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सिद्धारमैया ने बढ़ाया नाम, विधायकों ने लगाई मुहर… कर्नाटक में DK युग...

होमताजा खबरदेश सिद्धारमैया ने बढ़ाया नाम, विधायकों ने लगाई मुहर… कर्नाटक में DK युग का आगाज Last Updated:May 30, 2026, 19:15 IST कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया के बीच प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार को कांग्रेस विधायक दल का नेता चुन लिया गया. उनके नाम का प्रस्ताव मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने रखा, जिसका समर्थन वरिष्ठ कांग्रेस नेता जी. परमेश्वर ने किया. सीएलपी की बैठक में शिवकुमार के नाम पर मुहर लगने के साथ ही उनके कर्नाटक के अगले मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया है. शिवकुमार 3 जून को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे. ख़बरें फटाफट डीके शिवकुमार तीन जून को कर्नाटक के सीएम पद की शपथ लेंगे. (फाइल फोटो) बेंगलुरु. कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डी के शिवकुमार को शनिवार को पार्टी विधायक दल का नेता चुन लिया गया, जिससे उनके राज्य के अगले मुख्यमंत्री बनने का मार्ग प्रशस्त हो गया. यह जानकारी पार्टी सूत्रों ने दी. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं निवर्तमान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने शनिवार को विधान सौध में हुई बैठक के दौरान विधायक दल के नये नेता के रूप में शिवकुमार के नाम का प्रस्ताव रखा. यह बैठक कांग्रेस महासचिव (संगठन) के. सी. वेणुगोपाल और पार्टी के कर्नाटक मामलों के प्रभारी महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला की मौजूदगी में हुई. सूत्रों ने बताया कि हालांकि, नये नेता के चयन के लिए विधायक दल की बैठक के दौरान कुछ समय के लिए विराम लिया गया और सिद्धारमैया, वेणुगोपाल और सुरजेवाला सहित शीर्ष नेता विचार-विमर्श के लिए अलग कमरे में चले गए. कांग्रेस के महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने कहा, “कांग्रेस हाई कमांड ने डीके शिवकुमार का नाम कांग्रेस विधायक दल के नेता के रूप में सुझाया. सिद्धारमैया ने डीके शिवकुमार को विधायक दल के नए नेता के रूप में प्रस्तावित किया और डॉ जी परमेश्वर ने इसका समर्थन किया. इसके बाद विधायक दल ने सर्वसम्मति से सिद्धारमैया द्वारा प्रस्तावित नाम को स्वीकार कर लिया. मुझे यह घोषणा करते हुए गर्व हो रहा है कि विधायक दल ने सर्वसम्मति से डीके शिवकुमार को विधायक दल का नेता चुना है.” बैठक के दौरान कांग्रेस विधायक दल ने सिद्धारमैया के प्रति विशेष आभार भी व्यक्त किया. पार्टी ने कहा कि कर्नाटक की जनता और कांग्रेस कार्यकर्ता मुख्यमंत्री के रूप में वर्ष 2013 से 2018 और 2023 से 2026 तक उनके कार्यकाल को हमेशा गर्व और सम्मान के साथ याद रखेंगे, साथ ही विपक्ष के नेता के रूप में उनकी सेवाओं को भी सराहा जाएगा. कांग्रेस विधायक दल ने अपने प्रस्ताव में कहा कि सामाजिक न्याय के प्रति सिद्धारमैया की प्रतिबद्धता, उनका प्रशासनिक नेतृत्व, कांग्रेस की विचारधारा के प्रति समर्पण और पार्टी नेतृत्व में उनकी अटूट आस्था प्रत्येक कांग्रेस कार्यकर्ता के लिए प्रेरणा का स्रोत है. शिवकुमार का नये मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण समारोह तीन जून को यहां लोक भवन के ग्लास हाउस में होगा. सिद्धारमैया सरकार में शिवकुमार ने उपमुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया. सिद्धारमैया ने बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था और राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने अगले दिन उनका इस्तीफा स्वीकार करके मंत्रिपरिषद भंग कर दी. About the Author Rakesh Ranjan Kumar राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Bangalore,Karnataka Source link

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OPINION: कंटेंट क्रिएटर्स की वो चमकती दुनिया, जिसे हर कोई चाहता है…...

