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झारखंड

कारोबार बढ़ाना है तो यहां लगाइए दांव! जमशेदपुर का यह इलाका बन...

Last Updated:June 24, 2026, 07:55 IST जमशेदपुर में कारोबार के विस्तार के साथ गोडाउन और व्यावसायिक स्पेस की मांग लगातार बढ़ रही है. ऐसे में बर्मामाइंस का मिल्स एंड गोडाउन एरिया व्यापारियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है. यह क्षेत्र सुरक्षित भंडारण, बेहतर परिवहन सुविधा और शहर के प्रमुख बाजारों से आसान कनेक्टिविटी के लिए जाना जाता है. छोटे व्यापारियों से लेकर बड़े कारोबारी तक यहां अपने व्यवसाय का संचालन कर रहे हैं. सामान की आवाजाही और लॉजिस्टिक्स की सुविधाओं के कारण यह इलाका तेजी से एक प्रमुख बिजनेस हब के रूप में उभर रहा है और निवेश के लिए भी बेहतर विकल्प माना जा रहा है. जमशेदपुर में व्यापार लगातार बढ़ रहा है और इसके साथ ही अच्छे गोडाउन तथा व्यावसायिक स्पेस की मांग भी तेजी से बढ़ी है. यदि आप अपने व्यवसाय के लिए ऐसी जगह की तलाश कर रहे हैं, जहां सामान का सुरक्षित भंडारण, आसान परिवहन और ग्राहकों तक बेहतर पहुंच उपलब्ध हो, तो बर्मामाइंस स्थित मिल्स एंड गोडाउन एरिया आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है. शहर के प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों में शामिल यह इलाका आज कई छोटे और बड़े कारोबारियों की पहली पसंद बन चुका है. इस क्षेत्र की सबसे बड़ी विशेषता इसकी रणनीतिक लोकेशन है. बर्मामाइंस शहर के केंद्र में स्थित होने के कारण यहां से जमशेदपुर के लगभग सभी प्रमुख बाजारों और औद्योगिक क्षेत्रों तक आसानी से पहुंचा जा सकता है। चाहे आप थोक व्यापार करते हों, ई-कॉमर्स से जुड़े हों या किसी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का संचालन कर रहे हों, यहां से माल की आवाजाही बेहद सुगम रहती है. इससे समय और परिवहन लागत दोनों की बचत होती है. मिल्स एंड गोडाउन एरिया में चौड़ी और सुव्यवस्थित सड़कें उपलब्ध हैं, जिससे बड़े ट्रकों, मिनी ट्रकों और पिकअप वैन का आवागमन बिना किसी परेशानी के हो सकता है. कई अन्य इलाकों में जहां पार्किंग और लोडिंग-अनलोडिंग की समस्या रहती है, वहीं यहां पर्याप्त टेम्पोररी पार्किंग स्पेस उपलब्ध है. इससे व्यापारियों को अपने सामान की ढुलाई और स्टॉक प्रबंधन में काफी सुविधा मिलती है. Add News18 as Preferred Source on Google सुविधाओं की बात करें तो इस क्षेत्र में 24 घंटे बिजली और पानी की उपलब्धता इसे और अधिक आकर्षक बनाती है. इसके अलावा सुरक्षा के लिहाज से भी यह क्षेत्र काफी मजबूत माना जाता है. अधिकांश परिसरों में सीसीटीवी कैमरों की निगरानी रहती है तथा तीन से चार सुरक्षा गार्ड चौबीसों घंटे तैनात रहते हैं. इससे व्यापारियों को अपने सामान और संपत्ति की सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त चिंता नहीं करनी पड़ती. यहां की एक और खासियत यह है कि गोडाउन के साथ-साथ शोरूम, सर्विस सेंटर या ऑफिस स्पेस भी विकसित किया जा सकता है. यानी एक ही परिसर में स्टोरेज और व्यवसाय संचालन दोनों की सुविधा मिल जाती है. इससे कारोबार को व्यवस्थित ढंग से संचालित करने में मदद मिलती है और ग्राहकों के लिए भी पहुंच आसान हो जाती है. किराए की बात करें तो बर्मामाइंस के इस क्षेत्र में लगभग 25,000 से 30,000 रुपये प्रतिमाह के बजट में एक अच्छा और सुविधाजनक गोडाउन उपलब्ध हो सकता है. लोकेशन, सुरक्षा, परिवहन सुविधा और आधुनिक व्यवस्थाओं को देखते हुए यह निवेश व्यापारियों के लिए काफी लाभदायक साबित हो सकता है. यदि आप जमशेदपुर में अपने व्यवसाय के विस्तार की योजना बना रहे हैं, तो मिल्स एंड गोडाउन एरिया निश्चित रूप से एक मजबूत और व्यावहारिक विकल्प है. Source link

