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केवल 80 डिसमिल खेत, कमाई लाखों में, बोकारो के किसान के लिए...

होमताजा खबरकृषि केवल 80 डिसमिल खेत, कमाई लाखों में, किसान के लिए नोट छापने की मशीन बनी झींगा Last Updated:April 27, 2026, 12:56 IST Torai Farming: बोकारो के किसान भरत महतो केवल 80 डिसमिल पर झींगा यानी तरोई की खेती करके बड़ा मुनाफा कमा रहे हैं. उनका कहना है कि वे मल्चिंग विधि से खेती करते हैं, ड्रिप इरिगेशन का तरीका अपनाते हैं और 15 हजार के खर्च पर एक लाख तक का मुनाफा कमाते हैं. बोकारो. बोकारो जिले के चंद्रपुरा प्रखंड के तेलों गांव के किसान भरत महतो आधुनिक खेती से मिसाल पेश कर रहे हैं. महज 80 डिसमिल जमीन में मल्चिंग विधि से झींगा खेती कर वह लाखों रुपये की कमाई कर रहे हैं.  लोकल 18 से खास बातचीत में किसान भरत महतो ने बताया कि खेती उनके परिवार का पारंपरिक पेशा है और कई पीढ़ियों से वे इसी काम से जुड़े हैं. बदलते समय के साथ उन्होंने खेती में नई तकनीक अपनाई और मल्चिंग विधि और ड्रिप के माध्यम से झींगा की खेती शुरू की है और अब सफलतापूर्वक झींगा की फसल से बढ़िया आमदनी कर रहे हैं. इस विधि से मिलते हैं बहुत फायदेमल्चिंग तकनीक के फायदे बताते हुए किसान भरत ने बताया कि इस विधि में सिंचाई कम करनी पड़ती है और पौधों को ड्रिप सिस्टम के माध्यम से सीधे पानी और पोषण मिलता है, और गर्मियों के दौरान सब्जी में नमी बनी रहती है और बरसात में अधिक बारिश होने पर भी फसल को नुकसान नहीं पहुंचता है. जिस कारण फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों बेहतर होते हैं. 45 दिन में हो जाती है तैयारभरत महतो ने आगे बताया कि उन्होंने मार्च महीने में झींगा बोयी थी, जो करीब 40 से 45 दिनों में तैयार हो जाती है. फिलहाल बाजार में झींगा सब्जी 20 से 40 रुपये प्रति किलो के थोक भाव से बिक रहा है और 80 डिसमिल जमीन में वे करीब 80 से 100 क्विंटल तक उत्पादन प्राप्त कर लेते हैं. उन्होंने बताया कि इस खेती में करीब 15,000 रुपये की लागत आई है, और तैयार फसल को वे बोकारो के गोमो मंडी में बेचते हैं. बस इस कीट से बचाकर रखें फसलअच्छी पैदावार और सही बाजार मिलने से वे दो महीने के भीतर करीब 1 से 1.5 लाख रुपये तक की बचत कर लेते हैं. आखिर में उन्होंने किसानों को सलाह दी है कि झींगा की फसल में ‘लीफ रिमाइंडर’ (पत्ती से जुड़ी बीमारी) का खतरा रहता है, जिससे समय पर कीटनाशक का छिड़काव कर नियंत्रण पाया जा सकता है और झींगा की खेती से किसान कम समय में मोटी आमदनी कमा सकते हैं. About the Author Raina Shukla बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Bokaro,Jharkhand First Published : April 27, 2026, 12:56 IST Source link

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रामनगर कॉलोनी में डस्टबिन लगा, लेकिन कचरा उठाव के लिए नहीं आ...

