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ओपन जेल निगरानी समिति नहीं बनने पर हाईकोर्ट सख्त, 10 दिन में...

राज्य सरकार को 24 जून तक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य में ओपन जेलों की निगरानी के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार मॉनिटरिंग कमेटी का गठन नहीं किए जाने पर राज्य सरकार के प्रति कड़ी नाराजगी जताई है। चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने मुख्य सचिव को 10 दिनों के भीतर तीन सदस्यीय निगरानी समिति गठित करने का निर्देश दिया है। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि इस मामले में अब और समय नहीं दिया जाएगा। खंडपीठ ने राज्य सरकार को 24 जून तक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने तथा राज्य के सभी ओपन जेलों की स्थिति, प्रबंधन और वहां उपलब्ध सुविधाओं का विस्तृत ब्योरा प्रस्तुत करने का आदेश दिया। मामले की अगली सुनवाई 25 जून को होगी। इससे पहले सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने समिति गठन के लिए आठ सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा, लेकिन अदालत ने इस मांग को खारिज कर दिया। अदालत के निर्देशानुसार समिति में झालसा के कार्यकारी अध्यक्ष या उनके प्रतिनिधि, गृह सचिव या अपर सचिव स्तर के अधिकारी तथा डीआईजी रैंक से कम नहीं स्तर के कारा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी को शामिल किया जाएगा। Source link

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लापता करण-अर्जुन की मां को आया फोन, कर्नाटक के अस्पताल में हैं...

धुर्वा थाना क्षेत्र से लापता दो भाई करण और अर्जुन का 12 दिन बाद भी कोई सुराग नहीं मिल पाया है। बच्चों की मां डॉली देवी लगातार उनकी तलाश में भटक रही हैं और पुलिस पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगा रही हैं। इसी बीच शुक्रवार रात करीब आठ बजे 9505487735 नंबर से एक फोन आया। कॉल करने वाले ने खुद को कर्नाटक से बताते हुए कहा कि बच्चों का एक्सीडेंट हो गया है और वे अस्पताल में भर्ती हैं। इस सूचना के बाद पूरा परिवार परेशान है। पुलिस उस मोबाइल नंबर की जांच कर रही है। डॉली देवी का कहना है कि उनके दोनों बेटे 12 दिनों से लापता हैं, लेकिन अब तक पुलिस उन्हें ढूंढ़ने में सफल नहीं हो सकी है। उनका आरोप है कि शुरुआत में पुलिस ने मामले में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई और उन्हें खुद बच्चों की तलाश करने की बात कही। अखबारों में खबर छपने के बाद ही पुलिस ने कुछ सक्रियता दिखाई। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद आदित्य साहू ने धुर्वा और जगन्नाथपुर क्षेत्र से लापता बच्चों करण, अर्जुन और शिवा के परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने पूरे मामले को गंभीर बताते हुए पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। आदित्य साहू ने कहा कि परिजनों के बयान और थाने में दर्ज प्राथमिकी के विवरण में विरोधाभास दिखाई देता है। उन्होंने बताया कि लापता बच्चों की बरामदगी की मांग को लेकर भाजपा ने शनिवार शाम छह बजे मशाल जुलूस निकालने का आह्वान किया है। पार्टी का कहना है कि यदि इसके बाद भी बच्चों का पता नहीं चलता है तो आगे की आंदोलनात्मक रणनीति बनाई जाएगी। भाजपा नेता परिजनों से मिले, बरामद करने की मांग पर आज मशाल जुलूस Source link

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रांची के पांच केंद्रों पर होगी परीक्षा, मजिस्ट्रेट, उड़नदस्ता रहेंगे तैनात

