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धान से भी ज्यादा मुनाफे वाली निकली यह फसल, कृषि वैज्ञानिक ने...

होमताजा खबरकृषि धान से भी ज्यादा मुनाफे वाली निकली यह फसल, कृषि वैज्ञानिक ने दी अहम सलाह Last Updated:June 14, 2026, 15:31 IST कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि किसान धान के साथ-साथ सोयाबीन की खेती कर कम लागत में बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं. सोयाबीन की उन्नत किस्में करीब 100 दिनों में तैयार हो जाती हैं. वैज्ञानिक तरीके से खेती करने पर 25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन दे सकती हैं. देवघर: मानसून की बारिश शुरू होते ही गांव-देहात के खेतों में रौनक बढ़ जाती है. किसान धान की नर्सरी तैयार करने में जुट जाते हैं और खरीफ सीजन की खेती की शुरुआत हो जाती है. झारखंड समेत पूरे पूर्वी भारत में धान किसानों की पहली पसंद मानी जाती है. वहीं, अब कृषि वैज्ञानिक किसानों को एक ऐसी फसल की खेती करने की सलाह दे रहे हैं. ये कम लागत में धान की तुलना में बेहतर मुनाफा दे सकती है. यह फसल है सोयाबीन, जिसकी मांग देशभर के बाजारों में लगातार बढ़ रही है. यही कारण है कि अब कई किसान धान के साथ-साथ सोयाबीन की खेती की ओर भी रुख कर रहे हैं. क्या कहते हैं कृषि वैज्ञानिकदेवघर कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक डॉ. विवेक कश्यप ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि जून और जुलाई का महीना खरीफ फसलों की बुवाई के लिए सबसे महत्वपूर्ण समय होता है. इस दौरान किसान यदि सही फसल का चयन करें तो कम समय में अच्छी आमदनी प्राप्त कर सकते हैं. उन्होंने बताया कि सोयाबीन ऐसी फसल है, जो कम लागत में अच्छी पैदावार देती है. बाजार में इसकी कीमत भी किसानों को अच्छी मिल जाती है. यही वजह है कि पिछले कुछ सालों में सोयाबीन की खेती का चलन लगातार बढ़ रहा है. इन किस्मों के बीज हैं बेहतरडॉ. कश्यप के अनुसार, झारखंड के किसानों के लिए बिरसा सोयाबीन-01, बिरसा सफेद सोयाबीन-02 और आरटीएस-18 जैसी उन्नत किस्में काफी बेहतर हैं. ये किस्में यहां की जलवायु और मिट्टी के अनुसार विकसित की गई हैं. इनकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इन पर कीटों और कई सामान्य बीमारियों का प्रभाव अपेक्षाकृत कम पड़ता है. इससे किसानों को बार-बार कीटनाशकों का छिड़काव नहीं करना पड़ता. खेती की लागत भी कम हो जाती है. कम खर्च और बेहतर उत्पादन का यही संतुलन किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित होता है. 100 दिनों में तैयार हो जाती है फसलडॉ. कश्यप ने बताया कि सोयाबीन की खेती केवल झारखंड तक सीमित नहीं है. इसकी खेती पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, असम और उत्तर-पूर्व के कई राज्यों में भी बड़े पैमाने पर की जाती है. इस फसल को बहुत अधिक देखभाल की आवश्यकता नहीं होती. सामान्य कृषि प्रबंधन के साथ भी अच्छा उत्पादन मिल जाता है. बुवाई के लगभग 40 से 45 दिनों बाद पौधों में फूल आने लगते हैं, जिससे किसानों को फसल की स्थिति का अंदाजा हो जाता है. वहीं करीब 100 दिनों में फसल पूरी तरह पककर कटाई के लिए तैयार हो जाती है. 15 जून के बाद शुरू कर सकते हैं बुवाईकृषि वैज्ञानिक का कहना है कि सोयाबीन की बुवाई जून के दूसरे सप्ताह से लेकर जुलाई के पहले सप्ताह तक कर लेनी चाहिए. यह समय सबसे उपयुक्त माना जाता है. मानसून की शुरुआती बारिश के कारण खेतों में पर्याप्त नमी बनी रहती है. बीजों का अंकुरण बेहतर होता है. हालांकि किसानों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि खेत में पानी जमा न हो, क्योंकि अत्यधिक जलभराव फसल को नुकसान पहुंचा सकता है. अच्छी जल निकासी वाली भूमि में सोयाबीन का उत्पादन बेहतर होता है. 20 से 25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपजउत्पादन की बात करें तो उन्नत किस्मों और वैज्ञानिक तरीके से खेती करने पर किसान 20 से 25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज प्राप्त कर सकते हैं. बाजार में सोयाबीन का उपयोग तेल, पशु आहार और कई खाद्य उत्पादों के निर्माण में किया जाता है, इसलिए इसकी मांग पूरे वर्ष बनी रहती है. मांग अधिक होने के कारण किसानों को अपनी उपज बेचने में भी ज्यादा परेशानी नहीं होती. यही वजह है कि सोयाबीन को कम लागत में अधिक मुनाफा देने वाली फसलों में गिना जाता है. About the Author Amita kishor न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Deoghar,Jharkhand Source link

