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झारखंड

गढ़वा में ‘घोड़े पर जनगणना’ का VIDEO वायरल:महंगे पेट्रोल-डीजल के बीच शिक्षक...

गढ़वा जिले से सामने आई एक अनोखी तस्वीर इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। वीडियो में एक शिक्षक घोड़े पर सवार होकर गांव-गांव जनगणना करते नजर आ रहे हैं। महंगे पेट्रोल-डीजल के दौर में यह दृश्य लोगों को हैरान भी कर रहा है और सोचने पर मजबूर भी। राजकीय उत्क्रमित उच्च विद्यालय टाटीदिरी के सहायक शिक्षक मुन्ना प्रसाद गुप्ता का यह अंदाज अब मोबाइल स्क्रीन से निकलकर हर चर्चा का हिस्सा बन गया है। कोई इसे ‘रियल इंडिया’ बता रहा है तो कोई इसे महंगाई पर करारा तंज मान रहा है। तरीका सस्ता और समय भी बचाता है दरअसल, मुन्ना प्रसाद गुप्ता को 16 मई से मकान सूचीकरण और जनगणना का कार्य सौंपा गया है। उनका कार्यक्षेत्र पनघटवा और आसपास के गांव हैं, जहां पहुंचना आसान नहीं है। उन्होंने पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दाम और दुर्गम रास्तों को देखते हुए अपने पुराने साधन घोड़े को चुना। वीडियो में वह हाथ में कागजात लिए, घोड़े पर सवार होकर संकरी पगडंडियों से गुजरते दिखाई दे रहे हैं। उनका कहना है कि यह तरीका न सिर्फ सस्ता है, बल्कि समय की बचत भी करता है। हर घर तक पहुंचना आसान बनाता है। दुर्गम रास्तों में घोड़ा बना सबसे भरोसेमंद साथी गढ़वा के इन इलाकों में गांव बिखरे हुए हैं। अधिकतर घर ऊंचाई या खेतों के बीच बने हैं। मुख्य सड़क से जुड़ाव कच्ची पगडंडियों के जरिए होता है, जहां बाइक या कार ले जाना मुश्किल होता है। ऐसे में घोड़ा उनके लिए सबसे कारगर साधन साबित हो रहा है। वायरल वीडियो में ग्रामीण भी उत्सुकता के साथ उन्हें देखते नजर आ रहे हैं। कई लोग उनका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं, जिससे यह मामला तेजी से फैल गया है। लोग बोले- यही है असली इनोवेशन जिला शिक्षा पदाधिकारी कैसर रजा ने शिक्षक के इस प्रयास की तारीफ की है। उन्होंने कहा कि यह न सिर्फ ईंधन बचाने की दिशा में अच्छा कदम है, बल्कि जिम्मेदारी निभाने का बेहतरीन उदाहरण भी है। वहीं, सोशल मीडिया पर लोग इस वीडियो को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कुछ इसे ‘देसी जुगाड़’ कह रहे हैं, तो कुछ इसे जमीनी हकीकत से जुड़ा इनोवेशन बता रहे हैं। कुल मिलाकर, मुन्ना प्रसाद गुप्ता का यह अनोखा अंदाज अब एक मिसाल बनता जा रहा है, जो बता रहा है कि मुश्किल हालात में भी काम करने के तरीके बदले जा सकते हैं। Source link

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हिमाचल के कसौली और शिमला के जंगलों में आग, IAF ने चिनूक...