झारखंड

Ranchi Student Releases Govt Procurement Data

रांची के जेवीएम श्यामली के कक्षा 12वीं के छात्र सार्थक सिद्धांत ने एक बार फिर अपनी पहल से सबका ध्यान खींचा है। सीबीएसई के डिजिटल मूल्यांकन टेंडर का विश्लेषण कर पहले ही चर्चा में आ चुके सार्थक ने इस बार भारत सरकार के केंद्रीय सार्वजनिक खरीद (सीपीपी) प . खास बात यह है कि यह पूरा डेटा उन्होंने अपने पोर्टल sarthaksiddhant.com पर अपलोड किया है, जहां से कोई भी व्यक्ति इसे देख और डाउनलोड कर सकता है। सार्थक का कहना है कि सरकारी खरीद से जुड़े दस्तावेज हर नागरिक के लिए सुलभ होने चाहिए, ताकि पारदर्शिता केवल कागजों तक सीमित न रहे। सार्थक ने पोर्टल sarthaksiddhant.com पर सरकारी खरीद का डेटा अपलोड किया है ज्यादा लोग करेंगे जांच तो बढ़ेगी जवाबदेही सार्थक ने बताया कि पिछले दो सप्ताह में उन्होंने सीपीपी पोर्टल से यह डेटा एकत्र किया। इसके बाद इसे व्यवस्थित कर अपने पोर्टल sarthaksiddhant.com पर उपलब्ध कराया। उन्होंने नागरिकों, पत्रकारों और शोधकर्ताओं से अपील की है कि वे इस डेटा को डाउनलोड कर खुद भी इसकी जांच करें। उनका मानना है कि जब अधिक लोग सरकारी खर्च और खरीद से जुड़े रिकॉर्ड का विश्लेषण करेंगे, तो इससे सिस्टम में पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों बढ़ेगी। सार्थक के अनुसार, यह पहल सार्वजनिक निगरानी को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम है। उन्होंने नागरिकों, पत्रकारों और शोधकर्ताओं से अपील की है कि वे इस डेटा को डाउनलोड कर खुद भी इसकी जांच करें। सीपीपी पोर्टल जटिल, अपने प्लेटफॉर्म को बनाया आसान सार्थक के मुताबिक भारत सरकार का केंद्रीय सार्वजनिक खरीद पोर्टल काफी जटिल है, जहां से डेटा डाउनलोड करना आम लोगों के लिए आसान नहीं है। इसी वजह से उन्होंने अपने वेबसाइट को सरल और यूजर फ्रेंडली बनाया है। यहां से लोग बिना किसी तकनीकी दिक्कत के रिकॉर्ड डाउनलोड कर सकते हैं। उनका स्वतंत्र विश्लेषण कर सकते हैं। इस डेटाबेस में विभिन्न सरकारी विभागों और संस्थानों की खरीद से जुड़ी जानकारी शामिल है। उन्होंने बताया कि आगे इस पोर्टल को और बेहतर बनाने के लिए इंजीनियरों की टीम भी तैयार की जा रही है। सार्थक इससे पहले सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली और 12वीं की उत्तर पुस्तिकाओं के डिजिटल मूल्यांकन को लेकर सवाल उठा चुके हैं। सीबीएसई के डिजिटल मूल्यांकन पर उठाए थे सवाल गौरतलब है कि सार्थक इससे पहले सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली और 12वीं की उत्तर पुस्तिकाओं के डिजिटल मूल्यांकन को लेकर सवाल उठा चुके हैं। अपनी उत्तर पुस्तिका की स्कैन कॉपी देखने के बाद उन्हें अंकों में अंतर महसूस हुआ था। जिसके बाद उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया की पड़ताल की थी। उनके इस विश्लेषण को व्यापक स्तर पर सराहा गया था। अब सरकारी खरीद के 1.66 करोड़ रिकॉर्ड को वेबसाइट के जरिए सार्वजनिक कर उन्होंने एक बार फिर पारदर्शिता की दिशा में बड़ी पहल की है। —————————————————————- इसे भी पढ़ें… भास्कर इंटरव्यू : ‘कम नंबर आए तो जानना चाहता था ऐसा क्यों हुआ’:इनसिक्योर प्लेटफॉर्म को टेंडर क्यों दिया; सार्थक के खुलासे से CBSE चेयरमैन की कुर्सी गई सीबीएसई के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) सिस्टम में जब कॉपियां धुंधली दिखने और चेकिंग में गड़बड़ी की शिकायतें आईं। इसके बाद रांची के 17 साल के छात्र सार्थक सिद्धांत ने सिर्फ शिकायत ही नहीं की, बल्कि सिस्टम की ही पोल खोल दी। 12वीं (2024-26 बैच) के इस छात्र ने सीबीएसई के 576 टेंडर दस्तावेजों को खंगाला और एक ब्लॉग के जरिए ओएसएम का ठेका देने की प्रक्रिया में हुई भारी अनियमितताओं को उजागर कर दिया। सार्थक के इस खुलासे की गूंज संसद तक पहुंची। स्थायी समिति ने मामले पर संज्ञान लिया। इसके बाद सरकार को सीबीएसई के चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता को पद से हटाना पड़ा। यहां पढ़ें पूरी खबर… Source link

