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झारखंड

Beauty Tips: चेहरे पर झुर्रियां, दाग-धब्बे और टैन सब खत्म, ब्यूटी पार्लर...

Last Updated:June 08, 2026, 09:29 IST Beauty Tips For Glowing Skin: रांची की ब्यूटी एक्सपर्ट कविता ने पपीता, कीवी, शहद और चावल के आटे से बने आइस क्यूब फेस पैक को चेहरे के लिए रामबाण बताया है. उन्होंने कहा कि यह झुर्रियां, दाग, टैन और सनबर्न कम करने का आसान घरेलू उपाय है. इससे आपको ब्यूटी पार्लज जाकर पैसे भी खर्च करने की आवश्यकता नहीं है. आइये जानते हैं इसके बारे में. ख़बरें फटाफट रांची: झारखंड की राजधानी रांची की ब्यूटी एक्सपर्ट कविता बताती हैं कि कई बार ऐसा होता है कि हर दिन लोगों को फेस पैक बनाना बड़ा हार्ड लगता है. ऐसे में आप पपीता, कीवी, शहद, थोड़ा सा चावल का आटा लेकर मिला लीजिए और इस पेस्ट को बर्फ वाले कंटेनर में जमा दीजिए. अब हर दिन शाम में एक क्यूब लीजिए और अपने चेहरे पर रगड़ लीजिए और 15 मिनट बाद चेहरा धो लीजिए. इससे आपको ब्यूटी पार्लर भी जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी. कविता बताती हैं कि आपको हर दिन फेस पैक बनाने की आवश्यकता नहीं है और इस पैक से चेहरे पर गजब का निखार देखने को मिलता है. दरअसल, पपीता व कीवी दोनों में ही एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाई जाती है, जो चेहरे के फ्री रेडिकल्स को ठीक करता है और चेहरे में जो झुर्रियां समय से पहले पड़ जाती हैं, यह सारी चीज देखने को नहीं मिलेगी, यह चेहरे की फाइन लाइंस को भी कम करता है. आइस क्यूब करता है चेहरे को टाइट साथ ही, जब आप बर्फ को चेहरे पर रब करते हैं तो यह भी आपकी स्किन को टोन और टाइट करने का काम करता है. ऐसे में आपको हर दिन फेस पैक बनाने की जरूरत नहीं है. बस एक क्यूब निकालना है, नहाने के पहले रगड़ लीजिए और नहा लीजिए 15 मिनट रखिए. ऐसा अगर आप 30 दिन लगातार करते हैं, तो यकीन मानिये, जिद्दी से जिद्दी दाग और टैन भी चेहरे से खत्म हो जाएगी. दरअसल, पपीता और कीवि दोनों में ही प्रचुर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट के साथ-साथ विटामिन सी और एंटी इन्फ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं. इसका मतलब यह हुआ कि चेहरे पर सूजन और दाग है तो वह भी हटाने का काम करता है. इसके साथ शहद चेहरे की गंदगी को बाहर निकलता है और चेहरे को कोमल बनाता है. इसके अलावा चावल का आटा भी चेहरे को प्राकृतिक रूप से साफ करने का काम करता है. बस 1 मिनट में चमक जाएगी चेहरा ब्यूटी एक्सपर्ट कविता बताती हैं कि यह बस 1 मिनट का काम है. क्योंकि, आपको फेस पैक बनाना नहीं बस आइस क्यूब लेना है और रगड़ लेना है. इसीलिए बहुत अधिक इसमें मेहनत नहीं लगती है. इस तकनीक से आप अपना हर दिन का काफी कीमती समय बचा लेंगे और आपको अपनी ड्रीम त्वचा भी मिल सकती है. गर्मी के मौसम में तो यह ऊपर रामबाण है. यह सनबर्न को भी ठीक करता है. About the Author Brijendra Pratap Singh बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में (2021) लगभग 5 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटें…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Ranchi,Jharkhand Source link

झारखंड

साइबर अपराधियों को बैंक खाते बेचने वाला गिरफ्तार:लोगों को लालच देकर खुलवाता...

