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यही है बागवानी का सही समय! बारिश होते ही किसान लगाएं फलदार...

Last Updated:June 27, 2026, 19:00 IST उद्यानिकी वैज्ञानिक डॉ. एस.के. त्यागी ने बताया कि जिले की मिट्टी और मौसम कई तरह के फलों की खेती के लिए अनुकूल है. किसान नींबू, केला, पपीता, अमरूद, संतरा, आम, सीताफल और चीकू जैसे फलों के पौधे लगा सकते हैं. सही तकनीक और अच्छी देखभाल के साथ इन फसलों से बेहतर उत्पादन और अच्छा मुनाफा मिल सकता है. जिले में मानसून की दस्तक हो चुकी है और जिन खेतों में पर्याप्त नमी आ गई है. खरगोन में बारिश का इंतजार हर किसी को था, लेकिन सबसे ज्यादा उन किसानों को जो इस खरीफ सीजन में पारंपरिक फसलों की जगह फलों का बगीचा लगाने की तैयारी कर रहे थे. अब मानसून की शुरुआत के साथ ही ऐसे किसानों के लिए फलदार पौधे लगाने का ये परफेक्ट टाइम आए चुका है. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि सही समय पर पौधे लगाने और शुरुआत से ही कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखने पर किसान कई वर्षों तक अच्छी आमदनी प्राप्त कर सकते हैं. अगर आप भी इस बार कपास और सोयाबीन जैसी पारंपरिक फसलों की जगह कुछ नया करना चाहते हैं, तो फलों का बगीचा लगाना बेहतर विकल्प हो सकता है. एक बार पौधे लगाने के बाद कई वर्षों तक उत्पादन मिलता है और हर साल नियमित आमदनी भी होती रहती है. यही वजह है कि जिले के कई किसान अब बागवानी की ओर रुख कर रहे हैं. जिले की मिट्टी कई फलों के लिए अनुकूलउद्यानिकी वैज्ञानिक डॉ. एस.के. त्यागी ने बताया कि जिले की मिट्टी और मौसम कई तरह के फलों की खेती के लिए अनुकूल है. किसान नींबू, केला, पपीता, अमरूद, संतरा, आम, सीताफल और चीकू जैसे फलों के पौधे लगा सकते हैं. सही तकनीक और अच्छी देखभाल के साथ इन फसलों से बेहतर उत्पादन और अच्छा मुनाफा मिल सकता है. उन्होंने बताया कि जिले में मानसून की दस्तक हो चुकी है और जिन खेतों में पर्याप्त नमी आ गई है. और किसानों की पूरी तैयारी है, वे बिना देर किए पौधों की रोपाई शुरू कर सकते हैं. बारिश पर निर्भर किसान पहले करें ये कामजिन किसानों के खेतों में अभी पर्याप्त नहीं हुई, या बारिश कम हुई है. और वह पूरी तरह बारिश पर ही निर्भर हैं. उन्हें अभी थोड़ा और इंतजार करना चाहिए. जबकि कई किसानों के खेत देरी से खाली हुए उन्हें गर्मी में किए गए गड्ढों में रोपाई से पहले ऊपरी मिट्टी में करीब 25 किलो सड़ी हुई गोबर की खाद, एक किलो नीम की खली, 25 ग्राम ट्राइकोडर्मा, 25 ग्राम पीएचबी और 25 ग्राम मेटाराइज़ियम मिलाना चाहिए. इसके बाद इस मिश्रण से गड्ढे को जमीन की सतह से लगभग 6 इंच ऊपर तक भरना चाहिए. तीन से चार अच्छी बारिश के बाद लगाएं पौधेकिसानों के इस बार का ध्यान रखना चाहिए कि, जब तीन से चार अच्छी बारिश हो जाए या फिर 15 जुलाई के बाद पौधों की रोपाई करना बेहतर रहेगा. इससे पौधों को पर्याप्त नमी मिलती है और उनके सूखने की संभावना काफी कम हो जाती है. रोपाई के दौरान सबसे जरूरी बात यह है कि ग्राफ्टिंग वाला हिस्सा जमीन से करीब 6 इंच ऊपर रहे. यदि यह हिस्सा मिट्टी के अंदर चला गया तो पौधे में बीमारी आने का खतरा बढ़ सकता है और उसकी बढ़वार भी प्रभावित हो सकती है. रोपाई के बाद तुरंत करें सिंचाईविशेषज्ञों का कहना है कि पौधा लगाते समय उसकी जड़ को किसी भी तरह का नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए. पॉलीथिन में जितनी मिट्टी हो, उतनी ही मिट्टी के साथ पौधे को गड्ढे में लगाना चाहिए. पौधा लगाने के तुरंत बाद हल्की सिंचाई करना जरूरी है. साथ ही प्रत्येक पौधे के पास करीब तीन फीट ऊंचा मजबूत लकड़ी का डंडा लगाना चाहिए. इससे तेज हवा और बारिश के दौरान पौधा गिरने से बचता है और सीधा बढ़ता है. साथ ही  पानी की बचत और बेहतर उत्पादन के लिए ड्रिप सिंचाई सबसे अच्छा विकल्प माना जाता है. इससे पौधों की जड़ों तक जरूरत के अनुसार पानी पहुंचता है, पानी की बर्बादी कम होती है. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Khargone,Madhya Pradesh Source link

