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झारखंड

Deoghar News: बिना खेत और भारी मशीन के शुरू करें यह बिजनेस,...

होमताजा खबरकृषि बिना खेत और भारी मशीन के शुरू करें यह बिजनेस, कम समय में मिलेगा बड़ा मुनाफा Last Updated:May 26, 2026, 20:21 IST मशरूम की खेती कम लागत में ज्यादा कमाई देने वाला व्यवसाय बनता जा रहा है. विशेषज्ञों के अनुसार, एक मशरूम बैग तैयार करने में करीब 30 रुपये का खर्च आता है, जबकि सही देखभाल करने पर इससे कई गुना ज्यादा मुनाफा हो सकता है. अगर कोई किसान 100 बैग से शुरुआत करता है, तो वह हर महीने 50 से 60 हजार रुपये तक की कमाई कर सकता है. यही वजह है कि कई लोग अब छोटे स्तर से शुरू कर इसे बड़े व्यवसाय में बदल रहे हैं. देवघर: आज के समय में गांव के युवा सिर्फ नौकरी के भरोसे नहीं बैठे हैं, बल्कि खेती और छोटे व्यवसायों के जरिए अच्छी कमाई के रास्ते तलाश रहे हैं. इन्हीं में मशरूम की खेती तेजी से लोकप्रिय हो रही है. कम जगह, कम लागत और कम समय में तैयार होने वाली इस खेती को अब लोग ‘सफेद सोना’ भी कहने लगे हैं. झारखंड में यह खेती किसानों और युवाओं के लिए रोजगार का बड़ा साधन बनती जा रही है. खास बात यह है कि इसे शुरू करने के लिए बड़े खेत या भारी मशीनों की जरूरत नहीं पड़ती. घर के खाली कमरे, झोपड़ी या छोटे शेड में भी इसकी खेती आसानी से की जा सकती है. क्या कहते है मशरुम एक्सपर्टदेवघर कृषि विज्ञान केंद्र के मशरूम विशेषज्ञ रणजीत झा ने बताया कि आज कई युवा मशरूम की खेती सीखकर गांव में ही अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं. उन्होंने कहा कि नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए यह बेहतर विकल्प साबित हो सकता है. खासकर गर्मी के मौसम में मिल्की मशरूम और ऑयस्टर मशरूम की खेती आसानी से की जा सकती है. बाजार में इनकी मांग लगातार बनी रहती है, जिससे किसानों को अच्छा दाम मिल जाता है. घर बैठे कमा सकते हैं अच्छा मुनाफामशरूम की खेती की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें ज्यादा निवेश की जरूरत नहीं होती. विशेषज्ञों के अनुसार, एक मशरूम बैग तैयार करने में करीब 30 रुपये तक का खर्च आता है. सही तरीके से देखभाल करने पर इससे तीन गुना तक कमाई हो सकती है. अगर कोई किसान शुरुआत में 100 बैग तैयार करता है, तो वह हर महीने 50 से 60 हजार रुपये तक का मुनाफा कमा सकता है. कई लोग इस काम को छोटे स्तर से शुरू कर अब बड़े व्यवसाय में बदल चुके हैं. मुफ्त में दी जाती है ट्रेनिंगमशरूम की खेती के लिए कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से मुफ्त ट्रेनिंग भी दी जाती है. यह प्रशिक्षण 5 से 7 दिनों का होता है, जिसमें किसानों और युवाओं को मशरूम उत्पादन की पूरी जानकारी दी जाती है. ट्रेनिंग में मशरूम बैग तैयार करने, तापमान और नमी बनाए रखने, फसल को सुरक्षित रखने, तुड़ाई, पैकिंग और बाजार तक पहुंचाने की जानकारी दी जाती है. रोजगार का शानदार मौकाविशेषज्ञों का कहना है कि मशरूम की खेती में साफ-सफाई और सही तापमान का ध्यान रखना बेहद जरूरी है. सही जानकारी और मेहनत के साथ यह व्यवसाय कम समय में अच्छी आमदनी दे सकता है. यही वजह है कि गांवों में मशरूम की खेती तेजी से लोकप्रिय हो रही है. कई महिलाएं भी स्वयं सहायता समूह के जरिए इसकी खेती कर आत्मनिर्भर बन रही हैं. कम खर्च और कम जगह में शुरू होने वाला यह व्यवसाय ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार का शानदार अवसर बनता जा रहा है. About the Author Amita kishor न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Deoghar,Jharkhand Source link

