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बार-बार क्यों जीत जाती है बीजेपी? Axis My India वाले प्रदीप गुप्ता...

क्या बीजेपी सिर्फ हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण की वजह से चुनाव जीतती है? यह सवाल स‍ियासत में लंबे समय से पूछा जाता रहा है. लेकिन देश के सबसे चर्चित चुनाव विश्लेषकों में गिने जाने वाले प्रदीप गुप्‍ता ने इस थ्योरी को सीधे खारिज कर दिया है. Axis My India के चेयरमैन प्रदीप गुप्ता ने साफ कहा कि बीजेपी की लगातार चुनावी जीतों को सिर्फ सांप्रदायिक राजनीति से जोड़ना गुड गवर्नेंस और डिलीवरी का अपमान है. उन्होंने कहा, जीत-हार हिंदू-मुस्लिम राजनीति से तय नहीं होती. अगर आप ऐसा कहते हैं तो फिर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और दूसरे राज्यों में बीजेपी की लगातार वापसी को कैसे समझेंगे? वहां की सरकारों के काम, गवर्नेंस और डिलीवरी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. सिर्फ ध्रुवीकरण से चुनाव नहीं जीते जाते प्रदीप गुप्ता ने खास तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र करते हुए कहा कि अगर बीजेपी सिर्फ धार्मिक ध्रुवीकरण के भरोसे चुनाव जीतती, तो अलग-अलग राज्यों में बार-बार सत्ता में वापसी संभव नहीं होती. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में बीजेपी लगातार दो बार सत्ता में लौटी. मध्य प्रदेश में लंबे समय तक पार्टी का दबदबा बना रहा. बिहार में NDA गठबंधन लगातार मजबूत बना हुआ है. प्रदीप गुप्ता के मुताबिक, इन नतीजों के पीछे गुड गवर्नेंस, योजनाओं की डिलीवरी और संगठन की ताकत बड़ी वजह है. यानी उनके हिसाब से बीजेपी की चुनावी मशीनरी सिर्फ भावनात्मक मुद्दों पर नहीं, बल्कि “लाभार्थी राजनीति और जमीनी नेटवर्क पर भी टिकी हुई है. बीजेपी की असली ताकत क्या है? पिछले एक दशक में बीजेपी ने खुद को सिर्फ एक वैचारिक पार्टी नहीं, बल्कि चुनाव जीतने वाली हाई-परफॉर्मेंस मशीन में बदला है. प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला, मुफ्त राशन, आयुष्मान भारत और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर जैसी योजनाओं ने करोड़ों लोगों तक सीधा असर पहुंचाया. राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि बीजेपी ने वेलफेयर , नेशनलिज्म और मजबूत लीडरशिप का ऐसा कॉम्बिनेशन बनाया, जो विपक्ष के लिए चुनौती बन गया. प्रशांत किशोर पर भी बोले प्रदीप गुप्ता बातचीत में गुप्ता ने चुनावी रणनीतिकार प्रशांत क‍िशोर का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि प्रशांत किशोर किसी भी पार्टी के साथ तभी जुड़ते हैं, जब उन्हें वहां स्पार्क यानी उभरती हुई संभावनाएं दिखाई देती हैं. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि तमिलनाडु में DMK के साथ काम करने के दौरान I-PAC को यह समझ आ गया था कि एक नया नेतृत्व उभर रहा है. इसी संदर्भ में उन्होंने अभिनेता और नेता व‍िजय की बढ़ती लोकप्रियता का भी जिक्र किया. विपक्ष आखिर कहां चूक जाता है? बीजेपी की जीत को लेकर दो तरह की सोच दिखाई देती है. एक पक्ष मानता है कि धार्मिक ध्रुवीकरण बीजेपी की सबसे बड़ी ताकत है. दूसरा पक्ष कहता है कि विपक्ष बीजेपी की संगठन क्षमता, बूथ मैनेजमेंट और योजनाओं की पहुंच को कम आंकता है. प्रदीप गुप्ता का बयान इसी दूसरे नजरिए को मजबूत करता है. उनका कहना है कि अगर हर चुनावी जीत को सिर्फ हिंदू-मुस्लिम राजनीति कहकर समझाया जाएगा, तो फिर मतदाताओं के फैसले और सरकारों के काम दोनों को हल्के में लेना होगा. और शायद यही वजह है कि भारतीय राजनीति में बीजेपी को समझना सिर्फ नारों से नहीं, बल्कि वोटर बिहेवियर, वेलफेयर मॉडल और संगठन की गहराई से जुड़ा मामला बन चुका है. Source link

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बिजली के प्रीपेड मीटर कितने फायदेमंद हैं? पुराने और नए मीटर में...

