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झारखंड

दो छात्रों को बेंगलुरु बेस्ड लिंक्डइन कंपनी ने दिया ऑफर:बीआईटी मेसरा के...

रांची के मेसरा स्थित बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (बीआईटी) के साल 2022-26 बैच के दो छात्रों कुशाग्र सहाय और अंकित कुमार ने कैंपस प्लेसमेंट में एक करोड़ रुपए से अधिक का पैकेज हासिल किया है। दोनों ही छात्र कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग विभाग के हैं। कुशाग्र सहाय को 1.40 करोड़ (एनुअल सीटीसी) और अंकित कुमार को 1.09 करोड़ रुपए (एनुअल सीटीसी) का शानदार पैकेज ऑफर हुआ है। प्लेसमेंट सेल की डॉ. श्रद्धा शिवानी ने बताया कि दोनों ही छात्रों का प्लेसमेंट बेंगलुरु बेस्ड लिंक्डइन कंपनी में हुआ है। कुशाग्र ने 10वीं तक की पढ़ाई संत थॉमस, धुर्वा और 12वीं डीपीएस, रांची से पूरी की है। मां सुनिता नारायण टीचर और और पिता मनीष सीसीएल दरभंगा हाउस में नौकरी करते हैं। अंकित कुमार डालटनगंज के रहनेवाले हैं। अंकित ने अपनी 10वीं की पढ़ाई ब्राइटलैंड स्कूल, डालटनगंज से और 12वीं डीएवी हेहल से पूरी की। अंकित के पिता अश्विनी कुमार एसपी ऑफिस में कार्यरत हैं। मां भावना देवी हाउस वाइफ हैं। 240 कंपनियां पहुंचीं प्लेसमेंट ड्राइव में बीआईटी मेसरा के प्लेसमेंट सेल ने बताया कि इस वर्ष बीआईटी मेसरा में करीब 240 कंपनियां कैंपस प्लेसमेंट के लिए पहुंचीं। अब तक लगभग 75 प्रतिशत छात्रों का चयन हो चुका है। सेल ने बताया कि शेष छात्र उच्च शिक्षा के लिए विदेश या अन्य संस्थानों का रुख करते हैं या फिर अपना स्टार्टअप एवं व्यवसाय शुरू करने का विकल्प चुनते हैं, यह आगे देखने की बात होगी। पिछले साल 1.45 करोड़ था हाईएस्ट पैकेज पिछले साल बीआईटी मेसरा के 2021-25 बैच के कंप्यूटर इंजीनियर निडूमोलू लक्ष्मी नारायण राव को रुब्रिक कंपनी द्वारा 1.45 करोड़ रुपए का पैकेज मिला था। इतना बड़ा पैकेज संस्थान के किसी भी छात्र को अब तक नहीं मिला है। आईआईटी आईएसएम धनबाद के दो छात्रों को 1.59 करोड़ का पैकेज आईआईटी-आईएसएम धनबाद ने एक बार फिर प्लेसमेंट में शानदार प्रदर्शन किया है। इस सत्र में संस्थान के दो छात्रों को 1.59 करोड़ रुपए का सबसे बड़ा सालाना पैकेज मिला है। यह इस वर्ष का हाईएस्ट ऑफर है। इसके साथ ही संस्थान ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान कायम रखी है। राज्य के प्रमुख इंजीनियरिंग संस्थानों में प्लेसमेंट का दौर अब अंतिम चरण में है। अधिकांश कॉलेजों में 75 से 90 प्रतिशत छात्रों को नौकरी मिल चुकी है। कुछ संस्थानों में अभी भी कैंपस प्लेसमेंट प्रक्रिया जारी है। Source link

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15 साल से नहीं बदली धान की यह किस्म, किसान को हर...

