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Guru Purnima 2026 Today why we celebrate guru purnima history puja vidhi...

होमताजा खबरधर्म क्यों मनाई जाती है गुरु पूर्णिमा, कैसे करें गुरु पूजन? क्या है धार्मिक महत्व Last Updated:July 29, 2026, 04:03 IST Guru Purnima 2026 Today: गुरु पूर्णिमा का पर्व गुरु और शिष्य के पवित्र रिश्ते का प्रतीक है. इस दिन गुरुओं के प्रति सम्मान व्यक्त किया जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि गुरु पूर्णिमा क्यों मनाई जाती है और इसका धार्मिक महत्व क्या है? इस विशेष दिन पर गुरु पूजन कैसे किया जाता है? आइए जानते हैं गुरु पूर्णिमा से जुड़े इन सभी महत्वपूर्ण पहलुओं के बारे में, ताकि आप इस पावन पर्व को सही विधि और भावना के साथ मना सकें. Guru Purnima 2026 Today: आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाने वाली गुरु पूर्णिमा सनातन परंपरा का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है. आज यह पर्व देशभर में धूमधाम से मनाया जा रहा है. यह दिन गुरु के प्रति श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी तिथि पर महर्षि वेदव्यास का अवतरण हुआ था. उन्होंने चारों वेदों का विभाजन, महाभारत की रचना तथा 18 पुराणों का संकलन कर मानव समाज को ज्ञान का अमूल्य भंडार प्रदान किया. इसलिए उन्हें आदिगुरु माना जाता है और इस दिन व्यास पूजा भी की जाती है. आइए जानते हैं गुरु पूर्णिमा का महत्व और क्यों मनाया जाता है यह पर्व…. गुरु पूर्णिमा का धार्मिक महत्वगुरु गोविंद दोऊ खड़े काके लागू पाय बलिहारी गुरु आपकी गोविंद दियो बताए… भारतीय संस्कृति में गुरु को ईश्वर से भी उच्च स्थान दिया है. गुरु ही वह दिव्य शक्ति हैं जो अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश प्रदान करते हैं. उपनिषदों और गुरु परंपरा में गुरु को ब्रह्मा, विष्णु और महेश के समान पूजनीय बताया गया है. प्रसिद्ध गुरु मंत्र गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः गुरु के सर्वोच्च स्थान को दर्शाता है. माना जाता है कि गुरु के मार्गदर्शन के बिना आध्यात्मिक ज्ञान और मोक्ष की प्राप्ति कठिन है. आध्यात्मिक दृष्टि से गुरु पूर्णिमा आत्ममंथन, आत्मशुद्धि और ज्ञान प्राप्ति का पर्व है. यह दिन केवल शिक्षकों का सम्मान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन सभी व्यक्तियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर भी है जिन्होंने जीवन में सही दिशा दिखाई. क्यों मनाई जाती है गुरु पूर्णिमा?पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, आषाढ़ पूर्णिमा के दिन ही महाभारत, श्रीमद् भागवत कथा, 18 पुराणों के रचयिता महाज्ञानी महर्षि कृष्णद्वैपायन व्यास का जन्म हुआ था, जिनको वेदव्यासजी के नाम से भी जाना जाता है. महर्षि वेदव्यासजी को आदिगुरु भी माना जाता है क्योंकि उन्होंने मनुष्य को कई वदों और पुराणों से परिचित कराया था. इसलिए आषाढ़ पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा और व्यास पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है. भगवान शिव भी बने आदिगुरुगुरु पूर्णिमा का संबंध देवों के देव महादेव से भी जुड़ा हुआ है. भगवान शिव को सबसे पहले गुरु यानी आदिगुरु माना जाता है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी पावन तिथि पर भगवन शिव ने तपस्या में लीन सप्त ऋृषियों को योग, तंत्र समेत संपूर्ण ब्रह्मांड के ज्ञान का उपदेश दिया था. इस प्रकार शिवजी ने गुरु बनकर शिष्यों को ज्ञान दिया और अज्ञानता से मुक्त करवाकर, उनको समाज कल्याण के लिए प्रेरित करवाया. गुरु पूजन की विधिगुरु पूर्णिमा के दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें. पूजा स्थान पर अपने गुरु या महर्षि वेदव्यास के चित्र अथवा चरण पादुका स्थापित करें. इसके बाद दीपक जलाकर चंदन, अक्षत, पुष्प, फल और नैवेद्य अर्पित करें. गुरु मंत्र या गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः… का जाप करें और अगर गुरु साक्षात उपस्थित हों तो उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त करें. अपनी श्रद्धा के अनुसार वस्त्र, पुस्तक, अन्न या दक्षिणा का दान भी किया जा सकता है. गुरु पूर्णिमा पर गुरु सेवागुरु पूर्णिमा पर गुरु सेवा, सत्संग, जप, ध्यान और दान-पुण्य करने से ज्ञान, विवेक और आध्यात्मिक उन्नति का आशीर्वाद प्राप्त होता है. यही कारण है कि यह पर्व भारतीय संस्कृति में गुरु-शिष्य परंपरा का सबसे महत्वपूर्ण और प्रेरणादायी उत्सव माना जाता है. योग, वेदांत और विभिन्न आध्यात्मिक परंपराओं में गुरु पूर्णिमा को साधना प्रारंभ करने और गुरु का आशीर्वाद लेने के लिए अत्यंत शुभ माना गया है. About the Author Parag SharmaChief Sub Editor पराग शर्मा Hindi News18 Digital में Chief Sub Editor के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, ग्रह-नक्षत्र, राशि और वास्तु से जुड़ी खबरों पर काम कर रहे हैं. भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेद… और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

