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Author name: scsmdos@gmail.com

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Uday Kotak warning | OPINION : 80 अरब डॉलर वाली Googleई और...

Last Updated:June 03, 2026, 19:31 IST Uday Kotak Warning: गूगल के पास भारी कैश और 160 अरब डॉलर का सालाना प्रॉफिट है. फिर भी कंपनी भविष्य के लिए 80 अरब डॉलर जुटा रही है. इसे लेकर उदय कोटक ने भारतीय कंपनियों को चेतावनी दी है. भारत में राजनीतिक स्थिरता है लेकिन इकॉनमी में कई चुनौतियां हैं. विदेशी निवेश और प्राइवेट इन्वेस्टमेंट उस रफ्तार से नहीं बढ़ रहा है. रुपया लगातार कमजोर हो रहा है. भारत के पास बड़ा मार्केट है लेकिन ग्रोथ के लिए कॉरपोरेट इन्वेस्टमेंट बढ़ाना जरूरी है. गूगल के 80 अरब डॉलर जुटाने पर उदय कोटक ने अलर्ट किया है. दुनिया की अर्थव्यवस्था इस समय एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहां भविष्य की दिशा आज लिए जा रहे फैसलों से तय हो रही है. टेक्नोलॉजी,पूंजी और निवेश का खेल अब पहले से कहीं ज्यादा आक्रामक हो गया है. इसी संदर्भ में गूगल का हालिया कदम बेहद महत्वपूर्ण है. जिस कंपनी के पास पहले से ही भारी नकद भंडार है. जिसने लगातार मुनाफे के नए रिकॉर्ड बनाए हैं. वही कंपनी बाजार से अतिरिक्त 80 अरब डॉलर जुटाने जा रही है. उदय कोटक ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस तरफ ध्यान दिलाया है और देसी कंपनियों को चेताया है. आईपीएल का मजा खत्म हुआ, अब भविष्य की तरफ देख लो. गूगल के आंकड़े अपने आप में चौंकाने वाले हैं. सालाना मुनाफा लगभग 160 अरब डॉलर, एक तिमाही का मुनाफा 62 अरब डॉलर और कुल मार्केट वैल्यू 4.5 खरब डॉलर. इतना मार्केट कैप तो निफ्टी 50 और सेंसेक्स की कंपनियों को मिलाकर भी नहीं है. Google which is cash surplus, just announced an additional capital raise of $80 bn.Google annual profit is $160 bn, last quarter $62 bn, and market cap $4.5 trillion. That is close to total profits and market cap of all Indian listed companies put together.It’s a wake up call… Source link

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हजारीबाग मेडिकल कॉलेज में दो घंटे कटी रही बिजली:मोबाइल टॉर्च की रोशनी...

हजारीबाग के शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (SBMCH) में मंगलवार देर रात बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। अस्पताल में करीब दो घंटे तक बिजली नहीं रही। उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में बिजली गुल होने का सबसे ज्यादा असर इमरजेंसी वार्ड में देखने को मिला। जहां डॉक्टरों को मोबाइल फोन की फ्लैशलाइट और टॉर्च के सहारे मरीजों का इलाज करना पड़ा। भीषण गर्मी के बीच अचानक बिजली कटने से वार्डों में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। कई मरीज गर्मी और घुटन से बेचैन दिखे, जबकि परिजन व्यवस्था को लेकर नाराज नजर आए। डीजल खत्म होने से जनरेटर नहीं चला अस्पताल में बिजली बैकअप के लिए लगाए गए लाखों रुपए के सोलर पावर सिस्टम के भी पिछले कई महीनों से खराब पड़े रहने की बात सामने आई है। ऐसे में जब मुख्य बिजली आपूर्ति ठप हुई, तो बैकअप सिस्टम भी काम नहीं आया। अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही तब और उजागर हुई जब जनरेटर भी नहीं चल सका। अस्पताल के सुपरिंटेंडेंट डॉ. केके सिंह ने बताया कि जनरेटर के लिए डीजल खत्म हो गया था, जिसके कारण आपातकालीन स्थिति में भी बिजली बहाल नहीं की जा सकी। इस घटना ने अस्पताल में आपातकालीन ईंधन स्टॉक की गंभीर कमी को उजागर कर दिया है। सांसद ने जताई नाराजगी, दी सख्त चेतावनी मामले की जानकारी मिलते ही हजारीबाग के सांसद मनीष जायसवाल ने अस्पताल प्रबंधन से बातचीत कर नाराजगी जताई। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मरीजों की जान से खिलवाड़ किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सांसद ने यहां तक कहा कि यदि अस्पताल को डीजल की जरूरत है, तो वे खुद इसकी व्यवस्था कराने को तैयार हैं, लेकिन ऐसी लापरवाही दोबारा नहीं होनी चाहिए। इस घटना के बाद अस्पताल की व्यवस्था और जवाबदेही को लेकर सवाल तेज हो गए हैं। Source link

झारखंड

देवघर में युवक पर फायरिंग:कमर में लगी गोली; बरियारबांधी में दिनदहाड़े हुई...