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हिरासत से साइबर अपराधी छुड़ाने का मामला:गिरिडीह पुलिस ने दो को दबोचा,...

गिरिडीह जिले के अहिल्यापुर थाना क्षेत्र के चिकसोरिया गांव में पुलिस हिरासत से साइबर अपराधी को छुड़ाने और पुलिस टीम पर हमला के मामले में दो आरोपियों को दबोचा है। वहीं मामले में शामिल अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है। यह घटना 10/11 जून की रात उस समय हुई, जब साइबर थाना की टीम आरोपी चुड़ामन मंडल को गिरफ्तार करने गांव पहुंची थी। पुलिस कार्रवाई के दौरान स्थानीय लोगों ने विरोध करते हुए न केवल आरोपी को छुड़ा लिया, बल्कि पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की भी की। इस दौरान सरकारी वाहन पर पथराव कर उसे क्षतिग्रस्त कर दिया गया था। पुलिस की स्पेशल टीम ने दो को पकड़ा घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक डॉ. विमल कुमार के निर्देश पर तत्काल एक विशेष टीम का गठन किया गया। सदर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी जितवाहन उरांव के नेतृत्व में गठित इस टीम ने तेजी से कार्रवाई करते हुए मामले में शामिल दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान चिकसोरिया गांव निवासी 51 वर्षीय जितन मंडल और 20 वर्षीय सूरज मंडल के रूप में हुई है। दोनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। फरार आरोपियों की तलाश में लगातार छापेमारी पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस घटना में कई अन्य लोग भी शामिल थे, जो फिलहाल फरार हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी की जा रही है। पुलिस टीम तकनीकी और स्थानीय इनपुट के आधार पर आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सरकारी कार्य में बाधा डालने, पुलिस पर हमला करने और आरोपी को छुड़ाने जैसी गंभीर घटनाओं में शामिल सभी लोगों को चिन्हित कर सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का मानना है कि जल्द ही बाकी आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा। विशेष टीम में कई थानों की संयुक्त भागीदारी इस पूरे अभियान में जिले के कई थानों की संयुक्त टीम ने हिस्सा लिया। छापेमारी दल में पुलिस निरीक्षक कमलेश पासवान, साइबर थाना प्रभारी रामेश्वर भगत, मुफ्फसिल थाना प्रभारी श्याम किशोर महतो, अहिल्यापुर थाना प्रभारी ऐनुल हक खान, बेंगाबाद थाना प्रभारी अमन कुमार समेत अन्य अधिकारी शामिल थे। इसके अलावा एसडीपीओ की क्यूआरटी/सैट टीम और कई पुलिस जवान भी इस अभियान का हिस्सा बने। Source link

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धनबाद में पति ने ब्लेड से काटी पत्नी की गर्दन:खाना बनाने का...