झारखंड

अज्ञात व्यक्ति पर परेशान करने का आरोप

गुमला|जिला मुख्यालय के भरदा गांव निवासी नंद किशोर साहू ने थाने में लिखित आवेदन देकर अज्ञात लोगों द्वारा रात में डराने का आरोप लगाया है। आवेदन के माध्यम से बताया है कि 23 मई शनिवार को करीब 2 बजकर 15 मिनट में बांस का बना दरवाजा को आकर कोई खोलकर अंदर दरवाजे को हथौड़ी से तोड़ने का प्रयास कर रहा था। इस तरह से कोई व्यक्ति परेशान करने का काम कर रहा है। इससे कोई बड़ी अनहोनी होने की आशंका है। नंद किशोर ने पुलिस से जांच कर कानूनी कार्रवाई करने की मांग किया है। Source link

शिक्षा

CBSE Marking Portal Hack Claim

Hindi News Career CBSE Marking Portal Hack Claim | Cyber Researcher Nisarg Adhikari 1 घंटे पहले कॉपी लिंक 19 साल के एक स्‍टूडेंट निसर्ग अधिकारी ने दावा किया है कि उसने CBSE की वेबसाइट आसानी से हैक कर ली। निसर्ग एक साइबर सिक्योरिटी रिसर्चर है। निसर्ग के ब्लॉग को आंत्रप्रेन्योर डीडी दास ने अपने ट्विटर अकाउंट पर पोस्ट किया है। निसर्ग ने फरवरी में ही किया था अलर्ट निसर्ग ने अपने ब्लॉग में कहा कि उसने भारत सरकार की साइबर सुरक्षा एजेंसी ‘सर्ट इन’ (CERT In) को फरवरी 2026 में भी अलर्ट किया था। सीबीएसई पोर्टल पर बोर्ड एग्जाम का डाटा पता करने जैसा इश्यू भी आसानी से बिना किसी पासवर्ड की मदद के देखा जा सकता है। यहां यूज होने वाला पासवर्ड भी नाम मात्र ही है। निसर्ग का दावा है कि उसे पूरे पोर्टल का एक्‍सेस आसानी से मिल गया। सीबीएसई के ऑनस्क्रीन मार्किंग पोर्टल में कई खामियां 22 मई को जारी निसर्ग की पोस्ट में दावा किया गया है कि सीबीएसई की ऑनस्क्रीन मार्किंग पोर्टल में कई खामियां हैं। निसर्ग द्वारा CERT को फरवरी 2026 में भी अलर्ट करने के बाद भी इस विषय पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। 26 मई को डीडी दास ने निसर्ग की पोस्ट को ट्विटर पर वायरल करते हुए लिखा कि सीबीएसई की वेबसाइट पर मार्किंग स्कीम को कोई भी देख सकता है या बदल भी सकता है। सीबीएसई का ओएसएम पोर्टल पब्लिक निसर्ग ने अपने ब्लॉग में बताया कि सीबीएसई का ओएसएम पोर्टल (जहां शिक्षक ऑनलाइन कॉपियां चेक करते हैं) पूरी तरह से पब्लिक था। जब उसने वेबसाइट के कोडिंग सिस्टम को देखा तो उसे आश्चर्य हुआ। निसर्ग के अनुसार लॉगिन पेज पर केवल तीन चीजें मांगी जाती थीं, यूजर आईडी, स्कूल कोड और पासवर्ड जिसके बाद ओटीपी आता है। बाहर से सब कुछ सामान्य लग रहा था लेकिन असली खेल कोडिंग के अंदर था। पोर्टल पर पासवर्ड को देखना बेहद आसान पोर्टल में सबसे बड़ी खामी यह थी कि उसका एक मास्टर पासवर्ड खुलेआम कोडिंग के एक हिस्से में रखा हुआ था। इसे कोई भी आसानी से देख सकता था। निसर्ग ने दावा किया कि सीबीएसई पोर्टल पर मास्टर पासवर्ड का इस्तेमाल करने पर ओटीपी की जरूरत ही खत्म हो जाती थी। उसके बाद किसी भी एग्जामिनर (कॉपी चेक करने वाले शिक्षक) के अकाउंट में आसानी से प्रवेश किया जा सकता था। इसके लिए सिर्फ एक यूजर आईडी और स्कूल कोड चाहिए था जो आसानी से इंटरनेट पर मिल जाता है। पोर्टल पर प्रॉपर प्रोटेक्शन रूट की कमी निसर्ग के अनुसार इस एप्लिकेशन में और भी कई इंटरनल रूट हैं जहां कोई प्रॉपर प्रोटेक्शन रूट नहीं है। सीबीएसई पोर्टल पर जारी डैशबोर्ड, प्रोफाइल, इवेल स्क्रिप्ट्स व्यू और वेरिफिकेशन डैश बोर्ड ब्राउजर स्टोरेज में जाकर आसानी से देखे जा सकते हैं। कोई भी एग्‍जामिनर बनकर छेड़छाड़ कर सकता है इस तरह बिना असली पासवर्ड डाले केवल कुछ कमांड देकर पूरा अकाउंट कंट्रोल किया जा सकता था। इस चूक के चलते कोई भी यूजर एग्जामिनर बनकर कॉपियों के साथ छेड़छाड़ कर सकता था। बिना ओटीपी डाले लॉग इन करना आसान पोर्टल का ओटीपी सिस्टम केवल एक दिखावा था। यानी जो ओटीपी आपके फोन पर आना चाहिए वह वेबसाइट पर ही देखा जा सकता था। कोई भी यूजर थोड़ी सी चालाकी से बिना ओटीपी डाले ही लॉगिन कर सकता था। डीडी दास द्वारा अपने ट्विटर अकाउंट पर पोस्ट जारी करने के बाद सीबीएसई पोर्टल यूजर के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। सीबीएसई के भारत में 33 हजार स्कूल हैं। विदेशों में भी इन स्कूलों की कमी नहीं है। इसलिए इस एग्जामिनेशन सिस्टम का असर लाखों स्टूडेंट्स को प्रभावित करता है। ————— दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं… Source link

