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चाईबासा के जंगल में सुरक्षाबलों और नक्सलियों में मुठभेड़, रुक-रुक कर हो...

Last Updated:April 29, 2026, 10:33 IST चाईबासा में गोइलकेरा और टोंटो थाना क्षेत्र के बीच जंगल में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ चल रही है. यह मुठभेड़ बोरोई के पास सर्च ऑपरेशन के दौरान शुरू हुई और सुबह से जारी है. एसपी अमित रेणु ने इसकी पुष्टि की है. दोनों तरफ से रुक-रुक कर फायरिंग हो रही है. यह इलाका कोल्हान और सारंडा जंगल की सीमा पर स्थित है, जहां सुरक्षा बल लगातार ऑपरेशन चला रहे हैं.. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें First Published : April 29, 2026, 10:33 IST Source link

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मक्खन में नहायी पावभाजी, चिकन पकोड़ा, मसाला सोडा…सब है यहां, खबोड़ों की...

Last Updated:April 29, 2026, 10:18 IST Jamshedpur Famous Food Street Khao Gali: जमशेदपुर की एग्रिको खाओ गली यहां के फूडीज का फेवरेट ईवनिंग स्पॉट है. यहां शाम 6 से रात 10 बजे तक खाने के शौकीनों की जमकर भीड़ लगती है. थोड़ी सी दूरी पर 25 से 30 वेज, नॉनवेज फूड के स्टॉल हैं और सामने खुला मैदान. ख़बरें फटाफट जमशेदपुर. अगर आप खाने-पीने के शौकीन हैं और शाम के समय किसी बेहतरीन जगह की तलाश में हैं, तो जमशेदपुर की एग्रिको खाओ गली आपके लिए एक शानदार विकल्प हो सकता है. यह जगह खास तौर पर उन लोगों के लिए है जो अलग-अलग तरह के स्वाद का मजा एक ही जगह पर लेना चाहते हैं. हर दिन शाम 6:00 बजे से लेकर रात 10:00 बजे तक यह खाओ गली पूरी तरह से गुलजार हो उठती है. लगते हैं 25 से 30 स्टॉललगभग 100 मीटर की दूरी पर यहां 25 से 30 स्टॉल लगते हैं और हर स्टॉल पर कुछ न कुछ खास मिलता है. जैसे ही आप इस गली में कदम रखते हैं, सबसे पहले आइसक्रीम की ठंडी मिठास आपका स्वागत करती है. इसके बाद गोलगप्पा, लिट्टी-चोखा, बर्गर, पिज्जा, मोमोज, फ्रेंच फ्राइज, डोसा, इडली जैसे स्वादिष्ट व्यंजन एक-एक करके आपकी भूख को और बढ़ा देते हैं. नॉनवेज के शौकीनों के लिए भी बहुत कुछअगर आप नॉन-वेज पसंद करते हैं, तो यहां तंदूरी चिकन, चिकन पकोड़ा जैसे लजीज ऑप्शन भी मौजूद हैं. वहीं, गर्मी से राहत पाने के लिए कोल्ड ड्रिंक, मसाला सोडा और नोवेल्टी आइसक्रीम भी आसानी से मिल जाती है. पाव भाजी का मक्खन भरा स्वाद तो यहां आने वालों की खास पसंद में शामिल है. हर चीज बनती है फ्रेशइस खाओ गली की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां हर चीज आपके सामने ताजा बनाकर दी जाती है. साफ-सफाई का भी खास ध्यान रखा जाता है, जिससे आप बेफिक्र होकर खाने का आनंद ले सकते हैं. हर स्टॉल का स्वाद दूसरे से अलग होता है, जिससे आपको हर कदम पर नया अनुभव मिलता है. खुले मैदान में बिताएं समयइसके अलावा, इस जगह के पास ही एक बड़ा ग्राउंड भी है, जहां आप अपने दोस्तों या परिवार के साथ बैठकर क्वालिटी टाइम बिता सकते हैं. पहले स्वादिष्ट खाना खाइए और फिर खुले माहौल में बैठकर अपने पलों को यादगार बनाइए. यही इस जगह की खास पहचान है. तो अगर आप भी शाम को कहीं अच्छा समय बिताना चाहते हैं, दोस्तों के साथ घूमना चाहते हैं या अपने लव वन्स के साथ कुछ खास पल बिताना चाहते हैं, तो एक बार एग्रिको खाओ गली जरूर जाएं. यहां का स्वाद, माहौल और अनुभव आपको बार-बार आने पर मजबूर कर देगा. About the Author Raina Shukla बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Jamshedpur,Purbi Singhbhum,Jharkhand First Published : April 29, 2026, 10:15 IST Source link

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साल भर मिर्च की पैदावार, वो भी गमले में! कोडरमा की कंचन...