धनबाद के भूली ओपी क्षेत्र अंतर्गत पांडरपाला में रविवार को एक घरेलू विवाद ने खौफनाक रूप ले लिया। मामूली कहासुनी इतनी बढ़ गई कि एक पति ने अपनी ही पत्नी पर जानलेवा हमला कर दिया। आरोपी ने गुस्से में आकर ब्लेड से पत्नी की गर्दन पर वार कर दिया। जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई। घायल महिला को स्थानीय लोगों की तत्परता से तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसका इलाज जारी है। वहीं, घटना को अंजाम देने के बाद आरोपी पति मौके से फरार हो गया। दोनों साथ करते थे काम, बहस के बाद चलाया ब्लेड जानकारी के अनुसार, झरिया के चौथाई कुल्ली निवासी शाहबाज उर्फ खैरुल अंसारी और उनकी पत्नी मेंहदी खातून एक ही स्थान पर काम करते थे। दोनों अलहबीबी मैरेज हॉल में खाना बनाने का काम करते हैं। रविवार को किसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद शुरू हुआ, जो धीरे-धीरे उग्र होता चला गया। गुस्से में नियंत्रण खो बैठे शाहबाज ने पास में मौजूद ब्लेड उठाया और पत्नी की गर्दन पर हमला कर दिया। इस अचानक हुए हमले से महिला लहूलुहान होकर वहीं गिर पड़ी। चीख-पुकार सुनकर पहुंचे लोग, बचाई जान घटना के बाद महिला की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे। वहां का दृश्य देख हर कोई सन्न रह गया। लोगों ने तुरंत स्थिति को संभालते हुए घायल महिला को उठाया और बिना देर किए शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एसएनएमएमसीएच) पहुंचाया। डॉक्टरों ने प्राथमिक इलाज के बाद उसकी स्थिति को गंभीर लेकिन नियंत्रण में बताया है। स्थानीय लोगों की सक्रियता से महिला की जान बच पाई, नहीं तो स्थिति और भी भयावह हो सकती थी। पुलिस जांच में जुटी, आरोपी की तलाश जारी घटना की सूचना मिलते ही भूली ओपी प्रभारी विश्वजीत ठाकुर पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे और आसपास के लोगों से पूछताछ की। इसके बाद वह अस्पताल भी गए और घायल महिला का हालचाल जाना। पुलिस के अनुसार, प्रथम दृष्टया मामला पति-पत्नी के आपसी विवाद का है। जिसमें पति ने गुस्से में आकर हमला किया। फिलहाल आरोपी फरार है। उसकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि आरोपी को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा। Source link

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बुटीक बिजनेस में छिपा है मोटा मुनाफा, बोकारो की डिजाइनर ने बताया...

