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Terrorists Killed By Unknown Gunmen In Pakistan | हमजा बुरहान भी जहन्नुम...

नई दिल्ली: पाकिस्तान की धरती पर भारत के दुश्मनों का काल बनकर मंडरा रहे अज्ञात हमलावरों ने एक और बड़े आतंकी को जहन्नुम पहुंचा दिया है. गुरुवार को खबर आई कि पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड हमजा बुरहान की पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी पीओके में ताबड़तोड़ गोलियां मारकर हत्या कर दी गई है. पिछले कुछ सालों से पाकिस्तान के अलग-अलग शहरों में भारत के मोस्ट वांटेड आतंकियों को चुन-चुनकर निशाना बनाया जा रहा है. मोटरसाइकिल पर आने वाले इन अज्ञात हमलावरों ने अब तक लश्कर, जैश और हिजबुल के कई टॉप कमांडरों को मौत के घाट उतार दिया है. इन रहस्यमय हत्याओं ने पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों और वहां पनाह लिए बैठे आतंकियों के आकाओं की नींद उड़ा दी है. कोई नहीं जानता कि इन आतंकियों की जान लेने वाले ये अज्ञात लोग आखिर कौन हैं. पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड हमजा बुरहान को कैसे मिली मौत? भारत सरकार की तरफ से साल 2022 में आतंकी घोषित किया गया हमजा बुरहान अब इस दुनिया में नहीं है. उसे मुजफ्फरराबाद में अज्ञात हमलावरों ने कई गोलियां मारीं, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई. हमजा बुरहान का असली नाम अर्जुमंद गुलजार डार था और वह खतरनाक आतंकी संगठन अल बदर से जुड़ा हुआ था. साल 2019 में पुलवामा में हुए आत्मघाती हमले की साजिश में उसका बड़ा हाथ था, जिसमें भारत के 40 सीआरपीएफ जवान शहीद हुए थे. इस हमले के बाद से ही वह भारत का बड़ा दुश्मन बना हुआ था, लेकिन पीओके में अज्ञात बंदूकधारियों ने उसे गोलियां मारकर हमेशा के लिए खामोश कर दिया. लाहौर में लश्कर के संस्थापक अमीर हमजा पर कैसे हुआ था हमला? पाकिस्तान के लाहौर शहर में लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक सदस्यों में शामिल अमीर हमजा को भी इसी साल अप्रैल में निशाना बनाया गया था. बाइक पर सवार होकर आए अज्ञात हमलावरों ने अमीर हमजा पर अचानक अंधाधुंध फायरिंग कर दी. इस जानलेवा हमले में वह बुरी तरह जख्मी हो गया, जिसके बाद उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था. अमीर हमजा भारत के खिलाफ लंबे समय से जहर उगलने और आतंकी नेटवर्क को मजबूत करने का काम कर रहा था. मसूद अजहर और हाफिज सईद के करीबियों को किसने ढेर किया? जैश-ए-मोहम्मद के चीफ मौलाना मसूद अजहर के बड़े भाई मोहम्मद ताहिर अनवर की भी पिछले महीने पाकिस्तान में रहस्यमयी हालात में मौत हो गई. वह जैश के सभी बड़े ऑपरेशन्स को संभालता था. वहीं, पिछले साल मार्च में 26/11 मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद के बेहद करीबी अबू कतल उर्फ कतल सिंधी को झेलम सिंध में अज्ञात हमलावरों ने मार गिराया. कतल सिंधी साल 2024 में जम्मू-कश्मीर के रियासी में तीर्थयात्रियों की बस पर हुए हमले का मुख्य आरोपी था. इसके अलावा कराची में हाफिज सईद के एक और खास मुफ्ती कैसर फारूक को भी अज्ञात हमलावरों ने मदरसा के पास पीठ में गोलियां मारकर ढेर कर दिया था. पठानकोट हमले के गुनहगार शाहिद लतीफ का अंत कैसे हुआ? साल 2016 में भारत के पठानकोट एयरबेस पर हुए बड़े आतंकी हमले के मुख्य साजिशकर्ता शाहिद लतीफ को सियालकोट की एक मस्जिद में अज्ञात बंदूकधारियों ने गोलियां मार दी थीं. 54 साल का शाहिद लतीफ भारत की मोस्ट वांटेड लिस्ट में शामिल था और लंबे समय से पाकिस्तान में बैठकर कश्मीरी युवाओं को भड़काने का काम कर रहा था. इसी तरह लश्कर का एक और खतरनाक भर्ती कमांडर अकरम खान गाजी भी नवंबर 2023 में मोटरसाइकिल सवार हमलावरों की गोलियों का शिकार बन गया. गाजी भारत में आतंकियों की घुसपैठ कराने के लिए नए लड़कों का ब्रेनवॉश करता था. ख्वाजा शाहिद का सिर कलम और विमान हाईजैक के आरोपी की मौत कैसे हुई? लश्कर-ए-तैयबा के टॉप कमांडर ख्वाजा शाहिद उर्फ मियां मुजाहिद की लाश एलओसी के पास नीलम घाटी में बेहद डरावनी हालत में मिली थी. अज्ञात हमलावरों ने पहले उसका अपहरण किया, फिर उसे बुरी तरह टॉर्चर करने के बाद उसका सिर धड़ से अलग कर दिया. इससे पहले साल 1999 में इंडियन एयरलाइंस के आईसी-814 विमान को हाईजैक करने वाले मुख्य आतंकियों में शामिल मिस्त्री जहूर इब्राहिम को कराची में मौत के घाट उतारा गया था. वह जाहिद अखुंद नाम से फर्जी पहचान छिपाकर रह रहा था, लेकिन अज्ञात हमलावरों ने उसके सिर में पॉइंट ब्लैंक रेंज से दो गोलियां मारकर उसका काम तमाम कर दिया था. यूएपीए (UAPA) के तहत घोषित व्यक्तिगत आतंकियों की लिस्ट मौलाना मसूद अजहर उर्फ मौलाना मोहम्मद मसूद अजहर अल्वी उर्फ वली आदम इस्सा. हाफिज मोहम्मद सईद उर्फ हाफिज मोहम्मद साहिब उर्फ हाफिज मोहम्मद सईद उर्फ हाफिज मोहम्मद उर्फ हाफिज सईद उर्फ हाफेज मोहम्मद सईद उर्फ हाफिज मोहम्मद सयीद उर्फ मोहम्मद सईद उर्फ मोहम्मद सईद. जकी-उर-रहमान लखवी उर्फ अबू वाहीद इर्शाद अहमद अर्शद उर्फ काकी उर-रहमान उर्फ जाकिर रहमान लखवी उर्फ जकी-उर-रहमान लकवी उर्फ जाकिर रहमान. दाऊद इब्राहिम कास्कर. वधावा सिंह बब्बर उर्फ चाचा. लखबीर सिंह उर्फ रोडे. रंजीत सिंह उर्फ नीता. परमजीत सिंह उर्फ पंजवड़. भूपिंदर सिंह भिंडा. गुरमीत सिंह बग्गा. गुरपतवंत सिंह पन्नून. हरदीप सिंह निज्जर. परमजीत सिंह उर्फ पम्मा. साजिद मीर उर्फ साजिद मजीद उर्फ इब्राहिम शाह उर्फ वासी उर्फ खाली उर्फ मोहम्मद वसीम. यूसुफ मुजम्मिल उर्फ अहमद भाई उर्फ यूसुफ मुजम्मिल बट उर्फ हुरैरा भाई. अब्दुर रहमान मक्की उर्फ अब्दुल रहमान मक्की. शाहिद महमूद उर्फ शाहिद महमूद रहमतुल्लाह. फरहातुल्लाह गोरी उर्फ अबू सूफियान उर्फ सरदार साहब उर्फ फारू. अब्दुल रऊफ असगर उर्फ मुफ्ती उर्फ मुफ्ती असगर उर्फ साद बाबा उर्फ मौलाना मुफ्ती रऊफ असगर. इब्राहिम अथर उर्फ अहमद अली मोहम्मद अली शेख उर्फ जावेद अमजद सिद्दीकी उर्फ ए.ए. शेख उर्फ चीफ. यूसुफ अजहर उर्फ अजहर यूसुफ उर्फ मोहम्मद सलीम. शाहिद लतीफ उर्फ छोटा शाहिद भाई उर्फ नूर अल दीन. सैयद मोहम्मद यूसुफ शाह उर्फ सैयद सलाहुद्दीन उर्फ पीर साहब उर्फ बुजुर्ग. गुलाम नबी खान उर्फ आमिर खान उर्फ सैफुल्लाह खालिद उर्फ खालिद सैफुल्लाह उर्फ जवाद उर्फ दांद. जफर हुसैन भट उर्फ खुर्शीद उर्फ मोहम्मद जफर खान उर्फ मौलवी उर्फ खुर्शीद इब्राहिम. रियाज इस्माइल शाहबांदरी उर्फ शाह रियाज अहमद उर्फ रियाज भटकल उर्फ मोहम्मद रियाज उर्फ अहमद भाई उर्फ रसूल खान उर्फ रोशन खान उर्फ अजीज. मोहम्मद इकबाल उर्फ शाहबांदरी मोहम्मद इकबाल उर्फ इकबाल भटकल. शेख शकील उर्फ छोटा शकील. मोहम्मद अनीस शेख. इब्राहिम मेमन उर्फ टाइगर