धनबाद साइबर थाना पुलिस ने साइबर अपराधियों को बैंक खाते बेचने वाले एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने पुराना बरवाअड्डा थाना के सामने स्थित कृष्णा इंटरनेट कैफे में छापेमारी कर तिसरा थाना क्षेत्र के मुकुन्दा निवासी संतोष कुमार गोराई को पकड़ा। डीएसपी सीसीआर प्रदीप कुमार साव ने सोमवार को बताया कि वरीय पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर गठित टीम ने यह कार्रवाई की। आरोपी की तलाशी के दौरान उसके पास से एक मोबाइल फोन, छह सिम कार्ड और विभिन्न बैंकों के सात एटीएम कार्ड बरामद हुए। खातों को साइबर अपराधियों को 20 से 25 हजार रुपए में बेच देता था पुलिस पूछताछ में आरोपी संतोष कुमार गोराई ने स्वीकार किया कि वह लोगों को लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाता था। इसके लिए वह उन्हें पांच हजार रुपए तक देता था और खाते से जुड़े एटीएम कार्ड व मोबाइल नंबर अपने पास रख लेता था। बाद में इन खातों को साइबर अपराधियों को 20 से 25 हजार रुपए में बेच दिया जाता था। जांच के दौरान आरोपी के मोबाइल फोन से कई बैंक खातों और यूपीआई एप्लीकेशन से जुड़े स्क्रीनशॉट भी मिले हैं। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि इन खातों के खिलाफ राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर साइबर ठगी से संबंधित कई शिकायतें दर्ज हैं। पुलिस के अनुसार, इन खातों का उपयोग साइबर ठगी से अर्जित राशि के लेन-देन और निकासी के लिए किया जाता था। इस मामले में साइबर थाना धनबाद में कांड संख्या 32/2026 दर्ज की गई है। आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं और आईटी एक्ट की धारा 66(C) व 66(D) के तहत कार्रवाई की गई है। पुलिस अब पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है और गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है। Source link

शिक्षा

10 राज्यों के 50 गांवों में पर्यटन के साथ लर्निंग:विदेशी बच्चों की...

टोटो, दुनिया की सबसे छोटी जनजाति है। पश्चिम बंगाल के टोटोपारा गांव में इस जनजाति के आखिरी बचे 1700 लोग रहते हैं। गांव अपनी पहचान के लिए संघर्ष कर रहा था, इकलौते स्कूल में एक अतिरिक्त कमरे की जरूरत थी। खानपान को बचाने के लिए महिलाएं कैफे खोलना चाहती थीं। टोटोपारा से 2500 किलोमीटर दूर बेंगलुरु की क्राइस्ट यूनिवर्सिटी के छात्रों का 14 सदस्यीय दल बीते साल इस गांव की विजिट पर आया। अपने 10 दिन के टूर में छात्रों ने महिलाओं के साथ मिलकर कैफे का प्राइसिंग मॉडल-मेन्यू बनाया। छात्रों की इस यात्रा से गांव को 6 लाख रु. की कमाई हुई। इससे स्कूल का कमरा तैयार हो गया, कैफे भी खुल गया। ‘लोकल नैरेटिव्स’ ने गांवों में पर्यटन को मनोरंजन तक सीमित नहीं रखा, बल्कि लर्निंग से जोड़ दिया। जापान-ऑस्ट्रेलिया के 10 संस्थान जुड़े ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू कासल, क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी और जापान में टोक्यो व नागोया के 8 स्कूलों के बच्चे इसे सीखने के लिए भारत आ रहे हैं। भारत के 50 गांव मेजबानी के लिए तैयार वैष्णवी बताती हैं, लोकल नैरेटिव्स की शुरुआत 2021 में हुई। कम्युनिटी आधारित पर्यटन का उद्देश्य लोकल की तरह गांव में रहकर जनजीवन समझना-सीखना है। इसमें 50 गांवों को मेजबानी के लिए तैयार किया है। इससे गांवों को भी फायदा हो रहा है। उत्तराखंड के सुनकिया में छात्रों की यात्रा के बाद वहां देश की पहली कम्युनिटी टूरिज्म प्लेबुक तैयार हुई। इससे पर्यटन में मदद मिल रही है। एक अन्य यात्रा में गोवा के असनोरा में बुनकर महिलाओं को खरीदारों से जोड़ा, इससे उनकी कमाई बढ़ी। वैष्णवी सोमानी फाउंडर- लोकल नैरेटिव्स IIM बेंगलुरु ने इसे क्रेडिट प्रोग्राम के रूप में अप्रूव किया वैष्णवी कहती हैं, हमने पर्यटन को लर्निंग से जोड़ा। इसके लिए 5 दिन का करिकुलम बनाया। इसमें लोकल नैरेटिव्स को-फैकल्टी था। IIM बेंगलुरु ने इस कोर्स को अप्रूव किया। यानी गांवों में सामाजिक उद्यमिता सीखने के बाद छात्रों को 3 क्रेडिट मतलब मार्क्स भी मिल रहे हैं। – जैसा रोमेश साहू को बताया Source link

झारखंड

धनबाद के राजगंज में युवक की सांप काटने से मौत:एसएनएमएमसीएच में इलाज...

