Arvind Kejriwal Latest News | Delhi Liquor Case | Justice Swarana Kanta...
होमताजा खबरदेश ‘मैं जो चोगा पहनती हूं वो…’ जस्टिस स्वर्णकांता ने ऐसा ये क्यों कहा? Last Updated:May 14, 2026, 19:27 IST Arvind Kejriwal News: दिल्ली शराब घोटाले केस में कई आरोपियों को बरी किए जाने को चुनौती देने वाली सीबीआई की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस शर्मा ने पाया कि कई लोगों ने अदालत की अवमानना की है. जस्टिस स्वर्णकांता ने कहा था कि वह ऐसे आरोपों के सामने चुप नहीं रह सकतीं और संकेत दिया कि अवमानना की कार्रवाई शुरू की जाएगी और अब वह इस मामले में ही फैसला दे रही हैं… अरविंद केजरीवाल केस में जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने क्या क्या कहा (Photo AI) नई दिल्ली. ‘मैं जो चोगा पहनती हूं वो इतना कमज़ोर नहीं है कि कुछ आलोचनाओं से उस पर असर पड़े’ अरविंद केजरीवाल समेत 22 आरोपियों को दिल्ली आरोप मुक्त करने के मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस स्वर्णकांता ने यह टिप्पणी की.दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को कहा था कि वह कुछ प्रतिवादियों और व्यक्तियों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करेगा जब दिल्ली शराब घोटाले मामले के संबंध में जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के खिलाफ कथित तौर पर ‘बेहद मानहानिकारक सामग्री’ फैलाई गई थी. दरअसल, कोर्ट ने साफ किया कि अवमानना की ये कार्यवाही अचानक या किसी निजी नाराजगी की वजह से शुरू नहीं हुई. फैसला सुनाने के बाद कोर्ट के संज्ञान में आया कि सोशल मीडिया पर एक सुनियोजित डिजिटल कैंपेन चलाया गया था. एडिट किए हुए वीडियो, चिट्ठियां और पोस्ट बड़े पैमाने पर फैलाए गए जिनका मकसद सिर्फ आलोचना नहीं, बल्कि पूरी न्यायपालिका की छवि को निशाना बनाना था. ‘जज का चोगा पहनने वाले से शांत रहने की अपेक्षा होती है’जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने कहा कि उन्हें निष्पक्ष आलोचना और असहमति स्वीकार करने की ट्रेनिंग दी गई है, और जज का चोगा पहनने वाले से शांत रहने की अपेक्षा की जाती है. लेकिन उन्होंने ये भी स्पष्ट किया कि हर बार चुप रहना न्यायिक संयम नहीं होता. इस मामले में की गई टिप्पणियां सिर्फ असहमति नहीं थीं बल्कि एक बदनामी अभियान का हिस्सा थीं, जिसमें कुछ लोगों के पास राजनीतिक ताकत भी थी. ‘डराने-धमकाने की कोशिश की गई’जस्टिस शर्मा ने कहा कि उन्हें डराने-धमकाने की कोशिश की गई. कोर्ट के खिलाफ मनगढ़ंत कहानियां गढ़ी गईं और यहां तक कि उनके परिवार को भी इन कहानियों में घसीटा गया ताकि सोच-समझकर उनका अपमान किया जा सके. जब कोर्ट के अंदर कानूनी प्रक्रिया चल रही थी तब बाहर समानांतर डिजिटल नैरेटिव खड़ा किया जा रहा था जो सीधे इस कोर्ट और न्यायपालिका को टारगेट कर रहा था. ‘न्यायिक चोगा इतना कमजोर नहीं होता’इसी पृष्ठभूमि में जस्टिस स्वर्णकांता ने यह टिप्पणी की कि वे जो न्यायिक चोगा पहनती हैं, वह इतना कमज़ोर नहीं कि आलोचनाओं से हिल जाए लेकिन जब आलोचना की आड़ में न्यायपालिका की संस्थागत साख पर सुनियोजित हमला हो तो कोर्ट का चुप रहना भी न्यायिक संयम नहीं माना जा सकता. यही वह क्षण था जब उन्होंने अवमानना की कार्यवाही आगे बढ़ाने का संकेत दिया. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi Source link