होमताजा खबरकृषि साल भर मिर्च की पैदावार: कोडरमा की कंचन उगा रही हैं ‘ब्लैक कोबरा’ वैरायटी Last Updated:April 29, 2026, 05:20 IST Koderma Black Cobra Chili : झुमरी तिलैया की कंचन सिंह ने गमले में बेहद तीखी ब्लैक कोबरा मिर्च उगाई हैं. उन्होंने बताया कि यह मिर्च सालभर उत्पादन देती है. जहां एक मिर्च ही सब्जी, अचार और चटनी के लिए काफी है. इस मिर्च की खासियत जानकर आप हैरान रह जाएंगे. ख़बरें फटाफट कोडरमा:  घर और रेस्टोरेंट में स्वादिष्ट व्यंजनों की पहचान मसालों से होती है और इनमें मिर्च की भूमिका सबसे अहम मानी जाती है, लेकिन अक्सर लोगों की शिकायत रहती है कि बाजार से खरीदी गई मिर्च अधिक मात्रा में डालने के बावजूद अपेक्षित तीखापन नहीं दे पाती. ऐसे में झुमरी तिलैया के बिशनपुर रोड निवासी गृहणी कंचन सिंह ने अपने घर के गमले में एक ऐसी खास मिर्च उगाई है. जिसकी चर्चा अब आसपास के लोगों के बीच हो रही है. इस मिर्च का नाम ब्लैक कोबरा है. जो अपने तेज तीखेपन और सालभर उत्पादन के लिए जानी जाती है.  गमले में लगाकर कर कर सकते हैं उत्पादन कंचन सिंह ने बताया कि जहां सामान्य तौर पर सब्जी बनाने में 8 से 10 मिर्च तक डालनी पड़ती थी. वहीं, अब सिर्फ एक ब्लैक कोबरा मिर्च ही पर्याप्त साबित हो रही है. उन्होंने इस मिर्च का बीज अपने एक परिचित से लिया था. बीज से पौधा तैयार कर गमले में लगाया गया और अब यह पौधा लगातार मिर्च दे रहा है. उन्होंने बताया कि पौधा लगाने के करीब 60 से 70 दिनों बाद इसमें मिर्च आनी शुरू हो जाती है और इसके बाद सालभर उत्पादन बना रहता है. इस पौधे की एक और बड़ी खासियत यह है कि इसमें मिर्च नीचे झुकने के बजाय आसमान की ओर ऊपर उठती हुई लगती है, जो इसे आम मिर्च के पौधों से अलग बनाती है. बाजार से मिर्च खरीदना जाएंगे भूल उन्होंने बताया कि ब्लैक कोबरा मिर्च का रंग भी इसे खास बनाता है. शुरुआत में यह हरे रंग की होती है, फिर धीरे-धीरे हल्के बैंगनी रंग में बदलती है और पकने के बाद लाल हो जाती है. इसका हल्का बैंगनी रूप सबसे ज्यादा तीखा होता है. उन्होंने बताया कि इस पौधे की सबसे बड़ी खूबी यह है कि पूरे साल मिर्च मिलती रहती है. जिससे अब बाजार से मिर्च खरीदने की जरूरत लगभग खत्म हो गई है. अधिक उत्पादन होने पर इसे सुखाकर भी रखा जा सकता है और जरूरत पड़ने पर उपयोग किया जा सकता है. अचार, चटनी, स्नैक्स में भी कर सकते हैं इस्तेमाल उन्होंने बताया कि नियमित सिंचाई और पर्याप्त धूप मिलने पर पौधा तेजी से बढ़ता है और अधिक मिर्च देता है. गमले में आसानी से उगने के कारण यह घरों के लिए बेहतर है. ब्लैक कोबरा मिर्च का इस्तेमाल सिर्फ सब्जियों तक सीमित नहीं है. इसका उपयोग चटनी, अचार, तीखे स्नैक्स और अन्य मसालेदार व्यंजनों में भी किया जा सकता है. About the Author Brijendra Pratap Singh बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में (2021) लगभग 5 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटें…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Kodarma,Jharkhand First Published : April 29, 2026, 05:20 IST Source link

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200-500 के बजट में शानदार एडी ज्वेलरी, दुल्हन की सहेली-भाभी करेंगी लकलक,...