देवघर के नगर थाना क्षेत्र स्थित बरियारबांधी इलाके में बुधवार दोपहर एक युवक को गोली मार दी गई। अज्ञात हमलावरों ने 23 वर्षीय अभिषेक यादव को निशाना बनाया और वारदात को अंजाम देकर फरार हो गए। घायल युवक को तत्काल देवघर सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। अभिषेक यादव बमपास टाउन स्थित एसकेपी स्कूल के पास का निवासी है। बुधवार दोपहर वह बरियारबांधी क्षेत्र में मौजूद था, तभी उस पर फायरिंग की गई। गोली उसकी कमर में लगी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल होकर घटनास्थल पर गिर पड़ा। गोली चलने की आवाज सुनकर आसपास के लोग और उसके मित्र मौके पर पहुंचे और उसे तुरंत अस्पताल पहुंचाया। सदर अस्पताल में चिकित्सकों ने घायल युवक का प्राथमिक उपचार किया। डॉक्टरों के अनुसार, गोली लगने के बावजूद उसकी स्थिति स्थिर है और वह खतरे से बाहर है। चिकित्सकों की निगरानी में उसका इलाज जारी है। घटना की सूचना मिलते ही नगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। पुलिस ने आसपास के लोगों से पूछताछ शुरू कर दी है और हमलावरों की पहचान के लिए विभिन्न पहलुओं पर जांच कर रही है। आरोपियों तक पहुंचने के लिए घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की भी जांच की जा रही है। फिलहाल फायरिंग के पीछे के कारणों का खुलासा नहीं हो पाया है। पुलिस आपसी रंजिश, पुरानी दुश्मनी और अन्य संभावित कारणों को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। दिनदहाड़े हुई इस वारदात के बाद इलाके में दहशत का माहौल है। पुलिस ने जल्द ही मामले का खुलासा कर आरोपियों की गिरफ्तारी का भरोसा दिलाया है। Source link

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araria ashish mandal left 65 lakh job creates ai exam checking platform...

