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यूपी के हादसे का शिकार हुए लोगों का शव पहुंचा:पलामू में जनाजे...

उत्तर प्रदेश के किछौछा शरीफ से जियारत कर लौट रहे मेदिनीनगर के पांच लोगों की सड़क हादसे में दर्दनाक मौत हो गई। यह हादसा आजमगढ़ जिले के देवगांव थाना क्षेत्र में वाराणसी-आजमगढ़ मार्ग पर हुआ, जहां उनकी कार एक ट्रेलर से टकरा गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार सवार सभी पांच लोगों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। मृतकों में अजमल आलम, सोहराब राइन, चालक अरबाज खान, कैश आलम और हाजी अब्दुल रज्जाक शामिल हैं। सभी लोग 11 जून को एक शादी समारोह में शामिल होने के बाद किछौछा शरीफ दरगाह में जियारत कर वापस लौट रहे थे, तभी रास्ते में यह हादसा हो गया। शव पहुंचते ही पसरा मातम, रातभर जुटे रहे लोग शनिवार देर रात जैसे ही पांचों शव पलामू के मेदिनीनगर पहुंचे, पूरे शहर में मातम पसर गया। मृतकों के घरों पर परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। खबर मिलते ही बड़ी संख्या में लोग उनके घरों पर पहुंचने लगे और संवेदना व्यक्त करने वालों का तांता लग गया। पूरी रात मोहल्लों में सन्नाटा और गम का माहौल बना रहा। हर कोई इस हृदयविदारक घटना से स्तब्ध नजर आया। स्थानीय लोग और रिश्तेदार परिजनों को ढांढस बंधाते रहे। शहर के विभिन्न इलाकों से लोग मृतकों के अंतिम दर्शन के लिए पहुंचते रहे, जिससे माहौल पूरी तरह गमगीन हो गया। रविवार को जनाजे में उमड़ी भीड़ रविवार सुबह छोटी मस्जिद में पांचों मृतकों की जनाजे की नमाज अदा की गई, जिसमें हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए। नमाज के दौरान मस्जिद और आसपास का पूरा इलाका लोगों से खचाखच भरा रहा। इसके बाद शवों को पुलिस लाइन रोड स्थित कब्रिस्तान ले जाया गया, जहां उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया गया। जनाजे के दौरान किसी तरह की अव्यवस्था न हो, इसके लिए प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। Source link

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Ritesh Madhav: 87 Blood Donations

विश्व रक्तदाता दिवस के अवसर पर कोडरमा के रितेश माधव की कहानी समाज के लिए एक प्रेरणा बनकर सामने आई है। महज 45 वर्ष की आयु में 87 बार रक्तदान कर चुके रितेश ने यह साबित कर दिया है कि अगर इरादे मजबूत हों तो एक व्यक्ति भी कई जिंदगियां बचा सकता है। . जेजे कॉलेज कोडरमा में कार्यरत रितेश नियमित अंतराल पर रक्तदान करते हैं। जरूरतमंदों की मदद के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं। उनका मानना है कि रक्तदान सबसे बड़ा दान है, क्योंकि इससे सीधे किसी की जान बचाई जा सकती है। महज 45 वर्ष की आयु में 87 बार रक्तदान कर चुके रितेश ने यह साबित कर दिया है कि अगर इरादे मजबूत हों तो एक व्यक्ति भी कई जिंदगियां बचा सकता है। छात्र जीवन में लिया संकल्प, आज भी निभा रहे रितेश माधव ने वर्ष 2000 में पटना विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान पहली बार रक्तदान किया था। यह अवसर विद्यार्थी परिषद द्वारा आयोजित एक शिविर में मिला। उसी समय उन्होंने 101 बार रक्तदान करने का संकल्प लिया था। इस लक्ष्य को पाने के लिए वह लगातार हर तीन से चार महीने के अंतराल पर रक्तदान करते आ रहे हैं। उनका कहना है कि जब उन्होंने रक्त की कमी से लोगों को जूझते देखा, तभी यह संकल्प और मजबूत हुआ। आज भी वह उसी प्रतिबद्धता के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रहे हैं। रितेश माधव ने वर्ष 2000 में पटना विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान पहली बार रक्तदान किया था। कोरोना काल और आपात स्थितियों में भी आगे रहे रितेश ने कोरोना काल की कठिन परिस्थितियों को याद करते हुए बताया कि उस समय भी उन्होंने रक्तदान करने की इच्छा जताई थी, लेकिन संक्रमण के खतरे को देखते हुए उन्हें अस्पताल में मना कर दिया गया। इसके बावजूद उन्होंने कई बार ऐसी स्थितियों का सामना किया, जब लोगों को तुरंत रक्त की आवश्यकता थी। दो वर्ष पहले एक सड़क हादसे में घायल महिला के लिए उन्होंने सदर अस्पताल में रक्तदान कर उसकी जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। ऐसे कई उदाहरण हैं, जहां रितेश ने मानवता की मिसाल पेश की है। रितेश कहते हैं कि अगर हर व्यक्ति थोड़ी जिम्मेदारी ले, तो किसी को भी रक्त की कमी से जान नहीं गंवानी पड़ेगी। हर व्यक्ति जिम्मेदारी ले तो नहीं होगी ब्लड की कमी रितेश बताते हैं कि रक्तदान करने के बावजूद वह पूरी तरह स्वस्थ हैं। सामान्य जीवन जीते हैं। इसके लिए किसी विशेष डाइट की आवश्यकता नहीं होती। उन्होंने रक्तदान की तुलना कुएं के पानी से करते हुए कहा कि जैसे पानी को उपयोग में लाना जरूरी है वैसे ही रक्तदान भी शरीर के लिए लाभकारी है। उनके इस कार्य के लिए उन्हें जिला और राज्य स्तर पर कई बार सम्मानित किया जा चुका है। रितेश कहते हैं कि अगर हर व्यक्ति थोड़ी जिम्मेदारी ले, तो किसी को भी रक्त की कमी से जान नहीं गंवानी पड़ेगी। Source link