बोकारो: आज के समय में महिलाओं के लिए बुटीक व्यवसाय आत्मनिर्भर बनने का एक बेहतरीन माध्यम बनकर उभरा है. कम पूंजी में शुरू होने वाला यह व्यवसाय न केवल रोजगार का अवसर प्रदान करता है, बल्कि अच्छी आय का स्रोत भी बन सकता है. बोकारो के सेक्टर-4 स्थित ‘द फैब्रिक जॉन’ बुटीक की संचालिका बसंती दास पिछले 35 वर्षों से इस क्षेत्र में काम कर रही हैं. उन्होंने बुटीक व्यवसाय शुरू करने से लेकर उसे सफल बनाने तक की कई महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं. बसंती दास ने बताया कि बुटीक व्यवसाय को छोटे स्तर पर करीब 40 हजार रुपये की पूंजी से शुरू किया जा सकता है. इसमें दो सिलाई मशीनों पर लगभग 20 हजार रुपये, दुकान के इंटीरियर पर 5 हजार रुपये, दुकान या कार्यस्थल के किराये पर 5 हजार रुपये, स्टीम आयरन, कैंची और मेजरिंग टेप जैसे उपकरणों पर 5 हजार रुपये तथा टेलरिंग से जुड़े अन्य सामानों पर करीब 5 हजार रुपये खर्च किए जा सकते हैं. उन्होंने बताया कि बुटीक में सिर्फ कपड़ों की सिलाई ही नहीं होती, बल्कि ग्राहकों की पसंद और जरूरत के अनुसार कस्टम डिजाइनिंग का काम भी किया जाता है. इसमें सूट, ब्लाउज, लहंगा, गाउन, कुर्ती, फॉल-पिको, अल्टरशन और ब्राइडल वियर जैसी सेवाओं की अच्छी मांग रहती है. खासकर शादी-विवाह के सीजन में ऑर्डर बढ़ने से कमाई में भी उल्लेखनीय वृद्धि होती है. बसंती दास के अनुसार, साधारण डिजाइन वाले गाउन की सिलाई का शुल्क 1,500 रुपये से शुरू होकर 4,000 रुपये या उससे अधिक तक हो सकता है. वहीं, कस्टम ब्लाउज डिजाइनिंग के लिए डिजाइन और कार्य की जटिलता के आधार पर 150 रुपये से लेकर 1,500 रुपये तक शुल्क लिया जाता है. ब्राइडल वियर और विशेष डिजाइन वाले परिधानों में मुनाफे की संभावना और भी अधिक रहती है. उन्होंने कहा कि बुटीक व्यवसाय शुरू करने से पहले कम से कम 4 से 5 वर्षों का अनुभव होना बेहद जरूरी है. इच्छुक लोग किसी स्थापित बुटीक में काम करके डिजाइनिंग, कटिंग, सिलाई और व्यवसाय प्रबंधन की बारीकियां सीख सकते हैं. इससे व्यवसाय शुरू करने में आने वाली चुनौतियों को बेहतर तरीके से समझा जा सकता है. बसंती दास ने बताया कि आज के डिजिटल दौर में बुटीक व्यवसाय को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए ऑनलाइन माध्यमों का उपयोग करना भी जरूरी है. होम डिलीवरी, डिजाइन कैटलॉग, सोशल मीडिया मार्केटिंग और डिजिटल प्रमोशन के जरिए ग्राहक संख्या बढ़ाई जा सकती है. इससे स्थानीय बाजार के अलावा दूसरे शहरों से भी ऑर्डर मिलने की संभावना बढ़ जाती है. उन्होंने कहा कि यदि इस व्यवसाय को सही योजना और ग्राहकों की पसंद के अनुसार संचालित किया जाए, तो छोटे शहरों और कस्बों में भी हर महीने 50 हजार रुपये या उससे अधिक की आय आसानी से अर्जित की जा सकती है. इतना ही नहीं, यह व्यवसाय लोगों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ दूसरों को रोजगार देने का अवसर भी प्रदान करता है. Source link

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पति के अवैध संबंध पर पत्नी ने जताई नाराजगी:पति ने गला रेतकर...