सिटी रिपोर्टर | बोकारो गाड़ी वाला आया घर से कचरा निकाल … यह संदेश चास नगर निगम के विभिन्न मोहल्लों में अक्सर सुनाई देता था। लेकिन इधर कुछ महीनों से कचरा उठाव के लिए गाड़ी नहीं आ रही है। इससे चास शहर के लोग परेशान हैं। ऐसा ही मामला वार्ड-14 स्थित रामनगर कॉलोनी में देखने को मिला। कॉलोनी के समाजसेवी प्रेम राय, सोमनाथ घोष, प्रमोद कुमार, चंदन सिंह, शिबू कुमार, कैलाश शर्मा आदि ने बताया कि कॉलोनी का पुराना बांध चौक के पास काफी मिन्नतें करने के बाद एक महीने पहले एक डस्टबिन लगवाया गया और लोग डस्टबिन में कचरा डालने भी लगे। लेकिन डस्टबिन लगाया हुआ एक महीना हो गया, लेकिन यहां एक दिन भी कचरा उठाव के लिए गाड़ी नहीं आया। ऐसे में डस्टबिन ओवरफ्लो हो गया और लोग अब कचरा डस्टबिन के बाहर फेंकने लगे हैं। जबकि नियमत: हर दिन कचरा उठाव करना चाहिए। उन्होंने बताया कि कचरा का अंबार लगा हुआ है, जिससे आसपास लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। दुर्गंध के कारण लोगों को आसपास से गुजरने के लिए नाक बंद करना पड़ रहा है। Source link

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धालभूमगढ़ चौक के समीप उभरे गड्ढे के कारण हो रहीं दुर्घटनाएं

भास्कर न्यूज | धालभूमगढ़ धालभूमगढ़ थाना क्षेत्र के एनएच 18 पर धालभूमगढ़ चौक स्थित अंडरपास के समीप दोनों और गड्ढा उभर गया है। इस गड्ढे में हल्का बारिश से ही पानी जम जाता है। सड़क पर गड्ढा में पानी जम जाने के कारण लोग अक्सर इस स्थान पर बाइक से गिरकर घायल हो रहे हैं। अगर गड्ढा को जल्द नहीं भरा जाए तो बड़ा हादसा भी हो सकता है। इस अंडरपास पर अक्सर वाहनों का भीड़भाड़ रहती है। गड्ढे की मरम्मत करने को लेकर लोगों ने कई बार एनएचएआई के कर्मियों से मांग की है, पर मरम्मत नहीं हुई है। सड़क के ऊपर उभरे हुए गड्ढों के कारण कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। Source link

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टाटानगर स्टेशन के पास ये हैं सस्ते और अच्छे होटल, 300 में...

Last Updated:April 27, 2026, 13:18 IST Good Cheap Hotels Near Tatanagar Station: नौकरी का एग्जाम देने या दोस्तों के ग्रुप के साथ घूमने-फिरने आते हैं और सस्ते लेकिन अच्छे होटल की तलाश है तो इन ऑप्शंस पर गौर फरमा सकते हैं. टाटानगर रेलवे स्टेशन के पास के ये होटल बजट में सुविधाएं देते हैं. सबसे पहले अगर आप स्टेशन के गेट नंबर 2 से बाहर निकलते हैं, तो ठीक सामने आपको होटल भवानी नजर आएगा. यह होटल कम बजट वाले स्टूडेंट्स के लिए काफी लोकप्रिय है. यहां आपको मात्र ₹200 में नॉन-एसी बेड और ₹300 में एसी बेड मिल जाता है. कम कीमत के बावजूद यहां साफ-सुथरे बाथरूम और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हैं, जिससे आप आराम से रात गुजार सकते हैं. अब अगर आप गेट नंबर 1 की ओर निकलते हैं, तो स्टेशन से लगभग 200 मीटर की दूरी पर आपको Swarnarekha Lodge मिलेगा. यह जमशेदपुर के पुराने और भरोसेमंद लॉज में से एक है. यहां ₹300 में सामान्य कमरा और ₹500 में अटैच बाथरूम वाला कमरा आसानी से मिल जाता है. लंबे समय से यह लॉज यात्रियों के बीच अपनी विश्वसनीयता के लिए जाना जाता है. इसके अलावा, अगर आप और बेहतर और प्रीमियम स्टे की तलाश में हैं, तो पास में ही Hotel Rajasthan मौजूद है. यहां ₹1000 से ₹1200 के बीच बेहतरीन कमरे उपलब्ध हैं, जहां आपको अच्छी सर्विस और आरामदायक माहौल मिलता है.अगली बार जब भी आप जमशेदपुर आएं – चाहे एग्जाम, मीटिंग या किसी अन्य काम से – तो टाटानगर स्टेशन के पास ही आपको अपने बजट के अनुसार बढ़िया ठहरने की सुविधा आसानी से मिल जाएगी. Add News18 as Preferred Source on Google झारखंड में इन दिनों विभिन्न सरकारी और निजी नौकरियों की वैकेंसी निकली हुई हैं, जिसके चलते बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं परीक्षा देने के लिए Jamshedpur पहुंच रहे हैं. ऐसे में सबसे बड़ी चिंता होती है – कम बजट में सुरक्षित और आरामदायक ठहरने की व्यवस्था. अगर आप भी Tatanagar Railway Station पर उतर रहे हैं, तो यहां आपके लिए कई किफायती और अच्छे विकल्प मौजूद हैं. अगर आप परिवार के साथ आए हैं या थोड़ा बेहतर स्टे चाहते हैं, तो आपके लिए Hotel Nanak और Hotel Paradise अच्छे विकल्प हो सकते हैं. यहां ₹700 से ₹1000 के बीच आपको आरामदायक कमरे मिलते हैं, साथ ही कई जगहों पर मॉर्निंग ब्रेकफास्ट की सुविधा भी दी जाती है. यह होटल उन लोगों के लिए उपयुक्त हैं जो बजट के साथ थोड़ी अतिरिक्त सुविधा चाहते हैं. गेट नंबर 2 से थोड़ी ही दूरी, लगभग 50 मीटर पर आपको Hotel Ashirwad मिलेगा. यह होटल उन लोगों के लिए बेहतर विकल्प है जो थोड़ी ज्यादा सुविधा चाहते हैं. यहां करीब ₹500 में अच्छा कमरा मिल जाता है, जिसमें फ्री वाई-फाई, फिल्टर पानी और एयर कंडीशन जैसी सुविधाएं शामिल हैं. छात्रों और छोटे ग्रुप्स के लिए यह एक संतुलित विकल्प माना जाता है. First Published : April 27, 2026, 13:18 IST Source link

