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समस्तीपुर में गन्ना खेती का नया तरीका…. एकल गांठ विधि से घटेगी...

Last Updated:May 20, 2026, 23:32 IST समस्तीपुर में गन्ने की खेती करने वाले किसानों के लिए अब वैज्ञानिक तकनीक एक नई उम्मीद लेकर आई है. हर सीजन में बाजार से महंगे बीज खरीदने की मजबूरी जहां खेती की लागत बढ़ा देती है, वहीं कई बार उत्पादन भी संतोषजनक नहीं मिलता. ऐसे में डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के वैज्ञानिकों द्वारा सुझाई गई “एकल गांठ विधि” किसानों के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है. इस तकनीक के जरिए किसान अपने ही खेत में कम लागत में स्वस्थ और अधिक पौधे तैयार कर बेहतर उत्पादन हासिल कर सकते हैं. ख़बरें फटाफट समस्तीपुर. गन्ने की खेती करने वाले अधिकांश किसान हर सीजन में बाजार से बीज खरीदते हैं, जिससे खेती की लागत बढ़ जाती है. कई बार महंगे बीज लेने के बावजूद पौधों की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं मिलती. ऐसे में यदि किसान अपने ही खेत में तैयार गन्ने से पौधा बना लें, तो खर्च कम होने के साथ-साथ बेहतर उत्पादन भी हासिल किया जा सकता है. इसी उद्देश्य से लोकल लैटिन की टीम ने पूसा स्थित डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के अनुसंधान केंद्र पहुंचकर वैज्ञानिक डॉ. बलवंत कुमार से खास बातचीत की. वैज्ञानिक ने बताया कि गन्ना ऐसी फसल है जिसे आधुनिक तकनीक के जरिए किसान स्वयं तैयार कर सकते हैं. इसके लिए “एकल गांठ विधि” सबसे उपयोगी और किफायती तरीका माना जा रहा है. इस विधि में किसान सबसे पहले स्वस्थ और अच्छी गुणवत्ता वाले गन्ने का चयन करते हैं. इसके बाद गन्ने को विशेष कटर मशीन से इस प्रकार काटा जाता है कि प्रत्येक टुकड़े में केवल एक गांठ मौजूद रहे.यही गांठ आगे चलकर नए पौधे के रूप में विकसित होती है. वैज्ञानिकों के अनुसार यह तरीका कम जगह में अधिक पौधा तैयार करने के लिए बेहद प्रभावी साबित हो रहा है. नमी का सही प्रबंधन पौधा तैयार करने में निभाता है अहम भूमिकाडॉ. बलवंत कुमार ने बताया कि कटिंग करने के बाद किसान इन एकल गांठों को ट्रे, प्लास्टिक ग्लास या छोटे कंटेनर में लगा सकते हैं. इसके लिए वर्मी कंपोस्ट, कोकोपीट या अच्छी भुरभुरी मिट्टी का उपयोग करना चाहिए ताकि पौधों को पर्याप्त पोषण और नमी मिल सके.गन्ने की गांठ को लगाने के बाद नियमित रूप से नमी बनाए रखना बेहद जरूरी होता है. यदि मिट्टी सूख जाती है तो अंकुरण प्रभावित हो सकता है. वैज्ञानिकों के अनुसार लगभग 25 से 35 दिनों के भीतर इन गांठों से मजबूत पौधे तैयार हो जाते हैं. जब पौधे पूरी तरह विकसित हो जाएं, तब किसान उन्हें खेत में रोप सकते हैं. यदि खेत तैयार न हो या पौधों को कुछ दिन और सुरक्षित रखना हो, तो ट्रे में ही नमी बनाए रखते हुए पौधों को रखा जा सकता है. इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि कम बीज में अधिक पौधे तैयार हो जाते हैं और रोगमुक्त पौध मिलने की संभावना भी बढ़ जाती है. इससे किसान अतिरिक्त पौध तैयार कर दूसरे किसानों को बेचकर अतिरिक्त आमदनी भी प्राप्त कर सकते हैं. सही किस्म का चयन बढ़ा सकता है उत्पादन वैज्ञानिक ने बातचीत के दौरान यह भी स्पष्ट किया कि केवल पौधा तैयार करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि सही किस्म का चयन करना भी उतना ही जरूरी है. उन्होंने बताया कि बिहार और आसपास के जिलों के किसानों के लिए राजेंद्र गन्ना-1 काफी उपयुक्त किस्म मानी जाती है. यह किस्म बेहतर उत्पादन देने के साथ किसानों को अच्छा लाभ भी देती है. इसके अलावा किसान CoP 112 किस्म का भी उपयोग कर सकते हैं, जो कई क्षेत्रों में बेहतर परिणाम दे रही है. वहीं जल जमाव वाले क्षेत्रों के लिए “राजेंद्र गन्ना-2” अधिक लाभकारी मानी जाती है क्योंकि यह जलभराव को सहन करने की क्षमता रखती है. वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि किसान आधुनिक तकनीक और सही किस्म का उपयोग करें तो गन्ने की खेती अधिक लाभकारी बन सकती है. आज के समय में जब खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, About the Author Madhuri Chaudhary पिछले 4 साल से मीडिया इंडस्ट्री में काम कर रही हूं और फिलहाल News18 में कार्यरत हूं. इससे पहले एक MNC में भी काम कर चुकी हूं. यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश की बीट कवर करती हूं. खबरों के साथ-साथ मुझे…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Samastipur,Bihar Source link

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मीन राशि वालों की आज चमक उठेगी किस्मत! ग्रहो की बरसेंगी कृपा,...