झारखंड

अवैध खनन पर जीरो टॉलरेंस, छापेमारी तेज करने का निर्देश

भास्कर न्यूज | गिरिडीह जिले में अवैध खनन, खनिजों के अवैध परिवहन एवं भंडारण पर प्रभावी नियंत्रण को लेकर सोमवार को उपायुक्त रामनिवास यादव की अध्यक्षता में समाहरणालय सभागार में जिला खनन टास्क फोर्स की समीक्षा बैठक हुई। बैठक में पुलिस अधीक्षक डॉ. बिमल कुमार, पूर्वी वन प्रमंडल पदाधिकारी मनीष तिवारी, पश्चिमी वन प्रमंडल पदाधिकारी अंकित कुमार, अपर समाहर्ता वैभव कुमार सिंह, प्रशिक्षु आईएएस यश कुमार, सभी एसडीओ, एसडीपीओ, सीओ और जिला खनन पदाधिकारी मौजूद थे। उपायुक्त ने कहा कि अवैध खनन, परिवहन और भंडारण के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी। उन्होंने खनन, पुलिस और वन विभाग को समन्वय बनाकर नियमित संयुक्त छापेमारी करने, चेकपोस्ट पर वाहनों की सघन जांच और रात्रि गश्ती मजबूत करने के निर्देश दिए। बिना वैध चालान या ओवरलोडिंग वाले वाहनों को तत्काल जब्त कर कानूनी कार्रवाई करने को कहा गया। उपायुक्त ने सभी एसडीओ, एसडीपीओ व सीओ को अपने क्षेत्रों में नियमित निरीक्षण करने और कार्रवाई की रिपोर्ट जिला स्तर पर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। Source link

झारखंड

रौनियार वैश्य महासभा की बैठक, चुनाव का निर्णय

गिरिडीह| गिरिडीह रौनियार वैश्य महासभा की जिला स्तरीय बैठक रविवार को मधुबन में हुई। अध्यक्षता जिलाध्यक्ष दीपक साह व संचालन सरिया के मोहन गुप्ता ने किया। बैठक में सरिया, हेसला, अटका और मधुबन प्रखंड के प्रतिनिधि शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत महाराजा हेमचंद विक्रमादित्य की तस्वीर पर माल्यार्पण से हुई। इसके बाद संगठन विस्तार पर चर्चा की गई। बैठक में निर्णय लिया गया कि वर्तमान जिला कमेटी कार्यकाल पूरा करेगी और अगले वर्ष चुनाव कराकर नई कमेटी बनेगी।बैठक में मधुबन प्रखंड कमेटी का गठन किया गया। साथ ही सरिया के संतोष गुप्ता को छह माह के लिए जिला कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया। मौके पर कोषाध्यक्ष संतोष कुमार गुप्ता, कैलाश नाथ गुप्ता, महेंद्र गुप्ता, विशाल गुप्ता, अभय गुप्ता, राकेश गुप्ता, विनायक गुप्ता, चंदन गुप्ता, राजेश गुप्ता, दिनेश गुप्ता, सुनील गुप्ता और बिरजू गुप्ता समेत कई लोग मौजूद थे। Source link

