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झारखंड

Jharkhand takes major action against drug traffickers… Those providing information on drugs...

Hindi News Local Jharkhand Ranchi Jharkhand Takes Major Action Against Drug Traffickers… Those Providing Information On Drugs Will Receive A Reward Of Up To 2 Lakh Rupees. रांची8 घंटे पहले कॉपी लिंक झारखंड सरकार ने नशे के कारोबार का नेटवर्क तोड़ने के लिए कैश रिवार्ड पॉलिसी लागू कर दी है। गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने शुक्रवार को इसका संकल्प जारी कर दिया। इस नियम के तहत अफीम, हेरोइन, ब्राउन शुगर और सिंथेटिक दवा जैसे मादक पदार्थों के अवैध कारोबार की जानकारी देने वालों को सरकार तीन हजार रुपए से दो लाख रुपए तक का इनाम देगी। यह इनाम सिर्फ आम लोगों को ही नहीं, बल्कि तस्करों को रंगे हाथ दबोचने वाले पुलिसकर्मियों और सरकारी कर्मचारियों को भी दिया जाएगा। इस पॉलिसी को 27 मई को हुई कैबिनेट की बैठक में मंजूरी दी गई थी। सरकार ने संकल्प में पूरी तरह से स्पष्ट कर दिया है कि जानकारी देने वालों का नाम-पता और कोई भी निजी जानकारी पूरी तरह से गुप्त रखी जाएगी। वह सबकुछ जो आपके लिए जानना जरूरी है कैसे तय होगी इनाम राशि: नशे की तस्करी की सटीक सूचना देने पर कम से कम 3000 रुपए और अधिकतम दो लाख रुपए तक का नकद इनाम मिलेगा। यह इनाम राशि इस बात पर निर्भर करेगा कि बरामद मादक पदार्थ किस श्रेणी का है और उसकी मात्रा कितनी है। किसे मिलेगा यह इनाम: कोई भी नागरिक जो ड्रग्स के धंधे की जानकारी पुलिस या संबंधित विभाग को देगा। यह सिर्फ आम जनता नहीं, अपनी जान जोखिम में डालकर नशा तस्करों को रंगे हाथ दबोचने वाले या भारी मात्रा में ड्रग्स जब्त करने वाले पुलिस अधिकारियों और सरकारी कर्मचारियों को भी मिलेगा, ताकि उन्हें प्रोत्साहित किया जा सके। कैसे काम करेगी यह व्यवस्था: यह नीति पूरी तरह एनडीपीएस एक्ट 1985 के प्रावधानों के तहत लागू की गई है। इसके दायरे में अवैध उत्पादन, तस्करी, खरीद-बिक्री और अवैध परिवहन, सब कुछ शामिल है। राज्य सरकार इसके लिए उच्चस्तरीय विशेष समिति बनाएगी। यह सूचना की प्रमाणिकता और जब्ती की जांच के बाद दो लाख रुपए तक के पुरस्कार की अनुशंसा करेगी। अगर ड्रग्स की खेप अंतरराष्ट्रीय या अंतरराज्यीय स्तर की है तो इनाम राशि दो लाख रुपए से अधिक की बनती है। ऐसे में इसे अंतिम मंजूरी के लिए केंद्र सरकार की नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) को भेजा जाएगा। सूचना देने वालें पर हमला हुआ तो क्या होगा: सूचना देने वालों पर अगर हमला हुआ और उसकी मौत हो गई तो उसके आश्रित को 20 लाख रुपए दिए जाएंगे। स्थाई दिव्यांगता होने पर 10 लाख रुपए, 40 प्रतिशत या इससे अधिक दिव्यांगता पर पांच लाख रुपए दिए जाएंगे। वहीं गंभीर रूप से घायल होने तीन लाख और सामान्य रूप से घायल होने की स्थिति में 50 हजार रुपए दिए जाएंगे। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ Source link

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West Bengal Bullet Train : बंगाल में दौड़ेगी बुलेट ट्रेन, लखनऊ-पटना होते...