होमताजा खबरदेश OPINION: कंटेंट क्रिएटर्स की वो चमकती दुनिया, जिसे हर कोई चाहता है… Last Updated:May 30, 2026, 18:00 IST Content Creators: भारत का क्रिएटर इकोनॉमी इन दिनों मुश्किल दौर से गुजर रहा है. लाखों युवा कंटेंट क्रिएटर बनने का सपना देख रहे हैं. लेकिन सच्चाई थोड़ी अलग है. AI बैन, टैक्स का दबाव और कम कमाई ने इस इंडस्ट्री को हिला दिया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक 2.5 मिलियन क्रिएटर्स में से बहुत कम लोग ही अच्छी इनकम कमा पा रहे हैं. कई लोगों के अकाउंट बिना चेतावनी बंद हो रहे हैं. वहीं ब्रांड डील्स भी सभी को नहीं मिल रही. धीरे-धीरे यह सपना अब आसान नहीं लग रहा है. फोटो- कंटेट क्रियेटर AI इमेज पहले जब बच्चों से पूछा जाता था कि बड़े होकर क्या बनना है, तो जवाब होता था डॉक्टर, इंजीनियर या टीचर. ये एक तय और सुरक्षित रास्ता माना जाता था. लेकिन आज हालात बदल चुके हैं. अब यही सवाल पूछो, तो जवाब मिलता है ‘यूट्यूबर बनना है… कंटेंट क्रिएटर बनना है.’ हर दूसरा बच्चा आज कैमरे के सामने अपनी दुनिया बना रहा है. हर कोई वायरल होने का सपना देख रहा है. लेकिन असली सवाल यही हैक्या यह सपना उतना आसान है जितना दिखता है? या इसके पीछे एक ऐसी सच्चाई छिपी है, जो कोई खुलकर नहीं बताता? क्रिएटर्स की भीड़, कमाई की कमी आज देश में करीब 2.5 मिलियन कंटेंट क्रिएटर्स हैं. लेकिन सच्चाई यह है कि इनमें से 10% से भी कम लोग ही स्थिर या अच्छी कमाई कर पा रहे हैं. बाकी लोग लगातार वीडियो बना रहे हैं, ऑडियंस भी बढ़ा रहे हैं, लेकिन कमाई अभी भी कमजोर है. रिपोर्ट क्या कहती है? यूट्यूब चैनल @MobileAppDaily के अनुसार, भारत की क्रिएटर इकोनॉमी तेजी से बढ़ जरूर रही है, लेकिन इसके पीछे एक कड़वी सच्चाई भी छिपी है कि ज्यादातर क्रिएटर्स स्थिर इनकम नहीं कमा पा रहे हैं और सिर्फ एक छोटे हिस्से को ही इसका असली फायदा मिल रहा है. ये हैं 4 बड़े कारण जो भारत की क्रिएटर इकोनॉमी को हिला रहे सबसे बड़ा बदलाव सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की पॉलिसी में देखने को मिल रहा है. Meta और Instagram जैसे प्लेटफॉर्म्स ने AI मॉडरेशन को काफी सख्त कर दिया है. इसके चलते कई क्रिएटर्स के अकाउंट बिना किसी चेतावनी के बंद हो रहे हैं. और कई बार वजह भी साफ नहीं बताई जाती.क्रिएटर्स का कहना है कि सालों की मेहनत, फॉलोअर्स और कंटेंट एक झटके में खत्म हो जाता है और अपील सिस्टम भी इतना आसान नहीं है, कई बार जवाब तक नहीं मिलता. दूसरी बड़ी चुनौती टैक्स सिस्टम है. सरकार ने क्रिएटर्स को प्रोफेशनल पहचान तो दी है. लेकिन GST, TDS और अन्य टैक्स नियमों ने कमाई पर दबाव बढ़ा दिया है. 20 लाख से ज्यादा इनकम पर GST लगता है. ब्रांड डील्स पर TDS कटता है और गिफ्टेड प्रोडक्ट्स भी टैक्स के दायरे में आ गए हैं. इस वजह से नेट इनकम काफी कम हो जाती है. ब्रांड डील्स को लेकर भी स्थिति आसान नहीं है. बड़े क्रिएटर्स को तो अच्छे ऑफर मिल जाते हैं. लेकिन छोटे और मिड-लेवल क्रिएटर्स को अक्सर ब्रांड्स से जवाब ही नहीं मिलता.असल में यह इंडस्ट्री बहुत अनस्ट्रक्चर्ड है. कुछ लोग करोड़ों कमा रहे हैं. लेकिन बहुत बड़ी संख्या में लोग बहुत कम कमाई कर रहे हैं या पार्ट-टाइम जॉब कर रहे हैं.कई क्रिएटर्स तो दिन में कॉरपोरेट जॉब करते हैं और रात में कंटेंट बनाते हैं. सबसे बड़ी कमी यहां सेफ्टी नेट की है. न पेंशन है, न इंश्योरेंस, न कोई वेलफेयर सिस्टम. अगर कोई कुछ समय काम न करे, तो उसकी इनकम तुरंत रुक जाती है.सोशल तौर पर भी यह करियर अभी पूरी तरह स्वीकार नहीं किया गया है.कई परिवार आज भी इसे स्थिर करियर नहीं मानते. टॉप 1% की अलग दुनिया हालांकि दूसरी तरफ टॉप 1% क्रिएटर्स तेजी से आगे बढ़ रहे हैं. वे ब्रांड्स, OTT और बड़े बिजनेस तक पहुंच बना रहे हैं. लेकिन असली दबाव मिड और लो-टियर क्रिएटर्स पर है. जो इस पूरे सिस्टम को चलाते हैं. कुल मिलाकर तस्वीर मिली-जुली है. कहीं बड़ा मौका है, तो कहीं बड़ा रिस्क भी. और यही सबसे बड़ा सवाल है क्या भारत की क्रिएटर इकोनॉमी आगे और मजबूत होगी, या धीरे-धीरे कमजोर पड़ती जाएगी? About the Author Harshita Patel Harshita Patel is working with News18 Hindi (hindi.news18.com) Central Desk since 2025. She has a good understanding of national, international, and local news, along with current affairs, gold rates, and resea…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Delhi Cantonment,New Delhi,Delhi Source link

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Abhishek Banerjee attack | cm suvendu adhikari | tmc vs bjp in...

Last Updated:May 30, 2026, 17:29 IST Abhishek Banerjee Attack : पश्चिम बंगाल के सोनारपुर में चुनाव बाद हुई हिंसा के पीड़ित परिवारों से मिलने पहुंचे टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी पर स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा. उग्र भीड़ ने न केवल अभिषेक बनर्जी पर हमला किया और अंडे फेंके, बल्कि उनके कपड़े भी फट गए. हालात इस कदर बेकाबू हो गए कि सुरक्षा के लिए उन्हें हेलमेट पहनना पड़ा. ख़बरें फटाफट ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी पर हमला. कोलकाता. पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के शीर्ष नेतृत्व की मुश्किलें और राजनीतिक जमीन खिसकने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. एक समय जिस राज्य में ममता बनर्जी के भतीजे और टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के ‘शांतनिकेतन’ आवास की फोटो खींचना भी कानूनन जुर्म माना जाता था, आज उसी बंगाल की धरती पर उनके साथ एक अभूतपूर्व और चौंकाने वाली घटना घटी है. दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर में चुनाव बाद हुई हिंसा (Post-Poll Violence) के पीड़ित परिवारों से मिलने पहुंचे सांसद अभिषेक बनर्जी को स्थानीय निवासियों और उग्र भीड़ के भारी आक्रोश का सामना करना पड़ा. देखते ही देखते हालात इस कदर बेकाबू हो गए कि स्थानीय लोगों ने टीएमसी सांसद पर हमला कर दिया, जिसके बाद वहां भारी भगदड़ मच गई. प्रत्यक्षदर्शियों और ग्राउंड से मिल रही रिपोर्टों के मुताबिक, जैसे ही अभिषेक बनर्जी का काफिला सोनारपुर के प्रभावित इलाके में पहुंचा, वहां पहले से ही आक्रोशित बैठे स्थानीय लोगों और महिलाओं ने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया. भीड़ ने टीएमसी नेतृत्व के खिलाफ और पिछले शासनकाल के दौरान हुए कथित घोटालों को लेकर ‘चोर-चोर’ के नारे लगाने शुरू कर दिए. अंडे फेंके, फटे कपड़े और गूंजे ‘चोर-चोर’ के नारे विरोध प्रदर्शन ने देखते ही देखते उग्र रूप अख्तियार कर लिया. भीड़ में मौजूद कुछ लोगों ने अभिषेक बनर्जी को निशाना बनाते हुए ताबड़तोड़ अंडे फेंकने शुरू कर दिए. सुरक्षा घेरा तोड़कर कुछ प्रदर्शनकारी उनके बिल्कुल करीब पहुंच गए, जिससे हुई धक्का-मुक्की में टीएमसी सांसद के कपड़े तक फट गए. स्थानीय लोगों का आरोप था कि जब वे सालों तक हिंसा और सिंडिकेट राज से पीड़ित थे, तब कोई सुध लेने नहीं आया और अब राजनीतिक जमीन खिसकने के बाद यहां केवल राजनीति चमकाने के लिए आया जा रहा है. #WATCH | Sonarpur, West Bengal: TMC MP Abhishek Banerjee was beaten up by locals during his visit to Sonarpur to meet the post-poll victims’ families pic.twitter.com/zkXxLJydqe Source link

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कराची का मुन्ना, पाकिस्तानी ग्रेनेड और मुंबई से दिल्ली तक रेकी… ISI...