ब‍िजली चोरी रोकते हैं स्‍मार्ट प्रीपेड मीटर (सांकेतिक तस्वीर) लेकिन प्रीपेड मीटर एक क्रांति की तरह हैं. अभी चूंकि लोगों को इन मीटरों की आदत नहीं हुई है, इस वजह से लोगों को प्रीपेड मीटर खराब लग रहे हैं. हालांकि एक एक्सपर्ट के तौर पर देखा जाए तो नुकसान सिर्फ मानसिक है. वास्तविकता में प्रीपेड मीटरों का कोई नुकसान नहीं है. इससे कंपनियों को तो फायदा है ही उपभोक्ताओं को भी दोहरा लाभ है. डॉ. भूषण कहते हैं कि ग्राहकों को इससे शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म में फायदा मिलेगा. क्या हैं प्रीपेड मीटरों के शॉर्ट टर्म फायदे क्या हैं लॉन्ग टर्म में फायदे भूषण कहते हैं कि बहुत सारी भ्रांतियों को दूर करने की जरूरत है. बिजली के प्रीपेड और पोस्टपेड मीटर मोबाइल सिम की तरह ही हैं और दोनों ही सिम आज बखूबी चल रही हैं. बहुत सारे लोगों को प्रीपेड सिम ज्यादा फायदेमंद लगती हैं. प्रीपेड या पोस्‍टपेड कौन से मीटर ज्‍यादा फायदेमंद. आने वाले समय में जब लोगों को इन मीटरों की आदत पड़ेगी तो उन्हें इनके फायदे नजर आएंगे. कहीं भी तब तकनीक आती है और पूरा शिफ्ट होता है तो ये चुनौतियां सामने आती हैं. हालांकि प्रीपेड मीटर भविष्य के लिए बेहतर हैं और तकनीकी रूप से बेहद मजबूत हैं. आइए जानते हैं उनसे सवालों के जवाब क्या प्रीपेड मीटर से बिजली चोरी रुकती है?हां प्रीपेड मीटर पूरी तरह स्मार्ट मीटर हैं और इनसे बिजली की चोरी रुकेगी, ऐसी उम्मीद है. ये मीटर कैसे काम करते हैं?प्रीपेड मीटर मोबाइल फोन की प्रीपेड सिम की तरह काम करते हैं. पहले भुगतान करिए फिर उसके हिसाब से बनी यूनिटों का उपभोग करिए.अगर आप भुगतान से ज्यादा बिजली इस्तेमाल करेंगे तो आपकी बिजली कट जाएगी. इन मीटरों का फायदा क्या है?इन मीटरों से उपभोक्ता को पता चलता है कि उसकी बिजली की खपत कितनी है. उसे खपत का रियल टाइम डेटा मिलता है.