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नलदोहा में मनायी गई पं रघुनाथ मुर्मू का जयंती

धालभूमगढ़| आदिवासी सोशिएल एसोशिएशन नलदोहा की ओर से शुक्रवार को पंडित रघुनाथ मुर्मू का जयंती धूमधाम से मनायी गई। इस दौरान नाइके लखन चंद्र मुर्मू ने पारंपरिक रीति रिवाज अनुसार पंडित रघुनाथ मुर्मु के मूर्ति के समीप पूजा-अर्चना की गई। बाद में इस उपलक्ष्य पर कई तरह का सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन हुआ। मैट्रिक परीक्षा के टॉपारो को सम्मानित भी किया गया। साथ ही ओलचिकी की किताब का वितरण किया गया। मौके पर महेद्र हांसदा, बाबूलाल, विक्रम हांसदा, दाखिन कीस्कू, कुनाराम टुडू आदि उपस्थित थे Source link

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बेहतर एफिशिएंसी, सेफ्टी के लिए एसी को 24 डिग्री पर चलाएं, 4-6...

दिल्ली में हाल ही में हुई एसी ब्लास्ट की घटना ने एक बार फिर एयर कंडिशनर के सुरक्षित उपयोग को लेकर लोगों को चिंता में डाल दिया है। इस हादसे के बाद उपभोक्ता अब केवल खरीददारी तक सीमित नहीं रहकर इसके सुरक्षित संचालन, मेंटेनेंस और संभावित जोखिमों को समझने में अधिक रुचि दिखा रहे हैं। उपभोक्ता व्यवहार में यह बदलाव बताता है कि लोग अब तकनीक के प्रति अधिक जिम्मेदार और जागरूक हो रहे हैं। इसी बढ़ती चिंता को देखते हुए सैमसंग के झारखंड सर्विस हेड राजेश कुमार ने एसी के सुरक्षित उपयोग से जुड़े महत्वपूर्ण तकनीकी पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। बताया कि एसी ब्लास्ट या स्पार्किंग की घटनाएं आमतौर पर गलत इंस्टॉलेशन, अनियमित मेंटेनेंस और लापरवाही से उपयोग के कारण होती हैं। इन्हें सही देखभाल व मेंटेनेंस से काफी हद तक रोका जा सकता है। सही उपयोग से बढ़ेगी एसी की उम्र एसी का इस्तेमाल सही तरीके से करना उसकी परफॉर्मेंस और सुरक्षा दोनों के लिए जरूरी है। उपयोग के बाद एसी को ठीक से बंद करना चाहिए। बेहतर एफिशिएंसी और बिजली बचत के लिए एसी को 24 डिग्री सेल्सियस पर चलाना उपयुक्त माना जाता है। कमरे के साइज अनुसार ही एसी का चयन करें, क्योंकि गलत क्षमता का एसी मशीन पर अतिरिक्त दबाव डालता है। आग-शॉर्ट सर्किट से बचने के आसान उपाय अगर शॉर्ट सर्किट की स्थिति बने तो एसी से तुरंत दूर हो जाएं और पानी का उपयोग बिल्कुल न करें, बल्कि फायर एक्सटिंग्विशर का प्रयोग करें। एसी के नीचे टीवी या अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण नहीं रखने चाहिए, क्योंकि पानी की बूंदें या नमी गिरने से नुकसान हो सकता है। आउटडोर यूनिट (कंप्रेसर) को हमेशा छायादार जगह पर रखें, ताकि वह ज्यादा गर्म न हो। एसी के इंस्टॉलेशन में लापरवाही न की जाए एसी का पावर केबल कभी भी ज्वाइंट नहीं होना चाहिए, क्योंकि इससे स्पार्किंग और शॉर्ट सर्किट का खतरा बढ़ जाता है। एसी की क्षमता (टन) के अनुसार सही एमएम का वायर इस्तेमाल करना जरूरी है, ताकि ओवरलोडिंग और वायर हीटिंग न हो। प्लग पॉइंट पर हमेशा एमसीबी (मिनी सर्किट ब्रेकर) लगवाएं। वोल्टेज उतार-चढ़ाव से बचाव के लिए स्टेबलाइजर लगाना भी जरूरी है। मेंटेनेंस में ढिलाई की तो बढ़ेगा खतरा एसी की नियमित देखभाल उसकी सुरक्षा और बेहतर प्रदर्शन के लिए जरूरी है। हर 4 से 6 महीने के भीतर सर्विसिंग करानी चाहिए, ताकि मशीन सही तरीके से काम करती रहे। सर्विसिंग हमेशा प्रशिक्षित और अधिकृत इंजीनियर से ही कराएं। इसके अलावा एसी में केवल कंपनी के ओरिजिनल पार्ट्स का ही उपयोग करें, ताकि किसी तरह का तकनीकी जोखिम न हो। Source link