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देवघर हाईवे किनारे बना स्वास्थ्य केंद्र बंद:‘गोल्डन आवर’ में नहीं मिल रहा...

देवघर-दुमका-बासुकीनाथ नेशनल हाईवे पर स्थित खड़गडीहा स्वास्थ्य उपकेंद्र नियमित रूप से संचालित नहीं होने से क्षेत्र में गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है। यह महत्वपूर्ण मार्ग बाबा बैद्यनाथ धाम और बासुकीनाथ धाम को जोड़ता है, जहां सालभर वाहनों की आवाजाही बनी रहती है। सावन माह में यहां लाखों कांवरियों और श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में हाईवे किनारे स्थित स्वास्थ्य केंद्र का बंद रहना लोगों की चिंता बढ़ा रहा है। आयुष्मान आरोग्य मंदिर के रूप में विकसित यह केंद्र आसपास के हजारों ग्रामीणों के साथ-साथ यात्रियों के लिए भी जीवनरक्षक साबित हो सकता था, लेकिन जमीनी हकीकत इससे उलट है। तीन साल पहले बना भवन, सेवाएं अब तक शुरू नहीं ग्रामीणों के अनुसार स्वास्थ्य केंद्र का भवन करीब तीन से चार वर्ष पूर्व बनकर तैयार हो गया था, लेकिन आज तक यहां नियमित स्वास्थ्य सेवाएं बहाल नहीं हो सकी हैं। आरोप है कि स्वास्थ्यकर्मी महीने में केवल कुछ दिन ही आते हैं। बाकी समय केंद्र बंद रहता है। इसके कारण सामान्य बीमारियों के इलाज के लिए भी लोगों को कई किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। सड़क दुर्घटनाओं के दौरान स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, जब घायलों को प्राथमिक उपचार नहीं मिल पाता। उन्हें सीधे देवघर या दुमका रेफर करना पड़ता है। इससे इलाज में देरी होती है। कई बार मरीज की हालत बिगड़ जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपए खर्च कर बनाए गए इस केंद्र का लाभ उन्हें नहीं मिल पा रहा है। ‘गोल्डन आवर’ में इलाज न मिलना गंभीर वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. शरद कुमार ने बताया कि दुर्घटना के बाद का पहला घंटा ‘गोल्डन आवर’ होता है, जो जीवन बचाने के लिए सबसे अहम माना जाता है। यदि इस दौरान प्राथमिक उपचार मिल जाए, तो गंभीर रूप से घायल व्यक्ति की जान बचाई जा सकती है। लेकिन केंद्र के बंद रहने से यह महत्वपूर्ण समय व्यर्थ हो रहा है। इस मामले में सिविल सर्जन डॉ. रमेश कुमार ने कहा कि उन्हें केंद्र के नियमित रूप से बंद रहने की जानकारी नहीं थी। उन्होंने आश्वासन दिया कि मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी और स्वास्थ्य केंद्र को नियमित रूप से संचालित कराने का प्रयास किया जाएगा। फिलहाल यह सवाल बना हुआ है कि करोड़ों की लागत से बना यह केंद्र कब तक आम लोगों को वास्तविक स्वास्थ्य सुविधा दे पाएगा। Source link

