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झारखंड

जमशेदपुर का कभी न सोने वाला मोहल्ला, गर्ल स्टूडेंट्स के लिए माना...

Last Updated:June 27, 2026, 14:43 IST Jamshedpur Safest Colony For Rental Place: जमशेदपुर की गोलमुरी स्थित रिफ्यूजी कॉलोनी किराये पर घर लेने वालों के लिए काफी अच्छी मानी जाती है. यहां आसपास ही सारी सुविधाएं हैं साथ ही दूर-दराज के इलाकों से बढ़िया कनेक्टिविटी है. खासकर स्टूडेंट्स के लिए यह एरिया रेंट पर रूम लेने के लिए अच्छे ऑप्शंस में गिना जाता है. अगर आप जमशेदपुर में पढ़ाई, नौकरी या किसी अन्य कारण से रहने के लिए एक सुरक्षित और सुविधाजनक इलाके की तलाश कर रहे हैं, तो गोलमुरी स्थित रिफ्यूजी कॉलोनी आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकती है. शहर के पुराने और व्यवस्थित इलाकों में गिनी जाने वाली यह कॉलोनी अपनी सुरक्षा, बेहतर कनेक्टिविटी और 24 घंटे की गतिविधियों के लिए जानी जाती है. खासकर बाहर से आने वाले छात्रों और कामकाजी लोगों के लिए यह क्षेत्र काफी लोकप्रिय है. रिफ्यूजी कॉलोनी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां दिन हो या रात, हमेशा लोगों की आवाजाही बनी रहती है. इलाके में छोटे-बड़े बाजार, किराना दुकानें, दवा दुकानें, खाने-पीने के स्टॉल और दूसरी जरूरी सेवाएं देर रात तक उपलब्ध रहती हैं. यही वजह है कि यहां रहने वाले लोगों को कभी भी सुनसान माहौल का सामना नहीं करना पड़ता. स्थानीय लोग मजाक में कहते हैं कि इस इलाके में ‘रात होती ही नहीं’, क्योंकि यहां हमेशा किसी न किसी गतिविधि की हलचल बनी रहती है. सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी यह क्षेत्र काफी बेहतर माना जाता है. खासकर छात्राओं और नौकरीपेशा महिलाओं के लिए यह इलाका अधिक सुरक्षित समझा जाता है. लगातार लोगों की मौजूदगी, आसपास के सक्रिय बाजार और स्थानीय समुदाय की सतर्कता के कारण यहां रहने वाले लोग खुद को अधिक सुरक्षित महसूस करते हैं. यही कारण है कि कई परिवार अपनी बेटियों के लिए हॉस्टल या किराए का कमरा तलाशते समय इस क्षेत्र को प्राथमिकता देते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google शिक्षा के क्षेत्र में भी रिफ्यूजी कॉलोनी की लोकेशन काफी महत्वपूर्ण है. शहर के कई प्रमुख कॉलेज, कोचिंग संस्थान और शैक्षणिक केंद्र यहां से लगभग तीन से चार किलोमीटर के दायरे में स्थित हैं. इससे छात्रों का समय और यात्रा खर्च दोनों बचते हैं. कॉलेज जाने के लिए आसानी से ऑटो, बस और अन्य सार्वजनिक परिवहन सुविधाएं भी उपलब्ध रहती हैं, जिससे रोजाना आने-जाने में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होती. इसके अलावा यह इलाका जमशेदपुर के अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों से भी अच्छी तरह जुड़ा हुआ है. साकची, बिष्टुपुर, टेल्को, कदमा और सोनारी जैसे प्रमुख क्षेत्रों तक पहुंचना यहां से आसान है. स्वास्थ्य सुविधाओं, बैंकिंग सेवाओं, बाजार और मनोरंजन के साधनों की उपलब्धता भी इस क्षेत्र को और अधिक सुविधाजनक बनाती है. यही वजह है कि यहां रहने वाले लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए ज्यादा दूर नहीं जाना पड़ता. अगर आप जमशेदपुर में ऐसा इलाका तलाश रहे हैं जहां सुरक्षा, सुविधा, बेहतर कनेक्टिविटी और जीवंत माहौल एक साथ मिले, तो गोलमुरी की रिफ्यूजी कॉलोनी एक बेहतर विकल्प हो सकता है. छात्रों, नौकरीपेशा लोगों और परिवारों के लिए यह क्षेत्र शहर के सबसे व्यावहारिक और सुविधाजनक आवासीय इलाकों में से एक माना जाता है. Source link

झारखंड

जमशेदपुर के धतकीडीह तालाब में अज्ञात शव मिला:मृतक की नहीं हो सकी...