Last Updated:May 21, 2026, 03:25 IST Aaj Ka Meen Rashifal 21 May 2026: मीन राशि वालों के लिए आज का दिन अच्छे परिणाम लेकर आएगा. पारिवारिक जीवन में प्रेम और आपसी सामंजस्य बना रहेगा. सेहत अच्छी रहेगी और आप पूरे दिन सक्रिय बने रहेंगे. समय पर संतुलित और पोषक आहार लेने से सेहत और बेहतर होगी. मीन राशि के जातकों के लिए आज का दिन शुभ संकेत लेकर आया है. कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत का अच्छा परिणाम देखने को मिल सकता है और सफलता के नए रास्ते खुलेंगे. नौकरी करने वालों को नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं, वहीं पदोन्नति या सम्मान मिलने के भी योग बन रहे हैं. आर्थिक स्थिति मजबूत रहेगी और निवेश से जुड़े फैसलों के लिए समय अनुकूल रहेगा. दिनभर सकारात्मक ऊर्जा और उत्साह बना रहेगा. उज्जैन के प्रसिद्ध ज्योतिष आचार्य आनंद भारद्वाज के अनुसार, आज गुरुवार का दिन मीन राशि के जातकों के लिए बेहद अनुकूल रहने वाला है. प्रेम जीवन में अपनापन और विश्वास बढ़ेगा, जिससे रिश्ते पहले से ज्यादा मजबूत और खुशहाल बनेंगे. पार्टनर के साथ बेहतर संवाद आपकी बॉन्डिंग को और गहरा करेगा. मीन राशि वालों का करियर राशिफलमीन राशि के जातकों के लिए आज करियर के क्षेत्र में तालमेल और सूझबूझ सफलता की कुंजी बनेगी. कार्यस्थल पर सहकर्मियों का भरपूर सहयोग मिलेगा, जिससे आपके अधूरे काम तेजी से पूरे हो सकते हैं. आपका धैर्य, सकारात्मक सोच और विनम्र व्यवहार लोगों को प्रभावित करेगा. टीम के साथ बेहतर समन्वय आपकी छवि को मजबूत बनाएगा और कार्यक्षेत्र में सम्मान बढ़ने के संकेत भी मिल रहे हैं. मीन राशि वालों का व्यापार राशिफलमीन राशि के व्यापारियों के लिए आज का दिन सफलता और लाभ के नए संकेत लेकर आया है. कारोबार में सकारात्मक बदलाव दिखाई देंगे और काम की रफ्तार बढ़ेगी. किसी विश्वसनीय मित्र या बिज़नेस पार्टनर के सहयोग से नए अवसर आपके सामने आ सकते हैं. साथ ही किसी बड़े प्रोजेक्ट या महत्वपूर्ण ऑर्डर मिलने के भी प्रबल योग बन रहे हैं, जो आपके व्यापार को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है. मीन राशि वालों का स्वास्थ राशिफलमीन राशि के जातकों के लिए आज स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद अनुकूल दिन रहेगा. शरीर में ऊर्जा और ताजगी बनी रहेगी, वहीं पुराने रोगों से राहत मिलने के भी सकारात्मक संकेत हैं. समय पर संतुलित और पोषक आहार लेने से सेहत और बेहतर होगी. बच्चों का स्वास्थ्य भी सामान्य और सुदृढ़ रहेगा. कुल मिलाकर आज का दिन स्वास्थ्य के मामले में संतोष और प्रसन्नता देने वाला रहेगा. मीन राशि वालों का आर्थिक राशिफलआज आर्थिक मामलों में आपके लिए सकारात्मक और लाभकारी परिस्थितियां बनती नजर आ रही हैं. Bधन संबंधी जरूरत पड़ने पर मित्रों और करीबी लोगों का पूरा सहयोग मिलेगा. पुराने निवेश से अच्छे लाभ के संकेत हैं, जिससे आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है. साथ ही नए निवेश के अवसर भी सामने आ सकते हैं.यदि आप धैर्य और समझदारी के साथ फैसले लेते हैं, तो आने वाले समय में आपको इसके शानदार परिणाम और लाभ मिलने की संभावना है. मीन राशि वालों का लव लाइफ राशिफलमीन राशि के जातकों के लिए आज प्रेम और वैवाहिक जीवन खुशियों से भरा रहने वाला है. शादीशुदा लोगों के रिश्तों में अपनापन और तालमेल बढ़ेगा, जिससे संबंध और मजबूत होंगे. प्रेमी जोड़ों के लिए दिन रोमांस से भरपूर रहेगा और साथी के साथ बिताए पल खास बनेंगे. वहीं जो लोग अभी सिंगल हैं, उनके जीवन में नई शुरुआत के संकेत हैं, मनपसंद साथी से मुलाकात या प्रेम प्रस्ताव मिलने के योग बन रहे हैं. मीन राशिफल वाले जरूर करेंयह उपाय आज आपके लिए लकी नंबर 4 रहेगा. यह अंक आपको सफलता और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करेगा. जो जातक धर्म-कर्म में रुचि रखते हैं, वे आज देव गुरु ब्रह्मस्पति के मंदिर जाकर भगवान का पूजन करे. साथ ही गरीबों को पिली वस्तु का दान करें. यह उपाय मानसिक शांति देगा और आत्मविश्वास बढ़ाएगा. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Ujjain,Madhya Pradesh Source link

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India Italy Agreements: कपड़ा, चमड़ा, फार्मास्यूटिकल्स… भारत-इटली के बीच हुए 15 समझौते,...

