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किसानों के लिए खुशखबरी! BAU ने बनाई ये खास स्प्रे मशीन, 25...

Last Updated:June 24, 2026, 08:44 IST Agri Tools : बिरसा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी ने 25 लीटर क्षमता वाला बैगनुमा स्प्रेयर बनाया है. इस बैटरी मोटर की मदद से आप 20-25 फीट दूर तक छिड़काव कर सकते हैं. वहीं, इसकी कीमत करीब 15000 रुपये रखी गई है. इससे किसानों को काफी फायदा होगा. ख़बरें फटाफट रांची: बिरसा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी की तरफ से कीटनाशक या फिर लिक्विड खाद के छिड़काव के लिए खासतौर पर एक बैग की तरह मशीन बनाई गई है, जिसको आप पीछे बैग की तरह पहन लीजिए और इसमें एक बार में आप 25 लीटर कीटनाशक ले सकते हैं. इसकी सबसे खास बात यह है कि इसमें जो पाइप है, उससे आप 20-25 फीट दूर तक कीटनाशक या लिक्विड खाद का छिड़काव कर पाएंगे. आइये जानते हैं इसके बारे में. इस मशीन के बारे में टेक्नीशियन रौनक बताते हैं कि ये खास तौर पर वैसे लोगों के लिए तैयार की गई है, जो कि 2-3 एकड़ में खेती करते हैं और कीटनाशक या लिक्विड घाट का छिड़काव करना उनके लिए एक बहुत बड़ी चुनौती हो जाती है. कई बार वह किसी मजदूर को रखकर यह काम करवाते हैं, लेकिन इसके जरिए 1 घंटे में ही सारा काम कर लेंगे. गद्दादार है कंफर्टेबल बैग रौनक बताते हैं कि यह काफी कंफर्टेबल बैग बनाया गया है, जो काफी मोटा और गद्दादार है. मतलब आपके कंधे पर यह बिल्कुल भी भारीपन महसूस नहीं होने देगा और इसे आप पहनकर कमर में बांध लीजिए, इधर-उधर बिल्कुल नहीं गिरने वाला है. हाथ में इसका पाइप लीजिए और छिड़काव कीजिए. एक बार में 25 लीटर आप ले सकते हैं, लेकिन आपको यह ज्यादा भारी लग रहा है तब 10 लीटर भी लेकर 1 एकड़ जमीन में आराम से छिड़काव कर सकते हैं. एक और खास बात यह है कि इसमें मोटर लगा हुआ है. मतलब की प्रेशर देने के लिए पाइप के जरिए इसमें नीचे एक छोटा सा मोटर लगा हुआ है, जिससे एक जगह खड़े-खड़े 20 से 25 फीट तक पानी आराम से चला जाएगा. इसके लिए आपको अधिक मेहनत करने की जरूरत नहीं पड़ेगी. यह मोटर बैटरी से चलती है. जो लंबे समय तक चलेगी. इससे अधिकतर किसानों को एक से दो घंटे का ही काम होता है. जानें कितनी है कीमत वहीं, अगर इसकी कीमत की बात करें तो इस मशीन की कीमत ₹15000 है. आप चाहे तो एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी आकर इस मशीन के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं. यहां पर आपको डेमो भी दिखाया जाएगा और इसके अलावा भी और भी कई सारी मशीन हैं, जिसको आप यहां पर आकर एक्सप्लोरर कर पाएंगे. इसके लिए आपको कृषि यंत्र विभाग में आना पड़ेगा. About the Author Brijendra Pratap Singh बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में (2021) लगभग 5 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटें…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Ranchi,Jharkhand Source link

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एआईजीडब्ल्यूयू ने झारखंड में गिग वर्कर्स कानून लागू न होने पर जताई...

ऑल इंडिया गिग वर्कर्स यूनियन (एआईजीडब्ल्यूयू), झारखंड राज्य कमेटी ने झारखंड गिग वर्कर्स कल्याण बोर्ड की बैठक में अधिनियम की नियमावली बनाने के बजाय संशोधन पर चर्चा करने पर गहरी चिंता जताई है। यूनियन का कहना है कि ‘झारखंड प्लेटफॉर्म आधारित गिग वर्कर्स (पंजीकरण एवं कल्याण) अधिनियम’ पारित हुए लंबा समय बीत चुका है, लेकिन सरकार ने अब तक इसकी नियमावली तैयार नहीं की है। नियमावली के अभाव में इस कानून के प्रावधान जमीन पर लागू नहीं हो पा रहे हैं, जिससे गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिक अपने कानूनी अधिकारों से लगातार वंचित हैं। सरकार की प्राथमिकता सबसे पहले नियमावली बनाकर इस अधिनियम को प्रभावी ढंग से लागू करने की होनी चाहिए। एआईजीडब्ल्यूयू ने साफ किया कि यदि केंद्र सरकार के मजदूर विरोधी श्रम संहिताओं के कारण कुछ कानूनी तकनीकी बदलाव जरूरी हैं, तो उन पर विचार किया जा सकता है। लेकिन संशोधन की आड़ में झारखंड अधिनियम के श्रमिक हितैषी प्रावधानों जैसे न्यूनतम कमाई सुनिश्चित करना और शिकायत निवारण तंत्र को कमजोर या समाप्त करने का कोई भी प्रयास बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। एक तरफ श्रमिकों के कल्याण के लिए बने अधिनियम को लागू करने के बजाय उसमें बदलाव की बातें हो रही हैं, वहीं दूसरी तरफ झारखंड में लेबर कोड्स के नियम तय करने के लिए आज तक ट्रेड यूनियनों से कोई सार्थक संवाद नहीं किया गया है। Source link

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डीएसपीएमयू : सीयूईटी स्कोर अपडेट करने का छात्रों को मिला मौका, अब...

डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय ने स्नातक सत्र 2026-30 में नामांकन के लिए आवेदन करने वाले विद्यार्थियों को चांसलर पोर्टल पर अपना सीयूईटी स्कोर अपडेट करने का अवसर दिया है। विश्वविद्यालय ने इसके लिए अधिसूचना जारी कर दी है। आवेदन और स्कोर अपडेट करने की अंतिम तिथि एक जुलाई शाम 5 बजे निर्धारित है। पीआरओ डॉ राजेश कुमार सिंह ने बताया कि 6 जुलाई को मेधा सूची जारी की जाएगी, जबकि 31 जुलाई तक नामांकन प्रक्रिया पूरी होगी। वहीं 3 अगस्त से नए सत्र की कक्षाएं शुरू होंगी। रांची| मुहर्रम के ताजिया जुलूस को देखते हुए रांची जिले के सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी विद्यालयों में 27 जून को अवकाश घोषित किया गया है। जिला शिक्षा पदाधिकारी के संयुक्त आदेश के तहत पठन-पाठन पूरी तरह स्थगित रहेगा। हालांकि, जिन विद्यालयों की परीक्षाएं पहले से निर्धारित हैं, वे तय कार्यक्रम के अनुसार आयोजित की जाएंगी। प्रशासन ने सभी विद्यालय प्रबंधन को आदेश का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। रांची| उपायुक्त रांची के निर्देश पर जिले के सभी सरकारी, सहायता प्राप्त, उच्च एवं निजी विद्यालय 27 जून को बंद रहेंगे। इसके मद्देनजर जिला शिक्षा अधीक्षक (डीएसई) ने 27 जून को प्रस्तावित परियोजना टीम की मासिक मूल्यांकन परीक्षा स्थगित कर दी है। अब यह परीक्षा जिले के सभी प्रारंभिक एवं मध्य विद्यालयों में 1 जुलाई 2026 को आयोजित होगी। डीएसई ने सभी संबंधित विद्यालयों को संशोधित तिथि के अनुसार परीक्षा आयोजित कराने का निर्देश जारी किया है। Source link

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राजा भोज के नाम पर बालाघाट में बवाल! क्या है 11वीं शताब्दी...