Last Updated:April 29, 2026, 07:43 IST Palamu Markets AD Jewelry In Trend: शादी सीजन में लहंगे, कपड़ों के अलावा ज्वेलरी की भी खूब डिमांड रहती है. इसी क्रम में पलामू में आजकल एडी यानी अमेरिकन डायमंड की ज्यूलरी खूब पसंद की जा रही है. यह हर बजट में फिट बैठती है और मैचिंग ऑप्शन भी आसानी से मिल जाते हैं. ख़बरें फटाफट पलामू. शादी-विवाह का सीजन चल रहा है. ऐसे में पलामू की बाजारों में रौनक लौट आई है. यहां कपड़ों, श्रृंगार सामग्री और सजावटी सामानों के साथ ज्वेलरी दुकानों पर भी ग्राहकों की भारी भीड़ उमड़ रही है. किसी भी शादी समारोह में महिलाओं के श्रृंगार में ज्वेलरी की सबसे अहम भूमिका होती है. दुल्हन से लेकर घर की महिलाओं तक हर कोई अपने पहनावे के अनुसार आकर्षक गहनों की तलाश में बाजार पहुंच रहा है. यही वजह है कि इन दिनों पलामू के मेदिनीनगर सहित विभिन्न बाजारों में एडी ज्वेलरी की डिमांड बढ़ रही है. बजट फ्रेंडली और स्टाइलिशबता दें कि शादी के मौसम में अब महिलाएं महंगे सोने-चांदी के गहनों के साथ-साथ स्टाइलिश और बजट फ्रेंडली विकल्प भी पसंद कर रही हैं. इसी वजह से अमेरिकन डायमंड यानी एडी ज्वेलरी की मांग तेजी से बढ़ी है. कम कीमत में शानदार लुक और आकर्षक चमक मिलने के कारण यह हर वर्ग की महिलाओं की पसंद बन चुकी है. दुकानदारों का कहना है कि शादी-विवाह के सीजन में एडी सेट की बिक्री सबसे ज्यादा हो रही है. इसे आम तौर पर अमेरिकन डायमंड (AD) या CZ ज्वेलरी कहा जाता है, जो असली हीरे नहीं होते, बल्कि प्रयोगशाला में बने जिरकोनियम डाइऑक्साइड के क्रिस्टल से बने होते हैं. लेकिन ये असली हीरे की तरह ही रंगहीन, चमकदार और दोषरहित दिखते हैं. मिलता है रॉयल लुकपलामू जिले के मेदिनीनगर शहर के बाजार स्थित रूप रंग शॉप में अमेरिकन डायमंड ज्वेलरी देखने को मिल रही है. दुकानदार राजीव कुमार ने लोकल18 को बताया कि इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी चमक और डिजाइन है. यह देखने में बिल्कुल डायमंड सेट जैसी नजर आती है, जिससे पहनने वाली महिलाओं को खास और रॉयल लुक मिलता है. ब्राइडल सेट में इसकी मांग सबसे अधिक है. दुल्हनें अपने लहंगे और साड़ी के अनुसार ग्रीन, रेड, सिल्वर, पिंक, रूबी रेड, पिस्ता और बेबी पिंक रंगों के सेट पसंद कर रही हैं. हर नए सीजन में दुकानदार नए डिजाइन और नया कलेक्शन ला रहे हैं. हर बजट में होती फिटउन्होंने कहा कि एडी ज्वेलरी 200 रुपये से शुरू होकर 1000 से 1200 रुपये तक उपलब्ध है. नेकलेस सेट, हार, झुमका, ईयररिंग्स और मैचिंग ब्राइडल सेट की अच्छी रेंज दुकानों में सजी हुई है. इसके अलावा कुंदन सेट भी अलग-अलग डिजाइन और रंगों में उपलब्ध हैं, जिन्हें महिलाएं खूब पसंद कर रही हैं. कम बजट में शानदार ज्वेलरी मिलने से मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए यह बेहतर विकल्प साबित हो रहा है. टिकाऊ होती है यह ज्वेलरीआगे कहा कि एडी ज्वेलरी टिकाऊ भी होती है. यदि इसे नमी, परफ्यूम और मॉइश्चराइजर से बचाकर रखा जाए तो इसकी चमक लंबे समय तक बनी रहती है. यही कारण है कि आजकल की महिलाओं के बीच यह पसंदीदा फैशन ट्रेंड बन चुका है. शादी-विवाह के इस सीजन में पलामू के बाजार में अमेरिकन डायमंड ज्वेलरी की भारी डिमांड देखी जा रही है और आने वाले दिनों में इसकी बिक्री और बढ़ने की उम्मीद है. About the Author Raina Shukla बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Palamu,Jharkhand First Published : April 29, 2026, 07:43 IST Source link

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वज्रपात और आंधी का खतरा! रांची जमशेदपुर…. झारखंड के कई जिलों में...