जमशेदपुर के बिष्टुपुर थाना क्षेत्र के धतकीडीह तालाब में शनिवार को एक अज्ञात व्यक्ति का शव मिला। स्थानीय लोगों ने सुबह तालाब में शव उपलाता हुआ देखा, जिसके बाद उन्होंने बिष्टुपुर थाना की पुलिस को सूचना दी। पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और स्थानीय लोगों की मदद से शव को तालाब से बाहर निकाला। घटना की जानकारी मिलते ही घटनास्थल पर भीड़ जमा हो गई। पुलिस ने शव का पंचनामा कर उसे पोस्टमॉर्टम के लिए एमजीएम मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेज दिया। समाचार लिखे जाने तक मृतक की पहचान नहीं हो पाई थी। पुलिस शव की शिनाख्त कराने के प्रयास में जुटी है। इसके लिए आसपास के थाना क्षेत्रों में दर्ज गुमशुदगी के मामलों की भी जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस फिलहाल सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मामले की जांच कर रही है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही व्यक्ति की मौत के कारणों और परिस्थितियों का पता चल पाएगा। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही घटना के संबंध में स्पष्ट जानकारी दी जा सकेगी। Source link

शिक्षा

76% Promoted in 2 Years, Many Reach Leadership

Hindi News Career Jaipuria Alumni Success: 76% Promoted In 2 Years, Many Reach Leadership 1 घंटे पहले कॉपी लिंक प्लेसमेंट से आगे बढ़कर करियर की असली तस्वीर भारत में मैनेजमेंट संस्थानों की सफलता अक्सर प्लेसमेंट, वेतन पैकेज और बड़ी कंपनियों की भर्ती के आधार पर आंकी जाती है। लेकिन किसी संस्थान की वास्तविक सफलता का पैमाना यह नहीं है कि छात्र को पहली नौकरी कहां मिली, बल्कि यह है कि वह अपने करियर में आगे कितनी तेजी से बढ़ता है। इसी पहलू पर रोशनी डालती है जयपुरिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट की हालिया एलुमनाई ट्रेसर स्टडी, जिसमें पूर्व छात्रों की लॉन्ग टर्म करियर ग्रोथ का विश्लेषण किया गया है। दो साल में 76% को मिला पहला बड़ा करियर ग्रोथ, 10 साल से ज्यादा अनुभव वाले 50% लोग लीडरशिप पदों पर अध्ययन के अनुसार, जयपुरिया के 76.1% पूर्व छात्रों को स्नातक होने के दो वर्षों के भीतर पहला महत्वपूर्ण करियर प्रमोशन या प्रगति हासिल हुई। जबकि दस साल से ज़्यादा का प्रोफेशनल अनुभव रखने वाले लगभग आधे लोग जनरल मैनेजर और वाइस प्रेसिडेंट जैसे सीनियर लीडरशिप पदों पर पहुंच गए हैं। ये नतीजे एक अहम सच्चाई को पुख्ता करते हैं: मैनेजमेंट एजुकेशन की असली कीमत सिर्फ़ इस बात से नहीं पता चलती कि ग्रेजुएट अपने करियर की शुरुआत कहां से करते हैं, बल्कि इस बात से पता चलती है कि समय के साथ वे कितनी तरक्की करते हैं। इससे पता चलता है कि जयपुरिया केवल नौकरी दिलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि छात्रों को तेजी से आगे बढ़ने के लिए भी तैयार करता है। इससे स्वाभाविक रूप से एक और सवाल उठता है: लंबे समय तक प्रोफेशनल ग्रोथ किस चीज से संभव होती है? इसका जवाब अक्सर इस बात में मिलता है कि संस्थान छात्रों को सिर्फ नौकरी के लिए ही नहीं, बल्कि लीडरशिप, परिस्थितियों के अनुसार ढलने की क्षमता और लगातार सीखते रहने के लिए कैसे तैयार करते हैं। राजस्थान के छात्रों को अपने राज्य में रहते हुए ग्लोबल और इंटरनेशनल लेवल की मैनेजमेंट एजुकेशन हासिल करने का मौका! राजस्थान के छात्रों और परिवारों के लिए ये एक एडवांटेज है कि जयपुरिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट जयपुर उन्हें अपने राज्य में ही रहकर राष्ट्रीय स्तर की मैनेजमेंट शिक्षा और ग्लोबल करियर के अवसरों तक पहुंचने का मौका देता है। जयपुरिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट के पास AACSB एक्रेडिटेशन और NIRF रैंकिंग दोनों है! जयपुरिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट जयपुर इस बात का एक बेहतरीन उदाहरण है कि कैसे लंबे समय के विकास की इस सोच को छात्रों के अनुभव में बदला जाता है। यह राजस्थान के सिर्फ दो मैनेजमेंट संस्थानों में से एक है जिनके पास AACSB एक्रेडिटेशन और NIRF रैंकिंग दोनों हैं। जयपुरिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, जयपुर ने एक ऐसा इकोसिस्टम बनाया है जहां पढ़ाई की गंभीरता, इंडस्ट्री से जुड़ाव, लीडरशिप का विकास और करियर के लिए तैयारी, सब मिलकर सीखने का एक शानदार अनुभव देते हैं। रैंकिंग और एक्रेडिटेशन से कहीं ज्यादा, इस इकोसिस्टम का असर मौजूदा स्टूडेंट्स के करियर के सफर में साफ नजर आता है दिखाई देता है। 