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Delhi Police Notice Social Media। Delhi Police IFSO CJP Protest Action। 4...

होमताजा खबरदेश 4 सोशल प्लेटफार्म को पहुंचा नोटिस; PM पर अभद्र टिप्पणी करने वालों की खैर नहीं Last Updated:July 28, 2026, 22:07 IST CJP Protest: दिल्ली हिंसा के दौरान भ्रामक जानकारियां, फर्जी वीडियो और देश का माहौल खराब करने वाली पोस्ट्स पर दिल्ली पुलिस सख्त हो गई है. पुलिस की IFSO यूनिट ने BNS के तहत दुनिया के चार बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स X, फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब को नोटिस भेजा है. इसमें पीएम और सुरक्षा बलों के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने वाले हैंडल्स की जानकारी मांगी गई है और भ्रामक कंटेंट को तुरंत हटाने के निर्देश दिए गए हैं. पुलिस मामले की जांच कर रही है. जंतर मंतर पर सीजेपी प्रोटेस्‍ट के दौरान हिंसा के मामले में सोशल मीडिया पर अफवाहें फैलाने और देश का माहौल खराब करने वालों के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने अपना शिकंजा कसना शुरू कर दिया है. भ्रामक खबरें, फर्जी वीडियो और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत सुरक्षा बलों पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने वाले सोशल मीडिया हैंडल्स पर दिल्ली पुलिस की विशेष IFSO (Intelligence Fusion and Strategic Operations) यूनिट ने कड़ा रुख अपनाया है. पुलिस ने दुनिया के चार सबसे बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स—X (ट्विटर), फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत नोटिस थमाया है. भ्रामक जानकारी और नफरती पोस्ट हटाने का निर्देशदिल्ली पुलिस की ओर से जारी इस नोटिस में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि सीजेपी प्रोटेस्‍ट से जुड़ी तमाम ऐसी पोस्ट, वीडियो और फर्जी नैरेटिव को तुरंत प्रभाव से हटाया जाए जो देश का सौहार्द बिगाड़ने की नीयत से शेयर किए गए थे. जांच में सामने आया है कि हिंसा के दौरान हजारों की तादाद में फर्जी वीडियो और गलत जानकारियां शेयर की गईं, जिससे लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हुई. PM और सेना पर अभद्र टिप्पणी करने वालों पर कसेगा शिकंजानोटिस में दिल्ली पुलिस ने उन सोशल मीडिया हैंडल्स की पूरी जानकारी और डेटा भी मांगा है जिनका इस्तेमाल देश के शीर्ष नेतृत्व और सुरक्षा एजेंसियों के खिलाफ अभद्र शब्दावली का प्रयोग करने के लिए किया गया. इनमें कई तथाकथित डिजिटल न्यूज पोर्टल्स और नामी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के हैंडल्स भी शामिल हैं, जिन पर प्रधानमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक कंटेंट पोस्ट किया गया था. पुलिस अब इन हैंडल्स को चलाने वाले चेहरों को बेनकाब करने की तैयारी में है. IFSO यूनिट की पैनी नजरसाइबर अपराधों से निपटने वाली दिल्ली पुलिस की स्पेशल IFSO यूनिट अब उन तमाम संदिग्ध अकाउंट्स को शॉर्टलिस्ट कर रही है जिनसे नफरत फैलाने वाली सामग्री को प्रमोट किया गया. पुलिस का मानना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का दुरुपयोग कर एक सोची-समझी साजिश के तहत फर्जी नैरेटिव गढ़ने की कोशिश की गई थी. प्लेटफॉर्म्स से जवाब और यूजर डेटा मिलते ही अभद्र भाषा और भ्रामक जानकारी फैलाने वाले आरोपियों को नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए तलब किया जाएगा. About the Author Sandeep GuptaChief Sub Editor पत्रकारिता में 16 वर्षों से अधिक का सुदीर्घ अनुभव रखने वाले संदीप गुप्ता वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर होम पेज पर जिम्‍मेदारी संभाल रहे हैं. जटिल और सामरिक विषयों को बेहद सरल भाषा में पाठकों त… और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi Source link

