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सड़क के बीचों-बीच ‘न्याय के देवता’ का दरबार, जमशेदपुर में यहां रुककर...

होमताजा खबरधर्म जमशेदपुर में बीच सड़क पर न्याय के देवता का दरबार, शीश झुकाकर आगे बढ़ते राहगीर Last Updated:May 14, 2026, 10:45 IST जमशेदपुर के गोलमुरी चौक के बीचों-बीच स्थित शनि मंदिर आस्था का बड़ा केंद्र है. यह मंदिर एक पुराने पीपल के पेड़ के नीचे स्थित है. इसकी स्थापना वर्ष 1968 में हुई थी. यहां हर शनिवार श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. भक्तों का मानना है कि यहाँ मांगी गई हर मुराद पूरी होती है. ख़बरें फटाफट जमशेदपुरः आस्था और विश्वास का रिश्ता भारत में सदियों पुराना रहा है. यही कारण है कि देश के हर शहर, हर गली और हर चौक पर किसी न किसी देवी-देवता का मंदिर लोगों की श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है. झारखंड के जमशेदपुर में भी एक ऐसा ही अनोखा मंदिर मौजूद है, जो न सिर्फ धार्मिक आस्था बल्कि लोगों के अटूट विश्वास का प्रतीक बन चुका है. यह मंदिर शहर के गोलमुरी चौक के बीचो-बीच स्थित शनि देव मंदिर है, जहां रोजाना सैकड़ों श्रद्धालु पूजा-अर्चना करने पहुंचते हैं. सबसे खास बात यह है कि यह मंदिर सड़क के बिल्कुल बीचों-बीच एक पुराने पीपल के पेड़ के नीचे स्थित है. तेज रफ्तार ट्रैफिक और शहर की भागदौड़ के बीच भी यहां का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय नजर आता है. मंदिर में स्थापित शनि देव की प्रतिमा के साथ-साथ बजरंगबली, शिवलिंग और राम दरबार की भी पूजा की जाती है. हर मनोकामना होती है पूरीमंदिर को लेकर स्थानीय लोगों में गहरी मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है. यही वजह है कि मंगलवार और शनिवार के दिन यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. हालत यह रहती है कि मंदिर परिसर में पैर रखने तक की जगह नहीं मिलती. दूर-दूर से लोग तेल, फूल, नारियल और पूजा सामग्री लेकर यहां पहुंचते हैं और शनि देव से अपने परिवार की सुख-शांति की कामना करते हैं. हैरानी की बात यह भी है कि सड़क के बीच स्थित होने के बावजूद यहां ट्रैफिक व्यवस्था कभी पूरी तरह बाधित नहीं होती. भीड़ और वाहनों के बीच भी लोग बड़ी श्रद्धा और अनुशासन के साथ पूजा करते नजर आते हैं. स्थानीय लोग इसे शनि देव की कृपा मानते हैं कि इतनी भीड़ के बावजूद यहां हमेशा व्यवस्था बनी रहती है. 1968 में हुई थी स्थापनामंदिर के पुजारी पंडित राकेश पांडे बताते हैं कि इस मंदिर की स्थापना वर्ष 1968 में हुई थी. शुरुआत में यहां सिर्फ पीपल के पेड़ के नीचे पूजा होती थी, लेकिन धीरे-धीरे भक्तों की आस्था बढ़ती गई और मंदिर का स्वरूप भी बड़ा होता चला गया. सबसे दिलचस्प बात यह है कि मंदिर के निर्माण में किसी से कुछ मांगा नहीं गया. मंदिर की हर ईंट, हर टाइल्स और छोटी से छोटी वस्तु भक्तों ने अपनी श्रद्धा से स्वयं अर्पित की है. पंडित राकेश पांडे कहते हैं कि जिन लोगों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं, वे दोबारा यहां आकर सेवा और पूजा में सहयोग करते हैं. कोई घंटा चढ़ाता है, कोई दीपदान करता है तो कोई मंदिर की सजावट में योगदान देता है. आज गोलमुरी चौक का यह शनि मंदिर सिर्फ पूजा का स्थान नहीं, बल्कि लोगों की आस्था, विश्वास और भक्ति का जीवंत उदाहरण बन चुका है. शहर की भीड़भाड़ के बीच स्थित यह मंदिर हर किसी को यह एहसास कराता है कि सच्ची श्रद्धा हो तो भगवान हर जगह विराजमान रहते हैं. About the Author Prashun Singh मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Jamshedpur,Purbi Singhbhum,Jharkhand Source link

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धनबाद में डीजल संकट से ऑटो के पहिए थमे:पंपों पर भारी भीड़,...