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17 women in palamu transformed 20 acres of farming with solar irrigation...

होमताजा खबरकृषि पलामू की 17 महिलाओं का कमाल! सोलर लिफ्ट सिंचाई से 20 एकड़ में लहलहाई फसलें Last Updated:May 21, 2026, 15:34 IST Solar Irrigation System: झारखंड के पलामू (चैनपुर) में 17 महिला किसानों ने आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश की है. सरकार से मिले 90% अनुदान की मदद से महिलाओं ने सोलर लिफ्ट सिंचाई प्रणाली को अपनाया. जिससे 20 एकड़ बंजर जैसी भूमि पर पानी की समस्या का स्थायी समाधान हो गया है. डीजल और बिजली के खर्च से मुक्ति मिलने के कारण खेती की लागत में भारी कमी आई है. जिससे अब इन महिलाओं के लिए हाई-वैल्यू (नकदी) फसलों की खेती करने और अपनी आय बढ़ाने का नया रास्ता खुल गया है. ख़बरें फटाफट पलामू: सरकार किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और खेती को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए लगातार नई योजनाएं चला रही है. इसी कड़ी में पलामू जिले के चैनपुर प्रखंड में महिलाओं ने सामुदायिक प्रबंधित सौर्य लिफ्ट सिंचाई प्रणाली अपनाकर खेती में नई मिसाल पेश की है. यहां 17 महिलाओं ने मिलकर सोलर पंप आधारित सिंचाई व्यवस्था शुरू की है. जिससे अब 20 एकड़ तक की जमीन पर सालभर सिंचाई संभव हो सकेगी. इस पहल से दोहरा लाभ मिलेगा. खेती की लागत घटने के साथ हाई वैल्यू क्रॉप यानी अधिक लाभ देने वाली फसलों की खेती का रास्ता भी खोल रही है. लागत 6 लाख पर खर्च मात्र 60 हजार यह योजना नित्या परिवर्तन जल उपभोक्ता समूह के माध्यम से सीएम एसएलआई योजना के तहत लागू की गई है. इसके अंतर्गत किसानों को 90 प्रतिशत अनुदान पर सोलर पंप की सुविधा दी जा रही है. इस परियोजना की कुल लागत करीब 6 लाख रुपए है. जिसमें किसानों को केवल 10 प्रतिशत राशि यानी लगभग 60 हजार रुपए खर्च करने पड़े हैं. जेएसएलपीएस और स्वयंसेवी संस्था टीआरआई के सहयोग से ग्राम संगठन के माध्यम से यह सुविधा किसानों तक पहुंचाई गई है. न बिजली कटने की समस्या, न डीजल खर्च का बोझमहिला किसान रीता देवी बताती हैं कि वह पिछले 10 वर्षों से खेती कर रही हैं. पहले डीजल पंप से सिंचाई करनी पड़ती थी. जिससे खर्च अधिक होता था. वहीं बिजली पंप से सिंचाई के दौरान बिजली कटने की समस्या बनी रहती थी. लेकिन अब खेत में सोलर पंप लगने से सिंचाई बेहद आसान हो गई है. उन्होंने बताया कि गेहूं, सरसों और सब्जियों की खेती में अब पानी की समस्या काफी हद तक खत्म हो गई है. 17 महिलाओं ने मिलकर इस योजना का लाभ लिया है. इससे खेती में अच्छा फायदा मिलने लगा है. 20 एकड़ तक की भूमि सिंचाई हुई आसानमहुगांवा की रहने वाली शकुंतला देवी कहती हैं कि सब्जी खेती में सबसे बड़ी समस्या पटवन की होती थी. लेकिन अब सोलर आधारित सिंचाई प्रणाली से खेती आसान हो गई है. शिवपुर डैम में लगाए गए 5 एचपी मोटर के जरिए पानी को करीब 1500 फीट दूर तक पाइपलाइन से खेतों तक पहुंचाया जा रहा है. इससे 20 एकड़ तक की भूमि की सिंचाई आसानी से हो सकेगी. सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें बिजली बिल का कोई खर्च नहीं आता और मोटर चलाने में भी परेशानी नहीं होती. भविष्य की खेती का मजबूत विकल्पउन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई प्रणाली किसानों के लिए भविष्य की खेती का मजबूत विकल्प बन सकती है. इससे खेती की लागत कम होगी, पानी की उपलब्धता बढ़ेगी और किसान पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर हाई वैल्यू क्रॉप की ओर कदम बढ़ा सकेंगे. About the Author Amit ranjan मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Palamu,Jharkhand Source link

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चीनी या फिर गुड़…किसकी चाय अच्छी और हेल्दी होती है?