शिक्षा

August Batch Starts, Study Cost Reduced 30-40%

Hindi News National Foreign Universities In India: August Batch Starts, Study Cost Reduced 30 40% नई दिल्ली3 मिनट पहलेलेखक: कृष्ण मोहन तिवारी कॉपी लिंक भारत में अब विदेशी यूनिवर्सिटी की डिग्री लेने के लिए विदेश जाने की जरूरत नहीं होगी। केंद्र सरकार अब तक 15 विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में कैंपस खोलने के लिए लेटर ऑफ इंटेंट (LoI) जारी कर चुकी है। इनमें ज्यादातर कैंपस अगस्त से पहला बैच शुरू करेंगे। शुरुआती चरण में हर कैंपस में 200 से 250 छात्रों को दाखिला दिया जाएगा। अगले पांच सालों में इसे बढ़ाकर हर कैंपस में सालाना 1,000 से 1,200 छात्रों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। मुंबई, दिल्ली और बेंगलुरु में यूनिवर्सिटी ऑफ एबरडीन, ब्रिस्टल, यॉर्क, इलिनोइस टेक, लिवरपूल और विक्टोरिया यूनिवर्सिटी जैसे संस्थान अपने कैंपस खोल रहे हैं। मौजूदा सत्र के लिए 10 हजार से ज्यादा आवेदन मिल चुके हैं। विदेशी विश्वविद्यालयों के भारतीय कैंपस में पढ़ाई, परीक्षा, मूल्यांकन और डिग्री पूरी तरह उनके होम कैंपस के वैश्विक मानकों के मुताबिक होगी। पहले चरण में AI, कंप्यूटर साइंस और STEM विषयों पर फोकस रहेगा। 1 से 2 सेमेस्टर विदेश में पढ़ने का भी मौका मिलेगा, जॉब नेटवर्क भी बढ़ेगा दैनिक भास्कर ने ग्लोबल एडटेक कंपनी के सीईओ अश्विन डमेरा से बात की। 8 सवालों के जवाब में जाने वो सब कुछ जो है जरूरी… 1. भारत में किन विदेशी यूनिवर्सिटी के कैंपस खुलेंगे? यूनिवर्सिटी ऑफ एबरडीन (मुंबई), ब्रिस्टल (मुंबई), लिवरपूल (बेंगलुरु), यॉर्क (मुंबई), इलिनोइस टेक (मुंबई) और विक्टोरिया यूनिवर्सिटी (दिल्ली) कैंपस खोल रही हैं। मौजूदा सत्र के लिए 10 हजार से ज्यादा आवेदन मिल चुके हैं। 2. एडमिशन के लिए क्या योग्यता होगी? 12वीं में कम से कम 75% और ग्रेजुएशन में 55% से 70% अंक जरूरी होंगे। बोर्ड परीक्षा में अंग्रेजी में 70% से 85% अंक होने पर IELTS देने की जरूरत नहीं होगी। 3. सिलेबस, परीक्षा और डिग्री कैसी होगी? पढ़ाई, परीक्षा, मूल्यांकन और डिग्री पूरी तरह होम कैंपस के मानकों के मुताबिक होगी। पहले चरण में AI, कंप्यूटर साइंस और STEM विषयों पर फोकस रहेगा। 4. क्या विदेश के कैंपस में पढ़ने का मौका मिलेगा? एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत 1 से 2 सेमेस्टर विदेश में पढ़ सकेंगे। यूनिवर्सिटी ऑफ यॉर्क 2+1 मॉडल लेकर आई है। ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी के छात्र ब्रिटेन में मौजूद AI सुपरकंप्यूटर का भी इस्तेमाल कर सकेंगे। 5. फैकल्टी कैसी होगी? भारतीय और विदेशी प्रोफेसरों का मिश्रण होगा। विक्टोरिया यूनिवर्सिटी की एक-तिहाई फैकल्टी मेलबर्न से आएगी। इलिनोइस टेक विदेशी और भारतीय मूल के अनुभवी शिक्षकों की भर्ती कर रही है। 6. स्कॉलरशिप मिलेगी? अगले पांच वर्षों के लिए करीब 1,000 करोड़ रुपए का फंड रखा गया है। योग्यता और जरूरत के आधार पर 10% से 100% तक स्कॉलरशिप मिलेगी। एबरडीन 2 लाख और ब्रिस्टल 10 लाख रुपए सालाना तक स्कॉलरशिप देगा। 7. फीस ज्यादा होने के बावजूद फायदा क्या होगा? विदेश जाकर 80 लाख से 1.2 करोड़ रुपए खर्च करने के मुकाबले भारत में 30-40% कम लागत आएगी। छात्रों को ग्लोबल डिग्री, अंतरराष्ट्रीय फैकल्टी, मजबूत एलुमनाई नेटवर्क और बेहतर करियर अवसर मिलेंगे। 8. 2040 तक क्या तस्वीर हो सकती है? डेलॉय और नाइट फ्रैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, 2040 तक भारत में विदेशी विश्वविद्यालयों के कैंपस में 5.6 लाख से ज्यादा छात्र पढ़ सकते हैं। इससे 113 अरब डॉलर (करीब 10.67 लाख करोड़ रुपए) की विदेशी मुद्रा देश से बाहर जाने से बचेगी। ………………… यह खबर भी पढ़ें… QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027 जारी: टॉप 100 में एक भी भारतीय यूनिवर्सिटी नहीं, भारत में IIT दिल्ली टॉप पर, DU-JNU की रैकिंग सुधरी QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027 जारी हो गई है। इस रैंकिंग द्वारा जारी टॉप 100 यूनिवर्सिटी की रैंकिंग में एक भी भारत का संस्थान शामिल नहीं हो सका है। वहीं टॉप 200 की लिस्ट में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) दिल्ली ने एक बार फिर भारत के सबसे अच्छे एजुकेशन और रिसर्च संस्थान के तौर पर अपनी जगह बनाई है। इस संस्थान ने अपनी स्थिति में सुधार करते हुए वैश्विक स्तर पर 118वां स्थान हासिल किया है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं… Source link

झारखंड

देश के पंद्रह हजार गांवों तक अपनी सेवा पहुंचाएगा आरोग्य फाउंडेशन :...