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नप के 5 करोड़ की 32 योजनाओं पर उठे सवाल उपायुक्त ने...

भास्कर न्यूज|गुमला नगर परिषद द्वारा हाल ही में जारी पांच करोड़ से अधिक की 32 विकास योजनाओं की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो गए हैं। गुमला विधानसभा क्षेत्र के विधायक सह झारखंड विधानसभा की शून्यकाल समिति के सभापति भूषण तिर्की ने इस पूरी निविदा प्रक्रिया में नियमों की घोर अनदेखी का आरोप लगाया है। विधायक ने निविदा (एनआईटी नंबर जीएमएल/एनपी /03/2026-27) में गड़बड़ी की शिकायत करते हुए उपायुक्त से उच्च स्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग की थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए उपायुक्त ने त्वरित कार्रवाई की और सात सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन कर दिया है। इस जांच कमेटी की कमान अपर समाहर्ता राजीव नीरज को सौंपी गई है। जबकि अनुमंडल पदाधिकारी इसके सचिव बनाए गए हैं। इनके अलावा कमेटी में ग्रामीण विकास विभाग के कार्यपालक अभियंता, लेखा पदाधिकारी, राज्यकर संयुक्त आयुक्त गुमला अंचल, जिला सूचना व विज्ञान पदाधिकारी और जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। डीसी ने जांच समिति को एक सप्ताह के भीतर सभी तथ्यों का गहन अध्ययन कर विस्तृत प्रतिवेदन सौंपने का सख्त निर्देश दिया है। इसके साथ ही नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी को निर्देशित किया है कि वे जांच टीम को सभी जरूरी दस्तावेज और अपेक्षित सहयोग तुरंत उपलब्ध कराएं। भूषण तिर्की ने पत्र में ईओ मनीष कुमार पर कुछ पसंदीदा संवेदकों के साथ मिलीभगत कर निविदा प्रक्रिया को प्रभावित करने का आरोप लगाया है। कहा है कि नियमों की अनदेखी कर योग्य संवेदकों को काम से वंचित करने का प्रयास किया गया है। निविदा में प्रभावशाली लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की गई है। इस मिलीभगत से सरकारी कार्यों की गुणवत्ता प्रभावित होने और सरकारी राजस्व को भारी क्षति पहुंचने की आशंका जताई है। विधायक ने पूरे टेंडर की प्रक्रिया पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने, ईओ की भूमिका की विशेष जांच कर उन्हें कार्य से मुक्त करने, टेंडर में शामिल सभी संवेदकों, तकनीकी मूल्यांकन और वित्तीय बोली की गहन जांच करने और दोष सिद्ध होने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। पत्र की प्रतिलिपि सरकार को भी प्रेषित की है। धरना देने की तैयारी में है झामुमो: बताया जा रहा है कि निविदा प्रकिया में जांच के साथ-साथ अन्य कई मामले को लेकर झामुमो मोर्चा खोलने की तैयारी में है। इस निमित जल्द ही झामुमो द्वारा धरना प्रदर्शन भी किया जाएगा। Source link

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तेल टैंकर ने बाइक में टक्कर मारी, सौ मीटर घसीटा:रिम्स ले जाते...