अंबाला. हर साल 21 मई पूरी दुनिया में अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस मनाया जाता है. इस दिन का चाय के उत्पादन और खपत को बढ़ावा देने के साथ-साथ चाय उद्योग से जुड़े किसानों और श्रमिकों की आजीविका और उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया जाता है. वहीं भारत में चाय सिर्फ एक पेय नहीं, बल्कि रोजाना की आदत और भावनाओं से जुड़ी चीज है. सुबह की शुरुआत हो या शाम की थकान, चाय के बिना बात अधूरी लगती है. लेकिन, जैसे-जैसे लोग सेहत को लेकर जागरूक हुए हैं. ऐसे में हम आपको आज बताने जा रहे हैं कि चीनी या फिर गुड़, किसकी चाय अच्छी होती है. दरअसल, चाय में चीनी के अलावा, गुड़ एक हेल्दी विकल्प है. बहुत से लोग मानते हैं कि अगर चाय में चीनी की जगह गुड़ डाल दिया जाए, तो वह नुकसानदेह नहीं रहती, लेकिन, क्या यह सच है?  क्या वाकई गुड़ वाली चाय सेहत के लिए बेहतर है, या यह सिर्फ एक भ्रम है?  इसी सवालों को लेकर लोकल 18 की टीम ने अंबाला छावनी नागरिक अस्पताल में कार्यरत आयुर्वेदिक डॉ. जितेंद्र वर्मा से बातचीत की. उन्होंने बताया कि गुड़ और चीनी में सबसे बेहतर आयुर्वेद में गुड़ को ही माना गया हैं. क्योंकि चीनी गुड़ से ही बनती है, लेकिन दोनों के बीच काफी ज्यादा फर्क होता है. उन्होंने कहा कि गुड़ में भी क्वालिटी काफी मायने रखती हैं, क्योंकि आजकल गुड़ में भी मिलावट देखने को मिल रही है इसलिए अच्छे ब्रांड का ही गुड़ लोगों को चाय में डालना चाहिए. वह बताते हैं कि कई जगह पर गुड़ को साफ करने के लिए मीठा सोडा डाला जाता है,जिससे पिला और लाल गुड़ इतना फायदेमंद नहीं होता है. चीनी का काफी नुकसान होता है, क्योंकि चीनी से कोलेस्ट्रॉल की मात्रा भी काफी ज्यादा बढ़ रही है. इसलिए गर्मियों के मौसम में चाय का इस्तेमाल भी काफी काम करना चाहिए और अगर चाय पी भी रहे हैं तो उसमें देसी गुड़ ही डालें. चीनी के इस्तेमाल बंद करने के बाद काफी ज्यादा बदलाव शरीर में देखने को मिलता है और मोटापा भी कम होता है. आयुर्वेदिक डॉ. जितेंद्र वर्मा बताते हैं कि ब्राउन कलर का गुड़ अच्छा और फायदेमंद होता है. इसके साथ ही चाय में गुड़ की मात्रा भी सीमित रखनी है. आयुर्वेद के अनुसार, हमारे शरीर को 6 प्रकार के रस की जरूरत होती है, जिसमें मधुर, अम्ल, लवण, कटु तिक्त, कषाय शामिल हैं. यह 6 प्रकार के रस हमें खानपान की सभी वस्तुओं से मिल जाते हैं और इनका ध्यान हमें बस रखना होता हैं. आयुर्वेदिक डॉ. जितेंद्र वर्मा बताते हैं कि ब्राउन कलर का गुड़ अच्छा और फायदेमंद होता है. चाय में गुड़ डालने से कितना पोषण मिलता है? हकीकत यह है कि चाय में हम गुड़ बहुत ही कम मात्रा में डालते हैं. आमतौर पर आधा या एक छोटा चम्मच. इतनी कम मात्रा से मिलने वाले मिनरल्स का शरीर पर कोई खास असर नहीं पड़ता. यानी पोषण के लिहाज से गुड़ वाली चाय, चीनी वाली चाय से बहुत अलग नहीं है. असली समस्या कहां है? समस्या गुड़ या चीनी में नहीं, बल्कि मीठे की आदत में है. जब लोग गुड़ को पूरी तरह सुरक्षित मान लेते हैं, तो वे इसकी मात्रा बढ़ा देते हैं. यही आदत धीरे-धीरे सेहत को नुकसान पहुंचाती है, चाहे मीठा गुड़ से आए या चीनी से. Source link

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CM Vijay Cabinet Expansion News: CM विजय की कैबिनेट में बड़ा ड्रामा!...