Last Updated:May 27, 2026, 10:09 IST Himachal Kasauli Forest Fire: हिमाचल के शिमला, सोलन और हमीरपुर के के जंगलों में भीषण आग लगी है. सोलन जिले के कसौली में एयरफोर्स स्टेशन के करी लगी आग को बुझाने के लिए IAF ने एमआई-17 और चिनूक हेलिकॉप्टर से ऑपरेशन शुरू किया है और चंडीगढ़ की सुखना लेक से पानी लाकर आग पर काबू की कोशिश जारी हैं. फिलहाल, आग पर अब तक काबू नहीं पाया जा सका है. एयरफोर्स ने जंगल के मुश्किल हिस्सों में लगी आग बुझाने के लिए अपने ‘एमआई-17’ और ‘चिनूक’ हेलीकॉप्टर लगाए. शिमला. हिमाचल प्रदेश में जंगल की आग का तांडव देखने को मिल रहा है. प्रदेश में शिमला और सोलन जिले में जंगलों में आग लगी है. ऐसे में अब यहां पर सेना के हेलिकॉप्टरों से भी आग बुझाने के लिए मदद ली गई है. आग पर पूरी तरह से काबू नहीं पाया गया है. जानकारी के अनुसार, सोलन जिले के कसौली में जंगल में भीषण आग भारतीय एयरफोर्स स्टेशन के चपेट में आने का खतरा पैदा हो गया था और ऐसे में दो हेलीकॉप्टर आग बुझाने  के लिए लगाए गए. सोलन प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि यह आग कसौली एयरफोर्स स्टेशन के पास लगी है. आग ने जंगल के बड़े हिस्से को घेर लिया है. फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की टीम और फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियां आग बुझाने के लिए तुरंत पहुंचीं, लेकिन वे इसे काबू नहीं कर पाए. इसके बाद एयरफोर्स ने जंगल के मुश्किल हिस्सों में लगी आग बुझाने के लिए अपने ‘एमआई-17’ और ‘चिनूक’ हेलीकॉप्टर लगाए. आग बुझाने के लिए चंडीगढ़ की सुखना लेक से भी पानी लाया गया. अधिकारियों ने बताया कि आखिरी खबर मिलने तक आग पर काबू पाने की कोशिशें जारी थीं. एक और घटना में शिमला के पास रझाना गांव में भी जंगल में आग लगने की खबर है. फॉरेस्ट और फायर डिपार्टमेंट की टीम आग बुझाने के लिए मौके पर पहुंच गई है. अधिकारियों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों में तापमान बढ़ने की वजह से ही जंगल में आग लगी है. शिमला में तारा देवी के पास आग बुझाते लोग. शिमला में भी आग लगी शिमला के रझाना क्षेत्र में भी मंगलवार को जंगल में लगी भीषण आग ने इलाके में अफरा-तफरी मच गई. तारा देवी क्षेत्र से फैलती हुई आग करीब 12 बजे रझाना तक पहुंच गई, जहां तेज हवाओं के चलते लपटें रिहायशी इलाकों के बेहद करीब पहुंचने लगीं. स्थिति गंभीर होती देख स्थानीय लोगों ने खुद ही मोर्चा संभाला औऱ घरों तक पहुंचने से पहले रोका. महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग तक आग बुझाने के प्रयास में लगे रहे. स्थानीय निवासियों ने प्रशासन और वन विभाग से जल्द राहत और दमकल सहायता पहुंचाने की मांग की है, ताकि आग को समय रहते नियंत्रित किया जा सके. शिमला के रही है रामपुर के ननखड़ी के पुनन गांव के सामने भी जंगल में आग लगी है और दो दिनों से बेकाबू आग की वजह से हर तरफ धुआं और दहशत फैली हुई है. उधर, हमीरपुर जिले के चबूतरा के जंगलों में छह दिन से भीषण आग लगी है औऱ यहां पर भारी तबाही हुई है. आग की चपेट में आकर सैकड़ों स्लीपर और हरे-भरे पेड़ जल गए हैं और करोड़ों की वन संपदा को नुकसान पहुंचा है. दमकल विभाग ने आग बुझाने की कोशिशें की हैं. लेकन नाकाम रही हैं. क्यों लग रही है आग  घासनियों में लोग कांटे और सफाई कर रहे हैं और यहां पर आग लगा रहे है, जो कि फिर बेकाबू होकर जंगलों तक पहुंच रही है. जंगलों में लोग पार्टी करते हैं और फिर यहां पर आग जलाकर छोड़ देते हैं. जंगलों में गिराए गए शीशे भी आग की वजह बन रहे हैं, क्योंकि लगातार धूप गिरने से इनकी वजह से आग लगती है. जंगलों में लकड़ी या जानवर चराने गए लोग जलती हुई बीड़ी और सिगरेट फेंकते हैं. अब तक आग की कितनी घटनाएं हुईं? हिमाचल प्रदेश में जंगलों में आग के 148 मामले दर्ज किए गए हैं. मई महीने में मंडी में सबसे अधिक जगंलों में आग लगने की घटनाएं सामने आई हैं. 23 मई तक का आंकड़ा मिला है और पता चला है कि तापमान बढ़ने और लोगों की गलतियों की वजह से आग लग रही है. वन विभाग के अनुसार, बिलासपुर सर्किल में 10 हेक्टेयर वन क्षेत्र पर आग का असर हुआ है.  चंबा में 25.5, धर्मशाला में 51.3, मंडी में 233, नाहन में 337, शिमला में 1544.36 और वाइल्ड लाइफ दक्षिण जोन में 45 हेक्टेयर वन क्षेत्र को आग ने नुकसान पहुंचाया है.  हालांकि, वन विभाग के फिल्ट स्टाफ में अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टियां रद कर दी हैं. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Shimla,Shimla,Himachal Pradesh Source link

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सेना में कम हाइट से चुके, पर नहीं मानी हार, किसान के...