पटना: सीबीएसई की कॉपी जांच प्रक्रिया इन दिनों काफी चर्चा में है. कॉपी जांच करने के तरीके पर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं. इसी बीच बिहार के अररिया के रहने वाले आशीष मंडल की टीम ने एआई प्लेटफॉर्म एकेडाइन (Acadine) तैयार किया है. यह आंसर शीट की जांच को तेज और सटीक बनाने का दावा करता है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें कॉपी जांच के लिए एआई का प्रयोग किया जाता है. इतना ही नहीं, अगर किसी सवाल में अंक काटे जाते हैं तो यह प्लेटफॉर्म उसकी वजह भी बताता है. छात्र या अभिभावक आसानी से यह समझ सकते हैं कि नंबर किस वजह से कटे हैं. इसके अलावा भी कई ऐसे फीचर दिए गए हैं जो कॉपी जांच की प्रक्रिया को आसान और पारदर्शी बनाते हैं. एकेडाइन के सीईओ आशीष मंडल का दावा है कि यह प्लेटफार्म सबसे सटीक तरीके से कॉपियों की जांच कर सकता है. उनके मुताबिक इसमें गलती की संभावना ना के बराबर है. काफी कम समय में बहुत बड़ी संख्या में काॅपी जांच कर सकता है. आशीष का यह भी कहना है कि अगर सीबीएसई मौका दे तो उनका प्लेटफॉर्म दूसरे विकल्पों की तुलना में कम खर्च में बेहतर सेवा दे सकता है. अब टीचर नहीं एआई चेक करेगा कॉपीएकेडाइन के बारे में बात करते हुए आशीष कहते हैं कि भारत में आज भी ज्यादातर परीक्षाएं लिखित रूप में होती हैं. शिक्षकों द्वारा उनकी जांच में काफी समय खर्च होता है और बारीकी से हम कमजोरी भी नहीं बता पाते हैं. इससे जो मुख्य कमजोरी का समाधान नहीं हो पाता है. इसी चुनौती को देखते हुए उनकी टीम ने AI प्लेटफॉर्म एकेडाइन तैयार किया है. यह बहुत हीं कम समय में चेकिंग और फीडबैक दे सकता है. इसमें टीचर के बजाय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा काॅपी जांची जाती हैं. उनका दावा है कि एआई द्वारा किया गया मूल्यांकन शिक्षकों से भी ज्यादा सटीक होता है. इसमें गलती होने की संभावना बहुत कम है. इसके साथ ही शिक्षक की तुलना में समय और खर्च में भी बचत होती है. कैसे काम करता है यह प्लेटफॉर्मआशीष मंडल बताते हैं कि परीक्षा खत्म होने के बाद छात्रों की उत्तरपुस्तिकाओं को स्कूल या कॉलेज की ओर से स्कैन करके एकेडाइन प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया जाता है. कॉपी अपलोड होते ही एआई जांचना शुरू कर देता है और कुछ ही समय में रिजल्ट तैयार हो जाता है. उनका दावा है कि प्लेटफॉर्म की सटीकता करीब 98 प्रतिशत तक है. किसी भी संस्थान को डेमो देने के दौरान एक खास सुविधा भी दी जाती है. संस्थान चाहे तो उसी कॉपी की जांच किसी शिक्षक से भी करा सकता है और फिर दोनों परिणामों की तुलना कर सकता है. इससे प्लेटफॉर्म की कार्य क्षमता और सटीकता को आसानी से परखा जा सकता है. आशीष के मुताबिक, इस प्लेटफॉर्म की सबसे बड़ी खासियत सिर्फ अंक देना नहीं है, बल्कि अंक कटने की वजह भी बताना है. अगर किसी सवाल में एआई ने कम अंक दिए हैं, तो वह यह भी बताता है कि जवाब में कौन सी कमी या गलती रह गई, जिसके कारण अंक काटे गए. इससे छात्रों और शिक्षकों दोनों को यह समझने में मदद मिलती है कि उत्तर में सुधार की जरूरत कहां है. सीबीएसई वाले प्लेटफॉर्म से बेहतर क्योंआशीष मंडल अपने प्लेटफॉर्म को सीबीएसई की मौजूदा कॉपी जांच प्रणाली से अधिक सटीक और प्रभावी बताते हैं. उनका कहना है कि इस बार सीबीएसई के कॉपी जांच की प्रक्रिया में मानवीय गलतियां देखने को मिली हैं. कॉपी स्कैन करने से लेकर मूल्यांकन तक अलग अलग लेवल पर त्रुटियां सामने आ रही है. इस वजह से सीबीएसई पर सवाल उठ रहे हैं. आशीष के अनुसार, सीबीएसई के मौजूदा व्यवस्था की सबसे बड़ी कमी यह है कि अंक काटे जाने का स्पष्ट कारण नहीं बताया गया. शिक्षक कॉपी जांच तो करते हैं, लेकिन छात्र यह नहीं जान पाते कि उनके उत्तर में क्या कमी रह गई. वहीं अलग-अलग शिक्षकों के मूल्यांकन में भी अंतर देखने को मिल सकता है. उनका दावा है कि अकैडाइन प्लेटफॉर्म इन कमियों को दूर करता है. यहां कॉपियों की जांच एआई द्वारा की जाती है, जिससे सभी उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन एक समान मानकों पर होता है. साथ ही, अगर किसी उत्तर में अंक काटे जाते हैं तो प्लेटफॉर्म उसका कारण भी विस्तार से बताता है. इससे छात्रों को अपनी गलतियां समझने और सुधार करने में मदद मिलती है. 65 लाख कि नौकरी छोड़ बनाया प्लेटफार्मबिहार के अररिया जिले के रहने वाले आशीष मंडल ने वर्ष 2020 में आईआईटी इंदौर से कंप्यूटर साइंस में ग्रेजुएशन किया था. पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने एक निजी कंपनी में नौकरी शुरू की. सितंबर 2025 में नौकरी छोड़ने के समय उनका सालाना पैकेज करीब 65 लाख रुपये था. हालांकि, उन्हें शिक्षा और मूल्यांकन के क्षेत्र में एआई की बड़ी संभावनाएं नजर आई. इसी वजह से उन्होंने अपने कुछ दोस्तों के साथ मिलकर एक नया प्लेटफॉर्म विकसित करने का फैसला किया और इस दिशा में काम शुरू कर दिया. आशीष बताते हैं कि उनकी टीम ने कुछ ही महीनों में एकेडाइन प्लेटफॉर्म तैयार कर लिया और दिसंबर 2025 में इसे लॉन्च कर दिया. उनका दावा है कि फिलहाल देशभर के 66 से अधिक शिक्षण संस्थान इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं. जम्मू से लेकर कोयंबटूर तक कई स्कूल, कॉलेज और कोचिंग संस्थान इससे जुड़े हुए हैं. इसके अलावा दिल्ली, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों में भी कई संस्थान इस तकनीक का उपयोग कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि फिलहाल प्लेटफॉर्म का मुख्य फोकस कॉपी जांच पर है, लेकिन आने वाले समय में इसमें होमवर्क, असाइनमेंट, पीपीटी, नोट्स और अन्य शैक्षणिक कार्यों के मूल्यांकन से जुड़े कई नए फीचर जोड़े जाएंगे. आशीष का मानना है कि एआई आधारित मूल्यांकन प्रणाली ही शिक्षा क्षेत्र का भविष्य है और आने वाले वर्षों में इसका उपयोग तेजी से बढ़ेगा. Source link

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घर में कोई नहीं खाता बैंगन? तो एक बार ट्राई करें यह...