2024–26 बैच की छात्रा खुशी सोनी, जिन्हें डेलॉइट में नियुक्ति मिली है, मानती हैं कि इंडस्ट्री इंटरैक्शन, लाइव प्रोजेक्ट्स और प्रैक्टिकल लर्निंग ने उन्हें कॉर्पोरेट दुनिया के लिए तैयार किया। इसी तरह, उसी बैच के वेदांश राठी ने दुबई में लैंडमार्क ग्रुप के साथ अपना इंटरनेशनल करियर शुरू किया है। इससे पता चलता है कि जयपुरिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, जयपुर से ग्रेजुएट होने वाले स्टूडेंट्स के लिए दुनिया भर में कितने बड़े मौके खुल रहे हैं। ये अलग-अलग करियर यात्राएं संस्थान के एलुमनाई नेटवर्क में दिखने वाले एक बहुत बड़े पैटर्न का एक हिस्सा हैं। जयपुरिया जयपुर के ग्रेजुएट आज दुनिया भर में सम्मानित संगठनों में लीडरशिप के पदों पर काम कर रहे हैं। एल्युमनाई ट्रेसर स्टडी के जरिये इन उदाहरणों से पता चलता है कि जयपुरिया जयपुर अपने स्टूडेंट्स के लंबे समय के करियर विकास को लेकर कितना गंभीर है। जयपुरिया जयपुर के कई पूर्व छात्र दुनिया की प्रतिष्ठित कंपनियों में नेतृत्वकारी भूमिकाएं निभा रहे विजय साधनानी – असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट, HSBC गुंजन जैन – वाइस प्रेसिडेंट, BlackRock अपूर्व सोगानी – असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट, Citibank प्रेरणा भदानी – एसोसिएट डायरेक्टर, UBS नेतृत्व और व्यक्तित्व विकास पर विशेष जोर इस तरह के उताहरण कोई इत्तेफाक नहीं हैं। ये जयपुरिया इंस्टीट्यूट की उस सोच को दिखाते हैं जिसमें स्टूडेंट्स की ओवरऑल ग्रोथ पर ध्यान दिया जाता है। संस्थान का फोकस केवल अकादमिक पढ़ाई तक सीमित नहीं है। यहां छात्रों को नेतृत्व क्षमता, निर्णय लेने की योग्यता और आत्म-विकास पर भी काम करने का अवसर मिलता है। रिसर्च पर आधारित टीचिंग, लीडरशिप से जुड़ी पहल, इंडस्ट्री के साथ सहयोग और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों से छात्रों को अलग-अलग नजरिए और असल दुनिया की बिज़नेस चुनौतियों से रूबरू होने का मौका मिलता है। संस्थान की ‘लीडरशिप लैब’ छात्रों को असल ऑर्गनाइजेशनल माहौल से जुड़े लीडरशिप के सबक सीखने में मदद करती है, जबकि ‘4D रिसेट जर्नल’ आत्म-जागरूकता, मुश्किलों से उबरने की क्षमता, हालात के हिसाब से ढलने और सोच-समझकर फ़ैसले लेने की काबिलियत को बढ़ावा देता है-ये ऐसी खूबियां हैं जो आज के वर्कप्लेस में तेजी से अहम होती जा रही हैं। हालांकि ये पहल लंबे समय में क्षमता बढ़ाने पर केंद्रित हैं, लेकिन इनसे हायरिंग के समय इंडस्ट्री का भरोसा भी मजबूत होता है। जयपुरिया इंस्टीट्यूट जयपुर के प्रमुख रिक्रूटर्स में कंसल्टिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज, मैन्युफैक्चरिंग, कंज्यूमर गुड्स, एनर्जी और मीडिया जैसे सेक्टर शामिल हैं। देश और दुनिया की प्रतिष्ठित कंपनियां लगातार जयपुरिया के कैम्पस से हायरिंग कर रही हैं। देश और दुनिया की प्रतिष्ठित कंपनियों का भरोसा जयपुरिया के विभिन्न परिसरों में भर्ती करने वाली कंपनियों में डेलॉइट, ब्लैकरॉक, कोटक महिंद्रा बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, आदित्य बिड़ला कैपिटल, कोलगेट-पामोलिव, टीवीएस मोटर, जियो-बीपी, द टाइम्स ऑफ इंडिया और जेके सीमेंट जैसी प्रमुख कंपनियां शामिल हैं। इन सभी खूबियों का प्रभाव ठोस परिणामों के रूप में भी स्पष्ट दिखाई देता है। जयपुरिया के विभिन्न कैंपसों से वर्ष 2026 में ग्रेजुएट होने वाले छात्रों के लिए सबसे बड़ा वार्षिक पैकेज 24.11 लाख रुपये रहा, जबकि 2025 में यह आंकड़ा 36 लाख रुपये के उच्चतम वार्षिक पैकेज तक पहुंचा था। हालांकि, जयपुरिया इंस्टीट्यूट का फोकस केवल पहली नौकरी या शुरुआती वेतन तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसे करियर बनाने पर

झारखंड

सोनारडीह ओपी के सामने बीसीसीएल कर्मी को गोली लगी:केबल चोरी रोकने पर...