कोडरमा के तिलैया एनएच-20 पर महतोआरा के पास तेल टैंकर ने बाइक सवार मजदूर को टक्कर मार दी। इसके बाद बाइक सहित सवार को लगभग 100 मीटर तक घसीटा। इससे व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया। जानकारी के मुताबिक गुमो निवासी 45 वर्षीय अनिल यादव अपनी बाइक से महतोआरा से घर लौट रहे थे। इसी दौरान पीछे से तेज रफ्तार में आ रहे तेल टैंकर ने उनकी बाइक को अपनी चपेट में ले लिया। इस हादसे में बाइक पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। अनिल यादव के सिर व पैर में गंभीर चोटें आईं। इलाज के दौरान रास्ते में तोड़ा दम घटना की सूचना मिलते ही तिलैया थाना प्रभारी विनय कुमार अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने गंभीर रूप से घायल अनिल यादव को तत्काल तिलैया थाना के वाहन से कोडरमा सदर अस्पताल पहुंचाया। वहां डॉक्टरों ने उनकी नाजुक हालत को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए रांची के रिम्स रेफर कर दिया। लेकिन रिम्स ले जाने के दौरान रास्ते में ही अनिल यादव ने दम तोड़ दिया। इसके बाद शव को वापस उनके घर लाया गया, जहां परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। मृतक अनिल यादव स्थानीय एक निजी फैक्ट्री में मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। मुआवजे की मांग को लेकर फैक्ट्री गेट जाम आज सुबह आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों ने शव के साथ कोडरमा केमिकल्स से निकले उस तेल टैंकर से संबंधित फैक्ट्री के मुख्य गेट को जाम कर दिया। ग्रामीण मुआवजे की मांग को लेकर धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। मृतक के पुत्र बिट्टू यादव ने बताया कि उनके पिता ही घर के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे। परिवार में एक जवान बहन और एक छोटा भाई भी है। जिनकी जिम्मेदारी अब उन पर आ गई है। परिजनों की मांग है कि फैक्ट्री संचालक उचित मुआवजा दे, ताकि परिवार को सहारा मिल सके। घटना की जानकारी मिलते ही तिलैया थाना पुलिस मौके पर पहुंच गई है और आक्रोशित लोगों को समझाने का प्रयास कर रही है। Source link

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चतरा के ढहूं गांव में घुसा हाथी:तीन घरों के शटर तोड़े, घर...

चतरा जिले के टंडवा थाना क्षेत्र के ढहूं गांव में शनिवार देर रात एक जंगली हाथी के घुस आने से ग्रामीणों में दहशत फैल गई। घटना रात करीब 1 बजे की है, जब गांव के अधिकांश लोग अपने घरों के बाहर या छतों पर सो रहे थे। तभी अचानक चिंघाड़ते हुए एक हाथी बस्ती में दाखिल हो गया। हाथी को देखते ही ग्रामीणों में भगदड़ जैसी स्थिति हो गई। हालांकि इस घटना में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई, लेकिन हाथी ने गांव में जमकर उत्पात मचाया। कई घरों को नुकसान पहुंचाया। ग्रामीणों के अनुसार, हाथी काफी देर तक बस्ती में घूमता रहा। तीन घरों के शटर उखाड़े, घर में रखे चावल खाया हाथी ने सीधे रिहायशी इलाके को निशाना बनाते हुए लीलू महतो, राजेंद्र महतो और नामधारी महतो के घरों व दुकानों के लोहे के मजबूत शटर उखाड़ फेंके। इसके बाद हाथी ने दो अन्य घरों की खिड़कियां तोड़ दीं। अंदर रखा क्विंटल चावल निकालकर खा गया। घटना के बाद कई घरों में नुकसान का आकलन किया जा रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि हाथी काफी आक्रामक था। किसी भी समय बड़ी घटना हो सकती थी। स्थानीय लोगों ने किसी तरह खुद को सुरक्षित रखा। इस दौरान गांव के लोग पूरी तरह असहाय नजर आए और मदद के लिए इधर-उधर संपर्क करने की कोशिश करते रहे। वन विभाग पर लापरवाही का आरोप घटना के बाद ग्रामीणों में वन विभाग के प्रति भारी आक्रोश देखा जा रहा है। लोगों का आरोप है कि हाथियों को खदेड़ने के लिए विभाग ने लाखों रुपए खर्च कर विशेष प्रशिक्षित टीम तैयार की है, लेकिन घटना के समय यह टीम मौके पर नहीं पहुंची। ग्रामीण दीपक कुमार सहित अन्य लोगों ने बताया कि चार स्थानीय युवकों को विशेष ट्रेनिंग दी गई है, लेकिन वे सिर्फ मानदेय लेने तक सीमित हैं। आरोप है कि सूचना देने के बावजूद क्विक रिस्पांस टीम ने आने से मना कर दिया। वहीं वन क्षेत्र समिति के अध्यक्ष पर भी संवेदनहीन रवैये का आरोप लगाया गया है। आक्रोशित ग्रामीणों ने दोषियों को पद से हटाने और हुए नुकसान का मुआवजा देने की मांग की है। Source link