होमताजा खबरदेश कपड़ा, चमड़ा, फार्मास्यूटिकल्स… भारत-इटली के बीच हुए 15 समझौते Last Updated:May 20, 2026, 23:33 IST भारत और इटली के बीच रिश्ते अब सिर्फ डिप्लोमैटिक मुलाकातों तक सीमित नहीं रहे. दोनों देशों ने कपड़ा, चमड़ा, फार्मास्यूटिकल्स, ग्रीन एनर्जी, टेक्नोलॉजी और इंडस्ट्रियल सहयोग समेत 15 बड़े समझौतों पर सहमति बनाई है. इन डील्स को भारत-इटली आर्थिक साझेदारी के नए दौर की शुरुआत माना जा रहा है, जिससे कारोबार, निवेश और रोजगार के नए मौके खुल सकते हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के बीच हुई हाईलेवल मीटिंग के बाद दोनों देशों ने अपने रिश्तों को अपग्रेड करते हुए स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप की घोषणा की. इसके साथ ही 15 डील पर साइन हुई, ज‍िसमें ट्रेड को 20 ब‍िल‍ियन यूरो (लगभग 1.8 लाख करोड़ रुपये) के पार ले जाना और ‘मेक इन इंडिया-मेक इन इटली’ में भागीदारी बढ़ाना है. इन फैसलों से कपड़ा, चमड़ा, फार्मास्यूटिकल्स क्षेत्र को बड़ा फायदा होने वाला है. हम आपको हर समझौते में भारत के ल‍िए क्‍या है, वो बता रहे हैं. स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप क्या है समझौता: दोनों देशों ने अपने पारंपरिक द्विपक्षीय संबंधों को अपग्रेड करते हुए विशेष रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया है. इससे क्या मिलेगा: इससे भारत और इटली के बीच व्यापार, तकनीक, क्लीन एनर्जी, सुरक्षा और इनोवेशन के क्षेत्रों में सहयोग को अभूतपूर्व मजबूती मिलेगी. साथ ही, दोनों देशों के नागरिकों के बीच आपसी संबंध, शिक्षा, संस्कृति और गतिशीलता के नए रास्ते खुलेंगे. ड‍िफेंस एंड स‍िक्‍योर‍िटी क्या है समझौता: दोनों देशों ने रक्षा क्षेत्र में इंडस्ट्रियल रोडमैप और जॉइंट डिक्लेरेशन ऑफ इंटेंट पर हस्ताक्षर किए हैं. इसके तहत ज्‍वाइंट म‍िलि‍ट्री एक्‍सरसाइज, इंटेलिजेंस शेयरिंग और आतंकवाद विरोधी नेटवर्क को मजबूत किया जाएगा. इससे क्या मिलेगा: इस समझौते से इटली की दिग्गज रक्षा कंपनियों के लिए भारत में सैन्य उपकरणों के कोड‍िजाइन, कोप्रोडक्‍शन का रास्ता खुलेगा. भारतीय सेनाओं को अत्याधुनिक डिफेंस टेक्नोलॉजी मिलेगी और भारत को रक्षा विनिर्माण का ग्लोबल हब बनने में मदद मिलेगी. ट्रेड एंड इन्‍वेस्‍टमेंट क्या है समझौता: दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार को 2029 तक बढ़ाकर लगभग 1.8 लाख करोड़ रुपये करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है. साथ ही भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते को जल्द लागू करने पर सहमति बनी है. इससे क्या मिलेगा: भारत में पहले से सक्रिय 800 से अधिक इतालवी कंपनियों का निवेश बढ़ेगा. भारतीय कपड़ा, चमड़ा, फार्मास्यूटिकल्स और कृषि-खाद्य उत्पादों के लिए यूरोप का एक बड़ा बाजार खुलेगा, जिससे भारत में बड़े पैमाने पर नए रोजगार पैदा होंगे और आर्थिक विकास को गति मिलेगी. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर क्या है समझौता: भारत के मानव-केंद्रित तकनीक दृष्टिकोण और इटली की अल्गोर-एथिक्स परंपरा को मिलाकर दोनों देश सुरक्षित एआई, डिजिटल क्षमता निर्माण और साइबर सुरक्षा में सहयोग करेंगे. इससे क्या मिलेगा: दोनों देशों के आईटी विशेषज्ञ और सुपरकंप्यूटर्स मिलकर अगली पीढ़ी की एआई तकनीक विकसित करेंगे. भारतीय फिनटेक और टेक-स्टार्टअप्स को ग्लोबल प्लेटफॉर्म मिलेगा. इसके अलावा, साइबर हमलों से निपटने के लिए एक मजबूत और सुरक्षित डिजिटल स्पेस का निर्माण होगा. अंतरिक्ष और सैटेलाइट टेक्नोलॉजी क्या है समझौता: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और इटली की अंतरिक्ष एजेंसी के बीच अंतरिक्ष अन्वेषण, सैटेलाइट विकास और रिमोट सेंसिंग तकनीकों के क्षेत्र में संयुक्त अनुसंधान के लिए समझौता हुआ है. इससे क्या मिलेगा: भारत की किफायती एवं उन्नत अंतरिक्ष क्षमता और इटली की एयरोस्पेस इंजीनियरिंग के मिलन से कम लागत वाले कमर्शियल सैटेलाइट्स का निर्माण होगा. अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में भारतीय वैज्ञानिकों को नई ग्लोबल लैब और अत्याधुनिक तकनीकों का एक्सेस मिलेगा. ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन मिशन क्या है समझौता: स्वच्छ ऊर्जा, रिन्यूएबल इंफ्रास्ट्रक्चर, स्मार्ट ग्रिड और हाइड्रोजन टेक्नोलॉजी के विकास के लिए दोनों देशों ने ऊर्जा साझीदारी को नई दिशा देने की घोषणा की है. इससे क्या मिलेगा: भारत का ग्रीन हाइड्रोजन एक्सपोर्ट हब बनने का सपना सच होगा. इटली की उन्नत रिन्यूएबल ऊर्जा तकनीकों की मदद से भारत को अपने नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन लक्ष्य को समय से पहले हासिल करने में मदद मिलेगी और देश में स्वच्छ ऊर्जा सस्ती होगी. क्रिटिकल मिनरल्स और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग क्या है समझौता: दोनों देशों ने भविष्य की तकनीकों के लिए जरूरी क्रिटिकल मिनरल्स (जैसे लिथियम, कोबाल्ट) की सप्लाई चेन को सुरक्षित करने और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग पर हाथ मिलाया है. इससे क्या मिलेगा: इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs), सेमीकंडक्टर्स और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण के क्षेत्र में भारत की विदेशी निर्भरता कम होगी. भारतीय ऑटोमोटिव और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योगों को कच्चे माल की बिना रुके आपूर्ति सुनिश्चित होगी, जिससे घरेलू स्तर पर उत्पादन लागत काफी घट जाएगी. भारतीय नर्सों के लिए इटली में रोजगार क्या है समझौता: भारत से इटली में नर्सिंग प्रोफेशनल्स की गतिशीलता और आसान आवाजाही को सुविधाजनक बनाने के लिए दोनों देशों के बीच सहमति बनी है. इससे क्या मिलेगा: यह समझौता भारतीय नर्सों के लिए इटली में रोजगार के बड़े और नए अवसर पैदा करेगा. इससे वैश्विक स्तर पर भारतीय कार्यबल की गुणवत्ता को पहचान मिलेगी और दोनों देशों के बीच स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं की क्षमता निर्माण में सुधार होगा. प्रवासन और गतिशीलता क्या है समझौता: दोनों नेताओं ने ‘माइग्रेशन एंड मोबिलिटी पार्टनरशिप एग्रीमेंट’ को पूरी तरह लागू करने की प्रतिबद्धता जताई है, जिससे कानूनी रूप से प्रतिभाओं का आदान-प्रदान आसान हो सके. इससे क्या मिलेगा: भारतीय छात्रों, शोधकर्ताओं और स्किल्ड प्रोफेशनल्स (जैसे इंजीनियर्स, डॉक्टर्स और नर्सों) के लिए इटली में पढ़ाई और नौकरी के रास्ते बेहद आसान हो जाएंगे. इससे अवैध प्रवासन पर रोक लगेगी और भारतीय युवाओं को यूरोपीय वर्क परमिट आसानी से मिल सकेगा. कनेक्टिविटी और आईएमईसी कॉरिडोर क्या है समझौता: दोनों देश भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक कॉरिडोर (IMEEC) के त्वरित क्रियान्वयन और बंदरगाहों के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए पूरी तरह सहमत हुए हैं. इससे क्या मिलेगा: भारत से यूरोप तक माल पहुंचाने का समय और लागत 40% तक कम हो जाएगी. इटली यूरोप के लिए भारत का ‘एनर्जी और लॉजिस्टिक्स गेटवे’ बनेगा. भारतीय समुद्री इंफ्रास्ट्रक्चर आधुनिक होगा और वैश्विक व्यापार में भारत की रणनीतिक स्थिति मजबूत होगी. वैश्विक गठबंधन और समुद्री सुरक्षा क्या है समझौता: इटली ने भारत के नेतृत्व वाले अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA), आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढांचे के लिए गठबंधन (CDRI) और वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन (GBA) में सक्रिय सहयोग का संकल्प लिया है. इससे क्या मिलेगा: वैश्विक मंचों पर भारत की साख बढ़ेगी.