झारखंड

एक रुपये में पौधा, सालभर मांग… मानसून में करें हरी मिर्च की...

होमफोटोकृषि एक रुपये में पौधा, सालभर मांग… मानसून में हरी मिर्च से होगा लाखों का मुनाफा Last Updated:June 27, 2026, 16:57 IST Best Crop For Monsoon Season: मानसून की दस्तक होने वाली है. खेत-खलिहान में किसान खरीफ फसलों की तैयारी में जुट गए हैं. बारिश का मौसम कई फसलों के लिए वरदान माना जाता है, लेकिन सब्जियों की खेती करने वाले किसानों के लिए यही बारिश कई बार परेशानी का कारण बन जाती है. अधिक बारिश होने पर खेतों में जलजमाव हो जाता है, जिससे टमाटर, बैंगन, फूलगोभी समेत कई सब्जियों की फसल प्रभावित हो जाती है. ऐसे में किसान ऐसी फसल की तलाश में रहते हैं, जिसमें लागत कम लगे और मुनाफा अच्छा मिले. तो आइए देवघर के कृषि एक्सपर्ट से जानते हैं कि मानसून में किस चीज की खेती करें किसान, जिससे बेहद कम लागत में अच्छा-खासा मुनाफा हो? देवघर के कृषि विशेषज्ञ अंबिका कुशवाहा ने लोकल 18 के संवाददाता से बातचीत करते हुए कहा कि मानसून के मौसम में हरी मिर्च की खेती किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित हो सकती है. उन्होंने बताया कि इस समय किसान मिर्च की नर्सरी तैयार कर सकते हैं या फिर सरकारी संस्थानों से बेहद कम कीमत पर पौधे खरीद सकते हैं. कई जगहों पर किसानों को मात्र एक रुपये प्रति पौधे की दर से मिर्च के पौधे उपलब्ध कराए जाते हैं. ऐसे में किसान बहुत कम लागत में अपनी खेती की शुरुआत कर सकते हैं. मानसून की शुरुआती बारिश मिर्च के पौधों के विकास के लिए काफी लाभदायक होती है. हल्की और नियमित बारिश मिलने पर पौधों की बढ़वार तेजी से होती है और खेत में हरियाली छा जाती है. अंबिका जी बताते हैं कि अगर कोई किसान एक एकड़ खेत में हरी मिर्च की खेती करना चाहता है, तो लगभग पांच से छह हजार पौधों की जरूरत पड़ती है. अच्छी किस्म के पौधे, सही दूरी पर रोपाई और समय-समय पर देखरेख करने से उत्पादन काफी बेहतर होता है. मिर्च की खेती में सबसे बड़ी बात यह है कि इसकी मांग पूरे साल बाजार में बनी रहती है. हरी मिर्च रोजाना घरों से लेकर होटल और ढाबों तक इस्तेमाल होती है, इसलिए किसानों को इसकी बिक्री को लेकर ज्यादा चिंता नहीं करनी पड़ती. Add News18 as Preferred Source on Google उन्होंने बताया कि यदि किसान जैविक खाद, गोबर खाद और संतुलित पोषक तत्वों का उपयोग करें, तो उत्पादन और गुणवत्ता दोनों बेहतर होती है. समय पर निराई-गुड़ाई और रोग-कीट नियंत्रण करने से फसल स्वस्थ रहती है. सही तरीके से खेती करने पर एक एकड़ में किसानों को अच्छी आमदनी हो सकती है. कई किसान मिर्च की खेती से सालाना लाखों रुपये तक का मुनाफा कमा रहे हैं. मिर्च की खेती का एक और बड़ा फायदा यह है कि अगर किसी कारणवश किसान हरी मिर्च को तुरंत बाजार में नहीं बेच पाते हैं, तो उसे सुखाकर भी बेचा जा सकता है. सूखी मिर्च की बाजार में अच्छी मांग रहती है और उसका दाम भी बेहतर मिल जाता है. यानी किसान के पास फसल बेचने के एक से अधिक विकल्प मौजूद रहते हैं. यही वजह है कि मिर्च की खेती को कम जोखिम वाली खेती भी माना जाता है. विशेषज्ञों का कहना है कि किसान उन्नत किस्मों का चयन करके उत्पादन और कमाई दोनों बढ़ा सकते हैं. वर्तमान समय में नांगवो की अजीता, वीएनआर, एडवांटा समेत कई उन्नत किस्में उपलब्ध हैं, जिनकी पैदावार अच्छी होती है और बाजार में मांग भी ज्यादा रहती है. ऐसे में मानसून के इस सीजन में अगर किसान थोड़ी वैज्ञानिक जानकारी और सही तकनीक के साथ हरी मिर्च की खेती करें, तो कम लागत में बेहतर उत्पादन लेकर अच्छी कमाई कर सकते हैं. बारिश के मौसम में जहां कई सब्जियां किसानों की चिंता बढ़ाती हैं, वहीं हरी मिर्च की खेती उनके लिए कमाई का मजबूत जरिया बन सकती है. Source link