मध्य प्रदेश के बालाघाट में 13 जून को बालाघाट-गर्रा रेलवे ओवर ब्रिज का उद्घाटन हुआ. इस ब्रिज में कई ऐसी तकनीकी खामियां थी लेकिन विवाद हुआ नामकरण को लेकर. दरअसल, इस ब्रिज के लोकार्पण के ठीक एक दिन पहले नामकरण की तख्ती लगाई गई. नाम रखा गया परमार वंश के शासक राजा भोज के नाम पर है. दरअसल, बालाघाट में एक जाति के लोग राजा भोज को अपना आराध्य मानते हैं. कई लोग ये भी दावा करते हैं कि वह राजा भोज के वंशज है. अब इसी बात पर बहस शुरू हुई कि अगर जनता के टैक्स के पैसों से इस रेलवे ओवरब्रिज का नाम एक जाति के आराध्य के नाम पर ही क्यों रखा गया. यह विवाद इतना बढ़ गया है कि शांति का टापू माने जाने वाले बालाघाट का सामाजिक सौहार्द दांव पर है. नामकरण के साथ ही शुरू हुआ विवादबालाघाट के गर्रा रेलवे ओवर ब्रिज के लोकार्पण से ठीक एक दिन पहले नगरपालिका ने ब्रिज का नाम परमार वंश से ताल्लुक रखने वाले शासक राजा भोज के नाम पर रखा गया. नगरपालिका अध्यक्ष भारती ठाकुर ने एक वीडियो जारी कर कहा था कि गौरी भाऊ (पूर्व मंत्री गौरीशंकर बिसेन) की अनुशंसा पर रखा गया. ऐसे में वही से विवाद शुरू हुआ. सोशल मीडिया पर शुरू हुई बहस चौक-चौराहों तक पहुंची. ब्रिज के लोकार्पण की शाम को पूर्व सांसद कंकर मुंजारे ब्रिज का निरीक्षण करने पहुंचे. यहां पर उन्होंने ब्रिज की गुणवत्ता पर सवाल उठाए. उन्होंने मीडिया के एक सवाल पर कहा बालाघाट के इस रेलवे ओवरब्रिज का नाम स्वतंत्रता सेनानियों के नाम पर रखा जाना चाहिए था. राजा भोज कौन है उन्हें बालाघाट में कौन जानता है. उनका बालाघाट से कोई ताल्लुक नहीं है. ऐसे में राजा भोज नाम रखना सिर्फ एक वर्ग को खुश करने की राजनीति है. इसी के बाद से नामकरण विवाद ने तूल पकड़ लिया. सोशल मीडिया पर ही राजा भोज के उपासकों ने आपत्ति दर्ज करवाई. पूर्व सांसद के घर का घेराव तक पहुंचा विरोधब्रिज के नामकरण का विरोध अब राजनीतिक बयानबाजी तक पहुंचा. एक विशेष जाति के जिलाध्यक्ष विशाल बिसेन ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और एफआईआर की मांग को लेकर कलेक्टर और एसपी को ज्ञापन देने की भी बात कहीं गई. लेकिन जब 18 जून को इसी के विरोध में कार्यक्रम रखा गया. फिर उग्र भाषण और माफी की मांग को लेकर एक रैली निकली, जहां पर मध्य प्रदेश के बालाघाट ही नहीं बल्कि महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के भी लोग विरोध करने पहुंचे. एक रैली निकली जो शहर के अंबेडकर चौक से होते हुए पूर्व सांसद कंकर मुंजारे के घर तक पहुंची. यहां पर कंकर मुंजारे के खिलाफ सिर्फ नारे ही नहीं बल्कि अपशब्द भी कहें गए. नीम का पत्ता कड़वा है, कंकर मुंजारे *&#* है के नारे भी लगे. यहां पर घंटे भर से ज्यादा समय तक प्रदर्शन चलता रहा. आंदोलनकारियों ने पूर्व सांसद को घर से बाहर निकालने के लिए ललकार भी लगाई और कंकर बाहर भी आए लेकिन उन्होंने मांग के मुताबिक माफी नहीं मानी. इस बीच पुलिस ने बीच बचाव किया और कंकर को समझाकर घर में भेज दिया ताकि कोई अनहोनी न हो. इसके बाद कंकर मुंजारे का पुतला दहन भी किया गया. माफी की मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलनकारी एसपी कार्यालय पहुंचे, जहां पर एसपी आदित्य मिश्रा से मुलाकात कर एफआईआर दर्ज करवाई गई. आखिर में कंकर मुंजारे के खिलाफ बीएनएस की धारा 299 के तहत मामला पंजीबद्ध हुआ. इस पूरे प्रकरण में कंकर मुंजारे नें पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए. उनका कहना था कि प्रदर्शन करना सभी का मौलिक अधिकार है लेकिन मेरे घर के आगे प्रदर्शन करना गलत था. वहीं, इस मामले में सीएसपी मयंक तिवारी ने आंदोलनकारियों के रूट और कार्यक्रम के बारे पूछा तो उन्होंने कहा इस प्रदर्शन की अनुमति एसडीएम ने दी. इसलिए उन्हें रूट की जानकारी नहीं थी. कंकर के समर्थकों ने भी किया थाना घेरावइसके ठीक अगले दिन कंकर मुंजारे के समर्थकों ने भी आंदोलन को गलत ठहराते हुए आरोप लगाया कि भीड़ की आड़ में पूर्व सांसद पर हमला करने की कोशिश की गई. ऐसे में उन्होंने उस भीड़ के खिलाफ भी एफआईआर करने की मांग की थी. लेकिन पुलिस ने उनका आवेदन तो लिया लेकिन एफआईआर नहीं लिखी. कंकर ने किया माफी मांगने से इनकारइस मामले में लोकल 18 ने कंकर से पूछा कि आपको अपने बयान पर अफसोस है, तो उनका कहना था कि यह बयान एक बार नहीं सौ बार दूंगा. मैंने राजा भोज का कोई अपमान नहीं किया है. बस यहीं कहा है कि उनका बालाघाट से कोई ताल्लुक नहीं है. उनका कार्यकाल सिर्फ धार, उज्जैन और भोपाल तक था. वहीं, एक समाज के जिलाध्यक्ष विशाल बिसेन का कहना है कि कौन होते हैं कंकर मुंजारे. उन्होंने हमारे आराध्य पर टिप्पणी कैसे की. भारत का संविधान हमें आजादी देता है कि हम अपने आराध्य को मान सकते हैं. राजा भोज हमारे है और हम उनको पुजते हैं. उन्हें कोई अधिकार नहीं हमारे राजा भोज पर टिप्पणी करने का. साल भर पहले ही हो चुका है नामकरणगर्रा रेलवे ओवरब्रिज का नाम राजा भोज रेलवे ओवर ब्रिज रखा गया. लेकिन यह नाम कब तय हुआ. नगर पालिका ने पहले जाहिर क्यों नहीं किया. ऐसे में नगरपालिका की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं. विशाल बिसेन ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ही खुलासा किया था कि 28 मार्च 2025 को नगर परिषद की बैठक में 25 से ज्यादा स्थानों का नामकरण किया गया है. इसकी पुष्टि विपक्ष के भी पार्षदों ने की. लेकिन सवाल उठता है कि अगर उन स्थानों के नामकरण किए गए, तो पहले नाम सार्वजनिक क्यों नहीं किए गए. इससे पहले सरेखा रेलवे ब्रिज का नाम भी सावित्रीबाई फुले के नाम पर रखा गया लेकिन आज तक बोर्ड नहीं लगा. वहीं सरेखा अंडर पास का नाम भी छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम पर रखा गया. लेकिन उसका भी बोर्ड नहीं लगाया गया है. इस मामले में लोकल 18 नपा अध्यक्ष भारती ठाकुर से बातचीत की उन्होंने कहा कि परिषद की बैठक की सारे मुद्दे सार्वजनिक हो जाते हैं. वहीं, बोर्ड नहीं लगने पर कहा कि जल्द सभी स्थानों पर बोर्ड लगाएंगे जाएंगे. क्या वाकई में राजा भोज

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कोडरमा की बाजार पर महंगाई की मार, महंगे हुए कपड़े, बर्तन, चूड़ी,...