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मुस्लिम से शादी करने वाली हिंदू महिला को मिलेगा पूरा हक, देना...

होमताजा खबरwest bengalKolkata मुस्लिम से शादी करने वाली हिंदू महिला को गुजारा भत्ता देना पड़ेगा, HC का फैसला Last Updated:May 20, 2026, 23:37 IST कलकत्‍ता हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि मुस्लिम रीति-रिवाजों से शादी करने वाली हिंदू महिला भी गुजारा भत्ता पाने की हकदार है. अदालत ने साफ किया कि जब तक किसी सक्षम अदालत द्वारा विवाह को अवैध घोषित नहीं किया जाता, तब तक पति को भरण-पोषण देना होगा. हाई कोर्ट ने पश्चिम बर्द्धमान की मजिस्ट्रेट अदालत के उस आदेश को बहाल कर दिया, जिसमें महिला को 5 हजार रुपये और उसके नाबालिग बेटे को 4 हजार रुपये अंतरिम भरण-पोषण देने का निर्देश दिया गया था. हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि केवल तकनीकी आधारों पर किसी महिला और बच्चे को राहत से वंचित नहीं किया जा सकता है. Calcutta High Court: कलकत्‍ता हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में साफ कर दिया है कि अगर कोई हिंदू महिला मुस्लिम रीति-रिवाजों के अनुसार शादी करती है, तब भी उसे गुजारा भत्ता पाने का पूरा अधिकार होगा. अदालत ने कहा कि जब तक किसी सक्षम अदालत द्वारा शादी को अवैध घोषित नहीं किया जाता, तब तक पति अपनी पत्नी के भरण-पोषण के लिए जिम्मेदार रहेगा. यह मामला पश्चिम बंगाल के पश्चिम बर्द्धमान जिले का है. यहां एक हिंदू महिला ने आरोप लगाया था कि शादी के बाद उसके पति ने उसे छोड़ दिया और घरेलू हिंसा भी की. इसके बाद महिला ने मजिस्ट्रेट अदालत का दरवाजा खटखटाया. अदालत ने महिला को अंतरिम भरण-पोषण के तौर पर हर महीने 5 हजार रुपये और उसके नाबालिग बेटे के लिए 4 हजार रुपये देने का आदेश दिया था. हालांकि, फरवरी 2024 में आसनसोल की एक पुनरीक्षण अदालत ने इस आदेश को रद्द कर दिया था. पति ने दलील दी थी कि शादी कानूनी रूप से मान्य नहीं है, इसलिए भरण-पोषण नहीं दिया जा सकता. पुनरीक्षण अदालत ने इसी आधार पर मजिस्ट्रेट के आदेश को खारिज कर दिया था. लेकिन अब कलकत्‍ता हाईकोर्ट ने उस फैसले को पलट दिया है. न्यायमूर्ति चैताली चटर्जी ने अपने आदेश में कहा है कि पुनरीक्षण अदालत ने सामाजिक न्याय और महिलाओं के अधिकारों से जुड़े कानूनी सिद्धांतों को नजरअंदाज किया. हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि केवल तकनीकी आधारों पर किसी महिला और बच्चे को राहत से वंचित नहीं किया जा सकता है. अदालत ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि मुस्लिम पुरुष अपनी पत्नी को भरण-पोषण देने के लिए बाध्य है, जब तक विवाह को किसी सक्षम अदालत द्वारा अमान्य घोषित न कर दिया जाए. इसके साथ ही हाई कोर्ट ने मजिस्ट्रेट अदालत के पुराने आदेश को फिर से बहाल कर दिया और पति को निर्देश दिया कि वह तय की गई अंतरिम भरण-पोषण राशि का भुगतान करे. About the Author Anoop Kumar MishraAssistant Editor Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at News18 Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation, defence, paramilitary forces, international security affairs…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Kolkata,West Bengal Source link

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पाकिस्तान में दो गुटों की झड़प में मारे 14 आतंकवादी, सेना चला...

Last Updated:May 21, 2026, 00:27 IST दोनों गुटों के बीच मुख्य विवाद वसूली और स्थानीय इलाके में प्रभुत्व स्थापित करने को लेकर था. 20 मई 2026 की झड़प इसी विवाद का नतीजा थी, इसमें एक गुट का कमांडर मुमताज इम्ती है, इसमें उसके कई साथी मारे गए हैं. खैबर पख्तूनख्वा. (AP) पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में बुधवार को दो सशस्त्र गुटों के बीच झड़प में कम से कम 14 आतंकवादी मारे गए. इनमें कई लोग घायल हुए हैं. पुलिस ने बताया कि झड़प मध्य कुर्रम जिले के मनातो कामरान इलाके में हुई है. यह अफगानिस्तान सीमा के नजदीक है. इस झड़प में आतंकी कमांडर काजिम और मुमताज इम्ती के गुटों के शामिल थे. अधिकारी ने कहा कि गोलीबारी में मुमताज इम्ती भी मारा गया. झड़प के बाद स्थानीय लोगों ने शवों को उसी इलाके में दफना दिया. मध्य कुर्रम में कई आतंकवादी गुटों की मौजूदगी की खबरों के चलते कई बार अभियान चलाए गए हैं. सेंट्रल कुर्रम इलाके में चलाया गया ऑपरेशन अधिकारियों ने बताया कि सेंट्रल कुर्रम में कई उग्रवादी गुटों की मौजूदगी की खबरों मिली है. इन्हें देखते हुए कई ऑपरेशन चलाए गए हैं. उन्होंने आगे बताया कि इन ऑपरेशनों के दौरान सुरक्षा बलों ने उग्रवादियों के ट्रेनिंग सेंटर और ठिकानों को तबाह कर दिया है. पुलिस ने बताया कि माना जा रहा है कि सेंट्रल कुर्रम के मनातो कामरान किल्ले इलाके में कई हथियारबंद गुट सक्रिय हैं. पाकिस्तान के कबायली इलाकों में अक्सर जमीन, जातीय विवाद और पुरानी रंजिशों को लेकर हिंसक झड़पें होती रहती हैं. कमजोर प्रशासनिक पकड़ और हथियारों की आसान उपलब्धता के कारण ऐसे संघर्ष कई बार देखने को मिले. इस बीच बड़े खूनी टकराव में बदल जाते हैं. टीटीपी से जुड़ा है काजिम कमांडर काजिम तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान से जुड़ा एक वांछित आतंकी माना जाता है. वह पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के कुर्रम जिले का रहने वाला बताया जाता है. पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और नागरिकों पर हुए कई हमलों में उसका नाम सामने आ चुका है. अक्टूबर 2025 में प्रांतीय सरकार ने उस पर 10 करोड़ पाकिस्तानी रुपये का इनाम घोषित किया था. दोनों गुटों के बीच मुख्य विवाद वसूली और स्थानीय इलाके में प्रभुत्व स्थापित करने को लेकर था. About the Author सज्जन कुमार दड़बीSenior Sub Editor मैं इस समय News18 App टीम का हिस्सा हूं. News18 App पर आप आसानी से अपनी मनपसंद खबरें पढ़ सकते हैं. मुझे खबरें लिखने का 4 साल से अधिक का अनुभव है और फिलहाल अभी सीनियर सब एडिटर के पद पर हूं. इससे पहले इनशॉर्ट्स औ…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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मेहरानगढ़ का वो शाही कक्ष, जहां दीवारों पर चमकता है सोना… पहली...