रामपुर: धान की खेती में सही किस्म का चुनाव ही किसान की कमाई तय करता है. इसलिए कई किसान ऐसी वैरायटी को सालों तक नहीं छोड़ते, जो अच्छी पैदावार के साथ बेहतर दाम भी दिलाए. रामपुर के किसान दरबारी भी पिछले करीब 15 वर्षों से इसी धान की खेती कर रहे हैं. इस बार भी उन्होंने करीब 60 बीघा खेत में 2626 धान की रोपाई शुरू कर दी है. किसान का कहना है कि यह किस्म उत्पादन, स्वाद और बाजार तीनों मामलों में उनके लिए फायदे का सौदा साबित हुई है. दरबारी बताते हैं कि 60 बीघा में रोपाई के लिए पहले नर्सरी (पौध) तैयार की जाती है. सामान्य तौर पर एक बीघा धान की रोपाई के लिए करीब 1 से 1.5 किलो बीज पर्याप्त होता है. यानी 60 बीघा के लिए लगभग 60 से 90 किलो बीज की जरूरत पड़ती है. बीज बोने के बाद करीब 25 से 30 दिन में पौध रोपाई के लिए तैयार हो जाती है. इसके बाद खेत में पानी भरकर रोपाई की जाती है. 2626 धान की किस्म किसान के मुताबिक, वे 2626 धान की किस्म उगा रहे हैं. उनका कहना है कि इस किस्म की सबसे बड़ी खासियत इसकी अच्छी पैदावार है. सही देखभाल और अनुकूल मौसम मिलने पर प्रति बीघा करीब 5 क्विंटल तक उत्पादन मिल जाता है. दरबारी बताते हैं कि इस धान का चावल खाने में स्वादिष्ट होता है. अच्छी गुणवत्ता होने की वजह से बाजार में इसकी मांग भी बनी रहती है. उन्हें इस चावल का करीब 35 रुपये प्रति किलो तक भाव मिल जाता है, जिससे अच्छा मुनाफा होता है. 125 से 135 दिन में हो जाती है तैयार रोपाई के बाद यह फसल सामान्य तौर पर करीब 125 से 135 दिनों में पककर कटाई के लिए तैयार हो जाती है. यानी जुलाई में रोपाई होने पर इसकी कटाई आमतौर पर अक्टूबर के आखिर से नवंबर के बीच शुरू हो जाती है. समय पर सिंचाई, खाद और खरपतवार नियंत्रण करने पर पैदावार और गुणवत्ता दोनों बेहतर रहती हैं. किसान के अनुसार, इस तरह की मध्यम अवधि वाली धान की किस्मों की रोपाई जून के आखिरी सप्ताह से जुलाई के मध्य तक करना सबसे उपयुक्त माना जाता है. इससे पौध को मौसम का अच्छा साथ मिलता है और फसल का विकास भी बेहतर होता है. सही समय पर धान की करें रोपाई किसान ने बताया कि उन्होंने कई किस्मों की खेती की, लेकिन जिस तरह की पैदावार, चावल की गुणवत्ता और बाजार में कीमत इस किस्म से मिलती है, उसे देखते हुए वे हर साल इसी की खेती करना पसंद करते हैं. उनके मुताबिक, अगर किसान समय पर रोपाई करें और खेत का सही प्रबंधन रखें, तो यह किस्म अच्छी आमदनी दिला सकती है. Source link

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मानसून में बेसन और चावल का माड़ करें पशुओं की डाइट में...

होमताजा खबरकृषि बेसन और चावल का माड़ करें पशुओं की डाइट में शामिल, बाल्टी भर-भर देंगे दूध Last Updated:July 07, 2026, 08:17 IST Cattle Diet In Monsoon: मानसून में पशुओं को स्वस्थ रखने और उनका दूध बढ़ाने के लिए खास डाइट की जरूरत होती है. अगर उन्हें फिक्स टाइम पर आहार देंगे और भोजन में ये कुछ विशेष चीजें शामिल करेंगे तो पशु बीमार नहीं होंगे और भर-भरकर दूध देंगे. ख़बरें फटाफट रांची. बहुत पशुपालकों की शिकायत होती है कि बरसात के सीजन में पशुओं को बीमारी हो जाती है, फीवर हो जाता है और साथ ही दूध देना भी कम हो जाता है. ऐसे में गाय पालन करने वाले भानु प्रताप बताते हैं कि हम लोग खासतौर पर बेसन और कई तरह की खली देने का काम करते हैं. सुबह सबसे पहली खुराक में चावल का माड़ देते हैं. इससे गाय की प्रजाति के हिसाब से हर दिन बढ़िया मात्रा में दूध निकलता है, जिसे हम लोग बेचने का काम करते हैं. भानु प्रताप बताते हैं कि कम से कम एक मुट्ठी बेसन आपको तीनों टाइम देना है. आप जो भी खली दें, जैसे हम लोग सुबह सरसों की खली देते हैं. साथ में सुधा दाना या सुदाना आता है, जो आपको बाजार में आसानी से मिल जाएगा और बहुत ही पौष्टिक होता है, ये मिला दें. ऐसे में इसके साथ आप एक मुट्ठी बेसन मिला दीजिए. साथ में सरसों की खली सबसे अच्छी होती है. तीन समय की डाइट कुछ इस तरह रखेंवे कहते हैं, सुबह में सबसे पहले हम लोग चावल का माड़ एक बाल्टी दे देते हैं. दरअसल माड़ में कई सारे पोषक तत्व होते हैं, जो प्राकृतिक रूप से गायों को मिलते हैं. इससे उन्हें फीवर या फिर किसी प्रकार की बीमारी जैसी समस्या देखने को नहीं मिलती और दूध भी काफी अच्छा होता है. इसके बाद सरसों की खली में थोड़ा बेसन मिलाकर देते हैं. इसके बाद हमारे जो खेत हैं, उससे जितना भी वेस्ट का अवशेष निकलता है, उसको फिर से एक मुट्ठी बेसन में मिलाकर और नीम की खली के साथ मिलाकर दोपहर में दे देते हैं. पानी भी पर्याप्त मात्रा में देते हैं. शाम को इन्हें बाहर चरने के लिए छोड़ देते हैं, ताकि ताजी हरी घास भी इन्हें मिलती रहे. इसके बाद रात में भी खाना दिया जाता है. दलिया है बेस्टआप अपने मन अनुसार कोई भी खली चुन सकते हैं और उसके साथ एक मुट्ठी बेसन और दलिया, जो खासतौर पर पशुओं के लिए बाजार में आता है, वह खरीदकर ला सकते हैं. उसको मिला लीजिए और रात की डाइट में दीजिए. फिर देखिए कैसे आपकी गाय हर दिन 6 से 7 किलो दूध नहीं देती है. एक बात और ध्यान रखना है, खाने का समय उनका एकदम फिक्स करिए. मतलब एक समय पर उनका खाना मिल जाना चाहिए. यह भी बहुत जरूरी चीज है. इन बातों का ध्यान रखेंगे तो दुग्ध उत्पादन बढ़िया रहेगा और पशु स्वस्थ भी रहेंगे. About the Author Raina Shukla बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Ranchi,Jharkhand Source link

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JTET में भाषा विवाद; CM लेंगे फैसला:भोजपुरी-मगही की एंट्री कठिन आसान नहीं,...

झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (जेटेट) में क्षेत्रीय भाषा के रूप में भोजपुरी, मगही, मैथिली और अंगिका को शामिल करने का मामला फिलहाल उलझता नजर आ रहा है। इस मुद्दे पर गठित सात सदस्यीय उच्चस्तरीय मंत्रियों की कमेटी ने अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंप दी है, लेकिन कमेटी किसी सर्वसम्मति पर नहीं पहुंच सकी। दिलचस्प यह है कि कमेटी के भीतर ही मतभेद साफ तौर पर सामने आए हैं। झामुमो के सुदिव्य कुमार, योगेंद्र प्रसाद महतो और हफीजुल हसन अंसारी के साथ कांग्रेस की मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने इन भाषाओं को शामिल करने का विरोध किया, जबकि कांग्रेस के ही राधाकृष्ण किशोर और दीपिका पांडेय सिंह तथा राजद के संजय प्रसाद यादव ने इसके समर्थन में अपनी राय रखी। सात मंत्रियों की कमेटी में चार का विरोध खास बात यह रही कि कांग्रेस कोटे से आने वाली शिल्पी नेहा तिर्की ने अपनी ही पार्टी के दो अन्य मंत्रियों से अलग रुख अपनाया। इससे पहले बनी पांच सदस्यीय कमेटी में तीन मंत्री इन भाषाओं के पक्ष में और दो विरोध में थे, लेकिन बाद में सर्वसम्मति नहीं बनने पर हफीजुल हसन अंसारी और शिल्पी नेहा तिर्की को कमेटी में शामिल किया गया। दोनों के विरोध में आने से सात सदस्यीय कमेटी में चार मंत्री विरोध और तीन समर्थन में हो गए, जिससे बहुमत विरोध के पक्ष में झुक गया। हालांकि अंतिम निर्णय पर सहमति नहीं बनने के कारण अब यह मामला मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पास पहुंच गया है। इस पर अंतिम फैसला वही लेंगे। भाषा विवाद पर किसने क्या कहा पक्ष में : राधाकृष्ण किशोर, दीपिका सिंह और संजय प्रसाद समान अवसरः किसी भी क्षेत्र के अभ्यर्थियों के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए। सभी को समान अवसर मिलना चाहिए। व्यावहारिक पक्षः पलामू, गढ़वा, लातेहार, देवघर, गोड्डा और साहिबगंज जैसे सीमावर्ती जिलों में भोजपुरी, मगही, मैथिली और अंगिका बोलने वालों की बड़ी आबादी है। इन्हें बाहर रखना व्यावहारिक नहीं होगा। दोहरा मापदंडः जब बांग्ला ओड़िया जैसी बाहरी भाषाओं को क्षेत्रीय भाषा का दर्जा मिला तो भोजपुरी, मगही, मैथिली और अंगिका को बाहर रखना गलत है। विपक्ष में : सुदिव्य सोनू, हफीजुल हसन, योगेंद्र प्रसाद और शिल्पी नेहा तिर्की मूल क्षेत्रीय भाषा नहींः इन मंत्रियों का कहना है कि भोजपुरी, मगही और अंगिका झारखंड की मूल क्षेत्रीय भाषाएं नहीं हैं, इसलिए इन्हें सूची में शामिल करने का औचित्य नहीं है। बीपीएससी का उदाहरणः जब बिहार ने प्रशासनिक सेवा परीक्षाओं में इन भाषाओं को शामिल नहीं किया है, तो झारखंड पर भी ऐसा करने की बाध्यता नहीं है। सांस्कृतिक पहुंचानः झारखंड की अपनी विशिष्ट जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाई पहचान है, इसलिए परीक्षा नियमावली में उसी को प्राथमिकता मिले। तीन बैठकों में भी नहीं बनी सहमति पहली बैठकः अधिकारी 2012 और 2016 की नियमावली तथा पूर्व में हुई परीक्षाओं में भाषाओं के चयन से जुड़े दस्तावेज और आंकड़े लेकर नहीं पहुंचे थे। इस पर मंत्रियों ने नाराजगी जताई और शिक्षा व कार्मिक विभाग से पूरा ब्योरा मांगा। दूसरी और तीसरी बैठकः भोजपुरी, मगही, मैथिली, अंगिका और कुड़माली को क्षेत्रीय भाषा की सूची में शामिल करने के मुद्दे पर मंत्रियों के बीच तीखे मतभेद सामने आए। कुछ मंत्रियों ने समर्थन किया, जबकि कुछ ने कड़ा विरोध जताया। सीएम के निर्देश पर मई में बनी थी कमेटी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर मई में वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय कमेटी गठित की गई थी। दो बैठकों में सहमति नहीं बनने पर अनुसूचित जनजाति और अल्पसंख्यक समाज से एक-एक मंत्री को भी कमेटी में शामिल किया गया। Source link