Last Updated:June 24, 2026, 14:23 IST Koderma Market Inflation Effect On Wedding Shopping: पुरुषोत्तम मास के बाद शादी का सीजन शुरू हो गया है लेकिन महंगाई की मार ने ग्राहकों की संख्या काफी घटा दी है. एलपीजी, पेट्रोल डीजल महंगे होने से चूड़ी, कॉस्मेटिक, बर्तन, कपड़ों के दाम 20-30 फीसदी तक बढ़े हैं. लोग कम शॉपिंग कर रहे हैं और जो कर भी रहे हैं वो कम रेंज का सामान खरीद रहे हैं. ख़बरें फटाफट कोडरमा. करीब एक महीने तक चले पुरुषोत्तम मास की समाप्ति के बाद एक बार फिर विवाह समारोहों का शुभ मुहूर्त शुरू हो गया है. बाजारों में शादी-विवाह की तैयारियां तो शुरू हो गई हैं. लेकिन इस बार लोगों को महंगाई की दोहरी मार झेलनी पड़ रही है. कोडरमा के बाजार में शादी-विवाह में उपयोग होने वाले कपड़े, बर्तन, कॉस्मेटिक और अन्य जरूरी सामानों की कीमतों में 20 से 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. बढ़ती कीमतों का असर न केवल ग्राहकों के बजट पर पड़ा है, बल्कि दुकानदारों के कारोबार पर भी साफ दिखाई दे रहा है. कीमतें बढ़ने पर ब्रांडेड छोड़कर कम रेंज वाले सामान खरीद रहे लोगस्टेशन रोड स्थित कॉस्मेटिक दुकान के संचालक मदन मोहन प्रसाद ने विशेष बातचीत में बताया कि पिछले कुछ महीनों में एलपीजी की कीमतों में वृद्धि का सीधा असर चूड़ी उद्योग पर पड़ा है. चूड़ी निर्माण में बड़ी मात्रा में एलपीजी का उपयोग किया जाता है, जिसके कारण प्लेन और फैंसी चूड़ियों की कीमतें बढ़ गई हैं. उन्होंने बताया कि जो चूड़ी का डिब्बा पहले ग्राहकों को 30 रुपये में बेचा जाता था, वही अब दुकानदारों को लगभग उसी कीमत पर होलसेल में मिल रहा है. नहीं आ रहे ग्राहकफिलहाल ग्राहकों को पुरानी कीमत पर सामान उपलब्ध कराया जा रहा है. लेकिन आने वाले दिनों में कीमत बढ़ने की पूरी संभावना है. उन्होंने बताया कि केवल चूड़ियां ही नहीं, बल्कि अधिकांश कॉस्मेटिक उत्पादों की कीमतों में भी लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. इसका असर बाजार में ग्राहकों की संख्या पर दिखाई दे रहा है. पहले जहां शादी के सीजन में दुकानों पर भीड़ लगी रहती थी, वहीं अब दुकानदार ग्राहकों का इंतजार करते नजर आ रहे हैं. उन्होंने कहा कि पहले लोग ब्रांडेड और बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पाद खरीदते थे, लेकिन अब ग्राहक कम कीमत और मीडियम रेंज के सामान को प्राथमिकता दे रहे हैं. शादी-विवाह में दिए जाने वाले बर्तन सेट की कीमतों में भी हुई बढ़ोतरीवहीं बर्तन व्यवसायी मनोज कुमार ने बताया कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण परिवहन खर्च बढ़ा है, जिससे स्टील, एल्यूमिनियम, कांसा और पीतल के बर्तनों की कीमतों में 25 से 30 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है. उन्होंने बताया कि छह महीने पहले जो बर्तन पीस 800 रुपये में उपलब्ध था, उसकी कीमत अब 1200 रुपये तक पहुंच गई है. इसी तरह 2000 रुपये में मिलने वाला बर्तन अब 2500 रुपये में बिक रहा है. बढ़ गए हैं दामउन्होंने बताया कि शादी में उपहार स्वरूप दिए जाने वाले स्टील बर्तन सेट, जो पहले 4 से 5 हजार रुपये में मिल जाते थे, उनकी कीमत अब 6 से 7 हजार रुपये हो गई है. वहीं कांसा के बर्तन का एक सेट, जो पहले 12 से 13 हजार रुपये में आता था, अब 15 से 16 हजार रुपये तक पहुंच गया है. उन्होंने कहा कि लोग अब जरूरत के अनुसार सीमित खरीदारी कर रहे हैं और बाजार में खरीदारों की संख्या भी पहले की तुलना में कम हो गई है. कपड़ों की कीमतों में भी बढ़ोतरी, दुकानों पर कम पहुंच रहे हैं ग्राहककपड़ा व्यवसायी मोंटी जैन ने बताया कि ट्रांसपोर्टेशन चार्ज, फैब्रिक की कीमत और मजदूरी बढ़ने से कपड़ों की कीमतों में भी भारी वृद्धि हुई है. उन्होंने बताया कि जो लहंगा पहले 15 से 16 हजार रुपये में बिकता था, उसकी कीमत अब 25 से 28 हजार रुपये तक पहुंच गई है. महंगाई के कारण ग्राहकों की खरीदारी क्षमता प्रभावित हुई है और इसका असर कपड़ा बाजार में साफ दिखाई दे रहा है. About the Author Raina Shukla बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Kodarma,Jharkhand Source link