Last Updated:May 27, 2026, 09:53 IST बोकारो के दुर्गा चरण महथा ने पांचवें प्रयास में इसरो (ISRO) की परीक्षा पास की है. वे एक साधारण किसान के बेटे हैं. सेना में कम हाइट के कारण उनका चयन नहीं हो सका था. इसके बाद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. उन्होंने नौकरी के साथ रोजाना 8-10 घंटे कड़ी पढ़ाई की और यह बड़ी सफलता हासिल की. ख़बरें फटाफट बोकारोः कहते हैं ‘लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती’. इस कहावत को सच कर दिखाया है बोकारो जिले के चंदनक्यारी प्रखंड अंतर्गत सुदूर गांव सिमुलिया के रहने वाले दुर्गा चरण महथा ने. जिन्होंने पांचवें प्रयास में भारत की प्रतिष्ठित अंतरिक्ष संस्था इसरो कि LPSC परीक्षा में सफलता हासिल कर पूरे जिले का नाम रोशन किया है. उनकी इस  सफलता से गांव और आसपास के इलाके में खुशी और हर्ष का माहौल है. लोकल 18 से खास बातचीत में दुर्गा चरण महथा ने बताया कि बचपन से उनका सपना देश सेवा करने का था. वह भारतीय सेना में जाना चाहते थे, लेकिन कम हाइट के कारण उन्होंने सेना में भाग नहीं लिया, इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अब इसरो के माध्यम से देश सेवा करने का अवसर मिला है. दुर्गा चरण ने आगे बताया कि इस मुकाम तक पहुंचने का सफर बेहद संघर्षपूर्ण और दिलचस्प रहा है. उन्होंने बताया कि साल 2022 में जब उनका चयन रेलवे ग्रुप डी में नहीं हुआ, तो वह काफी निराश हुए इसके बाद वह काम की तलाश में बेंगलुरु चले गए, जहां उन्हें एक पीजी में मैनेजर की नौकरी मिल गई. मैनेजर की नौकरी के दौरान उन्हें दिन में काफी समय मिल जाता था और खाली समय में वह यूट्यूब पर पढ़ाई से जुड़े वीडियो देखा करते थे. इसी दौरान यूट्यूब पर ही उन्होंने इसरो से जुड़े कुछ वीडियो देखा, जिसने उनके भीतर एक नई ऊर्जा पैदा कर दी और उस वीडियो से  प्रेरित होकर उन्होंने ठान लिया कि अब यही उनकी मंजिल है वह नौकरी छोड़ वापस अपने गांव लौट आए और पूरी लगन से तैयारी में जुट गए. रोजाना 8-10 घंटे पढ़ाईगांव लौटकर दुर्गा चरण ने यूट्यूब वीडियो और सेल्फ स्टडी को अपना हथियार बनाया वह रोजाना 8 से 10 घंटे कड़ी पढ़ाई करते थे और साल 2022 के बाद से उन्होंने इसरो की परीक्षा देनी शुरू की. कई बार वह लिखित परीक्षा पास कर लेते, लेकिन इंटरव्यू के स्टेज पर जाकर छट जाते थे. लगातार मिल रही असफलताओं के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और ऐसे में उन्होंने अपनी कमियों को पहचाना और उन पर काम करना शुरू किया. आईटीआई के ईसीएस इंजीनियरिंग ड्राइंग और टेक्निकल थ्योरी के क्षेत्रों में अपनी पकड़ को मजबूत किया. आखिरकार, उनके 5 सालों के कठिन परिश्रम और अटूट विश्वास का फल उन्हें 2026 में मिला, जब उन्होंने इसरो कि LPSC परीक्षा मे सफलता हसील की. अपनी सफलता को लेकर दुर्गा चरण कहते हैं कि लगातार असफलता मिलने से इंसान मानसिक रूप से टूट जाता है, लेकिन उनकी पत्नी विभा देवी ने हर कठिन समय में उनका आत्मविश्वास बढ़ाया और उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी. पारिवारिक पृष्ठभूमि के बारे में बताते हुए दुर्गा चरण ने कहा कि उनके पिता अरुण महथा एक साधारण किसान हैं, जबकि माता मीरा देवी गृहिणी हैं उनका परिवार बेहद साधारण आर्थिक स्थिति से आता है. उनकी पत्नी विभा देवी एक निजी स्कूल में इंग्लिश टीचर हैं और कठिन समय में उन्होंने परिवार और पढ़ाई दोनों में उनका पूरा साथ दिया. माता-पिता ने क्या कहा?दुर्गा चरण की सफलता पर उनके पिता अरुण महथा ने कहा कि उन्होंने काफी संघर्षों के साथ अपने बेटे को पढ़ाया है. आज बेटे की सफलता से बेहद खुश हैं. वहीं, उनकी पत्नी विभा देवी ने कहा कि लंबे संघर्ष और मेहनत के बाद यह सफलता मिली है, जिससे पूरा परिवार गर्व महसूस कर रहा है. BIT Sindri से पढ़ाईदुर्गा चरण ने अपनी शुरुआती पढ़ाई हाई स्कूल सिमुलिया से पूरी की इसके बाद उन्होंने इंटर की पढ़ाई चंद्रा कॉलेज और आईटीआई फिटर ट्रेड की पढ़ाई BIT Sindri से पूरी की. अंत में उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि यदि छात्र टेक्निकल बैकग्राउंड से आते हैं, तो उन्हें टेक्निकल परीक्षाओं पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए उनका कहना है कि टेक्निकल परीक्षाओं का सिलेबस सीमित होता है और इसमें सफलता की संभावना भी अधिक रहती है. About the Author Prashun Singh मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Bokaro,Jharkhand Source link

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हजारीबाग में सेफ्टी टैंक बना मौत का कुआं:टैंक में रखा था महुआ...