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गुमला के किसानों ने आम की बागवानी से रचा इतिहास, खास तरीके...

Last Updated:April 27, 2026, 13:36 IST किसानों के मुताबिक, आम के बाग की शुरुआती चार साल तक विशेष देखभाल की जाती है. इसके बाद पेड़ फल देने लगते हैं और कम मेहनत में अच्छी आमदनी होने लगती है. पिछले साल प्रति पेड़ लगभग 400 रुपये की आमदनी हुई, जिससे करीब 6 लाख रुपये का मुनाफा हुआ. गुमला: गर्मी का मौसम शुरू होते ही बाजार में आम की मांग तेजी से बढ़ जाती है. आम को ‘फलों का राजा’ कहा जाता है और यह सिर्फ गर्मियों में ही विभिन्न किस्मों में उपलब्ध होता है. लाल, पीले और रसीले आम न केवल देखने में आकर्षक होते हैं, बल्कि स्वाद में भी बेहद मीठे और लाजवाब होते हैं. साथ ही यह स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक है. ऐसे में आम की बागवानी किसानों के लिए कमाई का बेहतरीन विकल्प बनकर उभर रही है. पालकोट के किसानों की पहल बनी मिसालगुमला जिले के पालकोट प्रखंड के पिंजराडीपा गांव के करीब 10 किसानों ने मिलकर 25 एकड़ जमीन में आम की बागवानी कर सफलता की नई कहानी लिखी है. किसान संदीप साहू ने बताया कि वे पारंपरिक रूप से खेती करते आ रहे हैं, लेकिन वर्ष 2015 में उन्होंने ‘प्रदान’ संस्था के सहयोग से आम की खेती शुरू की. संस्था की देखरेख में पौधरोपण से लेकर देखभाल तक की पूरी जानकारी दी गई, जिससे किसानों को बेहतर उत्पादन मिला. कम समय में लाखों की कमाईकिसानों के मुताबिक, आम के बाग की शुरुआती चार साल तक विशेष देखभाल की जाती है. इसके बाद पेड़ फल देने लगते हैं और कम मेहनत में अच्छी आमदनी होने लगती है. पिछले साल प्रति पेड़ लगभग 400 रुपये की आमदनी हुई, जिससे करीब 6 लाख रुपये का मुनाफा हुआ. वहीं इस साल पूरे बाग की फसल 7 लाख रुपये में बिक चुकी है. बाग में मालदा, आम्रपाली, मलिका और लंगड़ा जैसी लोकप्रिय किस्में लगाई गई हैं. सही तकनीक से करें बागवानीकिसान संदीप साहू बताते हैं कि आम की बागवानी के लिए 3 फीट लंबा, चौड़ा और गहरा गड्ढा खोदना चाहिए. पौधों के बीच 15 से 20 फीट की दूरी रखना जरूरी है, ताकि बीच की जमीन में अन्य फसलें भी उगाई जा सकें. गड्ढे में पहले एक फीट मिट्टी डालें, फिर खाद मिश्रित मिट्टी भरें और पौधे को लगभग 6 इंच अंदर रोपें. शुरुआती चार वर्षों तक पेड़ में आने वाले मंजर और फूल को हटा देना चाहिए, ताकि पेड़ मजबूत बने और भविष्य में बेहतर फल दे. एक बार की मेहनत, लंबे समय तक मुनाफाकिसानों का कहना है कि आम की बागवानी एक ऐसा निवेश है, जिसमें शुरुआती मेहनत के बाद लंबे समय तक लगातार आय होती है. सही तकनीक और देखभाल से किसान कम लागत में बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है. About the Author Amita kishor न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Gumla,Jharkhand First Published : April 27, 2026, 13:36 IST Source link