गिरिडीह जिले के बिरनी प्रखंड अंतर्गत भरकट्टा ओपी क्षेत्र के सिरमाडीह गांव में पति ने पत्नी की हत्या कर दी। जानकारी के मुताबिक पति का अवैध संबंध था। पत्नी इसपर आपत्ति जताई थी। जिससे नाराज पति ने पत्नी की हत्या कर दी। मृतका का नाम कुलसी देवी है। आरोपी पति का नाम दौलत साव है। हत्या के बाद आरोपी पति खुद ही थाने चला गया और हत्या करने की जानकारी पुलिस को दी। वहीं घटना की जानकारी मिलते ही पूरे गांव में सनसनी फैल गई। बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जुट गए। इसके बाद भरकट्टा ओपी प्रभारी ओमप्रकाश पांडेय पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। घर बंद होने के कारण पुलिस ने ताला तोड़कर अंदर प्रवेश किया। इसके बाद घर के बरामदे से महिला का शव बरामद किया गया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। घटना के बाद की तस्वीरें देखें… खुद थाने पहुंचकर दी हत्या की जानकारी इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि आरोपी पति दौलत साव खुद रविवार सुबह करीब नौ बजे भरकट्टा ओपी पहुंचा और अपनी पत्नी की हत्या की सूचना दी। इसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उसे हिरासत में ले लिया। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि हत्या के बाद आरोपी ने शव को ठिकाने लगाने की भी कोशिश की, लेकिन वह सफल नहीं हो सका। पुलिस अब पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। आरोपी से लगातार पूछताछ कर रही है, ताकि हत्या के पीछे के कारणों का स्पष्ट खुलासा हो सके। अवैध संबंध बना हत्या की वजह, जांच जारी ग्रामीणों के अनुसार, दौलत साव का एक अन्य महिला के साथ अवैध संबंध था, जिसका उसकी पत्नी कुलसी देवी विरोध करती थी। इसी विवाद को हत्या की मुख्य वजह माना जा रहा है। हालांकि पुलिस इस एंगल के साथ-साथ अन्य संभावित कारणों की भी जांच कर रही है। सरिया-बगोदर एसडीपीओ धनंजय राम ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला बेहद निर्मम हत्या का प्रतीत होता है। उन्होंने कहा कि आरोपी सहित दो लोगों से पूछताछ की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी। Source link

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धनबाद में पति ने ब्लेड से काटी पत्नी की गर्दन:खाना बनाने का...

धनबाद के भूली ओपी क्षेत्र अंतर्गत पांडरपाला में रविवार को एक घरेलू विवाद ने खौफनाक रूप ले लिया। मामूली कहासुनी इतनी बढ़ गई कि एक पति ने अपनी ही पत्नी पर जानलेवा हमला कर दिया। आरोपी ने गुस्से में आकर ब्लेड से पत्नी की गर्दन पर वार कर दिया। जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई। घायल महिला को स्थानीय लोगों की तत्परता से तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसका इलाज जारी है। वहीं, घटना को अंजाम देने के बाद आरोपी पति मौके से फरार हो गया। दोनों साथ करते थे काम, बहस के बाद चलाया ब्लेड जानकारी के अनुसार, झरिया के चौथाई कुल्ली निवासी शाहबाज उर्फ खैरुल अंसारी और उनकी पत्नी मेंहदी खातून एक ही स्थान पर काम करते थे। दोनों अलहबीबी मैरेज हॉल में खाना बनाने का काम करते हैं। रविवार को किसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद शुरू हुआ, जो धीरे-धीरे उग्र होता चला गया। गुस्से में नियंत्रण खो बैठे शाहबाज ने पास में मौजूद ब्लेड उठाया और पत्नी की गर्दन पर हमला कर दिया। इस अचानक हुए हमले से महिला लहूलुहान होकर वहीं गिर पड़ी। चीख-पुकार सुनकर पहुंचे लोग, बचाई जान घटना के बाद महिला की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे। वहां का दृश्य देख हर कोई सन्न रह गया। लोगों ने तुरंत स्थिति को संभालते हुए घायल महिला को उठाया और बिना देर किए शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एसएनएमएमसीएच) पहुंचाया। डॉक्टरों ने प्राथमिक इलाज के बाद उसकी स्थिति को गंभीर लेकिन नियंत्रण में बताया है। स्थानीय लोगों की सक्रियता से महिला की जान बच पाई, नहीं तो स्थिति और भी भयावह हो सकती थी। पुलिस जांच में जुटी, आरोपी की तलाश जारी घटना की सूचना मिलते ही भूली ओपी प्रभारी विश्वजीत ठाकुर पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे और आसपास के लोगों से पूछताछ की। इसके बाद वह अस्पताल भी गए और घायल महिला का हालचाल जाना। पुलिस के अनुसार, प्रथम दृष्टया मामला पति-पत्नी के आपसी विवाद का है। जिसमें पति ने गुस्से में आकर हमला किया। फिलहाल आरोपी फरार है। उसकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि आरोपी को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा। Source link