इन मीटरों से डिस्कॉम कंपनियों को भी फायदा है और उन्हें बिजली सप्लाई का पूरा भुगतान मिल पाता है. रेवेन्यू के लिहाज से ये मीटर फायदेमंद हैं. इन मीटरों से बिजली चोरी भी रुकती है. स्मार्ट बिजली मीटर चोरी कैसे रोकता है? पुराने इलेक्ट्रो-मैकेनिकल मीटर आसानी से टैम्पर हो जाते थे. लोग मैग्नेट लगाकर, बाईपास करके या न्यूट्रल वायर काटकर मीटर को धीमा या बंद कर देते थे. स्मार्ट मीटर पूरी तरह डिजिटल और टैम्पर-प्रूफ हैं. इनमें एडवांस्ड सेंसर लगे होते हैं जो मैग्नेटिक टैम्पर, कवर ओपन, न्यूट्रल डिस्कनेक्ट, रिवर्स करंट या असामान्य खपत का तुरंत पता लगाते हैं. यह मीटर घटना रिकॉर्ड करता है और रियल-टाइम में डिस्कॉम के सेंटर को अलर्ट भेजता है. जरूरत पड़ने पर रिमोट से कनेक्शन डिस्कनेक्ट भी किया जा सकता है. इससे चोरी लगभग असंभव हो जाती है. प्रीपेड डिजिटल स्मार्ट मीटर का पूरा मैकेनिज्म क्या है?स्मार्ट मीटर में माइक्रोकंट्रोलर, करंट और वोल्टेज सेंसर, रियल-टाइम क्लॉक और कम्युनिकेशन मॉड्यूल (RF/GSM/PLC) होते हैं. यह हर 15-30 मिनट में खपत का डेटा रिकॉर्ड करता है और AMI (Advanced Metering Infrastructure) के जरिए हेड-एंड सिस्टम को भेजता है. यह न सिर्फ यूनिट गिनता है बल्कि पावर फैक्टर, वोल्टेज फ्लक्चुएशन, पीक लोड आदि भी मॉनिटर करता है. एन्क्रिप्टेड डेटा होने से हैकिंग मुश्किल है. क्या इन प्रीपेड मीटरों का बिल ज्यादा आता है, जैसा सूचनाएं आ रही हैं?नहीं ऐसा नहीं है. इसमें भी उतना ही बिल आता है. यह साइकोलॉजिकल है कि प्रीपेड में पहले पैसा जमा करके फिर बिजली इस्तेमाल करते हैं तो बिल खत्म होता दिखता है. इसके फायदे क्या हैं?इन मीटरों से सटीक बिलिंग, अनुमानित बिल खत्म, विवाद कम होता है. ये रियल-टाइम मॉनिटरिंग के साथ ऐप या डिस्प्ले पर देख सकेंगे कि कौन-सा उपकरण कितनी बिजली खा रहा है, बिल कंट्रोल में रहेगा. इन मीटरों के लगने से पूरा सिस्टम अपडेट होगा. चोरी रुकने से बिजली की उपलब्धता और गुणवत्ता बढ़ेगी, कम लोडशेडिंग होगी. प्रीपेड ऑप्शन में रिचार्ज जैसे मोबाइल, लो-बैलेंस अलर्ट की भी सुविधा है. लंबे समय में बिल में बचत और पारदर्शिता भी है. डॉ. भारत भूषण कहते हैं कि स्मार्ट मीटर सिर्फ मीटर नहीं, बल्कि ऊर्जा प्रबंधन का स्मार्ट टूल है. UP में इसका बड़े पैमाने पर विस्तार हो रहा है, जो AT&C घाटे को कम कर बिजली क्षेत्र को मजबूत बनाएगा. Source link

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TMC के 30 MLAs से छिनी सुरक्षा, लेकिन ममता दीदी की MP...