Last Updated:May 20, 2026, 23:40 IST Jodhpur Famous Palace: जोधपुर के ऐतिहासिक मेहरानगढ़ किला में स्थित फूल महल आज भी राजपूताना वैभव और शाही संस्कृति की अनोखी झलक दिखाता है. सोने की कारीगरी, शीशों की सजावट, भव्य चित्रकारी और बारीक नक्काशी से सजा यह महल पर्यटकों को खास आकर्षित करता है. कभी राजाओं के निजी दरबार और विशेष मेहमानों के स्वागत का केंद्र रहा. जोधपुर के ऐतिहासिक मेहरानगढ़ किले में स्थित फूल महल अपनी भव्यता और शाही सजावट के कारण पर्यटकों को पहली नजर में ही आकर्षित कर लेता है. यह महल राजसी ठाठ, सुनहरी कलाकारी और पारंपरिक राजपूत स्थापत्य का शानदार उदाहरण माना जाता है. महल के भीतर प्रवेश करते ही दीवारों और छतों पर बनी बारीक नक्काशी लोगों को मंत्रमुग्ध कर देती है. सोने की परत और शीशों की सजावट इसकी खूबसूरती को कई गुना बढ़ा देती है. यहां का माहौल आज भी राजघराने के गौरवशाली इतिहास की झलक दिखाता है. यही वजह है कि देश-विदेश से आने वाले पर्यटक इस शाही हॉल को देखने जरूर पहुंचते हैं. फूल महल का निर्माण 18वीं शताब्दी में महाराजा अभय सिंह ने करवाया था. उस समय इस महल का उपयोग राजपरिवार के निजी विश्राम और खास मेहमानों के स्वागत के लिए किया जाता था. महल के हर हिस्से में उस दौर की शाही जीवनशैली साफ दिखाई देती है. भव्य दरबार शैली में बने इस कक्ष में कभी संगीत सभाएं और विशेष आयोजन भी आयोजित होते थे. इतिहास और संस्कृति में रुचि रखने वाले लोगों के लिए यह स्थान मारवाड़ की विरासत को करीब से महसूस करने का अवसर देता है. आज भी यह हॉल राजपूताना गौरव की अनमोल धरोहर माना जाता है. फूल महल की सबसे बड़ी खासियत इसकी आकर्षक कलाकृतियां और रंगीन भित्तिचित्र हैं. दीवारों और छतों पर बने चित्र राजपूत काल की परंपराओं, युद्धों और सांस्कृतिक आयोजनों को दर्शाते हैं. महल में मौजूद बारीक शीशा कार्य और सजावटी डिजाइन पर्यटकों को लंबे समय तक अपनी ओर खींचे रखते हैं. यहां की हर दीवार मानो इतिहास की कोई कहानी सुनाती नजर आती है. Add News18 as Preferred Source on Google महल के भीतर रखा चंदन की लकड़ी से बना विशेष शाही आकर्षण पर्यटकों का ध्यान सबसे ज्यादा खींचता है.हाथीदांत, सोने और कीमती पत्थरों से सजा यह हिस्सा कभी राजसी मेहमानों के स्वागत का केंद्र हुआ करता था. इसकी बारीक कारीगरी उस समय के कलाकारों की अद्भुत कला को दर्शाती है. पर्यटक यहां पहुंचकर इसकी नक्काशी और डिजाइन को बेहद करीब से निहारते हैं.कई लोग इसे फूल महल का सबसे आकर्षक हिस्सा मानते हैं. पारंपरिक राजस्थानी कला का यह अद्भुत नमूना फोटोग्राफी प्रेमियों के बीच भी काफी लोकप्रिय है. शाम की रोशनी में चमकती सुनहरी सजावट इसकी खूबसूरती को और खास बना देती है. कई पर्यटक यहां पहुंचकर लंबे समय तक इसकी कलाकृतियों और नक्काशी को निहारते रहते हैं. महल के भीतर रखा चंदन की लकड़ी से बना विशेष शाही आकर्षण भी लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचता है. हाथीदांत, सोने और कीमती पत्थरों से सजा यह हिस्सा कभी राजसी मेहमानों के स्वागत का केंद्र माना जाता था. इसकी बारीक कारीगरी उस समय के कलाकारों की अद्भुत कला को दर्शाती है. कई लोग इसे फूल महल का सबसे आकर्षक हिस्सा बताते हैं. फूल महल आज जोधपुर आने वाले पर्यटकों की पसंदीदा जगहों में शामिल हो चुका है. यहां पहुंचने वाले लोग राजसी स्थापत्य और ऐतिहासिक विरासत को करीब से महसूस करते हैं. शाम ढलते ही महल की खूबसूरती और भी ज्यादा निखरकर सामने आती है. सुनहरी रोशनी में चमकती दीवारें, शीशों की सजावट और कलात्मक छतें लोगों को अलग ही अनुभव कराती हैं. फूल महल केवल एक शाही कक्ष नहीं, बल्कि मारवाड़ की समृद्ध संस्कृति और इतिहास का जीवंत प्रतीक माना जाता है. इसकी भव्य वास्तुकला और पारंपरिक सजावट आज भी लोगों को राजपूत काल की याद दिलाती है. जोधपुर शहर से मेहरानगढ़ किले तक आसानी से स्थानीय परिवहन उपलब्ध हो जाता है. वहीं शाम के समय किले से दिखाई देने वाला नीले शहर का दृश्य भी पर्यटकों को बेहद आकर्षित करता है. यही वजह है कि फूल महल आज जोधपुर पर्यटन की खास पहचान बन चुका है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। राजस्थान की ताजा खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें| Source link

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दुबई वाला एहसास अब जोधपुर में… बुर्ज खलीफा डोसा के स्वाद का...