लोहरदगा|आरोग्य फाउंडेशन ऑफ इंडिया के जिला सचिव सुनील अग्रवाल के आवास पर केंद्रीय समिति से पधारे पदाधिकारियों की बैठक हुई। जिसमें आगामी 25-26 जुलाई को रांची के माहेश्वरी भवन में देश के 22 राज्यों के फाउंडेशन के सदस्यों का सम्मेलन आयोजित करने पर मंत्रणा हुई। साथ ही 15 हजार गांवों तक सेवा विस्तार करने पर भी चर्चा हुई। जिलाध्यक्ष कुमुद अग्रवाल ने सभी आगंतुकों का पुष्पगुच्छ दे कर स्वागत किया और कहा कि रांची में आयोजित सम्मेलन कार्यक्रम में लोहरदगा की समिति अपनी भागीदारी अवश्य सुनिश्चित करेगी। संयोजक जय प्रकाश शर्मा ने बताया कि अभी वर्तमान में फाउंडेशन 2 हजार गांवों में अपनी निःशुल्क सेवा दे रहा है जिसमें स्वास्थ्य जांच, टेलीमेडिसन सुविधा, औषधीय चिकित्सा, नेत्र जांच वाहन का संचालन, स्वच्छता और स्वावलंबन जैसे कार्यक्रम चला रहा है।फाउंडेशन का सबसे ज्यादा लाभ ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं को लाभ मिल रहा है, प्रशिक्षित कर उन्हें कुछ मानदेय देकर स्वावलंबी बनाना ही संस्था का लक्ष्य है। सचिव सुनील अग्रवाल ने धन्यवाद ज्ञापन दिया और भविष्य में किए जाने वाले कार्यों पर अपने विचार रखे। बाहर से आए केंद्रीय समिति में मुख्य रूप से केंद्रीय मार्गदर्शक सर्जन डॉक्टर मुकुल भाटिया, प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राम मोहन, सचिव प्रभा भट्ट, केंद्रीय संरक्षक डॉक्टर एमएस भट्ट, केंद्रीय कार्य समिति सदस्य शिव शंकर साबू, प्रदेश, वीरीया उरांव, राजनाथ के साथ साथ लोहरदगा के एकल भाग अध्यक्ष नवल अग्रवाल, सचिव दीपक अग्रवाल, सेवा भारती अध्यक्ष दीपक सर्राफ, संरक्षक शिव प्रसाद राजगढ़िया, फाउंडेशन सहसचिव जीवन मेहता, प्रमोद अग्रवाल, अग्रवाल महिला समिति अध्यक्ष रश्मि अग्रवाल मौजूद थे। Source link

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Ketan Murder Case Live Updates: ‘सिया तो बिल्कुल मासूम लगती थी…’ केतन...

Last Updated:June 28, 2026, 07:13 IST Ketan Agarwal Murder Case Live Updates : केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच आगे बढ़ने के साथ ही आरोपी सिया गोयल और उसने बॉयफ्रेंड चेतन चौधरी को लेकर नए खुलासे सामने आ रहे हैं. पुलिस ने इस मामले में सिया अग्रवाल के …और पढ़ें केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच आगे बढ़ने के साथ ही आरोपी सिया गोयल और उसने बॉयफ्रेंड चेतन चौधरी को लेकर नए खुलासे सामने आ रहे हैं. पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए खुलासे सामने आ रहे हैं. इस मामले से जुड़ी एक महत्वपूर्ण कार्रवाई के तहत सिया अग्रवाल के पिता, मां और भाई से पुलिस ने 10 घंटे से ज्यादा समय तक पूछताछ की. लंबी पूछताछ और बयान दर्ज होने के बाद परिवार पुलिस स्टेशन से बाहर निकला. पुलिस फिलहाल मामले के हर पहलू की जांच कर रही है और घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों को जोड़ने में जुटी है. ऐसे में इस हाई-प्रोफाइल केस की जांच पर सबकी नजर बनी हुई है. वहीं अब इस मामले में सिया गोयल की शादी तय कराने वाले उसके मामा और मामी का बयान भी सामने आया है. उन्होंने पुलिस को बताया कि उन्हें आज भी इस बात पर यकीन नहीं हो रहा कि सिया पर अपने मंगेतर की हत्या की साजिश रचने का आरोप लगा है. दरअसल जांच के दौरान पता चला है कि सिया गोयल के मामा नरेंद्र मित्तल और मामी रेनू मित्तल ने ही पुणे के कारोबारी केतन अग्रवाल के साथ उसका रिश्ता तय कराने में अहम भूमिका निभाई थी. दोनों ने पुलिस को बताया कि जब उन्हें इस वारदात की जानकारी मिली तो वे पूरी तरह स्तब्ध रह गए. सूत्रों के मुताबिक, नरेंद्र मित्तल ने पुलिस से कहा कि वह सिया को बचपन से जानते हैं. उनके मुताबिक सिया और केतन दोनों ही शांत स्वभाव, विनम्र और अच्छे संस्कार वाले लगते थे. उन्होंने कहा, ‘हमने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि सिया ऐसा कोई कदम उठा सकती है.’ पुलिस का आरोप है कि 18 जून को पुणे के पास लोहागढ़ किले पर सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी ने मिलकर केतन अग्रवाल को खाई में धक्का देकर उसकी हत्या कर दी. शुरुआती दौर में इसे हादसा बताने की कोशिश की गई, लेकिन जांच में इसे सुनियोजित हत्या बताया गया. फिलहाल पुलिस मामले की हर पहलू से जांच कर रही है और सिया गोयल व सह-आरोपी चेतन चौधरी से पूछताछ के आधार पर पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में जुटी है. Ketan Agarwal Murder Case Live Updates: सिर्फ सिया और चेतन नहीं, 4-5 लोग हत्या में शामिल… केतन अग्रवाल के परिवार और स्थानीय लोगों ने शनिवार को पिंपरी-चिंचवड़ में कैंडल मार्च निकाला. इस दौरान उन्होंने केतन को श्रद्धांजलि दी और हाथों में तख्तियां लेकर उसके लिए न्याय की मांग की. तो उधर, केतन अग्रवाल मर्डर केस में अब पीड़ित परिवार की ओर से गंभीर आरोप लगाए गए हैं. कैंडल मार्च के दौरान केतन के दादा ने दावा किया कि इस मामले में सिर्फ दो नहीं, बल्कि 4 से 5 और लोग शामिल हो सकते हैं और उनकी भूमिका की भी जांच होनी चाहिए. वहीं केतन के पिता ने भावुक होते हुए कहा कि वे अपने बेटे की शादी की तैयारी कर रहे थे, लेकिन अब उसे ही खो दिया. परिवार ने मामले में शामिल सभी लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और न्याय की मांग की है. इस बीच पुलिस जांच लगातार जारी है. Ketan Agarwal Murder Case Live Updates: ‘केतन हमारा भी बेटा था…’ सिया के पिता को बेटी की करतूतों पर अब तक नहीं यकीन सिया के पिता प्रवीण गोयल ने भी एक बार फिर बेटी पर लगे आरोपों पर अविश्वास जताते हुए केतन की मौत पर गहरा दुख व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि केतन उनके लिए बेटे जैसा था और पूरा परिवार उससे बेहद जुड़ गया था. प्रवीण गोयल ने कहा, ‘यह बेहद दुखद घटना है. आज भी हमें विश्वास नहीं हो रहा कि ऐसा हो गया. केतन सिर्फ उनके परिवार का बेटा नहीं था, वह हमारा भी बेटा था. हमने उसके साथ भविष्य के कई सपने देखे थे.’ उन्होंने यह भी कहा कि सिया ने कभी परिवार के सामने शादी को लेकर कोई आपत्ति नहीं जताई थी. परिवार उदयपुर में होने वाली शादी की तैयारियों में जुटा हुआ था और यदि उन्हें रिश्ते में किसी तरह की परेशानी का पता चलता तो वे जरूर इस पर बात करते. Location : Pune,Maharashtra Source link

