सड़क के बीचों-बीच ‘न्याय के देवता’ का दरबार, जमशेदपुर में यहां रुककर...
होमताजा खबरधर्म जमशेदपुर में बीच सड़क पर न्याय के देवता का दरबार, शीश झुकाकर आगे बढ़ते राहगीर Last Updated:May 14, 2026, 10:45 IST जमशेदपुर के गोलमुरी चौक के बीचों-बीच स्थित शनि मंदिर आस्था का बड़ा केंद्र है. यह मंदिर एक पुराने पीपल के पेड़ के नीचे स्थित है. इसकी स्थापना वर्ष 1968 में हुई थी. यहां हर शनिवार श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. भक्तों का मानना है कि यहाँ मांगी गई हर मुराद पूरी होती है. ख़बरें फटाफट जमशेदपुरः आस्था और विश्वास का रिश्ता भारत में सदियों पुराना रहा है. यही कारण है कि देश के हर शहर, हर गली और हर चौक पर किसी न किसी देवी-देवता का मंदिर लोगों की श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है. झारखंड के जमशेदपुर में भी एक ऐसा ही अनोखा मंदिर मौजूद है, जो न सिर्फ धार्मिक आस्था बल्कि लोगों के अटूट विश्वास का प्रतीक बन चुका है. यह मंदिर शहर के गोलमुरी चौक के बीचो-बीच स्थित शनि देव मंदिर है, जहां रोजाना सैकड़ों श्रद्धालु पूजा-अर्चना करने पहुंचते हैं. सबसे खास बात यह है कि यह मंदिर सड़क के बिल्कुल बीचों-बीच एक पुराने पीपल के पेड़ के नीचे स्थित है. तेज रफ्तार ट्रैफिक और शहर की भागदौड़ के बीच भी यहां का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय नजर आता है. मंदिर में स्थापित शनि देव की प्रतिमा के साथ-साथ बजरंगबली, शिवलिंग और राम दरबार की भी पूजा की जाती है. हर मनोकामना होती है पूरीमंदिर को लेकर स्थानीय लोगों में गहरी मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है. यही वजह है कि मंगलवार और शनिवार के दिन यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. हालत यह रहती है कि मंदिर परिसर में पैर रखने तक की जगह नहीं मिलती. दूर-दूर से लोग तेल, फूल, नारियल और पूजा सामग्री लेकर यहां पहुंचते हैं और शनि देव से अपने परिवार की सुख-शांति की कामना करते हैं. हैरानी की बात यह भी है कि सड़क के बीच स्थित होने के बावजूद यहां ट्रैफिक व्यवस्था कभी पूरी तरह बाधित नहीं होती. भीड़ और वाहनों के बीच भी लोग बड़ी श्रद्धा और अनुशासन के साथ पूजा करते नजर आते हैं. स्थानीय लोग इसे शनि देव की कृपा मानते हैं कि इतनी भीड़ के बावजूद यहां हमेशा व्यवस्था बनी रहती है. 1968 में हुई थी स्थापनामंदिर के पुजारी पंडित राकेश पांडे बताते हैं कि इस मंदिर की स्थापना वर्ष 1968 में हुई थी. शुरुआत में यहां सिर्फ पीपल के पेड़ के नीचे पूजा होती थी, लेकिन धीरे-धीरे भक्तों की आस्था बढ़ती गई और मंदिर का स्वरूप भी बड़ा होता चला गया. सबसे दिलचस्प बात यह है कि मंदिर के निर्माण में किसी से कुछ मांगा नहीं गया. मंदिर की हर ईंट, हर टाइल्स और छोटी से छोटी वस्तु भक्तों ने अपनी श्रद्धा से स्वयं अर्पित की है. पंडित राकेश पांडे कहते हैं कि जिन लोगों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं, वे दोबारा यहां आकर सेवा और पूजा में सहयोग करते हैं. कोई घंटा चढ़ाता है, कोई दीपदान करता है तो कोई मंदिर की सजावट में योगदान देता है. आज गोलमुरी चौक का यह शनि मंदिर सिर्फ पूजा का स्थान नहीं, बल्कि लोगों की आस्था, विश्वास और भक्ति का जीवंत उदाहरण बन चुका है. शहर की भीड़भाड़ के बीच स्थित यह मंदिर हर किसी को यह एहसास कराता है कि सच्ची श्रद्धा हो तो भगवान हर जगह विराजमान रहते हैं. About the Author Prashun Singh मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Jamshedpur,Purbi Singhbhum,Jharkhand Source link