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तबीयत खराब बताकर बुलाया, पहुंचने पर मिला शव:कोडरमा के स्कूल हॉस्टल में...

कोडरमा जिले के तिलैया थाना क्षेत्र अंतर्गत असनाबाद स्थित सेक्रेड हार्ट स्कूल के हॉस्टल में एक 10वीं कक्षा के छात्र की संदिग्ध परिस्थिति में मौत हो गई। मृतक की पहचान कोडरमा थाना क्षेत्र के दूधिमाटी निवासी विजय यादव के 17 वर्षीय पुत्र उदित यादव के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि उदित ने हॉस्टल के कमरे में गमछे के सहारे फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना की जानकारी मिलते ही विद्यालय परिसर में सनसनी फैल गई। आनन-फानन में विद्यालय प्रबंधन द्वारा छात्र को निजी वाहन से सदर अस्पताल कोडरमा ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। अचानक आई तबीयत खराब होने की सूचना मृतक के बड़े भाई आदित्य कुमार ने बताया कि रविवार को वह अपने भाई से मिलने दो बार स्कूल गए थे। पहली बार दोपहर करीब 2:30 बजे वह उसके मैले कपड़े लेने पहुंचे थे, जबकि दूसरी बार शाम करीब 5:30 बजे साफ कपड़े और जरूरी सामान देने गए थे। दोनों बार उदित से उनकी सामान्य बातचीत हुई। वह ठीक लग रहा था। घर लौटने के कुछ देर बाद ही स्कूल के एक छात्र ने फोन कर सूचना दी कि उदित की तबीयत अचानक खराब हो गई है। तुरंत स्कूल आने को कहा। इसके बाद आदित्य अपने भाई रोहित के साथ स्कूल पहुंचे, जहां उन्होंने उदित को हॉस्टल के एक कमरे में जमीन पर मृत अवस्था में पड़ा पाया। परिजनों ने लगाया प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप परिजनों का कहना है कि उदित ऐसा कदम नहीं उठा सकता। इस मामले में कुछ न कुछ संदिग्ध जरूर है। उन्होंने विद्यालय प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका सवाल है कि जब हॉस्टल में कई छात्र रहते हैं। ऐसे में उदित को अकेले इतना समय कैसे मिल गया कि उसने कमरे में जाकर फांसी लगा ली। बताया गया कि घटना के समय सभी छात्र स्कूल के मैदान में खेलने गए हुए थे। उदित कमरे में अकेला था। परिजनों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। प्रबंधन ने बताया- छात्र था परेशान वहीं विद्यालय के संचालक प्रमोद कुमार ने फोन पर बताया कि वह फिलहाल शहर से बाहर हैं। उन्हें सूचना मिली है कि उदित ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। उन्होंने बताया कि उदित पिछले चार-पांच दिनों से परेशान चल रहा था। वह हॉस्टल में रहकर पढ़ाई नहीं करना चाहता था, जबकि उसके अभिभावक उसे वहीं रहकर पढ़ाई करने के लिए दबाव बना रहे थे। इधर घटना की सूचना मिलते ही तिलैया थाना पुलिस सदर अस्पताल पहुंची। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के स्पष्ट कारणों का खुलासा हो सकेगा। परिजनों ने किया सड़क जाम पोस्टमॉर्टम करवाने के पश्चात आक्रोशित परिजनों ने शव को रांची-पटना मुख्य मार्ग के एनएच 20 पर रखकर सड़क को जाम कर दिया। परिजनों का आरोप है कि उदित ने फांसी नहीं लगाई, बल्कि उसकी हत्या की गई है। उनकी मांग है कि सबसे पहले विद्यालय के संचालक की गिरफ्तारी हो, उसके पश्चात उदित के हत्या की सही से जांच की जाए। Source link