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डीप डिप्रेशन का असर:झारखंड में मेहरबान मानसून 3 दिन और बरसेगा मानसून

24 घंटे में सरायकेला खरसावां के नीमडीह में सबसे ज्यादा 79.8 मिमी और रांची में 37 मिमी हुई बारिश बंगाल की खाड़ी में बने डीप डिप्रेशन के असर से रांची समेत पूरे झारखंड में मानसून सक्रिय है। सोमवार को राजधानी में दिनभर रुक-रुककर बारिश होती रही। मौसम विभाग के अनुसार, पिछले 24 घंटे में रांची में 37 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई, जबकि राज्य में सबसे अधिक 79.8 मिमी वर्षा सरायकेला-खरसावां के नीमडीह में हुई। राज्य के कई हिस्सों में गर्जन के साथ हल्की से मध्यम बारिश हुई, वहीं कुछ स्थानों पर भारी बारिश भी दर्ज की गई। मौसम विभाग के अनुसार, मंगलवार को रांची समेत राज्य के लगभग सभी जिलों में हल्की से मध्यम बारिश और कहीं-कहीं वज्रपात की संभावना है। 8 और 9 जुलाई को भी आसमान में बादल छाए रहेंगे। रांची सहित अधिकतर इलाकों में हल्की बारिश जारी रहेगी। भारी बारिश, तेज हवा और वज्रपात के आसार भारत मौसम विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने कहा कि झारखंड में बारिश का दौर अभी जारी रहेगा। उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और ओडिशा के ऊपर लो प्रेशर सिस्टम बना हुआ है। यह पिछले छह घंटे में करीब आठ किमी प्रति घंटे की रफ्तार से उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ा है। यह सिस्टम अगले 24 घंटे में पूरे झारखंड से गुजरेगा। इससे पूरे राज्य में मध्यम से भारी बारिश, तेज हवा और वज्रपात की संभावना है। जिलावार बारिश रिपोर्ट (1 जून से 6 जुलाई) नोट: बारिश के आंकड़े मिमी (mm) में हैं और कमी प्रतिशत (%) में दर्शाई गई है। Source link

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‘मनोरंजन ठीक, लेकिन शहर की पहचान से खिलवाड़ नहीं’.., मिर्जापुर फिल्म के...

Last Updated:July 07, 2026, 07:49 IST मिर्जापुर फिल्म का ट्रेलर रिलीज होने के बाद जिले में विरोध शुरू हो गया है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि फिल्म और वेब सीरीज में मिर्जापुर की धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान की जगह अपराध और हिंसा को प्रमुखता देकर शहर की छवि को गलत तरीके से पेश किया गया है. मिर्जापुर: ओटीटी पर धमाल मचाने वाली मिर्जापुर वेब सीरीज के बाद अब मिर्जापुर फिल्म लांच होने जा रहा है. मिर्जापुर फिल्म का ट्रेलर लॉन्च होने के बाद लगातार इसका विरोध भी हो रहा है. मिर्जापुर वेब सीरीज को लेकर जिले में काफी आक्रोश है. वहीं, मिर्जापुर फिल्म के ट्रेलर आने के बाद लोगों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही है. लोगों का कहना है कि फिल्म के माध्यम से मिर्जापुर की जो धार्मिक छवि है,  उसे खराब करने की कोशिश की जा रही है. मिर्जापुर जनपद का इतिहास कभी ऐसा नहीं रहा है. मिर्जापुर बेहद शांति जिला रहा है,  यह मां विंध्यवासिनी की नगरी है. यह जिले की पहचान है. वेब सीरीज में मिर्जापुर की असली पहचान को बताया ही नहीं गया है. मिर्जापुर फिल्म को लेकर लोगों की राय मिर्जापुर के रहने वाले धर्मेश दुबे उर्फ शिशु ने बताया कि मिर्जापुर फिल्म को मनोरंजन के नजरिए से देखा जाना चाहिए. हालांकि, फिल्म में कुछ ऐसे सीन है, जिसे कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता. सीरीज में ब्राह्मणों को मांस और मुर्गे का सेवन करते हुए दिखाया गया है, जो की मिर्जापुर के ब्राह्मणों के लिए बेहद ही दुख की बात है. मां की नगरी में इस तरीके का कृत्य दिखाया गया है, जो की अशोभनीय है. ब्राह्मण ऐसा नहीं करते हैं. बाकी मनोरंजन के नजरिए से वेब सीरीज को देखा जाए तो ठीक है. मिर्जापुर के हिसाब से देखा जाए तो वेब सीरीज और फिल्म दोनों ही छवि को खराब करने वाली है. मां के धाम से पहचान अतीक खाने बताया कि मिर्जापुर की पहचान को सीरीज और फिल्मों के माध्यम से धूमिल करने का यह प्रयास है. मिर्जापुर कभी भी अपराध के लिए नहीं जाना जाता है. मिर्जापुर अपनी प्राचीनतम इतिहास के लिए जाना जाता है. अपने अंदर कई ऐतिहासिक घटनाक्रमों को समेटे हुए है. इस वजह से मिर्जापुर की पहचान है. फिल्म में सबसे ज्यादा वायलेंस दिखाया गया है, जो मिर्जापुर में कभी था ही नहीं. हम मांग करेंगे कि मिर्जापुर वेब सीरीज के मेकर्स के ऊपर कारवाई हो. प्रतीक पांडेय ने बताया कि मिर्जापुर की पहचान मां विंध्यवासिनी धाम है. विश्व भर से लोग यहां पर दर्शन करने के लिए आते हैं. ऐसे में वेब सीरीज और फिल्म में यहां के धरोहरों को दिखाकर मारपीट और गुंडागर्दी को दिखाया गया है, जो मिर्जापुर की छवि को खराब करने का प्रयास है. About the Author Vivek Kumar विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Mirzapur-cum-Vindhyachal,Mirzapur,Uttar Pradesh Source link