होमताजा खबरदेश विजय की कैबिनेट में बड़ा ड्रामा! दो सगे दोस्तों ने ऐन वक्त पर क्यों बदला पाला? Last Updated:May 21, 2026, 13:32 IST CM Vijay Cabinet Expansion News: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय की कैबिनेट विस्तार के बाद नई सियासी हलचल शुरू हो गई है. सरकार को समर्थन देने वाले VCK और IUML ने मंत्री पद से दूरी बनाकर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है. दोनों दलों ने अब तक अपने मंत्री पद के नाम तय नहीं किए हैं. राजनीतिक जानकार इसे DMK कनेक्शन, बड़े मंत्रालय की मांग और विजय सरकार की स्थिरता से जोड़कर देख रहे हैं. AIADMK में बगावत के बाद तमिलनाडु की राजनीति और जटिल हो गई है. अब सवाल यह है कि क्या विजय अपने सहयोगियों को पूरी तरह साथ रख पाएंगे या आगे और बड़ा सियासी ड्रामा देखने को मिलेगा. ख़बरें फटाफट तमिलनाडु में CM विजय की कैबिनेट विस्तार के बाद बड़ा सियासी ड्रामा. (फोटो- पीटीआई) CM Vijay News: तमिलनाडु की राजनीति इन दिनों किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं दिख रही. सुपरस्टार से मुख्यमंत्री बने जोसेफ विजय ने जैसे ही अपनी कैबिनेट का विस्तार किया वैसे ही सियासी गलियारों में नई हलचल शुरू हो गई. जिन सहयोगियों ने सरकार बनाने के वक्त विजय का साथ देकर सत्ता तक पहुंचाया, वही अब मंत्री पद से दूरी बनाते नजर आ रहे हैं. VCK और IUML जैसे सहयोगी दलों का कैबिनेट विस्तार से बाहर रहना सिर्फ एक सामान्य राजनीतिक घटना नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे सत्ता के भीतर चल रही बड़ी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है. विधानसभा चुनाव के बाद जिस तरह नंबर गेम चला, उसने पहले ही तमिलनाडु की राजनीति को अस्थिर बना दिया था. अब कैबिनेट में शामिल न होने का फैसला इस बात का संकेत दे रहा है कि विजय सरकार को समर्थन देने वाले दल अभी पूरी तरह भरोसे में नहीं आए हैं. सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या ये दोनों दल भविष्य की राजनीति देखकर अपने पत्ते संभालकर चल रहे हैं या फिर मंत्री पद के लिए बड़ा सौदा चाहते हैं. दरअसल, विजय सरकार बहुमत के बेहद करीब पहुंचकर बनी थी. TVK सबसे बड़ी पार्टी बनी लेकिन जादुई आंकड़े से पीछे रह गई. ऐसे में कांग्रेस, वाम दलों, VCK और IUML ने समर्थन देकर सरकार बचाई. अब जब कैबिनेट विस्तार हुआ तो कांग्रेस को जगह मिली, लेकिन VCK और IUML के नेता शपथ समारोह से गायब रहे. NDTV की रिपोर्ट के अनुसार सूत्रों का दावा है कि दोनों दलों को एक-एक मंत्री पद का आश्वासन दिया गया है, लेकिन उन्होंने अभी तक अपने नाम तय नहीं किए हैं. राजनीतिक जानकार इसे साधारण देरी नहीं मान रहे. उनका कहना है कि दोनों दल पहले विजय सरकार की स्थिरता और भविष्य देखना चाहते हैं. खास बात यह भी है कि इन दोनों दलों के DMK से पुराने संबंध रहे हैं. ऐसे में सीधे TVK सरकार में शामिल होना उनके लिए आसान फैसला नहीं है. यही वजह है कि तमिलनाडु की राजनीति में “दोस्ती और दूरी” का यह खेल चर्चा का विषय बन गया है. कैबिनेट विस्तार के बाद साफ हो गया है कि विजय के लिए सरकार बनाना जितना मुश्किल था उसे संभालना उससे भी ज्यादा कठिन होने वाला है. विजय सरकार पर बढ़ता दबाव विजय ने अपनी कैबिनेट में TVK के 21 विधायकों और कांग्रेस के दो नेताओं को शामिल किया. इसके बाद कुल मंत्रियों की संख्या 32 पहुंच गई है. तमिलनाडु विधानसभा में अधिकतम 35 मंत्री बनाए जा सकते हैं. यानी विजय ने जानबूझकर तीन पद खाली छोड़े हैं. इसे VCK और IUML के लिए राजनीतिक संदेश माना जा रहा है. लेकिन दोनों दलों ने अब तक अपने मंत्री पद के उम्मीदवारों का नाम नहीं भेजा. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि VCK और IUML फिलहाल ‘वेट एंड वॉच’ की रणनीति पर चल रहे हैं. वे देखना चाहते हैं कि विजय सरकार प्रशासन में कितना सफल रहती है. साथ ही यह भी कि क्या TVK भविष्य में भरोसेमंद सहयोगी साबित होगी. अगर सरकार अस्थिर हुई तो इन दलों को राजनीतिक नुकसान हो सकता है. इसलिए दोनों दल फिलहाल खुलकर सत्ता में शामिल होने से बच रहे हैं. DMK से रिश्तों ने बढ़ाई दुविधा VCK और IUML लंबे समय तक MK स्टालिन की DMK के करीबी सहयोगी रहे हैं. चुनाव के बाद भी इन दलों ने साफ कहा था कि उन्होंने विजय सरकार को समर्थन ‘राज्य में राष्ट्रपति शासन रोकने’ के लिए दिया. यानी उनका समर्थन पूरी तरह वैचारिक नहीं बल्कि परिस्थितिजन्य था. ऐसे में अगर वे सीधे विजय सरकार में शामिल होते हैं तो DMK से दूरी बढ़ सकती है. यही वजह है कि दोनों दल अब हर कदम बेहद सावधानी से रख रहे हैं. क्या बड़े मंत्रालय की चल रही है डील? तमिलनाडु की राजनीति में यह चर्चा भी तेज है कि VCK और IUML बेहतर मंत्रालयों के लिए दबाव बना रहे हैं. खबरें हैं कि VCK प्रमुख थोल तिरुमावलवन डिप्टी सीएम जैसे बड़े पद की उम्मीद लगाए बैठे थे. हालांकि पार्टी ने इन दावों को खारिज किया, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसकी चर्चा अभी भी जारी है. माना जा रहा है कि कैबिनेट में शामिल होने में देरी करके दोनों दल अपने लिए ज्यादा ताकतवर मंत्रालय चाहते हैं. AIADMK के बागियों ने बदल दिया पूरा खेल विजय सरकार के लिए सबसे बड़ी राहत AIADMK में हुई बगावत बनी. 25 विधायकों ने EPS नेतृत्व के खिलाफ जाकर फ्लोर टेस्ट में विजय सरकार का समर्थन किया. इससे सरकार को स्थिरता मिली. लेकिन इसी ने VCK और IUML की चिंता भी बढ़ा दी. अगर AIADMK का बागी गुट सरकार में शामिल हो गया तो इन दोनों दलों की राजनीतिक अहमियत कम हो सकती है. इसलिए वे जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लेना चाहते. विजय सरकार के सामने अब असली चुनौती कैबिनेट विस्तार के बाद साफ हो गया है कि विजय के लिए सरकार बनाना जितना मुश्किल था उसे संभालना उससे भी ज्यादा कठिन होने वाला है. सहयोगियों की नाराजगी, AIADMK का संकट और DMK का दबाव आने वाले महीनों में तमिलनाडु की राजनीति को और गर्म कर सकता है. फिलहाल VCK और IUML दोनों ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं. लेकिन इतना तय है कि विजय

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फाइनेंस पर खरीदा है मोबाइल और लैपटॉप तो न भूलें ईएमआई चुकाना,...