धनबाद में ईंधन की कमी के कारण पेट्रोल पंपों पर भारी भीड़ उमड़ रही है। शहर के अधिकांश पंपों पर सुबह से ही लंबी कतारें देखी जा रही हैं, जहां लोग पेट्रोल और डीजल के लिए घंटों इंतजार कर रहे हैं। इस स्थिति का सबसे अधिक असर डीजल से चलने वाले ऑटो चालकों पर पड़ा है। ऑटो चालकों के अनुसार, कई पेट्रोल पंपों पर डीजल सीमित मात्रा में दिया जा रहा है। कुछ पंपों पर तो दो लीटर से अधिक डीजल नहीं मिल रहा, जिससे उन्हें काफी परेशानी हो रही है। पहले जहां चालक दिनभर में चार से पांच ट्रिप लगाकर अच्छी कमाई कर लेते थे, वहीं अब डीजल की समस्या के कारण वे मुश्किल से एक या दो ट्रिप ही चला पा रहे हैं। इससे उनकी दैनिक आय पर सीधा असर पड़ा है। शहर की सड़कों पर डीजल ऑटो की संख्या में कमी आई है। इसके विपरीत, ई-रिक्शा (टोटो) की संख्या बढ़ गई है, क्योंकि वे ईंधन संकट से प्रभावित नहीं हैं। लोग अब छोटी दूरी तय करने के लिए ई-रिक्शा का अधिक उपयोग कर रहे हैं। प्रशासन और पेट्रोल डीलर लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि ईंधन की आपूर्ति सामान्य है और घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है। इसके बावजूद, पेट्रोल पंपों पर भीड़ कम होने का नाम नहीं ले रही है। Source link

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Koderma Woman Murder | Love Marriage 6 Years Ago; Son Sees Body

कोडरमा जिले के सदर थाना क्षेत्र स्थित मिटको कॉलोनी में गुरुवार को एक महिला की गला रेतकर हत्या कर दी गई। महिला का शव घर में पड़ा था और स्कूल से वापस आने पर बेटे ने सबसे पहले लाश देखी। . मृतका की पहचान 30 वर्षीय नेहा राज के रूप में हुई है, जो शंभू राणा की पत्नी थीं। नेहा ने 6 साल पहले शंभू राणा से प्रेम विवाह किया था। घटना का खुलासा तब हुआ, जब नेहा राज का बेटा दोपहर करीब 12:30 बजे स्कूल से घर लौटा। कमरे में प्रवेश करते ही उसने अपनी मां को खून से लथपथ देखा और चीखते हुए घर से बाहर भागा। उसकी चीख सुनकर पड़ोसी जमा हो गए। पड़ोसियों ने बच्चे से जानकारी ली, जिसने बताया कि उसकी मां के गले से खून बह रहा है और वह बोल नहीं पा रही है। नेहा का शव बेड के नीचे मिला। फैक्ट्री से कॉपी पहुंचाने बाजार गए थे पति इसके बाद पड़ोसियों ने नेहा के पति शंभू राणा को सूचना दी, जो उस समय अपनी फैक्ट्री से कॉपी पहुंचाने एक दुकान पर गए हुए थे। सूचना मिलते ही शंभू ने अपने साथियों को जल्द से जल्द घर पहुंचने को कहा। उमेश पंडित समेत अन्य पड़ोसी तुरंत शंभू के घर पहुंचे। वहां उन्होंने देखा कि नेहा का गला किसी धारदार हथियार से रेता गया था और काफी खून बह रहा था। पड़ोसियों ने तत्काल महिला को सदर अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना की सूचना मिलते ही कोडरमा थाना प्रभारी सदर अस्पताल पहुंचे और जांच शुरू कर दी। एसडीपीओ अनिल कुमार सिंह भी अस्पताल पहुंचे और मामले की छानबीन में जुट गए हैं। उन्होंने बताया कि प्रथम दृष्टया यह हत्या का मामला लग रहा है। उन्होंने कहा कि मामले की सभी पहलुओं पर जांच की जा रही है। मृतका के परिजनों से इस मामले में पूछताछ की जा रही है। जो भी इस मामले में लिप्त होंगे उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। रोते-बिलखते परिजन। मायके वालों को शादी से थी आपत्ति बताते चलें कि नेहा राज का मायके झुमरीतिलैया के पानी टंकी रोड में स्थित है। उसने 2017 में अपने मायके वालों के इच्छा के विरुद्ध जाकर बेकोबार निवासी शम्भू राणा से प्रेम विवाह किया था। बताते चलें कि उनके इस विवाह से नेहा के मायके वाले नाराज थे। शादी के बाद वह अपने पति के साथ मिटको कॉलोनी में ही रहती थीं। वे अपने पीछे एक पुत्र तथा एक पुत्री छोड़ गई हैं। कॉपी बनाने का था कारोबार बताते चलें कि नेहा राज मिटको कॉलोनी में ही अपने पति के साथ मिलकर कॉपी बनाने का बिजनेस करती थी। नेहा फैक्ट्री की देखरेख करती थीं, जबकि शम्भू मार्केटिंग का कार्यभार संभालते थे। —————————— ये भी खबर पढ़िए लॉकडाउन में शुरू किया बिजनेस, सालाना इनकम 18 लाख रुपए:400 दुकानदार और स्कूलों में जाती हैं इनकी बनाई कॉपियां, दे रहीं रोजगार कोडरमा सदर प्रखंड की बेकोबार अंश पंचायत निवासी नेहा राज स्वयं सहायता समूह से जुड़कर आत्मनिर्भर बनी हैं। वह अपने पति के साथ मिलकर कॉपी बनाने और बाइंडिंग का व्यवसाय करती हैं, जिससे उन्हें सालाना 18 लाख रुपए तक की आमदनी हो रही है। नेहा अब अन्य महिलाओं को भी रोजगार के अवसर प्रदान कर रही हैं। नेहा ने लॉकडाउन के वक्त 50 हजार रुपए की सीएलएफ (CLF) राशि और 1 लाख रुपये का बैंक ऋण लेकर कॉपी मेकिंग और बाइंडिंग का अपना व्यवसाय शुरू किया। पढ़िए पूरी खबर… Source link