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देवघर के इस चायवाले के लिए धोनी हैं भगवान, जन्मदिन पर दिनभर...

Last Updated:July 07, 2026, 07:25 IST Mahendra Singh Dhoni Birthday Tea Free: महेंद्र सिंह धोनी आज अपना 45वां जन्मदिन मना रहे हैं. देवघर में धोनी टी स्टाल के संचालक आर्यन धोनी के बहुत बड़े फैन हैं, जो उनके जन्मदिन पर मुफ्त चाय पिलाते हैं. उनकी इच्छा है कि धोनी एकबार जरूर उनकी दुकान पर चाय पिएं. ख़बरें फटाफट देवघर: भारतीय क्रिकेट के इतिहास में जब भी सबसे सफल कप्तानों का नाम लिया जाएगा, तो सबसे पहले महेंद्र सिंह धोनी का नाम जरूर आएगा. साल 2007 में अपनी कप्तानी में भारत को पहला टी-20 वर्ल्ड कप जिताने वाले धोनी ने साल 2011 में 28 साल बाद वनडे वर्ल्ड कप का सपना भी पूरा किया. अपनी शांत सोच, शानदार कप्तानी और मैच को आखिरी गेंद तक खत्म करने की कला की वजह से धोनी करोड़ों भारतीयों के दिलों पर राज करते हैं. यही वजह है कि उनके चाहने वाले उन्हें सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि भगवान का दर्जा देते हैं. आज यानी 7 जुलाई को महेंद्र सिंह धोनी अपना 45वां जन्मदिन मना रहे हैं. उनके जन्मदिन को देशभर में या विदेश मे भी उनके फैंस अपने-अपने अंदाज में खास बनाते हैं. कोई केक काटता है तो कोई पूजा करता है, लेकिन देवघर में एक ऐसा फैन है, जिसकी दीवानगी हर किसी को हैरान कर देती है. धोनी क्रिकेटर नहीं, बल्कि उनके लिए हैं भगवान देवघर के जसीडीह स्थित आरोग्य भवन के पास रहने वाले आर्यन पेशे से चाय बेचते हैं. उन्होंने अपनी छोटी-सी चाय की दुकान का नाम ही ‘धोनी टी स्टॉल’ रख दिया है. आर्यन बताते हैं कि वह बचपन से ही महेंद्र सिंह धोनी के बहुत बड़े प्रशंसक हैं. उनके लिए धोनी सिर्फ एक क्रिकेटर नहीं, बल्कि प्रेरणा और भगवान के समान हैं. यही कारण है कि वह हर साल 7 जुलाई का इंतजार करते हैं और पूरे उत्साह के साथ अपने पसंदीदा खिलाड़ी का जन्मदिन मनाते हैं. उनकी दुकान को गुब्बारों और पोस्टरों से सजाया जाता है. धोनी की तस्वीर के सामने केक काटा जाता है और फिर आने वाले हर ग्राहक को मुफ्त में चाय पिलाई जाती है. आर्यन का कहना है कि यह उनका अपने पसंदीदा खिलाड़ी के प्रति सम्मान जताने का सबसे छोटा प्रयास है. जानें क्या कहते है दुकानदार आर्यन आर्यन ने लोकल 18 से बातचित करते हुए कहा कि वह पिछले कई सालों यह परंपरा बनाए रखी है कि धोनी के जन्मदिन पर उनकी दुकान में कोई भी ग्राहक आए, उससे चाय का एक भी पैसा नहीं लिया जाएगा. पूरे दिन मुफ्त में चाय पिलाई जाती है. आसपास के लोग भी इस दिन का इंतजार करते हैं और बड़ी संख्या में उनकी दुकान पर पहुंचते हैं. कई लोग सिर्फ इस अनोखी दीवानगी को देखने आते हैं, तो कई लोग धोनी के जन्मदिन की खुशी में आर्यन के साथ शामिल होकर चाय का आनंद लेते हैं. आर्यन कहते हैं कि धोनी ने जिस तरह अपने खेल और व्यवहार से करोड़ों लोगों का दिल जीता है, उसी का सम्मान करने के लिए वह हर साल यह आयोजन करते हैं. कलयुग में हो जाएगा भगवान का दर्शन आर्यन का कहना है कि उनके जीवन की सबसे बड़ी इच्छा सिर्फ एक है. वह चाहते हैं कि एक दिन महेंद्र सिंह धोनी उनकी छोटी-सी चाय की दुकान पर आएं और उनके हाथ की बनी हुई चाय पिएं. आर्यन भावुक होकर कहते हैं कि अगर ऐसा हो गया तो वह अपने जीवन को सफल मानेंगे. उनके लिए वह पल किसी सपने से कम नहीं होगा. वह कहते हैं कि जिस दिन माही उनकी दुकान पर आएंगे, उस दिन उन्हें ऐसा महसूस होगा जैसे इस कलयुग में उन्हें अपने भगवान के साक्षात दर्शन हो गए हैं. हालांकि, उन्हें एक बार रांची के स्टेडियम में दूर से धोनी को देखने का मौका मिला था, लेकिन आज भी वह उनसे आमने-सामने मिलने का इंतजार कर रहे हैं. मुख्य कोच के रूप मे देखना चाहते महेन्द्र सिंह धोनी को धोनी के भविष्य को लेकर भी आर्यन की बड़ी इच्छा है. उनका मानना है कि महेंद्र सिंह धोनी का अनुभव भारतीय क्रिकेट के लिए अभी भी बहुत कीमती है. इसलिए वह चाहते हैं कि आने वाले समय में माही टीम इंडिया के मुख्य कोच की जिम्मेदारी संभालें. आर्यन का कहना है कि जिस तरह धोनी ने कप्तान रहते हुए भारतीय टीम को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया, उसी तरह अगर वह कोच बनेंगे तो आने वाली पीढ़ी के खिलाड़ियों को भी सही दिशा मिलेगी. देवघर के इस चायवाले की धोनी के प्रति ऐसी दीवानगी लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है और हर कोई उनकी इस अनोखी श्रद्धा की तारीफ करता रहता है. About the Author Brijendra Pratap Singh बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में (2021) लगभग 5 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटें…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Deoghar,Jharkhand Source link