रांची| झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) द्वारा आयोजित झारखंड पात्रता परीक्षा-2024 के सफल, निष्पक्ष और पारदर्शी संचालन को लेकर जिला प्रशासन ने व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं। परीक्षा 14 जून को रांची जिले के पांच उप-केंद्रों पर एक ही पाली में आयोजित होगी। परीक्षा सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक चलेगी। प्रशासन ने अभ्यर्थियों को निर्धारित समय से पहले परीक्षा केंद्र पहुंचने तथा आयोग द्वारा जारी सभी दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी है। परीक्षा की तैयारियों और विधि-व्यवस्था की समीक्षा को लेकर शुक्रवार को समाहरणालय स्थित ब्लॉक-ए सभागार में बैठक आयोजित की गई। उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देश पर आयोजित बैठक की अध्यक्षता अपर जिला दंडाधिकारी (विधि-व्यवस्था) धनंजय ने की। सभी पांच परीक्षा केंद्रों पर रहेगी कड़ी निगरानी प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा केंद्रों पर किसी भी प्रकार की गड़बड़ी, नकल या अनुचित गतिविधियों को रोकने के लिए विशेष निगरानी रखी जाएगी। सभी परीक्षा केंद्रों पर मजिस्ट्रेट और पर्याप्त संख्या में सुरक्षा बल तैनात रहेंगे। इसके अलावा उड़नदस्ता दल भी लगातार निरीक्षण करेगा। परीक्षार्थियों की सुविधा के लिए केंद्रों पर चिकित्सा सहायता, पेयजल, अग्निशमन व्यवस्था और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। केंद्राधीक्षकों को परीक्षा के दौरान पारदर्शी और अनुशासित वातावरण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। अपर जिला दंडाधिकारी धनंजय ने कहा कि यह परीक्षा राज्य के हजारों युवाओं के भविष्य से जुड़ी है। इसलिए सभी अधिकारियों को अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी सतर्कता, निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ करने का निर्देश दिया गया है। Source link

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साइकिल रैली का आयोजन

भास्कर न्यूज | कुड़ू विश्व साइकिल दिवस के अवसर पर साइकिल रैली का आयोजन एवं खेलो इंडिया, भारत सरकार अस्मिता महिला साइकिलिंग का आयोजन शनिवार (सुबह 7:30बजे) को साइकल रैली आयोजन किया गया है। इसकी जानकारी देते हुए जिला साइकल एसोसियन के जिला कोषाध्यक्ष अमित सिंह ने बताया कुड़ू के टाटी चौक से बस स्टेण्ड (कुरु) तक साइकिल रैली तथा खेलो इंडिया, भारत सरकार अस्मिता महिला साइकिलिंग जिला स्तर साइकिल रेस प्रतियोगिता का आयोजन टाटी नर्सरी से उमरी कोयल नदी पूल तक किया जा रहा है जिसमे अंडर 14 वर्ष, अंडर 18 वर्ष तथा 19 साल से 40 वर्ष तक के महिला प्रतिभागी भाग लेंगें,प्रतियोगिता में प्रथम,द्वितीय एवं तृतीय स्थान पर आने वाले विजेताओं को राज्य स्तरीय साइकिलिंग प्रतियोगिता मे खेलने का मौका मिलेगा। Source link

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रांची की ललिता देवी ने जूट बैग-सोहराई पेंटिंग से बदली तकदीर, लाखों...

Last Updated:June 13, 2026, 21:43 IST Success Story: झारखंड की राजधानी रांची की रहने वाली ललिता देवी ट्राइब्स इंडिया से जुड़ी हुई हैं. उन्हें झारक्राफ्ट से भी मदद मिलती है. उन्होंने बताया कि एक समय था, जब नमक रोटी भी खाने को मुश्किल था. आज हम जूट का बैग बनाते हैं, बैग के साथ कई सारी चीज जैसे पर्स, घड़ी, घर सजाने का आइटम यह सारी चीज बनाते हैं. साथ ही हाथ से सोहराई पेंटिंग भी करते हैं. वह सबकुछ हाथ से ही बनाती हैं. उनके यहां मशीन का कोई काम नहीं होता है. आज उनके कस्टमर मुंबई से लेकर चेन्नई तक हैं. क्योंकि सरकार मुफ्त में हमें स्टॉल लगाने के लिए इन शहरों मे भेजती है. आज महीने की कमाई आराम से इतना है कि अमेरिका तक घूम लिए हैं. महीने की लाख रुपए तो रखे हुए रहते हैं, कोई टेंशन नहीं है. इतना सबकुछ मिल रहा है कि उन्होंने इतना तो सोचा भी नहीं था, लेकिन हां हिम्मत और हौसला था कि अपने दम पर कुछ करना तो है. ललिता बताती हैं कि हम लोग जूट का सारा चीज बनाते हैं. ऑफिस जाने वाला फाइल बनाते है, जिसमें खूबसूरत सोहराई पेंटिंग बनी होती है. पेंटिंग भी ऐसा, जिसमें महिलाएं सर पर टोकरी लेकर जंगल की तरफ जा रही हैं, महिलाएं घर में खाना पका रही हैं, सारे लोग एक साथ आदिवासी नाच कर रहे हैं. मतलब झारखंड का जो कल्चर है. उसको पेंटिंग के जरिये दिखाने की कोशिश करते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google वह लकड़ी का घड़ी बनाते हैं, लकड़ी का पेन स्टैंड, लकड़ी का घर के सजावट का सारा सामान. वह यह सारी चीज अपने हाथों से काटकर बनाती हैं. इसकी उन्हें समय-समय पर ट्रेनिंग दी जाती है. इसे खूबसूरत और फिनिश बनाना है और क्या कर सकते हैं. इन सभी चीजों की ट्रेनिंग मिलती रहती है. आज दिल्ली, मुंबई, कोलकाता हर दूसरे तीसरे महीने जाती हैं, सरकार की तरफ से उन्हें स्टॉल लगाने का मौका मिलता है.. ललिता बताती हैं कि आज हम लोग पनीर खाते हैं, अच्छा खाना खाते हैं. आज दोपहर के खाने में दो रंग की सब्जी तो जरूर होती थाली में होती है. एक समय था, जब नमक रोटी के भी लाले पड़े होते थे, समझ में नहीं आता था. आज क्या खाएं तो कल कहां से लाएं. हालांकि आज वह सबकुछ खाती हैं. इसके साथ ही महिला होने की वजह से घर में इज्जत भी बहुत मिलती है. अब लोग हमारे बात सुनते हैं, कोई भी कुछ बोलने के पहले चार बार सोचता है. Source link