Last Updated:May 21, 2026, 12:24 IST RBI New Rule : रिजर्व बैंक ने कर्ज वसूली के लिए नए प्रस्‍ताव पेश किए हैं, जिन्‍हें 1 अक्‍टूबर, 2026 से लागू किया जा सकता है. आरबीआई ने कहा है कि अगर किसी ग्राहक ने फाइनेंस कराकर मोबाइल या लैपटॉप खरीदा है और 90 दिन से ज्‍यादा का डिफॉल्‍ट किया है तो बैंक उसकी सर्विस बंद कर सकते हैं. आरबीआई ने बैंकों को लोन डिफॉल्‍टर्स के मोबाइल बंद करने की अनुमति का प्रस्‍ताव दिया है. नई दिल्‍ली. टेलीग्राम रेगुलेटर ट्राई के आंकड़े देखें तो पता चलता है कि भारत अब दुनिया के सबसे बडे़ मोबाइल फोन बाजार में से एक बन चुका है, जहां 1.16 अरब मोबाइल कनेक्‍शन हैं. देश के कुल इलेक्‍ट्रॉनिक उपभोक्‍ताओं में से एक तिहाई यानी करीब 40 करोड़ ने छोटे लोन लेकर अपने गैजेट्स खरीदे हैं. इसका मतलब है कि अगर 3 में से करीब 1 आदमी अपना लैपटॉप और मोबाइल फाइनेंस कराकर खरीदता है. रिजर्व बैंक ने ऐसे उपभोक्‍ताओं के लिए अब नियमों को कड़ा करने का मन बना लिया है. आरबीआई ने प्रस्‍ताव दिया है कि अगर फाइनेंस पर खरीदे मोबाइल या लैपटॉप की ईएमआई नहीं चुकाई गई तो बैंक इन गैजेट्स के फंक्‍शंस को बंद कर सकते हैं. रिजर्व बैंक के हालिया प्रस्‍ताव में कहा गया है कि अगर इलेक्‍ट्रॉनिक उपकरणों की ईएमआई 90 दिन से ज्‍यादा समय से बकाया रही तो बैंकों को पहले नोटिस देना होगा और फिर इन गैजेट्स को बंद करा सकते हैं. आरबीआई ने कहा है कि लोन लेने वालों को पहले 60 दिन का ओवरड्यू होने पर नोटिस देना होगा और पुनर्भुगतान के लिए 21 दिन का समय देना होगा. इसके बावजूद अगर पैसे नहीं चुकाए जाते तो बैंक दूसरी नोटिस देकर एक सप्‍ताह का समय और देंगे फिर उसके बाद गैजेट्स को बंद कराया जा सकता है. ग्राहक से पहले ही लेनी होगी अनुमतिआरबीआई ने अपने प्रस्‍ताव में कहा है कि कर्ज देने वाले बैंकों को लोन देते समय ही ग्राहक के साथ इस तरह का कॉन्‍ट्रैक्‍ट बनवाना होगा और उसकी अनुमति भी लेनी होगी. न्‍यूज एजेंसी रॉयटर्स ने पिछले साल ही बताया था कि आरबीआई ऐसे कानून पर विचार कर रहा है जो बैंकों को अपने कर्ज वसूलने के लिए स्‍मार्टफोन या लैपटॉप को लॉक करने की अनुमति देगा, ताकि ग्राहकों पर बैंकों के पैसे लौटाने का दबाव डाला जा सके. जरूरी सेवाएं बंद नहीं कर सकेंगे बैंकआरबीआई ने अपने प्रस्‍ताव में यह भी कहा है कि बकाया कर्ज की वसूली के दौरान सख्त और अनुचित तरीकों पर रोक जारी रहेगी. बैंक डिफॉल्‍ट करने वाले उधारकर्ताओं के मोबाइल फोन की सेवाओं को बंद या सीमित नहीं कर सकेंगे. बैंक किसी तकनीक की मदद से इंटरनेट, इनकमिंग कॉल, आपातकालीन एसओएस और सरकारी सुरक्षा संदेश जैसी जरूरी सेवाओं को बाधित नहीं कर सकेंगे. यदि उधारकर्ता बकाया चुका देता है, तो एक घंटे के भीतर सभी सेवाएं बहाल करनी होंगी. ऐसा न करने पर बैंक को 250 रुपये प्रति घंटे के हिसाब से मुआवजा देना होगा. बैंक रखेंगे हर कॉल का रिकॉर्डरिजर्व बैंक ने यह भी स्पष्ट किया कि कर्ज वसूली के लिए नियुक्त एजेंटों द्वारा अभद्र भाषा का इस्तेमाल, सोशल मीडिया पर उधारकर्ता की जानकारी साझा करना या बार-बार कॉल करना और संदेश भेजना कठोर वसूली तरीकों में शामिल होगा. इन सभी तरीकों पर रोक रहेगी. बैंकों को वसूली कॉल का रिकॉर्ड रखना होगा, जिसमें कॉल की संख्या, समय और बातचीत का विवरण शामिल होगा. इन प्रस्तावित नियमों को एक अक्टूबर, 2026 से लागू करने की योजना है. About the Author Pramod Kumar Tiwari प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्‍वेस्‍टमेंट टिप्‍स, टैक्‍स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Source link

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कौन हैं कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके? CJP से जुड़ने...

Cockroach Janata Party Founder Abhijeet Dipke: सोशल मीडिया की दुनिया में इन दिनों एक नया नाम तेजी से वायरल हो रहा है- ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ यानी सीजेपी. इंस्टाग्राम पर शुरू हुआ यह व्यंग्यात्मक और मीम-आधारित डिजिटल अभियान देखते ही देखते करोड़ों युवाओं तक पहुंच गया है. बेरोजगारी, सिस्टम पर तंज, राजनीति पर व्यंग्य और युवाओं की भाषा में तैयार किए गए कंटेंट ने सीजेपी को इंटरनेट पर चर्चा का बड़ा विषय बना दिया है. अब सोशल मीडिया पर बहस छिड़ चुकी है कि क्या यह सिर्फ एक वायरल मीम ट्रेंड है या फिर युवाओं की नाराजगी का नया चेहरा? सोशल मीडिया कैंपेनिंग में अभिजीत पहले से सक्रिय राजनीतिक रणनीति और सोशल मीडिया कैंपेनिंग में अभिजीत पहले से सक्रिय रहे हैं. साल 2020 से 2022 के बीच वह अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी की सोशल मीडिया टीम में प्रमुख वॉलंटियर के रूप में काम कर चुके हैं. इसके अलावा 2025 दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने आप के साथ मिलकर चुनावी रणनीति और डिजिटल कैंपेन पर काम किया था. अब वही अभिजीत दीपके कॉकरोच जनता पार्टी के जरिए सोशल मीडिया पर नया डिजिटल प्रयोग करते नजर आ रहे हैं. सीजेपी की शुरुआत कथित तौर पर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत की एक टिप्पणी के बाद हुई. पहले यह एक्स पर एक व्यंग्यात्मक ट्रेंड के रूप में सामने आया, लेकिन जल्द ही इंस्टाग्राम पर इसका अकाउंट लॉन्च हुआ और कुछ ही दिनों में इसके फॉलोअर्स करोड़ों में पहुंच गए. इंस्टाग्राम पर सीजेपी की लोकप्रियता इंस्टाग्राम पर सीजेपी की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसके फॉलोअर्स 10.8 मिलियन यानी 1 करोड़ से ज्यादा हो चुके हैं. वहीं भारतीय जनता पार्टी के इंस्टाग्राम पर करीब 8.7 मिलियन फॉलोअर्स हैं, जबकि कांग्रेस के लगभग 13.3 मिलियन और आम आदमी पार्टी के करीब 1.9 मिलियन फॉलोअर्स हैं. खास बात यह है कि सीजेपी ने बेहद कम समय में यह आंकड़ा हासिल किया है. सीजेपी की पोस्ट्स में बेरोजगारी, पेपर लीक, सिस्टम से नाराजगी, राजनीतिक बयानबाजी और युवाओं की रोजमर्रा की परेशानियों को मीम्स और व्यंग्य के जरिए पेश किया जाता है. यही वजह है कि यह कंटेंट युवाओं के बीच तेजी से वायरल हो रहा है. दिलचस्प बात यह है कि सीजेपी ने खुद को पूरी तरह गंभीर राजनीतिक संगठन के बजाय एक डिजिटल सटायर मूवमेंट की तरह पेश किया है. पार्टी से जुड़ने के लिए जो एलिजेबिलिटी बताए गए हैं, वे भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहे हैं. इनमें लिखा गया है: बेरोजगार होना चाहिए आलसी होना चाहिए हमेशा ऑनलाइन रहने वाला होना चाहिए प्रोफेशनल तरीके से भड़ास निकालने की क्षमता होनी चाहिए इन शर्तों को लोग मजाकिया अंदाज में शेयर कर रहे हैं, लेकिन इसके पीछे युवाओं की निराशा और सिस्टम से असंतोष की झलक भी दिखाई दे रही है. सीजेपी को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं. आप नेता मनीष सिसोदिया ने भी इंस्टाग्राम पर वीडियो पोस्ट करके कॉकरोच जनता पार्टी के बारे में कहा कि जब सिस्टम को गटर बनाया हुआ है तो कहीं ना कहीं कॉकरोच पैदा होंगे. NEET पेपर लीक हुआ किसी क्रोकोडाइल को जेल हुई? महंगाई बढ़ रही है, पेट्रोल डीजल महंगा है क्रोकोडाइल ऐश कर रहे हैं. सपा के मुखिया अखिलेश यादव ने एक्स पर ‘BJP बनाम CJP’ लिखते हुए पोस्ट शेयर किया, जिसके बाद यह ट्रेंड और तेजी से वायरल हो गया. वहीं महुआ मोइत्रा समेत कई विपक्षी नेताओं ने भी इस अभियान को लेकर प्रतिक्रिया दी है. Source link

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Falta Repolling Live: फाल्टा में वोटिंग जारी, सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम,...