होमताजा खबरदेश बंगाल में दौड़ेगी बुलेट ट्रेन, लखनऊ-पटना होते हुए पहुंचेगी चिकन नेक Last Updated:June 06, 2026, 13:55 IST West Bengal Bullet Train: रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पश्चिम बंगाल के लिए कई बड़ी रेलवे परियोजनाओं का ऐलान किया है. इस दौरान उन्होंने कहा कि राज्य को जल्द ही बुलेट ट्रेन की सौगात मिलेगी. उन्होंने बताया कि यह प्रस्तावित हाईस्पीड रेल कॉरिडोर दिल्ली से सिलीगुड़ी तक जाएगा और इसके रास्ते में लखनऊ, वाराणसी और पटना जैसे प्रमुख शहर शामिल होंगे. इस बुलेट ट्रेन के शुरू होने के बाद दिल्ली से सिलीगुड़ी की यात्रा महज छह घंटे में पूरी की जा सकेगी. केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शनिवार को पश्चिम बंगाल के लिए कई बड़ी रेलवे परियोजनाओं का ऐलान किया है. पश्चिम बंगाल को जल्द ही बुलेट ट्रेन की सौगात मिलने वाली है. केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शनिवार को पश्चिम बंगाल के लिए कई बड़ी रेलवे परियोजनाओं का ऐलान किया है. उन्होंने बताया कि प्रस्तावित हाईस्पीड रेल कॉरिडोर दिल्ली से सिलीगुड़ी तक जाएगा और इसके रास्ते में लखनऊ, वाराणसी और पटना जैसे प्रमुख शहर शामिल होंगे. इस बुलेट ट्रेन के शुरू होने के बाद दिल्ली से सिलीगुड़ी की यात्रा महज छह घंटे में पूरी की जा सकेगी. यह पहला मौका था, जब अश्विनी वैष्णव के साथ पूरा रेलवे बोर्ड कोलकाता दौरे पर पहुंचा और सभी पेंडिंग प्रोजेक्ट को तेजी से आगे बढ़ाने चर्चा की. इस मौके पर रेल मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पश्चिम बंगाल में रेलवे ढांचे को मजबूत करने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश किया जा रहा है. उन्होंने दावा किया कि यूपीए सरकार के समय राज्य के रेलवे विकास के लिए जहां करीब 4,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे, वहीं मौजूदा सरकार ने यह राशि बढ़ाकर 14,205 करोड़ रुपये कर दी है. अब तेजी से बढ़ेगा रेल प्रोजेक्ट का काम वैष्णव ने कहा कि लंबे समय तक कई रेलवे परियोजनाएं प्रशासनिक मंजूरी और भूमि संबंधी अड़चनों के कारण अटकी रहीं. कुछ मामलों में विवाद अदालतों तक पहुंच गए थे. उन्होंने कहा कि अब इन बाधाओं को दूर कर परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा. Never ever such has happened anywhere but today, WHOLE Railway Board has come down to Bengal to address all pending issues. Bengal so far has been a hostile State with no coordination at Central level, but 2026 changed everything. Union Min. @AshwiniVaishnaw at Nabanna now. pic.twitter.com/kBMa76ut5K Source link

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मजाक-मजाक में शुरू हुआ बाजार, आज हजारों का कारोबार..! यहां महिलाएं लगाती...

पलामू. आज की महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से पीछे नहीं हैं. शिक्षा, कृषि, व्यवसाय, विज्ञान, खेल, राजनीति और सामाजिक नेतृत्व जैसे हर क्षेत्र में वे अपनी प्रतिभा और क्षमता का परचम लहरा रही हैं. जरूरत केवल उन्हें सही अवसर, मंच और प्रोत्साहन देने की है. जब महिलाओं को संसाधन, प्रशिक्षण और आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिलता है, तो वे न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करती हैं, बल्कि समाज और देश के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देती हैं. चैनपुर के चेडाबार गांव का ग्रामीण हाट इसकी एक जीवंत मिसाल है, जहां स्वयं सहायता समूह की महिलाएं अपने परिश्रम और सामूहिक प्रयास से सफलता की नई कहानी लिख रही हैं. बन रहीं आत्मनिर्भर, बना रही पहचानदरअसल, चैनपुर प्रखंड के चेडाबार गांव में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा संचालित ग्रामीण हाट आज महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की नई मिसाल बनकर उभरा है. सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर ग्रामीण महिलाएं न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि समाज में अपनी अलग पहचान भी बना रही हैं. दीदी बाड़ी योजना जैसी पहल ने महिलाओं को सब्जी उत्पादन से जोड़कर उन्हें स्वरोजगार का अवसर दिया है. कभी घर की चारदीवारी तक सीमित रहने वाली महिलाएं आज बाजार का संचालन कर रही हैं और अपने परिवार की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं. सरकारी योजनाओं से बदली महिलाओं की तस्वीरग्रामीण हाट की सफलता के पीछे स्वयं सहायता समूहों की सक्रियता और सरकारी योजनाओं का बड़ा योगदान है. महिलाओं ने दीदी बाड़ी योजना के तहत सब्जियों की खेती शुरू की और अपने उत्पादों के लिए स्थानीय बाजार तैयार किया. इससे उन्हें अपनी उपज बेचने के लिए दूर शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता. स्थानीय स्तर पर ही बाजार उपलब्ध होने से समय और खर्च दोनों की बचत हो रही है. साथ ही, ग्रामीणों को ताजी सब्जियां और जरूरी सामग्री भी गांव में ही मिल जा रही है. बैठक से शुरू हुई बाजार की अनोखी पहलसुनीता देवी ने लोकल18 को बताया कि बटुआ की ग्रामीण हाट की शुरुआत वर्ष 2022 में एक साधारण बैठक के दौरान हुई थी. स्वयं सहायता समूह की महिलाएं बैठक कर रही थीं, तभी एक महिला ने बताया कि उसके पास 15 से 20 किलो टमाटर है, जिसे बेचने के लिए उसे डालटनगंज जाना पड़ेगा. इस पर समूह की अन्य महिलाओं ने मिलकर उसका पूरा टमाटर खरीद लिया. संयोग से वह दिन गुरुवार था. इसके बाद महिलाओं ने तय किया कि हर गुरुवार को स्थानीय स्तर पर बाजार लगाया जाएगा, ताकि किसी भी महिला को अपनी उपज बेचने के लिए दूर न जाना पड़े. यही छोटी पहल आज एक सफल ग्रामीण हाट का रूप ले चुकी है. हर गुरुवार सजता है सब्जियों का बाजारआज चेडाबार का ग्रामीण हाट आसपास के क्षेत्रों में पहचान बना चुका है. गुरुवार को यहां बड़े पैमाने पर बाजार लगता है, जिसमें 15 से 20 स्टॉल लगाए जाते हैं. महिलाओं द्वारा ताजी सब्जियों के अलावा फास्ट फूड, चूड़ी-कंगन, श्रृंगार सामग्री तथा रोजमर्रा के उपयोग की वस्तुओं की बिक्री की जाती है. बाजार प्रतिदिन भी संचालित होता है, हालांकि गुरुवार को इसकी रौनक सबसे अधिक होती है. दोपहर तीन बजे से शाम सात बजे तक लगने वाला यह बाजार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रहा है. स्थायी शेड की मांग, मिलेगी और मजबूतीग्रामीण हाट से जुड़ी सुनीता देवी बताती हैं कि बरसात, तेज धूप और आंधी-पानी के दौरान बाजार संचालन में काफी परेशानी होती है. खुले में बैठने के कारण सब्जियां खराब होने का खतरा बना रहता है. महिलाओं की मांग है कि सरकार यहां स्थायी शेड का निर्माण कराए, जिससे बाजार को और व्यवस्थित तरीके से संचालित किया जा सके. यदि यह सुविधा मिलती है, तो ग्रामीण हाट का दायरा और अधिक बढ़ेगा तथा इससे जुड़ी महिलाओं की आय में भी बढ़ोतरी होगी. Source link