झारखंड

Jamtara Fake PGDCA Case | BPOs Terminated

जामताड़ा जिला प्रशासन ने मनरेगा के तहत कार्यरत दो प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारियों (बीपीओ) को फर्जी शैक्षणिक प्रमाण पत्र के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया है। उपायुक्त आलोक कुमार के निर्देश पर यह कार्रवाई की गई। . जारी आदेश के अनुसार जामताड़ा प्रखंड के बीपीओ गोविंद प्रसाद घोष और नाला प्रखंड के बीपीओ नयन कुमार की नियुक्ति वर्ष 2023-24 में प्रकाशित विज्ञापन के आधार पर हुई थी। नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान दोनों अधिकारियों ने PGDCA प्रमाण पत्र प्रस्तुत किए थे, जो बाद में जांच में संदिग्ध पाए गए। जनता दरबार में की गई थी शिकायत मामले का खुलासा तब हुआ जब जनता दरबार में इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई गई। इसके बाद जिला प्रशासन ने गंभीरता दिखाते हुए जांच समिति का गठन किया। समिति की रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि दोनों अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत PGDCA प्रमाण पत्र किसी भी सरकारी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या संस्थान से जारी नहीं किए गए थे। जांच के दौरान दोनों अधिकारियों से स्पष्टीकरण भी मांगा गया, जिसमें उन्होंने शपथ पत्र देकर कहा था कि प्रमाण पत्र में किसी भी प्रकार की त्रुटि या विसंगति के लिए वे स्वयं जिम्मेदार होंगे। इस स्वीकारोक्ति ने मामले को और गंभीर बना दिया। हाईकोर्ट याचिका और रिपोर्ट के आधार पर निर्णय प्रशासन ने झारखंड उच्च न्यायालय में दायर याचिका W.P.(S) No. 4607 of 2024 तथा जांच समिति की रिपोर्ट को आधार बनाते हुए दोनों बीपीओ को सेवा से हटाने का फैसला लिया। उपायुक्त आलोक कुमार ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि दोनों अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया गया है। Source link

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Baegal News | Sharab ko lekar faisala | अब 1KM के दायरे...