झारखंड

झारखंड में बनेगा नया सियासी समीकरण? राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की हार...

Last Updated:June 24, 2026, 08:37 IST Opinion: राज्यसभा चुनाव के नतीजे आने के पहले से ही चर्चा है कि झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन भाजपा के करीब जा सकते हैं. इसके कई कारण बताए जा रहे हैं. अव्वल तो वे सीबीआई और ईडी के कई कानूनी मामलों में उलझे हुए हैं. भाजपा के साथ रहने पर उन्हें राहत मिल सकती है. दूसरा बड़ा कारण यह कि जिस तरह भाजपा के आगे विपक्षी पार्टियों के सांसद-विधायक नतमस्तक होते जा रहे हैं, वह जेएमएम के लिए भी खतरे की घंटी साबित हो सकती हैं. हेमंत सोरेन की चुप्पी से नई संभावनाओं की अटकलों को बल मिल रहा है. हेमंत सोरेन और राहुल गांधी. (फाइल फोटो) अबूझ पहेली बनी ‘इंडिया’ की राजनीतिझारखंड की राजनीति फिलवक्त किसी की समझ में नहीं आ रही. राज्यसभा चुनाव के बाद से यही स्थिति बनी हुई है. सत्ताधारी इंडिया ब्लॉक की चारों पार्टियों कांग्रेस, राजद, सीपीआई (एमएल) और जेएमएम के दूरी कतार के नेता कुछ न कुछ बोल रहे हैं, लेकिन जिन पर गठबंधन का सारा दारोमदार है, उन्होंने खामोशी ओढ़ ली है. जेएमएम के प्रमुख और झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन ने राज्यसभा चुनाव में इंडिया समर्थित कांग्रेस उम्मीदवार की हार घटक दलों के गले नहीं उतर रही. कांग्रेस के प्रदेश स्तरीय नेता हार का ठीकरा राजद और माले पर फोड़ रहे हैं तो जेएमएम के राष्ट्रीय महासचिव सुप्रीयो भट्टाचार्य कहते हैं कि हेमंत सोरेन की सरकार 56 के बजाय अब सिर्फ 50 विधायकों के समर्थन पर आधारित है. यानी कांग्रेस की तरह उनका भी मानना है कि राजद और माले के जिन 6 विधायकों ने इंडिया ब्लॉक के उम्मीवार को वोट नहीं किया, वे अघोषित तौर पर गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं. इन सबके बावजूद हेमंत सोरेन की चुप्पी ने सबको सकते में डाल दिया है. क्या बदल जाएगा सत्ता का स्वरूपझारखंड में सरकार का स्वरूप बदल सकता है. अब इसकी तस्वीर धीरे-धीरे साफ होने लगी है. बिहार विधानसभा चुनाव के समय इंडिया ब्लॉक में शुरू हुई तनातनी अब संबंध विच्छेद के करीब पहुंच गई है. मार्के की बात यह कि इस स्थिति के लिए इंडिया ब्लॉक की पार्टियां खुद जिम्मेवार हैं. वे साथ रहते हुए भी आपस में गुत्थमगुत्था हो रही हैं. भाजपा तमाशबीन बन कर मजे ले रही है. गठबंधन की इस हालत के लिए इंडिया ब्लॉक की पार्टियां ही जिम्मेवार हैं. राजद और कांग्रेस ने बिहार में झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) को तवज्जो नहीं दी. जेएमएम ने भी असम में कांग्रेस की खाट खड़ी करने में अपनी भूमिका निभाई. बची-खुची कसर राज्यसभा चुनाव में पूरी हो गई. एनडीए समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी की जीत सुनिश्चित कर इंडिया ब्लॉक की पार्टियों ने साफ कर दिया कि उनकी एकता सिर्फ सरकार तक ही सीमित है. बाकी फैसलों के लिए सभी आजाद हैं. राज्यसभा चुनाव के नतीजे समझिएजेएमएम के नेतृत्व वाले गठबंधन-इंडिया की झारखंड में सरकार है. सर्वाधिक सीटों के कारण हेमंत सोरेन सरकार