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लोगों को कुरकुरा रेलवे स्टेशन, प्लस टू उच्च विद्यालय कुरकुरा, थाना मुख्यालय...

भास्कर न्यूज|कामडारा रामपुर पंचायत के अंतर्गत जामडीह गांव के ग्रामीणों ने अपनी इच्छाशक्ति और श्रमदान की बदौलत इलाके में विकास की एक अनूठी मिसाल पेश की है। ग्रामीणों ने आपसी सहयोग से जामडीह से कुरकुरा जाने वाली पगडंडी को एक कच्ची सड़क के रूप में तब्दील कर दिया है, साथ ही रास्ते में पड़ने वाले नाले पर एक कामचलाऊ बांस का पुल भी तैयार कर लिया है। इस पहल से ग्रामीणों की वर्षों पुरानी आवागमन की समस्या का काफी हद तक समाधान हो गया है। ​​मिली जानकारी के अनुसार जामडीह गांव से कुरकुरा की वास्तविक दूरी महज तीन किलोमीटर है। हालांकि पक्की सड़क न होने के कारण ग्रामीणों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ता था। अब इस कच्ची सड़क और बांस की पुलिया के तैयार हो जाने से जामडीह के लोगों को कुरकुरा रेलवे स्टेशन, प्लस टू उच्च विद्यालय कुरकुरा, थाना मुख्यालय और साप्ताहिक बाजार आने-जाने में बड़ी राहत मिली है। इससे ग्रामीणों की लगभग 5 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी और मूल्यवान समय की भारी बचत होगी। रास्ते में आने वाले नाले के ऊपर बांस का एक कामचलाऊ पुल। ​जामडीह और कुरकुरा के बीच कृषि भूमि होने के कारण लंबे समय से सड़क निर्माण का कार्य अटका हुआ था। इसके अलावा खेत मालिकों की सहमति नहीं मिलने के कारण भी आधिकारिक या बड़ी सड़क बनाना संभव नहीं हो पा रहा था। मजबूरी में ग्रामीण खेतों के बीच बनी संकरी पगडंडी पर किसी तरह पैदल चलकर रोजाना कुरकुरा आने-जाने को विवश थे। वहीं दोपहिया वाहन चालकों को मजबूरन कदमडीह-ईचागुटू होते हुए लंबा चक्कर काटकर कुरकुरा पहुंचना पड़ता था, जिसमें उन्हें 5 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती थी। ​ग्रामीणों की इस निरंतर परेशानी को दूर करने के लिए जामडीह निवासी संतु और नवीन ने पहल की। उनके नेतृत्व में ग्रामीणों ने एकजुट होकर खेत मालिकों से सकारात्मक बातचीत की। आखिरकार खेत मालिकों की आपसी सहमति मिलते ही ग्रामीणों में उत्साह की लहर दौड़ गई। इसके बाद सभी ने मिलकर श्रमदान किया और खेतों के बीचों-बीच करीब 500 मीटर लंबे कच्चे पथ का निर्माण कर डाला। Source link

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Scientific cultivation of sweet potato in the district is a better source...

गुमला21 घंटे पहले कॉपी लिंक गुमला|​जिले की वर्षा आधारित कृषि प्रणाली में शकरकंद किसानों के लिए एक वरदान साबित हो रही है। कम लागत, सूखा सहने की अद्भुत क्षमता और उच्च पोषण मूल्य के कारण यह फसल किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ पोषण सुरक्षा में भी अहम भूमिका निभा रही है। जिला कृषि व . Source link

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फलों की खेती से कमाई का सुनहरा मौका, 5 वैरायटी के उद्यान...