झारखंड

गढ़वा कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में हंगामा:छात्राओं की तबीयत बिगड़ने पर अभिभावक...

गढ़वा जिले के खरौंधी स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में छात्राओं के बीमार पड़ने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। शुक्रवार को जहां 100 से ज्यादा छात्राएं बीमार पड़ गईं थी, वहीं शनिवार को भी आठ और छात्राओं की तबीयत बिगड़ गई। सुबह विद्यालय की आठ छात्राओं को अचानक उल्टी, सिर चकराने और बेहोशी की शिकायत हुई। स्थिति बिगड़ने पर विद्यालय प्रशासन ने सभी छात्राओं को तत्काल भवनाथपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया, जहां चिकित्सकों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा है। अभिभावकों ने किया जमकर हंगामा इधर, बीमार छात्राओं की लगातार बढ़ रही संख्या से आक्रोशित अभिभावकों विशेष कर उनकी माताएं शनिवार दोपहर स्कूल पहुंचीं और ग्रिल तोड़कर अंदर दाखिल हो गए। स्कूल में जमकर हंगामा किया। वहीं, गढ़वा डीसी ने स्कूल के कई कर्मियों को कार्यमुक्त कर दिया है। पुलिस को करना पड़ा तैनात हंगामे से स्थिति तनावपूर्ण होने पर पुलिस को मामले की सूचना दी गई। पुलिस मौके पर पहुंची और पहले तो आक्रोशित महिलाओं को समझाया। वहीं, स्कूल के खिलाफ मिली शिकायतों के मद्देनजर जिला प्रशासन ने कार्रवाई की है। डीसी ने जान छात्राओं का हालचाल गढ़वा डीसी पीएन मिश्रा ने जांच पूरी होने तक एहतियातन स्कूल के एक कर्मी को छोड़कर वार्डन, लेखापाल, गार्ड, रसोइया सहित अन्य संबंधित कर्मियों को कार्यमुक्त करने का आदेश दिया गया है। वहीं, घटना की सूचना मिलते ही डीसी एवं सिविल सर्जन डॉ. जॉन एफ. कैनेडी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। उन्होंने छात्राओं का हालचाल जाना और चिकित्सकों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। डीसी ने बताया कि सभी छात्राओं की हालत फिलहाल खतरे से बाहर है और उनका इलाज जारी है। शुक्रवार से शुरू हुआ तबीयत खराब होने का सिलसिला दरअसल, यह घटना शुक्रवार देर शाम शुरू हुई, जब खरौंधी कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की सौ से ज्यादा छात्राएं दूषित भोजन और टंकी का गर्म पानी पीने के बाद बीमार पड़ गईं। इसके बाद स्कूल प्रशासन द्वारा आनन फानन में उन्हें भवनाथपुर सामुदायिक अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के बाद छात्राओं की सेहत में हुए सुधार के बाद वे अपने-अपने घर लौट गईं। सभी छात्राएं खतरे से बाहर: डीसी डीसी पीएन मिश्रा ने बताया कि खरौंदी स्थित कस्तूरबा गांधी विद्यालय की छात्राओं की सेहत खराब की सूचना मिलते ही राहत कार्यों की निगरानी के लिए तुरंत एसडीएम और अन्य अधिकारियों को भेज दिया गया था। सभी बीमार छात्राओं का इलाज भवनाथपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में करवाया गया। कुछ छात्राएं शनिवार को फिर बीमार पड़ गईं थी और उनका भी इलाज चल रहा है। चिकित्सकों से हुई बातचीत में यह स्पष्ट हुआ कि सभी छात्राएं खतरे से बाहर हैं। Source link

झारखंड

हजारीबाग में 70 लाख की अवैध शराब जब्त:बिहार तस्करी के लिए ट्रक...

