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JAC बोर्ड में 95% लाकर जमशेदपुर जिला टॉपर बने सक्षम, बताया पढ़ाई...

Last Updated:May 07, 2026, 06:26 IST सक्षम के पिता दूधेश्वर मिश्रा ट्यूशन पढ़ाकर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं, जबकि उनकी माता रीना मिश्रा एक गृहिणी हैं और बच्चों की पढ़ाई पर विशेष ध्यान देती हैं. सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने सक्षम को हर संभव समर्थन दिया, जो उनकी सफलता की मजबूत नींव बना. ख़बरें फटाफट आकाश कुमार/जमशेदपुर: झारखंड के जमशेदपुर की गलियों से निकलकर मेहनत और लगन की मिसाल बन चुके सक्षम मिश्रा आज उन हजारों छात्रों के लिए प्रेरणा हैं, जो बड़े सपने देखते हैं और उन्हें सच करने के लिए दिन-रात जुटे रहते हैं. साधारण परिवार से आने वाले सक्षम ने यह साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी मुकाम दूर नहीं होता. सक्षम ने साइंस स्ट्रीम से इंटरमीडिएट की परीक्षा में 95% अंक लाकर पूरे जिले में टॉप किया है. उनकी इस सफलता के पीछे सिर्फ और सिर्फ कड़ी मेहनत, अनुशासन और एक स्पष्ट लक्ष्य रहा है. उन्होंने बताया कि यह उपलब्धि अचानक नहीं मिली, बल्कि इसके लिए उन्होंने लंबे समय तक लगातार पढ़ाई की और खुद पर विश्वास बनाए रखा. दिलचस्प बात यह है कि सक्षम ने अपनी 10वीं की पढ़ाई जमशेदपुर पब्लिक स्कूल से की थी, जहां उन्होंने 94.2% अंक हासिल किए थे. इसके बाद उन्होंने एक अलग रास्ता चुना. उन्होंने सोचा कि क्यों न सरकारी स्कूल से इंटर की पढ़ाई की जाए. इसी सोच के साथ उन्होंने जमशेदपुर के राज्यकृत आदिवासी प्लस टू उच्च विद्यालय में दाखिला लिया और वहीं से अपनी 12वीं की पढ़ाई पूरी की. यह फैसला उनके लिए एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ. उनके विषयवार अंक भी उनकी मेहनत की कहानी खुद बयां करते हैं. मैथ्स में 100, फिजिक्स में 96, केमिस्ट्री में 97, बायोलॉजी में 96 और इंग्लिश में 90 अंक. खासकर गणित में पूरे अंक हासिल करना उनकी गहरी समझ और अभ्यास का प्रमाण है. सक्षम के पिता दूधेश्वर मिश्रा ट्यूशन पढ़ाकर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं, जबकि उनकी माता रीना मिश्रा एक गृहिणी हैं और बच्चों की पढ़ाई पर विशेष ध्यान देती हैं. सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने सक्षम को हर संभव समर्थन दिया, जो उनकी सफलता की मजबूत नींव बना. सक्षम का सपना है कि वह आगे चलकर एक साइंटिस्ट बनें और रिसर्च के क्षेत्र में अपना नाम रोशन करें. उनका मानना है कि पढ़ाई और सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता. वह कहते हैं, “अगर आप शांत दिमाग और धैर्य के साथ पढ़ाई करते हैं, तो उसका परिणाम जरूर अच्छा मिलता है.” आज सक्षम मिश्रा सिर्फ एक टॉपर नहीं, बल्कि उन सभी छात्रों के लिए एक प्रेरणा हैं जो संघर्षों के बीच अपने सपनों को जिंदा रखते हैं. उनकी कहानी यह सिखाती है कि मेहनत, सही दिशा और आत्मविश्वास के साथ कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है. About the Author Rajneesh Singh जी न्यूज, इंडिया डॉट कॉम, लोकमत, इंडिया अहेड, न्यूज बाइट्स के बाद अब न्यूज 18 के हाइपर लोकल सेगमेंट लोकल 18 के लिए काम कर रहा हूं. विभिन्न संस्थानों में सामान्य खबरों के अलावा टेक, ऑटो, हेल्थ और लाइफ स्टाइल बीट…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Jamshedpur,Purbi Singhbhum,Jharkhand Source link

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दिशा कमेटी के सदस्य ने समस्याएं सुनी, डीसी को किया निर्देशित