होमताजा खबरदेश पाकिस्तानी ग्रेनेड, मुंबई से दिल्ली तक रेकी… ISI टेरर केस में 5 बड़े खुलासे Last Updated:May 30, 2026, 16:27 IST ISI terror module busted: दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक बड़े आतंकी और अंडरवर्ल्ड नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है. स्पेशल सीपी अनिल शुक्ला और एडिशनल सीपी प्रमोद कुशवाह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में खुलासा किया कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम से जुड़ा यह नेटवर्क दिल्ली और मुंबई में बड़े आतंकी हमलों की साजिश रच रहा था. आतंकियों ने मुंबई के दादर ब्रिज पार्क समेत दिल्ली के कई अहम ठिकानों की रेकी कर ली थी. आरोपियों के पास से पाकिस्तान ऑर्डिनेंस फैक्ट्री में बने 4 हैंड ग्रेनेड मिले हैं, जिन्हें एनएसजी ने नष्ट किया. इस ऑपरेशन को कराची में बैठा मुन्ना झिंगाड़ा ऑपरेट कर रहा था. गिरफ्तार आरोपी. Terror Module Busted: दिल्ली पुलिस ने एक बहुत बड़ी आतंकी साजिश को नाकाम कर दिया है. स्पेशल सीपी (स्पेशल सेल) अनिल शुक्ला और एडिशनल सीपी प्रमोद कुशवाह ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसके बारे में खुलासा किया है. अधिकारियों के मुताबिक, पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम देश को दहलाने की साजिश रच रहा था. आतंकी मॉड्यूल के नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. आतंकियों के निशाने पर मुंबई और दिल्ली थे. प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि आतंकियों ने दिल्ली और मुंबई के कई अहम और संवेदनशील ठिकानों की बाकायदा रेकी कर ली थी. मुंबई में दादर ब्रिज पार्क जैसी व्यस्त जगहों पर रेकी की गई थी. इनका मुख्य मकसद दिल्ली-मुंबई में बड़े धमाके करना और देश की पुलिस फोर्स के जवानों को सीधे तौर पर अपना निशाना बनाना था. दाऊद का गुर्गा मुन्ना झिंगाड़ा था मास्टरमाइंड इस खौफनाक आतंकी साजिश का पूरा खाका पाकिस्तान से तैयार किया जा रहा था. इस ऑपरेशन का हेड अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन पर जानलेवा हमला करने वाला कुख्यात शूटर मुन्ना झिंगाड़ा था. वह कराची में बैठकर आईएसआई (ISI) के इशारे पर इस पूरे नेटवर्क को कंट्रोल कर रहा था. दिल्ली और मुंबई के अहम ठिकानों की हुई थी रेकी पूछताछ में यह चौंकाने वाली बात सामने आई है कि आतंकियों ने देश की आर्थिक राजधानी मुंबई और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली को दहलाने का पूरा प्लान बना लिया था. इसके लिए उन्होंने बाकायदा मुंबई के दादर ब्रिज पार्क समेत दिल्ली के कई अहम और भीड़भाड़ वाले ठिकानों की रेकी (Recce) भी कर ली थी. पाकिस्तानी ऑर्डिनेंस फैक्ट्री (POF) के 4 ग्रेनेड बरामद आतंकियों के पास से भारी मात्रा में विदेशी हथियार और विस्फोटक बरामद हुए हैं. सबसे बड़ा खुलासा यह है कि इनके पास से 4 ऐसे हैंड ग्रेनेड मिले हैं, जिन पर ‘पाकिस्तान ऑर्डिनेंस फैक्ट्री’ की मुहर है. इससे पाकिस्तान की सीधी संलिप्तता साबित होती है. इन ग्रेनेड्स को NSG ने महरौली इलाके में ले जाकर नष्ट किया. पुलिस फोर्स के जवानों पर था सीधा टारगेट आम जनता और अहम ठिकानों के अलावा, इन आतंकियों का एक बड़ा और खतरनाक मकसद देश की पुलिस फोर्स पर हमला करना था. स्पेशल सेल की जांच में साफ हुआ है कि ये आतंकी जानबूझकर पुलिस और सुरक्षाबलों के जवानों को निशाना बनाने की फिराक में थे. ISI, अंडरवर्ल्ड और नेपाली नेटवर्क का गठजोड़ जांच में सामने आया है कि यह कोई आम आतंकी मॉड्यूल नहीं था, बल्कि इसमें तीन अलग-अलग सिंडिकेट एक साथ काम कर रहे थे. इसमें पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) रणनीतिक मास्टरमाइंड थी, दाऊद इब्राहिम का अंडरवर्ल्ड नेटवर्क इसे जमीन पर उतार रहा था, और लॉजिस्टिक सपोर्ट व घुसपैठ के लिए एक ‘नेपाली नेटवर्क’ का इस्तेमाल किया जा रहा था. About the Author Deep Raj DeepakSub-Editor Deep Raj Deepak working with News18 Hindi (hindi.news18.com/) Central Desk since 2022. He has strong command over national and international political news, current affairs and science and research-based news. …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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‘हिम्मत है तो गिरफ्तार करो…’ अभिषेक बनर्जी के घर अचानक पहुंची CID,...