धनबाद के राजगंज थाना क्षेत्र अंतर्गत बरदार गांव में सांप काटने से एक 38 वर्षीय युवक की मौत हो गई। घटना रविवार रात की है, जिसके बाद सोमवार सुबह इलाज के दौरान युवक ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। जानकारी के अनुसार, मृतक कामदेव सिंह रविवार रात अपने घर के कमरे में जमीन पर सो रहे थे। इसी दौरान देर रात एक काले रंग के जहरीले सांप ने उनके हाथ पर डस लिया। बताया जाता है कि सांप ने उनके हाथ को जकड़ रखा था, जिसे उन्होंने किसी तरह छुड़ाया। कामदेव सिंह ने तुरंत परिवार के सदस्यों को घटना की जानकारी दी। परिजन उन्हें तत्काल इलाज के लिए धनबाद स्थित शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एसएनएमएमसीएच) ले गए। अस्पताल में डॉक्टरों ने कामदेव सिंह का इलाज शुरू किया, लेकिन उनकी हालत लगातार गंभीर बनी रही। इलाज के दौरान सोमवार सुबह उनकी मौत हो गई। कामदेव सिंह दिहाड़ी मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। उनकी असामयिक मृत्यु से परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने भी इस घटना पर दुख व्यक्त किया है। Source link

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‘हमें भी एनडीए में शामिल होना है’, TMC के 20 बागी सांसदों...

होमताजा खबरदेश ‘हमें भी एनडीए में शामिल होना है’, TMC के 20 बागी सांसदों का ओम बिरला को पत्र Last Updated:June 08, 2026, 15:28 IST नई दिल्ली में तृणमूल कांग्रेस के भीतर बड़ी राजनीतिक हलचल की खबर है. दावा किया जा रहा है कि पार्टी के 20 असंतुष्ट सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र भेजकर अलग गुट बनाने की मांग की है. बताया जा रहा है कि इस पहल का नेतृत्व काकोली घोष दस्तीदार कर रही हैं. इससे पहले बागी सांसदों ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर एक गोपनीय बैठक की, जिसमें सुवेंदु अधिकारी के मौजूद रहने की भी चर्चा है. जगदीश चंद्र बसुनिया, अरुप चक्रवर्ती, प्रसून बनर्जी, शर्मिला सरकार और खलीलुर रहमान समेत कई नेताओं के नाम सामने आए हैं, जबकि देव, पार्थ भौमिक और जून माल्या को लेकर भी अटकलें लगाई जा रही हैं. हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है. पश्चिम बंगाल विधानसभा के बाद लोकसभा में टीएमसी में टूट. नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल के बाद नई दिल्ली में तृणमूल कांग्रेस में बड़ी टूट होने का प्रोसेस शुरू हो गया है. तृणमूल कांग्रेस के 20 असंतुष्ट सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र भेजा है और उन्होंने अलग गुट बनाने का प्रस्ताव दिया है. बताया जा रहा है कि इस गुट का नेतृत्व सांसद काकोली घोष दस्तीदार कर रही हैं. दिलचस्प बात यह है कि यह बगावत ऐसे समय में आया है जब तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी नई दिल्ली में ही मौजूद हैं. उनके साथ पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी भी हैं. इन सांसदों के पास दो विकल्प हैं. या तो ये टीएमसी से अलग होकर बीजेपी में शामिल हो जाएं या फिर विधानसभा की तरह अलग गुट बनाकर अलग हों. बताया जा रहा है कि तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों ने लोकसभा स्पीकर को पत्र भेजने से पहले दिल्ली के मोतीलाल नेहरू मार्ग पर स्थित केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के सरकारी आवास पर सोमवार को एक बेहद गोपनीय बैठक की, जिसमें पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी भी मौजूद रहे. ये हो सकते हैं बागी सांसद लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को सौंपे गए पत्र में जगदीश चंद्र बसुनिया, अरुप चक्रवर्ती, प्रसून बनर्जी, शर्मिला सरकार और खलीलुर रहमान जैसे नेताओं के नाम प्रमुखता से सामने आ रहे हैं. वहीं काकोली घोष दस्तीदार, पार्थ भौमिक, अभिनेता-राजनेता देव और जून माल्या को लेकर भी असंतोष की अटकलें लगाई जा रही हैं. तृणमूल सांसद सुखेंदु शेखर राय ने पार्टी से इस्तीफा दिया, राज्यसभा सदस्य पद छोड़ा तृणमूल कांग्रेस को बड़ा झटका देते हुए वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर राय ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और राज्यसभा दोनों से इस्तीफा दे दिया. पार्टी के संस्थापक सदस्यों में शामिल राय का यह कदम ऐसे समय आया है, जब संगठन के भीतर लंबे समय से असंतोष और गुटबाजी की चर्चा चल रही है. उनके इस्तीफे ने संकेत दिया है कि पार्टी के अंदरूनी मतभेद अब संसदीय स्तर तक पहुंच चुके हैं. राय ने अपने इस्तीफे में शासन और संगठन में बढ़ते भ्रष्टाचार तथा जनता के बढ़ते असंतोष को वजह बताया. उन्होंने आरजी कर अस्पताल दुष्कर्म-हत्याकांड मामले में पार्टी के रुख पर भी लगातार सवाल उठाए थे. उनका इस्तीफा उस बगावत के कुछ दिन बाद आया है, जिसमें 58 विधायकों ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ जाकर रिताब्रता बनर्जी का समर्थन किया था. विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर उभरी दरारें अब और गहरी होती दिखाई दे रही हैं. About the Author Abhishek Kumar अभिषेक कुमार News18 की डिजिटल टीम में बतौर एसोसिएट एड‍िटर काम कर रहे हैं. वे यहां बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तसीगढ़, उत्तराखंड की राजनीति, क्राइम समेत तमाम समसामयिक मुद्दों पर लिखते …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi Source link