भास्कर न्यूज | मझिआंव मझिआंव प्रखंड के गोपालपुर गांव में बुधवार को पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार दिशा कमेटी के झारखंड राज्य सदस्य देवेश तिवारी पहुंचे। इधर आने के दौरान बकोइया गांव में संसद प्रतिनिधि भगवान दत्त तिवारी एवं नगर मंडल अध्यक्ष दीपक चंद्रवंशी ने अंग वस्त्र देकर देवेश तिवारी का स्वागत किया। इधर गोपालपुर गांव पहुंचकर ग्रामीणों के साथ बैठक कर उनकी समस्याओं से अवगत हुए। युवा समाजसेवी आशीष कुमार दुबे उर्फ चिंटू दुबे एवं पूर्व जिला परिषद सदस्य कविता दुबे के संयोजन में मझिआंव व कांडी प्रखंड के ग्रामीण, किसान मित्र एवं पारा शिक्षकों ने अपनी अपनी समस्याएं रखी। इस दौरान पारा शिक्षकों ने अपने कष्ट बताए और सरकारी स्तर पर उनकी नौकरी बहाल कराने की मांग की गई। इस अवसर पर उत्क्रमित उच्च विद्यालय पुरहे के प्रबंधन समिति के अध्यक्ष सोना बच्चा यादव द्वारा विद्यालय में शिक्षकों की कमी के कारण पढ़ाई बाधित होने का मुद्दा उठाया गया। जबकि मझिआंव एवं कांडी प्रखंड के उद्यान मित्रों ने अपनी समस्या बताते हुए कहा कि प्रखंड कृषि विभाग एवं जिला कृषि विभाग से अनुमोदित होने के बाद सेवा में रखे गए उद्यान मित्रों से तीन माह कार्य लेने के बाद भी उन्हें बिना कोई प्रोत्साहन राशि दिए ही या बिना कोई कारण बताये और बिना कोई सूचना दिए ही उनकी सेवा स्थगित भी कर दी गई। ग्रामीणों एवं उद्यान मित्रों तथा अन्य लोगों की समस्याओं को सुनने के पश्चात देवेश तिवारी ने उपायुक्त गढ़वा से बात कर समस्या समाधान के लिए सार्थक पहल करने का आश्वासन दिया गया। मौके पर उपस्थित लोग पूर्व जिला परिषद सदस्य कविता दुबे, युवा समाजसेवी आशीष कुमार दुबे उर्फ चिंटू दुबे, मीनू दुबे, बिंदल सिंह, बसंत सिंह, सरजू शाह, सोना बच्चा यादव, विजय विश्वकर्मा, अजय दुबे, प्रमोद यादव, धीरेंद्र दुबे, धनंजय तिवारी आदि मौजूद थे। Source link

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गढ़वा में पहले एमबीबीएस बैच के 100 में 91 विद्यार्थी सफल, मंदिरों...

भास्कर न्यूज | गढ़वा रामचंद्र चंद्रवंशी ट्रस्ट द्वारा संचालित लक्ष्मी चंद्रवंशी मेडिकल कॉलेज के लिए बुधवार का दिन ऐतिहासिक रहा, जब सत्र 2021-26 के पहले एमबीबीएस बैच के 100 में से 91 विद्यार्थियों ने परीक्षा उत्तीर्ण कर सफलता हासिल की। अपनी इस उपलब्धि के बाद विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय के अधिकारियों के साथ काली मंदिर एवं गढ़ देवी मंदिर में पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया। मौके पर रामचंद्र चंद्रवंशी विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. ईश्वर सागर चंद्रवंशी, रजिस्ट्रार प्रो. देवाशीष मंडल, डॉ. ओम प्रकाश भारती, भाजपा नेता ओम प्रकाश तिवारी और विनय चौबे आदि लोग उपस्थित थे। कुलाधिपति डॉ. चंद्रवंशी ने इस सफलता को राज्य और विश्वविद्यालय के लिए गर्व का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह पहला मौका है जब इस मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस का बैच पास हुआ है, जो क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि है। दूसरे राज्यों के विद्या​र्थी भी कर रहे पढ़ाई : कुलाधिपति कुलाधिपति ने कहा कि ट्रस्ट अब मेडिकल कॉलेज में पोस्ट ग्रेजुएट (पीजी) पाठ्यक्रम शुरू करने की दिशा में भी तेजी से काम कर रहा है, जिससे उच्च स्तरीय चिकित्सा शिक्षा का विस्तार हो सके। उन्होंने बताया कि कॉलेज में उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों के विद्यार्थी अध्ययन कर रहे हैं, जो इसकी व्यापक पहचान को दर्शाता है। यह उपलब्धि न केवल संस्थान बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए एक नई उम्मीद लेकर आई है, जिससे भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद है। मौके पर सफल विद्यार्थियों ने भी अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि देश में डॉक्टरों की कमी एक गंभीर समस्या है, जिसके कारण कई मरीज समय पर इलाज न मिलने से अपनी जान गंवा देते हैं। उन्होंने संकल्प लिया कि वे सेवा भावना के साथ कार्य करेंगे और आम जनता को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने में योगदान देंगे। एक साल राज्य में ही करेंगे इंटर्नशिप उन्होंने जानकारी दी कि सभी सफल विद्यार्थी झारखंड मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण कराकर राज्य के भीतर ही एक वर्ष की इंटर्नशिप पूरी करेंगे। इसके बाद वे चिकित्सा सेवा देने के लिए अधिकृत होंगे। उन्होंने यह भी बताया कि इस संस्थान की स्थापना का उद्देश्य ट्रस्ट के चेयरमैन एवं पूर्व मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी का सपना था, जिसमें स्थानीय स्तर पर चिकित्सा शिक्षा को बढ़ावा देकर डॉक्टरों की कमी को दूर करना शामिल था। Source link