होमताजा खबरदेश TMC के 30 MLAs से छिनी सुरक्षा, लेकिन दीदी की MP को मिला Y श्रेणी प्रोटेक्शन Last Updated:May 20, 2026, 15:07 IST Kakoli Ghosh Dastidar Gets Y Category Security: केंद्र ने TMC सांसद काकोली घोष दस्तीदार को IB रिपोर्ट के बाद CISF की Y कैटेगरी सुरक्षा दी गई है. पश्चिम बंगाल में TMC नेताओं की सुरक्षा कटौती के बीच इसे बड़ा राजनीतिक संकेत माना जा रहा है. केंद्र सरकार ने टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार को Y श्रेणी सुरक्षा दी है. फोटो- पीटीआई पश्चिम बंगाल की राजनीति में सत्ता परिवर्तन के बाद सुरक्षा को लेकर बड़ा राजनीतिक संदेश सामने आया है. एक तरफ जहां तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कई नेताओं और विधायकों की सुरक्षा में कटौती की खबरें चर्चा में हैं, वहीं दूसरी तरफ काकोली घोष दस्तीदार को केंद्र सरकार ने ‘Y’ कैटेगरी की सुरक्षा प्रदान कर दी है. इस फैसले ने बंगाल की सियासत में नई बहस छेड़ दी है. केंद्र सरकार ने वरिष्ठ टीएमसी नेता और लोकसभा सांसद काकोली घोष दस्तीदार को CISF की सशस्त्र सुरक्षा मुहैया कराई है. अधिकारियों के मुताबिक यह सुरक्षा 19 मई से लागू कर दी गई है. यह फैसला गृह मंत्रालय द्वारा इंटेलिजेंस ब्यूरो की थ्रेट असेसमेंट रिपोर्ट के आधार पर लिया गया. क्या होती है Y कैटेगरी सुरक्षा? ‘Y’ कैटेगरी सुरक्षा भारत में वीआईपी सुरक्षा की अहम श्रेणियों में गिनी जाती है. इसमें आमतौर पर 24 घंटे सुरक्षा के लिए हथियारबंद जवानों की टीम तैनात रहती है. खतरे के स्तर के अनुसार सुरक्षाकर्मियों की संख्या तय की जाती है. इस बार खास बात यह है कि काकोली घोष दस्तीदार को यह सुरक्षा सीआईएसएफ के जरिए दी गई है. सीआईएसएफ आमतौर पर एयरपोर्ट, मेट्रो, परमाणु संयंत्र और महत्वपूर्ण सरकारी प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए जानी जाती है, लेकिन खतरे के आकलन के आधार पर यह हाई-प्रोफाइल नेताओं को भी सुरक्षा देती है. कौन हैं काकोली घोष दस्तीदार? काकोली घोष दस्तीदार पश्चिम बंगाल की राजनीति में TMC का बड़ा चेहरा मानी जाती हैं. वह राज्य की बारासात लोकसभा सीट से सांसद हैं और लंबे समय से पार्टी संगठन तथा संसदीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाती रही हैं. टीएमसी की ओर से वह कई राष्ट्रीय मुद्दों पर मुखर आवाज रही हैं. पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी की करीबी नेताओं में उनकी गिनती होती है. संसद में भी वह कई बार स्वास्थ्य, महिला सुरक्षा और केंद्र-राज्य संबंधों से जुड़े मुद्दों पर पार्टी का पक्ष रखती रही हैं. राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद कुछ टीएमसी नेताओं की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है. ऐसे में केंद्र द्वारा काकोली घोष दस्तीदार को सुरक्षा दिए जाने को सिर्फ प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि राजनीतिक संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है. 30 विधायकों की सुरक्षा कटौती की चर्चा क्यों? पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पहली बार भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिलने के बाद राज्य की राजनीतिक परिस्थितियां तेजी से बदली हैं. सूत्रों के मुताबिक चुनाव के बाद कई TMC नेताओं और करीब 30 विधायकों की सुरक्षा में कटौती या समीक्षा की प्रक्रिया शुरू हुई थी. ऐसे माहौल में काकोली घोष दस्तीदार को ‘Y’ कैटेगरी सुरक्षा मिलना राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है. विपक्षी दल इसे केंद्र की सेलेक्टेड सुरक्षा नीति बता रहे हैं, जबकि अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा केवल खतरे के आकलन के आधार पर दी जाती है. IB रिपोर्ट के बाद लिया गया फैसला सूत्रों के मुताबिक इंटेलिजेंस ब्यूरो की रिपोर्ट में काकोली घोष दस्तीदार के लिए संभावित सुरक्षा खतरे का जिक्र किया गया था. इसके बाद गृह मंत्रालय ने उनकी सुरक्षा प्रोफाइल की समीक्षा की और CISF सुरक्षा मंजूर कर दी. अधिकारियों ने यह भी साफ किया है कि सुरक्षा व्यवस्था स्थायी नहीं होती. समय-समय पर खतरे के स्तर की समीक्षा की जाती है. अगर भविष्य में खतरा बढ़ता या घटता है तो सुरक्षा श्रेणी में बदलाव भी किया जा सकता है. बंगाल की राजनीति में नया संदेश? राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बंगाल में बदलते सत्ता समीकरण के बीच सुरक्षा अब बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनती जा रही है. एक ओर TMC लगातार अपने नेताओं पर राजनीतिक दबाव और सुरक्षा खतरे की बात करती रही है, वहीं दूसरी तरफ केंद्र सरकार यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि सुरक्षा का फैसला केवल इंटेलिजेंस इनपुट के आधार पर लिया जाता है. हालांकि, काकोली घोष दस्तीदार को मिली ‘Y’ कैटेगरी सुरक्षा ने इतना जरूर साफ कर दिया है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में आने वाले दिनों में सुरक्षा और राजनीतिक टकराव दोनों बड़े मुद्दे बने रह सकते हैं. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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छपरा के किसान अशोक सिंह का संघर्ष, आटा मिल हादसे में कटा...