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अहीर सेना की बैठक आज संगठन मजबूती पर होगी चर्चा

गुमला|अहीर सेना प्रखंड समिति सिसई की एक महत्वपूर्ण बैठक रविवार 14 जून को सुबह 10 बजे से डूमर टोली स्थित आम बगीचा में आयोजित की गई है। इस बैठक में सिसई प्रखंड के सभी पंचायतों से अहीर समाज के प्रबुद्ध और बुद्धिजीवी लोग शामिल होंगे। बैठक में समाज के हक, अधिकार और वर्तमान दशा-दिशा पर गहन मंथन किया जाएगा। अहीर सेना झारखंड के प्रदेश सचिव देव नारायण यादव ने बैठक के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान सरकार को अहीर समाज की दशा और उनकी जायज मांगों से अवगत कराया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी कि यदि सरकार ने अहीर समाज की मांगों और उनके अधिकारों पर ध्यान नहीं दिया, तो पूरा समाज सड़कों पर उतरकर उग्र धरना-प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि अहीर समाज को ओबीसी आरक्षण का अपना हक हर कीमत पर वापस चाहिए। ​सचिव देव नारायण यादव ने समाज के सभी लोगों से इस बैठक में अनिवार्य रूप से पहुंचने की अपील की है। उन्होंने कहा कि बैठक में आने वाले सभी स्वजातीय बंधु अहीर सेना झारखंड के आधिकारिक पोर्टल पर अपना पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) जरूर कराएं। इसके साथ ही, संगठन को बूथ और पंचायत स्तर पर मजबूत करने के लिए सिसई प्रखंड और विभिन्न पंचायतों की नई कमेटियों का गठन भी इसी बैठक में किया जाएगा। इस महाबैठक में समाज के होनहार और मेधावी छात्र-छात्राओं के मार्गदर्शन के लिए एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम भी रखा गया है, ताकि युवाओं को शिक्षा और करियर के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया जा सके। ​बैठक को सफल बनाने और सभी पंचायतों तक इसकी सूचना पहुंचाने की पूरी जिम्मेदारी अहीर सेना की ओर से सिसई प्रखंड अध्यक्ष अनिल यादव और सचिव नीरज अधिकारी को सौंपी गई है। Source link

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मतदाता मैपिंग कार्य में लाएं तेजी, 15 जून तक कराएं रजिस्ट्रेशन: भूषण...