हजारीबाग पुलिस ने अवैध शराब तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए लगभग 70 लाख रुपए मूल्य की अंग्रेजी शराब जब्त की है। बरकट्ठा थाना क्षेत्र के झारखंड होटल के पास से एक 12 चक्का ट्रक से 935 कार्टून शराब बरामद की गई। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि यह खेप बिहार में तस्करी के लिए ले जाई जा रही थी। मद्य निषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो, पटना से हजारीबाग पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि भारी मात्रा में अंग्रेजी शराब की तस्करी की जा रही है। सूचना के आधार पर, हजारीबाग पुलिस अधीक्षक अमन कुमार के निर्देश पर एक विशेष टीम का गठन किया गया। शुक्रवार शाम को टीम ने बरकट्ठा थाना क्षेत्र में अभियान चलाया। झारखंड होटल के पास सड़क किनारे खड़े ट्रक की तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान ट्रक से कुल 935 कार्टून अंग्रेजी शराब बरामद हुई, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 70 लाख रुपए है। पुलिस ने मौके से ट्रक को जब्त कर लिया और उसके चालक दलजीत सिंह, जो उत्तराखंड का निवासी है, को गिरफ्तार कर पूछताछ शुरू कर दी है। शनिवार को बरही एसडीपीओ राधा प्रेम किशोर ने बताया कि यह कार्रवाई गुप्त सूचना पर आधारित थी। उन्होंने पुष्टि की कि शराब की यह खेप बिहार भेजी जा रही थी। पुलिस अब पूरे तस्करी नेटवर्क की जांच कर रही है और इस अवैध कारोबार से जुड़े सभी लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। Source link

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शाही सफर की अनोखी कहानी! आज भी इतिहास की गवाही देता बीकानेर...