Last Updated:May 26, 2026, 19:48 IST पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने राज्य में शराब दुकानों को लेकर बड़ा फैसला लिया है. अब स्कूलों, कॉलेजों और मंदिरों के एक किलोमीटर के दायरे में नई शराब दुकानों को अनुमति नहीं दी जाएगी. मुख्यमंत्री ने यह घोषणा कल्याणी में आयोजित प्रशासनिक समीक्षा बैठक के दौरान की है. कल्याणी में प्रशासनिक बैठक के दौरान पश्चिम बंगाल के मुख्‍यमंत्री सुवेंदु सरकार ने बड़ा ऐलान किया है. CM Suvendu Government New Decision: पश्चिम बंगाल के मुख्‍यमंत्री सुवेंदु अधिकारी एक के बाद एक ऐसे फैसले लिए जा रहे है, जिससे जनता का हर दिन ‘दीवाली’ की तरह बीत रहा है. आज पश्मिच बंगाल की सुवेंदु सरकार ने एक बार फिर ऐसा फैसला लिया है, जिसकी वजह से सूबे के स्‍कूल-कॉलेजों और मंदिर में ‘खुशियों’ की दीवाली मनाई जा रही है. जी हां, बंगाल की नई नवेली बीजेपी सरकार ने फैसला लिया है कि अब स्‍कूल-कालेजों और मंदिरों से एक किलोमीटर के दायरे में शराब की कोई भी शराब की दुकान नहीं होगी. मुख्यमंत्री सुवेंदु सरकार ने ऐलान किया है कि अब स्कूलों, कॉलेजों और मंदिरों से एक किलोमीटर के दायरे में किसी भी नई शराब दुकान को अनुमति नहीं दी जाएगी. मुख्यमंत्री ने यह घोषणा नदिया जिले के कल्याणी में आयोजित एक प्रशासनिक समीक्षा बैठक के दौरान की है. बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सार्वजनिक व्यवस्था और सामाजिक माहौल को बेहतर बनाने के लिए कई नए कदम उठा रही है. इसी दिशा में शराब दुकानों की लोकेशन को लेकर सख्त नियम लागू किए जाएंगे. सरकार का मानना है कि शैक्षणिक संस्थानों और धार्मिक स्थलों के आसपास शराब की दुकानों की मौजूदगी से स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ती है. ऐसे में नई नीति के जरिए संवेदनशील इलाकों में शराब बिक्री को नियंत्रित करने की कोशिश की जाएगी. मुख्यमंत्री ने इस दौरान कई अन्य लोककल्याणकारी योजनाओं का भी ऐलान किया है. उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए ‘अन्नपूर्णा योजना’ के तहत आर्थिक सहायता दी जाएगी. इसके अलावा, मुख्‍यमंत्री ने सूबे में सब्सिडी वाले कैंटीन खोलने की बात भी कही है. इन कैंटीन में 5 रुपये में मछली-भात उपलब्ध कराने की योजना भी शुरू करने की बात कही है. About the Author Anoop Kumar MishraAssistant Editor Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at News18 Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation, defence, paramilitary forces, international security affairs…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Kolkata,West Bengal Source link

झारखंड

इन कॉलोनी को देखकर मचल जाता है अच्छे-अच्छों का दिल, यहां आशियाना...