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दुबई से आया फोन… प्रिंस खान के नाम पर हटिया के शराब...

गैंगस्टर प्रिंस खान के नाम पर रंगदारी मांगने का सिलसिला थम नहीं रहा है। अब हटिया के चांदनी चौक स्थित शराब दुकान के मालिक उमाशंकर सिंह को वॉट्सएप कॉल, मैसेज और ऑडियो चैट भेजकर पांच करोड़ रुपए की रंगदारी मांगी है। धमकी देने वाले ने उनकी गाड़ी का नंबर, कारोबार की जगह और उनके मंदिर जाने के समय की जानकारी भी भेजी है। रंगदारी न देने पर उनकी प|ी, दोनों बेटे और भतीजे की हत्या कराने की धमकी दी गई है। उमाशंकर ​ने इस संबंध में जगन्नाथपुर थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। यह धमकी दुबई के मोबाइल नंबर (+971545920432) से दी गई है। कॉल करने वाले ने खुद को प्रिंस खान बताया है। हटिया डीएसपी नीरज कुमार ने कहा कि मामले की जांच चल रही है। तकनीकी टीम की मदद ली जा रही है। गौरतलब है कि इससे पहले 8 जून को पॉल ज्वेलर्स के संचालक सुमन पॉल से भी पांच करोड़ रुपए की रंगदारी मांगी गई थी। -पेज 18 भी पढ़ें धमकी का तरीका व मोबाइल नंबर एक रंगदारी के लिए व्यवसायियों को धमकी देने का तरीका एक है। रात करीब 12 बजे इन्हें वॉट्सएप पर धमकी भरे मैसेज मिलते हैं। फिर ऑडियो संदेश भेजा जाता है। इसके बाद वॉट्सएप पर कॉल कर धमकी दी जाती है। ​फोन करने वाला खुद को प्रिंस खान बताता है। हाल में जितने व्यवसायियों को धमकी मिली है, सभी इसी मोबाइल नंबर (+971545920432) से दिए गए हैं। Source link

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कागजी झंझट से मिलेगी मुक्ति:झारखंड की 1297 पैक्स होंगी डिजिटल, अब कंप्यूटर...

झारखंड सरकार ने राज्य की 1297 पैक्स (प्राथमिक कृषि साख समिति) को पूरी तरह डिजिटल बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। सहकारिता विभाग इसके लिए जरूरी कंप्यूटर और हार्डवेयर उपकरण खरीदने की प्रक्रिया में जुट गया है। इसके लिए टेंडर जारी किए जा रहे हैं। इस बड़े कदम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और किसानों को मिलने वाली सुविधाओं को पारदर्शी बनाना है। वर्तमान में पैक्स का अधिकांश काम कागजों और रजिस्टरों पर होता है, जिससे लोन, खाद-बीज वितरण और वित्तीय लेनदेन में काफी समय लगता है। पूरी तरह कंप्यूटराइज्ड होने के बाद कामकाज तेज होगा और किसानों को बेहद कम समय में बेहतर सेवाएं मिल सकेंगी। हर पैक्स में लगेंगे आधुनिक हार्डवेयर उपकरण योजना के तहत सभी 1297 पैक्स में आवश्यक आईटी हार्डवेयर उपलब्ध कराए जाएंगे। इनमें डेस्कटॉप कंप्यूटर, मल्टी फंक्शन प्रिंटर, यूपीएस, बायोमेट्रिक स्कैनर, वीपीएन आधारित सुरक्षित नेटवर्किंग उपकरण और अन्य जरूरी डिजिटल संसाधन शामिल होंगे। इन उपकरणों के साथ पांच वर्षों तक वारंटी, रखरखाव और तकनीकी सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि सिस्टम लगातार सुचारू रूप से चलता रहे। नई व्यवस्था से पैक्स के वित्तीय लेनदेन पूरी तरह डिजिटल होंगे। इससे नकदी प्रबंधन, लेखा-जोखा और स्टॉक का रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध रहेगा। अधिकारियों को भी विभिन्न पैक्स की गतिविधियों की निगरानी आसान होगी। डिजिटल रिकॉर्ड होने से अनियमितताओं, फर्जीवाड़े और रिकॉर्ड में हेराफेरी की संभावनाएं काफी कम हो जाएंगी। किसानों को होंगे फायदे….ऋण आवेदन, भुगतान समेत अन्य सेवाओं का रिकॉर्ड डिजिटल होगा कंप्यूटराइजेशन लागू होने के बाद किसानों को सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि उन्हें बार-बार कागजी प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा। सदस्यता, ऋण आवेदन, खाद-बीज वितरण, भुगतान और अन्य सेवाओं का रिकॉर्ड डिजिटल रूप में उपलब्ध रहेगा। इससे गलतियों की संभावना कम होगी और जानकारी तुरंत उपलब्ध हो सकेगी। डिजिटल रिकॉर्ड होने से किसानों के ऋण और लेनदेन का पूरा इतिहास सुरक्षित रहेगा। भविष्य में सरकारी योजनाओं का लाभ देने, सब्सिडी वितरण और वित्तीय सहायता जैसी प्रक्रियाओं में भी आसानी होगी। साथ ही किसी भी स्तर पर रिकॉर्ड का सत्यापन तेजी से किया जा सकेगा। पैक्स क्या है भारत के ग्रामीण इलाकों में पैक्स (प्राइमरी एग्रीकल्चर क्रेडिट सोसाइटीज) ग्राउंड लेवल पर काम करने वाली सहकारी कर्ज देने वाली समितियां हैं। यह तीन-स्तरीय सहकारी बैंकिंग प्रणाली की सबसे निचली और महत्वपूर्ण कड़ी है। Source link