भास्कर न्यूज|​गुमला झारखंड मुक्ति मोर्चा के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार को जिला अध्यक्ष सह गुमला विधायक भूषण तिर्की की अगुवाई में जिला उपायुक्त से मुलाकात की। इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान जिले के विभिन्न विकास कार्यों के साथ-साथ वर्तमान में राज्य और जिले में चल रहे एसआईआर -मतदाता सूची मैपिंग अभियान पर विशेष रूप से चर्चा की गई। विधायक भूषण तिर्की ने जिला उपायुक्त से कहा कि जिले में चल रहे मैपिंग कार्य की गति को तेज किया जाए। उन्होंने जोर देकर कहा जिला प्रशासन शत-प्रतिशत मैपिंग का कार्य समय रहते पूर्ण करना सुनिश्चित करे, ताकि भविष्य में कोई भी योग्य मतदाता अपने लोकतांत्रिक अधिकार से वंचित न रहे और न ही किसी नागरिक को किसी प्रकार की परेशानी का सामना करना पड़े। ​इस पर उपायुक्त ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विधायक को आश्वस्त किया कि सभी बीएलओ को सख्त निर्देश दिए गए हैं। मैपिंग के कार्य में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ​वर्तमान में जिला प्रशासन द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार गुमला जिले में अब तक 86.33 प्रतिशत मतदाताओं की मैपिंग पूरी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि आगामी 15 जून 2026 तक हर हाल में अपनी मैपिंग का कार्य संपन्न करा लें, ताकि मताधिकार सुरक्षित रह सके। इस बैठक में मुख्य रूप से जिला सचिव आरिफ अंसारी, केंद्रीय समिति सदस्य कलीम अख्तर, रंजीत सिंह, नगर अध्यक्ष मो. लड्डन, संजय सिंह, मीडिया प्रभारी मोहम्मद साजिद सहित मनोज तिर्की, सिकुदा लकड़ा, तारा पन्ना, जगरानी एक्का, शोभा प्रतिमा, सेवाती टोप्पो, सरिता कुजूर, जोहनी मिंज, अनूपा लकड़ा, गीता पाठक, दीपिका देवी, मिली देवी, इरफान अली, अनवर खान, मंगलेश्वर एक्का, संजीव उरांव, चंद्र उरांव, कमलेश उरांव, संजय उरांव, रंजीत उरांव, शाहनवाज आलम, मो. नावेद, कृष्ण उरांव, पंकज खलखो, रवि वर्मा, नंदलाल पासवान, आकाश कुमार और आकाश सावन सहित कई कार्यकर्ता उपस्थित थे। Source link

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यूपी के हादसे का शिकार हुए लोगों का शव पहुंचा:पलामू में जनाजे...

उत्तर प्रदेश के किछौछा शरीफ से जियारत कर लौट रहे मेदिनीनगर के पांच लोगों की सड़क हादसे में दर्दनाक मौत हो गई। यह हादसा आजमगढ़ जिले के देवगांव थाना क्षेत्र में वाराणसी-आजमगढ़ मार्ग पर हुआ, जहां उनकी कार एक ट्रेलर से टकरा गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार सवार सभी पांच लोगों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। मृतकों में अजमल आलम, सोहराब राइन, चालक अरबाज खान, कैश आलम और हाजी अब्दुल रज्जाक शामिल हैं। सभी लोग 11 जून को एक शादी समारोह में शामिल होने के बाद किछौछा शरीफ दरगाह में जियारत कर वापस लौट रहे थे, तभी रास्ते में यह हादसा हो गया। शव पहुंचते ही पसरा मातम, रातभर जुटे रहे लोग शनिवार देर रात जैसे ही पांचों शव पलामू के मेदिनीनगर पहुंचे, पूरे शहर में मातम पसर गया। मृतकों के घरों पर परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। खबर मिलते ही बड़ी संख्या में लोग उनके घरों पर पहुंचने लगे और संवेदना व्यक्त करने वालों का तांता लग गया। पूरी रात मोहल्लों में सन्नाटा और गम का माहौल बना रहा। हर कोई इस हृदयविदारक घटना से स्तब्ध नजर आया। स्थानीय लोग और रिश्तेदार परिजनों को ढांढस बंधाते रहे। शहर के विभिन्न इलाकों से लोग मृतकों के अंतिम दर्शन के लिए पहुंचते रहे, जिससे माहौल पूरी तरह गमगीन हो गया। रविवार को जनाजे में उमड़ी भीड़ रविवार सुबह छोटी मस्जिद में पांचों मृतकों की जनाजे की नमाज अदा की गई, जिसमें हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए। नमाज के दौरान मस्जिद और आसपास का पूरा इलाका लोगों से खचाखच भरा रहा। इसके बाद शवों को पुलिस लाइन रोड स्थित कब्रिस्तान ले जाया गया, जहां उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया गया। जनाजे के दौरान किसी तरह की अव्यवस्था न हो, इसके लिए प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। Source link