Last Updated:June 27, 2026, 17:57 IST Bikaner State Railway Coach: बीकानेर अपने समृद्ध इतिहास और शाही विरासत के लिए प्रसिद्ध है. इन्हीं धरोहरों में बीकानेर स्टेट रेलवे का विशेष शाही डिब्बा भी शामिल है, जो आज भी बीते दौर की शान और वैभव की कहानी बयां करता है. यह विशेष कोच कभी राजघराने और विशिष्ट मेहमानों की यात्रा के लिए उपयोग में लाया जाता था. इसकी आकर्षक बनावट, शानदार इंटीरियर और उस दौर की बेहतरीन कारीगरी इसे ऐतिहासिक महत्व प्रदान करती है. वर्षों बाद भी यह शाही डिब्बा इतिहास प्रेमियों और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. बीकानेर की समृद्ध रेल विरासत को समझने के लिए यह एक महत्वपूर्ण धरोहर मानी जाती है. इस विशेष रेलवे कोच को देखकर लोग उस दौर की शाही जीवनशैली और रेल यात्रा की भव्यता का अनुभव कर सकते हैं. यह वही ऐतिहासिक शाही रेल डिब्बा है, जो कभी महाराजा गंगा सिंह को उनके लालगढ़ पैलेस से देश के विभिन्न हिस्सों तक लेकर जाता था। बताया जाता है कि पैलेस तक मीटरगेज रेल लाइन बिछी हुई थी और ट्रेन सीधे महाराजा के निवास के पास आकर रुकती थी। करीब 50 वर्षों तक यह व्यवस्था जारी रही। आज भले ही रेल पटरियां हट चुकी हैं, लेकिन यह डिब्बा उस सुनहरे इतिहास की गवाही देता है। सफेद रंग, पारंपरिक डिजाइन और मजबूत बनावट वाला यह कोच बीकानेर स्टेट रेलवे की इंजीनियरिंग क्षमता और राजसी ठाठ-बाट का अनूठा उदाहरण माना जाता है। राजकीय गंगा संग्रहालय में रखा यह लकड़ी का खूबसूरत मॉडल महाराजा गंगा सिंह के विशेष रेल सैलून की संरचना को दर्शाता है। स्थानीय कारीगरों ने इसे बेहद बारीकी से तैयार किया था, ताकि आने वाली पीढ़ियां समझ सकें कि शाही डिब्बे का स्वरूप कैसा था। मॉडल में डिब्बे के अलग-अलग हिस्सों को दर्शाया गया है, जिनमें बैठक कक्ष, शयनकक्ष, रसोई, स्नानघर और कर्मचारियों के लिए अलग स्थान शामिल थे। यह मॉडल केवल कलात्मक कृति नहीं बल्कि बीकानेर की शिल्पकला और रेलवे इतिहास का महत्वपूर्ण दस्तावेज भी है। संग्रहालय में आने वाले पर्यटकों के लिए यह आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। करीब 1934 में बीकानेर रेलवे वर्कशॉप में तैयार किया गया यह शाही रेल डिब्बा उस समय आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित था। इसमें आरामदायक बैठक, आलीशान बेडरूम, रसोई, स्नानघर, बिजली की रोशनी, पंखे और सुंदर सजावट की व्यवस्था थी। महाराजा गंगा सिंह की यात्राओं के दौरान इस डिब्बे को सामान्य ट्रेन के बीच में लगाया जाता था, ताकि सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। यह डिब्बा बीकानेर राज्य की तकनीकी दक्षता और महाराजा की दूरदर्शिता का प्रतीक माना जाता है। आज संग्रहालय में इसे देखकर पर्यटक शाही रेल यात्रा की भव्यता का अनुभव कर सकते हैं। Add News18 as Preferred Source on Google संग्रहालय में प्रदर्शित यह ऐतिहासिक दस्तावेज और दुर्लभ तस्वीरें बीकानेर स्टेट रेलवे के विकास की कहानी बयां करती हैं. इनमें विभिन्न रेल मार्गों, यात्राओं और ऐतिहासिक अवसरों का विवरण सुरक्षित रखा गया है. महाराजा गंगा सिंह के शासनकाल में बीकानेर से दुल्मेरा, सूरतगढ़, बठिंडा, चूरू, हिसार, श्रीगंगानगर, रेवाड़ी सहित अनेक क्षेत्रों तक रेल लाइनें बिछाई गईं. यही कारण है कि उन्हें बीकानेर का “विकास पुरुष” और “भागीरथ” कहा जाता है. यह गैलरी दर्शाती है कि किस प्रकार रेल नेटवर्क ने व्यापार, कृषि और आमजन के जीवन में नई गति प्रदान की. इस तस्वीर में शाही रेल डिब्बे के नीचे सुरक्षित रखी गई पुरानी मीटरगेज रेल पटरी दिखाई दे रही है. यही पटरियां कभी लालगढ़ पैलेस तक पहुंचती थीं, जहां से महाराजा गंगा सिंह अपनी विशेष ट्रेन में सवार होकर देशभर की यात्राओं पर निकलते थ. संग्रहालय में इन्हें मूल स्वरूप में संरक्षित रखा गया है ताकि लोग बीकानेर स्टेट रेलवे के इतिहास को करीब से समझ सकें. यह दृश्य उस दौर की रेल तकनीक और राजसी परिवहन व्यवस्था की अनूठी झलक प्रस्तुत करता है, जब रेल केवल यात्रा का माध्यम नहीं बल्कि विकास और शासन का महत्वपूर्ण आधार भी थी. राजकीय गंगा संग्रहालय में संरक्षित यह पूरा शाही रेल सैलून आज भी बीकानेर के गौरवशाली इतिहास की कहानी सुनाता है. महाराजा गंगा सिंह के लिए तैयार इस विशेष कोच में राजसी ठाठ-बाट के साथ आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध थीं. बीकानेर स्टेट रेलवे के इस डिब्बे का उपयोग महाराजा प्रशासनिक बैठकों, सरकारी यात्राओं और दिल्ली सहित अन्य महत्वपूर्ण स्थानों की यात्राओं के दौरान करते थे. यह सैलून इस बात का प्रमाण है कि बीकानेर रियासत अपने समय में रेलवे विकास और आधुनिक परिवहन व्यवस्था के क्षेत्र में देश की अग्रणी रियासतों में शामिल थी. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

झारखंड

मुर्गी की ये किस्म बनाएगी मालामाल, 24 महीने रोज 1 अंडा, कम...