होमताजा खबरकृषि फलों की खेती से कमाई का सुनहरा मौका, 5 वैरायटी के उद्यान पर मिलेगा सब्सिडी Last Updated:July 28, 2026, 23:13 IST किसान भाइयों के लिए मानसून के सीजन में फल उद्यान लगाने का अच्छा मौका रहता है और जो किसान भाई इसके इच्छुक हैं उनकी सरकार मदद कर रही है.इसमें आम अमरूद लीची अनार नींबू के सामान्य दूरी पर पौधे लगाने पर प्रति हेक्टेयर 125000 की लागत आती है. जिसमें 40% अनुदान दे रहे हैं  खेती से किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और समृद्धशाली बनाने के लिए अलग अलग प्रयोग देखने को मिल रहे हैं, कृषि वैज्ञानिको और शासन के सामंजस्य से किसानों के लिए इस तरह के प्रयोग करने के लिए बढ़ावा भी दिया जा रहा है. ऐसे ही किसान भाई अगर अब फल उद्यान लगाते हैं तो इससे भी मोटी कमाई कर सकते हैं आजकल निश्चित दूरी पर खेत में फलों के पौधे लगते हैं. बीच में पारंपरिक फसलों को भी बुवाई कर ले सकते हैं जिसमें एक साथ दो फैसले होती हैं जबकि फलों के पौधों में ज्यादा लागत नहीं आती और उत्पादन हर साल मिलता रहता है. इसकी तरफ किसान भाई आकर्षित भी हो रहे हैं तो जो किसान फल उद्यान लगाना चाह रहे हैं. उनके लिए सरकार के द्वारा 40% अनुदान दिया जा रहा है.हॉर्टिकल्चर डिपार्टमेंट के डिप्टी डायरेक्टर डॉक्टर पी एस बडोले बताते हैं कि किसान भाइयों के लिए मानसून के सीजन में फल उद्यान लगाने का अच्छा मौका रहता है और जो किसान भाई इसके इच्छुक हैं उनकी सरकार मदद कर रही है.इसमें आम अमरूद लीची अनार नींबू के सामान्य दूरी पर पौधे लगाने पर प्रति हेक्टेयर 125000 की लागत आती है. जिसमें 40% अनुदान के रूप में 50000 रुपया प्रति हेक्टेयर की सब्सिडी दी जाएगी. 5 वैरायटी के उद्यान पर मिलेगा सरकारी अनुदानवहीं उच्च घनत्व से फल उद्यान लगाने पर आम अमरूद लीची अनार नींबू में लगभग दो लाख रुपए की लागत आती है. ऐसे में 40% अनुदान के रूप में 80000 प्रति हेक्टेयर की सब्सिडी दी जा रही है. हल्की पथरीली जमीन पर चीकू सीताफल आंवला जैसी फसल लगा सकते हैं अगर गहरी काली मिट्टी है तो काम कटहल अमरुद जामुन जैसी पेड़ लगा सकते हैं. अन्य तरह की पेड़ों पर अनुदान मिल रहा है.हॉर्टिकल्चर डिपार्टमेंट में सबसे पहले किस को MPFSTS पोर्टल पर अपना पंजीयन करवाना होगा पंजीयन के लिए एक पासपोर्ट साइज की फोटो बैंक पासबुक की छाया प्रति खसरा की नकल आधार कार्ड की फोटो कॉपी एससी एसटी वालों के लिए जाति प्रमाण पत्र और मोबाइल नंबर की आवश्यकता होगी पंजीयन होने के बाद किसान भाई हॉर्टिकल्चर डिपार्टमेंट से जुड़ी किसी भी योजना का लाभ लेना चाहते हैं तो उसे योजना का चयन करने से आवेदन हो जाएगा, फिर उद्यान की विभाग की ब्लाक अधिकारियों के द्वारा डॉक्यूमेंट का वेरिफिकेशन करने के बाद योजना का लाभ दिया जाएगा. सब्सिडी की राशि खाते में ट्रांसफर की जाएगी. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Sagar,Madhya Pradesh Source link

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सीएसआर योजनाओं की समीक्षा: सदर अस्पताल बर्न यूनिट एक सप्ताह में शुरू...