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दिल, फेफड़े, किडनी… जिंक फॉस्फाइड कैसे ले सकता है आपकी जान? जिसके...

होमताजा खबरदेश जिंक फॉस्फाइड कैसे ले सकता है आपकी जान, क्यों माना जाता है ‘साइलेंट किलर’? Last Updated:June 27, 2026, 21:51 IST जिंक फॉस्फाइड एक अत्यंत तीव्र और डार्क ग्रे रंग का अकार्बनिक रासायनिक यौगिक है. इसका मुख्य और व्यावसायिक इस्तेमाल खेतों, गोदामों और घरों में चूहों व अन्य हानिकारक कृंतकों को मारने के लिए ‘रोडेंटिसाइड’ के रूप में किया जाता है. इसकी अत्यधिक मारक क्षमता और इंसानों के लिए जानलेवा प्रकृति के कारण इसके खुले रखरखाव और बिक्री पर कड़े विधिक और प्रशासनिक नियम लागू होते हैं. ख़बरें फटाफट मुहर्रम जुलूस में 14000 से ज्यादा जिंक फॉस्फाइड के कैप्सूल बांटे गए. मुंबई के भायखला में मुहर्रम के आशूरा जुलूस के दौरान दर्द निवारक के नाम पर खतरनाक जहर (जिंक फॉस्फाइड) बांटने का सनसनीखेज मामला सामने आया है. बताया गया कि एक शख्स ने 14000 से ज्यादा गोलियां खरीदी थीं और वह लोगों को दर्द से छुटकारा दिलाने के लिए यह कैप्सूल देता था. जानिए आखिर यह रसायन क्या है और शरीर के लिए कितना जानलेवा साबित हो सकता है. प्रत्येक कैप्सूल में था एक ग्राम जिंक फॉस्फाइडबता दें कि जिंक फॉस्फाइड एक अत्यधिक जहरीला रासायनिक पदार्थ है. इसका इस्तेमाल आमतौर पर घरों और खेतों में चूहों को मारने के लिए किया जाता है. इसके शरीर में जाने से गंभीर पॉइजनिंग हो सकती है और जान जाने का खतरा रहता है. पेट में जाने के बाद यह रसायन पेट के एसिड के साथ प्रतिक्रिया करके फॉस्फीन गैस बनाता है. यह गैस शरीर के लिए अत्यंत घातक होती है, जो हृदय, फेफड़े, लीवर, किडनी और मस्तिष्क को सीधे प्रभावित करती है. शरीर पर होने वाले प्रभावइसके असर से शरीर की कोशिकाओं द्वारा ऑक्सीजन का उपयोग करने की प्रक्रिया बाधित हो जाती है.दिल की धड़कन अनियमित हो सकती है.ब्लड प्रेशर तेजी से कम हो सकता है.सांस लेने में अत्यधिक तकलीफ हो सकती है.शरीर के कई अंगों के काम बंद करने यानी मल्टी-ऑर्गन फेल्योर का खतरा रहता है. जिंक फॉस्फाइड के सेवन के बाद दिखने वाले लक्षणमतली (जी मिचलाना) और लगातार उल्टी होना.पेट में असहनीय तेज दर्द.मुंह या उल्टी से लहसुन जैसी तीखी गंध आना.चक्कर आना और भारी कमजोरी महसूस होना.अत्यधिक पसीना आना. जिंक फॉस्फाइड पॉइजनिंग होने पर डॉक्टर क्या जांचते हैं?मरीज का ब्लड प्रेशर और हृदय की स्थिति.ईसीजी में होने वाले बदलाव.खून में ऑक्सीजन का स्तर.लीवर और किडनी फंक्शन टेस्ट.फेफड़ों और सांस लेने की क्षमता. जिंक फॉस्फाइड का सेवन करने पर इलाजइस जहर का कोई विशिष्ट एंटीडोट उपलब्ध नहीं है. जिंक फॉस्फाइड का सेवन करने वाले व्यक्ति को बिना समय गंवाए तुरंत अस्पताल में भर्ती करना आवश्यक होता है. मरीज को ऑक्सीजन और वेंटलेटर सपोर्ट की आवश्यकता पड़ सकती है. हृदय और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने के लिए लक्षणात्मक उपचार किया जाता है. शरीर में जहर को और अधिक फैलने से रोकने के लिए प्राथमिक चिकित्सा दी जाती है. जिंक फॉस्फाइड विषाक्तता को एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी माना जाता है, क्योंकि इसकी थोड़ी सी मात्रा का सेवन भी जानलेवा साबित हो सकता है. About the Author रवि सिंह Special Correspondent रवि सिंह News 18 India में कार्यरत हैं. पिछले 20 वर्षों से इलेक्ट्रानिक मीडिया में सक्रिय हैं. उनकी मुख्य रूप से रेलवे,स्वास्थ्य,शिक्षा मंत्रालय,VHP और राजनीतिक गतिविधियों पर पकड़ है. अयोध्या में मंदिर की कवरेज…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Source link