सोनारडीह ओपी क्षेत्र में केबल चोरी का विरोध करने पर अपराधियों ने बीसीसीएल कर्मी उमेश रविदास को गोली मारकर घायल कर दिया। यह घटना शुक्रवार देर रात करीब 2 से 2:30 बजे बोकारो-धनबाद एनएच-32 किनारे स्थित बीसीसीएल के समरसेबल पंप पर हुई, जो सोनारडीह ओपी से कुछ ही दूरी पर है। जानकारी के अनुसार, तीन अपराधी समरसेबल पंप से केबल चोरी करने पहुंचे थे। ड्यूटी पर तैनात पंप ऑपरेटर उमेश रविदास ने कमरे के अंदर से शोर मचाया। इसके बाद अपराधियों ने गोली चला दी, जो पतले दरवाजे को पार करते हुए उनके पैर में जा लगी और आर-पार हो गई। घटनास्थल से एक खोखा बरामद घायल कर्मी को प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए सेंट्रल हॉस्पिटल धनबाद रेफर किया गया। घटना की सूचना मिलते ही सोनारडीह ओपी पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। पुलिस ने घटनास्थल से एक खोखा बरामद किया है। बाघमारा एसडीपीओ अजीत कुमार विमल ने बताया कि यह घटना थाना के ठीक सामने हुई है। सीसीटीवी फुटेज में तीन लोग चोरी करने आते हुए दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि कर्मी द्वारा शोर मचाने के बाद अपराधियों ने गोली चलाई, जो दरवाजे को पार करते हुए कर्मी के पैर में लगी। मामले की जांच जारी है और अपराधियों की पहचान की जा रही है। थाना के सामने ऐसी घटना चिंता का विषय: विधायक वहीं, घटना की जानकारी मिलने के बाद बाघमारा विधायक शत्रुघ्न महतो भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने क्षेत्र की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि थाना के सामने इस तरह की घटना होना चिंता का विषय है। विधायक ने कहा कि अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने की जरूरत है। बताया जा रहा है कि बीसीसीएल के इस समरसेबल पंप में केबल चोरी की यह तीसरी घटना है। लगातार चोरी की घटनाओं के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। Source link

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Food | Recipe | Monsoon Food | मानसून में क्या खाएं? मेवाड़...