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विवाहिता की मौत, मायके पक्ष का हत्या का आरोप

लोहरदगा|सदर थाना क्षेत्र के जयनाथपुर में एक विवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। मृतका की पहचान सुषमा देवी पति जनार्दन खत्री के रूप में हुई है। घटना गुरुवार शाम की बताई जा रही है। घर में महिला का शव फंदे से झूलता हुआ मिलने के बाद परिजनों में अफरा-तफरी मच गई। घटना को लेकर दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। ससुराल पक्ष का कहना है कि महिला ने फांसी लगाकर आत्महत्या की है, जबकि मायके पक्ष ने इसे हत्या का मामला बताते हुए आरोप लगाया है कि पहले महिला का गला दबाकर हत्या की गई और बाद में साक्ष्य छिपाने के उद्देश्य से शव को फंदे से लटका दिया गया। मृतका के परिजनों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है। Source link

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राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस : पेसा नियमावली के तहत ग्राम सभा के अधिकारों...

भास्कर न्यूज | लोहरदगा जिला परिषद लोहरदगा सभाकक्ष में शुक्रवार को पेसा नियमावली झारखंड 2025 को लेकर राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। जिसमें पेसा नियमावली के विभिन्न प्रावधानों, ग्राम सभाओं की भूमिका एवं अनुसूचित क्षेत्रों में स्थानीय स्वशासन को सशक्त बनाने संबंधी विषयों पर मास्टर ट्रेनर्स द्वारा विस्तृत जानकारी दी गई। वहीं बताया गया कि पेसा नियमावली का उद्देश्य अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को अधिक अधिकार प्रदान करना तथा विकास योजनाओं में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना है। नियमावली के तहत ग्राम सभा को स्थानीय संसाधनों के संरक्षण, विकास योजनाओं की निगरानी, सामाजिक अंकेक्षण, परंपरागत व्यवस्थाओं के संरक्षण एवं सामुदायिक हितों से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण अधिकार दिए गए हैं। वहीं बताया गया कि नियमावली में ग्राम सभा की नियमित बैठकें, योजनाओं की स्वीकृति एवं निगरानी, सरकारी एवं गैर-सरकारी एजेंसियों द्वारा किए जा रहे कार्यों की समीक्षा, उपलब्ध श्रमबल के उपयोग की योजना, प्रवासी श्रमिकों से संबंधित सूचना एवं संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन तथा सामाजिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल हैं। वहीं जानकारी दी गई कि ग्राम सभा विकास कार्यों की गुणवत्ता की जांच कर सकती है तथा आवश्यकतानुसार संबंधित विभागों को सुझाव एवं निर्देश दे सकती है। इसके अतिरिक्त ग्राम पंचायत एवं अन्य संस्थाओं को ग्राम सभा के प्रति जवाबदेह बनाने का भी प्रावधान किया गया है। वक्ताओं ने कहा कि पेसा नियमावली अनुसूचित क्षेत्रों में लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण को मजबूत करने और स्थानीय समुदायों को निर्णय प्रक्रिया में सहभागी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। बताया गया कि कार्यक्रम का उद्देश्य पेसा नियमावली के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा इसके प्रावधानों की व्यापक जानकारी आमजन एवं संबंधित हितधारकों तक पहुंचाना था। मौके पर जिप अध्यक्ष सुखदेव उरांव, डीडीसी राज महेश्वरम, पीडीआइटीडीए सुषमा नीलम सोरेंग, जिला स्तरीय पदाधिकारी, बीडीओ, सीओ सहित अन्य लोग उपस्थित थे। राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस में उपस्थित जिले का प्रशासनिक महकमा। Source link