Abhishek Banerjee News: पश्चिम बंगाल में जांच एजेंसियों और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में रस्साकशी लगातार जारी है. शनिवार को सीआईडी की एक टीम ने टीएमसी नेता और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के दरवाजे पर कानूनी नोटिस लेकर पहुंची. विधानसभा फर्जी हस्ताक्षर मामले की जांच के सिलसिले में उनको कानूनी नोटिस थमाया गया है. हालांकि, इस नोटिस को देने की प्रक्रिया के दौरान कोलकाता में जमकर सियासी और पुलिसिया ड्रामा देखने को मिला. सूत्रों के मुताबिक, गुरुवार दोपहर विधानसभा फर्जी हस्ताक्षर मामले की जांच के सिलसिले में सीआईडी और हेयर स्ट्रीट पुलिस स्टेशन की एक संयुक्त टीम अभिषेक बनर्जी को कानूनी नोटिस देने के लिए 188 ए, हरीश मुखर्जी रोड स्थित उनके आवास शांतिनिकेतन पहुंची थी. अधिकारियों का मुख्य उद्देश्य टीएमसी नेता को यह लीगल नोटिस सौंपना था. हालांकि, उस वक्त अभिषेक बनर्जी हरीश मुखर्जी रोड वाले इस घर पर मौजूद नहीं थे, जिसके कारण टीम को इंतजार करना पड़ा. कालीघाट पहुंची सीआईडी इस घटनाक्रम के कुछ ही देर बाद अभिषेक बनर्जी अपने कालीघाट रोड स्थित आवास पर मीडिया के सामने आए. उन्होंने सीआईडी की कार्रवाई पर तंज कसते हुए स्पष्ट किया, ‘मैं उस घर (शांतिनिकेतन) में नहीं रहता हूं. अगर किसी को मुझसे मिलना है या कोई नोटिस देना है, तो उन्हें मेरे इसी घर (कालीघाट) पर आना होगा.’ अभिषेक बनर्जी के इस बयान के चंद मिनटों के भीतर ही, शांतिनिकेतन के बाहर खड़ी सीआईडी के अधिकारियों की टीम हरकत में आई. वहां से निकलकर सीधे कालीघाट रोड स्थित अभिषेक बनर्जी के आवास के सामने पहुंच गई. सीआईडी के अधिकारी अभिषेक बनर्जी के नीचे आने का इंतजार करने लगे. जब अभिषेक बनर्जी नीचे आए, तो सीआईडी के अधिकारियों ने सीधे उनके हाथों में कानूनी नोटिस सौंप दिया. मैं 7 साल से वहां नहीं रहता नोटिस लेने के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए अभिषेक बनर्जी ने जांच अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए. उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, ‘जो अधिकारी इस मामले की जांच कर रहे हैं, उन्हें यह तक नहीं पता कि मैं पिछले सात सालों से उस घर में नहीं रहता हूं. हो सकता है कि उनके पास गलत जानकारी हो. मैं भी समझता हूं कि उन्हें अपनी नौकरी करनी है. मैंने अभी तक नोटिस नहीं पढ़ा है.’ उन्होंने आगे कहा, ‘नोटिस पढ़ने के बाद मैं अपने वकील से इस पर चर्चा करूंगा. इसके बाद, अगर मुझे लगेगा और अगर मुझे पूछताछ के लिए उपस्थित होने के लिए कहा जाएगा, तो मैं निश्चित रूप से जाऊंगा. मैं जरूरी कानूनी कदम भी उठाऊंगा, यह मेरा अधिकार है.’ हिम्मत है तो गिरफ्तार करें केंद्र और राज्य की एजेंसियों पर भड़कते हुए टीएमसी सांसद ने खुली चुनौती दे डाली. अभिषेक बनर्जी ने कहा, ‘अब तक केवल ईडी और सीबीआई पीछे पड़ी थीं, लेकिन अब इसमें पुलिस और नगर पालिका भी जुड़ गए हैं. लेकिन हम उस मिट्टी के नहीं बने हैं जो डर जाएं. अगर उनमें हिम्मत है और क्षमता है, तो वे मुझे गिरफ्तार करके ले जाएं. मैं कहीं भाग नहीं रहा हूं.’ सीआईडी ने अभिषेक बनर्जी को किस मामले में कानूनी नोटिस थमाया है? सीआईडी ने अभिषेक बनर्जी को पश्चिम बंगाल ‘विधानसभा फर्जी हस्ताक्षर मामले’ की चल रही जांच के सिलसिले में कानूनी नोटिस थमाया है. सीआईडी की टीम नोटिस देने के लिए सबसे पहले अभिषेक बनर्जी के किस आवास पर पहुंची थी? सीआईडी की टीम सबसे पहले अभिषेक बनर्जी को नोटिस देने के लिए 188 ए, हरीश मुखर्जी रोड स्थित उनके शांतिनिकेतन वाले आवास पर पहुंची थी, जहां वे नहीं मिले. अभिषेक बनर्जी को अंततः सीआईडी द्वारा कानूनी नोटिस कहां सौंपा गया? शांतिनिकेतन में न मिलने पर, सीआईडी की टीम ने अभिषेक बनर्जी को उनके कालीघाट रोड स्थित आवास पर पहुंचकर सीधे उनके हाथों में नोटिस सौंपा. नोटिस मिलने के बाद जांच एजेंसियों को लेकर अभिषेक बनर्जी ने क्या तीखी प्रतिक्रिया दी? अभिषेक बनर्जी ने तंज कसते हुए कहा कि अधिकारियों को यही नहीं पता कि वह 7 साल से पुराने घर में नहीं रहते. साथ ही उन्होंने चुनौती दी कि अगर एजेंसियों में हिम्मत है तो वे उन्हें गिरफ्तार करें, वह कहीं भागने वाले नहीं हैं. Source link

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कोर्ट कचहरी या पुलिस फोर्स? राबड़ी देवी ने नहीं छोड़ा 10 सर्कुलर...