Last Updated:June 03, 2026, 12:30 IST बैंगन को थोड़े अलग तरीके से बनाया जाए तो यही साधारण सब्जी बेहद स्वादिष्ट और लाजवाब बन सकती है. आज हम आपको बैंगन की एक ऐसी आसान रेसिपी बताने जा रहे हैं, जिसे बनाने में ज्यादा समय भी नहीं लगता. साथ ही, इसका स्वाद इतना शानदार होता है. यहां तक कि बच्चे भी इसे चाव से खा सकते हैं. इस खास रेसिपी को बनाने के लिए आपको ज्यादा सामग्री की जरूरत नहीं पड़ती. जमशेदपुर: अक्सर घरों में देखा जाता है कि बैंगन का नाम सुनते ही कई लोग मुंह बनाने लगते हैं. खासकर बच्चों को बैंगन की सब्जी पसंद नहीं आती. लेकिन अगर बैंगन को थोड़े अलग तरीके से बनाया जाए, तो यही साधारण सब्जी बेहद स्वादिष्ट बन सकती है. आज हम आपको बैंगन की एक आसान और स्वादिष्ट रेसिपी बता रहे हैं, जिसे बनाने में ज्यादा समय नहीं लगता. इसका स्वाद इतना लाजवाब होता है कि बच्चे भी इसे चाव से खा सकते हैं. ज्यादा सामग्री की जरूरत नहींइस खास रेसिपी को तैयार करने के लिए ज्यादा सामग्री की जरूरत नहीं है. इसके लिए बैंगन, टमाटर, लहसुन, प्याज, हरी मिर्च, नमक, हल्दी और थोड़ा सा तेल चाहिए. सबसे पहले बैंगन को अच्छी तरह धोकर छोटे-छोटे चौकोर टुकड़ों में काट लें. टमाटर को पतले स्लाइस में काट लें. वहीं, लहसुन को बारीक काटें और प्याज व हरी मिर्च को भी छोटे-छोटे टुकड़ों में तैयार कर लें. इस रेसिपी से बढ़ता है कई गुना स्वादअब एक कढ़ाई में थोड़ा तेल गर्म करें. तेल गर्म होने पर सबसे पहले लहसुन डालकर हल्का सुनहरा होने तक भूनें. लहसुन की खुशबू इस रेसिपी का स्वाद कई गुना बढ़ा देती है. इसके बाद प्याज और हरी मिर्च डालकर अच्छी तरह भूनें. जब प्याज सुनहरा होने लगे, तो समझिए कि मसाले का बेस तैयार हो गया है. बैंगन और टमाटर अच्छी तरह मिलाएंअब इसमें कटे हुए बैंगन और टमाटर डालकर अच्छी तरह मिलाएं और कुछ मिनट तक भूनें. इसके बाद स्वादानुसार नमक और हल्दी पाउडर डालें. मसालों को अच्छी तरह मिलाने के बाद थोड़ा सा पानी डाल दें, ताकि सब्जी तले में न लगे और बैंगन आसानी से पक जाए. अब कढ़ाई को ढककर 10 से 15 मिनट तक मध्यम आंच पर पकने दें. ऊपर से हरा धनिया डालेंकरीब 10 मिनट बाद ढक्कन हटाकर देखें. बैंगन और टमाटर अच्छी तरह गलकर आपस में मिल चुके होंगे. टमाटर की हल्की खटास और लहसुन का स्वाद बैंगन को एक अलग ही फ्लेवर देता है. अब इसे चम्मच से हल्के हाथों से चलाते हुए भर्ते जैसा टेक्सचर दे सकते हैं. आखिर में ऊपर से ताजा कटा हुआ हरा धनिया डाल दें. रेसिपी बेहद आसानअब आपका स्वादिष्ट देसी बैंगन भर्ता तैयार है. इसे गरमा-गरम रोटी, पराठे या चावल के साथ परोसा जा सकता है. खास बात यह है कि यह रेसिपी बेहद आसान, पौष्टिक और कम सामग्री में तैयार हो जाती है. अगर आपके घर में भी बच्चे या बड़े बैंगन खाने से कतराते हैं, तो एक बार यह तरीका जरूर आजमाएं. इसका स्वाद उन्हें बैंगन का दीवाना बना सकता है. About the Author Amita kishor न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Jamshedpur,Purbi Singhbhum,Jharkhand Source link

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हजारीबाग में भाई-बहन मर्डर का खुलासा, आरोपी गिरफ्तार:रेप के विरोध पर बच्ची...