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धनबाद में आउटसोर्सिंग कंपनी में हादसा:12 चक्का टिपर की चपेट में आकर...

धनबाद जिले के पूटकी थाना क्षेत्र अंतर्गत गोपालीचक स्थित एसएनआर आउटसोर्सिंग कंपनी में सोमवार को एक दर्दनाक हादसे में 54 वर्षीय कर्मी की मौत हो गई। मृतक की पहचान गोधरा 4 नंबर निवासी रामस्वरूप चौहान के रूप में हुई है। वह पिछले चार वर्षों से सिंह नेचुरल आउटसोर्सिंग कंपनी में सुपरवाइजर (स्विफ्ट इंचार्ज) के पद पर कार्यरत थे। घटना ड्यूटी के दौरान हुई, जिससे कार्यस्थल पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सहकर्मियों में शोक की लहर दौड़ गई। 12 चक्का वाल्वो टिपर की चपेट में आए मिली जानकारी के अनुसार, रामस्वरूप चौहान काम के दौरान एक 12 चक्का वाल्वो टिपर की चपेट में आ गए। बताया जा रहा है कि भारी वाहन ने उन्हें जोरदार टक्कर मारी, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के तुरंत बाद मौके पर मौजूद लोगों ने उन्हें आनन-फानन में एक निजी अस्पताल पहुंचाया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एसएनएमएमसीएच) रेफर कर दिया गया। अस्पताल में तोड़ा दम, परिजनों ने लगाए आरोप एसएनएमएमसीएच में चिकित्सकों ने जांच के बाद रामस्वरूप चौहान को मृत घोषित कर दिया। घटना की सूचना मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया। मृतक के परिजन गुड्डू चौहान ने बताया कि उन्हें फोन के माध्यम से हादसे की जानकारी मिली थी। उन्होंने आरोप लगाया कि भारी वाहन उनके कमर के पास चढ़ गया था, जिससे उनकी मौके पर ही गंभीर स्थिति हो गई और बाद में उनकी मौत हो गई। मृतक के बेटे आदर्श कुमार ने कहा कि उनके पिता सुबह सामान्य रूप से ड्यूटी के लिए घर से निकले थे, लेकिन कुछ ही देर बाद यह दुखद खबर आ गई। मुआवजे को लेकर उठे सवाल घटना के बाद परिजनों ने कंपनी प्रबंधन पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि अब तक मुआवजे को लेकर कंपनी की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई है। इधर, कंपनी के इंचार्ज श्रीराम पांडे ने बताया कि घटना की विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है और जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। Source link

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चाईबासा पुलिस विभाग में ‘बड़ा खेल’, 8 साल तक सरकारी खातों में...