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कांके डैम को गंदा करने वाली 20 मुहल्लों की नालियां अब बंद...

कांके डैम को गंदा करने वाली नालियां बंद होंगी। सरोवर नगर, कांके रोड डैम साइड, इंद्रपुरी, पंडरा व पंचशील नगर सहित 20 से अधिक मुहल्लों में अब लोगों को घर के गंदे पानी की निकासी के लिए शॉकपिट बनाना होगा। नगर आयुक्त सुशांत गौरव ने शुक्रवार को कांके डैम का निरीक्षण करने के बाद यह आदेश दिया। नगर आयुक्त ने इन मुहल्लों से आने वाली नालियों को डायवर्ट करने की योजना बनाने को कहा, ताकि गंदा पानी डैम में न जा सके। डैम को बचाने के लिए उन्होंने स्पेशल टास्क फोर्स बनाने का निर्देश भी दिया। उन्होंने कहा कि डैम के पूरे क्षेत्र का ड्रोन सर्वे कराएं। ड्रोन मैपिंग करके कैचमेंट एरिया में प्लॉटवार अतिक्रमण चिह्नित करें। अवैध निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियों को चिह्नित कर उसे हटाएं। साथ ही डैम के पूरे क्षेत्र की मापी कर घेराबंदी करें, जिससे भविष्य में अति​क्रमण न हो। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पिछले दिनों नगर विकास विभाग की समीक्षा करते हुए कांके डैम को संरक्षित करने का निर्देश दिया था। सीएम के निर्देश के बाद नगर आयुक्त सुशांत गौरव जलाशयों के संरक्षण के लिए लगातार निरीक्षण कर रहे हैं। 10 साल में नहीं बना सीवरेज-ड्रेनेज, कहां बहेगा पानी रांची के जोन वन में पिछले 10 साल से सीवरेज प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। इसके अंतर्गत कांके डैम के तीन तरफ बसे मुहल्ले आते हैं। सीवरेज प्रोजेक्ट शुरू हो जाता तो अधिकतर घरों का सीवर पाइप से जुड़ जाता। ऐसे में घरों की गंदगी नाली के सहारे डैम में नहीं जाती। ऐसे में पानी कहां बहेगा। दूसरी आेर नगर निगम ने शहर में नालियां पर करोड़ों खर्च किया, लेकिन अधिकतर नालियां एक-दूसरे से नहीं जुड़ी है। ऐसे में डैम के किनारे बसे मुहल्लों का गंदा पानी सीधे डैम में जा रहा है। इसी डैम के पानी को फिल्टर करके शहर के एक लाख से अधिक लोगों को आपूर्ति की जा रही है। डैम के 15 मीटर दायरे में बने घर अतिक्रमण माने जाएंगे: नगर आयुक्त ने मास्टर प्लान के अनुसार वाटर बॉडी के क्षेत्र का निर्धारण करने के लिए कहा है। यानी कांके डैम के 15 मीटर के दायरे में जो भी घर हैं, उस पर कार्रवाई होगी। ऐसे भवनों को कब्जा मानते हुए निगम अवैध निर्माण का केस दर्ज करेगा। कब्जा हटाने की कार्रवाई भी होगी। डैम के चारों ओर वॉक-वे बनेगा, हरियाली बढ़ेगी: कांके डैम को बचाने के लिए चारों ओेर से घेराबंदी के अलावा एंड-टू-एंड वॉक-वे का निर्माण होगा। नगर आयुक्त ने इंजीनियरों को इसका प्रस्ताव तैयार करने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि वॉक-वे के साथ पौधरोपण भी होगा, ताकि चारों ओेर हरियाली दिखे। आज से होगी कार्रवाई, कई घरों की बाउंड्री टूटेगी: कांके डैम के क्षेत्र की मापी का काम शनिवार से शुरू होगा। नगर आयुक्त ने डैम के क्षेत्र में अवैध तरीके से चल रहे खटालों औैर संरचनाओं को तत्काल तोड़ने का निर्देश दिया है। वीड हार्वेस्टिंग मशीन से हटेगी जलकुंभी, गाद भी हटेगा कांके डैम में चारों ओर जलकुंभी है। नगर निगम द्वारा लंबे समय से जलकुंभी निकाला जा रहा है, लेकिन इसमें सफलता नहीं मिली है। इसे देखते हुए वीड हार्वेस्टिंग मशीन से जलकुंभी हटाई जाएगी। साथ ही पोकलेन मशीन से डैम का गाद निकाला जाएगा, ताकि मानसून में डैम में अधिक से अधिक पानी का भराव हो सके। Source link

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चतरा में ट्रक ने बाइक सवार को कुचला, मौत:चतरा-डोभी मुख्य मार्ग पर...