Last Updated:May 30, 2026, 14:27 IST Rabri Devi 10 circular road bungalow controversy: सर्कुलर रोड आवास खाली करने के आदेश को लेकर शुरू हुआ विवाद अब बिहार की राजनीति का बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है. पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी द्वारा सरकारी आवास खाली करने से इनकार और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को खुली चुनौती दिए जाने के बाद सवाल उठ रहा है कि यदि यह टकराव और बढ़ता है तो सरकार के पास कौन-कौन से कानूनी और राजनीतिक विकल्प मौजूद हैं. 10 सर्कुलर रोड पर सियासी संग्राम, राबड़ी के रुख के बाद सम्राट सरकार अगला कदम क्या उठाएगी? पटना. मुख्यमंत्री राबड़ी देवी द्वारा पटना स्थित ’10 सर्कुलर रोड’ आवास को किसी भी कीमत पर खाली न करने और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को ‘फोर्स बुलाने’ की खुली चुनौती देने के बाद बिहार का बंगला विवाद अब एक बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है. यह मामला अब महज एक प्रशासनिक नोटिस तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें गहरे कानूनी पेंच और बड़े राजनीतिक नफा-नुकसान जुड़ गए हैं. यदि राबड़ी देवी अपने स्टैंड पर कायम रहती हैं और स्वेच्छा से बंगला खाली नहीं करती हैं, तो सम्राट चौधरी सरकार के पास कानून की किताब से लेकर राजनीतिक कूटनीति तक कई रास्ते मौजूद हैं. आइए समझते हैं कि इस हाई-प्रोफाइल विवाद में सरकार के पास क्या कानूनी और राजनीतिक विकल्प हो सकते हैं. राज्य सरकार के नियमों के अनुसार, सत्ता परिवर्तन या नए आवंटन की स्थिति में सरकारी आवास खाली कराना एक नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया मानी जाती है. यदि कोई आवंटी निर्धारित अवधि के बाद भी आवास नहीं छोड़ता है तो संबंधित विभाग उसे अनधिकृत कब्जाधारी मानते हुए कानूनी प्रक्रिया शुरू कर सकता है. आमतौर पर पहले कारण बताओ नोटिस जारी किया जाता है, फिर जवाब संतोषजनक नहीं होने पर बेदखली की कार्रवाई और जुर्माने जैसी प्रक्रिया अपनाई जा सकती है. हालांकि 10 सर्कुलर रोड का मामला सामान्य प्रशासनिक कार्रवाई से कहीं आगे बढ़ चुका है, क्योंकि इसमें बिहार की दो प्रमुख राजनीतिक धाराएं आमने-सामने दिखाई दे रही हैं. कानूनी विकल्प: ‘बिहार सरकारी परिसर (बेदखली) अधिनियम’ का इस्तेमाल प्रशासनिक नियमों के तहत सरकार के पास सबसे अचूक हथियार कानून का होता है. अगर कोई अलॉटी तय समय सीमा के बाद भी सरकारी बंगला खाली नहीं करता तो भवन निर्माण विभाग ‘बिहार पब्लिक प्रेमाइसेस (इविक्शन) एक्ट’ (Bihar Public Premises Eviction Act) के तहत कार्रवाई शुरू कर सकता है. कारण बताओ नोटिस (Show Cause): इसके तहत विभाग की ओर से अनधिकृत कब्जेधारी (Unauthorized Occupant) को एक अंतिम नोटिस जारी कर पूछा जाता है कि उन्हें बेदखल क्यों न किया जाए. बलपूर्वक बेदखली और जुर्माना: यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है, तो सक्षम प्राधिकारी (Competent Authority) जिला प्रशासन और मजिस्ट्रेट की मदद से परिसर को बलपूर्वक खाली कराने का आदेश जारी कर सकता है. साथ ही, अनधिकृत रूप से रहने की अवधि का भारी बाजार मूल्य के हिसाब से जुर्माना (Damage Rent) भी वसूला जा सकता है. राजनीतिक विकल्प: ‘वेट एंड वॉच’ और सहानुभूति कार्ड को बेकार करना जानकार कहते हैं कि कानूनी रास्ते के अलावा सम्राट चौधरी सरकार को इसके राजनीतिक नफा-नुकसान को भी तौलना होगा. राजनीति के चश्मे से सरकार के पास दो रणनीतिक विकल्प हैं. सहानुभूति कार्ड को रोकना (कूटनीतिक रास्ता): आरजेडी इस समय इस मुद्दे को ‘लालू परिवार के उत्पीड़न’ और ‘विपक्षी नेताओं का अपमान’ के तौर पर भुनाने का प्रयास करेगी. अगर सरकार तुरंत पुलिस फोर्स भेजती है, तो राबड़ी देवी को जनता के बीच ‘सहानुभूति’ मिल सकती है. इससे बचने के लिए सरकार बातचीत का रास्ता चुन सकती है या किसी अन्य विकल्प की पेशकश कर सकती है. कानून का इकबाल बुलंद करना (आक्रामक रास्ता): मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की छवि एक कड़े और बेबाक फैसले लेने वाले नेता की है. अगर सरकार इस मामले में ढील देती है तो विपक्ष इसे सरकार की कमजोरी के रूप में प्रचारित कर सकता है. ऐसे में सरकार कोर्ट की शरण लेकर या कानूनी प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी रखकर यह संदेश दे सकती है कि ‘कानून के सामने कोई भी रसूखदार परिवार विशेष नहीं है’. आगे क्या हो सकता है? राजनीति और कानूनी पहलू के जानकार बताते हैं आरजेडी इस मुद्दे पर कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकती है और इस बेदखली के आदेश पर ‘स्टे ऑर्डर’ लेने का प्रयास कर सकती है. यदि कोर्ट से स्टे मिल जाता है तो राबड़ी देवी को कुछ समय की मोहलत मिल जाएगी, अन्यथा सम्राट सरकार को देर-सबेर कानून के तहत कड़े प्रशासनिक कदम उठाने ही होंगे. बहरहाल, आने वाले दिनों में इस विवाद की दिशा काफी हद तक कानूनी प्रक्रिया और राजनीतिक रणनीति पर निर्भर करेगी. About the Author Vijay jha पत्रकारिता क्षेत्र में 22 वर्षों से कार्यरत. प्रिंट, इलेट्रॉनिक एवं डिजिटल मीडिया में महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन. नेटवर्क 18, ईटीवी, मौर्य टीवी, फोकस टीवी, न्यूज वर्ल्ड इंडिया, हमार टीवी, ब्लूक्राफ्ट डिजिट…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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उज्जैन में गहराया जल संकट, पानी की एक-एक बूंद को तरसे 400...

Last Updated:May 30, 2026, 13:24 IST उज्जैन के विक्रमनगर स्थित गांधीनगर और आसपास की कॉलोनियों में जल संकट ने लोगों का जीवन मुश्किल कर दिया है. करीब 400 परिवार वर्षों से नियमित जल आपूर्ति का इंतजार कर रहे हैं. टैंकरों पर निर्भर लोगों को दो-दो दिन पानी नहीं मिलता. टैंकर आते ही पानी भरने की होड़ मच जाती है. महिलाओं को काम छोड़कर घंटों पानी का इंतजार करना पड़ रहा है. उज्जैन के विक्रमनगर क्षेत्र की गांधीनगर और आसपास की कॉलोनियों में रहने वाले सैकड़ों परिवार इन दिनों पानी की भारी किल्लत से जूझ रहे हैं.करीब 400 परिवारों की सुबह किसी काम से नहीं, बल्कि पानी की तलाश से शुरू होती है. वर्षों से लोग नियमित जलापूर्ति और नल कनेक्शन की मांग कर रहे हैं, लेकिन समस्या अब भी जस की तस बनी हुई है. भीषण गर्मी ने हालात और मुश्किल कर दिए हैं.कई घरों में पानी की एक-एक बूंद बचाकर इस्तेमाल की जा रही है. स्थानीय रहवासियों का कहना है कि उनकी दिनचर्या अब पानी के इंतजार के इर्द-गिर्द ही सिमटकर रह गई है. उज्जैन के इस इलाके में पानी की किल्लत लोगों के लिए रोज़ की परेशानी बन चुकी है. स्थानीय रहवासियों का कहना है कि नलों से नियमित जल सप्लाई नहीं होने के कारण उनका जीवन पूरी तरह पीएचई विभाग के टैंकरों पर निर्भर हो गया है. लेकिन टैंकर भी समय पर नहीं पहुंचते और कई बार दो से तीन दिन का इंतजार करना पड़ता है. जैसे ही टैंकर क्षेत्र में आता है, लोग बाल्टियां, ड्रम, केन और पाइप लेकर दौड़ पड़ते हैं. पानी भरने की होड़ में पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी और चिंता का माहौल दिखाई देता है. हर कभी होती है धक्का-मुक्की और बहस गांधीनगर की गलियों में इन दिनों पानी की हर बूंद कीमती बन गई है। जैसे ही पानी का टैंकर मोहल्ले में प्रवेश करता है, चारों ओर हलचल मच जाती है. महिलाएं बाल्टियां लेकर दौड़ पड़ती हैं, बुजुर्ग कतार में लग जाते हैं और बच्चे भी पानी जुटाने में हाथ बंटाते हैं. टैंकर के आसपास इतनी भीड़ जमा हो जाती है कि कभी-कभी धक्का-मुक्की और बहस की नौबत आ जाती है. यह दृश्य इलाके में गहराते जल संकट की दर्दनाक कहानी बयां करता है. क्या बोले ग्रामीण स्थानीय रहवासी सीमा परमार बताती हैं कि उनके मोहल्ले में पानी की किल्लत अब लोगों की सबसे बड़ी परेशानी बन चुकी है. सुबह होते ही घरों में पानी जुटाने की चिंता शुरू हो जाती है. पीने के पानी के लिए कई परिवारों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है और डिब्बों में पानी भरकर घर लाना पड़ता है. हालात ऐसे हैं कि पड़ोसी भी मजबूरी में पानी देने से इंकार कर देते हैं. नहाने-धोने और अन्य जरूरतों के लिए लोगों को अलग से इंतजाम करना पड़ रहा है. क्षेत्र की रहने वाली रेखा बताती हैं कि पानी की समस्या अब उनकी जिंदगी का हिस्सा बन चुकी है. टैंकर कब आएगा, इसका कोई तय समय नहीं होता. कभी शाम तो कभी आधी रात को पानी पहुंचता है. लोग घंटों बर्तनों के साथ इंतजार करते रहते हैं. कई महिलाओं को कामकाज और मजदूरी छोड़कर पानी की चिंता में बैठना पड़ता है. रेखा कहती हैं, अगर पानी न मिले तो पूरे परिवार का दिन मुश्किलों में गुजरता है. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Ujjain,Madhya Pradesh Source link