झारखंड

फाइन आर्ट्स सीखना है तो यहां लें एडमिशन, ये हैं शहर के...

Last Updated:June 08, 2026, 15:24 IST Jamshedpur Best Colleges For Fine Arts: जमशेदपुर में फाइन आर्ट्स की पढ़ाई करना चाहते हैं तो ये कुछ ऑप्शन हैं, जिनमें से आप चुनाव कर सकते हैं. JWU, द ग्रेजुएट स्कूल कॉलेज फॉर वूमेन, करीम सिटी कॉलेज और निजी आर्ट स्टूडियो में आर्ट्स व विजुअल आर्ट्स की पढ़ाई व ट्रेनिंग मिलती है. अगर आपको पेंटिंग, स्केचिंग, मूर्तिकला, ग्राफिक डिजाइन, क्राफ्ट या विजुअल आर्ट्स में रुचि है और आप फाइन आर्ट्स में करियर बनाना चाहते हैं, तो जमशेदपुर में कुछ ऐसे कॉलेज और संस्थान हैं जहां कला विषयों की पढ़ाई के साथ अपनी प्रतिभा को निखारा जा सकता है. हालांकि शहर में बीएफए (Bachelor of Fine Arts) जैसे विशेष कोर्स सीमित हैं, लेकिन कई कॉलेजों में आर्ट्स और विजुअल आर्ट्स से जुड़े विषय पढ़ाए जाते हैं, जो आगे फाइन आर्ट्स के क्षेत्र में करियर बनाने का रास्ता खोलते हैं. सबसे पहले बात करें जमशेदपुर विमेंस यूनिवर्सिटी (JWU) की, जो शहर के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में शामिल है. यहां आर्ट्स संकाय के अंतर्गत विभिन्न विषयों की पढ़ाई होती है. बीए कोर्स की कुल फीस लगभग 20 हजार रुपये के आसपास है. विश्वविद्यालय में ड्राइंग, पेंटिंग, सांस्कृतिक गतिविधियों और रचनात्मक कला को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं. दूसरा प्रमुख संस्थान द ग्रेजुएट स्कूल कॉलेज फॉर वूमेन, साकची है. यह कोल्हान विश्वविद्यालय से संबद्ध एक पुराना और प्रतिष्ठित महिला कॉलेज है. यहां आर्ट्स स्ट्रीम में पढ़ाई के साथ छात्राओं को सांस्कृतिक और रचनात्मक गतिविधियों में भाग लेने का अवसर मिलता है. कॉलेज में हजारों छात्राएं अध्ययन करती हैं और कला विषयों में बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध है. Add News18 as Preferred Source on Google करीम सिटी कॉलेज भी जमशेदपुर के प्रमुख कॉलेजों में गिना जाता है. यहां बीए ऑनर्स के विभिन्न विषय उपलब्ध हैं और फीस अपेक्षाकृत कम है. कला और साहित्य से जुड़े कार्यक्रमों के अलावा कॉलेज में सांस्कृतिक गतिविधियों पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है. अगर कोई छात्र आगे चलकर फाइन आर्ट्स, डिजाइनिंग या विजुअल कम्युनिकेशन में जाना चाहता है तो यह एक अच्छा आधार दे सकता है. इसके अलावा शहर में कई निजी संस्थान, आर्ट स्टूडियो और डिजाइनिंग अकादमियां भी हैं जहां स्केचिंग, कैनवास पेंटिंग, डिजिटल आर्ट, ग्राफिक डिजाइन और क्राफ्ट की ट्रेनिंग दी जाती है. कई छात्र स्नातक के साथ-साथ इन संस्थानों से प्रोफेशनल प्रशिक्षण लेकर अपनी कला को और बेहतर बनाते हैं. इससे प्रतियोगिताओं, प्रदर्शनियों और फ्रीलांसिंग के अवसर भी बढ़ जाते हैं. फाइन आर्ट्स की पढ़ाई के बाद छात्र पेंटर, इलस्ट्रेटर, ग्राफिक डिजाइनर, एनीमेशन आर्टिस्ट, आर्ट टीचर, आर्ट डायरेक्टर, फैशन इलस्ट्रेटर या स्वतंत्र कलाकार के रूप में करियर बना सकते हैं. आज डिजिटल मीडिया और सोशल मीडिया के दौर में कला के क्षेत्र में रोजगार और स्वरोजगार दोनों की संभावनाएं तेजी से बढ़ रही हैं. इसलिए अगर आपके भीतर रचनात्मकता है, तो जमशेदपुर के ये संस्थान आपके सपनों को नई उड़ान दे सकते हैं. Source link