हजारीबाग के कटकमदाग थाना क्षेत्र में दो भाई-बहन के अपहरण और हत्या के मामले को पुलिस ने सुलझा लिया है। पुलिस ने इस घटना के मुख्य आरोपी संजीत कुमार पासवान को गिरफ्तार किया है, जो ओला शोरूम में कार्यरत था। वारदात में इस्तेमाल की गई स्कूटी और एक प्लास्टिक का बोरा भी बरामद किया गया है। हजारीबाग एसपी अमन कुमार के अनुसार, आरोपी ने बच्ची के साथ दुष्कर्म का प्रयास किया था। बच्ची द्वारा विरोध करने और शोर मचाने पर उसने उसका गला घोंटकर और पानी में डुबोकर हत्या कर दी। पुलिस ने शहर से भागने के क्रम में दबोचा साक्ष्य छुपाने के लिए उसने बच्ची के मासूम भाई की भी गला घोंटकर हत्या कर दी और शव को प्लास्टिक की बोरी में डालकर कुएं में फेंक दिया। पुलिस ने आरोपी को शहर से भागने के क्रम में दबोच लिया। यह घटना 30 मई को सामने आई, जब ओला शोरूम के पास से 11 वर्षीय बच्ची और उसके 3 वर्षीय भाई के लापता होने की शिकायत उनके पिता मो. आमिर ने दर्ज कराई। मामले की गंभीरता को देखते हुए कटकमदाग थाना में कांड संख्या 90/26 दर्ज कर जांच शुरू की गई। अपर पुलिस अधीक्षक (अभियान) अमित कुमार के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया। जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों से पता चला कि आरोपी संजीत पासवान दोनों बच्चों को अपनी स्कूटी पर ले गया था। दोनों बच्चों को बहला-फुसलाकर स्कूटी से ले गया था 31 मई को कोरा थाना क्षेत्र के सिन्दुर स्थित श्मशान घाट से 11 वर्षीय बच्ची का शव बरामद हुआ। इसके बाद सघन तलाशी अभियान चलाकर श्मशान घाट से लगभग 500 मीटर दूर एक कुएं से 3 वर्षीय भाई का शव भी मिला। दोनों शवों का मेडिकल बोर्ड की निगरानी में पोस्टमार्टम कराया गया। गिरफ्तार आरोपी संजीत पासवान ने पुलिस पूछताछ में अपना अपराध स्वीकार कर लिया है। उसने बताया कि मृतका पिछले दो महीनों से ओला शोरूम के पास आती-जाती थी, जिससे उसकी पहचान हो गई थी। 27 मई को वह दोनों बच्चों को बहला-फुसलाकर अपनी स्कूटी पर सिन्दुर श्मशान घाट ले गया था और वहीं उनकी हत्या कर दी। Source link

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ब्लिंकिट डिलीवरी बॉय ने कंपनी के खिलाफ की नारेबाजी:पेट्रोल महंगा, इंसेंटिव और...

बढ़ती पेट्रोल और ईंधन कीमतों के बीच इंसेंटिव में बढ़ोतरी नहीं होने से नाराज ब्लिंकिट के डिलीवरी बॉय ने बुधवार को धनबाद के रणधीर वर्मा चौक पर प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में डिलीवरी कर्मियों ने कंपनी के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी विभिन्न मांगों को उठाया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि लगातार बढ़ रही पेट्रोल और ईंधन की कीमतों के कारण उनके काम का खर्च काफी बढ़ गया है। इसके बावजूद कंपनी की ओर से मिलने वाले इंसेंटिव और प्रति ऑर्डर भुगतान में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। इससे उनकी आय प्रभावित हो रही है और उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। डिलीवरी कर्मियों ने यह भी आरोप लगाया कि कई बार बिना किसी पूर्व सूचना या स्पष्ट कारण के उनकी आईडी ब्लॉक कर दी जाती है। इससे उनकी आजीविका पर सीधा असर पड़ता है। उन्होंने कंपनी से आईडी ब्लॉक करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने और कर्मचारियों को पहले सूचना देने की मांग की है। इस प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस के युवा नेता भी डिलीवरी कर्मियों के समर्थन में शामिल हुए। उन्होंने डिलीवरी कर्मियों की मांगों को जायज ठहराते हुए कंपनी से उनकी समस्याओं का समाधान करने का आग्रह किया। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि वे अपनी मांगों को लेकर धनबाद के उपायुक्त को एक लिखित आवेदन सौंपेंगे। Source link

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वीपी सिंह के अपमान पर जब मनमोहन-टाइटलर के सामने ढाल बनकर खड़े...