Last Updated:April 29, 2026, 08:05 IST Jharkhand Aaj Ka Mausam: झारखंड में भीषण गर्मी के बीच कई जिलों में बादल छाए रहने की संभावना है. इसके साथ ही कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश और आंधी की संभावना बनी हुई है. IMD ने 28 से 30 अप्रैल तक ऑरेंज अलर्ट जारी किया है. ख़बरें फटाफट झारखंड के कई जिलों में आज बारिश की संभावना है ( एआई फोटो ) रांची: झारखंड में इन दिनों मौसम दो रंग दिखा रहा है. एक तरफ जहां भीषण गर्मी का प्रकोप जारी है. वहीं, दूसरी ओर बादल के गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश और आंधी की संभावना बनी हुई है. IMD के अनुसार आज झारखंड के कई जिलों में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे और कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ बारिश या आंधी की संभावना भी है. वहीं, राजधानी रांची, बोकारो, हजारीबाग और गिरिडीह में दिनभर आंशिक बादल छाए रहने की उम्मीद है. इन क्षेत्रों में अधिकतम तापमान 34 से 36 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है, जो सामान्य से थोड़ा कम है. बता दें कि आज झारखंड की राजधानी रांची में अधिकतम तापमान 37-38 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की उम्मीद है. जबकि न्यूनतम तापमान 22-24 डिग्री के करीब रहेगा. आज जमशेदपुर, बोकारो, धनबाद और डाल्टनगंज जैसे इलाकों में दिन का पारा 39-42 डिग्री तक पहुंच सकता है. पलामू, चाईबासा और गढ़वा संभाग में सबसे ज्यादा गर्मी पड़ रही है. इन जिलों का तापमान 43 डिग्री के करीब रह सकता है. वहीं, जमशेदपुर, डाल्टनगंज और चाईबासा जैसे दक्षिणी जिलों में गर्मी का असर अभी भी बरकरार है. शहरों का तापमान और AQI   शहर तापमान अधिकतम/न्यूनतम AQI रांची 39/26 140 जमशेदपुर 43/29 150 हजारीबाग 41/26 160 धनबाद 42/28 150 IMD ने आज 28, 29 और 30 अप्रैल के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है. आज राज्य के कई जिलों में गरज-चमक, वज्रपात, तेज हवाएं चल सकती हैं. जहां ये हवाएं 30-50 किमी प्रति घंटा से चलने की संभावना है. इसके अलावा कहीं-कहीं ओलावृष्टि की भी आशंका है. साथ ही उत्तर-पूर्वी और मध्य झारखंड रांची, बोकारो, हजारीबाग, रामगढ़, कोडरमा, गुमला आदि में हल्की से मध्यम बारिश के साथ बौछारें पड़ सकती हैं. दक्षिणी हिस्सों में आड गर्मी का असर ज्यादा रहने की संभावना है. जबकि कुछ जगहों पर बादल राहत दे सकते हैं. झारखंड में आने वाले दो-तीन दिनों में कई जिलों में प्री-मानसून गतिविधियां बढ़ने की संभावना है, जिससे तापमान में और गिरावट आ सकती है. फिलहाल लोगों को सतर्क रहने और मौसम विभाग के अपडेट पर नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है. बता दें कि गर्म हवाओं का असर अभी भी बना हुआ है. लोगों को दोपहर 12 बजे से 4 बजे तक बाहर निकलने से बचना चाहिए. साथ ही पर्याप्त पानी पीना, हल्के रंग के ढीले कपड़े पहनना और छाता या टोपी का इस्तेमाल करना जरूरी है. About the Author Brijendra Pratap Singh बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में (2021) लगभग 5 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटें…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Ranchi,Jharkhand First Published : April 29, 2026, 06:09 IST Source link

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कुआं रिंग बनाते हैं रांची के मिस्त्री रहमान, हर तीसरे दिन 15000...