झारखंड

गुमला में दो गिरफ्तार, पिस्तौल और गोली बरामद:दो अलग-अलग मामलों में हुई...

गुमला पुलिस ने सोमवार को दो अलग-अलग मामलों में दो अपराधियों को हथियार के साथ गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पुलिस ने उनके पास से दो पिस्तौल और जिंदा गोलियां बरामद की है। पहली घटना सदर थाना क्षेत्र के चेटर निवासी शिवा केरकेट्टा से संबंधित है। पुलिस ने उसे सोमवार दोपहर करीब 12 बजे गिरफ्तार कर जेल भेजा। उसके पास से एक पिस्तौल और तीन जिंदा गोलियां बरामद हुईं। एसडीपीओ सुरेश प्रसाद यादव ने बताया कि रविवार शाम करीब 6:15 बजे चेटर मैदान में क्रिकेट मैच चल रहा था। इस दौरान अंपायरिंग कर रहे विकास कॉलोनी निवासी बलजीत सिंह का शिवा केरकेट्टा से मामूली विवाद हो गया। विवाद बढ़ने पर शिवा केरकेट्टा ने अपनी कमर से पिस्तौल निकालकर बलजीत सिंह पर तीन गोलियां चला दीं। हालांकि, गोली किसी को नहीं लगी। घटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने शिवा को पकड़ लिया और पिस्तौल छीनकर स्थानीय थाने को सौंप दिया था। दूसरी घटना में, गुमला पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि 13 बाईपास स्थित जोराग मोड़ के समीप एक व्यक्ति किसी आपराधिक घटना को अंजाम देने की फिराक में घूम रहा है। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर जोराग निवासी अशोक नायक को धर दबोचा। तलाशी लेने पर अशोक नायक के पास से एक देसी कट्टा और एक जिंदा गोली बरामद हुई। पुलिस ने उसकी होंडा ड्रीम बाइक भी जब्त कर ली। हथियार के संबंध में पूछताछ करने पर अशोक कोई वैध दस्तावेज नहीं दिखा पाया। एसडीपीओ सुरेश प्रसाद ने बताया कि गिरफ्तार अशोक नायक का पहले भी आपराधिक इतिहास रहा है और वह एक हत्याकांड में भी शामिल था। Source link

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10 राज्यों के 50 गांवों में पर्यटन के साथ लर्निंग:विदेशी बच्चों की...