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रांची सहित पूरे राज्य में मानसून एक्टिव:24 घंटे में रांची में 37...

बंगाल की खाड़ी में बने डीप डिप्रेशन और लो प्रेशर सिस्टम के असर से झारखंड में मानसून पूरी तरह सक्रिय हो गया है। राजधानी रांची सहित लगभग सभी जिलों में पिछले दो दिनों से रुक-रुक कर बारिश हो रही है। आज भी सुबह से बादलों का बरसना जारी है। सोमवार को रांची में दिनभर बादल छाए रहे और बीच-बीच में बारिश होती रही। मौसम विभाग के अनुसार पिछले 24 घंटे में रांची में 37 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। जबकि राज्य में सबसे अधिक 79.8 मिमी वर्षा सरायकेला-खरसावां के नीमडीह में दर्ज की गई। इसके अलावा लातेहार में 35 मिमी, रांची में 15 मिमी, मेदिनीनगर में 13 मिमी, बोकारो में 15 मिमी, जमशेदपुर में 2 मिमी, हजारीबाग और गुमला में 3-3 मिमी बारिश हुई। राज्य के कई हिस्सों में गर्जन के साथ हल्की से मध्यम बारिश और कुछ जगहों पर भारी बारिश दर्ज की गई है। 3 दिन तक तेज हवा और वज्रपात की चेतावनी भारत मौसम विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक अभिषेक आनंद के अनुसार उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और ओडिशा के ऊपर बना लो प्रेशर सिस्टम पिछले छह घंटे में करीब 8 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ा है। अगले 24 घंटे में पूरे झारखंड से गुजरने की संभावना है। इसके असर से राज्य में मध्यम से भारी बारिश, तेज हवा और वज्रपात की आशंका बनी हुई है। मौसम विभाग ने आज गिरिडीह, देवघर, धनबाद, जामताड़ा, दुमका, गोड्डा, साहिबगंज और पाकुड़ में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। वहीं रांची, खूंटी, गुमला, सिमडेगा, लोहरदगा, पश्चिमी और पूर्वी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, बोकारो, रामगढ़ और हजारीबाग में गरज-चमक के साथ 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने की संभावना है। 8 और 9 जुलाई को भी बादल छाए रहेंगे। हल्की बारिश जारी रहेगी। कई जिलों में मौसम हुआ सुहावना लगातार हो रही बारिश से झारखंड के कई जिलों में तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। मेदिनीनगर में तापमान में 4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आई, जबकि रांची का तापमान 1.8 डिग्री घटा है। सोमवार को रांची का अधिकतम तापमान 26.2 डिग्री और न्यूनतम 23.1 डिग्री सेल्सियस रहा। राज्य के दक्षिणी और मध्य हिस्सों रांची, गुमला, खूंटी, सिमडेगा, लोहरदगा और पश्चिमी सिंहभूम में मौसम सबसे ज्यादा सुहावना रहने का अनुमान है। जहां तापमान 27 से 30 डिग्री के बीच रहेगा। हालांकि पलामू, गढ़वा और लातेहार जैसे उत्तर-पश्चिमी जिलों में अपेक्षाकृत अधिक गर्मी रह सकती है। तापमान 34 डिग्री तक पहुंच सकता है। बारिश में अब भी भारी कमी, डैमों का जलस्तर कम एक जून से 6 जुलाई तक के आंकड़ों के अनुसार राज्य के अधिकांश जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है। बोकारो में 55%, खूंटी में 74%, कोडरमा में 76%, गढ़वा में 89% और गोड्डा में 79% तक कमी दर्ज की गई है। हालांकि सिमडेगा, धनबाद और गुमला में सामान्य से अधिक बारिश हुई है। रांची में भी 11% की कमी बनी हुई है। वहीं डैमों का जलस्तर भी पिछले साल की तुलना में कम है। रांची के गेतलसूद में 31 मीटर के मुकाबले इस साल 19.04 मीटर, गोंदा में 26.07 के मुकाबले 18.02 और हटिया में 33.05 के मुकाबले 26.2 मीटर जलस्तर दर्ज किया गया है। मौसम विभाग ने लोगों को वज्रपात के दौरान खुले स्थानों से दूर रहने, पेड़ों और बिजली के खंभों से बचने तथा अनावश्यक यात्रा नहीं करने की सलाह दी है। Source link