हजारीबाग जिले के कटकमदाग थाना क्षेत्र के कुद (वार्ड नंबर 24) में एक ही परिवार के तीन लोगों की सेफ्टी टैंक में दम घुटने से मौत हो गई। मृतकों में चमेली देवी, उनका बेटा रवि साव और चाचा मदन साव शामिल हैं, जबकि आनंद साव गंभीर रूप से घायल हैं। जानकारी के अनुसार, सेफ्टी टैंक में अवैध रूप से महुआ शराब बनाई और रखी जाती थी। जिसके कारण टैंक के अंदर जहरीली गैस बन गई थी। घटना के वक्त चमेली देवी टैंक से महुआ शराब निकालने के लिए नीचे उतरीं, लेकिन अंदर पहुंचते ही जहरीली गैस की चपेट में आकर बेहोश हो गईं। घटना से जुड़ी कुछ तस्वीरें देखें… एक-एक कर उतरे और मरते गए लोग जब काफी देर तक चमेली देवी बाहर नहीं निकलीं, तो परिजन चिंतित हो उठे। मां को बचाने के लिए सबसे पहले उनका बेटा रवि साव टैंक में उतरा, लेकिन वह भी गैस की चपेट में आकर गिर पड़ा। इसके बाद चाचा मदन साव ने हिम्मत जुटाकर दोनों को बचाने की कोशिश की। वे भी उसी जहरीली गैस के शिकार हो गए। टैंक के भीतर मौजूद गैस इतनी खतरनाक थी कि तीनों में से कोई भी बाहर नहीं निकल सका और मौके पर ही दम तोड़ दिया। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान घर के अन्य सदस्य बेसहारा होकर यह मंजर देखते रह गए। बचाने की कोशिश में घायल हुआ पिता अपनी पत्नी, बेटे और भाई को तड़पता देख आनंद साव ने भी उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन वे भी गैस से प्रभावित होकर गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तत्काल शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। घटना की सूचना मिलते ही कटकमदाग थाना प्रभारी सरोज कुमार सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और तीनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। प्रारंभिक जांच में अवैध महुआ शराब निर्माण को हादसे की मुख्य वजह माना जा रहा है। वहीं, वार्ड पार्षद प्रतिनिधि दिलीप साहू ने घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए जांच की मांग की है। घटना के बाद पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है। परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। Source link

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गिरिडीह में देह व्यापार के बड़े रैकेट का पर्दाफाश:बंधक बनाई गईं जुड़वां...

गिरिडीह जिले के पचंबा थाना पुलिस ने मानव तस्करी और देह व्यापार के बड़े रैकेट का भंडाफोड़ करने में सफलता हासिल की है। पुलिस ने बोडो इलाके में छापेमारी कर बंधक बनाई गईं दो नाबालिग जुड़वां बहनों को सकुशल मुक्त करा लिया। इस नेटवर्क का संचालन करने वाली मुख्य महिला मास्टरमाइंड को पुलिस ने मुफस्सिल थाना क्षेत्र के सिरसिया से गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी महिला शातिर तरीके से ग्रामीण इलाकों की गरीब लड़कियों को शहर में अच्छी नौकरी दिलाने का झांसा देकर बुलाती थी। इसके बाद उन्हें ठिकानों पर बंधक बनाकर जबरन इस घिनौने दलदल में धकेल दिया जाता था। पुलिस को इस काले धंधे की भनक तब लगी जब पीड़ितों ने फोन कर मदद मांगी। काम के बहाने बुलाकर बनाया बंधक मुक्त कराई गईं जुड़वां बहनों ने पुलिस को बताया कि उन्हें 15 दिनों से बोडो इलाके के एक कमरे में कैद रखा गया था। उन्हें काम दिलाने के बहाने गिरिडीह लाया गया था, लेकिन यहां आते ही उनसे जबरन अश्लील काम कराया जाने लगा। जब भी वे इसका विरोध करतीं, आरोपी महिला उनके साथ गाली-गलौज करती थी। उन्हें घर नहीं लौटने देती थी। मंगलवार को जब दोनों बहनों ने घर जाने की जिद की, तो आरोपी ने उन्हें कमरे में बंद कर दिया। इसके बाद लड़कियों ने साहस जुटाकर पुलिस को फोन किया। उन्होंने बताया कि उनके अलावा कई अन्य लड़कियों को भी नौकरी का लालच देकर यहां लाया जाता था। धंधा चलाने वाली महिला गई जेल पीड़ितों की सूचना पर पचंबा थाना प्रभारी राजीव कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बोडो में छापा मारा। पुलिस के आने की भनक मिलते ही आरोपी महिला भाग निकली, जिसे बाद में पुलिस ने सिरसिया से दबोच लिया। जांच में खुलासा हुआ कि महिला शातिर ढंग से एकांत इलाकों में किराए का कमरा लेकर यह धंधा चलाती थी। शक होने पर ठिकाना बदल लेती थी। थाना प्रभारी ने बताया कि दोनों लड़कियों को सुरक्षित बरामद कर लिया गया है। मामले की गहन जांच जारी है। गिरोह में शामिल अन्य चेहरों को बेनकाब करने के लिए पुलिस छापेमारी कर रही है। Source link

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Kerala CMRL Case: पिनाराई विजयन के घर क्यों पहुंची ईडी की टीम,...