टोटो, दुनिया की सबसे छोटी जनजाति है। पश्चिम बंगाल के टोटोपारा गांव में इस जनजाति के आखिरी बचे 1700 लोग रहते हैं। गांव अपनी पहचान के लिए संघर्ष कर रहा था, इकलौते स्कूल में एक अतिरिक्त कमरे की जरूरत थी। खानपान को बचाने के लिए महिलाएं कैफे खोलना चाहती थीं। टोटोपारा से 2500 किलोमीटर दूर बेंगलुरु की क्राइस्ट यूनिवर्सिटी के छात्रों का 14 सदस्यीय दल बीते साल इस गांव की विजिट पर आया। अपने 10 दिन के टूर में छात्रों ने महिलाओं के साथ मिलकर कैफे का प्राइसिंग मॉडल-मेन्यू बनाया। छात्रों की इस यात्रा से गांव को 6 लाख रु. की कमाई हुई। इससे स्कूल का कमरा तैयार हो गया, कैफे भी खुल गया। ‘लोकल नैरेटिव्स’ ने गांवों में पर्यटन को मनोरंजन तक सीमित नहीं रखा, बल्कि लर्निंग से जोड़ दिया। जापान-ऑस्ट्रेलिया के 10 संस्थान जुड़े ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू कासल, क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी और जापान में टोक्यो व नागोया के 8 स्कूलों के बच्चे इसे सीखने के लिए भारत आ रहे हैं। भारत के 50 गांव मेजबानी के लिए तैयार वैष्णवी बताती हैं, लोकल नैरेटिव्स की शुरुआत 2021 में हुई। कम्युनिटी आधारित पर्यटन का उद्देश्य लोकल की तरह गांव में रहकर जनजीवन समझना-सीखना है। इसमें 50 गांवों को मेजबानी के लिए तैयार किया है। इससे गांवों को भी फायदा हो रहा है। उत्तराखंड के सुनकिया में छात्रों की यात्रा के बाद वहां देश की पहली कम्युनिटी टूरिज्म प्लेबुक तैयार हुई। इससे पर्यटन में मदद मिल रही है। एक अन्य यात्रा में गोवा के असनोरा में बुनकर महिलाओं को खरीदारों से जोड़ा, इससे उनकी कमाई बढ़ी। वैष्णवी सोमानी फाउंडर- लोकल नैरेटिव्स IIM बेंगलुरु ने इसे क्रेडिट प्रोग्राम के रूप में अप्रूव किया वैष्णवी कहती हैं, हमने पर्यटन को लर्निंग से जोड़ा। इसके लिए 5 दिन का करिकुलम बनाया। इसमें लोकल नैरेटिव्स को-फैकल्टी था। IIM बेंगलुरु ने इस कोर्स को अप्रूव किया। यानी गांवों में सामाजिक उद्यमिता सीखने के बाद छात्रों को 3 क्रेडिट मतलब मार्क्स भी मिल रहे हैं। – जैसा रोमेश साहू को बताया Source link

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कोडरमा के मसनोडीह आम की अमेरिका तक मांग:बागान की 24 घंटे होती...