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परदादा ने लगाया था यह एक पेड़, आज पोते के लिए बना...

Last Updated:May 07, 2026, 06:52 IST रांची के मनातू गांव में सुरेश के परदादा का लगाया 50 साल पुराना कटहल का पेड़ आज वरदान बन गया है. यह पेड़ भीषण गर्मी में ठंडी छांव देता है. इसके फल बाजार में ₹50 किलो बिकते हैं. सुरेश हर दिन ₹1500 तक की कमाई कर रहे हैं. यह पेड़ प्यार और आमदनी दोनों दे रहा है. ख़बरें फटाफट रांची: झारखंड की राजधानी रांची के ग्रामीण इलाकों में कटहल के पेड़ों की बहुतायत है, लेकिन रांची के मनातू गांव में एक ऐसा पेड़ है जो आज मिसाल बन गया है. यह पेड़ न केवल एक परिवार को तपती धूप से बचा रहा है, बल्कि उनके लिए हर दिन आमदनी का एक बड़ा जरिया भी बना हुआ है. ग्रामीण सुरेश बताते हैं कि उनके परदादा द्वारा 50 साल पहले लगाया गया यह कटहल का पेड़ आज उनके परिवार के लिए ‘आशीर्वाद’ साबित हो रहा है. गर्मी का ‘प्राकृतिक छाता’ और ठंडी हवामनातु गांव के सुरेश बताते हैं कि यह पेड़ इतना विशाल और घना है कि इसे ‘गर्मी का प्राकृतिक छाता’ कहा जा सकता है. दोपहर की कड़कती धूप में भी इसकी छांव के नीचे सूर्य की एक किरण तक नहीं पहुंच पाती. गांव के लोग अक्सर दोपहर में इसी पेड़ के नीचे बैठकर गप्पे लड़ाते हैं और ठंडी हवा का आनंद लेते हैं. सुरेश के अनुसार, पूर्वजों की यह विरासत उन्हें सुकून के साथ-साथ आर्थिक मजबूती भी दे रही है. हर दिन ₹1500 का ‘फल’सिर्फ छांव ही नहीं, इस पेड़ का फल बाजार में हाथों-हाथ बिकता है। सुरेश बताते हैं कि पेड़ की एक-एक डाली पर 10 से 15 कटहल लदे हुए हैं. बाजार में ताजा कटहल की मांग काफी ज्यादा है और यह ₹50 प्रति किलो तक आसानी से बिक जाता है. सुरेश हर दिन पेड़ से लगभग 25-30 किलो ताजा कटहल तोड़ते हैं, जिससे उन्हें रोजाना ₹1500 तक की कमाई हो जाती है. ग्राहकों की पहली पसंदइस पेड़ के कटहल इतने मशहूर हैं कि कई लोग तो सीधे पेड़ के पास ही खरीदारी करने पहुंच जाते हैं. सुरेश ग्राहकों के सामने ही पेड़ से ताजा फल तोड़कर और काटकर देते हैं. वह बताते हैं कि उनके पास कटहल के और भी पेड़ हैं, लेकिन इस विशेष पेड़ के फल वे बाजार में बेचते हैं, जबकि अन्य पेड़ों के फल खुद के खाने और रिश्तेदारों को भेजने के काम आते हैं. सुरेश बड़े गर्व से कहते हैं, “यह पेड़ हमारे लिए प्यार और अपनापन बढ़ाने का जरिया भी है. हम अपने ससुराल और अन्य करीबियों को भी यहां के कटहल भेजते हैं. वाकई, यह एक पेड़ है लेकिन इसके काम अनेक हैं.” यह कहानी दर्शाती है कि अगर सही मंशा से पेड़ लगाए जाएं, तो वे आने वाली पीढ़ियों के लिए न केवल पर्यावरण बल्कि आर्थिक सुरक्षा का भी आधार बनते हैं. About the Author Prashun Singh मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Ranchi,Jharkhand Source link