Last Updated:June 27, 2026, 14:54 IST Famous Food and Recipe Of Mewar :मेवाड़ में मानसून पर ज्वार की खिचड़ी का चलन बढ़ा, भीलवाड़ा शाहपुरा की रिमझिम चौहान ने इसे आसान, पौष्टिक और पेट भरने वाला नाश्ता बताया, शहरों में भी तेजी से लोकप्रिय. भीलवाड़ा जिले के शाहपुरा की रहने वाली रिमझिम चौहान बताती हैं कि नाश्ते की बात आते ही लोगों के मन में सबसे पहले पोहा, कचोरी और समोसे का ख्याल आता है, लेकिन इन्हें घर पर बनाना हर किसी के लिए आसान नहीं होता. भीलवाड़ा. बारिश का मौसम आते ही हर किसी का मन गर्म, हल्का और पौष्टिक खाना खाने का करता है. आमतौर पर लोग सुबह के नाश्ते में कचोरी, समोसा, पोहा या उपमा खाना पसंद करते हैं. ऐसे में अगर आप नाश्ते में कुछ अलग और हेल्दी बनाना चाहते हैं, तो मेवाड़ की पारंपरिक ज्वार की खिचड़ी एक शानदार विकल्प हो सकती है. यह स्वादिष्ट होने के साथ-साथ सेहत के लिए भी फायदेमंद मानी जाती है. खास बात यह है कि इसे घर में आसानी से उपलब्ध सामग्री से कम मेहनत और कम समय में तैयार किया जा सकता है. मेवाड़ के कई गांवों में आज भी बारिश के दिनों में ज्वार की खिचड़ी नियमित रूप से बनाई जाती है और इसे देसी घी के साथ खाने का अलग ही आनंद होता है. अब यह रेसिपी शहरी क्षेत्रों में भी काफी पसंद की जाने लगी है. यही वजह है कि आजकल शहरों के कई घरों में भी यह नाश्ते का हिस्सा बन चुकी है. इसकी एक खास बात यह भी है कि सुबह इसका सेवन करने के बाद लंबे समय तक भूख महसूस नहीं होती. ज्वार की खिचड़ी बनाने की आसान विधिभीलवाड़ा जिले के शाहपुरा की रहने वाली रिमझिम चौहान बताती हैं कि नाश्ते की बात आते ही लोगों के मन में सबसे पहले पोहा, कचोरी और समोसे का ख्याल आता है, लेकिन इन्हें घर पर बनाना हर किसी के लिए आसान नहीं होता. ऐसे में ज्वार की खिचड़ी एक ऐसा विकल्प है, जिसे कम मेहनत में कोई भी घर पर तैयार कर सकता है. इसे बनाने के लिए सबसे पहले ज्वार को अच्छी तरह साफ करके कुछ घंटों के लिए भिगो दें. इसके बाद कुकर में थोड़ा देसी घी गर्म करें और उसमें जीरा, हींग, बारीक कटी हरी मिर्च और थोड़ा अदरक डालकर हल्का भून लें. अब इसमें ज्वार के साथ स्वादानुसार नमक, हल्दी और चाहें तो थोड़ी मूंग दाल भी मिला दें. पर्याप्त पानी डालकर कुकर में तीन से चार सीटी आने तक पकाएं. स्वाद के साथ सेहत का भी खजानापकने के बाद खिचड़ी नरम और खुशबूदार हो जाती है. ऊपर से एक चम्मच देसी घी डालने से इसका स्वाद कई गुना बढ़ जाता है. इस खिचड़ी को दही, छाछ, लहसुन की चटनी, हरी धनिया की चटनी या घर के बने आम के अचार के साथ परोसा जा सकता है. कई लोग इसमें मौसमी सब्जियां भी मिलाते हैं, जिससे यह और अधिक पौष्टिक बन जाती है. ज्वार में भरपूर फाइबर, आयरन और कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को ऊर्जा देने के साथ पाचन तंत्र को भी बेहतर बनाए रखने में मदद करते हैं. यही कारण है कि मानसून के मौसम में इसे हल्के और संतुलित भोजन के रूप में काफी पसंद किया जाता है. About the Author Anand Pandey आनंद पाण्डेय वर्तमान में News18 हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Bhilwara,Bhilwara,Rajasthan Source link

झारखंड

बारिश के बाद स्वर्ग सा दिख रहा पारसनाथ पर्वत, मानसून के बादलों...