कोडरमा जिले के डोमचांच प्रखंड स्थित मसनोडीह गांव के आम बागान इन दिनों अपनी खास पहचान बना रहे हैं। यहां के आमों की बिक्री शुरू हो गई है, जिनकी मांग देश ही नहीं, बल्कि अमेरिका तक है। इन मूल्यवान आमों की सुरक्षा के लिए बागानों में 24 घंटे सख्त पहरा रहता है, जिसमें तीन शिफ्ट में पहरेदारी की जाती है। विनय सिंह परिवार के इस विशाल बागान में एक हजार से अधिक आम के पेड़ हैं, जिनमें एक दर्जन से ज्यादा किस्में शामिल हैं। बागान की देखरेख कर रहे राजू मेहता ने बताया कि कुल सात बागानों में लगभग 3 हजार आम के पेड़ हैं। इन पेड़ों में मालदा, जर्दालु, गुलाब खास, बम्बईया, हिमसागर, किशुन भोग, बेलखास, मणिका, सीपिया, फ़ज़ली जैसी प्रमुख किस्में शामिल हैं। अचार के लिए प्रसिद्ध बिजुआ और सुकूल जैसी किस्में भी यहां उपलब्ध हैं। दूर-दराज से लोग खरीदारी के लिए पहुंचते हैं यहां प्राकृतिक रूप से पके ताजे आम सीधे पेड़ों से उपलब्ध होते हैं, जिससे दूर-दराज से लोग खरीदारी के लिए पहुंचते हैं। रांची से 150 किलोमीटर दूर और आसपास के 20-30 किलोमीटर के दायरे से भी ग्राहक आम खरीदने आते हैं। बिहार सहित अन्य जिलों के ग्राहक भी ट्रेन और बस के माध्यम से ऑर्डर पर आम मंगवाते हैं। राजू मेहता ने बताया कि पिछले 20 वर्षों से वे आम के कारोबार से जुड़े हैं। मसनोडीह के आम की मांग इतनी अधिक है कि एक बार जब एक नियमित ग्राहक को दूसरे स्थान का आम भेजा गया, तो उन्होंने उसे पसंद नहीं किया और अगले वर्ष फिर मसनोडीह के आम की ही मांग की। 30 किलो आम मंगवाया था मसनोडीह के आम अब केवल कोडरमा या झारखंड तक सीमित नहीं हैं। यहां के आम दिल्ली तक भेजे जा चुके हैं। पिछले वर्ष कोडरमा के एक व्यक्ति ने अमेरिका में रहने वाले अपने परिचितों के लिए 30 किलो आम मंगवाया था, जिसे 10-10 किलो के पैकेट बनाकर भेजा गया था। विनय सिंह के परिवार द्वारा हर वर्ष आम तैयार होने पर जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों तथा विशिष्ट लोगों को भी भेंट स्वरूप आम भेजे जाते हैं। लोगों को हर साल इस बागान के आम का बेसब्री से इंतजार रहता है। एक सीजन में 4 से 5 लाख रुपए की आमदनी आम विक्रेता राजू कुमार ने बताया कि यहां के अलग-अलग आमों को वे 50 से 80 रुपए प्रति किलो तक की दर से बेचते हैं। उन्होंने बताया कि अगर आंधी-तूफान में आम नहीं गिरते हैं तो वे एक सीजन में लगभग 4 से 5 लाख रुपए की आमदनी हो जाती है। 60:40 के अनुपात में आम के पेड़ की होती है डील आम बागान के मालिक विनय सिंह ने बताया कि अब आम के पेड़ों को बटैया (किराए पर) दे दिया गया है। इसके तहत इनके आम के पेड़ों को किराए पर लेने वाले पेड़ों से टूटने वाले प्रति 100 आमों में 60 आम इन्हें दे देते हैं, जबकि 40 आम वे बेच दिया करते हैं। आम की सुरक्षा के लिए दिन-रात पहरा बढ़ती मांग के साथ आम चोरी होने की आशंका भी बनी रहती है। इसी कारण पूरे बागान की सुरक्षा के लिए 24 घंटे निगरानी की व्यवस्था की गई है। उन्होंने बताया कि बागान की रखवाली तीन शिफ्टों में होती है। रात के समय बड़े टॉर्च की सहायता से पूरे बागान पर नजर रखी जाती है। सुरक्षा के लिए विभिन्न स्थानों पर बांस के मचान भी बनाए गए हैं। जहां बैठकर रखवाले लगातार निगरानी करते हैं। बाजार से महंगा पर शुद्धता पूरी इधर, आम खरीदने आए एक ग्राहक मुन्ना कुमार सिंह ने बताया कि बाजार में तो हर किस्म के आम उपलब्ध हैं लेकिन मसनोडीह के बगीचे के आम का एक अलग ही स्वाद है। एक ओर जहां बाजार के आम केमिकल युक्त होते हैं, वहीं मसनोडीह बगीचे का आम इससे अलग प्राकृतिक रूप से पका हुआ मिलता है। उन्होंने कहा कि हमलोग यहां आते हैं तो आम को पहले चखते हैं। इसके बाद आम की खरीदारी करते हैं। 63 साल पुरानी विरासत आज भी दे रही फल मसनोडीह का यह आम बागान रूपक सिंह परिवार के पूर्वजों द्वारा वर्ष 1963 में लगाया गया था। कुछ वर्षों बाद पेड़ों में फल आने शुरू हुए और तब से यह सिलसिला लगातार जारी है। छह दशक से अधिक समय बाद भी यह बागान न केवल स्वादिष्ट आमों का उत्पादन कर रहा है, बल्कि अपनी मिठास से लोगों के रिश्तों में भी मिठास घोलने का काम कर रहा है। यही वजह है कि मसनोडीह का नाम आज क्षेत्र के सबसे प्रसिद्ध आम बागानों में शुमार हो चुका है। Source link

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sitamarhi pupri farmers getting huge profit from himsagar mango cultivation tips