होमफोटोकृषि मुर्गी की ये किस्म बनाएगी मालामाल, 24 महीने रोज 1 अंडा, कम लागत में शुरू करें Last Updated:June 27, 2026, 17:19 IST Jharkhand Poultry Scheme: झारखंड सरकार द्वारा मोराबादी मैदान में आयोजित तीन दिवसीय कृषि व्यापार मेले में किसानों और महिला समूहों को आधुनिक कृषि एवं पशुपालन तकनीकों से जोड़ने के लिए कई जानकारीपूर्ण स्टॉल लगाए गए. मेले में विशेषज्ञों द्वारा खेती के साथ-साथ स्वरोजगार के नए अवसरों पर प्रशिक्षण दिया गया. जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आय बढ़ाने के नए रास्ते खुल रहे हैं. मेले में बरपोखर महिला फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी के प्रतिनिधि आशीष कुमार ने बताया कि कंपनी झारखंड के सभी 24 जिलों में 100 लेयर बर्ड मॉडल (केज सिस्टम) के तहत कार्य कर रही है. इस योजना का उद्देश्य महिला स्वयं सहायता समूहों और व्यक्तिगत लाभुकों को वैज्ञानिक तरीके से मुर्गी पालन से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाना है. उन्होंने बताया कि इस मॉडल के तहत लाभुकों को मुर्गी पालन शुरू करने के लिए आवश्यक सभी संसाधन उपलब्ध कराए जाते हैं. जिससे शुरुआती स्तर पर किसी प्रकार की तकनीकी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता. उन्होंने बताया कि इस योजना की कुल लागत लगभग 1 लाख 20 हजार रुपये है. इसमें बीवी-300 लेयर बर्ड, केज सिस्टम, शेड, एक महीने का फीड और आवश्यक दवाइयां शामिल रहती हैं. इसके अलावा कंपनी लाभुकों को प्रशिक्षण, नियमित तकनीकी मार्गदर्शन और जरूरत पड़ने पर वेटरनरी डॉक्टर की सहायता भी उपलब्ध कराती है. इससे नए लोगों के लिए भी मुर्गी पालन का व्यवसाय आसान हो जाता है. Add News18 as Preferred Source on Google उन्होंने बताया कि बीवी-300 लेयर प्रजाति की सबसे बड़ी विशेषता इसकी अंडा उत्पादन क्षमता है. यह मुर्गी लगभग 24 महीने तक प्रतिदिन एक अंडा देने में सक्षम होती है, जिससे नियमित आय का स्रोत बनता है. उन्होंने बताया कि पहले चूजों का 90 दिनों तक ब्रूडिंग कराया जाता है. इसके बाद इन्हें लाभुकों के जिले में भेजा जाता है. जहां 25 से 30 दिनों तक स्थानीय वातावरण के अनुकूल होने के बाद मुर्गियां अंडा देना शुरू कर देती हैं. उन्होंने बताया कि बीवी-300 लेयर मुर्गियां व्यावसायिक अंडा उत्पादन के लिए विकसित की गई हैं. इस कारण अंडा उत्पादन के लिए मुर्गे की आवश्यकता नहीं होती. जिससे पालन की लागत और देखभाल दोनों सरल हो जाते हैं. उन्होंने बताया कि महिला स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं या व्यक्तिगत लाभुक घर पर कम जगह और कम देखभाल में इस मॉडल को अपनाकर हर महीने लगभग 15 हजार तक की अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं. इससे ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और परिवार की आय बढ़ाने में मदद मिल रही है. Source link

झारखंड

जौली तुलसी 51 ड्रॉप्स की मांग देश और विदेश में बढ़ी :...

रांची | जौली फार्मा इंडिया ने कहा है कि उसके आयुर्वेदिक उत्पाद जौली तुलसी-51 ड्रॉप्स की मांग देश और विदेश में बढ़ी है, क्योंकि लोगों में मजबूत रोग प्रतिरोधक क्षमता की जरूरत बढ़ गई है और बाजार में कई उत्पाद दावे कर रहे हैं। कंपनी के अनुसार उत्पाद की गुणवत्ता पर क्लिनिकल ट्रायल किया गया, जिसमें इसे लेने वालों में इम्युनिटी बढ़ने और शरीर से टॉक्सिन साफ होने के संकेत मिले। कंपनी के एक अधिकारी ने कहा, “हम हर बैच की गुणवत्ता जांच के बाद ही उत्पाद बाजार में उतारते हैं, ताकि उपभोक्ता तक सुरक्षित और विश्वसनीय विकल्प पहुंचे।” कंपनी ने बताया कि 5-10 बूंदें पानी में किसी भी उम्र के लोग ले सकते हैं और जानकारी के लिए 98143-30500 व Jollyorganic.com उपलब्ध हैं। Source link