Last Updated:April 29, 2026, 08:10 IST Ranchi Rehman Kuaan Ring Maker: रांची के पिठोरिया के रहमान गर्मी में कुआं रिंग बनाने का काम करते हैं. यूं तो ये काम सीजनल है, जिसकी मांग इस मौसम में ज्यादा रहती है पर वे सीजनभर में ही मोटी कमाई कर लते हैं. इससे पूरे साल उनका खर्च इत्मीनान से चलता है. ख़बरें फटाफट रांची. रांची के पिठोरिया के रहमान खासतौर पर कुआं रिंग बनाने का काम करते हैं. इन्हें वे अपने हाथों से ही बनाते हैं. उन्होंने बताया कि ‘गर्मी के दिनों में इसका ऑर्डर बहुत आता है. खासतौर पर ग्रामीण एरिया में हर दूसरे-तीसरे दिन कुआं रिंग की डिमांड होती है और मैं खुद जाकर सेट करता हूं. जिसका रेट लगभग 15,000 तक होता है, तो गर्मी के दो महीने में ही अच्छा-खासा लाख रुपये के ऊपर कमा लेता हूं. रहमान बताते हैं, गर्मी में खासतौर पर यह बनाना बेहद ही आसान होता है. क्योंकि कड़ी धूप होती है और कड़ी धूप में रिंग आसानी से सूख जाती है. दूसरी बात कड़ी धूप के चलते कुआं की भी जरूरत अधिक पड़ती है. ऐसे में खास जितने भी ग्रामीण एरिया हैं, वहां से हर दूसरे व तीसरे दिन ऑर्डर आते हैं. हालांकि यह पूरी तरह सीजनल काम है. एक रिंग की कीमत होती है ₹800एक रिंग की कीमत ₹800 होती है. तो अगर एक कुआं बनाना होता है तो इस तरीके के 10 से 15 रिंग की जरूरत पड़ती है और क्योंकि वहीं जाकर फिट करता हूं, तो 15 से 16,000 तक का रेट आराम से चला जाता है. अगर थोड़ा और डीप जाना हो तो रेट 18,000 तक भी जाती है और यह सिर्फ कुआं ही नहीं बल्कि घर में जो जल संचय होता है, उसमें भी काम आता है. जल संचय में भी काम आता हैकई लोग ऐसे होते हैं जो अपने घरों के आगे इस तरह के रिंग जमीन के अंदर डलवाते हैं और पूरा का पूरा एक ब्लॉक बनवाते हैं. ताकि बारिश का पानी या फिर और पानी जो छत से टपक रहा है, वह सब सुरक्षित इसमें स्टोर होता रहे. तो ऐसे में खासतौर पर बरसात के मौसम में भी इस तरह के ऑर्डर आते हैं. अभी फिलहाल हर दिन 20-25 रिंग अपने हाथों से ही बनाता हूं. बच्चे पढ़ते हैं अच्छे स्कूलों मेंमेरे बच्चे अच्छे इंटरनेशनल स्कूलों में पढ़ते हैं. दो बच्चे हैं, दोनों पढ़ाई में काफी अव्वल हैं. ऐसे में यह जो दो-तीन महीनों में बंपर कमाई होती है, उनकी शिक्षा के लिए मैं सेव करके रखता हूं. क्योंकि सालभर फिर इतनी कमाई नहीं हो पाती. ऐसे में यह जो जैकपॉट वाला समय होता है, इसका इस्तेमाल करता हूं. ताकि आगे उनकी पढ़ाई न रुके और पूरे घर की जिम्मेदारी उठाता हूं. कोई काम छोटा-बड़ा नहींमुस्कुराते हुए आगे बताते हैं कि काम कोई छोटा-बड़ा नहीं होता. मिस्त्री हैं तो क्या हुआ, अगर आप शिद्दत के साथ काम करें और मेहनत पूरी लगन के साथ करें तो आप इसी में बहुत बढ़िया मुनाफा कमा सकते हैं. लेकिन कई बार लोगों में झिझक होती है कि यह छोटा काम मैं कैसे करूं. अगर यह चीज हटा दी जाए तो काम करने के कई विकल्प हैं और कमाने के भी.’ About the Author Raina Shukla बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Ranchi,Jharkhand First Published : April 29, 2026, 08:10 IST Source link

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किसान हो तो जेवियर लकड़ा जैसे… मिक्सड फार्मिंग में कर रहे हैं...

होमताजा खबरकृषि किसान हो तो जेवियर लकड़ा जैसे…1 खेत में उगा रहे ये 5 सब्जियां, कमाई है बंपर Last Updated:April 29, 2026, 07:34 IST Ranchi Kisan Xavier Lakra Story: रांची के दमी गांव के किसान जेवियर लकड़ा खेती में कमाल कर रहे हैं. वह एक एकड़ में 5 तरह की सब्जियों और फलों की खेती करते हैं. जहां इस समय उनके खेत में 150 से ज्यादा आम के पेड़ हैं. आइये जानते हैं उनकी खेती के बारे में. ख़बरें फटाफट रांची: झारखंड की राजाधानी रांची के दमी गांव के रहने वाले जेवियर लकड़ा अपने घर के पास ही अपने एक एकड़ फॉर्म में हर तरह की खेती करते हैं. खासतौर पर वह आम की खेती के लिए मशहूर हैं. आज उनके पास 150 से अधिक आम के पेड़ हैं. इसके अलावा लीची, धनिया पत्ता, मिर्ची, भिंडी जैसी सारी चीजों की खेती करते हैं, जिससे आज उन्हें लाखों का मुनाफा हो रहा है और उन्होंने अपने सीक्रेट खाद के बारे में भी लोकल 18 की टीम से जानकारी साझा की. आइये जानते हैं उनकी खेती के बारे में. भेड़ के खाद का करते हैं इस्तेमाल जेवियर लकड़ा ने लोकल 18 से बताया कि वह खेती के साथ-साथ 4 बैल और भेड़ भी पाले हुए हैं. ऐसे में बैल और भेड़ का जो वेस्ट होता है, वह उसको केंचुआ खाद में मिलाते हैं और उसको खाद के रूप में इस्तेमाल करते हैं. इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति काफी अच्छी रहती है और साथ में थोड़ा चूना भी मिला देते हैं, जिससे मिट्टी का पीएच लेवल एकदम बैलेंस रहता है. फार्म के बीच में ही बनाया है घर जेवियर बताते हैं कि उनके घर के चारों तरफ बगान है और बीच में यह उनका घर है. फिलहाल इस समय उनके बगान में कच्चे आम के फल पेड़ में ज्यादा लदे हुए हैं, जिसको हम लोग पका कर बाजार में बेचने का काम करते हैं, तो कुछ प्राकृतिक तौर पर भी पकते हैं. ऐसे में उन्हें कच्चे आम के भी दाम मिल जाते है और पका हुआ का फिलहाल मार्केट में ₹120 किलो तक मिल जाता है. हर दिन उन्हें 15 केजी तक पका आम मिल जाता है. लीची से लेकर मिर्ची तक है तैयार इसके अलावा उनके पास लीची के भी कई सारे पेड़ देखने को मिलेंगे, लेकिन लीची फिलहाल कच्चा है. जहां आने वाले 15 दिनों में वह भी पक जाएंगे और तो और पेड़ के छांव वाली जगह पर मिर्च की खेती होती है. उसमें वह कई तरह के साग और धनिया पत्ता जैसे चीजों की खेती करते हैं. क्योंकि इससे सूर्य की रोशनी सीधे नहीं पड़ती और जगह का भी उपयोग बढ़िया से हो जाता है. उन्होंने आगे बताया इस बगान को तैयार करने में उन्हें 8 से 9 साल का समय लगा है. यह सारे पेड़ इतने ही साल पुराने हैं. अभी और नए पेड़ करीबन 70 पौधे आम के और लगाया हुए हैं, जो आने वाले 4 साल में फल देने लगेंगे. इसी तरह हर साल 60 से 70 पेड़ लगा देते हैं. इससे क्या है गर्मी के मौसम का वक्त होता है. इसमें अच्छी खासी डेढ़ लाख तक की कमाई हो जाती है और यह मुनाफा रुकता नहीं है. साल भर खेती से होता रहता है. About the Author Brijendra Pratap Singh बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में (2021) लगभग 5 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटें…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Ranchi,Jharkhand First Published : April 29, 2026, 07:34 IST Source link