होमताजा खबरदेश Falta Repolling Live: फलता में वोटिंग जारी, जहांगीर खान छोड़ चुके हैं मैदान Last Updated:May 21, 2026, 10:27 IST Repolling In Falta Live Update: फाल्टा विधानसभा में 29 अप्रैल का मतदान रद्द होने के बाद आज रीपोलिंग हो रहा है. आज के मतदान के लिए चुनाव आयोग ने सुरक्षा दोगुनी कर दी है. CAPF और वेबकास्टिंग से कड़ी निगरानी रखी ज…और पढ़ें फलता विधानसभा सीट पर आज रीपोलिंग हो रही है. Repolling In Falta Live Update:  पश्चिम बंगाल की फाल्टा विधानसभा सीट पर गुरुवार को दोबारा मतदान कराया जा रहा है. चुनाव आयोग ने 29 अप्रैल को हुए मतदान को लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने वाला मानते हुए रद्द कर दिया था और रीपोलिंग का आदेश दिया था. अब दोबारा हो रहे मतदान को लेकर चुनाव आयोग पूरी तरह सतर्क नजर आ रहा है. सुरक्षा व्यवस्था को पहले के मुकाबले लगभग दोगुना कर दिया गया है ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या हिंसा की आशंका को रोका जा सके. चुनाव आयोग के मुताबिक फाल्टा विधानसभा क्षेत्र के सभी 285 मतदान केंद्रों पर इस बार केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की मजबूत तैनाती की गई है. हर बूथ पर आठ CAPF जवान तैनात रहेंगे, जबकि 29 अप्रैल के मतदान के दौरान केवल चार जवानों की ड्यूटी लगाई गई थी. आयोग का कहना है कि इस बार किसी भी तरह की अनियमितता की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी जाएगी. करीब 35 कंपनियों के केंद्रीय बल पूरे इलाके में तैनात किए गए हैं. इसके अलावा 30 क्विक रिस्पॉन्स टीमों को भी स्टैंडबाय पर रखा गया है ताकि किसी भी गड़बड़ी की स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके. चुनाव आयोग ने निगरानी व्यवस्था भी बेहद कड़ी कर दी है. हर बूथ के अंदर दो वेब कैमरे और बाहर एक कैमरा लगाया गया है. पूरे मतदान की लाइव वेबकास्टिंग जिला निर्वाचन अधिकारी और मुख्य निर्वाचन अधिकारी के दफ्तर से मॉनिटर की जाएगी. आयोग ड्रोन सर्विलांस पर भी विचार कर रहा है. इसके साथ ही तीन विशेष चुनाव पर्यवेक्षकों को पूरे मतदान प्रक्रिया की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है. जहांगीर खान ने चुनावी मुकाबले से हटे Falta Repolling Live: फाल्टा में 9 बजे तक 20 फीसदी वोटिंग Falta Repolling Live: फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में गुरुवार को दोबारा वोटिंग हो रही है. मतदान सुबह 7 बजे शुरू हुआ और शाम 6 बजे तक चलेगा. चुनाव आयोग ने 285 बूथों पर सुरक्षा के लिए केंद्रीय बलों की 35 कंपनियां तैनात की हैं. सभी बूथों पर वेबकास्टिंग की जा रही है. इससे पहले, उस केंद्र में मतदान में बड़े पैमाने पर धांधली के आरोप लगे थे. इसलिए, आयोग ने सभी बूथों पर दोबारा मतदान कराने का फैसला किया. सुबह 9 बजे तक 20.47 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया. Falta Repolling Live: एक लाख वोटों से जीतूंगा Falta Repolling Live: BJP उम्मीदवार देबांग्शु पांडा ने री-पोलिंग में बड़ी जीत का दावा किया है. उन्होंने कहा कि BJP फाल्टा सीट पर एक से डेढ़ लाख वोटों के अंतर से जीत दर्ज करेगी. पांडा ने आरोप लगाया कि पहले मतदान के दौरान कई बूथों पर भारी गड़बड़ी हुई थी. उन्होंने दावा किया कि कुछ जगहों पर BJP के चुनाव चिह्न पर सेलोटेप लगाया गया और कैमरों को घुमाकर मतदान प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की गई. BJP ने इन शिकायतों को लेकर चुनाव आयोग से दोबारा मतदान की मांग की थी, जिसके बाद आयोग ने री-पोलिंग का फैसला लिया. अब पूरे राज्य की नजर फल्टा पर टिकी हुई है, जहां कड़ी सुरक्षा और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच आज मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे. Phalta Repolling Live: फाल्टा को विशेष पैकेज देने का ऐलान Falta Repolling Live: पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने मंगलवार को फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में भव्य रोड शो किया और घोषणा की थी कि अगले राज्य बजट में फाल्टा के लिए एक विशेष पैकेज शामिल किया जाएगा. उन्होंने यह भी वादा किया कि 2021 विधानसभा चुनाव के बाद हुई कथित हिंसा में मारे गए BJP कार्यकर्ताओं के परिवारों के एक सदस्य को नौकरी दी जाएगी. रोड शो के दौरान मुख्यमंत्री ने TMC नेता जहांगीर खान पर भी निशाना साधा. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि खुद को ‘पुष्पा’ कहने वाला अब कहां है? उसके पास कोई रास्ता नहीं बचा था, क्योंकि उसे पोलिंग एजेंट तक नहीं मिल रहे थे, इसलिए वह मैदान छोड़कर भाग गया. सुवेंदु अधिकारी ने दावा किया कि फाल्टा के लोग अब खुलकर और निष्पक्ष तरीके से मतदान कर पा रहे हैं. उन्होंने कहा कि आज लोगों के चेहरों पर खुशी दिखाई दे रही है. यह दूसरे स्वतंत्रता दिवस जैसा महसूस हो रहा है. 10 साल बाद मतदाताओं को अपने मतदान अधिकार वापस मिले हैं. Source link

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Explainer: क्या नदी में दूध डालने से वह प्रदूषित हो सकती है-...