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सदर एसडीएम ने स्वास्थ्य केंद्र का किया निरीक्षण

गढ़वा|सदर एसडीएम संजय कुमार ने बुधवार को चिनिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने नव-निर्मित अस्पताल भवन के सभी कक्षों, खंडों सहित पूरे परिसर का जायजा लिया। साथ ही इमरजेंसी वार्ड, पुरुष वार्ड एवं महिला वार्ड सहित विभिन्न चिकित्सीय व्यवस्थाओं की स्थिति की समीक्षा की। वे यहां चिनिया प्रखंड के लिए नामित वरीय पदाधिकारी के रूप में निरीक्षण करने पहुंचे हुए थे। इस दौरान एसडीएम संजय ने संस्थागत प्रसव की स्थिति, दवाओं की उपलब्धता, चिकित्सक एवं कर्मियों की उपस्थिति, एंबुलेंस सेवा तथा ओपीडी एवं आईपीडी से संबंधित व्यवस्थाओं की विस्तृत जानकारी ली। स्वास्थ्य केंद्र में साफ-सफाई की स्थिति संतोषजनक पाई गई। निरीक्षण के समय दो मरीज भी भर्ती पाए गए। ओपीडी का समय समाप्त होने के कारण ओपीडी बंद मिली। Source link

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झारखंड में गंभीर अपराध 5.8% घटे, लेकिन धोखाधड़ी और बैंक फ्रॉड के...

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) ने बुधवार को ताजा रिपोर्ट जारी की। इसमें 2024 में हुए अपराधों का ब्योरा है। रिपोर्ट में कानून-व्यवस्था की चुनौतीपूर्ण तस्वीर सामने आई है। वर्ष 2024 में संज्ञेय (गंभीर) अपराधों में करीब 5.8% की गिरावट आई है, लेकिन आर्थिक अपराध, हत्या, गुमशुदगी और रेलवे क्षेत्र से जुड़े अपराधों में वृद्धि ने पुलिस की चिंता बढ़ा दी है। जालसाजी, धोखाधड़ी और बैंक फ्रॉड के मामलों ने राज्य में पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। धोखाधड़ी के 1,927 और जालसाजी के 535 नए मामले सामने आए हैं। 2023 में धोखाधड़ी के 1,630 और जालसाजी के 460 मामले दर्ज हुए थे। वहीं संज्ञेय अपराध 2024 में घटकर 47,250 रह गए। जो 2023 में 50,187 थे। रेलवे अपराध, नया उभरता खतरा रेलवे पुलिस के अधिकार क्षेत्र में अपराधों में तेजी से बढ़ोतरी देखी गई है। ट्रेनों और स्टेशनों पर चोरी, लूट और अन्य आपराधिक घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती दी है। वर्ष 2023 में झारखंड में रेलवे पुलिस द्वारा कुल 745 मामले दर्ज किए गए थे। वर्ष 2024 में यह संख्या बढ़कर 1,058 हो गई है। एससी/एसटी के खिलाफ अपराध घटे अनुसूचित जाति और जनजाति के खिलाफ अपराधों में 2024 में कमी दर्ज की गई है। एसटी के खिलाफ 260 और एससी के खिलाफ 566 मामले सामने आए हैं, जो पिछले वर्षों की तुलना में कम हैं। यह गिरावट सकारात्मक संकेत है, लेकिन इन मामलों में चार्जशीट दर अपेक्षाकृत कम होने से न्याय प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। गुमशुदा बच्चों की सुरक्षा बड़ा सवाल 2024 में राज्य से 1,042 बच्चे लापता हुए, जिनमें 639 लड़कियां शामिल हैं। यह आंकड़ा बाल सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। हालांकि, पुलिस ने पुराने मामलों सहित 2,262 लोगों को खोज निकाला है। इसके बावजूद गुमशुदगी की घटनाओं में वृद्धि समाज और प्रशासन दोनों के लिए चिंता का विषय है। मानव तस्करी का दाग नहीं धुल रहा झारखंड के लिए मानव तस्करी एक पुरानी और गंभीर समस्या रही है। 2024 के आंकड़े बताते हैं कि राज्य में एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट्स ने कुल 97 मामले दर्ज किए हैं। इन मामलों में 185 पुरुषों और 97 महिलाओं समेत कुल 282 पीडितों को तस्करों के चंगुल से छुड़ाया गया या वे तस्करी का शिकार हुए। Source link