Last Updated:May 26, 2026, 10:35 IST Ranchi Top Colonies: झारखंड की राजधानी रांची में कुछ ऐसी कॉलोनी हैं जहां घर लेने का लोग सपना देखते हैं. ये इतनी साफ-सुथरी, खूबसूरत और सुविधाओं से लैस हैं कि लगता है एक पूरा टाउन हो. सिक्योरिटी भी गजब की रहती है. शहर के अमीर लोग, बिजनेसमैन अक्सर यहीं अपना घर बनाते हैं. झारखंड की राजधानी रांची में कुछ ऐसी कॉलोनी हैं जहां पर बसने का लोग सपना देखते हैं. इस क्रम में सबसे पहला नाम आता है अशोकनगर का, दूसरा मेकॉन, तीसरा सेल सिटी का व चौथा पीपी कंपाउंड का. दरअसल, ये कॉलोनी इतनी साफ-सुथरी और इतनी खूबसूरत हैं कि लगता है कि ये एक टाउन हैं. यहां पर स्कूल से लेकर मंदिर, क्लब, हॉस्पिटल सब कुछ एक ही जगह देखने को मिल जाता है. पीपी कंपाउंड की बात करें तो रांची के जितने भी बड़े-बड़े बिजनेस टायकूंस हैं, जिनके बड़े-बड़े शोरूम और दुकानें हैं वे सब यहीं पर रहते हैं. यहां पर भी खूबसूरत बंगले व एकदम शांति देखने को मिलती है. यहां का का कल्चर काफी हाई प्रोफाइल है. सिक्योरिटी भी इतनी टाइट है कि अगर आप यूं ही घूमते हैं तो आपसे पूछा जाएगा कि आप यहां पर क्यों आए हैं और आपका घर कौन सा है. उसके बाद आप आ जाइए रांची के अशोकनगर. यहां पर खूबसूरत बंगले देखने को मिलेंगे. ऐसे बंगले जो शायद ही आपने देखे होंगे. बंगले देखकर ही लोगों की तमन्ना जाग जाती है की काश ऐसा घर हमारा भी होता. यहां पर आपको जितनी महंगी गाड़ियां होती हैं वे देखने को मिलेंगी. जैसे बीएमडब्ल्यू ऑडी वगैरह. इतना साफ सुथरा एरिया है कि यहां पर एक रैपर भी अगर आप दिखा दे तो आपको इनाम दिया जाएगा. Add News18 as Preferred Source on Google कोई भीड़ नहीं चारों तरफ हरियाली. इसके बाद बात करते हैं मेकौन कॉलोनी की. यहां पर तो आपको मात्र 1 किलोमीटर के दायरे में हॉस्पिटल से लेकर जेवीएम शामली स्कूल, क्लब और खेलने के लिए प्लेग्राउंड देखने को मिल जाएगा. ये सारी जगहें आप पैदल ही एक्सप्लोर कर सकते हैं, चारों तरफ सिर्फ और सिर्फ पेड़ पौधे और शांति. वही, सेल सिटी में तो रांची का सबसे बड़ा स्कूल डीपीएस देखने को मिलेगा. यहां पर भी मंदिर से लेकर प्लेग्राउंड सब कुछ मौजूद है. यहां पर क्वार्टर हैं जिनमें बाहर नंबरिंग की गई है. एकदम साफ-सुथरी सड़क, एक भी अनजान व्यक्ति नहीं, सिक्योरिटी एकदम टाइट, शाम के समय यहां से सनसेट का नजारा देखना बड़ा जबरदस्त होता है. Source link

झारखंड

22 हजार परिवार 48 घंटे से नहीं मिला है पेयजल:जमशेदपुर में गोविंदपुर...

जमशेदपुर के गोविंदपुर जलापूर्ति योजना क्षेत्र में पिछले 48 घंटे से पानी की आपूर्ति पूरी तरह ठप होने से 21 पंचायतों के करीब 22 हजार परिवार को गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। भीषण गर्मी के बीच जलापूर्ति बंद होने से स्थिति और भयावह हो गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में पीने के पानी की भारी किल्लत हो गई है। कई घरों में पानी पूरी तरह समाप्त हो चुका है। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की समस्या पहले भी होती रही है, लेकिन इस बार दो दिनों से लगातार आपूर्ति बंद रहने से हालात बेकाबू हो गए हैं। लोग दूर-दराज से पानी लाने को मजबूर हैं, जिससे उनकी दिनचर्या पूरी तरह प्रभावित हो रही है। बिजली बाधित होने से रुकी आपूर्ति ग्रामीणों के अनुसार जलापूर्ति बाधित होने का मुख्य कारण बिजली आपूर्ति में लगातार रुकावट है। बीते दो दिनों से बिजली की समस्या का समाधान नहीं हो पाने के कारण जलापूर्ति पूरी तरह ठप पड़ी है। लोगों का आरोप है कि हर बार बिजली या तकनीकी खराबी का हवाला देकर प्रशासन अपनी जिम्मेदारी से बच निकलता है। इस बार भी कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई, जिससे समस्या और गंभीर हो गई है। पार्षद डॉक्टर परितोष सिंह ने बताया कि इस मामले की जानकारी मुख्यमंत्री को ट्वीट कर दी गई है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि करोड़ों रुपए की लागत से बनी योजनाएं जमीनी स्तर पर फेल साबित हो रही हैं। हांडी-डेगची के साथ सड़कों पर उतरे लोग जल संकट से परेशान लोगों का आक्रोश अब सड़कों पर दिखने लगा है। कई जगहों पर ग्रामीण हांडी-डेगची लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की जा रही है। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द जलापूर्ति बहाल नहीं की गई तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा। इसी क्रम में ग्रामीणों ने कल गोविंदपुर अन्ना चौक को जाम करने की घोषणा की है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि तत्काल वैकल्पिक जलापूर्ति की व्यवस्था की जाए ताकि लोगों को राहत मिल सके। प्रशासन की ओर से अब तक कोई स्पष्ट समाधान सामने नहीं आने से लोगों में नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है। Source link