Last Updated:June 27, 2026, 14:09 IST Parasnath Hill Jharkhand: झारखंड के गिरिडीह जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध पारसनाथ पर्वत (सम्मेद शिखरजी) इन दिनों अध्यात्म और कुदरत के अद्भुत संगम का गवाह बना हुआ है. झारखंड का सबसे ऊंचा पर्वत शिखर होने के गौरव के साथ-साथ यह पवित्र स्थल अपनी असीम शांति और अलौकिक वादियों के लिए जाना जाता है. हाल ही में इलाके में हुई मानसूनी फुहारों के बाद इस पूरे पहाड़ी क्षेत्र की रंगत पूरी तरह बदल गई है और यह स्थान श्रद्धालुओं के साथ-साथ प्रकृति प्रेमियों के लिए भी मुख्य आकर्षण का केंद्र बन गया है. मानसून की हल्की बारिश के बाद झारखंड का सबसे ऊंचा पर्वत पारसनाथ इन दिनों हरियाली की चादर ओढ़े नजर आ रहा है. बादलों से घिरी चोटियां, ठंडी हवाएं और प्राकृतिक सौंदर्य के बीच यह विश्व प्रसिद्ध जैन तीर्थस्थल श्रद्धालुओं और पर्यटकों को एक साथ आकर्षित कर रहा है. बारिश के बाद पूरा पर्वत घने पेड़ों और हरियाली से ढक गया है. बादलों से घिरी पहाड़ियां और ठंडी हवाएं यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अलग ही अनुभव करा रही हैं. मौसम ऐसा महसूस हो रहा है मानो सावन पूरे शबाब पर हो. जहां एक ओर लोग प्रकृति के मनमोहक नजारों का आनंद ले रहे हैं, वहीं दूसरी ओर हजारों श्रद्धालु 10 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा कर उस पवित्र तपस्या शिला के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं, जहां मान्यता के अनुसार भगवान पार्श्वनाथ को मोक्ष की प्राप्ति हुई थी.जैन धर्म के इस सर्वोच्च और पावन महातीर्थ पर देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है. जैन धर्म का सबसे पवित्र तीर्थस्थल- पारसनाथ पर्वत जैन धर्म के सबसे महत्वपूर्ण तीर्थस्थलों में गिना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि 24वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ ने पर्वत की चोटी पर स्थित पवित्र तपस्या शिला पर वर्षों तक कठोर साधना की थी. इसी स्थान पर उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई थी. यही वजह है कि देश-विदेश से जैन श्रद्धालु इस स्थल के दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google 10 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर पहुंचते हैं श्रद्धालु- पारसनाथ पर्वत की चोटी तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को लगभग 10 किलोमीटर की पैदल यात्रा करनी पड़ती है. कठिन चढ़ाई के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था उन्हें लगातार यहां खींच लाती है. तपस्या शिला के दर्शन के बाद श्रद्धालु पूजा-अर्चना कर अपने और अपने परिवार के सुख, शांति तथा आध्यात्मिक उन्नति की कामना करते हैं. आध्यात्मिक यात्रा के साथ प्रकृति का भी आनंद- मानसून के मौसम में पारसनाथ पर्वत का वातावरण और अधिक आकर्षक हो जाता है. हरियाली, पहाड़ों के बीच तैरते बादल और ठंडी हवा श्रद्धालुओं की आध्यात्मिक यात्रा को यादगार बना देते हैं. बड़ी संख्या में प्रकृति प्रेमी और पर्यटक भी यहां पहुंचकर इस प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद ले रहे हैं. आस्था और पर्यटन दोनों को मिल रहा बढ़ावा- धार्मिक महत्व और प्राकृतिक सुंदरता का अनूठा मेल पारसनाथ पर्वत को झारखंड के प्रमुख पर्यटन स्थलों में भी शामिल करता है. स्थानीय लोगों का मानना है कि मानसून के दौरान यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या बढ़ जाती है. इससे क्षेत्र के पर्यटन और स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा मिलता है. क्यों खास है पारसनाथ?- पारसनाथ पर्वत केवल झारखंड का सबसे ऊंचा पर्वत ही नहीं, बल्कि करोड़ों जैन श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र भी है. मानसून के दौरान यहां का प्राकृतिक सौंदर्य इस धार्मिक स्थल को और अधिक दिव्य बना देता है. यही कारण है कि यहां आने वाला हर श्रद्धालु आध्यात्मिक शांति के साथ प्रकृति के अद्भुत सौंदर्य का भी अनुभव लेकर लौटता है. पहाड़ियों को छूकर गुजरने वाले काले बादल, चारों तरफ फैली धुंध और पहाड़ों से बहते छोटे-छोटे झरने यहाँ आने वाले लोगों को सावन के सुहावने मौसम का अहसास करा रहे हैं. सुबह और शाम के समय चलने वाली बर्फीली और ठंडी हवाएं इस आध्यात्मिक यात्रा के आनंद को दोगुना कर देती हैं. कुदरत का यह मनमोहक और जादुई रूप सैलानियों को अपनी ओर खींच रहा है और लोग इस विहंगम दृश्य को अपने कैमरों में कैद करने से खुद को रोक नहीं पा रहे हैं. Source link

झारखंड

गोड्डा के ललमटिया में दो शव फंदे से लटके मिले:अलग-अलग जगह पर...

गोड्डा जिले के ललमटिया थाना क्षेत्र में दो अलग-अलग स्थानों से दो व्यक्तियों के शव फंदे से लटके हुए बरामद किए गए हैं। पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। पहला शव डकैता चौक के पास चर्च के पीछे जंगल से मोहम्मद सरफराज अंसारी (25) का बरामद हुआ। सुबह शौच के लिए जंगल जा रहे लोगों ने पेड़ से लटकता शव देखा, जिसके बाद उन्होंने ललमटिया पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही ललमटिया थाना प्रभारी रौशन कुमार सिंह अपनी टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे और शव की शिनाख्त की। परिजनों ने बताया कि सरफराज मानसिक रूप से विक्षिप्त था और अक्सर घर से बाहर रहता था। वह पहले गाड़ी चलाकर परिवार का भरण-पोषण करता था। परिजनों ने सरफराज की हत्या का आरोप लगाया है। घटनास्थल से एक जोड़ी चप्पल और नशा करने वाला डेंडोरॉइड बरामद हुआ है। मृतक अपने पीछे पत्नी और दो बेटों को छोड़ गया है। मानसिक रूप से विक्षिप्त अमीन लोहार इधर, दूसरा शव पियारम जंगल से सुंदरपहाड़ी थाना क्षेत्र के रामपुर निवासी अमीन लोहार (40) का बरामद किया गया है। अमीन की पत्नी बेनुका देवी ने बताया कि उनके पति मानसिक रूप से विक्षिप्त थे और अक्सर घर से बाहर रहते थे। अमीन लोहार अपने ससुराल पियारम में रहते थे। मृतक अपने पीछे एक बेटे को छोड़ गए हैं। ललमटिया थाना प्रभारी रौशन कुमार सिंह ने बताया कि थाना क्षेत्र से दो शव बरामद हुए हैं। डकैता चौक के पास मिला शव प्रथम दृष्टया आत्महत्या का मामला प्रतीत होता है। हालांकि, दोनों शवों की मौत का वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। Source link

शिक्षा

महाराष्ट्र में TET पेपर लीक, एग्जाम कल होना था:पेपर ठाणे से बरामद...