Last Updated:June 03, 2026, 17:17 IST Nitish Archive George Fernandes: जॉर्ज फर्नांडिस और नीतीश कुमार की संयुक्त शक्ति को बताने वाली 1992 की यह संसदीय घटना केवल एक पुराने राजनीतिक विवाद की याद नहीं दिलाती, बल्कि उस दौर की राजनीति की भी तस्वीर पेश करती है जब वैचारिक प्रतिबद्धता और राजनीतिक रिश्तों को सार्वजनिक रूप से निभाया जाता था. राजनीतिक आरोपों की एक कड़ी को लेकर बहस में वी.पी. सिंह के बचाव में जिस तरह से जॉर्ज फर्नांडिस और नीतीश कुमार का एक साथ खड़ा हो गए थे, वह भारतीय संसदीय इतिहास के उन कहानियों में शामिल है, जिन्हें आज भी राजनीतिक निष्ठा और दोस्ती की मिसाल के रूप में याद किया जाता है. जगदीश टाइटलर और मनमोहन सिंह के आरोपों पर जब संसद में वी.पी. सिंह के बचाव में एक साथ खड़े हुए थे जॉर्ज फर्नांडिस और नीतीश कुमार पटना. भारतीय राजनीति में नेताओं के पाले और गठबंधन बदल लेने का अनूठा इतिहास रहा है. इस कड़ी में संसदीय इतिहास में कुछ ऐसे उदाहरण भी दर्ज हैं जिसको लेकर वैचारिक निष्ठा और दोस्ती की मिसालें दी जाती हैं. ऐसा ही एक ऐतिहासिक पकरण साल 1992 के मानसून सत्र के दौरान देश की संसद में देखा गया था. इसी से जुड़ी एक घटना सोशल मीडिया और यूट्यूब चैनलों पर शेयर किए जा रहे हैं जो राजनीतिक गलियारों में बेहद लोकप्रिय है. यह वह दौर था जब देश के सबसे बड़े वित्तीय घोटाले को लेकर विपक्ष ने तत्कालीन पी.वी. नरसिम्हा राव सरकार की ईंट से ईंट बजा दी थी. इस पूरी बहस के केंद्र में थे तत्कालीन वित्त मंत्री डॉ. मनमोहन सिंह, केंद्रीय राज्य मंत्री जगदीश टाइटलर और पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह. तब लगातार हमलों के बीच तब ढाल बने थे नीतीश कुमार और जॉर्ज फर्नांडिस. 3 जून को दिवंगत जॉर्ज फर्नांडिस की जयंती के अवसर उनसे जुड़ा यह वाकया सोशल मीडिया में चर्चा के केंद्र में है. क्या था 1992 का वह सियासी माजरा? बात साल 1992 की है जब भारत का सबसे बड़ा और चर्चित ‘हर्षद मेहता शेयर बाजार घोटाला’ उजागर हुआ था. इस घोटाले ने पूरे देश की अर्थव्यवस्था और बैंकिंग प्रणाली को हिलाकर रख दिया था. जून-जुलाई 1992 के दौरान जब संसद का मानसून सत्र शुरू हुआ तो विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार को चौतरफा घेरना शुरू किया. विपक्ष का सीधा आरोप था कि नरसिम्हा राव सरकार और उनके वित्त मंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की नई उदारवादी आर्थिक नीतियों के कारण ही हर्षद मेहता जैसे सटोरियों को देश के बैंकों को लूटने की छूट मिली. सदन में नियम 193 के तहत इस विषय पर बेहद तीखी चर्चा चल रही थी. जब वी.पी. सिंह को लपेटने लगी कांग्रेस कांग्रेस पार्टी और सरकार के मंत्रियों को समझ आ गया था कि वित्तीय अनियमितताओं के इस मामले में वे बुरी तरह घिर चुके हैं. अपनी सरकार का बचाव करने और विपक्ष के हमलों को कुंद करने के लिए कांग्रेस के रणनीतिकारों ने एक नया दांव खेला. केंद्रीय राज्य मंत्री जगदीश टाइटलर और उनके साथी सांसदों ने सदन में खड़े होकर दलील दी कि इस घोटाले की जड़ें वास्तव में 1989-90 में थीं, जब देश में जनता दल की सरकार थी और वी.पी. सिंह प्रधानमंत्री थे. कांग्रेस नेताओं का आरोप था कि वी.पी. सिंह के कार्यकाल की ढिलाई की वजह से ही शेयर बाजार का यह संकट पैदा हुआ. ढाल बनकर खड़े हुए नीतीश कुमार और जॉर्ज फर्नांडिस कांग्रेस द्वारा ‘मंडल मसीहा’ वी.पी. सिंह पर कीचड़ उछाले जाने की देर थी कि संसद के भीतर जनता दल के दो सबसे आक्रामक और प्रखर समाजवादी नेता- जॉर्ज फर्नांडिस और नीतीश कुमार- एक साथ खड़े हो गए. जॉर्ज फर्नांडिस उस समय अपनी बेबाक वक्तृत्व शैली और धारदार तर्कों के लिए पूरे देश में विख्यात थे. जॉर्ज साहब ने सदन में खड़े होकर बेहद रौद्र रूप अख्तियार कर लिया. उन्होंने सीधे वित्त मंत्री मनमोहन सिंह और जगदीश टाइटलर की तरफ उंगली उठाते हुए कहा कि अपनी प्रशासनिक और वित्तीय नाकामियों को छिपाने के लिए एक पूर्व प्रधानमंत्री पर बेबुनियाद आरोप लगाना बेहद शर्मनाक है. आज जॉर्ज फर्नांडिस का जन्मदिन है. एक दौर था जब नीतीश कुमार और जॉर्ज फर्नांडिस की दोस्ती के उदाहरण दिए जाते थे. उसी दौर में एक बार लोकसभा में जब बहस हो रही थी तब मनमोहन सिंह और जगदीश टाइटलर के खिलाफ नीतीश कुमार और जॉर्ज फर्नांडिस दोनों मंडल मसीहा वी पी सिंह के बचाव में उतर गए.… pic.twitter.com/SkwJM81seK Source link

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Solar energy series 3rd story: सौर ऊर्जा-3: जिनके पास छत नहीं फ्लैट...