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झुलसाती गर्मी में चाहिए सुकून के पल तो घूम आएं रानी तालाब,...

Last Updated:April 28, 2026, 08:35 IST Jamshedpur Famous Pond: जमशेदपुर के पास तिरुलडीह गांव में ऐतिहासिक रानी तालाब है, जिसकी एक नहीं कई विशेषताएं हैं. यह सालभर भरा रहता है, मछली और बत्तख पालन से लोगों को आजीविका का मौका देता है, खूबसूरत इतना है कि लोग यहां सुकून के पल बिताने आते हैं. ख़बरें फटाफट जमशेदपुर. झारखंड का मूलभूत नारा ‘जल, जंगल, जमीन’ सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि इस राज्य की पहचान है. चारों ओर फैली हरियाली, घने जंगल, पहाड़ और जल स्रोत इसे प्राकृतिक रूप से बेहद खूबसूरत बनाते हैं. खासकर गर्मियों के मौसम में जब शहरों की गर्मी लोगों को परेशान करती है, तब ऐसे शांत और ठंडे स्थानों की तलाश बढ़ जाती है जहां कुछ समय सुकून से बिताया जा सके. ऐसे में जमशेदपुर के पास स्थित तिरुलडीह गांव का रानी तालाब एक बेहतरीन पर्यटन स्थल के रूप में उभरकर सामने आता है. इस वजह से पड़ा नामजमशेदपुर से करीब 14 किलोमीटर दूर बड़ा तालसा पंचायत में स्थित यह रानी तालाब प्राकृतिक सुंदरता का अद्भुत उदाहरण है. इस तालाब का नाम ‘रानी तालाब’ इसलिए पड़ा क्योंकि इसका निर्माण घाटशिला की रानी के समय में कराया गया था. वर्षों पुराना यह तालाब आज भी अपनी ऐतिहासिक पहचान और प्राकृतिक आकर्षण को संजोए हुए है. आजीविका का भी साधनइस तालाब की सबसे खास बात यह है कि जहां आसपास के अधिकांश तालाब गर्मी के दिनों में सूख जाते हैं, वहीं रानी तालाब सालभर पानी से भरा रहता है. यही कारण है कि यह न सिर्फ स्थानीय लोगों के लिए बल्कि पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. गांव के लोग इस तालाब का उपयोग बत्तख पालन और मछली पालन के लिए भी करते हैं, जिससे उनकी आजीविका भी जुड़ी हुई है. गांव के निवासी कानू मुर्मू बताते हैं कि रानी तालाब का पानी बहुत ही पवित्र माना जाता है. यहां के लोग किसी भी शुभ कार्य, शादी या त्योहार की शुरुआत इसी तालाब के पानी से करते हैं. इस आस्था और परंपरा ने इस स्थान को और भी खास बना दिया है. पर्यटन के लिए बेहद खासपर्यटन की दृष्टि से देखा जाए तो रानी तालाब का दृश्य खासकर शाम के समय बेहद मनमोहक हो जाता है. सूरज के ढलते ही आसमान के रंग और तालाब का पानी मिलकर ऐसा दृश्य बनाते हैं, जो किसी विदेशी लोकेशन से कम नहीं लगता. चारों ओर फैले पहाड़, हरी-भरी घास और शांत वातावरण लोगों को प्रकृति के करीब ले जाता है. यहां बैठकर लोग सुकून के पल बिताते हैं और खूबसूरत सनसेट का आनंद लेते हैं. नेचर की असली खूबसूरतीअगर आप भी इस गर्मी में किसी शांत, ठंडी और प्राकृतिक जगह की तलाश में हैं, तो तिरुलडीह का रानी तालाब आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है. यह जगह न सिर्फ आपकी थकान दूर करेगी, बल्कि आपको प्रकृति की असली खूबसूरती का एहसास भी कराएगी. About the Author Raina Shukla बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Jamshedpur,Purbi Singhbhum,Jharkhand First Published : April 28, 2026, 08:35 IST Source link