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पलामू में शादी सीजन की चमक, सोना-चांदी नहीं, 200 से शुरू एडी...

Last Updated:May 07, 2026, 22:34 IST Palamu Markets AD Jewelry In Trend: शादी-विवाह का सीजन चल रहा है. ऐसे में पलामू की बाजारों में रौनक लौट आई है. यहां कपड़ों, श्रृंगार सामग्री और सजावटी सामानों के साथ ज्वेलरी दुकानों पर भी ग्राहकों की भारी भीड़ उमड़ रही है. किसी भी शादी समारोह में महिलाओं के श्रृंगार में ज्वेलरी की सबसे अहम भूमिका होती है. दुल्हन से लेकर घर की महिलाओं तक हर कोई अपने पहनावे के अनुसार आकर्षक गहनों की तलाश में बाजार पहुंच रहा है. यही वजह है कि इन दिनों पलामू के मेदिनीनगर सहित विभिन्न बाजारों में एडी ज्वेलरी की डिमांड बढ़ रही है. बता दें कि शादी के मौसम में अब महिलाएं महंगे सोने-चांदी के गहनों के साथ-साथ स्टाइलिश और बजट फ्रेंडली विकल्प भी पसंद कर रही हैं. इसी वजह से अमेरिकन डायमंड यानी एडी ज्वेलरी की मांग तेजी से बढ़ी है. कम कीमत में शानदार लुक और आकर्षक चमक मिलने के कारण यह हर वर्ग की महिलाओं की पसंद बन चुकी है. दुकानदारों का कहना है कि शादी-विवाह के सीजन में एडी सेट की बिक्री सबसे ज्यादा हो रही है. इसे आम तौर पर अमेरिकन डायमंड (AD) या CZ ज्वेलरी कहा जाता है, जो असली हीरे नहीं होते, बल्कि प्रयोगशाला में बने जिरकोनियम डाइऑक्साइड के क्रिस्टल से बने होते हैं. लेकिन ये असली हीरे की तरह ही रंगहीन, चमकदार और दोषरहित दिखते हैं. पलामू जिले के मेदिनीनगर शहर के बाजार स्थित रूप रंग शॉप में अमेरिकन डायमंड ज्वेलरी देखने को मिल रही है. दुकानदार राजीव कुमार ने लोकल18 को बताया कि इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी चमक और डिजाइन है. यह देखने में बिल्कुल डायमंड सेट जैसी नजर आती है, जिससे पहनने वाली महिलाओं को खास और रॉयल लुक मिलता है. Add News18 as Preferred Source on Google ब्राइडल सेट में इसकी मांग सबसे अधिक है. दुल्हनें अपने लहंगे और साड़ी के अनुसार ग्रीन, रेड, सिल्वर, पिंक, रूबी रेड, पिस्ता और बेबी पिंक रंगों के सेट पसंद कर रही हैं. हर नए सीजन में दुकानदार नए डिजाइन और नया कलेक्शन ला रहे हैं. उन्होंने कहा कि एडी ज्वेलरी 200 रुपये से शुरू होकर 1000 से 1200 रुपये तक उपलब्ध है. नेकलेस सेट, हार, झुमका, ईयररिंग्स और मैचिंग ब्राइडल सेट की अच्छी रेंज दुकानों में सजी हुई है. इसके अलावा कुंदन सेट भी अलग-अलग डिजाइन और रंगों में उपलब्ध हैं, जिन्हें महिलाएं खूब पसंद कर रही हैं. कम बजट में शानदार ज्वेलरी मिलने से मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए यह बेहतर विकल्प साबित हो रहा है. आगे कहा कि एडी ज्वेलरी टिकाऊ भी होती है. यदि इसे नमी, परफ्यूम और मॉइश्चराइजर से बचाकर रखा जाए तो इसकी चमक लंबे समय तक बनी रहती है. यही कारण है कि आजकल की महिलाओं के बीच यह पसंदीदा फैशन ट्रेंड बन चुका है. शादी-विवाह के इस सीजन में पलामू के बाजार में अमेरिकन डायमंड ज्वेलरी की भारी डिमांड देखी जा रही है और आने वाले दिनों में इसकी बिक्री और बढ़ने की उम्मीद है. Source link