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वेज चिलाः सब्जी डालकर ऐसे करें तैयार, चटनी-दही के साथ चाव से...

Last Updated:May 14, 2026, 11:31 IST झारखंड का यह विशेष वेज चिला स्वाद और सेहत का बेजोड़ संगम है. इसे बेसन, सूजी और ताजी सब्जियों से तैयार किया जाता है. बीटरूट और गाजर इसे रंगीन और पौष्टिक बनाते हैं. यह नाश्ता कम समय में झटपट तैयार हो जाता है. बच्चे इसे चटनी या सॉस के साथ बड़े चाव से खाते हैं. ख़बरें फटाफट जमशेदपुरः आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में शाम होते ही बच्चों को कुछ स्वादिष्ट खाने का मन करता है. ऐसे समय में हर मां यही सोचती है कि ऐसा क्या बनाया जाए जो जल्दी भी बन जाए, पौष्टिक भी हो और बच्चों को पसंद भी आए. झारखंड के घरों में ऐसे ही समय के लिए एक खास तरह का वेज चिला बनाया जाता है, जो स्वाद के साथ-साथ सेहत का भी पूरा ख्याल रखता है. खास बात यह है कि इसे बनाने में ज्यादा समय नहीं लगता और घर में मौजूद सामान से ही यह तैयार हो जाता है. झारखंड के कई गांवों और शहरों में शाम के नाश्ते के रूप में यह चिला काफी पसंद किया जाता है. बाहर के फास्ट फूड की तुलना में यह कहीं ज्यादा हेल्दी और स्वादिष्ट माना जाता है. बच्चे भी इसे बड़े चाव से खाते हैं क्योंकि इसमें कुरकुरापन, रंग-बिरंगी सब्जियां और हल्का मसालेदार स्वाद होता है. ऐसे करें तैयारइसे बनाने के लिए सबसे पहले एक बड़े बर्तन में बेसन और थोड़ा सा आटा लें. इसमें थोड़ा सूजी डाल दीजिए ताकि चिला हल्का कुरकुरा बने. इसके बाद घर में मौजूद सब्जियां जैसे बारीक कटी गाजर, बीटरूट, शिमला मिर्च और प्याज मिला दीजिए. चाहें तो थोड़ा हरा धनिया और हरी मिर्च भी डाल सकते हैं. फिर इसमें स्वादानुसार नमक, हल्दी और थोड़ा जीरा डालकर अच्छी तरह मिक्स करें. अब इसमें धीरे-धीरे पानी डालते हुए ऐसा घोल तैयार करें जो ना ज्यादा पतला हो और ना ज्यादा गाढ़ा. सही कंसिस्टेंसी ही इस चिले का असली स्वाद बढ़ाती है. इसके बाद गैस पर तवा या फ्राई पैन गर्म करें और उसमें थोड़ा तेल डाले. जब तवा अच्छी तरह गर्म हो जाए, तब घोल को गोल आकार में फैलाएं. धीमी आंच पर पकाएंधीमी आंच पर चिले को दोनों तरफ से अच्छी तरह सेकें. जब इसका रंग गोल्डन ब्राउन हो जाए और किनारे कुरकुरे दिखने लगें, तब इसे प्लेट में निकाल लें. गर्मागर्म चिले को टमाटर सॉस, हरी चटनी या दही के साथ परोसें. यह चिला सिर्फ स्वादिष्ट ही नहीं बल्कि काफी पौष्टिक भी होता है. बेसन और सब्जियों की वजह से बच्चों को प्रोटीन और विटामिन भरपूर मात्रा में मिल जाते हैं. वहीं बीटरूट और गाजर इसे रंगीन और हेल्दी बनाते हैं, जिससे बच्चे बिना नखरे के इसे खुशी-खुशी खा लेते हैं. झारखंड की यह आसान रेसिपी आज भी कई घरों में शाम की भूख मिटाने का सबसे बेहतरीन तरीका मानी जाती है. कम समय, कम खर्च और शानदार स्वाद के कारण यह चिला बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी का पसंदीदा नाश्ता बन चुका है. About the Author Prashun Singh मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Jamshedpur,Purbi Singhbhum,Jharkhand Source link