केरल की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. मुख्यमंत्री पद छोड़ने के कुछ ही समय बाद पूर्व मुख्यमंत्री और मौजूदा नेता प्रतिपक्ष पिनाराई विजयन की मुश्किलें बढ़ती दिखाई दे रही हैं. बुधवार सुबह प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम उनके आवास पहुंची और तलाशी अभियान शुरू किया. यह कार्रवाई चर्चित CMRL यानी कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड मामले से जुड़ी बताई जा रही है. ईडी की इस कार्रवाई ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है. सवाल उठ रहा है कि आखिर CMRL केस क्या है और इसमें पिनाराई विजयन तथा उनके परिवार का नाम क्यों सामने आ रहा है. अचानक 10 ठिकानों पर पहुंची ईडी जानकारी के मुताबिक ईडी ने बुधवार सुबह केरल में एक साथ 10 स्थानों पर छापेमारी की. इनमें पिनाराई विजयन का आवास भी शामिल है. एजेंसी की टीम बिना पूर्व सूचना के विभिन्न ठिकानों पर पहुंची और दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी. सूत्रों के अनुसार, विजयन के घर पर अधिकारियों को तलाशी लेने में किसी तरह की बाधा नहीं हुई. जैसे ही यह खबर सामने आई, सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में CMRL केस को लेकर चर्चा तेज हो गई. क्या है CMRL मामला? CMRL यानी कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड एक निजी खनन कंपनी है. आरोप है कि कंपनी ने पिनाराई विजयन की बेटी टी. वीणा की आईटी कंपनी ‘एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस’ को करोड़ों रुपये का भुगतान किया, जबकि बदले में कोई ठोस सेवा नहीं ली गई. यही कथित भुगतान अब जांच एजेंसियों के निशाने पर है. विपक्ष का आरोप है कि यह सामान्य कारोबारी लेन-देन नहीं था, बल्कि प्रभाव और राजनीतिक पहुंच के बदले किया गया भुगतान हो सकता है. हालांकि संबंधित पक्ष इन आरोपों को लगातार खारिज करते रहे हैं. कैसे सामने आया पूरा विवाद? इस मामले की शुरुआत आयकर विभाग की जांच से हुई. आयकर विभाग के अंतरिम निपटान बोर्ड की जांच में सामने आया कि वर्ष 2017-18 से 2019-20 के बीच CMRL ने एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस को लगभग 1.72 करोड़ रुपये का भुगतान किया था. जांच में यह सवाल उठा कि आखिर इस भुगतान के बदले कंपनी को कौन-सी सेवाएं मिलीं. आयकर विभाग का दावा था कि रिकॉर्ड में ऐसी कोई स्पष्ट सेवा दिखाई नहीं दी. इसके बाद यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया. SFIO से लेकर ED तक पहुंची जांच मामले की गंभीरता को देखते हुए जनवरी 2024 में कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने जांच का जिम्मा सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस (SFIO) को सौंप दिया. SFIO ने कंपनी कानून के संभावित उल्लंघनों की जांच की और अप्रैल 2025 में शिकायत दर्ज की. इसके बाद ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग की आशंका को देखते हुए प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत मामला दर्ज किया और संबंधित लोगों को पूछताछ के लिए समन भेजना शुरू किया. हाई कोर्ट से नहीं मिली राहत CMRL और उससे जुड़े अधिकारियों ने ईडी की कार्रवाई को चुनौती देते हुए केरल हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. उनका तर्क था कि उन्होंने आयकर विभाग के समक्ष मामला सुलझा लिया था और उन्हें अभियोजन से राहत मिली हुई है. कंपनी ने यह भी कहा कि किसी मूल आपराधिक एफआईआर के बिना ईडी सीधे PMLA के तहत कार्रवाई नहीं कर सकती. लेकिन हाई कोर्ट ने यह दलील स्वीकार नहीं की. अदालत ने कहा कि ईडी की जांच अभी शुरुआती चरण में है और इस स्तर पर जांच रोकने का कोई आधार नहीं है. कोर्ट ने एजेंसी को अपनी जांच जारी रखने की अनुमति दे दी. हाई कोर्ट से हरी झंडी मिलने के अगले ही दिन ईडी ने बड़े स्तर पर छापेमारी शुरू कर दी. अब जांच एजेंसी वित्तीय लेन-देन, भुगतान के उद्देश्य और संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है. फिलहाल यह मामला जांच के दायरे में है और किसी भी पक्ष के खिलाफ अदालत की ओर से दोष सिद्ध नहीं हुआ है. लेकिन इतना तय है कि CMRL केस आने वाले दिनों में केरल की राजनीति का सबसे बड़ा मुद्दा बन सकता है और इसकी गूंज राज्य से लेकर राष्ट्रीय राजनीति तक सुनाई दे सकती है. Source link

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मिलिए ‘बंदर वाले वकील साहब’ से, हर रविवार फलों से भरी गाड़ी...