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26 साल में 87 बार ब्लड डेनेशन…. प्रेरक है कोडरमा के रितेश...

Last Updated:June 14, 2026, 09:43 IST कोडरमा के रितेश माधव 26 साल में 87 बार रक्तदान कर चुके हैं. उनका लक्ष्य 101 बार रक्तदान करने का है. उन्होंने सन 2000 में पटना से इसकी शुरुआत की थी. वे हर तीन-चार महीने में रक्तदान करते हैं. इतनी बार रक्तदान के बाद भी वे पूरी तरह स्वस्थ हैं. ख़बरें फटाफट कोडरमा: विश्व रक्तदान दिवस के अवसर पर कोडरमा के जेजे कॉलेज के कर्मी रितेश माधव उन लोगों के लिए प्रेरणा हैं. जिन्होंने जीवन में अभी तक एक बार भी रक्तदान नहीं किया है. 45 वर्ष की उम्र में वे अब तक 87 बार रक्तदान कर चुके हैं और अनगिनत जरूरतमंदों को नया जीवन देने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं. उनका लक्ष्य अपने जीवन में 101 बार रक्तदान करना है. रितेश माधव ने विशेष बातचीत में बताया कि रक्तदान की शुरुआत वर्ष 2000 में हुई. जब वे पटना विश्वविद्यालय के छात्र थे. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा आयोजित एक रक्तदान शिविर में उन्होंने पहली बार रक्तदान किया. उसी दिन उन्होंने यह संकल्प लिया कि जीवनभर नियमित रूप से रक्तदान करेंगे और जरूरतमंदों की मदद करेंगे. हर तीन से चार महीने में करते हैं रक्तदानपिछले 25 वर्षों से रितेश माधव लगातार तीन से चार महीने के अंतराल पर रक्तदान करते आ रहे हैं. उनका कहना है कि रक्तदान केवल एक सामाजिक दायित्व नहीं, बल्कि किसी अनजान व्यक्ति को जीवन देने का सबसे बड़ा माध्यम है. उनका ब्लड ग्रुप ए पॉजिटिव है और जरूरत पड़ने पर वे बिना किसी हिचकिचाहट के रक्तदान के लिए तैयार रहते हैं. कोरोना काल में भी नहीं डगमगाया हौसलाउन्होंने बताया कि जब पूरा देश कोरोना महामारी के भयावह दौर से गुजर रहा था. तब भी उन्होंने रक्तदान करने की इच्छा जताई और सदर अस्पताल के ब्लड बैंक पहुंचे. हालांकि उस समय संक्रमण के खतरे को देखते हुए ब्लड बैंक कर्मियों ने उन्हें रक्तदान की अनुमति नहीं दी और वापस घर भेज दिया था. दुर्घटना में घायल महिला को देकर बचाई जानउन्होंने एक भावुक घटना साझा करते हुए बताया कि करीब दो साल पहले जेजे कॉलेज के सामने कार और ट्रक की टक्कर में एक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई थी. जबकि उसकी पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गई थीं. अस्पताल में रक्त की तत्काल आवश्यकता थी. ऐसे समय में रितेश माधव ने रक्तदान कर महिला के इलाज में सहयोग किया और उनका जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. रक्त शरीर में कुएं के पानी की तरह हैरक्तदान के महत्व को समझाते हुए रितेश माधव ने कहा कि शरीर का रक्त कुएं के पानी के समान है. यदि कुएं से लगातार पानी नहीं निकाला जाए तो वह सड़ने लगता है. उसी तरह शरीर में पुरानी रक्त कोशिकाएं भी समय के साथ नष्ट हो जाती हैं. यदि हम रक्तदान करते हैं तो शरीर नई रक्त कोशिकाओं का निर्माण करता है और हमारा स्वास्थ्य भी बेहतर रहता है. इसलिए रक्तदान करके किसी की जिंदगी बचाना सबसे बड़ा पुण्य है. 87 बार रक्तदान के बाद भी पूरी तरह स्वस्थलगातार 87 बार रक्तदान करने के बावजूद रितेश पूरी तरह स्वस्थ हैं. उनका कहना है कि वे किसी विशेष डाइट का पालन नहीं करते, बल्कि सामान्य लोगों की तरह नियमित भोजन करते हैं और सामान्य जीवनशैली अपनाते हैं. उनका मानना है कि स्वस्थ व्यक्ति के लिए नियमित रक्तदान पूरी तरह सुरक्षित है. कई मंचों पर हो चुके हैं सम्मानितरक्तदान के प्रति जागरूकता फैलाने और लगातार समाज सेवा करने के लिए रितेश माधव को जिला स्तर से लेकर राज्य स्तर तक कई सामाजिक संस्थाओं और गैर सरकारी संगठनों द्वारा सम्मानित किया जा चुका है. झारखंड सरकार भी उन्हें सम्मानित कर चुकी है. उनका मानना है कि ऐसे सम्मान दूसरों को भी रक्तदान के लिए प्रेरित करते हैं. About the Author Prashun Singh मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Kodarma,Jharkhand Source link