चतरा जिले के हंटरगंज थाना क्षेत्र में एक सड़क हादसे में 29 वर्षीय युवक की मौत हो गई। यह घटना बीती रात चतरा-डोभी मुख्य मार्ग पर भोंदल नगिनदहा पुल के पास हुई, जहां एक तेज रफ्तार अनियंत्रित ट्रक ने बाइक सवार को कुचल दिया। मृतक की पहचान हंटरगंज बाजार निवासी बर्तन व्यवसायी बिहारी गुप्ता के पुत्र रौशन गुप्ता उर्फ मुन्ना के रूप में हुई है। रौशन डुमरी पेट्रोल पंप से पेट्रोल भरवाकर अपने घर लौट रहे थे। जैसे ही उनकी बाइक भोंदल नगिनदहा पुल के पास पहुंची, सामने से आ रहे एक अनियंत्रित ट्रक ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। हादसे में रौशन की मौके पर ही मौत हो गई। दुर्घटना को अंजाम देने के बाद ट्रक चालक वाहन सहित मौके से फरार हो गया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि मुन्ना की घटनास्थल पर ही सांसें थम गईं। वहां से गुजर रहे राहगीरों और स्थानीय लोगों ने तुरंत इसकी सूचना हंटरगंज थाना पुलिस को दी, जिसके बाद पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर शव को अपने कब्जे में लिया। Source link

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पर्यावरण दिवस पर गाजीपुर में पौधारोपण की हकीकत, दम तोड़ रहे पौधे...

Last Updated:June 06, 2026, 12:45 IST विश्व पर्यावरण दिवस पर हर साल करोड़ों पौधे लगाने के दावे किए जाते हैं और सरकारी रिकॉर्ड में हरित अभियान की सफलता की लंबी कहानियां भी दर्ज होती हैं, लेकिन गाजीपुर में जमीनी हकीकत इन दावों से काफी अलग दिखाई दे रही है. पौधारोपण पर लाखों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद कई पौधे पर्याप्त देखभाल के अभाव में दम तोड़ रहे हैं, जबकि उनकी सुरक्षा के लिए लगाए गए ट्री गार्ड भी टूट-फूटकर बेकार हो चुके हैं. गाजीपुरः विश्व पर्यावरण दिवस पर हर साल करोड़ों पौधे लगाने के दावे किए जाते हैं और सरकारी रिकॉर्ड में हरित अभियान की सफलता की लंबी कहानियां भी दर्ज होती हैं, लेकिन गाजीपुर में जमीनी हकीकत इन दावों से काफी अलग दिखाई दे रही है. पौधारोपण पर लाखों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद कई पौधे पर्याप्त देखभाल के अभाव में दम तोड़ रहे हैं, जबकि उनकी सुरक्षा के लिए लगाए गए ट्री गार्ड भी टूट-फूटकर बेकार हो चुके हैं. इस स्थिति की पड़ताल करने के लिए लोकल 18 की टीम आरटीआई चौराहा से मेडिकल कॉलेज रोड तक पहुंची, जहां सड़क किनारे लगाए गए पौधों की हालत कई सवाल खड़े करती नजर आई. निरीक्षण के दौरान दर्जनों ऐसे पौधे मिले जिनके ट्री गार्ड टूट चुके थे. कई स्थानों पर ट्री गार्ड तो मौजूद थे लेकिन उनकी जाली गायब थी। कुछ पौधे झुके हुए मिले तो कई की शाखाएं टूट चुकी थीं. ट्री गार्ड टूटे-फूटे मिले सड़क किनारे लगे पौधों के आसपास गंदगी और कचरे का ढेर भी दिखाई दिया. हालात ऐसे हैं कि पेड़ों से ज्यादा उनके ट्री गार्ड संरक्षण की मांग करते नजर आ रहे हैं. करीब 20 से 25 ऐसे पौधे मिले जिनके ट्री गार्ड पूरी तरह क्षतिग्रस्त थे या उनकी सुरक्षा व्यवस्था नदारद थी. स्थानीय लोगों का कहना है कि पौधारोपण के समय विभागीय अधिकारी और कर्मचारी सक्रिय दिखाई देते हैं, लेकिन बाद में पौधों की देखभाल और निगरानी लगभग बंद हो जाती है. गर्मी के मौसम में पानी देने और पौधों को बचाने की जिम्मेदारी अक्सर स्थानीय नागरिकों पर आ जाती है. महराजगंज निवासी हरिवंश यादव ने लोकल 18 से बताया कि हर साल बड़ी संख्या में पौधे लगाए जाते हैं, लेकिन उनकी देखभाल नहीं होती. उन्होंने कहा कि कई जगह ट्री गार्ड तक नहीं लगाए गए हैं. स्थानीय लोग खुद पौधों को पानी देकर उन्हें बचाने की कोशिश करते हैं. यदि लोग ध्यान न दें तो कई पौधे सूख सकते हैं. पौधे बड़े होकर दें छाया तभी सफलता उन्होंने यह भी कहा कि केवल पौधों की संख्या बढ़ाने से पर्यावरण संरक्षण का उद्देश्य पूरा नहीं होगा. असली सफलता तब मानी जाएगी जब लगाए गए पौधे सुरक्षित रहकर बड़े पेड़ों का रूप लें और लोगों को छाया, स्वच्छ हवा तथा पर्यावरणीय लाभ प्रदान करें. विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर सबसे बड़ा सवाल यही है कि पौधारोपण के बाद उनकी देखभाल और संरक्षण की जिम्मेदारी कौन तय करेगा. जब तक पौधों के रखरखाव की जवाबदेही सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक करोड़ों पौधे लगाने के दावे केवल कागजों तक सीमित रह जाएंगे. About the Author Rajneesh Kumar Yadav मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Ghazipur,Uttar Pradesh Source link

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क्या भूपेश बघेल झारखंड में प्रियंका गांधी के दोस्त को जितवा पाएंगे?...