झारखंड

स्वास्थ्य विभाग में अनियमितताओं की हो सीबीआई जांच:बाबूलाल मरांडी ने उठाए एंबुलेंस...

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने झारखंड के स्वास्थ्य विभाग में कथित घोटालों को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने दवा बर्बादी, एंबुलेंस खरीद में अनियमितता और नियमों के विपरीत कंसलटेंट सेवा विस्तार जैसे मामलों को गंभीर बताते हुए पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच की मांग की है। कहा कि विभाग में बनाए गए कॉरपोरेशन का उपयोग लूट और टेंडर मैनेजमेंट के लिए किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के बजाय उसे बढ़ावा दे रही है। सरकार पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का आरोप बाबूलाल मरांडी ने कहा कि पिछले छह वर्षों में राज्य की स्थिति बदतर हुई है। कानून-व्यवस्था कमजोर हुई है। विकास कार्य ठप पड़े हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें रोजाना राज्यभर से भ्रष्टाचार की शिकायतें मिलती हैं, लेकिन सरकार इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं करती। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भ्रष्टाचार अब शिष्टाचार बन गया है। इस पर बोलने के लिए शब्द भी कम पड़ रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब तक दोषी अधिकारी पदों पर बने रहेंगे, तब तक व्यवस्था में सुधार कैसे संभव है। कंसलटेंट नियुक्ति और एंबुलेंस खरीद पर सवाल नेता प्रतिपक्ष ने JMHIDPCL में कंसलटेंट नियुक्ति को नियमों के खिलाफ बताते हुए कहा कि सेवानिवृत्त अधिकारी को तीन साल से अधिक सेवा विस्तार देने के लिए मुख्यमंत्री की मंजूरी जरूरी है, लेकिन बिना स्वीकृति के ही चौथे और पांचवें वर्ष तक नियुक्ति जारी रखी गई। उन्होंने एंबुलेंस खरीद घोटाले का जिक्र करते हुए कहा कि 55 करोड़ से खरीदी गई 206 एंबुलेंस एक साल तक निष्क्रिय रहीं, जबकि अब फिर से 80 करोड़ की नई निविदा निकाली गई है। साथ ही गोदामों में करोड़ों की दवाएं एक्सपायर होने और ऑक्सीजन टैंक परियोजना में अनियमितता के भी आरोप लगाए। ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की उन्होंने कहा कि ऑडिट में सामने आई अनियमितताएं बेहद गंभीर हैं, लेकिन सरकार इसे छिपाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने JMHIDPCL का पुनः ऑडिट कराने और रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की। साथ ही कैग रिपोर्ट के आधार पर तत्काल प्राथमिकी दर्ज करने की बात कही। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच सीबीआई से होनी चाहिए और दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नियुक्तियों में सत्ता का दुरुपयोग हुआ है। इसमें उच्च स्तर तक मिलीभगत हो सकती है। Source link

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इस निवेश गुरु की दुनिया दीवानी! एक सेशन की फीस 24 लाख...