Last Updated:May 27, 2026, 09:03 IST Jamshedpur Monkey Man: जमशेदपुर के अधिवक्ता संजय कुमार सरोज का यह वीडियो आपका दिल जीत लेगा. हर रविवार वे अपनी गाड़ी में फल लादकर डलमा के जंगलों में पहुंचते हैं जानवरों को भोज कराते हैं. सालों से यह सिलसिला चल रहा है. अब तो बंदर उनकी गाड़ी की आवाज तक पहचानने लगे हैं. ख़बरें फटाफट जमशेदपुर. दिनभर कोर्ट-कचहरी की व्यस्तता और कानूनी दलीलों के बीच समय बिताने के बाद, जहां ज्यादातर लोग आराम करना पसंद करते हैं, वहीं जमशेदपुर के अधिवक्ता संजय कुमार सरोज ने अपने लिए सुकून का एक बिल्कुल अलग रास्ता चुना है. उनका यह रास्ता शहर की भागदौड़ से निकलकर सीधे प्रकृति और जानवरों के बीच पहुंचता है. यही वजह है कि आज लोग उन्हें प्यार से ‘मंकी मैन ऑफ जमशेदपुर’ और ‘बंदर वाले वकील साहब’ के नाम से जानते हैं. संजय कुमार सरोज को बचपन से ही जानवरों के प्रति खास लगाव रहा है. कोर्ट और दफ्तर की जिम्मेदारियों के बीच जब भी उन्हें समय मिलता है, वे खुली वादियों और प्राकृतिक जगहों पर निकल पड़ते हैं. इसी दौरान उनका जुड़ाव जमशेदपुर के दलमा क्षेत्र में रहने वाले बंदरों से हुआ. 2019 से चल रहा क्रमउन्होंने बताया कि शुरुआत में जब वे घूमने जाते थे, तो रास्ते में बंदरों को देखकर अपने साथ एक-दो दर्जन केले ले जाया करते थे. लेकिन धीरे-धीरे उन्हें महसूस हुआ कि वहां बंदरों की संख्या काफी ज्यादा है और सभी उनकी ओर उम्मीद भरी नजरों से देखते हैं. इसके बाद साल 2019 से उन्होंने इसे एक नियमित पहल बना दिया. जंगलों में होता है भोजअब लगभग हर रविवार वे अपनी गाड़ी में करीब 3000 रुपये तक के फल और सब्जियां लेकर निकलते हैं. इनमें केला, आम, अमरूद, अनार, पपीता, खीरा और गाजर जैसी चीजें शामिल रहती हैं. पहाड़ियों और जंगलों के बीच पहुंचकर वे इन जानवरों के साथ समय बिताते हैं और उन्हें खाना खिलाते हैं. बंदर पहचानने लगे हैं गाड़ी की आवाजदिलचस्प बात यह है कि अब यह रिश्ता सिर्फ खाना खिलाने तक सीमित नहीं रहा. संजय बताते हैं कि कई बंदर उनकी गाड़ी और उनकी आवाज पहचानने लगे हैं. जैसे ही उनकी गाड़ी पहाड़ियों के पास पहुंचती है, बंदर आसपास इकट्ठा होने लगते हैं. उन्होंने कई बंदरों के नाम भी रखे हैं, जैसे चिंकी, शेरा, डॉन, बादशाह और सांभा. उनके मुताबिक, लंबे समय से साथ रहने के कारण कई जानवर अब उनके दोस्त जैसे हो गए हैं. पहले लोगों ने उड़ायी हंसीहालांकि, शुरुआत आसान नहीं थी. कई लोगों ने उनका मजाक भी उड़ाया और पूछा कि आखिर वे अपना समय और पैसा इस काम में क्यों लगा रहे हैं. लेकिन समय के साथ लोगों ने उनकी भावना और जानवरों के प्रति उनके लगाव को समझा. आज कई लोग उनके साथ इस अनुभव का हिस्सा बनने भी जाते हैं. संजय कुमार सरोज की यह पहल बताती है कि इंसान और प्रकृति का रिश्ता सिर्फ जरूरत का नहीं, बल्कि अपनापन और संवेदनाओं का भी हो सकता है. About the Author Raina Shukla बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Jamshedpur,Purbi Singhbhum,Jharkhand Source link

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गॉलब्लैडर के ऑपरेशन के दौरान महिला विस कर्मी की मौत, शव के...

