजी से बढ़ने लगते हैं. ऐसे में तेज हवा या लगातार बारिश होने पर पौधों के गिरने का खतरा बढ़ जाता है. उन्होंने कहा कि जब गन्ने के पौधे जमीन पर गिर जाते हैं तो उनकी बढ़वार प्रभावित होती है और उत्पादन पर भी नकारात्मक असर पड़ता है. इसलिए किसानों को समय रहते पौधों के आसपास मिट्टी चढ़ाकर उन्हें मजबूत सहारा देना चाहिए. इससे पौधों की जड़ें मजबूत होती हैं और वे मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों को आसानी से सहन कर पाते हैं. मिट्टी चढ़ाने से पहले जैविक खाद का करें उपयोगकृषि विशेषज्ञ के अनुसार, मिट्टी चढ़ाने से पहले खेत में जैविक खाद का प्रयोग करना और भी लाभदायक साबित हो सकता है. किसान अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद का उपयोग कर सकते हैं. इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ती है और पौधों को प्राकृतिक रूप से आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं. यदि गोबर की खाद उपलब्ध नहीं हो तो किसान जैविक खाद के अन्य विकल्पों का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. इससे पौधों की जड़ों का विकास बेहतर होता है और फसल अधिक स्वस्थ रहती है. साथ ही जैविक खाद के प्रयोग से मिट्टी की गुणवत्ता लंबे समय तक बनी रहती है, जिसका लाभ भविष्य की फसलों को भी मिलता है. पानी निकासी की समुचित व्यवस्था जरूरीविशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के मौसम में खेतों से पानी की निकासी की व्यवस्था सबसे महत्वपूर्ण होती है. कई बार लगातार बारिश के कारण खेतों में पानी जमा हो जाता है. गन्ने की फसल में लंबे समय तक जलभराव रहने से जड़ें सड़ने लगती हैं और कई तरह की बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए किसानों को अभी से खेतों में नालियां बनाकर पानी निकासी की उचित व्यवस्था कर लेनी चाहिए. खेत में कहीं भी पानी जमा नहीं होना चाहिए. बेहतर जल निकासी व्यवस्था से फसल सुरक्षित रहती है और पौधों की वृद्धि भी अच्छी होती है. बारिश से पहले पूरी कर लें जरूरी तैयारीकृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान बारिश शुरू होने से पहले मिट्टी चढ़ाने, जैविक खाद डालने और जल निकासी की व्यवस्था जैसे जरूरी कार्य पूरा कर लेते हैं तो मानसून का मौसम उनके लिए लाभकारी साबित हो सकता है. इन उपायों से फसल मजबूत होगी, पौधे गिरने से बचेंगे और उत्पादन में भी वृद्धि होगी. इसलिए गन्ना किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे मौसम को ध्यान में रखते हुए अभी से खेतों की तैयारी पूरी कर लें, ताकि मानसून के दौरान फसल सुरक्षित रहे और उन्हें बेहतर पैदावार के साथ अधिक आमदनी प्राप्त हो सके. About the Author Amita kishor न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Deoghar,Jharkhand Source link

झारखंड

बीपीएससीएल प्लांट में संविदा कर्मी की संदिग्ध अवस्था में मौत:परिजनों ने नौकरी-मुआवजे...

बोकारो पावर सप्लाई कंपनी प्राइवेट लिमिटेड (बीपीएससीएल) के कोल हैंडलिंग प्लांट में बुधवार को एक संविदा कर्मी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मृतक की पहचान 30 वर्षीय शिव शंकर हेम्ब्रम के रूप में हुई है, जो प्लांट में सुपरवाइजर के पद पर कार्यरत थे। घटना के बाद शिव शंकर हेम्ब्रम को इलाज के लिए बोकारो जनरल अस्पताल (बीजीएच) लाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। कंपनी प्रबंधन के खिलाफ प्रदर्शन गुरुवार को बड़ी संख्या में परिजन, मजदूर और स्थानीय लोग बीजीएच पहुंचे और कंपनी प्रबंधन के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस दौरान अस्पताल परिसर में हंगामा हुआ, जिससे आवागमन भी प्रभावित हुआ। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सिटी डीएसपी राजीव रंजन पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने परिजनों और प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर माहौल शांत कराया। मृतक के परिजनों ने बीपीएससीएल में एक आश्रित को स्थायी नौकरी और उचित मुआवजा देने की मांग की है। प्रदर्शन कर रहे मजदूरों ने आरोप लगाया है कि शिव शंकर हेम्ब्रम की मौत शॉर्ट सर्किट के कारण हुई। उनका कहना है कि भीषण गर्मी के बीच प्लांट के एक पाइप के अंदर काम कराया जा रहा था, जहां यह हादसा हुआ। हालांकि, प्रशासन ने अभी तक इन आरोपों की पुष्टि नहीं की है। फैक्ट्री इंस्पेक्टर शिवानंद लुगुन ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा। फिलहाल पुलिस और श्रम विभाग की टीम पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है। बीपीएससीएल प्रबंधन की ओर से घटना पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। Source link