के मुखिया हैं. जेएमएम के 34 विधायक हैं. इसके अलावा कांग्रेस के 16, राजद के 4, वाम दलों के 2 विधायक जेएमएम के समर्थन में हैं. यानी इंडिया ब्लॉक के कुल 56 विधायक हैं. राज्यसभा चुनाव में एक सीट पर जीत के लिए 28 विधायकों के वोट आवश्यक थे. कुल 81 सीटों वाली विधानसभा में 56 विधायकों के एक साथ होने से राज्यसभा की दोनों सीटें इंडिया ब्लॉक के खाते में जानी तय थीं. जेएमएम उम्मीदवार बैद्यनाथ राम को 30 वोट मिले. महागठबंधन समर्थित कांग्रेस उम्मीदवार को 20 वोट ही मिल पाए. मतदान पूर्व मॉक पोलिंग के बावजूद गठबंधन के 3 वोट निरस्त हो गए. यहां बड़ा सवाल यह है कि जब जेएमएम को 28 वोट ही पड़ने थे तो उसे 30 वोट क्यों और कैसे पड़ गए. कांग्रेस प्रत्याशी को 20 वोट ही क्यों मिले. जाहिर है कि इंडिया ब्लॉक की पार्टियों में एकता नहीं रह पाई. इसका फायदा निर्दलीय नाथवानी को हुआ. वे जीत गए, जबकि पर्याप्त वोट होने के बावजूद कांग्रेस उम्मीदवार को हार का मुंह देखना पड़ा. इंडिया ब्लॉक में शुरू हुई किचकिचराज्यसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने के साथ ही इंडिया ब्लॉक में सिर फुटव्वल शुरू हो गया है. कांग्रेस ने इसके लिए राजद और वाम दलों के विधायकों को जिम्मेवार ठहराया है. राजद ने उल्टे कांग्रेस पर ही बिकाऊ होने का आरोप मढ़ कर तल्खी बढ़ा दी है. वाम दलों में सीपीआई (एमएल) के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने भी कांग्रेस के आरोप को सिरे से खारिज कर दिया है. जेएमएम ने चुप्पी साध ली है. आश्चर्य यह कि कांग्रेस भी जेएमएम की भूमिका पर कोई शक नहीं कर रही, जबकि यह साफ हो चुका है कि जेएमएम कैंडिडेट को 28 की जगह 30 वोट जब चले गए तो 2 वोट वैसे ही कांग्रेस को कम पड़ गए. यानी उसके हिस्से में 28 की जगह 26 ही आए, जो हार के लिए काफी थे. उसके बाद कौन बिका या कौन बिकने से बचा, यह बेमलब की बहस का मुद्दा है. अनबन से तालमेल टूटने का खतराकांग्रेस यकीनन इस हार पर मंथन करेगी. राजद और वाम दलों ने भी तल्ख तेवर अपनाए हैं. जेएमएम कुछ बोल नहीं रहा. यह कांग्रेस को उकसाने वाला कदम साबित हो सकता है. अब देखना दिलचस्प होगा कि इस अपमान और धोखे के बाद भी कांग्रेस सरकार में बनी रहती है या अलग होने का रास्ता अख्तियार करती है. जेएमएम के दोनों हाथ में लड्डू हैं. भाजपा भी इशारों में हेमंत को साथ आने का न्यौता दे चुकी है. हेमंत की चुनाव नतीजों के तुरंत बाद दिल्ली यात्रा भी कुछ कहती है. दिल्ली में वे किससे क्या खिचड़ी पकाते हैं, बहुत जल्द सामने आ सकता है. गठबंधन में ऐसी स्थिति पैदा की जा रही है कि कांग्रेस आला कमान खुद अलग होने का फैसला कर ले. सरयू राय ने JMM को फिर राय दीइस बीच जेडीयू के इकलौते विधायक सरयू राय ने हेमंत सोरेन को फिर सलाह दी है कि वे भाजपा और कांग्रेस को छोड़ सरकार बनाएं. इसका फॉर्मूला भी उन्होंने सुझाया है. उनका कहना है कि जेएमएम के 34, राजद और वाम दलों के 6 तथा जेडीयू के 1 विधायक को लेकर 41 सदस्यों का बहुमत का आंकड़ा बन जाएगा. हेमंत चाहें तो इस फॉर्मूले से सरकार बना सकते

झारखंड

27 दिन में 160 की जगह 61 मिमी बारिश:झारखंड में सामान्य से...