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानि एनजीटी की भोपाल बेंच ने हाल ही में मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में नर्मदा नदी में एक अनुष्ठान के दौरान 11,000 लीटर दूध बहाने और 210 साड़ियां विसर्जित करने के मामले पर कड़ा संज्ञान लिया है. एनजीटी ने इस मामले में केंद्री प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एक वैज्ञानिक रिपोर्ट मांगी है. तो आइए जानते हैं कि साइंस नदी में दूध डालने पर क्या कहती है, क्या इससे नदी प्रदूषित हो सकती है. भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में नदियों को ‘मां’ और साक्षात चेतना मानकर पूजा जाता है. इसी श्रद्धा भाव से नदियों में दूध, दही, घी, तेल, फूल और वस्त्र व अन्य सामग्रियां अर्पित करते आए हैं. लेकिन मौजूदा हालात में जब हमारी नदियां प्रदूषण का शिकार हो रही हों तो ये देखना जरूरी है कि सजीव माने जाने वाली नदियों की सेहत के लिए क्या जरूरी और क्या नहीं. विज्ञान और रिसर्च क्या कहती है? विज्ञान के दृष्टिकोण से दूध एक “शुद्ध खाद्य पदार्थ” जरूर है लेकिन जब ये पानी में जाता है, तो अत्यधिक कंसंट्रेटेड जैविक प्रदूषक का काम करने लगता है. डेयरी विज्ञान और पर्यावरण इंजीनियरिंग के शोध बताते हैं कि दूध क बॉयोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड यानि बीओडी स्तर घरेलू सीवेज यानि नाली के गंदे पानी की तुलना में बहुत अधिक होता है यानि वो गंदे पानी की तुलना में पानी को ज्यादा प्रदूषित करता है. 1 लीटर दूध को पूरी तरह से डीकंपोज करने के लिए पानी को जितनी ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है, वह हजारों लीटर सामान्य पानी की ऑक्सीजन को खत्म कर सकती है. पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, जब 11,000 लीटर जैसी भारी मात्रा में दूध नदी में जाता है, तो ये उस हिस्से के पानी में ऑक्सीजन के स्तर को करीब शून्य कर सकता है, जिससे जलीय जीवों और मछलियों की तत्काल मौत हो सकती है. महीनों तक पानी पीने लायक नहीं रहता पर्यावरणविदों का कहना है कि इसका असर केवल तुरंत नहीं दिखता. दूध बहने के बाद नदी के पारिस्थितिकी तंत्र यानि इकोसिस्टम को जो नुकसान होता है, उसका ‘सेकंड फेज’ ज्यादा खतरनाक होता है. पानी में दूध के सड़ने से जो बैक्टीरिया पनपते हैं, वे महीनों तक पानी को पीने और नहाने के लिए अनुपयुक्त बना देते हैं. तेल और घी से नुकसान धार्मिक तौर पर जब नदी तेल और घी अर्पित करते हैं तो ये पानी से हल्के होते हैं, इसलिए पानी की सतह पर एक अदृश्य या गाढ़ी परत बना लेते हैं. यह परत हवा की ऑक्सीजन को पानी में घुलने से रोक देती है. साथ ही, यह सूरज की रोशनी को पानी के नीचे तक जाने से रोकती है, जिससे पानी के अंदर मौजूद पौधे प्रकाश संश्लेषण नहीं कर पाते और पर्यावरण का संतुलन बिगड़ जाता है. बैक्टीरिया और फंगस का बढ़ना दूध और दही में मौजूद लैक्टोज और प्रोटीन पानी में जाकर हानिकारक बैक्टीरिया और फंगस के लिए भोजन का काम करते हैं. इससे पानी में सड़न पैदा होती है, बदबू आती है और पानी पीने या नहाने योग्य नहीं रह जाता. कपड़ों या साड़ियों का विसर्जन दूध के साथ-साथ साड़ियों या अन्य कपड़ों का विसर्जन पानी में होने पर वो कई हानिकारक चीजें पानी में घोलते हैं, जिसमें टेक्सटाइल डाइस और माइक्रोप्लास्टिक्स होते हैं, टेक्सटाइल डाइस रासायनिक रंग होते हैं. ये तत्व नदी के तलवे में जमा होकर जलीय वनस्पतियों का दम घोंट देते हैं. तो इसका सीधा मतलब ये है कि धार्मिक या सांस्कृतिक कारणों से दूध नदी में बहाना पर्यावरण के लिए अच्छा नहीं माना जाता, खासकर जब मात्रा बहुत ज्यादा हो. वैज्ञानिक और पर्यावरणीय दृष्टिकोण से देखा जाए, तो इन सामग्रियों को नदी में डालने से पानी प्रदूषित होता है. विज्ञान की भाषा में इसे ऑर्गेनिक पोल्यूशन (जैविक प्रदूषण) कहा जाता है. क्या हैं भारत के जल कानून भारतीय जल अधिनियम, 1974 की धारा 24 पानी में प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण की बात करती है. ये कहती है कि किसी भी ऐसी प्रदूषणकारी या जैविक सामग्री को नदियों, धाराओं या कुओं में डालने पर सख्त रोक लगानी चाहिए, क्योंकि ये पानी की गुणवत्ता को खराब करते हैं. एनजीटी ने यह भी पाया कि सीपीसीबी के पास वर्तमान में ऐसी कोई स्पष्ट और समर्पित गाइडलाइन नहीं है जो धार्मिक अनुष्ठानों में नदी में दूध चढ़ाने को नियमबद्ध या रेगुलेट करती हो. अदालत ने इसी कमी को पूरा करने के लिए दोनों बोर्डों से कहा है कि वे वैज्ञानिक डेटा जुटाएं और यदि जरूरी हो, तो भविष्य के लिए नए नियम या दिशा-निर्देश सुझाएं. प्राचीन काल से अब तक कितना अंतर प्राचीन काल में नदियों में जो सामग्री दूध समेत अर्पित की जाती थी, वो प्रतीकात्मक तौर पर होती थी और आबादी बहुत कम होने की वजह से ऐसा करने वाले भी बहुत कम होते हैं. ऐसा चढ़ाया जाने वाला दूध नदियों के लिए कभी समस्या नहीं बनता था लेकिन आज टैंकरों के माध्यम से हजारों लीटर दूध नदी में बहाना सीधे तौर पर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है. फिर पुराने समय में नदियां अपने पूरे वेग के साथ बहती थीं. तब यदि कोई प्रतीकात्मक रूप से दूध या तेल अर्पित करता था, तो नदी की अपनी ‘खुद को साफ करने की क्षमता’ उसे संभाल लेती थी. आज नदियों में पानी का बहाव कम हो गया है. अब हमारी आबादी करोड़ों में है. जब हजारों लीटर दूध या टन के हिसाब से सामग्री एक साथ नदियों में बहती है, तो नदियां उस बोझ को संभाल नहीं पातीं. Source link

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दिल्ली की गर्मी में मिल गया छुपा हुआ गांव, यहां पहुंचते ही...