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रांची की सुष्मिता का मसाला ब्रांड, किचन से शुरू किया बिजनेस, 5...

Last Updated:June 13, 2026, 21:55 IST Success Story: झारखंड की राजधानी रांची की सुष्मिता अपना खुद का एक मसाला ब्रांड चलाती हैं. उन्होंने बताया कि महिलाएं घर के किचन से ही अपना बिजनेस शुरू कर सकती हैं. उन्हें बाहर जाने की जरूरत नहीं है, मार्केटिंग भी ऑनलाइन किया जा सकता है. अगर आपके प्रोडक्ट में दम है तो फिर सक्सेस होने से कोई नहीं रोक सकता है. उन्होंने बताया कि कैसे मसाले तैयार किए जाते हैं और कैसे उसकी ब्रांडिंग और प्रोडक्ट की क्वालिटी एश्योर की जाती है. आइये जानते हैं उनकी सफलात के बारे में. सुष्मिता बताती हैं कि घर पर मसाला को बेचना शुरू करना है तो सबसे पहले तो आप खुद मसाला बनाना शुरू करें और अपने आस पड़ोस के लोग को दें और उनसे पूछें कैसा लग रहा है. पहले फ्री में देना शुरू करें और फीडबैक लें. कहने का मतलब है कि पहले आप अपने मसाले की क्वालिटी को सुधार करें. पहले पैसा मत देखें, पहले देखें कि मेरा क्वालिटी कैसा है पहले लोगों को पसंद आना चाहिए, रिश्तेदारों को दें और जब खराब फीडबैक आए तो बिल्कुल भी निराश ना हों. बल्कि, बैठकर देखें कि कहां गलती हो रही है, 50 बार बनाना पड़े 50 पर बनाएं, कोई दिक्कत नहीं है, सफलता पाने के लिए निराश नहीं होना है. इसके बाद आपको पैकेजिंग और ब्रांडिंग पर ध्यान देना है. आप अपना नाम सोच सकते हैं कि आप किस तरह का ब्रांड का नाम चाहते हैं और फिर आप किसी भी एनीमेशन स्टोर में जाकर डब्बे के ऊपर लिखी जाने वाली सारी जानकारी वहां से बनवा सकते हैं. जैसे एक्सपायरी डेट, इसमें क्या-क्या मिला हुआ है या फिर इसी में कोई यूनिक रेसिपी भी लिख दीजिए कि इस मसाले से आप यह भी बना सकते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google ऐसे में क्या है कि जब लोग डिब्बे लेंगे तो उसमें उनको एक रेसिपी भी दिखेगी तो इस तरीके से एनीमेशन स्टोर जाकर सारे स्टीकर ले लीजिए और डब्बे हाई क्वालिटी के होने चाहिए. क्योंकि दुनिया आपके बाहरी चमक को देखती हैं. अंदर किसी की बात बाद में पता चलती है. इसीलिए जनता को अट्रैक्ट करना है तो बाहरी पैकेजिंग शानदार होनी चाहिए. जब यह हो जाए तो सबसे पहले आप सोशल मीडिया का प्रयोग करें. इंस्टाग्राम, फेसबुक व अपने व्हाट्सएप स्टेटस में यह लगाना शुरू करें और पहले डिस्काउंट में एकदम 50%. निश्चित तौर पर आपको ऑर्डर जरूर आएंगे. इंस्टाग्राम पर अपना ऑफिशल पेज बना लें, कांटेक्ट नंबर, ईमेल आईडी सब कुछ दें. अब देखेंगे आपको धीरे-धीरे एक और दो आर्डर आने लगेंगे. यहीं से आपकी सबसे बड़ी जीत होगी. इसी एक दो आर्डर को अगर आप रिपीट करने में सफल हो जाते हैं तो फिर आपके इसी तरह लॉयल कस्टमर बनते चले जाएंगे. एक बात का विशेष ध्यान रखना है किसी भी बिजनेस को करने में ईमानदारी, लगन और उसके साथ धैर्य की जरूरत होती है, कम से कम 5 साल आपको जी तोड़ मेहनत करना पड़ेगा. इसमें कोई शॉर्टकट नहीं होता है. अगर आप इतना कर लेते हैं तो फिर आपको सफल होने से एक समय के बाद कोई नहीं रोक सकता है, फिर घर बैठे लाख रुपए आराम से आते रहेंगे. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