महाराष्ट्र में रविवार को होने वाली शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) का क्वेश्चन पेपर करीब 24 घंटे पहले लीक हो गया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामले की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए लीक हुआ क्वेश्चन पेपर बरामद कर लिया और कई लोगों को हिरासत में लिया है। पेपर लीक के बाद कल होने वाली TET परीक्षा रद्द किए जाने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, महाराष्ट्र शिक्षा विभाग ने अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। सूत्रों के मुताबिक, विभाग जल्द ही इस पूरे घटनाक्रम पर प्रेस नोट जारी करेगा। इसके साथ ही परीक्षा रद्द करने की घोषणा भी की जाएगी। ऐसे में विभाग परीक्षा की नई तारीख का भी जल्द ऐलान कर सकता है। इससे पहले NEET और यूपी पुलिस भर्ती का भी पेपर लीक हुआ पिछले 5 साल में देश में 9 बड़े पेपर लीक के मामले सामने आए हैं। इनमें राजस्थान रीट (REET), यूपी पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा और हाल ही में मई 2026 में हुए नीट यूजी (NEET-UG) जैसे बड़े एग्जाम्स शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट बोला- शिक्षकों को TET पास करना ही होगा सुप्रीम कोर्ट ने 29 मई को स्पष्ट किया कि स्कूलों में काम कर रहे शिक्षकों के लिए टीचर इलिजिबिलटी टेस्ट (TET) पास करना अनिवार्य है। कोर्ट ने TET पास करने की समयसीमा 31 अगस्त 2027 से बढ़ाकर 31 अगस्त 2028 कर दी। हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इसके बाद कोई और समय नहीं दिया जाएगा। कोर्ट ने कहा, बिना TET योग्यता वाले शिक्षक सेवा में बने रहे तो इसका असर आने वाली पीढ़ियों की शिक्षा पर पड़ेगा। फैसले का असर देश के 20 लाख से ज्यादा शिक्षकों पर होगा। ——————————— ये खबर भी पढ़ें… MP के 1.5 लाख शिक्षकों को TET पास करना अनिवार्य:SC ने कहा- बच्चों के भविष्य से समझौता नहीं, पात्रता परीक्षा जरूरी; 1 साल का अतिरिक्त समय मध्यप्रदेश के डेढ़ लाख से ज्यादा शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) देनी ही पड़ेगी। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को रिव्यू पिटीशनों पर फैसला सुनाते हुए कहा कि बच्चों के बेहतर शैक्षणिक विकास और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए शिक्षकों का TET पास करना जरूरी है। पूरी खबर पढ़ें… Source link

झारखंड

शराब के नशे में बेटे ने की पिता की हत्या:बोकारो में कुल्हाड़ी...

बोकारो में शराब के नशे में धुत एक युवक ने मामूली विवाद के बाद अपने ही पिता की टांगी (कुल्हाड़ी) से वार कर हत्या कर दी। घटना शुक्रवार की देर रात बेरमो अनुमंडल के गोमिया प्रखंड अंतर्गत तिलैया पंचायत के कारीपानी गांव की है। मृतक की पहचान 63 वर्षीय जयलाल करमाली के रूप में हुई है, जबकि आरोपी पुत्र 30 वर्षीय अर्जुन करमाली को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। जानकारी के अनुसार, अर्जुन करमाली अपने मामा के घर आयोजित एक कार्यक्रम से देर रात शराब पीकर घर लौटा था। पिता ने नशे की लत छोड़ने की कही थी बात उसकी शराब की आदत से परेशान पिता ने उसे समझाने का प्रयास किया और कहा कि उसकी नशे की लत के कारण परिवार बिखर रहा है और उसकी पत्नी भी घर छोड़कर मायके चली गई है। पिता की यह बात अर्जुन को नागवार गुजरी। गुस्से में अर्जुन ने घर में रखी कुल्हाड़ी उठाकर पिता के सिर पर ताबड़तोड़ वार कर दिया। गंभीर चोट लगने से जयलाल करमाली की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। इधर, शोर सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे। उन्होंने भागने की कोशिश कर रहे आरोपी को पकड़ लिया, रस्सी से बांध दिया और इसकी सूचना जगेश्वर बिहार थाना पुलिस को दी। सूचना मिलते ही थाना प्रभारी प्रकाश यादव पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त खून से सनी कुल्हाड़ी भी बरामद कर जब्त कर ली है। Source link

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Nitish Kumar RCP Singh Meeting inside story | nishant kumar