Last Updated:June 06, 2026, 12:02 IST Jharkhand Rajya Sabha election: झारखंड की दो राज्यसभा सीटों को लेकर कांग्रेस और जेएमएम के बीच खींचतान खुलकर सामने आ गई है. कांग्रेस ने पहले ही अपने उम्मीदवार के तौर पर प्रणव झा के नाम पर दांव खेल दिया है, जबकि झामुमो ने अब दोनों सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान कर कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. पार्टी ने उम्मीदवार तय करने का अधिकार सीधे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को दे दिया है. इस घटनाक्रम पर राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कांग्रेस की ओर से पर्यवेक्षक बनाए गए भूपेश बघेल को अब गठबंधन प्रबंधन की बड़ी परीक्षा देनी होगी. प्रियंका गांधी के करीबी प्रणव झा के लिए भूपेश बघेल बनेंगे संकटमोचक? हेमंत सोरेन ने बढ़ाया सस्पेंस रांची. झारखंड में आगामी 18 जून को होने वाले राज्यसभा के द्विवार्षिक चुनाव ने ‘इंडिया’ गठबंधन (INDIA) के भीतर एक बड़ा सियासी संकट खड़ा कर दिया है. दरअसल, कांग्रेस आलाकमान, विशेषकर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के बेहद करीबी माने जाने वाले प्रणव झा को कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार घोषित किया है. लेकिन इस घोषणा के तुरंत बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के मुखिया और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने एक ऐसा राजनीतिक दांव चल दिया है, जिससे कांग्रेस खेमे में हड़कंप मच गया है. इस संभावित ‘खेला’ को रोकने और अपने उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित करने के लिए कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को विशेष ऑब्जर्वर बनाकर रांची भेजने का फैसला किया है. हेमंत सोरेन ने कैसे किया ‘खेल’? दरअसल, झारखंड विधानसभा में विधायकों की संख्या के गणित के हिसाब से गठबंधन आसानी से दो राज्यसभा सीटें जीत सकता है. तय फॉर्मूले के मुताबिक एक सीट झामुमो और दूसरी सीट कांग्रेस के खाते में जानी थी. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी की हेमंत सोरेन के साथ दिल्ली में हुई बैठक के बाद ही प्रणव झा के नाम का ऐलान हुआ था. लेकिन 5 जून को रांची में झामुमो विधायकों और मंत्रियों की बैठक में अचानक सुर बदल गए. झामुमो के विधायकों ने पुरजोर मांग रख दी कि पार्टी दोनों राज्यसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी. हेमंत सोरेन को इस पर अंतिम फैसला लेने के लिए अधिकृत कर दिया गया है, जिससे कांग्रेस उम्मीदवार की जीत पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं. खास बात यह बताया जाता है कि कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को प्रियंका गांधी के करीबी हैं, जिससे चुनाव का राजनीतिक महत्व और बढ़ गया है. प्रियंका गांधी के दोस्त प्रणव झा के लिए साख की लड़ाई झारखंड से आने वाले प्रणव झा अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) में सचिव हैं और उन्हें प्रियंका गांधी वाड्रा का बेहद भरोसेमंद रणनीतिकार माना जाता है. दिल्ली दरबार में मजबूत पकड़ रखने वाले प्रणव झा के लिए यह चुनाव उनके राजनीतिक भविष्य की सबसे बड़ी परीक्षा बन गया है. झामुमो के इस कड़े रुख के बाद कांग्रेस के भीतर यह डर बैठ गया है कि अगर झामुमो ने दूसरा उम्मीदवार उतार दिया, तो संख्याबल की दृष्टि से कांग्रेस प्रत्याशी की हार तय है. संकटमोचक बनकर आ रहे हैं भूपेश बघेल दूसरी ओर, गठबंधन के भीतर मचे इस घमासान को शांत करने और झामुमो को मनाने की जिम्मेदारी कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ के कद्दावर नेता भूपेश बघेल और अजय शर्मा को सौंपी है. अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने दोनों को तत्काल प्रभाव से झारखंड का ऑब्जर्वर नियुक्त कर दिया है. भूपेश बघेल को राजनीति का मझा हुआ खिलाड़ी माना जाता है, और उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को दूसरा उम्मीदवार उतारने से रोकें और कांग्रेस विधायकों के भीतर किसी भी संभावित क्रॉस-वोटिंग की आशंका को खत्म करें. क्या होगा हेमंत सोरेन का अगला कदम? राजनीति के जानकारों का मानना है कि हेमंत सोरेन 8 जून तक इस पर अपना अंतिम फैसला ले सकते हैं. ऐसे में झामुमो का यह कदम कांग्रेस पर आगामी राजनीतिक फैसलों और राज्य के भीतर अपनी पकड़ को और मजबूत करने के दबाव के रूप में देखा जा रहा है. ऐसे में बदली राजनीति के बीच असल सवाल यह नहीं है कि भूपेश बघेल किसी उम्मीदवार को जिता पाएंगे या नहीं. असली सवाल यह है कि क्या कांग्रेस और झामुमो राज्यसभा चुनाव में सीट बंटवारे पर सहमति बना पाएंगे. अब नजरें टिकीं भूपेश बघेल पर बहरहाल, यदि जेएमएम वास्तव में दोनों सीटों पर उम्मीदवार उतारती है, तो यह महागठबंधन के भीतर शक्ति संतुलन का बड़ा संदेश माना जाएगा. वहीं यदि अंतिम समय में समझौता हो जाता है, तो यह कांग्रेस नेतृत्व और बघेल की राजनीतिक बातचीत की सफलता मानी जाएगी. अब पूरी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या भूपेश बघेल रांची पहुंचकर हेमंत सोरेन को मनाने में कामयाब होते हैं या फिर झारखंड में इंडिया गठबंधन के बीच की यह दरार और गहरी हो जाएगी. About the Author Vijay jha पत्रकारिता क्षेत्र में 22 वर्षों से कार्यरत. प्रिंट, इलेट्रॉनिक एवं डिजिटल मीडिया में महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन. नेटवर्क 18, ईटीवी, मौर्य टीवी, फोकस टीवी, न्यूज वर्ल्ड इंडिया, हमार टीवी, ब्लूक्राफ्ट डिजिट…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Ranchi,Jharkhand Source link