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तिलापिया मछली के लिए बौराए रहते हैं कोडरमा वाले, कई किमी से...

Last Updated:April 28, 2026, 09:22 IST Koderma Tilapiya Fish On High Demand: कोडरमा के तिलैया डैम पर खास तिलापिया मछली मिलती है. स्वाद के शौकीन इसे इतना पसंद करते हैं कि कई किमी दूर से खरीदने आते हैं और घंटो इंतजार करते हैं. इसकी कीमत 160 रुपये किलो होती है. जानते हैं इसमें ऐसा क्या खास है. ख़बरें फटाफट कोडरमा. कोडरमा का तिलैया डैम प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ ताजा मछलियों के लिए भी लोगों के बीच खास पहचान रखता है. यहां मिलने वाली विभिन्न प्रजातियों की मछलियां दूर-दराज से आने वाले लोगों को आकर्षित करती हैं. लेकिन इन सबमें तिलापिया मछली की मांग सबसे अधिक देखने को मिल रही है. इसकी लोकप्रियता इतनी ज्यादा है कि इसे खरीदने के लिए लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता है और फिर भी मछली मिलेगी या नहीं, इसकी कोई गारंटी नहीं रहती. घंटों इंतजार करते हैं लोग, बड़े कांटे से खाने में काफी सहूलियततिलैया डैम में कोडरमा जिले के अलावा हजारीबाग, रांची समेत कई अन्य इलाकों से लोग ताजा मछली खरीदने पहुंचते हैं. मछुआरे जैसे ही डैम से मछलियां निकालकर किनारे स्टॉल पर लाते हैं. पहले से इंतजार कर रहे खरीदारों की भीड़ टूट पड़ती है और कुछ ही पलों में सारी तिलापिया मछलियां बिक जाती हैं. करीब 20 किलोमीटर दूर झुमरी तिलैया शहर से मछली खरीदने पहुंचे मोहम्मद शाहबाज ने बताया कि तिलापिया मछली की सबसे बड़ी खासियत इसके बड़े कांटे हैं. उन्होंने कहा कि ‘दूसरी मछलियों में छोटे-छोटे कांटे होने के कारण अक्सर बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को खाने में परेशानी होती है. कई बार कांटे गले या दांतों के बीच में फंसने से दिक्कत भी हो जाती है. लेकिन तिलापिया में बड़े कांटे होने से इसे खाने में काफी सहूलियत होती है.’ स्वाद के साथ-साथ प्रोटीन से भरपूरवे आगे कहते हैं कि ‘इस मछली की मांग लगातार बढ़ रही है. बच्चे भी इसे आसानी से खा लेते हैं. स्वाद के मामले में भी तिलापिया किसी से कम नहीं है. इसे अन्य मछलियों की तरह ही पकाया जाता है और इसका स्वाद बेहद लाजवाब होता है.’ मोहम्मद शाहबाज ने बताया कि इस मछली को खरीदने के लिए उन्हें करीब चार घंटे इंतजार करना पड़ा. यह मछली स्वाद के साथ-साथ पोषण से भी भरपूर मानी जाती है. इसमें प्रचुर मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है. जो स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है. यही कारण है कि लोग इसे सिर्फ स्वाद के लिए नहीं बल्कि सेहत के लिहाज से भी पसंद कर रहे हैं. तिलैया डैम के समीप ताजा तिलापिया मछली फिलहाल 160 रुपये प्रति किलो बेची जा रही है. About the Author Raina Shukla बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Kodarma,Jharkhand First Published : April 28, 2026, 09:22 IST Source link

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11 गुफाएं, 9 मंदिर…श्रद्धा-पर्यटन का केंद्र; देवघर की ये पहाड़ी देखने देश...