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45 साल की सेवा की सेवा के लिए सम्मान, देवघर के इस...

Last Updated:June 24, 2026, 14:28 IST देवघर जिले के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. सिकंदर सिंह को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) की ओर से दिल्ली में बेस्ट डॉक्टर सम्मान से सम्मानित किया जाएगा. यह सम्मान उन्हें चिकित्सा क्षेत्र में 45 वर्षों की सेवा, ईमानदार इलाज और समाज के प्रति उनके योगदान के लिए दिया जा रहा है. डॉ. सिकंदर सिंह लंबे समय से मरीजों का भरोसा जीतते आ रहे हैं. चिकित्सा सेवा के साथ-साथ उनके सामाजिक कार्यों को भी काफी सराहा जाता है. देवघर: आज के दौर में जब मरीज अक्सर महंगे इलाज, अनावश्यक जांच और डॉक्टरों के पास कम समय मिलने की शिकायत करते हैं, ऐसे समय में देवघर के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सिकंदर सिंह पिछले 45 वर्षों से लोगों के बीच भरोसे का दूसरा नाम बने हुए हैं. हजारों मरीजों के लिए डॉ. सिकंदर सिंह सिर्फ एक डॉक्टर नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य की तरह हैं. यही कारण है कि कई मरीज पिछले 30 से 35 वर्षों से लगातार उन्हीं से इलाज करवा रहे हैं. मरीजों का कहना है कि डॉ. सिकंदर सिंह बीमारी के साथ-साथ मरीज की आर्थिक स्थिति और मानसिक परेशानियों को भी समझते हैं. उनका सरल स्वभाव, मरीजों को पूरा समय देना और जरूरत के अनुसार ही दवा व जांच लिखना उन्हें अन्य चिकित्सकों से अलग पहचान दिलाता है. आईएमए की ओर से होंगे सम्मानितदेवघर जिले के लिए यह गर्व और खुशी की बात है कि जिले के प्रसिद्ध जनरल फिजिशियन और हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. सिकंदर सिंह को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) द्वारा डॉक्टर्स डे के अवसर पर दिल्ली में सम्मानित किया जाएगा. यह सम्मान उन्हें चिकित्सा क्षेत्र में उनके लंबे अनुभव, मरीजों के प्रति समर्पण, ईमानदारी और समाज सेवा के लिए दिया जा रहा है. क्या कहते हैं डॉ. सिकंदर सिंहडॉ. सिकंदर सिंह ने खुशी जताते हुए Local 18 से बातचीत में कहा कि यह सम्मान केवल उनका नहीं, बल्कि उन हजारों मरीजों का भी है जिन्होंने वर्षों से उन पर विश्वास बनाए रखा है. उन्होंने कहा, ‘मैंने हमेशा चिकित्सा को सेवा का माध्यम माना है और पूरी ईमानदारी के साथ मरीजों का इलाज करने का प्रयास किया है. मरीजों का प्यार, विश्वास और आशीर्वाद ही मेरी सबसे बड़ी पूंजी है. आज जो पहचान मिली है, उसमें मेरे मरीजों और सहयोगियों का बहुत बड़ा योगदान है.’ उन्होंने आगे कहा कि डॉक्टर का सबसे बड़ा धर्म मरीज को सही सलाह और सही इलाज देना है. यदि कोई मरीज स्वस्थ होकर मुस्कुराते हुए घर लौटता है, तो वही किसी भी डॉक्टर के लिए सबसे बड़ा पुरस्कार होता है. पिछले 45 वर्षों में उन्होंने हमेशा यही प्रयास किया है कि हर मरीज को बेहतर इलाज मिले और वह संतुष्ट होकर जाए. उन्होंने कहा कि IMA द्वारा दिया जा रहा यह सम्मान उन्हें आगे भी सेवा और समर्पण के साथ काम करने की प्रेरणा देगा. बेवजह मरीजों को नहीं करते परेशानडॉ. सिकंदर सिंह के मरीज अमर कुमार बताते हैं कि उन्होंने अपने जीवन में बहुत कम ऐसे डॉक्टर देखे हैं जो मरीजों की आर्थिक स्थिति को भी समझते हों. उनका कहना है कि डॉ. सिकंदर सिंह कभी भी मरीजों को बेवजह जांच या इलाज के नाम पर परेशान नहीं करते और जितनी आवश्यकता होती है, उतनी ही दवा और जांच की सलाह देते हैं. मरीजों के अनुसार, उनके क्लिनिक में पहुंचने के बाद एक अलग तरह का भरोसा और संतोष महसूस होता है. लोगों का मानना है कि उनकी ईमानदारी ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है. यही वजह है कि वर्षों से हजारों मरीज उनसे जुड़े हुए हैं. उनके इलाज से लाभ पाने वाले लोगों की संख्या इतनी अधिक है कि कई परिवारों की तीन पीढ़ियां तक उनसे इलाज करवा चुकी हैं. व्यवहार ही है उनकी सबसे बड़ी पहचानएक अन्य मरीज अजय कुमार राय बताते हैं कि डॉ. सिकंदर सिंह का व्यवहार ही उनकी सबसे बड़ी पहचान है. उनका कहना है कि जब कोई मरीज उनके पास पहुंचता है, तो वह उसकी बात को ध्यान से सुनते हैं और बीमारी को समझने का पूरा प्रयास करते हैं. मरीजों को पर्याप्त समय देना और उन्हें सरल भाषा में बीमारी के बारे में समझाना उनकी विशेषता है. अजय कुमार राय के अनुसार, कई बार मरीज उनकी बातों से ही मानसिक रूप से मजबूत महसूस करने लगता है और उसकी आधी परेशानी वहीं दूर हो जाती है. उनका मानना है कि मरीजों के प्रति ऐसा व्यवहार हर डॉक्टर को सीखना चाहिए, क्योंकि इलाज केवल दवा से नहीं बल्कि अच्छे व्यवहार और भरोसे से भी होता है. टीबी उन्मूलन कार्यक्रम में भी रहा अहम योगदानचिकित्सा सेवा के साथ-साथ डॉ. सिकंदर सिंह ने सामाजिक कार्यों में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है. टीबी उन्मूलन कार्यक्रम में उनकी भूमिका सराहनीय रही है. इसके अलावा वह समय-समय पर गांवों में स्वास्थ्य शिविर लगाकर जरूरतमंद लोगों का मुफ्त इलाज भी करते हैं. आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों की मदद करना उनकी पुरानी आदत रही है. कई ऐसे लोग हैं जिनका उन्होंने बिना किसी शुल्क के इलाज किया है. समाज के प्रति उनकी इसी सेवा भावना ने उन्हें लोगों के दिलों में खास जगह दिलाई है. अब IMA द्वारा मिलने वाला यह सम्मान उनके वर्षों की मेहनत, समर्पण और सेवा कार्यों का सम्मान माना जा रहा है. About the Author Amita kishor न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Deoghar,Jharkhand Source link