Last Updated:May 20, 2026, 23:16 IST Jodhpur news: जोधपुर के सरस्वती नगर स्थित मल्हार डोसा सेंटर का बुर्ज खलीफा डोसा चर्चा में, बड़ा साइज, प्रेजेंटेशन और स्वाद से भीड़, करीब 50 तरह के डोसे, गर्मी में फव्वारे की व्यवस्था. मल्हार डोसा सेंटर पर केवल बुर्ज खलीफा डोसा ही नहीं, बल्कि करीब 50 तरह के अलग-अलग डोसे तैयार किए जा रहे हैं. इनमें युवाओं से लेकर परिवारों तक की पसंद को ध्यान में रखते हुए कई नए फ्लेवर शामिल किए गए हैं. जोधपुर. सूर्यनगरी जोधपुर का नाम आते ही लोगों के ज़हन में यहां की मिर्ची बड़ा, प्याज कचौरी और पारंपरिक स्वाद की तस्वीर उभर आती है. लेकिन बदलते दौर के साथ अब शहर के लोगों की खानपान की पसंद भी तेजी से बदल रही है. यही वजह है कि इन दिनों जोधपुर में साउथ इंडियन फूड का क्रेज लगातार बढ़ता नजर आ रहा है. खास तौर पर एक ऐसा डोसा लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसका नाम सुनते ही लोग उसकी तरफ खिंचे चले आते हैं. यह खास डोसा है ‘बुर्ज खलीफा डोसा’. दुबई की मशहूर इमारत बुर्ज खलीफा की तर्ज पर तैयार किया जाने वाला यह डोसा अब जोधपुरवासियों के स्वाद का नया आकर्षण बन चुका है. जोधपुर के सरस्वती नगर स्थित मल्हार डोसा सेंटर पर तैयार होने वाला यह बुर्ज खलीफा डोसा अपने बड़े आकार, शानदार प्रेजेंटेशन और खास स्वाद की वजह से लोगों को खूब पसंद आ रहा है. दूर-दूर से लोग यहां सिर्फ इस अनोखे डोसे का स्वाद लेने पहुंच रहे हैं. लंबे और आकर्षक अंदाज में तैयार होने वाला यह डोसा कई तरह के मसालों और खास चटनियों के साथ परोसा जाता है. यही वजह है कि सोशल मीडिया पर भी इसकी काफी चर्चा देखने को मिल रही है. 50 तरह के डोसे बन रहे लोगों की पसंद मल्हार डोसा सेंटर पर केवल बुर्ज खलीफा डोसा ही नहीं, बल्कि करीब 50 तरह के अलग-अलग डोसे तैयार किए जा रहे हैं. इनमें युवाओं से लेकर परिवारों तक की पसंद को ध्यान में रखते हुए कई नए फ्लेवर शामिल किए गए हैं. शाम होते ही यहां लोगों की भारी भीड़ उमड़ने लगती है और लोग अपने दोस्तों व परिवार के साथ अलग-अलग डोसे का स्वाद लेते नजर आते हैं. यहां आने वाले लोगों का कहना है कि जोधपुर में इस तरह का स्वाद और प्रेजेंटेशन पहले कम देखने को मिलता था, लेकिन अब शहर में फूड एक्सपेरिमेंट का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है. खासकर युवा नई-नई डिशेज ट्राय करना पसंद कर रहे हैं. गर्मी में ग्राहकों के लिए खास इंतजाम भीषण गर्मी को देखते हुए मल्हार डोसा सेंटर पर ग्राहकों की सुविधा का भी खास ध्यान रखा गया है. यहां लोगों को ठंडक महसूस हो, इसके लिए फव्वारों की व्यवस्था की गई है, जिससे पूरा माहौल काफी सुकूनभरा और आकर्षक नजर आता है. सेंटर संचालक पंकज का कहना है कि ग्राहकों को सिर्फ अच्छा स्वाद ही नहीं, बल्कि बेहतर माहौल देने की भी कोशिश की जा रही है. उन्होंने बताया कि लोगों को कुछ नया और अलग स्वाद देने के लिए लगातार नए प्रयोग किए जा रहे हैं. यही वजह है कि अब लोग मजाकिया अंदाज में यह भी कहने लगे हैं कि जब जोधपुर में ही बुर्ज खलीफा डोसा मिल रहा है, तो दुबई जाने की क्या जरूरत. About the Author Anand Pandey आनंद पाण्डेय वर्तमान में News18 हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Jodhpur,Rajasthan Source link

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S400 Missile Price Per Unit | S-400 एयर डिफेंस की एक मिसाइल...