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UPSC vs CA: यूपीएससी का भौकाल या सीए की चकाचौंध? पावर, पैसा...

नई दिल्ली (UPSC vs CA Difference Career). जब भी देश की सबसे कठिन इम्तिहानों वाली नौकरियों की बात होती है तो जुबां पर 2 नाम सबसे पहले आते हैं- यूपीएससी और सीए. इन दोनों की ही समाज में बहुत प्रतिष्ठा है. कई लोग इन दोनों के बीच बुनियादी फर्क को लेकर उलझन में रहते हैं. यूपीएससी के जरिए देश के नीति-निर्माता यानी IAS, आईपीएस और आईएफएस अफसर निकलते हैं, वहीं सीए यानी चार्टर्ड अकाउंटेंसी के जरिए देश का बड़ा वित्तीय साम्राज्य संभालने वाले फाइनेंशियल जीनियस तैयार होते हैं. दोनों ही रास्तों में सफलता पाने के लिए दिन-रात एक करना पड़ता है और सफलता का रेशियो भी बेहद कम है. लेकिन परीक्षा के ढर्रे से लेकर नौकरी के प्रोफाइल, सैलरी, रुतबे और लाइफस्टाइल के मामले में दोनों फील्ड्स के बीच जमीन-आसमान का अंतर है. यूपीएससी में सरकारी तंत्र की असीमित ताकत का भौकाल है तो सीए में कॉर्पोरेट वर्ल्ड की चकाचौंध और बिना किसी सीमा के अंधाधुंध पैसा कमाने की आजादी है. समझिए परीक्षा, सिस्टम, सैलरी और करियर स्कोप के मामले में कौन किस पर भारी है. परीक्षा का पैटर्न: देश का सबसे बड़ा सिलेबस बनाम नंबरों का खेल यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 3 चरणों में होती है- प्रीलिम्स, मेन्स और इंटरव्यू. इसमें इतिहास, भूगोल, राजनीति से लेकर देश-दुनिया के हर मुद्दे का ज्ञान होना जरूरी है. हर साल 10-12 लाख लोग यूपीएससी परीक्षा देते हैं. उनमें से 1000 के आसपास चुने जाते हैं. सीए की परीक्षा ‘द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया’ (ICAI) कराती है. इसके भी 3 चरण हैं- फाउंडेशन, इंटरमीडिएट और फाइनल. सीए में कोई तय सीटें नहीं होतीं. यहां पूरा खेल मिनिमम पासिंग मार्क्स (हर विषय में 40% और कुल 50%) लाने का है. UPSC में किस्मत और रैंक का बड़ा रोल है, जबकि CA मार्कशीट और टेक्निकल होल्ड पर टिका है. सिस्टम और ट्रेनिंग: लबासना की वादियों से लेकर आर्टिकलशिप के रगड़े तक यूपीएससी परीक्षा पास करने के बाद आप देश के सबसे एलीट ग्रुप का हिस्सा बनते हैं. आपको मसूरी की ‘लबासना’ (LBSNAA) अकादमी में वर्ल्ड क्लास ट्रेनिंग दी जाती है और सीधे सरकार के तहत तैनात किया जाता है. वहीं, सीए बनने के सफर में सबसे अहम पड़ाव होता है ‘आर्टिकलशिप’. सीए इंटर पास करने के बाद किसी सीनियर सीए या फर्म के साथ दो-तीन साल तक कड़ी प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (रगड़ा) झेलनी पड़ती है. यूपीएससी सिविल सर्विस आपको प्रशासनिक ढांचा देती है, जबकि सीए का सिस्टम प्रोफेशनल फाइनेंस कंसलटेंट बनाता है. नौकरी और काम: जिले की कमान बनाम कंपनियों का बही-खाता एक आईएएस या आईपीएस अधिकारी के कंधों पर पूरे जिले की कानून-व्यवस्था, विकास से जुड़े काम और सरकारी योजनाओं को लागू करने की जिम्मेदारी होती है. इन सरकारी अफसरों के पास असीमित पावर और प्रशासनिक रसूख होता है. वहीं, एक सीए का काम कंपनियों का ऑडिट करना, टैक्स प्लानिंग, वित्तीय सलाह देना और धोखाधड़ी रोकना होता है. सीए के बिना देश की कोई भी छोटी-बड़ी कंपनी या बिजनेस एक कदम आगे नहीं बढ़ सकता. सैलरी और भत्ते: सरकारी सुविधाएं बनाम कॉर्पोरेट का भारी-भरकम पैकेज सैलरी के मामले में दोनों का गणित बिलकुल अलग है. शुरुआती आईएएस अफसर की बेसिक सैलरी 56,100 रुपये होती है, जो भत्तों के साथ करीब 1 लाख तक पहुंचती है. हालांकि, उन्हें बंगला, गाड़ी, स्टाफ और अपार सुरक्षा जैसी सुविधाएं मिलती हैं, जिसकी कोई कीमत नहीं लगाई जा सकती. वहीं, फ्रेशर सीए का औसत शुरुआती पैकेज 8 से 12 लाख रुपये सालाना (यानी करीब 80 हजार से 1 लाख महीना) होता है. लेकिन अगर आपके पास हुनर है तो कॉर्पोरेट कंपनियां सीए को करोड़ों का पैकेज भी देती हैं. करियर स्कोप: कैबिनेट सेक्रेटरी बनाम खुद की ग्लोबल प्रैक्टिस यूपीएससी परीक्षा पास करके करियर ग्राफ फिक्स है- आप डीएम, कमिश्नर से होते हुए देश के सर्वोच्च प्रशासनिक पद ‘कैबिनेट सेक्रेटरी’ तक पहुंच सकते हैं या रिटायरमेंट के बाद बड़े आयोगों के अध्यक्ष बन सकते हैं. सीए के पास करियर के असीमित रास्ते हैं. आप किसी मल्टीनेशनल कंपनी (MNC) के सीएफओ (CFO) या सीईओ (CEO) बन सकते हैं, दुनिया के किसी भी कोने में अपनी खुद की कंसल्टेंसी फर्म खोल सकते हैं या बड़े-बड़े कप्तानों के पर्सनल वेल्थ मैनेजर बन सकते हैं. Source link

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UPSC vs NTA Paper Leak: यूपीएससी का सीक्रेट फॉर्मूला vs NTA का...