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कैबिनेट स्वीकृति के बाद शुरू होगा काम:राज्य के 9 शहरों में खुलेंगे...

झारखंड के शहरों में लगातार बढ़ रही आवारा कुत्तों की संख्या और डॉग बाइट की घटनाओं पर नियंत्रण के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। रांची समेत 9 शहरों में एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) सेंटर और शेल्टर होम बनाए जाएंगे। इनमें जमशेदपुर में दो और रांची समेत अन्य नौ शहरों में एक-एक सेंटर स्थापित होंगे। इस पूरी परियोजना पर 21.06 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। नगर विकास विभाग के प्रस्ताव को राज्य योजना प्राधिकृत समिति ने मंजूरी दे दी है। अब इसे कैबिनेट की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। सरकार का कहना है कि इन केंद्रों में आवारा कुत्तों को मानवीय तरीके से पकड़ने, उनकी नसबंदी, एंटी-रेबीज टीकाकरण, ऑपरेशन के बाद देखभाल और नियमानुसार पुनर्स्थापन की व्यवस्था होगी। इससे रेबीज संक्रमण पर नियंत्रण के साथ शहरों में लोगों की सुरक्षा भी बेहतर होगी। -शेष पेज 11 पर वो सबकुछ जो आपके लिए जानना जरूरी है जन-सुरक्षा और रेबीज नियंत्रण को मिलेगी मजबूती… विशेषज्ञों का कहना है कि शहरी क्षेत्रों में बढ़ रही आवारा कुत्तों की संख्या बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों के लिए गंभीर चुनौती बन गई है। अधिकांश नगर निकायों में नसबंदी, टीकाकरण और उपचार की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से एनिमल बर्थ कंट्रोल कार्यक्रम प्रभावी ढंग से संचालित नहीं हो पा रहा है। इन केंद्रों के शुरू होने के बाद आवारा कुत्तों के वैज्ञानिक और मानवीय प्रबंधन की व्यवस्था विकसित होगी। इससे रेबीज नियंत्रण, पशु कल्याण और लोगों की सुरक्षा तीनों को मजबूती मिलेगी। Source link

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