शिक्षा

Graduates Get Chance, Age Limit 40 Years

Hindi News Career UPPSC PCS Recruitment 2024: Graduates Get Chance, Age Limit 40 Years 10 मिनट पहले कॉपी लिंक उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने अपर सब ऑर्डिनेट सर्विसेस यानी पीसीएस परीक्षा 2024 का नोटिस जारी कर दिया है। कैंडिडेट्स यूपीपीएससी की वेबसाइट uppsc.up.nic.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। आवेदन पत्र में संशोधन या सुधार 3 अगस्त 2026 तक किया जा सकेगा। फीस जमा करने की आखिरी तारीख 27 जुलाई 2026 तय की गई है। प्रीलिम्स परीक्षा का आयोजन 6 दिसंबर 2026 को किया जाएगा। आयोग ने कहा है कि आवेदन करते समय अपना OTR नंबर जरूर ले लें। इस बार आवेदन प्रक्रिया में सबसे जरूरी वन टाइम रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को बनाया गया है। बिना OTR नंबर के कोई भी उम्मीदवार आवेदन नहीं कर सकेगा। OTR नंबर के लिए उम्मीदवारों को आवेदन से कम से कम 72 घंटे पहले रजिस्ट्रेशन करना होगा ताकि सिस्टम में उनकी जानकारी अपडेट हो सके। क्या होता है OTR? वन टाइम रजिस्ट्रेशन (OTR) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें उम्मीदवार अपनी बेसिक जानकारी एक बार आयोग के पोर्टल पर भरनी होती है। इसके बाद भविष्य में उम्मीदवार अगर कोई और फार्म भरता है तो उसमें बार-बार अपनी बेसिक डीटेल्स लेने की जरूरत नहीं पड़ती है। OTR की इस प्रक्रिया से फॉर्म भरने की प्रक्रिया आसान होती है और गलतियों की संभावना भी कम हो जाती है। एजुकेशनल क्वालिफिकेशन : मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से पद के अनुसार ग्रेजुएशन या पोस्ट ग्रेजुएशन डिग्री। एज लिमिट : न्यूनतम : 21 साल अधिकतम : 40 साल दिव्यांग (PH) : अधिकतम 55 साल प्रिंसिपल (राजकीय इंटर कॉलेज) : 30 – 40 साल सिलेक्शन प्रोसेस : प्रीलिम्स एग्जाम मेन्स एग्जाम इंटरव्यू कुछ पदों के लिए फिजिकल स्टैंडर्ड टेस्ट फीस : सामान्य, ईडब्ल्यूएस, ओबीसी : 125 रुपए एससी, एसटी : 65 रुपए दिव्यांग : 25 रुपए भूतपूर्व सैनिक : 65 रुपए सैलरी : लेवल – 7 से लेवल – 10 के अनुसार ऐसे करें आवेदन : आयोग की ऑफिशियल वेबसाइट uppsc.up.nic.in पर जाएं। यहां ‘Apply’ लिंक पर क्लिक करके Authenticate with OTR Sever पर क्लिक करें। रजिस्ट्रेशन करके फॉर्म भरें। सभी डॉक्यूमेंट्स अपलोड करें। फीस जमा करके फॉर्म सब्मिट कर दें। आगे की जरूरत के लिए इसका प्रिंटआउट निकाल कर रखें। ऑनलाइन आवेदन लिंक ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक ये खबर भी पढ़ें Re NEET UG 2026 की आंसर की जारी:ऑफिशियल वेबसाइट से करें डाउनलोड, 15 जुलाई से पहले आ सकता है रिजल्ट NTA ने री-NEET UG 2026 की प्रोविजनल आंसर की जारी कर दी है। 21 जून को हुई री-NEET में शामिल उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट neet.nta.nic.in पर जाकर आंसर की चेक कर सकते हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं… Source link

झारखंड

गोड्डा में सड़क हादसा; एक की मौत, एक घायल:मेदनी चौक पर बाइक...

गोड्डा जिले के महागामा थाना क्षेत्र में एक सड़क हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि एक अन्य घायल हो गया। यह घटना बसंतराय प्रखंड के मेदनी चौक के पास हुई, जहां एक अनियंत्रित बाइक पुल के डिवाइडर से टकराकर खाई में जा गिरी। मृतक की पहचान ललमटिया थाना क्षेत्र के लीलातरी गांव निवासी ताला हेंब्रम (45) के रूप में हुई है। उनके पिता का नाम भगन हेंब्रम है। बताया गया कि ताला हेंब्रम पथरगामा प्रखंड के मटिहानी गांव में एक शादी समारोह में शामिल होने गए थे। वहां से लौटते समय वे बाबूजी टुडू के साथ बाइक पर सवार थे। बसंतराय प्रखंड के मेदनी चौक स्थित पुल के पास उनकी बाइक अचानक अनियंत्रित हो गई। बाइक डिवाइडर से टकराई और पुल के नीचे नदी किनारे खाई में जा गिरी। इस दुर्घटना में ताला हेंब्रम की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि बाबूजी टुडू घायल हो गए। हादसे के बाद स्थानीय लोग तुरंत मौके पर पहुंचे और दोनों को खाई से बाहर निकाला। सूचना मिलने पर पुलिस और एंबुलेंस भी घटनास्थल पर पहुंची। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए गोड्डा सदर अस्पताल भेज दिया है। वहीं, घायल बाबूजी टुडू का इलाज जारी है। Source link

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फंगल एवं बैक्टीरियल इन्फेक्शन की वजह से गर्मी-बरसात के बीच शरीर पर...