Last Updated:June 27, 2026, 13:52 IST Nitish Kumar RCP Singh Meeting inside story : बिहार की राजनीति में शनिवार को एक ऐसी तस्वीर सामने आई जिसने नए सियासी समीकरणों को जन्म दे दिया है. पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह ने अचानक नीतीश कुमार से मुलाकात की और खुद को जेडीयू में बताते हुए ‘घर वापसी’ के संकेत दिए. जानिए इस हाई-वोल्टेज मुलाकात के मायने और पर्दे के पीछे की पूरी कहानी. नीतीश-आरसीपी में मुलाकात के मायने क्या हैं? पटना. ‘इंतजार कीजिए, समय-काल पर छोड़ दीजिए… हम तो जेडीयू में हैई हैं मानकर चलिए न…’ पूर्व केंद्रीय मंत्री रामचंद्र प्रसाद सिंह उर्फ आरसीपी सिंह के इस बयान और पटना के 7 सर्कुलर रोड स्थित बंगले से आई एक तस्वीर ने बिहार की पूरी सियासत में भूचाल ला दिया है. लगभग 4 साल की लंबी कड़वाहट, आरोप-प्रत्यारोप और बीजेपी-जन सुराज का चक्कर काटने के बाद आखिरकार शनिवार को आरसीपी सिंह अपने पुराने बॉस और जेडीयू अध्यक्ष नीतीश कुमार से मिलने पहुंचे. इस मुलाकात को आरसीपी सिंह ने सोशल मीडिया पर बेहद आत्मीय बताया है. लेकिन इस मुलाकात के पीछे की क्रोनोलॉजी, टाइमिंग और जातीय समीकरणों का जो कॉकटेल है, वह बिहार में एक नई राजनीतिक पटकथा लिखने की ओर इशारा कर रहा है. बिहार की राजनीति को करीब से देखने वाले जानते हैं कि जेडीयू की असली ताकत उसका ‘लव-कुश’ (कोइरी-कुर्मी) वोट बैंक रहा है. लेकिन हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों और बीजेपी द्वारा सम्राट चौधरी (कोइरी समाज) को आगे बढ़ाए जाने के बाद जेडीयू के भीतर एक अंडरकरेंट था. सम्राट चौधरी के मजबूत होने के बाद जेडीयू को यह डर सताने लगा था कि उनका पारंपरिक गैर-यादव ओबीसी विशेषकर कोइरी-कुर्मी आधार खिसक सकता है. नीतीश कुमार से आरसीपी सिंह मिलने पहुंचे. कुर्मी किलेबंदी की मजबूरी नीतीश कुमार के इर्द-गिर्द रहने वाले लोग भली-भांति जानते हैं कि अगर अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता बचाए रखनी है, तो गृह जिले नालंदा और पूरे बिहार के कुर्मी मतदाताओं को एकजुट रखना होगा. आरसीपी सिंह इसी समाज के एक बड़े और रसूखदार चेहरे रहे हैं. पिछले कुछ महीनों से दोनों नेताओं को कुर्मी समाज के सम्मेलनों में एक साथ देखा जा रहा था. जेडीयू किसी भी कीमत पर इस कोर वोट बैंक में कोई बिखराव नहीं चाहती और आरसीपी की वापसी इसी डैमेज कंट्रोल का हिस्सा मानी जा रही है. मुलाकात की इनसाइड स्टोरी, किसने कराई सेटिंग? सियासी गलियारों में चर्चा तेज है कि आरसीपी सिंह पिछले कई महीनों से नीतीश कुमार से मिलने का समय मांग रहे थे. लेकिन जेडीयू के ही कुछ शीर्ष नेताओं की वजह से उन्हें एंट्री नहीं मिल पा रही थी, क्योंकि आरसीपी की वापसी से पार्टी के आंतरिक शक्ति संतुलन में खलल पड़ना तय है. इस गतिरोध को तोड़ने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की बताई जा रही है. पिछले कुछ समय से आरसीपी सिंह सार्वजनिक मंचों से न सिर्फ नीतीश कुमार बल्कि उनके बेटे निशांत कुमार की जमकर तारीफ कर रहे थे. उन्होंने निशांत की राजनीति में एंट्री का भी पुरजोर समर्थन किया था. सूत्रों के मुताबिक, निशांत कुमार और आरसीपी सिंह के बीच हुई अनौपचारिक बातचीत ने ही इस आत्मीय मुलाकात की जमीन तैयार की और आखिरकार शनिवार को नीतीश कुमार के आवास के दरवाजे आरसीपी के लिए खुल गए. #WATCH | Patna, Bihar: On meeting Nitish Kumar, former Union Minister, Ramchandra Prasad Singh says, “I met Nitish Kumar after 4 years, and it felt very good…Nitish Kumar has been, is, and will continue to be my leader…I met him today after years, and he appeared completely… pic.twitter.com/RMu9qO3ddV Source link

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