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टाटानगर से दिल्ली जाने वाली रेगुलर ट्रेन में लंबी वेटिंग:स्पेशल ट्रेनों से...

टाटानगर से दिल्ली के चलने वाली पुरुषोत्तम एक्सप्रेस, उत्कल एक्सप्रेस, नीलांचल एक्सप्रेस, भुवनेश्वर राजधानी एक्सप्रेस में आने वाले कई दिनों तक लंबी वेटिंग है। हालत यह है कि हर श्रेणी में वेटिंग होने से दिल्ली जाने में मुश्किल हो रही है। गर्मियों के छुट्टियों में पूर्व से टिकट नहीं करा पाएं लोगों को बनारस, प्रयागराज जाने में भी समस्या हो रही है। टाटा-आनंदबिहार समर स्पेशल ट्रेन 23 मई को खुलेगी रेलवे ने गर्मी में यात्रियों की भीड़ को देखते हुए टाटा-आनंदबिहार समर स्पेशल ट्रेन चलाने जा रही है। यह ट्रेन अप-डाउन एक फेरा लगाएगी। सूत्रों के मुताबिक ट्रेन नंबर-08183 टाटा-आनंदबिहार स्पेशल ट्रेन 23 मई को टाटानगर से खुलेगी। ट्रेन रात 12.30 बजे खुलेगी जो कि मुरी, बोकारो, गोमो, गया, प्रयागराज, गोविंदपुर होते हुए गोविंदपुर दूसरे दिन तड़के सुबह 3.30 बजे पहुंचेगी। वहीं 25 मई को ट्रेन नंबर- 08184 आनदंबिहार-टाटानगर स्पेशल ट्रेन रात 1.45 बजे खुलेगी। जो कि प्रयागराज होते हुए गया-मुरी होते हुए टाटानगर दूसरे दिन रात 12.15 बजे पहुंचेगी। इस ट्रेन के एक फेरा लगाने से टाटानगर से दिल्ली जाने वाले यात्रियों को राहत मिलेगी। Source link

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झारखंड के शंकरपुर स्टेशन में पूर्वा एक्सप्रेस पर पथराव:तकनीकी खराबी से रुकी...