झारखंड में इस बार मानसून की रफ्तार काफी धीमी बनी हुई है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है। एक जून से 27 जून तक राज्य में जहां सामान्य रूप से करीब 160 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, वहीं अब तक महज 61 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। यह सामान्य से लगभग 62 प्रतिशत कम है। राजधानी रांची की स्थिति भी बहुत बेहतर नहीं है। यहां अब तक 168.6 मिमी के मुकाबले केवल 125.7 मिमी बारिश हुई है, जो करीब 25 प्रतिशत कम है। राज्य के कई हिस्सों में बारिश की कमी के कारण खेत सूखे पड़े हैं। धान की खेती प्रभावित हो रही है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बार अलनीनो के प्रभाव के कारण मानसून कमजोर पड़ा है, जिससे बारिश का वितरण असमान हो गया है। 30 जून और 1 जुलाई को भारी बारिश का अलर्ट मौसम विभाग ने हालांकि आने वाले दिनों के लिए राहत की संभावना जताई है। विभाग के अनुसार 28 जून से 3 जुलाई तक राज्य में बादल छाए रहेंगे और कई स्थानों पर गर्जन, वज्रपात और तेज हवा के साथ हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। विशेष रूप से 30 जून और 1 जुलाई को राज्य के कई जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। देवघर, दुमका, जामताड़ा, पाकुड़, साहिबगंज, गोड्डा, बोकारो, धनबाद, रांची, पूर्वी और पश्चिमी सिंहभूम समेत कई इलाकों में 60 से 100 मिमी तक वर्षा होने की संभावना है। मौसम विज्ञान केंद्र ने इन क्षेत्रों के लिए यलो से ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इस दौरान अधिकतम तापमान में 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आने की संभावना भी जताई गई है। कहीं लू चल रही तो कहीं हो रही बारिश राज्य में मौसम का मिजाज पूरी तरह असमान बना हुआ है। जहां पलामू, गढ़वा, चतरा और लातेहार में लू जैसे हालात बने हुए हैं, वहीं अन्य जिलों में हल्की बारिश दर्ज की गई है। शनिवार को रामगढ़ में सबसे अधिक 10 मिमी वर्षा हुई, जबकि रांची, बोकारो और हजारीबाग में एक-एक मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। तापमान की बात करें तो मेदिनीनगर में अधिकतम तापमान 40.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सबसे अधिक रहा। इस बीच लोहरदगा जिले में वज्रपात की घटना में 17 वर्षीय किशोर की मौत हो गई, जिससे क्षेत्र में दहशत का माहौल है। मौसम वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है। कहा है कि वे निचले इलाकों में धान की बिचड़ा लगाने की तैयारी करें, जबकि ऊंचे क्षेत्रों में वैकल्पिक फसलों पर ध्यान दें। अगले चार दिन मानसून के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं और इस दौरान अच्छी बारिश होने की उम्मीद है। Source link

शिक्षा

Karnataka Police 1600 Bharti | Punjab Education 829 Vacancy

Hindi News Career Karnataka Police 1600 Bharti | Punjab Education 829 Vacancy | 3492 Top Jobs 2026 50 मिनट पहले कॉपी लिंक इस हफ्ते निकली हैं पंजाब स्कूल शिक्षा निदेशालय और रेलवे सहित कई विभागों में 3492 पदों पर नौकरियां। अगर आप भी इन पदों के लिए अप्लाई करना चाहते हैं, तो इन 5 नौकरियों की डिटेल्ड जानकारी 5 ग्राफिक्स के जरिए जानिए: ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक . दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं… सीनियर टीचर भर्ती अब 10 हजार 537 पदों पर होगी: RPSC ने 4037 पद बढ़ाए; 12 से 18 जुलाई तक 12 लाख से ज्यादा कैंडिडेट्स देंगे एग्जाम 0:22Play video Play video अजमेर कॉपी लिंक शेयर FIFA ने नेपाल फुटबॉल संघ को निलंबित किया: वेनेजुएला में भूकंप के चलते राष्‍ट्रीय आपातकाल घोषित; 26 जून के करेंट अफेयर्स 1:23Play video Play video जॉब – एजुकेशन कॉपी लिंक शेयर Re NEET UG 2026 की आंसर की जारी: ऑफिशियल वेबसाइट से करें डाउनलोड, 15 जुलाई से पहले आ सकता है रिजल्ट जॉब – एजुकेशन कॉपी लिंक शेयर Source link

झारखंड

बड़ा तालाब में छोड़ा गया नौ क्विंटल मछली का जीरा

लोहरदगा|शहर के ऐतिहासिक बड़ा तालाब में मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा देने और मत्स्य व्यवसाय से जुड़े लोगों की आजीविका को सशक्त बनाने के उद्देश्य से शनिवार को मत्स्यजीवी सहयोग समिति लिमिटेड की ओर से 9 क्विंटल मछली का जीरा छोड़ा गया। कार्यक्रम नगर परिषद के उपाध्यक्ष अब्दुल कादिर व अंजुमन इस्लामिया के नाज़िम-ए-आला हाजी जबारुल अंसारी की देखरेख में संपन्न हुआ। वहीं नगर परिषद उपाध्यक्ष ने कहा कि बड़ा तालाब शहर की महत्वपूर्ण धरोहर है। इसके संरक्षण के साथ साथ इसका बेहतर उपयोग भी जरूरी है। तालाब में मछली का जीरा छोड़ने से भविष्य में मत्स्य उत्पादन बढ़ेगा और इससे मत्स्यजीवी परिवारों की आय में वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि नगर परिषद हमेशा ऐसे जनहितकारी कार्यों को बढ़ावा देती रहेगी। अंजुमन इस्लामिया के नाजिम-ए-आला ने कहा कि समाज के आर्थिक विकास के लिए ऐसे सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने मत्स्यजीवी सहयोग समिति की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि तालाबों का संरक्षण और उनका सदुपयोग समय की आवश्यकता है। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ लोगों को रोजगार के नए अवसर भी मिलेंगे। मौके पर समिति के तौहीद अंसारी, अख्तर अंसारी, नूरजहां खातून, राबिया खातून, मुर्तजा अंसारी, संतु नायक, मुकेश नायक, मोनू उरांव, सोनू वर्मा, गगन उरांव, हारून रशीद, इम्तियाज अंसारी, सरवर खान सहित अन्य लोग उपस्थित थे। Source link

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पेठा, खुरचन से लेकर राजभोग तक, ये हैं आगरा की 6 सबसे...

