Last Updated:April 29, 2026, 16:41 IST जमशेदपुर की जरूरतमंद बच्चों के लिए एक खास पहल कर रही हैं. उन्होंने एक छोटी लाइब्रेरी शुरू की है, जहां बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक सीख भी दी जाती है. हर दिन शाम 5 से 8 बजे तक आसपास के गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे यहां आते हैं. इस लाइब्रेरी की खास बात यह है कि यहां बच्चों को केवल पढ़ाया नहीं जाता, बल्कि उनके हुनर को भी निखारा जाता है. जमशेदपुर: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में ज्यादातर लोग इतने व्यस्त हो चुके हैं कि उनके पास अपने अलावा किसी और के लिए समय निकालना मुश्किल हो जाता है. हर व्यक्ति अपने काम, मोबाइल और जिम्मेदारियों में उलझा रहता है. ऐसे समय में जमशेदपुर की अर्पिता एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आई हैं, जिन्होंने अपना समय जरूरतमंद बच्चों के लिए समर्पित कर दिया है. अर्पिता पिछले कई वर्षों से इंडियन पीपुल्स थिएटर एसोसिएशन (IPTA) से जुड़ी हुई हैं. उनकी सोच सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं है. उनका मानना है कि जीवन में केवल किताबी ज्ञान ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक समझ भी उतनी ही जरूरी है. इसी विचार के साथ उन्होंने एक छोटी सी लाइब्रेरी की शुरुआत की, जो आज कई बच्चों के लिए उम्मीद की नई किरण बन चुकी है. हर दिन शाम 5 बजे से 8 बजे तक अर्पिता अपनी लाइब्रेरी में आसपास के गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को बुलाती हैं. ये बच्चे मुख्य रूप से स्टाफ क्वार्टर और आउटहाउस में रहने वाले परिवारों से आते हैं. स्कूल और ट्यूशन के बाद वे यहां पहुंचते हैं, जहां उन्हें पढ़ाई के साथ-साथ अपनी पसंद की गतिविधियों में भाग लेने की पूरी आजादी मिलती है. इस लाइब्रेरी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां बच्चों को केवल पढ़ाया ही नहीं जाता, बल्कि उनके अंदर छिपी प्रतिभा को भी निखारा जाता है. कोई बच्चा गिटार बजाना सीख रहा है, तो कोई तबला और हारमोनियम में रुचि ले रहा है. कुछ बच्चे फेस पेंटिंग करते हैं, तो कुछ नुक्कड़ नाटक के माध्यम से अपनी अभिव्यक्ति करना सीख रहे हैं. वहीं, कुछ बच्चे गजल गाने और उर्दू सीखने में भी दिलचस्पी दिखा रहे हैं. यहां हर बच्चे को अपनी रुचि के अनुसार आगे बढ़ने का अवसर मिलता है. अर्पिता बच्चों को समाज और इतिहास से जोड़ने का भी प्रयास करती हैं. अंबेडकर जयंती और अन्य महान व्यक्तित्वों की जयंती जैसे खास अवसरों पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं. इन आयोजनों के माध्यम से बच्चों को देश के महान कलाकारों, लेखकों और समाजसेवियों के बारे में जानकारी दी जाती है, जिससे उनका दृष्टिकोण व्यापक बनता है. वर्तमान में इस लाइब्रेरी में करीब 20 से 25 बच्चे नियमित रूप से आते हैं. यहां आकर वे न सिर्फ नई चीजें सीख रहे हैं, बल्कि अपने सपनों को भी साकार करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. अर्पिता का यह छोटा सा प्रयास इन बच्चों के जीवन में बड़ा बदलाव ला रहा है. वास्तव में, जहां एक ओर लोग अपने लिए भी समय नहीं निकाल पाते, वहीं अर्पिता जैसे लोग समाज के लिए जीने की प्रेरणा देते हैं. उनका यह कार्य सराहनीय है. साथ ही, यह भी दर्शाता है कि यदि इच्छा हो, तो हम भी किसी के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं. About the Author Amita kishor न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Jamshedpur,Purbi Singhbhum,Jharkhand First Published : April 29, 2026, 16:41 IST Source link