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कबाड़ से सजाया गार्डन, आकर्षण का बना केंद्र:चंडीगढ़ के रॉक गार्डन से...

कोडरमा के झुमरीतिलैया स्थित देवी मंडप रोड निवासी 71 वर्षीय अरुण मिश्रा ने अपने घर के कबाड़ का उपयोग कर एक सुंदर बगीचा तैयार किया है, जिसके माध्यम से वे लोगों को पर्यावरण संरक्षण और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। अरुण मिश्रा स्वयं कैंसर जैसी गंभीर बीमारी को मात दे चुके हैं। अरुण मिश्रा का यह बगीचा अब आसपास के क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है। उन्होंने अपने इस विशेष बगीचे को अपनी दिवंगत बहन मीनाक्षी का नाम दिया है। मीनाक्षी का निधन कैंसर से हुआ था, जिसके बाद अरुण मिश्रा ने कैंसर को हराने और पर्यावरण को बचाने का संकल्प लिया था। उन्होंने अपने बगीचे को इसी संकल्प की शुरुआत माना है। अरुण मिश्रा ने बताया कि उन्हें यह प्रेरणा चंडीगढ़ के रॉक गार्डन से मिली। कुछ वर्ष पहले चंडीगढ़ भ्रमण के दौरान उन्होंने रॉक गार्डन देखा था, जहां अनुपयोगी वस्तुओं का इस्तेमाल कर एक खूबसूरत उद्यान बनाया गया था। इस अनुभव ने उन्हें इतना प्रभावित किया कि कोडरमा लौटने के बाद उन्होंने भी अपने घर के कबाड़ और वेस्ट मटेरियल से अपना बगीचा सजाना शुरू कर दिया। घर के अनुपयोगी चीजों को फेंकने के बजाय उपयोग में लाया बगान में पेड़-पौधे, फूल-फल इत्यादि लगाकर उसे संवारना यह तो सभी लोग कर लेते हैं, लेकिन अरुण मिश्रा ने इन सबसे हटकर अपने बगीचे को तैयार किया है। उन्होंने अपने घर के वैसे अनुपयोगी सामान जो कबाड़ बन चुकी थी, उसे पौधे लगाने में इस्तेमाल कर लिया है। उन्होंने घर के खराब कमोड, पानी के जार, वाटर फिल्टर, बाथटब सहित गाड़ी के खराब टायर और अन्य प्रकार के कबाड़ को फेंकने के बजाय उसमें अलग-अलग किस्म के पौधे लगाए हैं। वेस्ट (कचरा) को बेस्ट बनाया उन्होंने कहा कि वेस्ट को बेस्ट कैसे बनाया जाए, इस थीम पर उन्होंने अपने गार्डन को तैयार किया है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण को सजाने के लिए केवल पेड़ पौधों का लगाना ही विकल्प नहीं है बल्कि इसके साथ घर, दुकानों व अन्य जगहों पर उपयोग होने वाले वैसे सामान जिसे खराब हो जाने के बाद अमूमन हम फेंक देते हैं, उसे कैसे पर्यावरण को स्वच्छ बनाने में उपयोग में लाया जा सके, इस पर ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अमूमन लोग इस प्रकार के खराब सामानों को या तो कबाड़ में बेच देते हैं या फिर यत्र-तत्र फेंक देते हैं। लेकिन जरूरत है इन कबाड़ को कैसे हम अन्य चीजों में उपयोग में ला सके। इसका सबसे बेहतरीन उपाय है अपने बगीचे में पौधे लगाकर इसको उपयोग में लाना। वैसे लोग जिनके पास बगीचे के लिए अलग से जगह नहीं है वह अपने छत पर भी इसे उपयोग में ला सकते हैं। पर्यावरण दूषित करने में जुटे हुए हैं लोग उन्होंने कहा कि आजकल के लोग एक रेस में लगे हुए हैं कि कौन पर्यावरण को कितना अधिक से अधिक दूषित कर सकता है। लोग गुटका, पान, तंबाकू जैसी चीजें खाकर उनके रैपर को सड़कों पर फेंक देते हैं। वहीं घर में प्लास्टिक में आने वाले सामग्रियों को उपयोग के बाद लोग सड़कों पर फेंक देते हैं। जिससे नाले जाम हो जाते हैं, सड़कों पर गंदगी फैलती है और पर्यावरण दूषित होता है। हमें इस पर्यावरण दिवस पर यह संकल्प लेना होगा कि हम कैसे अपने पर्यावरण को दूषित होने से बचाए और लोग एक स्वच्छ वातावरण में जी सकें। स्वच्छ वातावरण से दी कैंसर को मात उन्होंने कहा कि वे कैंसर की फोर्थ स्टेज (आखिरी पायदान) पर पहुंच चुका थे, जहां से लौटना नामुमकिन सा था। वे जिस भी हॉस्पिटल गए, सभी जगह के चिकित्सकों ने उन्हें जवाब दे दिया था। बावजूद इसके उन्होंने हार मानने की बजाय कैसे अपने आप को स्वस्थ और खुश रख सके इसकी तैयारी की। उन्होंने बताया कि कैंसर को मात देने में जो सबसे उपयोगी चीज रही वह उनका बागान था। उन्होंने कहा कि उनके बागान की हरियाली देखकर उनका मन प्रफुल्लित हो जाता था और वह कैंसर के बारे में सोचना तक बंद कर दिए। बागान को सजाने संवारने में उन्होंने अपनी पूरी मेहनत लगा दी। इससे उनका कैंसर की ओर कभी ध्यान ही नहीं गया और एक समय ऐसा आया कि उन्होंने कैंसर को ही अलविदा कह दिया। उनका कहना है कि अगर आपके आसपास हरियाली है, स्वच्छ वातावरण है तो ऐसे में न केवल कैंसर बल्कि दुनिया के किसी भी बीमारी को हम मात दे सकते हैं। Source link