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जेटेट भाषा विवाद:सीएम को सौंपी रिपोर्ट, भोजपुरी-मगही की एंट्री कठिन

उच्चस्तरीय कमेटी भी नहीं सुलझा सकी मामला 5 सदस्यीय कमेटी में पक्ष में था बहुमत, दो मंत्री जुड़ने के बाद विरोधी पक्ष हुआ भारी अंतिम फैसला सीएम लेंगे झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (जेटेट) में क्षेत्रीय भाषा के रूप में भोजपुरी, मगही, मैथिली और अंगिका की एंट्री फिलहाल मुश्किल दिख रही है। सात मंत्रियों की उच्चस्तरीय कमेटी ने अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंप दी है। कमेटी के चार मंत्री—झामुमो के सुदिव्य कुमार, योगेंद्र प्रसाद महतो, हफीजुल हसन अंसारी और कांग्रेस की शिल्पी नेहा तिर्की—इन भाषाओं को शामिल करने के विरोध में रहे। वहीं, कांग्रेस के राधाकृष्ण किशोर, दीपिका पांडेय सिंह और राजद के संजय प्रसाद यादव ने इन्हें शामिल करने का समर्थन किया। दिलचस्प यह है कि कांग्रेस कोटे की मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने अपनी पार्टी के ही दो मंत्रियों राधाकृष्ण किशोर और दीपिका पांडेय सिंह से अलग राय रखी। इस तरह सात सदस्यीय कमेटी में चार मंत्री विरोध और तीन मंत्री समर्थन में रहे। इससे पहले बनी पांच सदस्यीय कमेटी में तीन मंत्री इन भाषाओं को शामिल करने के पक्ष में और दो विरोध में थे। सीएम के निर्देश पर मई में बनी थी कमेटी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर मई में वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय कमेटी गठित की गई थी। दो बैठकों में सहमति नहीं बनने पर अनुसूचित जनजाति और अल्पसंख्यक समाज से एक-एक मंत्री को भी कमेटी में शामिल किया गया। कमेटी की तीन बैठकें हुईं, लेकिन सहमति नहीं बनी पहली बैठक: अधिकारी 2012 और 2016 की नियमावली तथा पूर्व में हुई परीक्षाओं में भाषाओं के चयन से जुड़े दस्तावेज और आंकड़े लेकर नहीं पहुंचे थे। इस पर मंत्रियों ने नाराजगी जताई और शिक्षा व कार्मिक विभाग से पूरा ब्यौरा माँगा। दूसरी और तीसरी बैठक: भोजपुरी, मगही, मैथिली, अंगिका और कुड़माली को क्षेत्रीय भाषा की सूची में शामिल करने के मुद्दे पर मंत्रियों के बीच तीखे मतभेद सामने आए। कुछ मंत्रियों ने समर्थन किया, जबकि कुछ ने कड़ा विरोध जताया। सात मंत्री, दो राय… पढ़िए—किसने क्या कहा पक्ष में तीन मंत्री और उनके तर्क समान अवसर: किसी भी क्षेत्र के अभ्यर्थियों के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए। सभी को समान अवसर मिलना चाहिए। व्यावहारिक पक्ष: पलामू, गढ़वा, लातेहार, देवघर, गोड्डा और साहिबगंज जैसे सीमावर्ती जिलों में भोजपुरी, मगही, मैथिली और अंगिका बोलने वालों की बड़ी आबादी है। इन्हें बाहर रखना व्यावहारिक नहीं होगा। दोहरा मापदंड: जब बांग्ला-ओड़िया जैसी बाहरी भाषाओं को क्षेत्रीय भाषा का दर्जा मिला, तो भोजपुरी, मगही, मैथिली और अंगिका को बाहर रखना गलत है। विरोध करने वाले मंत्रियों की दलील मूल क्षेत्रीय भाषा नहीं: इन मंत्रियों का कहना है कि भोजपुरी, मगही और अंगिका झारखंड की मूल क्षेत्रीय भाषाएँ नहीं हैं, इसलिए इन्हें सूची में शामिल करने का औचित्य नहीं है। बीपीएससी का उदाहरण: जब बिहार ने प्रशासनिक सेवा परीक्षाओं में इन भाषाओं को शामिल नहीं किया है, तो झारखंड पर भी ऐसा करने की बाध्यता नहीं है। सांस्कृतिक पहचान: झारखंड की अपनी विशिष्ट जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाई पहचान है, इसलिए परीक्षा नियमावली में उसी को प्राथमिकता मिले। Source link

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Food: मानसून में माउंट आबू घूमने आ रहे हैं? इन फेमस स्ट्रीट...