झारखंड के शंकरपुर रेलवे स्टेशन के पास पूर्वा एक्सप्रेस पर पथराव की घटना सामने आई है। जानकारी के अनुसार, यह घटना उस समय हुई जब 07051 चारलापल्ली–रक्सौल स्पेशल ट्रेन बिना निर्धारित ठहराव के स्टेशन के पास तकनीकी खराबी के कारण घंटों तक खड़ी रही। ट्रेन के लंबे समय तक फंसे रहने से यात्रियों में नाराजगी बढ़ गई। जानकारी के अनुसार स्पेशल ट्रेन में तकनीकी गड़बड़ी की बात सामने आ रही है, जिसके चलते उसे आगे बढ़ने की अनुमति नहीं मिल सकी। इस दौरान कुछ लोगों ने आक्रोश में आकर पास से गुजर रही पूर्वा एक्सप्रेस पर पथराव कर दिया। पथराव से मची अफरा-तफरी घटना के बाद ट्रेन में सवार यात्रियों के बीच अफरा-तफरी मच गई। हालांकि, किसी के गंभीर रूप से घायल होने की सूचना नहीं है। इस घटना ने रेलवे सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पथराव अचानक शुरू हुआ, जिससे कोच के भीतर बैठे यात्रियों में भय का माहौल बन गया। रेलवे कर्मचारियों और अन्य यात्रियों ने स्थिति को संभालने की कोशिश की, लेकिन इस दौरान कुछ समय के लिए हालात तनावपूर्ण बने रहे। प्रशासन से जांच कर कार्रवाई की मांग घटना को लेकर रेलवे प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों से तुरंत कार्रवाई की मांग उठने लगी है। प्रशासन से मांग की जा रही है कि मामले की गंभीरता से जांच कर सभी दोषियों की पहचान की जाए और उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। Source link

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देवघर का यह किसान घुम चुका है विदेश, गांव में ठोका आलीशान...