Last Updated:May 21, 2026, 08:17 IST दिल्ली की भागदौड़, ट्रैफिक और भीषण गर्मी के बीच अगर आप कुछ देर सुकून और गांव जैसा शांत माहौल महसूस करना चाहते हैं, तो प्रगति मैदान के पास स्थित क्राफ्ट म्यूजियम आपके लिए बेहतरीन जगह साबित हो सकती है. यहां मिट्टी के घर, देसी गलियां, पारंपरिक कला और शांत वातावरण लोगों को शहर के शोर से दूर एक अलग ही दुनिया का एहसास कराते हैं. खास बात यह है कि यह जगह न सिर्फ संस्कृति प्रेमियों बल्कि सोशल मीडिया और aesthetic तस्वीरों के शौकीनों के बीच भी तेजी से लोकप्रिय हो रही है.टूर दिल्ली की गर्मी इन दिनों लोगों का हाल बेहाल कर रही है. ऐसे में अगर आप ऐसी जगह ढूंढ रहे हैं जहां कुछ देर सुकून मिले, ठहराव महसूस हो और शहर की भागदौड़ से अलग माहौल दिखे, तो दिल्ली का क्राफ्ट म्यूजियम आपके लिए एक शानदार ऑप्शन हो सकता है. यहां पहुंचते ही ऐसा एहसास होता है जैसे अचानक किसी गांव की गलियों में आ गए हों. मिट्टी के घर, देसी कला, शांत माहौल और हर तरफ भारतीय संस्कृति की झलक इस जगह को खास बना देती है. दिल्ली की ट्रैफिक, शोर और धूप से निकलकर जैसे ही आप क्राफ्ट म्यूजियम के अंदर कदम रखते हैं, माहौल पूरी तरह बदल जाता है. यहां मिट्टी से बने घर, लकड़ी के दरवाजे और देसी अंदाज में बनी छोटी-छोटी गलियां गांव जैसा एहसास कराती हैं. ऐसा लगता है जैसे शहर से दूर किसी शांत जगह पर पहुंच गए हों. अगर आप इंस्टाग्राम या सोशल मीडिया पर अलग और aesthetic तस्वीरें डालना पसंद करते हैं, तो यह जगह आपके लिए परफेक्ट है. मिट्टी की दीवारें, रंगीन सजावट और देसी बैकग्राउंड आपकी तस्वीरों को बिल्कुल अलग लुक दे सकते हैं.वैसे यहां पहुचना भी असान है क्राफ्ट म्यूजियम प्रगति मैदान के पास स्थित है. मेट्रो से जाना सबसे आसान रहता है. Add News18 as Preferred Source on Google अगर आपको हैंडमेड चीजें पसंद हैं, तो यह जगह और भी खास लग सकती है. यहां कई बार कलाकार अपने हाथों से मिट्टी के बर्तन बनाते, पेंटिंग करते या पारंपरिक चीजें तैयार करते दिख जाते हैं. इसे देखकर समझ आता है कि हमारी पुरानी कला कितनी खूबसूरत और मेहनत भरी है. यहां अलग-अलग राज्यों की पारंपरिक झोपड़ियां और संस्कृति को बेहद खूबसूरती से दिखाया गया है. कहीं राजस्थान का देसी टच दिखेगा, तो कहीं उत्तर-पूर्व और गुजरात की झलक नजर आएगी. हर कोना आपको भारत की अलग-अलग परंपराओं से जोड़ता है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

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भारत ने UN में पाकिस्तान को घेरा, सीमा पार आतंकवाद पर सख्त...

होमताजा खबरदेश अरे तुम तो अपने ही लोगों पर बम बरसाते हो…UN में भारत ने पाकिस्तान को रगड़ा Last Updated:May 21, 2026, 07:25 IST India Slams Pakistan: भारत ने संयुक्त राष्ट्र में आतंकवाद पर पाकिस्तान को खूब सुनाया है. भारत ने पाकिस्तान पर सीमा पार आतंकवाद और अफगानिस्तान में एयरस्ट्राइक के जरिए नागरिकों की मौत का आरोप लगाया. भारत ने 1971 के नरसंहार का भी जिक्र किया और कहा कि तुम तो खुद अपने लोगों पर ही बम बरसाते हो. ख़बरें फटाफट संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि ने पाकिस्तान को जमकर लताड़ लगाई है. India Slams Pakistan: भारत ने आतंकवाद पर एक बार फिर पाकिस्तान को लताड़ा है. यूएन यानी संयुक्त राष्ट्र में भारत ने पाकिस्तान की बोलती बंद कर दी. यूएन में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी हरीश ने पाकिस्तान पर तीखा हमला बोला. पाकिस्तान पर प्रहार करते हुए उन्होंने कहा कि जिस देश का इतिहास नरसंहार और हिंसा से जुड़ा रहा है, वह भारत के आंतरिक मामलों पर बोलने का नैतिक अधिकार नहीं रखता. इतना ही नहीं, सीमा पार आतंकवाद पर भारत ने UN में कड़ा संदेश दिया. पी हरीश ने आतंकवाद को समर्थन देने वाले देशों को जवाबदेह ठहराने की मांग की. संयुक्त राष्ट्र में गुरुवार को भारत ने UNAMA यानी अफ़ग़ानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि साल 2026 के पहले तीन महीनों में पाकिस्तान की सेना की सीमा पार कार्रवाई और एयरस्ट्राइक के कारण अफगानिस्तान में 750 नागरिकों की मौत और घायल होने के मामले सामने आए. UNAMA के मुताबिक, 95 में से 94 घटनाओं के लिए पाकिस्तानी सुरक्षा बल जिम्मेदार थे. UNAMA का पूरा नाम है- यूनाइटेड मिशन असिस्टेंस मिशन इन अफगानिस्तान. अफगानिस्तान के नाम पर पाकिस्तान को भारत ने धोया पाकस्तान ने जिस तरह से अफगानिस्तान पर अटैक किया था, उसे लेकर भारत ने उसे अच्छे से धोया. भारत ने आगे कहा कि इसी साल रमजान के दौरान मार्च महीने में पाकिस्तान ने काबुल के ओमिद एडिक्शन ट्रीटमेंट हॉस्पिटल पर एयरस्ट्राइक की थी. इस हमले में 269 नागरिक मारे गए और 122 लोग घायल हुए. भारत ने कहा कि यह हमला तरावीह की नमाज के बाद हुआ, जब लोग मस्जिद से बाहर निकल रहे थे. 1971 जंग का जिक्र भारत ने यह भी कहा कि यूनाइटेड मिशन असिस्टेंस मिशन इन अफगानिस्तान के अनुसार पाकिस्तान की सीमा पार हिंसा के कारण 94,000 से ज्यादा लोग विस्थापित हुए. भारत ने 1971 के ऑपरेशन सर्चलाइट का भी जिक्र करते हुए कहा कि पाकिस्तान ने अपने ही नागरिकों के खिलाफ नरसंहार और 4 लाख महिलाओं के साथ सामूहिक दुष्कर्म जैसी घटनाओं को अंजाम दिया था. भारत ने कहा कि पाकिस्तान लगातार अपनी अंदरूनी विफलताओं को छिपाने के लिए हिंसा और प्रचार का सहारा लेता रहा है. सीमा पार आतंकवाद पर भारत का UN में कड़ा संदेश संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी हरीश ने कहा कि सीमा पार से होने वाला आतंकवाद आज भी क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बना हुआ है. उन्होंने कहा कि भारत कई दशकों से आतंकवाद का शिकार रहा है. भारत ने साफ कहा कि जो देश आतंकवाद को समर्थन, पनाह या मदद देते हैं, उन्हें जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए. उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी कारण के नाम पर आम नागरिकों पर हमला कभी सही नहीं ठहराया जा सकता. About the Author Shankar Pandit Shankar Pandit has more than 10 years of experience in journalism. Before News18 (Network18 Group), he had worked with Hindustan times (Live Hindustan), NDTV, India News Aand Scoop Whoop. Currently he handle ho…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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