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नलजल योजनाएं बंद, जलमीनार खराब और चापाकल से भी नहीं आ रहा...

् भास्कर न्यूज|लोहरदगा जिले में बढ़ती गर्मी के साथ पेयजल संकट लगातार गहराता जा रहा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरी इलाकों तक लोग पानी की एक-एक बूंद के लिए परेशान हैं। कई गांवों में नल-जल योजनाएं बंद पड़ी हैं, जलमीनार खराब हैं और चापाकलों की स्थिति भी दयनीय बनी हुई है। इसके कारण आम लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। जिले के विभिन्न हिस्सों से पेयजल संकट की लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। जानकारी के अनुसार, भंडरा प्रखंड के कई गांवों में पेयजल व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। भैसमुंदो गांव में जलमीनार पिछले कई दिनों से खराब पड़ा हुआ है, जबकि आसपास के कई टोलों में महीनों से पानी की आपूर्ति बंद है। ग्रामीणों को मजबूरन दूर-दराज के जलस्रोतों से पानी लाना पड़ रहा है। महिलाओं और बच्चों पर इसका सबसे अधिक असर पड़ रहा है, जिन्हें प्रतिदिन कई किलोमीटर पैदल चलकर पानी जुटाना पड़ता है। कुडू प्रखंड के डोरोटोली गांव में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। यहां सौर ऊर्जा आधारित जलमीनार और अन्य जल योजनाएं होने के बावजूद लोगों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि योजनाओं के रखरखाव की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण अधिकांश सुविधाएं बेकार पड़ी हुई हैं। उनका आरोप है कि संबंधित विभाग द्वारा समय-समय पर निरीक्षण और मरम्मत नहीं किए जाने से समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। शहरी क्षेत्र भी पेयजल संकट से अछूता नहीं है। लोहरदगा बस स्टैंड, जहां प्रतिदिन हजारों यात्रियों का आना-जाना होता है और जहां से हर वर्ष लाखों रुपये का राजस्व प्राप्त होता है, वहां तक पीने के पानी की समुचित व्यवस्था नहीं है। गर्मी के दिनों में यात्रियों को पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है। इससे प्रशासनिक व्यवस्था और जनसुविधाओं को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीण सावित्री देवी ने बताया कि उन्हें रोजाना दो से तीन किलोमीटर दूर जाकर पानी लाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि घर में छोटे बच्चे होने के बावजूद पानी की व्यवस्था करना बड़ी चुनौती बन गया है। रीना कुमारी ने बताया कि सरकार की नल-जल योजना कुछ दिनों तक चली, लेकिन बाद में बंद हो गई और अब लोग फिर पुराने चापाकलों के भरोसे हैं। मीना देवी ने कहा कि कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ है। शहर के निवासी रमेश उरांव ने कहा कि बस स्टैंड जैसे महत्वपूर्ण स्थान पर भी पानी की व्यवस्था नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है। वहीं सुनील भगत ने कहा कि कई जलमीनार खराब पड़े हैं, लेकिन उनकी मरम्मत नहीं हो रही है। यदि समय पर ध्यान दिया जाता तो आज लोगों को इस संकट का सामना नहीं करना पड़ता। विशेषज्ञों का मानना है कि भूजल स्तर में लगातार गिरावट, अनियमित वर्षा, जल स्रोतों के संरक्षण की कमी और योजनाओं के कमजोर क्रियान्वयन के कारण स्थिति गंभीर होती जा रही है। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में संकट और विकराल रूप ले सकता है। फिलहाल जिलेवासी प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप, खराब जलमीनारों की मरम्मत, नियमित जलापूर्ति तथा स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं, ताकि भीषण गर्मी में उन्हें राहत मिल सके। Source link

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प्रोपेन गैस आपूर्ति की चेन टूटी तो बीएसएल ने पीएनजी को बनाया...