Last Updated:April 27, 2026, 13:46 IST Chaibasa Treasury Fraud : सिस्टम के भीतर बैठकर सिस्टम को ही चूना लगाने का एक सनसनीखेज मामला झारखंड के चाईबासा में सामने आया है. यहां एक सिपाही ने पुलिस विभाग की ‘लेखा शाखा’ को ही अपना ‘एटीएम’ बना लिया और करीब 8 सालों तक फाइलों और कंप्यूटर डेटा के साथ ऐसा खतरनाक खेल खेला कि सरकारी खजाने से 26 लाख रुपये गायब हो गए. इस मामले में अब एफआईआर दर्ज करवाई गई है साथ ही हाई लेवल जांच टीम गठित की गई है. चाईबासा ट्रेजरी घोटाला केस में सिपाही देवनारायण मुर्मू के खिलाफ एफआईआर दर्ज पश्चिमी सिंहभूम. झारखंड के चाईबासा में खाकी को शर्मसार करने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है.  दरअसल, जिस खाकी पर सुरक्षा की जिम्मेदारी थी, उसी के एक सिपाही ने भरोसे को कत्ल कर दिया. अब जब चाईबासा कोषागार (Chaibasa Treasury) के इस महाघोटाले की परतें खुली हैं, तो महकमे से लेकर प्रशासन तक हड़कंप मच गया है. यहां जिला पुलिस विभाग के खातों से लाखों रुपये की अवैध निकासी की गई है. चाईबासा ट्रेजरी से हुई इस धोखाधड़ी का मास्टरमाइंड कोई बाहरी अपराधी नहीं, बल्कि पुलिस विभाग का ही एक सिपाही निकला है. आरोपी सिपाही ने कंप्यूटर डेटा के साथ छेड़छाड़ कर और अभिलेखों में जालसाजी कर सरकारी खजाने को चूना लगाया है. आरोप के अनुसार, एसपी कार्यालय के लेखा शाखा में पदस्थापित रहने के दौरान सितम्बर 2017 से मई 2025 के बीच सरकारी अभिलेखों में जालसाजी कर और कम्प्यूटर के डाटा में छेड़छाड़ कर अन्य खाताधारकों की मिलीभगत से यह अवैध निकासी की गई. अब इस मामले में आरोपी और अन्य खाताधारकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. बता दें कि इस मामले में जिला प्रशासन द्वारा गठित उच्च स्तरीय टीम पूरे मामले की जांच कर रही है. ट्रेजरी अफसर ने दर्ज कराई FIR इस सनसनीखेज मामले का खुलासा होने के बाद चाईबासा कोषागार के पदाधिकारी समित कुमार ने मुफ्फसिल थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई है. पुलिस ने मुख्य आरोपी सिपाही देवनारायण मुर्मू और उसके साथ मिलीभगत करने वाले अन्य खाताधारकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है. आरोप है कि इन लोगों ने मिलकर कुल 26 लाख 21 हजार 717 रुपये की सरकारी राशि का गबन किया है. 8 सालों तक चलता रहा फर्जीवाड़े का खेल मामले की जांच में यह चौंकाने वाली बात सामने आई है कि यह फर्जीवाड़ा कोई एक-दो दिन का काम नहीं था. आरोपी सिपाही देवनारायण मुर्मू जब एसपी कार्यालय की लेखा शाखा में तैनात था, तब उसने इस घोटाले की नींव रखी थी. सितंबर 2017 से लेकर मई 2025 तक, यानी लगभग 8 सालों तक वह लगातार कंप्यूटर डेटा में बदलाव कर अवैध रूप से पैसे निकालता रहा. उसने बेहद शातिराना तरीके से सरकारी दस्तावेजों में हेराफेरी की ताकि किसी को शक न हो. जांच के लिए बनी उच्च स्तरीय टीम जिला प्रशासन ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए एक उच्च स्तरीय जांच टीम का गठन किया है. यह टीम इस बात की पड़ताल कर रही है कि 8 साल तक इतना बड़ा गबन कैसे चलता रहा और विभाग के बड़े अधिकारियों को इसकी भनक क्यों नहीं लगी. जांच टीम यह भी पता लगा रही है कि इस खेल में सिपाही के साथ और कौन-कौन से कर्मचारी या बाहरी लोग शामिल थे. आरोपी सिपाही की वर्तमान स्थिति मुख्य आरोपी देवनारायण मुर्मू वर्तमान में पश्चिमी सिंहभूम जिले के ही सेरेंगदा थाना में पदस्थापित है. एसपी कार्यालय से हटने के बाद भी उसका किया गया घोटाला फाइलों में दबा रहा, जो अब ऑडिट और ट्रेजरी मिलान के दौरान पकड़ में आया है. मुफ्फसिल थाना पुलिस अब आरोपी सिपाही की गिरफ्तारी और गबन की गई राशि की बरामदगी के लिए कानूनी कार्रवाई में जुट गई है. About the Author Vijay jha पत्रकारिता क्षेत्र में 22 वर्षों से कार्यरत. प्रिंट, इलेट्रॉनिक एवं डिजिटल मीडिया में महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन. नेटवर्क 18, ईटीवी, मौर्य टीवी, फोकस टीवी, न्यूज वर्ल्ड इंडिया, हमार टीवी, ब्लूक्राफ्ट डिजिट…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Chaibasa,Pashchimi Singhbhum,Jharkhand First Published : April 27, 2026, 13:46 IST Source link

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