होमताजा खबरदेश S-400 की एक मिसाइल की कीमत में आ जाएंगे कई बंगले! चलाने का खर्च उड़ा देगा होश Last Updated:May 20, 2026, 21:52 IST भारत का S-400 एयर डिफेंस सिस्टम आसमान की अभेद्य ढाल है. इसकी एक मिसाइल दागने का खर्च 2.5 करोड़ से 16.6 करोड़ रुपये तक आता है. हाल ही में भारत ने 10,000 करोड़ रुपये में 288 नई मिसाइलों का आर्डर दिया है. महंगे आपरेशनल कॉस्ट के कारण इस सिस्टम का उपयोग केवल बड़े खतरों जैसे फाइटर जेट और क्रूज मिसाइलों को मार गिराने के लिए किया जाता है. S-400 का एक बटन दबाते ही स्वाहा हो जाते हैं करोड़ों रुपये. (File Photo : PTI) नई दिल्ली: भारत का S-400 एयर डिफेंस सिस्टम आसमान का असली सुदर्शन चक्र है. दुश्मन देश भारत की तरफ आंख उठाने से भी डरते हैं. यह सिस्टम पलक झपकते ही दुश्मन के फाइटर जेट और मिसाइलों को नष्ट कर देता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस एडवांस सिस्टम को एक बार चलाने में कितना भारी भरकम बजट खर्च होता है. हाल ही में आई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस खतरनाक सिस्टम की सिर्फ एक मिसाइल दागने की कीमत करोड़ों रुपये में है. इसकी सबसे एडवांस मिसाइल को एक बार फायर करने का खर्च किसी भी आम इंसान को हैरान कर सकता है. रूस से खरीदे गए इस खतरनाक हथियार का आपरेशनल कॉस्ट बहुत ज्यादा है. भारत ने अपनी सुरक्षा को मजबूत करने के लिए इस पर बड़ा इन्वेस्टमेंट किया है. आइए जानते हैं कि इस घातक सिस्टम से एक बार फायर करने पर कितना बड़ा खर्च आता है. S-400 सिस्टम की एक मिसाइल फायर करने की असली कीमत क्या है? S-400 एयर डिफेंस सिस्टम में कुल चार अलग-अलग तरह की मिसाइलें लोड होती हैं. इन मिसाइलों की मारक क्षमता 40 किलोमीटर से लेकर 400 किलोमीटर तक होती है. डिफेंस एक्सपर्ट्स और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इसके एक मिसाइल की कीमत करीब 2.5 करोड़ रुपये से शुरू होती है. इसकी सबसे खतरनाक और लंबी दूरी वाली मिसाइल का नाम 40N6E है. इस मिसाइल की कीमत करीब 8.3 करोड़ रुपये से लेकर 16.6 करोड़ रुपये तक होती है. इसका मतलब है कि अगर भारत इस सिस्टम से केवल एक लंबी दूरी की मिसाइल दागता है तो एक बार में कम से कम 16 करोड़ रुपये से ज्यादा का खर्च आता है. भारत को S-400 के नए मिसाइल आर्डर पर कितना खर्च करना पड़ा है? भारतीय एयरफोर्स अपनी सुरक्षा को लगातार अपडेट कर रही है. डिफेंस प्रोक्योरमेंट काउंसिल ने हाल ही में 288 नई एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइलों की खरीद को मंजूरी दी है. इस नए डिफेंस सौदे की कुल वैल्यू लगभग 10,000 करोड़ रुपये है. इस आर्डर में 120 कम दूरी की मिसाइलें शामिल हैं. इसके साथ ही 168 लंबी दूरी की मिसाइलें भी खरीदी जा रही हैं. इस पूरे आर्डर की कास्ट को देखें तो इसमें मेंटेनेंस और लाइफसाइकिल का खर्च भी शामिल होता है. इस बड़े आर्डर से साफ है कि भारत अपनी आसमानी ढाल को किसी भी कीमत पर कमजोर नहीं होने देना चाहता है. S-400 का आपरेशनल कॉस्ट इतना महंगा क्यों हो जाता है? यह कोई साधारण मिसाइल सिस्टम नहीं है. इसमें एडवांस रडार और सुपरफास्ट गाइडेड कंप्यूटर तकनीक का इस्तेमाल होता है. यह सिस्टम एक साथ 36 टारगेट पर नजर रख सकता है. यह एक बार में 72 मिसाइलें दागने में सक्षम है. इसके रडार की रेंज 600 किलोमीटर तक होती है. इस हाई-टेक रडार को हर समय एक्टिव रखने में बहुत ज्यादा बिजली और फ्यूल का इस्तेमाल होता है. इसके पार्ट्स और मेंटेनेंस के लिए रूस पर निर्भरता भी इसकी आपरेशनल कास्ट को बढ़ा देती है. ट्रेनिंग और लगातार होने वाले आपरेशनल खर्च मिलकर इसे दुनिया का सबसे महंगा डिफेंस सिस्टम बनाते हैं. क्या सस्ते ड्रोन को गिराने के लिए S-400 का उपयोग करना समझदारी है? आजकल युद्ध के मैदान में सस्ते कामिकेजी ड्रोन का इस्तेमाल बहुत बढ़ गया है. एक सामान्य ड्रोन की कीमत महज 15 से 20 लाख रुपये होती है. अगर इस सस्ते ड्रोन को गिराने के लिए भारत S-400 की 8 करोड़ रुपये की मिसाइल फायर करता है तो यह आर्थिक रूप से बड़ा नुकसान है. डिफेंस एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इतने महंगे सिस्टम का इस्तेमाल सिर्फ बड़े खतरों के लिए होना चाहिए. दुश्मन के फाइटर जेट या क्रूज मिसाइल को नष्ट करने के लिए ही इसका उपयोग सबसे बेस्ट माना जाता है. छोटे और सस्ते ड्रोन से निपटने के लिए भारत अब कम दूरी वाले सस्ते एंटी-ड्रोन सिस्टम तैनात कर रहा है. About the Author दीपक वर्माDeputy News Editor दीपक वर्मा News18 हिंदी के डिजिटल न्यूजरूम में डिप्टी न्यूज़ एडिटर के रूप में कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक से भी ज्यादा का अनुभव रखने वाले दीपक मुख्य रूप से विज्ञान, राजनीति और भारत के आंतरिक घ…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Source link

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सतीशन के दांव में अपने ही हुए चित्‍त, सामने खड़े कर दिए...

होमताजा खबरदेश वीडी सतीशन का बड़ा सियासी दांव, नई कैबिनेट में 14 नए चेहरों की एंट्री Last Updated:May 20, 2026, 21:12 IST केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने नई कैबिनेट में 14 नए चेहरों को शामिल कर सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है. पुराने दिग्गजों की जगह युवाओं और पहली बार विधायकों को मौका देकर सतीशन ने साफ संकेत दिया है कि कांग्रेस और यूडीएफ राज्य में नई नेतृत्व टीम तैयार करना चाहते हैं. दो महिला मंत्रियों की एंट्री और विभागों के बंटवारे को लेकर चले विवाद ने भी इस नई सरकार को चर्चा के केंद्र में ला दिया है. आखिरकार केरल में नए मंत्रिमंडल का गठन हो गया है. UDF Government Cabinet: केरल के नए नवेले मुख्‍यमंत्री वीडी सतीशन ने ऐसा दांव चला है, जिसने उनके अपने सियासी साथियों को चारों खाने चित्‍त कर दिया है. इतना ही नहीं, सतीशन के इस कदम से यूडीएफ के भीतर नई खलबली मच गई है. दरअसल, बीते कई दिनों से केरल की राजनीति में सियासी खींचतान का दौर जारी थी. पार्टी में रसूक रखने वाले तमाम नेता नई सरकार में मंत्री पद पाने की होड़ में थे. ऐसे में, सीएम सतीशन के एक फैसले ने सभी की उम्‍मीदों पर पूरी तरह से पानी फेर दिया है. दरअसल, सीएम सतीशन ने पुराने साथियों पर भरोसा जताने की जगह नए चेहरों को अपना सिपहसालार (मंत्री) बनाया है. इसी के साथ मुख्यमंत्री वीडी सतीशन की नई कैबिनेट का गठन भी पूरा हो गया है. उन्‍होंने बिना देरी किए इन सिपहसालारों में विभागों का बंटवारा भी कर दिया है, जिससे सरकार का औपचारिक कामकाज शुरू हो सके. आपको बता दें कि केरल में कांग्रेस के नेतृत्‍व वाली यूडीएफ सरकार की वापसी को खास माना जा रहा है. इससे पहले साल 2011 में ओम्मन चांडी के नेतृत्व में यूडीएफ सरकार सत्ता में आई थी. इस बार की कैबिनेट में युवा नेताओं और नए चेहरों को ज्यादा मौका दिया गया है. नई कैबिनेट के 14 सदस्य पहली बार मंत्री बने हैं. इनमें मुख्यमंत्री वीडी सतीशन भी शामिल हैं. खास बात यह है कि छह मंत्री ऐसे हैं जो पहली बार विधायक चुने गए हैं. इससे साफ संकेत मिलता है कि कांग्रेस और यूडीएफ राज्य में नई नेतृत्व टीम तैयार करना चाहते हैं. इस बार कांग्रेस ने इतिहास रचते हुए कैबिनेट में दो महिला मंत्रियों को भी जगह दी है. बिंदु कृष्णा को श्रम विभाग की जिम्मेदारी मिली है. वहीं केए तुलसी को अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग सौंपा गया है. यह पहली बार है जब कांग्रेस ने केरल में अपनी सरकार में दो महिला मंत्रियों को शामिल किया है. नए चेहरों में एम लिजू को अहम जिम्मेदारी मिली है. उन्हें आबकारी और सहकारिता जैसे महत्वपूर्ण विभाग दिए गए हैं. हालांकि विभागों के बंटवारे को लेकर यूडीएफ के अंदर कई दिनों तक विवाद चलता रहा. सबसे ज्यादा चर्चा मत्स्य पालन विभाग को लेकर हुई. यह विभाग इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) को दिया गया है. लैटिन कैथोलिक चर्च ने इसका विरोध किया था. चर्च का कहना था कि तटीय समुदाय को सरकार में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिला है, इसलिए यह विभाग कांग्रेस के पास रहना चाहिए. लेकिन मुस्लिम लीग अपने फैसले पर अड़ी रही. आखिरकार यूडीएफ ने यह विभाग आईयूएमएल के पास ही रहने दिया और वीई अब्दुल गफूर को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई. कांग्रेस के अंदर भी कुछ विभागों को लेकर खींचतान देखने को मिली है. स्वास्थ्य विभाग को लेकर के मुरलीधरन और एपी अनिल कुमार के बीच विवाद था. बाद में मुरलीधरन को स्वास्थ्य और देवस्वम विभाग दिया गया, जबकि अनिल कुमार को राजस्व विभाग मिला. मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने वित्त, कानून, सामान्य प्रशासन और बंदरगाह विभाग अपने पास रखे हैं. वहीं गृह और सतर्कता विभाग वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला को सौंपा गया है. इसके अलावा पीके कुन्हालीकुट्टी को उद्योग और आईटी, पीसी विष्णुनाथ को पर्यटन, संस्कृति और सिनेमा तथा केएम शाजी को स्थानीय स्वशासन विभाग की जिम्मेदारी दी गई है. इसके अलावा, माकपा के बागी नेता जी सुधाकरण ने बुधवार को केरल विधानसभा के प्रोटेम स्पीकर के रूप में शपथ ली है. गुरुवार को नए विधायक उनके सामने शपथ लेंगे. About the Author Anoop Kumar MishraAssistant Editor Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at News18 Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation, defence, paramilitary forces, international security affairs…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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नेनुआ से लौकी तक सब पर हमला! एक्सपर्ट ने बताया कीड़ों को...