वैश्विक युद्ध के घने बादलों और मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच बीएसएल ने वह कर दिखाया है, जिसकी कल्पना भी मुश्किल थी। ईरान-इजराइल संघर्ष के चलते जब दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों में से एक, होर्मुज जलडमरू मध्य में व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही और आपूर्ति ठप हुई, तो देश के स्टील उत्पादन पर एक बड़ा और गंभीर खतरा मंडराने लगा था। स्टील उत्पादन के लिए सबसे जरूरी माने जाने वाले ईंधन, प्रोपेन गैस की विदेशी सप्लाई चेन टूट चुकी थी। हालात इतने गंभीर हो गए थे कि बीएसएल के स्टोरेज में प्रोपेन का बैकअप घटकर महज 15 दिनों का रह गया था। इस दौरान बीएसएल प्रबंधन ने तुरंत प्रोपेन गैस की जगह पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) को अपनाने का साहसिक फैसला लिया और बीएसएल के इंजीनियरों ने कमाल कर दिखाया। उन्होंने युद्ध स्तर पर दिन-रात एक कर काम किया और महज 7 दिन के रिकॉर्ड समय में 7 किमी लंबी पीएनजी गैस पाइपलाइन खड़ी कर दी। इससे प्लांट को करोड़ों रुपए का सीधा फायदा भी हो रहा है। बीएसएल को प्रोपेन गैस की तुलना में पीएनजी गैस 40 प्रतिशत कम दर पर मिल रहा है। यानी प्रोपेन गैस पर प्रतिमाह करीब 6 करोड़ खर्च की जगह अब मात्र 3.60 करोड़ खर्च कर पीएनजी गैस मिलने लगा है। चर्चा है कि अगर समय रहते कोई ठोस फैसला न लिया जाता, तो स्टील मेल्टिंग शॉप, कोल्ड रोलिंग मिल और गैल्वेनाइजिंग लाइन जैसे विभागों में काम रुक जाता। कार्बन उत्सर्जन में आई कमी, पर्यावरण संरक्षण होगा 15 अप्रैल 2026 को 7 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन में गैस छोड़ दी गई और इसका ट्रायल पूरी तरह से सफल रहा। पिछले करीब डेढ़ महीने से प्लांट पीएनजी के दम पर अपनी पूरी रफ्तार से दौड़ रहा है। बीएसएल प्रबंधन के इस मास्टर स्ट्रोक से प्लांट को चौतरफा और दीर्घकालिक फायदे हुए हैं। महंगी प्रोपेन के मुकाबले पीएनजी बेहद किफायती और सस्ती पड़ रही है। इस ऐतिहासिक बदलाव से प्लांट का ईंधन खर्च करीब 40 फीसदी तक घट गया है। लागत में आई इस भारी कमी के कारण, बीते डेढ़ महीने में ही संयंत्र को करोड़ों रुपए की बंपर बचत होने का अनुमान है, जो मुनाफे के रूप में दर्ज होगी। पहले प्रोपेन के बड़े पैमाने पर भंडारण (स्टोरेज) और ट्रकों से ट्रांसपोर्टेशन का भारी झंझट रहता था। अब पीएनजी के सीधे पाइपलाइन से आने के कारण वे सारे सुरक्षा जोखिम पूरी तरह खत्म हो गए हैं। पीएनजी के इस्तेमाल से प्लांट के कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आई है। इससे पर्यावरण संरक्षण को बल मिला है और बीएसएल ने ग्रीन स्टील के निर्माण की दिशा में मजबूत कदम बढ़ा दिए हैं। मिशन मोड : सात दिन का चैलेंजिंग डेलाइजिंग हालात की गंभीरता और समय की कमी को देखते हुए बीएसएल प्रबंधन ने तुरंत प्रो पेन की जगह पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) को अपनाने का फैसला लिया। प्लांट के निदेशक प्रभारी प्रिय रंजन और कार्यपालक निदेशक (वर्क्स) अनूप कुमार दत्त के नेतृत्व में यूटिलिटी विभाग ने मोर्चा संभाला। बिना कोई समय गवाएं इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) के साथ आनन-फानन में गैस सेल्स एग्रीमेंट साइन किया गया। समझौते के तहत, आईओसीएल ने प्लांट की बाहरी सीमा तक 2 किलोमीटर की पाइपलाइन बिछाने का काम पूरा किया गया। Source link

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