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Ritesh Madhav: 87 Blood Donations

विश्व रक्तदाता दिवस के अवसर पर कोडरमा के रितेश माधव की कहानी समाज के लिए एक प्रेरणा बनकर सामने आई है। महज 45 वर्ष की आयु में 87 बार रक्तदान कर चुके रितेश ने यह साबित कर दिया है कि अगर इरादे मजबूत हों तो एक व्यक्ति भी कई जिंदगियां बचा सकता है। . जेजे कॉलेज कोडरमा में कार्यरत रितेश नियमित अंतराल पर रक्तदान करते हैं। जरूरतमंदों की मदद के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं। उनका मानना है कि रक्तदान सबसे बड़ा दान है, क्योंकि इससे सीधे किसी की जान बचाई जा सकती है। महज 45 वर्ष की आयु में 87 बार रक्तदान कर चुके रितेश ने यह साबित कर दिया है कि अगर इरादे मजबूत हों तो एक व्यक्ति भी कई जिंदगियां बचा सकता है। छात्र जीवन में लिया संकल्प, आज भी निभा रहे रितेश माधव ने वर्ष 2000 में पटना विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान पहली बार रक्तदान किया था। यह अवसर विद्यार्थी परिषद द्वारा आयोजित एक शिविर में मिला। उसी समय उन्होंने 101 बार रक्तदान करने का संकल्प लिया था। इस लक्ष्य को पाने के लिए वह लगातार हर तीन से चार महीने के अंतराल पर रक्तदान करते आ रहे हैं। उनका कहना है कि जब उन्होंने रक्त की कमी से लोगों को जूझते देखा, तभी यह संकल्प और मजबूत हुआ। आज भी वह उसी प्रतिबद्धता के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रहे हैं। रितेश माधव ने वर्ष 2000 में पटना विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान पहली बार रक्तदान किया था। कोरोना काल और आपात स्थितियों में भी आगे रहे रितेश ने कोरोना काल की कठिन परिस्थितियों को याद करते हुए बताया कि उस समय भी उन्होंने रक्तदान करने की इच्छा जताई थी, लेकिन संक्रमण के खतरे को देखते हुए उन्हें अस्पताल में मना कर दिया गया। इसके बावजूद उन्होंने कई बार ऐसी स्थितियों का सामना किया, जब लोगों को तुरंत रक्त की आवश्यकता थी। दो वर्ष पहले एक सड़क हादसे में घायल महिला के लिए उन्होंने सदर अस्पताल में रक्तदान कर उसकी जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। ऐसे कई उदाहरण हैं, जहां रितेश ने मानवता की मिसाल पेश की है। रितेश कहते हैं कि अगर हर व्यक्ति थोड़ी जिम्मेदारी ले, तो किसी को भी रक्त की कमी से जान नहीं गंवानी पड़ेगी। हर व्यक्ति जिम्मेदारी ले तो नहीं होगी ब्लड की कमी रितेश बताते हैं कि रक्तदान करने के बावजूद वह पूरी तरह स्वस्थ हैं। सामान्य जीवन जीते हैं। इसके लिए किसी विशेष डाइट की आवश्यकता नहीं होती। उन्होंने रक्तदान की तुलना कुएं के पानी से करते हुए कहा कि जैसे पानी को उपयोग में लाना जरूरी है वैसे ही रक्तदान भी शरीर के लिए लाभकारी है। उनके इस कार्य के लिए उन्हें जिला और राज्य स्तर पर कई बार सम्मानित किया जा चुका है। रितेश कहते हैं कि अगर हर व्यक्ति थोड़ी जिम्मेदारी ले, तो किसी को भी रक्त की कमी से जान नहीं गंवानी पड़ेगी। Source link

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