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देवघर में इमली के पेड़ से टकराया ट्रक:ट्रक का केबिन पेड़ में...

देवघर बुढ़ई में हुए सड़क हादसे में ट्रक चालक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि खलासी गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसा जगदीशपुर हटिया के समीप हुआ। जहां लोहे का सरिया लादकर धमनी की ओर जा रहा ट्रक अनियंत्रित होकर सड़क के बीच खड़े एक पुराने इमली के पेड़ से जा टकराया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार टक्कर इतनी जोरदार थी कि ट्रक का अगला हिस्सा पूरी तरह चकनाचूर हो गया। हादसे के बाद चालक केबिन में बुरी तरह फंस गया। घटनास्थल पर ही उसकी दर्दनाक मौत हो गई। दुर्घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। बिहार के शेखपुरा कर रहने वाला है ड्राइवर घटना में घायल खलासी को स्थानीय लोगों की मदद से तत्काल उपचार के लिए नजदीकी अस्पताल भेजा गया, जहां उसका इलाज जारी है। मृतक चालक की पहचान बिहार के शेखपुरा निवासी श्रीकांत यादव के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि दुर्घटनाग्रस्त ट्रक का नंबर WB 37 M 5734 है। हादसे के बाद काफी देर तक चालक का शव केबिन में फंसा रहा। जिसे बाद में पुलिस और स्थानीय लोगों की मदद से बाहर निकाला गया। सूचना मिलने पर बुढ़ई थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पेड़ हटाने को लेकर हुई कवायद, हटाया नहीं गया स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क के बीच खड़ा यह पुराना इमली का पेड़ लंबे समय से दुर्घटनाओं का कारण बन रहा है। कई बार संबंधित विभाग से इसे हटाने या सड़क को चौड़ा कर सुरक्षित बनाने की मांग की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई। लोगों का आरोप है कि प्रशासन की लापरवाही के कारण आए दिन यहां हादसे होते रहते हैं। Source link

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देवघर में तीन साइबर अपराधी गिरफ्तार:गूगल पे-फोन पे के नाम पर करते...