लोअर बाजार थाना क्षेत्र स्थित सेंटेविटा हॉस्पिटल में गॉलब्लैडर के ऑपरेशन के लिए भर्ती झारखंड विधानसभा की कर्मी अंजना तिवारी की इलाज के दौरान मौत हो गई। वह झारखंड विधानसभा में कनीय सचिवालय सहायक के पद पर कार्यरत थीं। परिजनों के अनुसार, अंजना 24 मई को गॉलब्लैडर का ऑपरेशन कराने के लिए सेंटेविटा हॉस्पिटल में भर्ती हुई थीं। उनका इलाज डॉ. राजेश कुमार मारू की देखरेख में चल रहा था। परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान आर्टरी पंचर हो जाने से अत्यधिक रक्तस्राव शुरू हो गया, जिससे स्थिति बिगड़ गई। मृतका के भैंसूर सुनील शुक्ला ने बताया कि डॉक्टर की लापरवाही से मरीज गंभीर हुई। अंजना के पति दीपक शुक्ला का पहले ही देहांत हो चुका है। अंजना 16 साल की बेटी के साथ हरिहर सिंह रोड में रहती थीं। मां के बाद बेटी अब अकेली हो गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक ही दिन में अंजना को 6 यूनिट ब्लड और 2 यूनिट प्लाज्मा चढ़ाया गया। सुधार नहीं होने पर कार्डियक समस्या का हवाला देकर रात करीब 10 बजे उन्हें महावीर मणिपाल हॉस्पिटल रेफर कर दिया गया, जहां मंगलवार सुबह इलाज के दौरान मौत हो गई। घटना के बाद सुनील ने लोअर बाजार थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। इस संबंध में अस्पताल प्रबंधन से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई। पति नहीं हैं , बेटी साथ रहती थी मृतक के परिजनों ने डॉक्टर पर लापरवाही का लगाया आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है। अस्पताल प्रबंधन ने मामले को रफा-दफा करने का प्रयास किया तो पीड़ित परिजन शव लेकर विधासभा पहुंच गए व कर्मियों की मौजूदगी में प्रदर्शन किया। पीड़ित परिजनों का कहना था कि अंजना को पहले से किसी प्रकार की कोई बीमारी नहीं थी। वह सिर्फ गॉलब्लैडर का ऑपरेशन कराने के लिए अस्पताल में भर्ती हुई थी। मरीज की स्थिति बिगड़ी तो डॉक्टर ने पल्ला झाड़ा। Source link

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उर्दू असिस्टेंट प्रोफेसर बहाली: आठ साल के बाद डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन की तारीख...

झारखंड के विश्वविद्यालयों में उर्दू असिस्टेंट प्रोफेसर बनने का सपना देख रहे अभ्यर्थियों का इंतजार अब आठवें साल में पहुंच चुका है। वर्ष 2018 के जुलाई-अगस्त में आवेदन भरने वाले अभ्यर्थियों की बहाली प्रक्रिया अब जाकर डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन तक पहुंची है। झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) ने 20 पदों पर नियुक्ति के लिए 1 जून 2026 को डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन की तारीख घोषित कर दी है। डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए पदों के मुकाबले पांच गुना अभ्यर्थियों को आमंत्रित किया गया है। आयोग के इस फैसले के बाद अभ्यर्थियों में बहाली की उम्मीद जगी है, लेकिन वर्षों की देरी को लेकर सवाल भी तेज हो गए हैं। सत्यापन के बाद इंटरव्यू डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के दौरान अभ्यर्थियों के शैक्षणिक प्रमाण पत्र, आरक्षण से जुड़े दस्तावेज और अन्य अभिलेखों की जांच होगी। सत्यापन के बाद ही उम्मीदवारों के साक्षात्कार की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। आयोग ने स्पष्ट किया है कि डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के बाद मेरिट लिस्ट के आधार पर कुल रिक्तियों के तीन गुना अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा। 8 महीने बाद जारी हुए संशोधित अंक प्रोविजनल एकेडमिक प्वाइंट पर अभ्यर्थियों की ओर से दर्ज आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी होने के करीब आठ महीने बाद अब संशोधित अंक आयोग की वेबसाइट पर अपलोड किए गए हैं। अभ्यर्थी जन्मतिथि और पंजीयन संख्या के जरिए अपना संशोधित स्कोर देख सकते हैं। वहीं, औपबंधिक रूप से योग्य पाए गए अभ्यर्थियों का डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन 1 जून को सुबह 10 बजे से आयोग कार्यालय में होगा। Source link

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CBSE Answer sheet row: कहीं पन्ने गायब, कहीं नंबर गायब…OSM सिस्टम पर...