झारखंड

सेमेस्टर-3 के छूटे छात्र 20 तक भर सकेंगे परीक्षा फार्म

रांची विश्वविद्यालय ने पीजी सेमेस्टर-3 (सत्र 2024-26) के उन विद्यार्थियों को बड़ी राहत दी है, जो किसी कारणवश परीक्षा फॉर्म भरने से वंचित रह गए थे। विवि प्रशासन ने ऐसे छात्रों के लिए विशेष अवसर प्रदान करते हुए कॉलेजों एवं विभागों से आवेदन आमंत्रित किए हैं। केवल विभागाध्यक्ष या प्राचार्य द्वारा सत्यापित आवेदन ही स्वीकार किए जाएंगे। कॉलेजों और विभागों को 20 जून तक छात्रों से आवेदन प्राप्त करने का समय दिया है। Source link

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भारतीय ‘पैरा’ कमांडो VS पाकिस्तान कमांडो: ट्रेनिंग, हथियार, युद्ध में कौन आगे?

भारतीय सेना के “पैरा स्पेशल फोर्स” और पाकिस्तान के “SSG” दोनों दुनिया के बेहतरीन स्पेशल फोर्स यूनिट्स में गिने जाते हैं. ये दोनों कड़ी ट्रेनिंग वाले सैनिकों से बने हैं और खास मिशनों के लिए तैयार किए जाते हैं. लेकिन ट्रेनिंग की लंबाई, विविधता, हथियार, बड़े युद्धों में प्रदर्शन और सफल ऑपरेशन्स को देखते हुए भारतीय पैरा SF को SSG से बेहतर माना जाता है. इस लेख में हम दोनों को तुलनात्मक रूप से समझेंगे: दोनों यूनिट्स का परिचय और इतिहासपैरा SF (भारत): 1966 में 1965 के भारत-पाक युद्ध के बाद बनाई गई. ये पैराशूट रेजिमेंट का हिस्सा हैं. मोटो – “Men apart, Every man an Emperor” और “शत्रुजीत”. कुल 10-15 बैटालियन हैं. एक बैटालियन में लगभग 1000 कमांडो होते हैं. ये जंगल, ऊंचे पहाड़, शहरों में लड़ाई और दुश्मन के पीछे घुसकर हमला करने में माहिर हैं. 1971 के युद्ध से लेकर 2016 के सर्जिकल स्ट्राइक्स तक कई सफल अभियान किए. SSG (पाकिस्तान): 1956 में बनाया गया. इसे “Black Storks” या “Maroon Berets” भी कहते हैं. मुख्य रूप से सीमा पर, आतंकवाद विरोधी और खास मिशनों के लिए. ट्रेनिंग कड़ी है लेकिन “पैरा SF” के मुकाबले कुछ नहीं है. ट्रेनिंग की तुलनाट्रेनिंग दोनों की बहुत मुश्किल है, लेकिन पैरा SF की ज्यादा लंबी और बेहतर मानी जाती है: पैरा SF: चयन और ट्रेनिंग 3 से 3.5 साल तक चलती है. इसमें जंगल युद्ध, हाई एल्टीट्यूड (हिमालय) युद्ध, HALO/HAHO पैराशूट जंप, शहरी लड़ाई, काउंटर इंसर्जेंसी शामिल. US Navy SEALs, Israeli Sayeret Matkal, Russian Spetsnaz के साथ संयुक्त ट्रेनिंग. ड्रॉपआउट रेट बहुत ऊंचा है. SSG: मुख्य कोर्स 8-9 महीने का. 36 मील मार्च, लंबी दौड़ आदि. ड्रॉपआउट 80-90%. लेकिन पैरा SF जितनी लंबी और अलग-अलग इलाकों की तैयारी कम है. पैरा SF की ट्रेनिंग उन्हें लंबे समय तक दुश्मन क्षेत्र में रहकर काम करने और हर मौसम में लड़ने के लिए ज्यादा तैयार करती है. हथियार और उपकरणपैरा SF: आधुनिक हथियार जैसे Tavor X95, AK-103, SIG Sauer, Glock पिस्तौल, बेहतर संचार उपकरण और Make in India के तहत नए गैजेट्स. टेक्नोलॉजी और सैटेलाइट सपोर्ट बेहतर. SSG: HK MP5, G3, M4 जैसे हथियार. अच्छे हैं, लेकिन भारतीय सेना की तुलना में टेक्नोलॉजी और बैकअप कम. महत्वपूर्ण ऑपरेशन्स और प्रदर्शनपैरा SF के बड़े सफल अभियान– 1971 युद्ध – Operation Mandhol: 9 Para SF ने दुश्मन की तोपों की पूरी बैटरी नष्ट कर दी. Poonch क्षेत्र बचाया और पाकिस्तान की योजना बिगाड़ दी. सिर्फ 2 भारतीय सैनिक शहीद हुए.