Last Updated:June 27, 2026, 16:50 IST Rainy summer day health tips: डॉ. सुमंत कुमार गुप्ता ने बताया कि गर्मी के मौसम में बैटल इंफेक्शन एवं फंगल इन्फेक्शन अधिक होता है. इसके वजह से भी फोड़ और फुंसी अधिक होते हैं, जो हर किसी की परेशानी बढ़ा देते हैं. क्योंकि छोटी सी लापरवाही बड़े फोड़े के आकार बना देते हैं और कई समस्याएं शुरू हो जाती है. यदि चाहते हैं कि इन सब बीमारी से बचे रहे तो इस मौसम में सूती कपड़े का प्रयोग करते रहे और यदि अधिक पसीना होता है तो उसे पोछते रहे और शरीर को अधिक देर तक गिला ना रहने दें. मऊः गर्मी का मौसम चल रहा है और बीच-बीच में बरसात हो रही है, जो अपने साथ कई बीमारियां लेकर आ रही हैं. जिसमें देखा जा रहा है सबसे अधिक लोग इस समय शरीर पर दाने निकलने से परेशान है और यह दाना छोटे आकार से होकर बड़े आकार ले ले रहा है, जो काफी परेशानी बढ़ा दे रहा है. लोकल 18 से बात करते हुए केसरी राज हॉस्पिटल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर सुमन्त कुमार गुप्ता बताते हैं की बरसात और गर्मी के बीच कई बीमारियां आती है जिसमें वर्तमान में देखा जा रहा है शरीर पर दाने निकल रहे हैं और यह दाने छोटे आकार से शुरू होकर फोड़ा फुंसी का रूप धारण कर ले रहे हैं, जिससे लोगों को काफी परेशानियां हो रही है. जिसका मुख्य कारण हो रहा है गर्मी के मौसम में लोग पसीना अधिक होता है और पसीना अधिक होने के वजह से शरीर में तेल ग्रंथ से तेल अधिक निकलता है और गंदगी अधिक निकलती है जिसके कारण रोम छिद्र बंद हो जाते हैं जिसके वजह से तेल नहीं निकल पाता और वह छोटी-छोटी दाने के आकार ले लेते हैं और उसके बाद फोड़ा फुंसी का रूप धारण कर लेते हैं. गर्मी में होता है फंगल इनफेक्शन डॉ सुमंत कुमार गुप्ता ने बताया कि गर्मी के मौसम में बैटल इंफेक्शन एवं फंगल इन्फेक्शन अधिक होता है. इसके वजह से भी फोड़ और फुंसी अधिक होते हैं, जो हर किसी की परेशानी बढ़ा देते हैं. क्योंकि छोटी सी लापरवाही बड़े फोड़े के आकार बना देते हैं और कई समस्याएं शुरू हो जाती है. यदि चाहते हैं कि इन सब बीमारी से बचे रहे तो इस मौसम में सूती कपड़े का प्रयोग करते रहे और यदि अधिक पसीना होता है तो उसे पोछते रहे और शरीर को अधिक देर तक गिला ना रहने दें. क्योंकि गर्मी के मौसम में गिला शरीर ही इस बीमारी को उत्पन्न करती है. इस मौसम में ज्यादा से ज्यादा पानी का सेवन करें और खाने में हरी सब्जियों का सेवन अधिक से अधिक करें. बर्तें सावधानी इस मौसम में जो फोड़े फुंसी होते हैं वह एक दूसरे के टच से फैलते हैं. ऐसे में ध्यान दें कि यदि किसी को फोड़ा फुंसी है तो उसके कपड़े की साफ सफाई रखें तथा उसके उपयोग किए हुए कपड़ों का इस्तेमाल न करें. बैक्टीरियल इंफेक्शन होने के वजह से यह बीमारी तेजी से फैलती है इसलिए सावधानी रखें कि यदि कोई व्यक्ति इससे इंफेक्शन से ग्रसित है तो उसके उपयोग किए हुए कपड़े का इस्तेमाल न करें उसे गर्म पानी में धुलने के बाद ही इस्तेमाल करें. About the Author Rajneesh Kumar Yadav मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Mau,Uttar Pradesh Source link

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