Last Updated:May 26, 2026, 18:46 IST AI Guru Fee : एआई का स्‍वरूप धीरे-धीरे विराट होता जा रहा है. अब यह इनवेस्‍टमेंट कंपनियों और बैंकों को भी अपनी सर्विस देने लगा है. आलम ये है कि एक सेशन की ट्रेनिंग के लिए बैंक 24 लाख रुपये तक का भुगतान कर रहे हैं. इस एआई कंपनी को बनाने वाले फाउंडर का कहना है कि जो काम करने में घंटों लग जाते हैं, उसे यह एआई मॉडल महज 90 सेकंड में पूरा कर देता है. बैंकों के लिए एआई निवेश को लेकर सलाह देता है. नई दिल्‍ली. अमेरिका के वॉल स्‍ट्रीट पर इन दिनों एक नया सितारा उभरकर सामने आया है. यह न तो कोई इनवेस्‍टमेंट बैंकर है, न हेज फंड मैनेजर और न ही कोई ट्रेडर. फिर भी इस निवेश गुरु का एक सुझाव पाने के लिए कंपनियों की लाइन लगी हुई है. यह एक आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस है, जिससे टिप्‍स लेने के लिए बड़ी-बड़ी कंपनियां भी लगी हुई हैं, वह भी तब जबकि इसके एक सेशन की फीस करीब 24 लाख रुपये है. दुनिया के तमाम दिग्‍गज बैंक्‍स इसकी सर्विस पाने के लिए यह कीमत चुकाने को तैयार हैं. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, सॉफ्टबैंक के दो पूर्व निवेशक फेलिपे सिनिस्टर्रा और डेव वांग बैंकरों, फंड मैनेजर्स और एनालिस्ट्स को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल्स जैसे चैटजीपीटी, क्लॉड और जेमिनी का इस्तेमाल करना सिखाकर भारी कमाई कर रहे हैं. ये टूल्स फाइनेंस सेक्टर में तेजी से काम करने, कंपनियों का बेहतर विश्लेषण करने और एआई के बढ़ते प्रभाव में टिके रहने में मदद करते हैं. इसी टूल्‍स में यह एआई गुरु भी शामिल है, जिसके एक सेशन की कीमत 24 लाख रुपये बताई जाती है. कैसे काम करती है यह कंपनीइस कंपनी का नाम है वॉल स्‍ट्रीट प्रॉम्‍प्‍ट, जो एक सेशन के लिए 25 हजार डॉलर यानी करीब 24 लाख रुपये की फीस वसूली जाती है. यह फीस एक दिन के वर्कशॉप की है, बावजूद इसके कंपनी के पास अगले 2 महीने की बुकिंग फुल है. यह डिमांड बताती है कि कैसे ग्‍लोबल बैंकिंग और फाइनेंशियल इंडस्‍ट्री में एआई की जरूरत बढ़ती जा रही है. हालांकि, यह सिर्फ समय बचाने के लिए तकनीक का इस्‍तेमाल नहीं है, बल्कि सही फैसला लेने के लिए तकनीक की मदद लेना है. क्‍या होगा इस बदलाव का असरबैंक नौकरियों का स्‍वरूप बदलने, कर्मचारियों की संख्‍या घटाने और प्रोडक्टिविटी बढ़ाने के लिए इस एआई टूल का इस्‍तेमाल लगातार बढ़ रहा है. जोखिम ये है कि बैंक एआई ट्रेनिंग पर हद से ज्‍यादा खर्चे न बढ़ा दें. ब्‍लूमबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि बैंक व अन्‍य निवेश संस्‍थान अभी यही सोच रहे हैं कि एआई का इस्‍तेमाल भविष्‍य को बेहतर बनाने के लिए वर्तमान में किया गया निवेश है. यही वजह है कि ज्‍यादातर बड़े बैंकों ने नौकरियों की संख्‍या घटाना शुरू भी कर दिया है. स्‍टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक ने अगले 4 साल में हजारों छंटनी करने का मन बनाया है, जबकि सिटी ग्रुप, वेल्‍स फार्गो और बैंक ऑफ अमेरिका ने 2026 की पहली तिमाही में 5 हजार छंटनी करने की बात कही है. बैंक ऑफ अमेरिका ने कहा है कि एआई टूल्‍स का इस्‍तेमाल करने से उनकी प्रोडक्टिविटी 25 फीसदी तक बढ़ गई है. आखिर क्‍या सिखाता है एआई गुरुयह वर्कशॉप पारंपरिक कोडिंग क्‍लास सिखाने जैसा नहीं है. ब्‍लूमबर्ग का कहना है कि न्‍यूयॉर्क में एक ट्रेनिंग सेशन के दौरान एआई मॉडल ने स्‍टार्टअप फाउंडर को पिच वीडियो बनाकर दिया और स्‍पीच भी तैयार की, जबकि बॉडी लैंग्‍वेज सहित अन्‍य छोटी-मोटी चीजों पर भी बारीकी से ध्‍यान दिया. अगर इस काम को मैन्‍युअली किया जाए तो एक कंपनी को एनालाइज करने में घंटों लगते हैं, जबकि एआई इसे 90 सेकंड में कर देता है. About the Author Pramod Kumar Tiwari प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्‍वेस्‍टमेंट टिप्‍स, टैक्‍स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Source link

झारखंड

नदी की बहती धारा, रेतीला किनारा, हरियाली…शांति-सुकून का पूरा पैकेज! दिनभर की...