देवघर साइबर थाना पुलिस ने तीन शातिर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस को सूचना मिली थी कि पथरड्डा ओपी (सारठ) क्षेत्र के सुरा-सुरा जंगल में कुछ साइबर अपराधी सक्रिय हैं। सूचना के आधार पर टीम ने योजनाबद्ध तरीके से छापेमारी की। जिसमें सिराजुद्दीन अंसारी (20), चंदन कुमार दास (22) और निलोय कुमार दास (23) को दबोच लिया गया। गिरफ्तार सभी आरोपी देवघर जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों के रहने वाले बताए गए हैं। पुलिस ने मौके से सात मोबाइल फोन और सात सिम कार्ड भी जब्त किए हैं, जिनकी जांच की जा रही है। फर्जी कस्टमर केयर बनकर करते थे ठगी प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी फर्जी कस्टमर केयर प्रतिनिधि और बैंक अधिकारी बनकर लोगों को अपने जाल में फंसाते थे। ये अपराधी फ्लिपकार्ट, अमेजन, एयरटेल बैंकिंग, गूगल पे और फोन पे के नाम पर कॉल कर लोगों से संपर्क करते थे। खुद को अधिकारी बताकर ये लोगों से बैंकिंग से जुड़ी गोपनीय जानकारी हासिल करते और फिर खातों से पैसे उड़ा लेते थे। इतना ही नहीं, आरोपी पीएम किसान योजना, बिजली बिल और आरटीओ चालान के नाम पर फर्जी एपीके फाइल भेजकर मोबाइल हैक करने की भी कोशिश करते थे। एयरटेल बैंकिंग अधिकारी बनकर एयरटेल थैंक्स ऐप के जरिए भी लोगों को ठगी का शिकार बनाया जाता था। 1930 पर शिकायत कराएं दर्ज देवघर पुलिस ने इस कार्रवाई को साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी उपलब्धि बताया है। बरामद मोबाइल और सिम कार्ड की विस्तृत जांच की जा रही है, जिससे गिरोह के अन्य सदस्यों और ठगी के नेटवर्क का खुलासा हो सकता है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि इन अपराधियों ने अब तक कितने लोगों को निशाना बनाया है। साथ ही, आम लोगों से सतर्क रहने की अपील की गई है। पुलिस ने कहा है कि किसी भी अनजान कॉलर को अपनी बैंकिंग जानकारी साझा न करें और संदिग्ध लिंक या ऐप डाउनलोड करने से बचें। यदि किसी के साथ साइबर ठगी होती है तो वह तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके। Source link

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खरौंधी : पेड़ के नीचे खड़ी महिला की वज्रपात से मौत

केतार | मुकुंदपुर गांव स्थित मायर टोला में शनिवार को आंधी और बूंदाबांदी में वज्रपात से एक भेड़ चरवाहे की मौत हो गई। मृतक की पालनगर गांव निवासी राम अवतार पाल (65 वर्ष) बताया गया। अवतार रोज की तरह भेड़ों को चराने निकला था। इसी दौरान आंधी और बूंदाबांदी के बीच तेज गर्जना के साथ हुए वज्रपात की चपेट में आने से उनकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही केतार पंचायत के मुखिया प्रमोद कुमार घटनास्थल पर पहुंचे और शोक संतप्त परिजनों को ढांढस बंधाते हुए हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। भास्कर न्यूज | खरौंधी प्रखंड के सुंडी गांव में शनिवार दोपहर हुई तेज बारिश के दौरान आकाशीय बिजली गिरने से एक महिला एवं उसकी गाय की दर्दनाक मौत हो गई। घटना के बाद पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है तथा परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। मृतका की पहचान सुंडी गांव निवासी रीना देवी (30 वर्ष), पति प्रमोद गुप्ता, के रूप में हुई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार शनिवार करीब तीन बजे अचानक तेज बारिश, गरज और चमक के साथ मौसम बिगड़ गया। बारिश से बचने के लिए रीना देवी अपने घर के समीप स्थित एक महुआ पेड़ के नीचे खड़ी हो गईं। उनके साथ उनकी एक गाय भी पेड़ के नीचे खड़ी थी। इसी दौरान अचानक आकाशीय बिजली पेड़ के पास गिरी, जिसकी चपेट में आने से रीना देवी और गाय दोनों गंभीर रूप से झुलस गए। स्थानीय लोगों के पहुंचने तक दोनों की मौके पर ही मौत हो चुकी थी। घटना की सूचना मिलते ही गांव में मातम पसर गया और बड़ी संख्या में ग्रामीण मृतका के घर पहुंचकर शोक संतप्त परिवार को सांत्वना देने लगे।इस हृदयविदारक घटना से परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से पीड़ित परिवार को तत्काल सरकारी सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है। घटना की जानकारी मिलने पर पूर्व मुखिया राजेंद्र गुप्ता ने गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने मृतका के परिजनों के प्रति संवेदना प्रकट करते हुए सरकार एवं प्रशासन से आपदा राहत के तहत उचित मुआवजा और सहायता राशि देने की मांग की है। Source link

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