Last Updated:June 03, 2026, 16:14 IST Solar Energy Series 3rd Story: Solar energy series 3rd story: न्‍यूज18हिंदी की सौर ऊर्जा-सोलर पैनल्‍स सीरीज में पढ़िए आज तीसरी स्टोरी. जिन लोगों के पास छत वाला घर नहीं है और वे फ्लैट या अपार्टमेंट में रहते हैं, वे सोलर पैनल सिस्टम कहां और कैसे लगवा सकते हैं? ताकि उन्हें भी सौर ऊर्जा से पैदा बिजली मिल सके. आइए सुनते हैं सीईईडब्ल्यू एक्सपर्ट भावना त्यागी की राय अगर आप फ्लैट या अपार्टमेंट में रहते हैं तो आप सोलर पैनल कहां और कैसे लगवा सकते हैं, आइए एक्‍सपर्ट से जानते हैं ? Solar Energy Series 3rd Story: सौर ऊर्जा को सबसे साफ और भविष्य की एनर्जी कहा जाता है. इससे बिजली पैदा करने में कोई प्रदूषण नहीं होता. साथ ही पॉवर ग्रिड से होने वाली बिजली पर भी निर्भर नहीं रहना होता. अगर आप अपने घर की छत पर सोलर पैनल सिस्टम लगाते हैं तो आप अपने घर के खर्च के लिए बिजली पैदा कर सकते हैं और उसे ताजा-ताजा इस्तेमाल कर सकते हैं. इसे इलेक्ट्रिसिटी आजादी भी कह सकते हैं और बार-बार कटने वाली बिजली की समस्या से निजात भी मान सकते हैं. सोलर एनर्जी के फायदों को सुनकर बहुत सारे लोग चाहते हैं कि वे भी अपने घर की पॉवर सप्लाई को लेकर फ्री हो जाएं और सोलर पैनल लगवा लें, लेकिन असली समस्या आती है फ्लैटों और अपार्टमेंटों में रह रहे लोगों के सामने, क्योंकि सोलर पैनल तो घरों की छत पर लगते हैं. अब फ्लैट या अपार्टमेंट में न तो आपके पास छत होती है और न ही जमीन, फिर सोलर पैनल कहां और कैसे लगवाएं? आजकल की लाइफस्टाइल देखें तो ज्यादातर मेट्रो सिटीज ही नहीं बल्कि छोटे शहरों में भी फ्लैट और अपार्टमेंट की भरमार है और छतों वाले घरों की संख्या कुछ कम हो गई है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या फ्लैटों में रहने वाले लोग कभी सोलर सिस्टम नहीं लगवा सकते? क्या वे कभी सोलर एनर्जी से पैदा बिजली का फायदा नहीं ले सकते? ‘सौर ऊर्जा-सोलर पैनल’ को लेकर चलाई जा रही News18hindi की सीरीजकी तीसरी कहानी में इन सवालों के जवाब दे रही हैं काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर की प्रोग्राम लीड भावना त्यागी… भावना त्यागी कहती हैं, ‘जिन लोगों का अपना निजी मकान है या छत पर पूरा अधिकार है, वे अपने लिए अलग से सोलर सिस्टम लगवा सकते हैं. लेकिन फ्लैट या बहुमंजिला इमारतों में रहने वाले लोग ऐसा नहीं कर सकते, क्योंकि छत पर किसी एक का हक नहीं होता.’ अगर आपके भी सोलर पैनल और सौर ऊर्जा को लेकर कुछ सवाल हैं तो आप हमें व्‍हाट्सएप कर सकते हैं.  About the Author प्रिया गौतमSenior Correspondent Priya Gautam is an accomplished journalist currently working with Hindi.News18.com with over 14 years of extensive field reporting experience. Previously worked with Hindustan times group (Hindustan Hindi) and …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi आजकल की लाइफस्टाइल देखें तो ज्यादातर मेट्रो सिटीज ही नहीं बल्कि छोटे शहरों में भी फ्लैट और अपार्टमेंट की भरमार है और छतों वाले घरों की संख्या कुछ कम हो गई है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या फ्लैटों में रहने वाले लोग कभी सोलर सिस्टम नहीं लगवा सकते? क्या वे कभी सोलर एनर्जी से पैदा बिजली का फायदा नहीं ले सकते? ‘सौर ऊर्जा-सोलर पैनल’ को लेकर चलाई जा रही News18hindi की सीरीजकी तीसरी कहानी में इन सवालों के जवाब दे रही हैं काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर की प्रोग्राम लीड भावना त्यागी… भावना त्यागी कहती हैं, ‘जिन लोगों का अपना निजी मकान है या छत पर पूरा अधिकार है, वे अपने लिए अलग से सोलर सिस्टम लगवा सकते हैं. लेकिन फ्लैट या बहुमंजिला इमारतों में रहने वाले लोग ऐसा नहीं कर सकते, क्योंकि छत पर किसी एक का हक नहीं होता.’ अगर आपके भी सोलर पैनल और सौर ऊर्जा को लेकर कुछ सवाल हैं तो आप हमें व्‍हाट्सएप कर सकते हैं.  लेकिन ऐसा भी नहीं है कि फ्लैट या अपार्टमेंटों में रहने वाले लोग कभी सोलर एनर्जी का फायदा ही नहीं ले सकते या सोलर पैनल सिस्टम लगवा ही नहीं सकते. इसके लिए भी कई उपाय हैं. भावना कहती हैं, ‘जिन लोगों के पास फ्लैट है उनके लिए तीन आसान विकल्प हैं. इन विकल्पों का उपयोग कर कोई भी फ्लैट या अपार्टमेंट मालिक अपने घर में सोलर एनर्जी से लाइट, पंखे, कूलर, एसी चला सकता है. सौर ऊर्जा-1: घर में सोलर पैनल लगवा लें तो कितने साल मुफ्त बिजली मिलेगी? सीरीज की पहली स्टोरी में एक्सपर्ट से समझें इसके अलावा कुछ और भी छोटे विकल्प हैं जो वह आजाद रूप से अपना सकता है. जैसे- बालकनी सोलर, यह सबसे आसान विकल्प है और फ्लैट में रहने वाले लोग बालकनी या विंडो पर छोटे प्लग-एंड-प्ले सोलर पैनल लगा सकते हैं. ये 300W से 800W तक के सिस्टम होते हैं जो सीधे आपकी बिजली के उपकरणों से जोड़े जाते हैं. हालांकि ध्यान रहे कि ये पैनल आपकी बिल्डिंग को कोई नुकसान न पहुचाएं और आरडब्ल्यूए की सहमति इसमें ले ली गई हो. इसमें भी बिजली का फायदा होता है और बिल में भी राहत मिल सकती है. इसके अलावा आप अपने घरों में सोलर बल्ब और सोलर पंखे भी लगा सकते हैं. जो बैटरी के साथ होते हैं और खुद ही चार्ज होकर फिर जलते हैं और चलते हैं. सौर ऊर्जा सीरीज की अगली स्टोरी में पढ़ें.. ‘क्या 100 वर्ग गज के मकान में लगा सोलर सिस्टम दो मंजिलों के लिए पर्याप्त बिजली दे सकता है?’ पढ़ते रहें न्‍यूज18 ह‍िंदी… खबरें पढ़ने का बेहतरीन अनुभव QR स्कैन करें, डाउनलोड करें News18 ऐप या वेबसाइट पर जारी रखने के लिए यहां क्लिक करें login Source link