Last Updated:May 26, 2026, 12:41 IST Latehar Best Place To Visit: झारखंड के लातेहार में केचकी संगम गर्मी में लोकप्रिय पर्यटन स्थल बन गया है. जबसे यहां कानपुर से एटीवी बाइक आयी है तब से लोग और रुचि ले रहे हैं. गर्मी की छुट्टियां भी शुरू हो गई हैं, ऐसे में परिवार और दोस्तों के साथ कहीं घूमने का प्लान कर रहे हैं तो ये स्पॉट एक अच्छा ऑप्शन है. ख़बरें फटाफट पलामू. गर्मी के मौसम में लोग ऐसी जगह की तलाश करते हैं, जहां प्रकृति की ठंडक, शांति और सुकून एक साथ महसूस हो सके. झारखंड के लातेहार जिले में स्थित केचकी संगम इन दिनों पर्यटकों के लिए ऐसी ही पसंदीदा जगह बन गया है. औरंगा और कोयल नदियों के संगम के रूप में प्रसिद्ध यह जगह प्राकृतिक खूबसूरती का शानदार उदाहरण पेश करती है. हाल की बारिश के बाद यहां का नजारा और भी मनमोहक हो गया है. चारों ओर हरियाली, नदी की बहती धाराएं और रेतीला किनारा लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है. यही कारण है कि बड़ी संख्या में लोग परिवार और दोस्तों के साथ यहां पहुंच रहे हैं. पिकनिक मनाएं या घूमने जाएंबेतला नेशनल पार्क के पास होने के कारण केचकी संगम का महत्व और भी बढ़ जाता है. यह जगह किसी बीच जैसी खूबसूरती का एहसास कराती है, जहां रेत, पानी और पेड़ों की हरियाली मिलकर अलग अनुभव देती है. वन विभाग ने इसे इको-टूरिज्म केंद्र के रूप में विकसित किया है. यहां पर्यटकों के ठहरने के लिए कॉटेज, टेंट और कैफेटेरिया जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं, जिससे लोग आराम से पिकनिक और घूमने का आनंद ले सकते हैं. एटीवी बाइक की भी सुविधाकेयरटेकर दिलीप कुमार सिंह बताते हैं कि केचकी संगम का माहौल गर्मी में भी सुकून का एहसास कराता है. यहां दूर-दूर से लोग घूमने आते हैं. नदी किनारे बैठकर लोग शांति महसूस करते हैं. पुल से गुजरती गाड़ियों का दृश्य बच्चों को काफी रोमांचित करता है. यहां पेड़-पौधों की हरियाली और नदी का शांत माहौल लोगों को मानसिक सुकून देता है. उन्होंने बताया कि पर्यटकों के मनोरंजन के लिए यहां एटीवी बाइक की सुविधा भी शुरू की गई है, जो इस जगह का नया आकर्षण बन चुकी है. दिलीप कुमार सिंह ने बताया कि यह एटीवी बाइक खास तौर पर रेतीले और ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर चलने के लिए बनाई गई है. इसे कानपुर से मंगाया गया है. जहां सामान्य बाइक बालू में फंस जाती है, वहीं यह बाइक तेज रफ्तार से आसानी से चलती है. यही वजह है कि युवा पर्यटक इसका खूब आनंद ले रहे हैं. कैसे पहुंचे यहांपलामू जिला मुख्यालय मेदिनीनगर से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित केचकी संगम सड़क मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है. यहां निजी वाहन, टैक्सी या ऑटो से आरामदायक सफर किया जा सकता है. प्राकृतिक सुंदरता, रोमांच और आधुनिक पर्यटन सुविधाओं का संगम बन चुका केचकी संगम अब झारखंड की नई पर्यटन पहचान के रूप में तेजी से उभर रहा है. About the Author Raina Shukla बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Latehar,Jharkhand Source link

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