भास्कर न्यूज|गुमला गुमला समाहरणालय सभागार में उपायुक्त दिलेश्वर महत्तो की अध्यक्षता में जिला स्तरीय कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) समिति की समीक्षा बैठक हुई। बैठक में हिंडालको के सीएसआर मद से जिले में चल रही और प्रस्तावित योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। लंबित कार्यों को तेजी से शुरू कराने के निर्देश दिए गए। उपायुक्त ने कहा कि सीएसआर निधि का उपयोग जिले की जरूरतों के अनुसार शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, कौशल विकास, कृषि और आधारभूत संरचना पर प्राथमिकता के आधार पर किया जाए। विभागों से आए प्रस्तावों की समीक्षा के बाद संबंधित अधिकारियों और कंपनी प्रतिनिधियों को समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया। सदर अस्पताल, गुमला में प्रस्तावित बर्न यूनिट के निर्माण पर उपायुक्त ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि स्वीकृति के बावजूद काम शुरू नहीं हुआ है। उन्होंने निर्देश दिया कि बर्न यूनिट का निर्माण एक सप्ताह के भीतर शुरू किया जाए। सदर अस्पताल के सौंदर्यीकरण से जुड़ा लंबित काम भी जल्द शुरू करने को कहा गया। टीबी मरीजों के लिए पोषण किट वितरण की समीक्षा में बताया गया कि पहले से चिन्हित करीब 200 मरीजों को किट दी जा रही है। नए मरीजों के बीच वितरण शुरू नहीं हो सका है। उपायुक्त ने सभी पात्र टीबी मरीजों को नियमित रूप से पोषण किट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। फिशरी कॉलेज में प्रस्तावित ओपन जिम, विशुनपुर और घाघरा प्रखंड में पांच विज्ञान प्रयोगशालाओं के निर्माण, और 15 स्थानों पर सोलर आधारित लिफ्ट सिंचाई योजना की प्रगति पर भी चर्चा हुई। हिंडालको प्रतिनिधियों ने बताया कि लिफ्ट सिंचाई के सभी स्थलों का सर्वे पूरा हो चुका है और बारिश के बाद निर्माण शुरू होगा। उपायुक्त ने सर्वे सूची उपलब्ध कराने और काम तेज करने को कहा। उप विकास आयुक्त अनिमेष रंजन ने जिले के 26 आवासीय विद्यालयों में पुस्तकालय और बुनियादी सुविधाओं के विकास का मुद्दा रखा। उपायुक्त ने सूचीबद्ध विद्यालयों में प्राथमिकता के आधार पर पुस्तकालय निर्माण और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। पीएम पोषण योजना के लिए सहयोग, आंगनबाड़ी केंद्रों में बर्तनों की उपलब्धता, और प्राथमिक व मध्य विद्यालयों में बेंच-डेस्क की कमी दूर करने के लिए प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया। बैठक में सिविल सर्जन डॉ. शंभूनाथ चौधरी और जिला योजना पदाधिकारी रमण कुमार भी मौजूद रहे। Source link

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थार ने बाइक को मारी टक्कर, दो मजदूर घायल

गुमला|शहर के एलोड्रम के समीप शनिवार को एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ। यहां तेज रफ्तार थार वाहन ने एक बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। इस भीषण दुर्घटना में बाइक पर सवार दो युवक गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। ​घायलों की पहचान गड़सारु गांव निवासी उपेंद्र सिंह 35 वर्ष और पालकोट थाना क्षेत्र के नावाडीह निवासी प्रकाश गोप 25 वर्ष के रूप में हुई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, दोनों युवक डूमरडीह में मजदूरी का काम खत्म कर अपनी बाइक से वापस अपने घर लौट रहे थे। इसी दौरान एलोड्रम के पास तेज रफ्तार थार ने उनकी बाइक को अपनी चपेट में ले लिया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दोनों युवक सड़क पर दूर जा गिरे और उन्हें गंभीर चोट आईं। Source link

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सिर्फ एक चूक और बकरियां पड़ सकती हैं बीमार! एक्सपर्ट से जानें...