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पारसनाथ तलहटी का तिरिलटांड़ गांव विकास से वंचित:सड़क-पानी की गंभीर समस्या, ग्रामीण...

गिरिडीह जिले के डुमरी प्रखंड की अति नक्सल प्रभावित छछन्दो पंचायत अंतर्गत पारसनाथ पहाड़ की तलहटी में स्थित तिरिलटांड़ गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है। लगभग 32 परिवारों और 300 की आबादी वाले इस गांव में सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव ग्रामीणों की परेशानी बढ़ा रहा है। प्राकृतिक सौंदर्य से घिरे इस गांव के अधिकांश लोग मधुबन क्षेत्र में दिहाड़ी मजदूरी कर जीवनयापन करते हैं। हालांकि, रोजगार के अभाव में बड़ी संख्या में युवा पलायन कर चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में पेयजल की सबसे गंभीर समस्या है। करीब एक किलोमीटर पैदल चलकर घर पहुंचना पड़ता है महिलाओं और युवतियों को घने जंगल के बीच लगभग एक किलोमीटर नीचे उतरकर चुआं (प्राकृतिक जलस्रोत) से पानी लाना पड़ता है। इसके बाद सिर पर पानी ढोकर करीब एक किलोमीटर पैदल चलकर घर पहुंचना पड़ता है। ग्रामीणों ने बताया कि गांव का एकमात्र हैंडपंप पिछले एक वर्ष से खराब पड़ा है। मजबूरी में लोग गांव के पास स्थित डाड़ी (तालाब) का गंदा पानी छानकर पी रहे हैं। इसी जल स्रोत का उपयोग स्नान और घरेलू कार्यों के लिए भी किया जाता है। बरसात में नाले का पानी मिलने और आसपास जंगली चूहों के बिल होने से जलस्रोत और अधिक प्रदूषित हो जाता है, जिससे बीमारियों का खतरा बना रहता है। पथरीले और पहाड़ी रास्ते से होकर जाना पड़ता है सड़क की स्थिति भी बेहद खराब है। गांव तक पहुंचने के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की अधूरी सड़क से होकर गुजरना पड़ता है। चार किलोमीटर सड़क का कालीकरण प्रस्तावित था, लेकिन कार्य पूरा नहीं हो सका। गांव तक पहुंचने के लिए आज भी डेढ़ किलोमीटर पथरीले और पहाड़ी रास्ते से होकर जाना पड़ता है। ग्रामीणों के अनुसार, रात में किसी महिला को प्रसव पीड़ा होने पर उसे खाट पर उठाकर करीब एक किलोमीटर दूर ले जाना पड़ता है, जहां से एंबुलेंस के माध्यम से 20 किलोमीटर दूर डुमरी या गिरिडीह अस्पताल पहुंचाया जाता है। ग्रामीण मोहन टुडू ने बताया कि गांव में तीन स्थानों पर जलमीनार और पानी की टंकी का निर्माण कराया गया है, लेकिन करीब तीन वर्षों से योजना शुरू नहीं हो सकी है। जलापूर्ति योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई वहीं, नारायण महतो ने आरोप लगाया कि मिनी जलापूर्ति योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। न सोलर प्लेट लगाया गया, न मोटर स्थापित हुई और न ही घरों तक नल कनेक्शन पहुंचा। गांव के मांझी हड़ाम कारू मुर्मू ने बताया कि गांव की बदहाल स्थिति का असर वैवाहिक रिश्तों पर भी पड़ रहा है। सड़क, पानी और अन्य सुविधाओं के अभाव को देखकर कई परिवार अपनी बेटियों का रिश्ता करने से इनकार कर देते हैं। ग्रामीण मोहन सोरेन ने बताया कि इसी कारण उनका तय विवाह भी टूट गया था। कृषि के लिए चेक डैम निर्माण की मांग ग्रामीण चुपा हांसदा, राजेश हेम्ब्रम, रूपा हांसदा, रस्मी देवी, सुनिया देवी, सोमरा टुडू और कारू मुर्मू समेत अन्य लोगों ने भी गांव में स्वच्छ पेयजल, पक्की सड़क, स्वास्थ्य सुविधाएं तथा कृषि के लिए चेक डैम निर्माण की मांग की है। छछन्दो पंचायत की मुखिया रूपानी देवी ने बताया कि मनरेगा के तहत गांव में मिट्टी-मोरम सड़क, तालाब और पुलिया का निर्माण कराया गया है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत सड़क निर्माण के लिए नापी भी हुई थी, लेकिन कार्य आगे नहीं बढ़ सका। इस संबंध में उपायुक्त को लिखित आवेदन दिया गया है। वहीं, उपायुक्त रामनिवास यादव ने बताया कि गांव का निरीक्षण किया गया है। यहां सड़क और पेयजल की समस्या है। उन्होंने कहा कि उपलब्ध फंड से सड़क निर्माण कराने की दिशा में पहल की जाएगी तथा अन्य समस्याओं का भी शीघ्र समाधान किया जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन और सरकार जल्द पहल नहीं करती है तो तिरिलटांड़ के लोगों को आने वाले समय में भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ेगा। Source link