Last Updated:May 27, 2026, 08:07 IST CBSE Answer Sheet Controversy: CBSE की 12वीं बोर्ड परीक्षा में इस बार सिर्फ नंबरों को लेकर नहीं, बल्कि पूरी मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं. कोई छात्र कह रहा है कि उसकी आंसरशीट के पन्ने गायब हैं.किसी को सही जवाब लिखने के बावजूद नंबर नहीं मिले तो कई छात्रों का दावा है कि उन्हें जो स्कैन कॉपी भेजी गई वह उनकी है ही नहीं. सोशल मीडिया पर लगातार सामने आ रही शिकायतों ने CBSE के ऑन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम (OSM) को विवादों के केंद्र में ला दिया है. अब छात्र और अभिभावक पूछ रहे हैं कि अगर आंसरशीट में ही इतनी गड़बड़ियां हैं, तो आखिर छात्रों के भविष्य की जिम्मेदारी कौन लेगा? ख़बरें फटाफट cbse board, cbse exam, cbse news, CBSE Answer Sheet Controversy: सीबीएसई आंसर शीट को लेकर बवाल. CBSE Answer Sheet Controversy: सीबीएसई की 12वीं बोर्ड परीक्षा का रिजल्ट आने के बाद शुरू हुआ आंसरशीट विवाद अब और गहराता जा रहा है. पहले वेदांत और संजना जैसे छात्रों ने गलत आंसरशीट मिलने का आरोप लगाया था अब बड़ी संख्या में छात्र और अभिभावक स्कैन कॉपी में गड़बड़ियों को लेकर सोशल मीडिया पर खुलकर शिकायत कर रहे हैं. किसी की कॉपी से पन्ने गायब हैं, किसी को सही जवाब देने के बावजूद नंबर नहीं मिले तो कई छात्रों को पैसे देने के बाद भी आंसरशीट नहीं मिल पाई.इन शिकायतों ने सीबीएसई की ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. छात्रों का कहना है कि 30-35 नंबर का फर्क सिर्फ अंक नहीं, बल्कि उनके पूरे करियर, कॉलेज एडमिशन और भविष्य पर असर डाल सकता है. पन्ने गायब, नंबर गायब… छात्रों की बढ़ती शिकायतें सीबीएसई की स्कैन कॉपी मिलने के बाद कई छात्र और अभिभावक हैरान रह गए. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लगातार ऐसे पोस्ट सामने आ रहे हैं, जिनमें आंसरशीट में गड़बड़ी के आरोप लगाए जा रहे हैं.सोशल मीडिया पर एक अभिभावक गीतू मोजो ने दावा किया कि उनकी बेटी को चार विषयों की स्कैन कॉपी मिली, लेकिन एक विषय की उत्तर पुस्तिका का 22वां पन्ना ही गायब था. उनका कहना है कि कई ऐसे जवाबों पर भी नंबर नहीं दिए गए जो आधिकारिक उत्तर कुंजी से पूरी तरह मेल खाते हैं.उन्होंने सवाल उठाया कि अगर 30-35 अंकों का अंतर आ जाए, तो इसका सीधा असर छात्र के कॉलेज एडमिशन और करियर पर पड़ सकता है. सही जवाब पर भी जीरो नंबर का आरोप लाइव हिन्‍दुस्‍तान में छपी रिपोर्ट में कहा गया है कि अनुराधा तिवारी नाम की एक यूजर ने सीबीएसई की OSM प्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह सिस्टम छात्रों का भविष्य खराब कर रहा है. उन्होंने स्क्रीनशॉट शेयर कर दावा किया कि कई बहुविकल्पीय सवालों (MCQ) के सही जवाब देने के बावजूद छात्रों को शून्य अंक दिए गए.उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जहां स्टेप मार्किंग मिलनी चाहिए थी, वहां भी नंबर काट दिए गए. पैसे जमा किए, फिर भी नहीं मिली आंसरशीट कई छात्रों ने यह शिकायत भी की कि उन्होंने स्कैन कॉपी के लिए फीस जमा की, लेकिन अब तक उनकी उत्तर पुस्तिका उपलब्ध नहीं कराई गई.अभिभावक अक्षय गुप्ता का दावा है कि उन्होंने फिजिक्स की कॉपी के लिए आवेदन और भुगतान दोनों किया था, लेकिन पोर्टल पर कॉपी दिखाई ही नहीं दे रही है. बाकी विषयों की कॉपियां मिल गईं, लेकिन फिजिक्स की उत्तर पुस्तिका अब तक उपलब्ध नहीं हुई.छात्र अनिमेष घोष की ओर से दावा किया गया है कि उन्होंने 200 रुपये फीस जमा की, लेकिन अभी तक आंसरशीट नहीं मिली. उनका कहना है कि स्कैन कॉपी के बिना वह यह भी नहीं देख पा रहे कि मूल्यांकन सही हुआ या नहीं.इसी तरह भव्या सैनी ने भी कहा कि भुगतान करने के बावजूद उन्हें कॉपी नहीं मिली. About the Author Dhiraj Raiअसिस्टेंट एडिटर न्यूज़18 हिंदी (Network 18) डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर के तौर पर कार्यरत. न्‍यूज 18 में एजुकेशन, करियर, सक्‍सेस स्‍टोरी की खबरों पर. करीब 15 साल से अधिक मीडिया में सक्रिय. हिन्दुस्तान, दैनिक भास्कर के प्रिंट व …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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