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घरगुली में उप स्वास्थ्य केंद्र खोलने की मांग, सिविल सर्जन को सौंपा...

पत्र सौंपते जिप सदस्य। भास्कर न्यूज| बगोदर बगोदर प्रखंड की सुदूरवर्ती धर्गुल्ली पंचायत में स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव ग्रामीणों के लिए बड़ी परेशानी बना हुआ है। इसे लेकर जिप सदस्य दुर्गेश कुमार ने जिले के सिविज सर्जन गिरिडीह को पत्र सौंपकर यहां उप स्वास्थ्य केंद्र खोलने की मांग की है। सिविल सर्जन को बताया कि धरगुल्ली पंचायत प्रखंड मुख्यालय से करीब 30 किमी दूर, जिले के अंतिम छोर पर जंगल किनारे स्थित है। यहां सरकारी स्वास्थ्य केंद्र नहीं होने के कारण ग्रामीणों को इलाज के लिए हजारीबाग जिले के गोरहर, बरकट्ठा या फिर बगोदर तक जाना पड़ता है। ऐसे में समय और पैसे दोनों की भारी मार झेलनी पड़ती है। क्षेत्र में आदिवासी और बिरहोर समुदाय के परिवारों की भी अच्छी-खासी आबादी है, जिन्हें स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव में ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। जिप सदस्य ने बताया कि इस मुद्दे को पहले भी जिला परिषद की बैठक में उठाया गया था। उस दौरान कुदर और अटका पश्चिमी पंचायत में उप स्वास्थ्य केंद्र की स्वीकृति मिल गई, लेकिन धर्गुल्ली पंचायत को अब तक नजरअंदाज किया गया है। कहा कि जनहित को देखते हुए धर्गुल्ली पंचायत में जल्द से जल्द उप स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना जरूरी है। इससे हजारों ग्रामीणों को राहत मिलेगी। जिप सदस्य ने इस संबंध में कोडरमा सांसद सह केंद्रीय महिला व बाल विकास मंत्री, गिरिडीह उपायुक्त और उप विकास आयुक्त को भी पत्र की प्रतिलिपि भेजकर शीघ्र कार्रवाई की मांग की है। Source link

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पिछले वर्ष से साइंस का ​रिजल्ट 3% गिरा, कॉमर्स में 2% बेहतर

झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जैक) द्वारा घोषित इंटरमीडिएट 2026 के परिणामों ने राजधानी रांची की शिक्षा व्यवस्था का बहुआयामी और कुछ हद तक विरोधाभासी चेहरा भी सामने रखा है। राजधानी होने के नाते रांची से सबसे अधिक परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल होते हैं, वहीं तीनों संकाय विज्ञान, वाणिज्य और कला के नतीजे संकेत दे रहे हैं कि शिक्षा का स्तर एकरूप नहीं है। एक ओर विज्ञान संकाय में गिरते परिणाम और राज्य औसत से पीछे रहना सवाल खड़े करता है, तो दूसरी ओर वाणिज्य और कला संकाय में शानदार प्रदर्शन बताता है कि सही रणनीति और फोकस के साथ बेहतर परिणाम संभव हैं। महत्वपूर्ण तथ्य है कि तीनों ही संकायों में छात्राओं ने छात्रों से बेहतर प्रदर्शन कर अपनी शैक्षणिक श्रेष्ठता साबित की। एक ही जिले में तीन अलग ट्रेंड : रांची में इंटर के रिजल्ट में तीन तरह के ट्रेंड सामने आए हैं। पहला साइंस में गिरावट चिंतित करने वाला है। वहीं, कॉमर्स में पास प्रतिशत में उछाल आया है। तीसरा आर्ट्स में स्थिरता व उत्कृष्टता देखने को मिला है। तीनों संकायों में छात्राओं का बेहतर प्रदर्शन यह दर्शाता है कि शिक्षा के प्रति उनकी गंभीरता और निरंतरता अधिक मजबूत है। रांची का रिजल्ट कहता है कि जहां बेटियां शिक्षा की नई तस्वीर गढ़ रही हैं, वहीं विज्ञान संकाय में सुधार के बिना राजधानी की शैक्षणिक साख अधूरी रहेगी। कॉमर्स: बीसी-एमबीसी का दबदबा कॉमर्स संकाय में रांची का प्रदर्शन लगभग हाई परफेक्शन की स्थिति में दिखा, जहां हर वर्ग में सफलता दर बेहद ऊंची रही। बीसी वर्ग की छात्राएं 99.11% और छात्र 96.04% पास हुए। एमबीसी की छात्राओं का पास प्रतिशत 99% रहा। एसटी वर्ग की छात्राएं 98.11% और छात्र 94.75% पास हुए, यानी संतुलित और मजबूत प्रदर्शन रहा। एससी वर्ग की छात्राएं 97.75% और छात्र 93.87% पास हुए। वहीं समान्य के छात्राएं 96.45% और छात्र 92.76% पास हुए। आर्ट्स संकाय: एसटी बड़ा आधार, बीसी का तेज प्रदर्शन आर्ट्स संकाय में रांची जिले के कुल 19,664 विद्यार्थी परीक्षा में शामिल हुए, जो इसे सबसे बड़ा संकाय बनाता है। एसटी वर्ग के 8,306 परीक्षार्थी परीक्षा में पास हुए। बीसी वर्ग की छात्राएं 99.08% और 97.72% छात्र पास हुए हैं, जो तेज प्रदर्शन रहा। समान्य वर्ग की छात्राएं 97.35%, छात्र 94.64% पास हुए हैं। वहीं एमबीसी वर्ग की छात्राएं 98.54%, छात्र 96.76% पास हुए हैं। एसी वर्ग की छात्राएं 98.15% व छात्र 96.40% पास हुए हैं। साइंस : सामान्य को मिली चुनौती रांची जिले में पिछड़ा वर्ग के छात्रों ने बेहतर प्रदर्शन किया है। कुल 2,685 परीक्षार्थियों में से 2,041 सफल रहे। एसटी में 1,980 परीक्षार्थियों में से 1,382 सफल हुए। सामान्य वर्ग में 1,993 में से 1,385 सफल रहे। प्रदर्शन अच्छा रहा, लेकिन अन्य वर्गों की चुनौती अब स्पष्ट दिख रही है। एससी में 295 में से 216 सफल हुए हैं, जो स्थिर प्रदर्शन, लेकिन सुधार की गुंजाइश बनी हुई है। जिले में कुल 4,799 छात्रों ने प्रथम श्रेणी प्राप्त की, जिनमें बीसी (1,728) और एसटी (1,165) का बड़ा योगदान रहा। 4668 में 3199 प्रथम श्रेणी से पास हुए कुल परीक्षार्थी 5680 छात्र सफल हुए, पास का प्रतिशत 73.11% कुल परीक्षार्थी बीसी-एसटी बने उभरते लीडर इंटरमीडिएट (कला, विज्ञान और वाणिज्य) के रिजल्ट ने रांची को लेकर एक अहम और गहरी तस्वीर खींची है। अगर इन नतीजों को जातिगत (कास्ट) आधार पर विश्लेषण किया जाए, तो पता चलता है कि अब पिछड़ा वर्ग (बीसी), अत्यंत पिछड़ा वर्ग (एमबीसी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के छात्र-छात्राएं न सिर्फ बड़ी संख्या में सफल हो रहे हैं, बल्कि मेरिट में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। तीनों संकायों आर्ट्स, साइंस और कॉमर्स में हर वर्ग में छात्राओं ने छात्रों से बेहतर प्रदर्शन किया है। रांची ने अपनी साख और मजबूत की संत जेवियर्स में सेलिब्रेशन। रांची, गुरुवार 7 मई, 2026 | 6 जैक इंटरमीडिएट साइंस/कॉमर्स रिजल्ट-2026 एनालिसिस : सामान्य को हर वर्ग से मिल रही चुनौती 92.68% 67.97% 94.16% 79.17% 3,199 5,680 97.77% 42 93.37% 76.08% 19 2,087 95.80% 73.11% 1,254 4,799 4,668 7,769 2025 लड़के लड़के लड़कियां प्रथम श्रेणी कुल सफल लड़कियां अनुपस्थित राज्य औसत पिछले वर्ष तृतीय श्रेणी फेल पास प्रतिशत पास प्रतिशत द्वितीय श्रेणी प्रथम श्रेणी कॉमर्स में उच्च पास प्रतिशत और बड़ी संख्या में प्रथम श्रेणी यह दिखाता है कि यहां के विद्यार्थी केवल पास होने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उत्कृष्टता हासिल कर रहे हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि वाणिज्य संकाय रांची के लिए परफॉर्मेंस इंजन साबित हो रहा है। वाणिज्य संकाय में रांची ने अपनी साख को न केवल बरकरार रखा, बल्कि और मजबूत किया है। राज्य के 82.92% की तुलना में रांची का 73.11% रिजल्ट (10% कम) बताता है कि विज्ञान शिक्षा में खामियां हैं। कोडरमा (90.83%) व लातेहार (93.25%) जैसे जिलों से पिछड़ना दर्शाता है कि संसाधनों के बावजूद यहां अपेक्षित परिणाम नहीं मिले। विशेषज्ञ कहते हैं विज्ञान संकाय में गुणवत्ता, पढ़ाई के स्तर व मॉनिटरिंग में सुधार की जरूरत है। कोडरमा व लातेहार से पिछड़ी राजधानी Source link