होमताजा खबरकृषि देवघर का यह किसान घुम चुका है विदेश, गांव में ठोका आलीशान घर, जानें कैसे Last Updated:May 14, 2026, 13:47 IST देवघर के किसान अंबिका प्रसाद कुशवाहा ने आधुनिक खेती से अपनी किस्मत बदल दी है. 6 एकड़ में मिश्रित खेती कर उन्होंने आलीशान घर बनाया और बच्चों को बेहतर शिक्षा दी. खेती की नई तकनीक सीखने वह इजरायल तक जा चुके हैं. उनकी सफलता साबित करती है कि समझदारी से खेती करना किसी बड़े बिजनेस से कम नहीं है. ख़बरें फटाफट देवघर: आज के समय में गांवों के कई युवा खेती छोड़ शहरों की तरफ भाग रहे हैं. वजह साफ है, लोगों के मन में वर्षों से यह धारणा बैठ चुकी है कि खेती में मेहनत तो बहुत है लेकिन कमाई नहीं. लोग मानते हैं कि खेती सिर्फ पेट पालने का जरिया है, इससे ना बड़ा घर बन सकता है, ना बच्चों को अच्छी पढ़ाई मिल सकती है और ना ही इंसान अपनी अलग पहचान बना सकता है.लेकिन देवघर जिले के रोहिणी स्थित गोपीडीह गांव के किसान अंबिका प्रसाद कुशवाहा ने अपनी मेहनत, समझदारी और नई सोच से इस सोच को पूरी तरह बदल कर रख दिया है. आज गांव में उनकी पहचान किसी बड़े बिजनेसमैन से कम नहीं है. लोग दूर-दूर से उनके खेत देखने आते हैं और उनकी सफलता की कहानी सुनकर हैरान रह जाते हैं. 6 एकड़ में विभिन्न फसलों की खेती करीब 6 एकड़ जमीन में अंबिका प्रसाद मिश्रित खेती करते हैं. उनके खेतों में मूंग, धनिया, गन्ना, भिंडी, कद्दू, कोहरा, निम्बू,समेत कई तरह की सब्जियां और फसलें लहलहाती रहती हैं. खेत का हर हिस्सा कमाई का जरिया बना हुआ है. एक फसल तैयार होती है तो दूसरी खेत में बढ़ रही होती है. यही वजह है कि उनके घर में सालभर पैसे की आवक बनी रहती है. अंबिका कुशवाहा बताते हैं कि पहले लोग सिर्फ एक फसल की खेती करते थे, जिससे मौसम खराब होने या बाजार में दाम गिरने पर भारी नुकसान उठाना पड़ता था. लेकिन उन्होंने खेती को पुराने तरीके से नहीं बल्कि बिजनेस की तरह करना शुरू किया.उन्होंने समझ लिया कि अगर अलग-अलग फसलों की खेती की जाए तो नुकसान का खतरा कम होगा और हर मौसम में आमदनी होती रहेगी. आज उनकी यही सोच उन्हें इलाके का सफल किसान बना चुकी है. खेती के बदौलत गांव में बनाया शानदार मकान किसान अंबिका कुशवाहा के घर में खेती की बदौलत इतनी समृद्धि है कि बाजार से उन्हें सिर्फ नमक खरीदना पड़ता है. बाकी जरूरत की लगभग हर चीज उनके खेतों और पशुपालन से ही पूरी हो जाती है. घर में अनाज, दाल, सब्जियां, दूध और कई दूसरी चीजें खुद की मेहनत से तैयार होती हैं. खेती से हुई कमाई से उन्होंने गांव में शानदार और आलीशान घर बनाया, जिसे देखने लोग दूर-दूर से पहुंचते हैं. इतना ही नहीं, उन्होंने अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाई और खेती के साथ-साथ खुद का बिजनेस भी शुरू किया.गांव में आज उनका नाम सम्मान और सफलता की पहचान बन चुका है. खेती की ट्रैनिग के लिए जा चुके हैं इजरायल खेती ने अंबिका प्रसाद को सिर्फ पैसा ही नहीं दिया, बल्कि देश-दुनिया देखने का मौका भी दिया. वह बताते हैं कि खेती से मिली कमाई के दम पर वह देश के सभी ज्योतिर्लिंगों का दर्शन कर चुके हैं. बाबा बैद्यनाथ धाम से शुरू हुआ उनका सफर देशभर के बड़े धार्मिक स्थलों तक पहुंचा. इसके अलावा आधुनिक खेती की तकनीक सीखने के लिए वह इजरायल तक जा चुके हैं. वहां उन्होंने ड्रिप इरिगेशन, कम पानी में ज्यादा उत्पादन और आधुनिक खेती के कई तरीके सीखे. आज उन्हीं तकनीकों का इस्तेमाल कर वह कम लागत में ज्यादा उत्पादन ले रहे हैं और दूसरे किसानों को भी इसके लिए प्रेरित कर रहे हैं. खेती से बदल सकती है किस्मत अंबिका प्रसाद कहते हैं कि खेती में सिर्फ मेहनत नहीं, समझदारी भी जरूरी है. अगर किसान नई तकनीक, सही योजना और बाजार की मांग के अनुसार खेती करें तो खेती किसी नौकरी से कम नहीं है. उनकी कहानी उन लोगों के लिए जवाब है जो खेती को मजबूरी समझते हैं. उन्होंने साबित कर दिया कि खेत सिर्फ अनाज नहीं उगाता, बल्कि मेहनत और सही सोच हो तो यही खेत इंसान की किस्मत भी बदल सकता है. About the Author Prashun Singh मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Deoghar,Jharkhand Source link

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पाकुड़ में सियार के हमले से बच्ची की मौत मामला:वन विभाग को...

पाकुड़ जिले के मुफ्फसिल थाना क्षेत्र में सियार के आतंक से ग्रामीण सहमे हुए हैं। सियार के हमले में एक बच्ची की मौत हो गई है, जबकि चार अन्य लोग घायल हुए हैं। वन विभाग सियार को पकड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। इस संबंध में डीएफओ सौरभ चंद्रा ने संभावना जताई है कि यह हमला सियार के झुंड द्वारा नहीं किया जा रहा है। संभवतः झुंड का एक सियार रेबीज से पीड़ित है और वही ग्रामीणों पर हमला कर रहा है। टीम ने प्रभावित गांवों का दौरा किया ग्रामीणों को सियार के हमले से बचाने के लिए एक विशेष क्विक रिस्पांस प्रोटोकॉल (QRP) टीम का गठन किया गया है। टीम ने प्रभावित गांवों का दौरा किया है और आशंका जताई है कि झुंड का एक सियार रेबीज से ग्रसित है। टीम ने यह भी पता लगाया है कि सियार का झुंड ग्रामीणों की बस्ती से दूर रहता है। डीएफओ ने बताया कि टीम इस बात का मुआयना कर रही है कि सियार से ग्रामीणों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए। उन्होंने बच्ची की मौत को एक दुखद घटना बताया और घायलों के प्रति भी चिंता व्यक्त की। मृतक और घायलों के परिजनों को मुआवजा दिलाने के हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। अब तक मृतक के परिजनों को 50 हजार रुपए और दो घायल लोगों को पांच हजार रुपए की सहायता दी गई है। प्रावधान के अनुसार, मृतक के परिजनों को 4 लाख रुपए, गंभीर रूप से घायल को 1 लाख रुपए और सामान्य घायलों को 15 हजार रुपए दिए जाते हैं। मृतक और घायलों का सत्यापन करवाया जा रहा डीएफओ ने बताया कि मृतक और घायलों का सत्यापन (वेरिफिकेशन) करवाया जा रहा है। सत्यापन के बाद आवश्यक दस्तावेज लिए जाएंगे और फिर मुआवजा राशि का भुगतान किया जाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि पीड़ित लोगों को जल्द से जल्द मुआवजा मिले, इसके लिए प्रयास जारी हैं। डीएफओ ने ग्रामीणों से घबराने की जरूरत नहीं होने की बात कही। उन्होंने कहा कि वन विभाग उनकी मदद के लिए पूरी तरह से तत्पर है। Source link