Last Updated:May 20, 2026, 20:10 IST Agriculture Tips : गर्मी के मौसम में सब्जी की खेती किसानों के लिए फायदे का सौदा होती है, लेकिन फ्रूट किट और व्हाइट फ्लाई जैसे कीट फसल को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं. कृषि वैज्ञानिक सुजीत पाल के अनुसार, कीट फल में छेद कर उसे सड़ा देते हैं. इससे बचाव के लिए किसान फ्रूट ट्रैप, चिपचिपे टिन, नीम तेल या कीटनाशक का इस्तेमाल कर सकते हैं. खेत में खरपतवार हटाना भी जरूरी है, क्योंकि वहीं से कीट तेजी से फैलते हैं और उत्पादन घटने लगता है. भागलपुर : लोग अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए तरह तरह की कृषि करते हैं. खासकर सब्जी की खेती में सबसे अधिक मुनाफा है, लेकिन इसमें थोड़ा रिस्क भी है. गर्मी के दिनों में सब्जी की कृषि थोड़ी रिस्की होती है, क्योकि इसमें पानी की समस्या, किट की समस्या, जीरी झरने की समस्या समेत कई तरह की समस्या आती है. लेकिन इसको अगर आप ठीक से समझ जाएं तो आप इसकी खेती में सफल किसान बन जाएंगे. फ्रूट किट लग जाए तो क्या करेंदरअसल फल व सब्जी में अभी फ्रूट किट बहुत लगते हैं. फ्रूट किट फलन क्षमता को कम कर और उपज फलन को खराब कर देती है. ऐसे में इससे बचाव अत्यंत आवश्यक है. जब इसको लेकर कृषि वैज्ञानिक सुजीत पाल से जब बात की गई तो उन्होंने बताया कि देखिए फ्रूट किट फल के बीच मे छेद कर देता है जिससे फलन सड़ने लगता है. ऐसे में इसका दो उपाय है. एक आप फ्रूट केप लगा सकते हैं जिसमे किट अपने आप अंदर चला जाएगा. अगर पैसा बचाना है तो आप किसी सफेद रंग या अन्य रंग का भी टिन काटकर उसमें चिपचिपा पदार्थ लगा दें. इसमें सब किट चिपक जाएगा. फ्रूट किट व अन्य किट दोनों का मैनेजमेंट जरूरी है तभी फलन सही होगा. ऐसे में ये चीजें आपके सभी किट के प्रबंधन के लिए सही होगा. अभी नेनुआ खेतो में लगा हुआ है लेकिन इसके बीच मे ही आप छिद्र देखेंगे. ऐसे में इसमें व्हाइट फ्लाई और अन्य किट का अटैक हो गया है तभी बीच मे छिद्र करने लगता है. इसके बचाव के सरल तरीके हैं आप इसको घरेलू विधि व अन्य विधि से भी बचा सकते हैं. आप घरेलू उपाय में टिन वाला चीज तो कर ही सकते हैं. इसके साथ साथ आप इसमें निम तेल का छिड़काव या किसी कीटनाशक चीजो का छिड़काव कर सकते हैं. आप अगर फ्रूट केप लगा सकते हैं तो और अच्छी बात है. गर्मी के दिनों महंगा होता है सब्जीउन्होंने बताया कि देखिए गर्मी के दिनों में सब्जी की डिमांड अधिक होती है. खासकर हरि सब्जी की बात करें तो डिमांड और बढ़ जाती है. इसलिए किसान को अच्छा खासा मुनाफा हो जाता है. लेकिन इसमें लॉस होने का खतरा तब रहता है जब आपका मैनजमेंट सही नहीं होगा. आपको बता दें कि अगर सब्जी के खेत मे खर पतवार अधिक है तो उससे सबसे ज्यादा किट की संभावना होती है. इसलिए पहले खर पतवार को हटा दें जिसके बाद किट का प्रबंधन करें. About the Author Amit Singh 7 वर्षों से पत्रकारिता में अग्रसर. इलाहबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नालिस्म की पढ़ाई. अमर उजाला, दैनिक जागरण और सहारा समय संस्थान में बतौर रिपोर्टर, उपसंपादक औऱ ब्यूरो चीफ दायित्व का अनुभव. खेल, कला-साह…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Bhagalpur,Bhagalpur,Bihar Source link

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