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झारखंड में जापान का स्वाद, पलामू में पहली बार मियाजाकी आम की...

होमफोटोकृषि झारखंड में जापान का स्वाद, पलामू में पहली बार मियाजाकी आम की खेती Last Updated:May 07, 2026, 22:06 IST Miyazaki Mangoes: झारखंड के पलामू जिले में अब दुनिया के सबसे महंगे और चर्चित आमों में शुमार जापानी प्रजाति मियाजाकी आम की खेती शुरू हो गई है. इसे ‘एग ऑफ द सन’ यानी सूरज का अंडा भी कहा जाता है. यह आम अपने गहरे लाल रंग, चमकदार छिलके, रेशारहित गूदे और बेहद मीठे स्वाद के लिए दुनियाभर में मशहूर है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत लाखों रुपये प्रति किलो तक बताई जाती है, जिस कारण यह लग्जरी फ्रूट की श्रेणी में आता है. अब यही खास आम पलामू की धरती पर फलने लगा है, जिससे इलाके के किसान और बागवानी प्रेमियों में उत्साह देखा जा रहा है. पलामू जिले के रहने वाले प्रगतिशील किसान सतीश दुबे ने इस अनोखे आम को अपने बागान में तैयार किया है. उन्होंने बताया कि गूगल और सोशल मीडिया पर मियाजाकी आम के बारे में जानकारी मिलने के बाद इसे लगाने का विचार आया. सतीश दुबे अपने फार्म में कई तरह के पेड़-पौधों पर लगातार प्रयोग करते रहते हैं और अब तक आम की करीब 40 किस्में लगा चुके हैं. इसी दौरान उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले की यात्रा के समय उन्हें एक नर्सरी में मियाजाकी आम का पौधा मिला, जहां से वे 15 हजार रुपये में दो पौधे खरीदकर पलामू लाए. सतीश दुबे ने लोकल18 को बताया कि इनमें से एक पौधा खराब हो गया, लेकिन दूसरा पौधा अब तीन साल का हो चुका है और उसमें पहली बार फल लगना शुरू हुआ है. सतीश दुबे ने बताया कि उन्होंने जिंदगी में पहली बार इस आम का फल अपने ही बागान में देखा है. Add News18 as Preferred Source on Google उनका कहना है कि संभवतः पलामू जिले में यह पहला पौधा है, जिसमें मियाजाकी आम फल रहा है. फल को देखकर आसपास के लोग भी हैरान हैं और इसे देखने के लिए बागान पहुंच रहे हैं. उन्होंने कहा कि अभी फल पूरी तरह पकने का इंतजार है, जिसके बाद इसका स्वाद चखा जाएगा. यदि जलवायु और उत्पादन बेहतर रहा तो आने वाले समय में इसका मदर प्लांट तैयार कर किसानों को भी उपलब्ध कराया जाएगा. इससे पलामू के किसानों को पारंपरिक खेती के साथ हाई वैल्यू हॉर्टिकल्चर का नया विकल्प मिल सकता है. ऐसे महंगे और विदेशी फलों की सफल खेती होती है, तो पलामू की पहचान राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बन सकती है. Source link

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