Last Updated:May 30, 2026, 11:25 IST UPSC vs NTA Paper Leak: नीट पेपर लीक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एनटीए के कायाकल्प का खाका मांगा है. आखिर यूपीएससी में कभी कोई पेपर लीक क्यों नहीं होता, जबकि एनटीए में धांधली रुकने का नाम नहीं ले रही? समझिए इसकी वजह. UPSC vs NTA Exams: यूपीएससी और एनटीए के वर्किंग सिस्टम में कई अंतर हैं नई दिल्ली (UPSC vs NTA Paper Leak). देश में नीट यूजी 2026 पेपर लीक और डिजिटल ‘गेस पेपर’ बिक्री कांड के बाद मचे हाहाकार के बीच सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है. कोर्ट ने साफ लफ्जों में कहा कि स्थिति बेहद संवेदनशील है और NTA के पूरे कायाकल्प का खाका अदालत के सामने पेश किया जाए. सुप्रीम कोर्ट की इन तल्ख टिप्पणियों के बीच अब इस बात को लेकर बहस तेज हो गई है कि आखिर देश का परीक्षा सिस्टम कहां फेल हो रहा है. कोर्ट ने सरकार की उच्च स्तरीय समिति (डॉ. के राधाकृष्णन कमेटी) से भी सवाल किया है कि इतनी निगरानी के बाद भी नीट पेपर लीक कैसे हो गया और ऐसी कौन सी खामी रह गई जो पकड़ में नहीं आई? जो देश यूपीएससी जैसी बेहद प्रतिष्ठित और जटिल परीक्षा बिना किसी दाग के सालों से करा रहा है, वही देश एनटीए के तहत होने वाली परीक्षाओं में बार-बार फेल हो रहा है. आखिर एनटीए की साख पूरी तरह मटियामेट क्यों हो रही है? जानिए UPSC का सिस्टम कैसे ‘लीक प्रूफ’ बना और NTA का ढांचा क्यों बार-बार ढह जाता है. यूपीएससी वर्सेस एनटीए: वो 7 बड़े कारण जिसने दोनों का ढर्रा बदला यूपीएससी यानी संघ लोक सेवा आयोग और एनटीए यानी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के काम करने के तरीके और उनकी बनावट में 7 बुनियादी अंतर हैं, जो एक को अभेद्य दीवार बनाते हैं और दूसरे को असुरक्षित: संवैधानिक स्वायत्तता बनाम गैर-संवैधानिक ढांचा: यूपीएससी संविधान के अनुच्छेद 315 के तहत एक स्वायत्त संस्था है, जिसमें बाहरी राजनीतिक या प्रशासनिक हस्तक्षेप 0 होता है. दूसरी तरफ, एनटीए महज सोसाइटी एक्ट के तहत पंजीकृत संस्था है, जिसके पास वैधानिक शक्तियों की कमी है. स्थायी कैडर की कमी: यूपीएससी के पास अपना समर्पित और स्थायी प्रशासनिक ढांचा है जो सालों से गोपनीयता की संस्कृति को बनाए रखता है. इसके उलट, एनटीए में स्थायी कैडर की कमी है और यह पूरी तरह आउटसोर्स और प्रतिनियुक्ति (Deputation) पर आए कर्मचारियों के भरोसे चलती है. ब्लाइंड पेपर सेटिंग: यूपीएससी में प्रश्नपत्र तैयार करने वाले एक्सपर्ट को अंतिम समय तक नहीं पता होता कि उनका सेट किया हुआ पेपर चुना जाएगा या नहीं. NTA में वेंडर-बेस्ड आउटसोर्सिंग के कारण छपाई और टेक्निकल मैनेजमेंट के लिए अक्सर प्राइवेट थर्ड-पार्टी वेंडर्स पर निर्भर रहना पड़ता है. इन-हाउस सीक्रेट प्रिंटिंग: यूपीएससी के पेपर की छपाई बहुत सुरक्षित, चुनिंदा और बाहरी दुनिया से पूरी तरह कटे हुए ‘आइसोलेटेड प्रिंटिंग प्रेस’ में होती है. एनटीए के केस में दूर-दराज के अनवेरिफाइड निजी स्कूलों और केंद्रों को भी एग्जाम सेंटर बना दिया जाता है, जिससे सुरक्षा में सेंध आसान होती है. कमजोर लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्टेशन: यूपीएससी के पेपर के लिए किसी निजी कूरियर के बजाय सीधे राज्य पुलिस और सरकारी मजबूत कमरों (स्ट्रॉन्ग रूम) का उपयोग होता है, जबकि एनटीए में कई बार निजी कूरियर सेवाओं का सहारा लिया जाता है, जिससे रास्ते में पेपर लीक का खतरा रहता है. ओएमआर बेस्ड फॉर्मेट: एनटीए की नीट जैसी परीक्षाओं में ऑब्जेक्टिव (OMR) पैटर्न होता है, जिसे सॉल्वर गैंग के लिए उत्तर कुंजी के जरिए लीक करना आसान होता है. इसके उलट यूपीएससी मुख्य परीक्षा का फॉर्मेट सब्जेक्टिव और एनालिटिकल होता है, जिसे रटकर या लीक से पास नहीं कर सकते. सिंगल-पॉइंट फेलियर मॉडल: एनटीए के मेगा-एग्जाम में देश के किसी भी एक कोने में सुरक्षा चक्र टूटने पर पूरी राष्ट्रीय परीक्षा पर असर पड़ता है. साथ ही, परीक्षा कराने में कई कमेटियां और वेंडर्स बिखरे हुए हैं, जिससे लीक होने पर हर कोई एक-दूसरे पर उंगली उठाता है. एनटीए की परीक्षाओं का लीक इतिहास: कब-कब दागदार हुआ सिस्टम? एनटीए के गठन (2017) के बाद से कई बार इसकी परीक्षाओं पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं: नीट यूजी 2021 और 2024 विवाद: साल 2021 में ओएमआर शीट लीक और सॉल्वर गैंग के एक्टिव होने की खबरें आईं. इसके बाद 2024 में नीट यूजी परीक्षा के दौरान ओएसिस स्कूल (हजारीबाग) और पटना में पेपर लीक का मामला सामने आया, जिसकी जांच अभी भी सीबीआई कर रही है. नीट यूजी 2026 महा-संकट: मई 2026 में हुए एग्जाम में डिजिटल माध्यमों और WhatsApp ग्रुप्स पर बकायदा हूबहू ‘गेस पेपर’ (जिसमें 180 में से 120 सवाल मैच कर गए) वायरल होने के बाद सरकार को परीक्षा रद्द कर री-नीट का आदेश देना पड़ा. UGC NET परीक्षाओं पर संकट: साल 2022 (अक्टूबर) में इतिहास के पेपर लीक के दावे और हाल के वर्षों में डार्क नेट पर यूजीसी नेट के इनपुट मिलने के बाद परीक्षाओं की शुचिता बार-बार प्रभावित हुई है, जिससे एनटीए के डिजिटल और फिजिकल सुरक्षा चक्रों पर सवालिया निशान लग गया है. About the Author Deepali PorwalSenior Sub Editor Deepali Porwal is a seasoned bilingual journalist with 11 years of experience in the media industry. She currently works with News18 Hindi, focusing on the Education and Career desk. She is known for her versat…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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आर्मी, नेवी और एयरफोर्स में अफसर बनने की राह आसान! सीकर की...