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Hyderabad News | हैदराबाद पाटनचेरु में काकतीय दौर का प्राचीन पत्थर मंडप...

Last Updated:June 06, 2026, 11:27 IST Hyderabad News : हैदराबाद के पाटनचेरु में काकतीय दौर का माने जाने वाला प्राचीन पत्थर मंडप आधुनिक इमारतों के बीच खड़ा, इतिहास प्रेमी संरक्षण और पुरातत्व जांच की मांग कर रहे हैं. शहरी चकाचौंध और संकरी गलियों के बीच छिपे इस मंडप पर आमतौर पर राहगीरों की नजर नहीं पड़ती. हालांकि इसकी नक्काशीदार बनावट, मजबूत खंभे और विशाल काले पत्थर इसके गौरवशाली अतीत की गवाही देते हैं. हैदराबाद. तेजी से कंक्रीट के जंगल में बदलते शहरी इलाकों के बीच अक्सर हमारा इतिहास कहीं न कहीं दबकर रह जाता है. ऐसा ही एक मामला हैदराबाद के बाहरी क्षेत्र पाटनचेरु से सामने आया है, जहां आधुनिक बहुमंजिला इमारतों और व्यावसायिक निर्माणों के बीच एक प्राचीन पत्थर का मंडप आज भी अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहा है. इस ऐतिहासिक संरचना को देखने के बाद स्थानीय लोगों और इतिहास प्रेमियों की दिलचस्पी भी बढ़ी है, वहीं इसके संरक्षण को लेकर चिंता भी जताई जा रही है. शहर की भागदौड़ और आधुनिक विकास के बीच खड़ा यह मंडप बीते समय की वास्तुकला और शिल्पकला की झलक पेश करता है. आसपास तेजी से बदलते परिवेश के बावजूद इसकी मजबूत संरचना अब भी लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रही है. इतिहास से जुड़े लोगों का मानना है कि ऐसी धरोहरें केवल पत्थरों का ढांचा नहीं होतीं, बल्कि किसी क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान और विरासत की कहानी भी अपने भीतर समेटे रहती हैं. प्राचीन वास्तुकला की झलक दिखाता है मंडपशहरी चकाचौंध और संकरी गलियों के बीच छिपे इस मंडप पर आमतौर पर राहगीरों की नजर नहीं पड़ती. हालांकि इसकी नक्काशीदार बनावट, मजबूत खंभे और विशाल काले पत्थर इसके गौरवशाली अतीत की गवाही देते हैं. इसकी वास्तुकला को देखकर कई इतिहास प्रेमी और जानकार मानते हैं कि यह संरचना काकतीय राजवंश के दौर की हो सकती है, जो अपनी उत्कृष्ट पत्थर कला और स्थापत्य शैली के लिए प्रसिद्ध रहा है. स्थानीय स्तर पर यह भी माना जाता है कि यह किसी बड़े प्राचीन मंदिर परिसर का हिस्सा रहा होगा. समय के साथ मुख्य मंदिर नष्ट हो गया, लेकिन यह मंडप आज भी सुरक्षित खड़ा है. कुछ लोग इसे श्री राम वसंत मंडपम के नाम से भी जोड़कर देखते हैं. संरक्षण की मांग हुई तेजइस ऐतिहासिक संरचना की स्थिति ने एक बार फिर विकास और विरासत संरक्षण के बीच संतुलन को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. इतिहास प्रेमियों का कहना है कि यदि समय रहते इस धरोहर की ओर ध्यान नहीं दिया गया, तो बढ़ते शहरी विस्तार और अतिक्रमण के कारण इसका अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है. उनका मानना है कि पुरातत्व विभाग को इसकी ऐतिहासिक प्रामाणिकता की जांच करानी चाहिए और इसके वास्तविक इतिहास को सामने लाना चाहिए. साथ ही इसे संरक्षित धरोहर घोषित कर इसके संरक्षण और जीर्णोद्धार की दिशा में आवश्यक कदम उठाने चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस ऐतिहासिक विरासत को देख और समझ सकें. About the Author Anand Pandey आनंद पाण्डेय वर्तमान में News18 हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Jaipur,Jaipur,Rajasthan Source link

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