Last Updated:June 28, 2026, 06:11 IST ताजमहल के अलावा आगरा अपनी स्वादिष्ट मिठाइयों के लिए भी दुनियाभर में मशहूर है. जानिए पेठा, खुरचन, रबड़ी, रसमलाई, जलेबी और राजभोग जैसी आगरा की 7 सबसे लोकप्रिय मिठाइयों का इतिहास और खासियत. आगरा घूमने आने वाले पर्यटक यहाँ की खूबसूरत ईमारतों का दीदार करते है. आगरा का नास्ता भी मशहूर है इसलिए लोग उसे भी बहुत पसंद करते हैं. आज हम आपको आगरा की टॉप  मिठाईयों के बारे में बताने जा रहे है जो आगरा को अलग पहचान दिलाती हैं. आगरा की मिठाइयो में सबसे पहला नाम पेठे का आता है. आगरा में पेठे की शुरुआत मुग़लकाल में हुई थी तब से आज तक पेठा दुनिया भर में मशहूर है. मुग़लकाल में शुरू हुआ यह पेठा पहले सिर्फ सफ़ेद और सूखा हुआ करता था. लेकिन बदलते समय के साथ अब कई तरह के पेठे आगरा में बिकते हैं. बताया जाता है कि आगरा में वर्तमान में 56 प्रकार के अलग अलग पेठे तैयार किये जाते हैं जो बाहर तक सप्लाई होते हैं. वर्तमान ने अंगूरी पेठा, केसर पेठा, चॉकलेट पेठा, पान पेठा सहित कई प्रकार के फ्लेवर वाले पेठे उपलब्ध हैं. आगरा के सेठ गली के पास मिठाई वाली गली है. दरअसल, इस गली का नाम ही मिठाई वाली गली है. इसका मुख्य कारण यह है कि यहाँ सिर्फ अलग अलग तरह की आगरा की मशहूर मिठाई बनाई जाती है. आगरा की रसमलाई जिसने भरपूर केसर डाली जाती है. यह इतनी स्वादिष्ट होती है कि जो एक बार खाता है दीवाना हो जाता है. Add News18 as Preferred Source on Google आगरा में शादी ब्याह या कोई भी कार्यक्रम हो उस समारोह में आगरा का राजभोग जरूर होता है. हालांकि, यह आगरा की मिठाई नहीं है फिर भी इसे वर्तमान में आगरा के लोग सबसे अधिक पसंद करने लगे है. राजभोग इस स्वादिष्ट होता है कि लोग इसे खाना पसंद करते है और यदि आप भी मीठे के शौकीन हैं, तो ज़ब भी आगरा आए तो एक बार आगरा वाला राजभोग जरूर खाएं. आगरा में खाने पीने के कई तरह के शौकीन रहते हैं और यही वजह है कि आगरा में सुबह 5 बजे से ही नाश्ते कि दुकाने खुलना शुरू हो जाती हैं. आगरा में जलेबी भी सबसे ज्यादा मशहूर है. आगरा के लोग इसे दही और आलू की सब्जी के साथ खाना पसंद करते हैं. सुबह सुबह कचौरी खाने के बाद लोग उसी सब्जी से जलेबी जरूर खाते हैं और कई ऐसे शौकीन हैं जो दही के साथ जलेबी खाते हैं आगरा का यह नाश्ता सुबह के समय अधिक प्रचलित है. आगरा की खुरचन मिठाई मूल रूप से शुद्ध दूध और मलाई से बनी एक पारंपरिक और शाही मिठाई है. यह अपनी रिच, मलाईदार बनावट और प्राकृतिक मिठास के लिए जानी जाती है. आगरा में इसे प्राचीन मिठाईयों में गिना जाता है. इसमें किसी भी तरह के मावे या आर्टिफिशियल थिकनर का इस्तेमाल नहीं होता. इसे बनाने के लिए केवल फुल-क्रीम दूध को धीमी आंच पर घंटों उबाला जाता है, जिस कारण यह पुरी तरह से शुद्ध होती है. दूध खौलने के बाद कड़ाही के किनारों पर जो गाढ़ी मलाई की परत जमती है, उसे कारीगर बहुत सावधानी से खुरच-खुरचकर अलग करते हैं. इसी प्रक्रिया के कारण इसका नाम खुरचन मिठाई पड़ा है. आगरा अपने विश्व प्रसिद्ध पेठे के अलावा अपनी गाढ़ी, मलाईदार और केसर-मेवे से भरपूर रबड़ी के लिए भी जाना जाता है. यहाँ कुछ सबसे प्रसिद्ध और पारंपरिक स्थान हैं जहाँ आप इस लाजवाब मिठाई का स्वाद ले सकते हैं. इसके लिए आप आगरा के सेठ गली या अन्य पसंदीदा मिठाई की दुकान से ले सकते है. यह मिठाई शुद्ध देशी घी से बनी और मेवों से सजी रबड़ी के लिए स्थानीय लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय है. बाहर से आने वाले लोग भी इसे खाना पंसद करते है. आगरा के वरिष्ठ इतिहासकार प्रोफेसर अनुराग पालीवाल बताते है कि आगरा शहर अपनी प्राचीनता के लिए मशहूर है. उन्होंने कहा कि अलग अलग मिठाई का अलग अलग इतिहास मिलता है. उन्होंने कहा कि आगरा के पेठे का जन्म मुग़लकाल में हुआ था. जब ताजमहल निर्माण चल रहा था उस वक़्त बादशाह ने एक खास मिठाई बनवाने के लिए आदेश जारी किया था और तब से अबतक यह मशहूर है. इसी तरह खुरचन को भी काफी प्राचीन मिठाई माना जाता है. इसी तरह कई बड़े मिठाई कारीगरों ने अलग अलग मिठाईयों को बनाना शुरू किया जो आज काफी लोकप्रिय है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। उत्तर प्रदेश की ताजा खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें| Source link

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