Last Updated:May 30, 2026, 10:18 IST Sikar Top NDA Academy: सीकर शिक्षा के क्षेत्र में लगातार अपनी अलग पहचान बना रहा है. इंजीनियरिंग और मेडिकल की तैयारी के साथ-साथ अब NDA और रक्षा सेवाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए भी यह प्रमुख केंद्र बन गया है. यहां की टॉप NDA एकेडमी छात्रों को लिखित परीक्षा से लेकर SSB इंटरव्यू तक की व्यापक तैयारी कराती है, जिससे उनका सेना में अफसर बनने का सपना साकार हो सके. एकेडमी में अनुभवी फैकल्टी, नियमित टेस्ट सीरीज, फिजिकल फिटनेस गाइडेंस और व्यक्तित्व विकास पर विशेष ध्यान दिया जाता है. यही कारण है कि हर साल बड़ी संख्या में छात्र NDA परीक्षा में सफलता हासिल कर भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना में अधिकारी बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. बेहतर रिजल्ट और गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन के कारण यह संस्थान छात्रों और अभिभावकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. Sikar NDA Academy: राजस्थान का सीकर आज पूरे देश में शिक्षा नगरी के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुका है. यहां हर साल लाखों विद्यार्थी JEE, NEET, NDA, CDS और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने पहुंचते हैं. खास बात यह है कि डिफेंस परीक्षाओं की तैयारी के लिए सीकर को देश के प्रमुख केंद्रों में गिना जाता है. यहां की कोचिंग संस्थाओं का परिणाम लगातार शानदार रहता है, जिसके कारण देशभर के अभ्यर्थी और उनके अभिभावक सीकर पर भरोसा जताते हैं. सीकर की डिफेंस अकादमियां केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि विद्यार्थियों में अनुशासन और देशसेवा का जज्बा भी विकसित करती हैं. हर साल यहां से सैकड़ों युवा भारतीय सेना में जवान और अधिकारी बनकर देश सेवा का सपना पूरा करते हैं. लोकल 18 की स्पेशल एजुकेशन सीरीज में आज हम आपको सीकर की पांच ऐसी डिफेंस एकेडमियों के बारे में बताएंगे, जिन्होंने अपने बेहतरीन परिणामों और उत्कृष्ट प्रशिक्षण से राजस्थान ही नहीं, बल्कि पूरे भारत में खास पहचान बनाई है. नवजीवन NDA एकेडमी: यह एकेडमी भी सीकर की टॉप NDA अकादमियों में से एक है. यहा, पर NDA, CDS, Airforce, Navy, Army और Paramilitary Forces की तैयारी करवाई जाती है. यहां पर तैयारी करने वाले स्टूडेंट्स को न केवल शैक्षणिक रूप से बल्कि शारीरिक और मानसिक रूप से भी मजबूत बनाया जाता है. एकेडमी में SSB इंटरव्यू की स्पेशल कोचिंग, GTO ग्राउंड एक्सरसाइज़ और फिजिकल ट्रेनिंग, खास ध्यान दिया जाता है. यहां पर स्टूडेंट्स के लिए समय समय पर मोटिवेशनल सेशंस भी होते हैं. इसके अलावा यहां बच्चों को हॉस्टल सुविधा भी मिलती है. यहा से हर साल बड़ी संख्या में अभ्यर्थी डिफेंस सेवाओं में चयनित होते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google राजस्थान डिफेंस एकेडमी: इस एकेडमी ने भी सीकर में ही नहीं बल्कि पूरे राजस्थान में अपनी अलग पहचान बनाई है. यहा पर खासतौर पर फाउंडेशन बेच के जरिए NDA और अन्य डिफेंस परीक्षाओं की तैयारी करवाई जाती है. राजस्थान एकेडमी में लड़कियों के लिए भी अलग से NDA की ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाए जाते हैं. एकेडमी में आधुनिक क्लासरूम, नियमित मॉक टेस्ट, पर्सनल गाइडेंस और फिजिकल ट्रेनिंग की बेहतरीन सुविधाए दी जाती हैं. गुरूकृपा डिफेंस एकेडमी: यह सीकर में डिफेंस परीक्षाओं की तैयारी के लिए एक भरोसेमंद नाम बन चुकी है. यहां NDA, CDS, Navy, Airforce और Army की सभी शाखाओं की कोचिंग दी जाती है. एकेडमी में पढ़ाई के साथ-साथ फिजिकल फिटनेस पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है. यहां पर स्टूडेंट्स के लिए समय-समय पर मॉक टेस्ट व प्रैक्टिस सेशन्स आयोजित किए जाते हैं. इसके अलावा यहां पर भी बच्चों को हॉस्टल और लाइब्रेरी जैसी सुविधा भी मिलती है. प्रिंस NDA एकेडमी: यह सीकर की बड़ी NDA डिफेंस संस्थानों में से एक है. इस एकेडमी ने कम समय में शानदार रिजल्ट्स के दम पर बड़ी पहचान बनाई है. यहा NDA लिखित परीक्षा के साथ-साथ SSB इंटरव्यू की भी विशेष तैयारी कराई जाती है. यहां पर त्यौहारी करने वाले स्टूडेंट्स में अनुशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है. इसके अलावा व्यक्तित्व विकास पर भी भरपूर ध्यान दिया जाता है. यहां तैयारी करने वाले अनेकों लड़के और लड़कियां सेना में अधिकारी बन चुके हैं. यहां पर सेना के रिटायर्ड अधिकारियों की देखरेख में स्टूडेंट्स की ट्रेनिंग होती है.  फिजिक्सवाला NDA एकेडमी: यह सीकर में एक मल्टीफेसिलिटी डिफेंस कोचिंग सेंटर है. इस एकेडमी में भी NDA के साथ साथ Airforce, Navy और Army की तैयारी करवाई जाती है. खास बात यह है कि यहा पर स्कूलिंग, कोचिंग, हॉस्टल, मैस और खेलकूद की सभी सुविधाए उपलब्ध हैं, जिससे स्टूडेंट्स को किसी अन्य सुविधा की तलाश नहीं करनी पड़ती. एकेडमी की पढ़ाई का स्तर काफी उच्च है और विद्यार्थी यहाँ से अच्छे रिजल्ट्स लेकर निकलते हैं. छात्रों के संपूर्ण विकास पर विशेष ध्यान दिया जाता है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

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