– Chachro Raid (1971): 10 Para SF ने 80 किलोमीटर अंदर घुसकर कई ठिकानों पर हमला किया, दुश्मन की सप्लाई लाइन बाधित की.– Kargil युद्ध (1999): ऊंचाई वाले इलाकों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई– 2015 Myanmar ऑपरेशन: आतंकियों के ठिकानों पर सफल हमला.– 2016 सर्जिकल स्ट्राइक्स: LoC पार करके आतंकी लॉन्च पैड्स नष्ट किए. SSG के ऑपरेशन्स: 1965 और 1971 में कुछ सफलताएं, लेकिन कई असफलताएं. 1965 में एयरबेस पर कमांडो ड्रॉप असफल रहा. कई कमांडो पकड़े गए या मारे गए. Kargil में भारतीय सेना ने बेहतर प्रदर्शन किया. आतंकवाद विरोधी काम में अनुभव है, लेकिन भारत के खिलाफ मिशन असफल रहे. युद्धों में कौन बेहतर? विश्लेषण1971 युद्ध: भारत ने पूर्ण जीत हासिल की. पैरा SF ने दुश्मन के पीछे हमले करके बड़ी भूमिका निभाई. SSG की कोशिशें कम प्रभावी रहीं. भारत ने पूर्वी पाकिस्तान को आजाद करवाया और बांग्लादेश बनाया। Kargil युद्ध (1999): पाकिस्तान ने घुसपैठ की, लेकिन भारतीय सेना, जिसमें पैरा SF भी शामिल थे, ने ऊंचाई वाले पहाड़ों पर दुश्मन को खदेड़ दिया। भारत ने सभी घुसपैठिए निकाल दिए. अन्य संघर्षों (सर्जिकल स्ट्राइक्स, काउंटर-इंसर्जेंसी) में भी पैरा SF की तैयारी, मोटिवेशन, समन्वय और टेक्नोलॉजी SSG से बेहतर साबित हुई. SSG में बहादुरी है, लेकिन कुल मिलाकर भारतीय पैरा SF ज्यादा सफल और प्रभावी रहे हैं. अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठाPara SF को अक्सर संयुक्त राष्ट्र मिशनों, बहुराष्ट्रीय अभ्यासों और वास्तविक अभियानों के कारण अधिक पहचान मिली है. भारतीय विशेष बलों ने अमेरिका, फ्रांस, रूस और अन्य देशों के साथ अभ्यास किए हैं. विविध भौगोलिक परिस्थितियों में काम किया है. लगातार सक्रिय ऑपरेशनल भूमिका निभाई है. SSG भी पेशेवर बल है, लेकिन उसकी अंतरराष्ट्रीय दृश्यता अपेक्षाकृत कम रही है. Para SF और SSG दोनों ही अपने-अपने देशों की पेशेवर स्पेशल फोर्स हैं और दोनों के कमांडो अत्यंत कठिन प्रशिक्षण से गुजरते हैं. हालांकि उपलब्ध युद्ध रिकॉर्ड, आतंकवाद विरोधी अभियानों का अनुभव, सीमा पार विशेष कार्रवाइयों, अंतरराष्ट्रीय सैन्य अभ्यासों और ऐतिहासिक प्रदर्शन को देखें तो भारतीय सेना की Para (Special Forces) को समग्र रूप से बढ़त मिलती दिखाई देती है. ट्रेनिंग, उपकरण, विविध अनुभव और युद्ध प्रदर्शन के आधार पर भारतीय पैरा स्पेशल फोर्स को पाकिस्तान के SSG से बेहतर माना जाता है. यह तुलना सार्वजनिक जानकारी और उपलब्ध रिकॉर्ड्स पर आधारित है. असली सैन्य क्षमता गोपनीय होती है. Source link

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