Last Updated:April 28, 2026, 09:41 IST Best Religious Place To Visit In Deoghar: देवघर में यूं तो घूमने की कई जगहें हैं पर तपोवन पहाड़ की बात ही अलग है. ये स्थान लोगों के लिए पूज्यनीय है. यहां संकरी गुफाएं और मंदिर हैं. साथ ही ट्रैकिंग का अलग ही रोमांच मिलता है. ख़बरें फटाफट देवघर. झारखंड के देवघर में स्थित तपोवन पहाड़ हिंदू धर्म के श्रद्धालुओं के लिए आस्था और विश्वास का एक महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है. यह स्थान ऊंचे पहाड़ पर बसा हुआ है और अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के साथ-साथ धार्मिक महत्व के लिए भी प्रसिद्ध है. तपोवन को ’11 गुफाओं और 09 मंदिरों की पहाड़ी’ के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि यहां एक ही स्थान पर कई प्राचीन गुफाएं और मंदिर मौजूद हैं. दूर-दूर से लोग यहां दर्शन करने और घूमने के लिए आते हैं. शांत वातावरण, ठंडी हवा और चारों तरफ फैली हरियाली इस जगह को और भी खास बना देती है. बेहद रहस्यमयी हैं यहां की गुफाएंतपोवन की गुफाएं यहां की सबसे बड़ी खासियत हैं. बाहर से देखने पर ये गुफाएं बेहद संकरी और छोटी लगती हैं, जिससे लगता है कि शायद इनमें प्रवेश करना आसान नहीं होगा. लेकिन जैसे ही लोग अंदर जाते हैं, उन्हें महसूस होता है कि इन गुफाओं में आसानी से जाया जा सकता है. अंदर का माहौल बिल्कुल अलग दुनिया जैसा लगता है, जहां शांति और सुकून का अनुभव होता है. यही वजह है कि पुराने समय में यह स्थान ऋषि-मुनियों और तपस्वियों की साधना का केंद्र रहा है. मान्यता है कि महर्षि वाल्मीकि ने भी यहां तप किया था, वहीं श्री बालानंद ब्रह्मचारी ने भी इसी स्थान पर साधना कर सिद्धि प्राप्त की थी. क्या कहते हैं स्थानीय लोगयहां के स्थानीय निवासी अमित कुमार बताते हैं कि यहां स्थित मंदिरों में भगवान शिव की विशेष पूजा होती है. पहाड़ पर बना तपो नाथ महादेव मंदिर श्रद्धालुओं के बीच खास महत्व रखता है, जहां लोग अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं. इसके अलावा गुफाओं के भीतर हनुमान जी की प्रतिमा भी स्थापित है, जो भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र है. यहां की एक और अद्भुत चीज है पहाड़ में बनी एक बड़ी दरार, जिसके बीच हनुमान जी का मंदिर स्थित है. इस दरार को लेकर एक पौराणिक कथा भी प्रचलित है कि जब रावण यहां तप करने आया था, तब देवताओं के कहने पर रावण का तप भंग करने के लिए हनुमान जी ने अपने गदा के प्रहार से पहाड़ को तोड़ दिया, जिससे यह दरार बन गई. दो पत्थरों के दरारों के बीच है हनुमान मंदिरतपोवन के नीचे एक पवित्र जल कुंड भी मौजूद है, जिसे सीता कुंड कहा जाता है. मान्यता है कि माता सीता यहां स्नान करती थीं, इसलिए यह स्थान भी धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. इसके साथ ही यह पूरा क्षेत्र प्राकृतिक रूप से बेहद सुंदर है, जहां पहाड़, गुफाएं और हरियाली मिलकर एक अनोखा दृश्य प्रस्तुत करते हैं. यही कारण है कि यहां न केवल श्रद्धालु, बल्कि पर्यटक भी बड़ी संख्या में पहुंचते हैं और तपो नाथ महादेव मंदिर, हनुमान गुफा, सीता कुंड समेत कई जगहों का आनंद लेते हैं. देवघर से इतना दूर हैझारखंड के सबसे ऊंचे पर्वतों में स्थित तपोवन पहाड़ी में पवित्र जैन तीर्थ स्थल है. यहां तपोवन पर्वत के ऊपर कई प्राचीन मंदिर और गुफाएं हैं, जिन्हें देखने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं. ऐसे में तपोवन पहाड़ियों में घूमने लायक जगहों में तपो नाथ महादेव मंदिर, हनुमान गुफा, सीता कुंड के साथ ही अन्य गुफाएं और पहाड़ियां हैं. जहां आप घूम सकते हैं. देवघर शहर से तपोवन पहाड़ की दूरी 10 किलोमीटर है. यहां पहुंचने के लिए आप देवघर से टैक्सी या ऑटो ले सकते हैं. जहां देवघर बस स्टैंड और देवघर रेलवे स्टेशन से भी तपोवन पहाड़ की दूरी 10 किलोमीटर है. इसके साथ ही नजदीकी एयरपोर्ट देवघर हवाई अड्डा रांची है. जहां से तपोवन पहाड़ की दूरी 15 किलोमीटर है. About the Author Raina Shukla बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Deoghar,Jharkhand First Published : April 28, 2026, 09:41 IST Source link

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