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Dhanbad Service Center Gate Suspicious Object Found

धनबाद9 मिनट पहले कॉपी लिंक धनबाद के सरायढेला थाना क्षेत्र स्थित प्रेमसंस होंडा सर्विस सेंटर के मुख्य गेट के पास गुरुवार सुबह एक संदिग्ध वस्तु मिली, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही सरायढेला थाना पुलिस मौके पर पहुंची और संदिग्ध वस्तु को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी। पुलिस के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज में गेट के पास बम जैसी वस्तु दिखाई दे रही है, जो बगल से लुढ़क गई थी। पुलिस ने इसे जब्त कर लिया है। घटनास्थल पर जमीन पर बारूद जैसे पाउडर के अंश भी पाए गए हैं। सरायढेला थाना के एसआई अनूप कुमार ने बताया कि यह किसी शरारती तत्व द्वारा डराने का प्रयास हो सकता है। इस घटना में किसी तरह की क्षति नहीं हुई है। पुलिस सभी बिंदुओं पर गहन जांच कर रही है और सीसीटीवी फुटेज की दोबारा पड़ताल की जा रही है। स्थानीय विधायक राज सिन्हा भी घटनास्थल पर पहुंचे और पुलिस अधिकारियों से जानकारी ली। उन्होंने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए पुलिस प्रशासन से त्वरित कार्रवाई कर मामले का जल्द खुलासा करने की मांग की। फिलहाल क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और पुलिस संदिग्ध वस्तु के वास्तविक स्वरूप का पता लगाने में जुटी है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं… Source link

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जमशेदपुर का 100 साल पुराना बरगद बना ‘कुदरती छाता’, गर्मी में लोगों...

X 00 साल पुराना बरगद बना ‘कुदरती छाता’, गर्मी में लोगों को दे रहा राहत   जमशेदपुर के काशीडीह गोलचक्कर के पास मौजूद 100 साल पुराना बरगद का पेड़ इन दिनों लोगों के लिए बड़ी राहत बना हुआ है. तेज गर्मी के बीच यह विशाल पेड़ इलाके के लोगों को ठंडी छांव दे रहा है. इसकी बड़ी और घनी शाखाओं के कारण स्थानीय लोग इसे “कुदरती छाता” कहते हैं. इस पेड़ के नीचे रोजाना 20 से ज्यादा छोटी दुकानें लगती हैं. यहां फल, जूस, सत्तू शरबत, लस्सी, चना-बादाम, डोसा, इडली, लिट्टी-चोखा और चाय जैसी चीजें मिलती हैं. राहगीर यहां रुककर गर्मी से राहत पाने के साथ खाने-पीने का आनंद भी लेते हैं.दुकानदार हीरामन साहू पिछले 35 साल से यहां दुकान लगा रहे हैं. उनका कहना है कि चाहे तेज धूप हो या बारिश, इस पेड़ के नीचे हमेशा ठंडक बनी रहती है. स्थानीय लोगों के लिए यह पेड़ सिर्फ छांव नहीं, बल्कि आस्था का केंद्र भी है. लोग यहां पूजा भी करते हैं. यह बरगद का पेड़ लोगों को पर्यावरण बचाने और पेड़ों की अहमियत का संदेश देता है. Source link

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