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बोकारो में भीषण गर्मी, घंटों बिजली कटौती से लोग परेशान:मेंटेनेंस के कारण...

बोकारो में बुधवार को भीषण गर्मी के बीच 33 केवी चास-फुदनीडीह लाइन में मेंटेनेंस कार्य के कारण कई घंटों तक बिजली आपूर्ति बाधित रही। इससे चीराचास और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। यह कार्य सुबह 11 बजे से प्रस्तावित था, लेकिन तकनीकी प्रक्रियाओं और डीवीसी की अनुमति संबंधी औपचारिकताओं के कारण दोपहर करीब 12:30 बजे शुरू हो सका। लंबे समय तक बिजली नहीं रहने से आम जनजीवन के साथ-साथ छोटे कारोबार भी प्रभावित हुए। बिजली कटौती से व्यवसाय प्रभावित हो रहा: दुकानदार चीराचास के दुकानदार प्रमोद कुमार ने बताया कि क्षेत्र में लगातार बिजली कटौती से उनका व्यवसाय प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि दूध, दही और आइसक्रीम जैसे उत्पादों को रखने में जोखिम रहता है, इसलिए उन्होंने कई सामान रखना बंद कर दिया है। एक अन्य व्यवसायी शिव लाल ने बताया कि बिजली नहीं होने पर कोल्ड ड्रिंक और आइसक्रीम जैसे उत्पाद ठंडे नहीं रह पाते, जिससे ग्राहक कम आते हैं और आर्थिक नुकसान होता है। उन्होंने सरकार और बिजली विभाग से इस समस्या के स्थायी समाधान की मांग की। शाम के समय बार-बार ट्रिपिंग होती है: स्थानीय स्थानीय निवासी संजय कुमार का कहना है कि क्षेत्र में बढ़ते लोड के कारण शाम के समय बार-बार ट्रिपिंग होती है। उनके अनुसार, पुराने पोल, तार और वितरण व्यवस्था को अपग्रेड किए बिना इस समस्या का समाधान संभव नहीं है। गृहिणी रागिनी देवी ने बताया कि घंटों बिजली नहीं रहने से घरों में रखा भोजन खराब हो जाता है। भीषण गर्मी में पंखे और कूलर बंद रहने से बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित होती है। 33 केवी लाइन का मेंटेनेंस किया जा रहा: एसबीओ इधर, फुदनीडीह सब-स्टेशन के एसबीओ संजीव कुमार दास ने जानकारी दी कि चंद्रपुरा थर्मल पावर से मिलने वाली 33 केवी लाइन का मेंटेनेंस किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि कई स्थानों पर बिजली तारों के आसपास पेड़-पौधे उग जाने के कारण हवा चलने पर आपूर्ति बाधित होती है। उन्होंने यह भी बताया कि पहले सब-स्टेशन को 10 मेगावाट बिजली मिलती थी, जबकि वर्तमान में 17 मेगावाट आपूर्ति हो रही है, जिससे स्थिति में पहले की तुलना में सुधार आया है। फुदनीडीह सब-स्टेशन से चिराचास, के.के. सिंह कॉलोनी, बिजुलिया और सेक्टर-9-रामडीह मोड़ सहित चार प्रमुख फीडरों को बिजली आपूर्ति की जाती है। Source link

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