होमताजा खबरकृषि एक चूक और बकरियां पड़ सकती हैं बीमार! एक्सपर्ट से जानें 5 रुपये वाला इलाज Last Updated:July 28, 2026, 23:37 IST बरसात में बकरियों को भीगने देना भारी पड़ सकता है. बालोद पशु चिकित्सा विभाग के उपसंचालक डॉ. डी. के. सिहारे ने बताया कि इस मौसम में एंटरोटॉक्सिमिया का खतरा बढ़ जाता है. बचाव के लिए विभाग केवल ₹5 पंजीयन शुल्क पर निशुल्क टीकाकरण कर रहा है. समय पर कृमिनाशक दवा और शुरुआती लक्षण दिखते ही इलाज कराना जरूरी है. बरसात का मौसम बकरी पालन के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण समय माना जाता है. इस दौरान थोड़ी सी लापरवाही भी बकरियों की सेहत पर भारी पड़ सकती है और पशुपालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है. पशु चिकित्सा सेवाएं विभाग ने बकरी पालकों को सावधानी बरतने की सलाह देते हुए बताया है कि बारिश के मौसम में कुछ सामान्य गलतियों से बचकर बकरियों को गंभीर बीमारियों से सुरक्षित रखा जा सकता है. बालोद पशु चिकित्सा सेवाएं विभाग के उपसंचालक डॉ. डी. के. सिहारे ने बताया कि बरसात के दिनों में बकरियों में एंटरोटॉक्सिमिया होने का खतरा काफी बढ़ जाता है. इस बीमारी के कारण बकरियों में पानी जैसे पतले दस्त, नाक बहना, सर्दी और खांसी जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं. यदि समय पर इलाज और बचाव नहीं किया गया तो यह बीमारी पशुपालकों के लिए बड़ा नुकसान साबित हो सकती है. बरसात में बकरियां पड़ सकती हैं बीमारविभाग की ओर से इस बीमारी की रोकथाम के लिए निशुल्क टीकाकरण किया जा रहा है. इसके लिए पशुपालकों को केवल 5 रुपये का पंजीयन शुल्क देना होता है. बालोद जिले में जहां-जहां बकरी पालन किया जा रहा है, वहां विभाग की टीम पहुंचकर टीकाकरण अभियान चला रही है. ऐसे में सभी बकरी पालकों को अपने पशुओं का समय पर टीकाकरण अवश्य कराना चाहिए. डॉ. सिहारे के अनुसार, बरसात में सबसे बड़ी गलती बकरियों को बारिश में भीगने देना है. लगातार भीगने से बकरियों को सर्दी और खांसी होने की संभावना बढ़ जाती है. इसलिए कोशिश करें कि तेज बारिश के दौरान बकरियों को चराने के लिए बाहर न ले जाएं और उन्हें सूखे एवं सुरक्षित स्थान पर रखें. 5 रुपये में ट्रीटमेंटबारिश के मौसम में नई घास के साथ कृमि (कीड़े) के अंडे भी बकरियों के शरीर में पहुंच जाते हैं. इससे बकरियां कमजोर होने लगती हैं और उनका विकास प्रभावित होता है. इस समस्या से बचने के लिए समय-समय पर कृमिनाशक दवा देना बेहद जरूरी है.उपसंचालक डॉ. सिहारे ने कहा कि यदि किसी बकरी में पानी जैसे पतले दस्त, नाक बहना और लगातार खांसी के लक्षण दिखाई दें तो इसे सामान्य बीमारी समझकर नजरअंदाज न करें. यह एंटरोटॉक्सिमिया का संकेत हो सकता है. ऐसी स्थिति में तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सक से संपर्क करें. यदि बीमारी की पुष्टि हो जाती है तो सामान्य एंटीबायोटिक और सर्दी-खांसी की दवाओं से इसका उपचार संभव है, लेकिन इलाज में देरी नुकसान बढ़ा सकती है. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Raipur,Raipur,Chhattisgarh Source link

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