होमफोटोलाइफ़फूड मानसून में माउंट आबू घूमने आ रहे हैं? इन फेमस स्ट्रीट फूड का जरूर लें स्वाद Last Updated:July 07, 2026, 07:03 IST Mount Abu Famous Street Food: राजस्थान का हिल स्टेशन माउंट आबू की पहचान सिर्फ प्राकृतिक खूबसूरती से नहीं, बल्कि यहां के स्वादिष्ट लोकल स्ट्रीट फूड से भी है. मानसून में सबसे ज्यादा राजस्थान में माउंट आबू में पर्यटक घूमने आते हैं. इसमें राजस्थान के अलावा गुजरात, महाराष्ट्र और देश पर से पर्यटक आते हैं. पर्यटकों को यहां के स्ट्रीट फूड भी काफी लुभाता है. आज हम आपको मानसून सीजन में सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले स्ट्रीट फूड के बारे में बताने जा रहे हैं, जो स्वाद में बेहतरीन हाेने के साथ-साथ जेब पर भी ज्यादा असर नहीं पड़ने देगा. किसी भी शहर की पहचान उसके खान-पान और स्ट्रीट फूड से होती है. मानसून में सबसे ज्यादा राजस्थान में माउंट आबू में पर्यटक घूमने आते हैं. इसमें राजस्थान के अलावा गुजरात, महाराष्ट्र और देश पर से पर्यटक यहां के स्ट्रीट फूड कभी स्वाद लेने पहुंचते हैं. आज हम आपको मानसून सीजन में सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले स्ट्रीट फूड के बारे में बताने जा रहे हैं. माउंट आबू और आबूरोड रेलवे स्टेशन के पास सबसे फेमस स्ट्रीट फूड मिलते हैं. रेलवे स्टेशन के पास ही मुख्य बाजार में नारायण नाश्ता सेंटर यहां के फेमस कढ़ी पकोड़ा नाश्ता के लिए पहचाना जाता है. इसमें बेशन और पालक के पकोड़ों के साथ बेसन वाली कढ़ी के साथ खाया जाता हैं. इसका क्रिस्पी टेस्ट टूरिस्ट को काफी पसंद आता है. माउंट आबू के नक्की लेक और गुरुशिखर मार्ग पर मानसून में सबसे ज्यादा मुंबई में फेमस वडापाव का ही एक नया रूप ग्रिल वड़ा पाव काफी पसंद किया जाता है. इसका टेस्ट सामान्य वड़ापाव से थोड़ा ज्यादा क्रिस्पी होता है. माउंट आबू में ग्रिल वड़ा पाव के लिया जाय भवानी वड़ापाव समेत कई नाश्ते की दुकानें फेमस है. यहां आने वाले पर्यटक इस खास बड़ा पाव का स्वाद जरूर चखते हैं. यहां कम रेट में लोगों को टेस्टी नाश्ता खाने को मिल जाता है. राजस्थानी दाल बाटी और चूरमा स्ट्रीट फूड नहीं होकर प्रदेश की एक सबसे ज्यादा पसंद की जाने वाली डिश है. अगर माउंट आबू में आप राजस्थानी ऑथेंटिक डाल बाटी चूरमा का स्वाद लेना चाहते है, तो इसके लिए यहां जोधपुर भोजनालय की दाल बाटी काफी फेमस है. जहां बारिश के सीजन में इस डिश की डिमांड काफी बढ़ जाती है. जोधपुर भोजनालय में राजस्थान की इस पारंपरिक डिश को खाने के लिए रोजाना लोगों की भीड़ जुटती है. Add News18 as Preferred Source on Google माउंट आबू की फेमस मिठाई और स्ट्रीट फूड में यहां की लच्छेदार रबड़ी का नाम सबसे पहले आता है. रबड़ी के लिए आबूरोड रेलवे स्टेशन के पास दयाल रबड़ी, सांवल रबड़ी के अलावा माउंट आबू में पंडित जी की रबड़ी की दुकानें काफी फेमस हैं. यहां आप ऑथेंटिक आबू की रबड़ी का स्वाद ले सकते हैं. पंडित जी की रबड़ी अपनी स्वाद के लिए अलग पहचान रखता है. यही वजह है कि यहां रबड़ी की सेल जबरदस्त है. माउंट आबू की पहचान सिर्फ प्राकृतिक खूबसूरती से नहीं, बल्कि यहां के स्वादिष्ट लोकल स्ट्रीट फूड से भी है. पर्यटन नगरी होने के कारण यहां खान-पान में नई-नई वैरायटी हमेशा आकर्षण का केंद्र रहती है. हालांकि, आधुनिक स्वाद के साथ स्थानीय व्यंजनों का पारंपरिक और ऑथेंटिक स्वाद भी पूरी तरह बरकरार रखा जाता है. यही वजह है कि यहां आने वाले पर्यटक स्थानीय स्ट्रीट फूड का स्वाद चखे बिना अपनी यात्रा अधूरी मानते हैं. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

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