होमताजा खबरकृषि सीतामढ़ी में इस आम की खेती से मालामाल हो रहे किसान, हर साल बंपर कमाई निश्चित Last Updated:June 08, 2026, 14:21 IST Himsagar Mango Cultivation Sitamarhi Tips: सीतामढ़ी के पुपरी में पारंपरिक खेती छोड़ किसान अब हिमसागर आम की बागवानी से बंपर मुनाफा कमा रहे हैं. मालदा-बम्बई से भी मीठे और पूरी तरह रेशा रहित इस आम की खासियत यह है कि यह बिना किसी गैप के हर साल फलता है. जानिए प्रगतिशील किसान पप्पू ठाकुर से इस आम की खासियत और पौधे मिलने की जगह. सीतामढ़ी: सीतामढ़ी जिले में पारंपरिक खेती से अलग हटकर किसान अब आम की बागवानी में नए प्रयोग कर रहे हैं. जिले के पुपरी ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में इन दिनों हिमसागर प्रजाति के आम की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है. अपनी मनमोहक खुशबू, रसीले स्वाद और पूरी तरह से रेशा रहित गूदे के कारण इस आम ने स्थानीय बाजार में अपनी एक खास और मजबूत पहचान बना ली है. क्षेत्र के प्रगतिशील किसान पप्पू ठाकुर पिछले कुछ समय से करीब डेढ़ एकड़ की भूमि पर हिमसागर आम के बगीचे की सफल खेती कर रहे हैं. उनके इस प्रयास को देखकर आसपास के अन्य किसान भी अब इस खास किस्म के आम के पौधे लगाने की ओर आकर्षित हो रहे हैं. हिमसागर से हर सीजन में निश्चित आमदनी​हिमसागर आम की सबसे बड़ी यूएसपी (विशेषता) इसका हर साल फल देना है. आमतौर पर मालदा और बम्बई जैसी आम की लोकप्रिय किस्में एक साल के अंतराल (गैप) पर फलती हैं. जिसे किसान ऑफ-ईयर और ऑन-ईयर कहते हैं. लेकिन हिमसागर के साथ ऐसा नहीं है. दसहरी और अम्रपाली की तरह ही हिमसागर के पेड़ों में भी नियमित रूप से हर वर्ष बंपर फल आते हैं. लगातार उत्पादन होने के कारण किसानों को हर सीजन में निश्चित आमदनी होती है. जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है. इस आम का पौधा लगाने के बाद महज पांच साल के भीतर ही फल देना शुरू कर देता है, जो व्यावसायिक दृष्टिकोण से किसानों के लिए बेहद फायदेमंद सौदा साबित हो रहा है. दिखने में बम्बई जैसा, खाने में मालदा से सौ गुना बेहतर​स्वाद और दिखावट के मामले में भी यह आम बेहद अनूठा और लाजवाब है. यह दिखने में बम्बई आम जैसा होता है, लेकिन इसका गूदा अंदर से एकदम गहरा और लाल होता है. स्थानीय किसानों का दावा है कि खाने के मामले में यह मालदा और बम्बई आम की तुलना में सौ गुना बेहतर, अत्यधिक मीठा और स्वादिष्ट है. इसके फल का आकार भी काफी अच्छा होता है. लगभग एक किलोग्राम वजन में चार से पांच आम चढ़ते हैं. इसका मतलब है कि एक आम का आकार इतना पर्याप्त होता है कि कोई एक व्यक्ति इसे खा ले तो उसका मन पूरी तरह तृप्त हो जाए. स्वाद के साथ-साथ यह स्वास्थ्य के लिहाज से भी काफी सेहतमंद और फायदेमंद माना जाता है. यहां ले सकते हैं हिमसागर के पौधे​किसानों के लिए मुनाफे को बढ़ाने के लिए अब क्षेत्र में ही बड़े पैमाने पर इसकी ग्राफ्टिंग (कलम तैयार करना) का कार्य भी शुरू कर दिया गया है. किसान पप्पू ठाकुर के अनुसार, जो भी लोग इस बेहतरीन प्रजाति की बागवानी करना चाहते हैं, उनके लिए उनके यहां हिमसागर के उन्नत पौधे भी आसानी से उपलब्ध हैं. इस प्रकार, सीतामढ़ी के पुपरी में हिमसागर आम न केवल अपनी मिठास से लोगों का दिल जीत रहा है, बल्कि नियमित और बेहतर उत्पादन के जरिए किसानों के जीवन में समृद्धि की नई मिठास घोल रहा है. कृषि क्षेत्र में इस तरह के आत्मनिर्भर प्रयास निश्चित रूप से सराहनीय हैं. About the Author Amit ranjan मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Sitamarhi,Bihar Source link

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