Last Updated:May 20, 2026, 14:00 IST Chhapra News: अशोक सिंह कहते है कि उनके संघर्ष की असली पैदावार बेटे की सफलता है. जिसे देखकर उन्हें अंदर से बहुत खुशी मिलती है और अपने हाथ खोने का कोई अफसोस नहीं होता. वे किसानों से अपील करते है कि अगर खुद नौकरी नहीं कर पाए तो भी अपने बच्चों को सफल बनाने के लिए पूरी मेहनत और संघर्ष करें. उनकी हर जरूरत पूरी करें. एक दिन आपका बच्चा जरूर सफल होगा. छपरा के किसान अब सिर्फ खेती नहीं कर रहे, बल्कि अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाकर उन्हें काबिल भी बना रहे है. आज हम ऐसे ही एक किसान की कहानी बता रहे है. जिन्होंने खेती-किसानी के भरोसे न सिर्फ परिवार चलाया, बल्कि बेटे को अधिकारी भी बनाया. यह कहानी है बनियापुर प्रखंड के सोहाई निवासी अशोक सिंह की. जिन्होंने खेती से हुई आमदनी से बेटे आलोक कुमार सिंह की पढ़ाई कराई और उसे सफल बनाने के लिए हर कठिनाई झेली. संघर्ष की इसी राह में आटा मिल चलाते समय उनका एक हाथ कट गया. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. आज उनका बेटा आलोक सिंह नेवी में CO के पद पर तैनात है. अशोक सिंह पारंपरिक फसलों के साथ-साथ नगदी फसल की भी खेती करते है. उनके पास 10 एकड़ से अधिक जमीन है. जिस पर हरी सब्जियां, धान, गेहूं और मक्का की खेती होती है. उन्हें बागवानी का भी शौक है. अपने बगीचे में उन्होंने आम के दो दर्जन से अधिक किस्मों के पौधे लगाए है. अशोक सिंह ने बेटे को सफल बनाने के लिए खेती को ही सहारा बनाया. खेत में उगाई गई फसल और नगदी फसलों को बेचकर वे बेटे की जरूरतों पर पैसा खर्च करते थे. घर का खर्च, बेटे आलोक सिंह की कोचिंग, ट्यूशन, स्कूल, कॉपी-किताब से लेकर कॉलेज तक की पूरी पढ़ाई खेती की आमदनी से ही चलती थी. घर और पढ़ाई का खर्च चलाने के बाद जब कुछ पैसा बचा तो अशोक सिंह ने एक छोटा आटा मिल शुरू किया. आटा मिल की मशीन चलाते समय उनका हाथ पट्टे में फंस गया. किसी तरह उन्होंने खुद को तो बचा लिया. लेकिन हाथ बुरी तरह जख्मी हो गया. इलाज के दौरान डॉक्टरों को उनका हाथ काटना पड़ा और वे दिव्यांग हो गए. इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. ठीक होते ही वे एक हाथ से ही पूरी ऊर्जा के साथ फिर खेत में जुट गए और खेती से होने वाली आमदनी से बेटे की पढ़ाई जारी रखी. आलोक सिंह ने भी पिता के संघर्ष और दर्द को देखते हुए पूरी ईमानदारी से पढ़ाई की और नेवी में नौकरी हासिल कर ली. फिलहाल आलोक सिंह मुंबई में CO के पद पर कार्यरत है. अब वे पिता को ज्यादा मेहनत नहीं करने देते. स्थानीय बाजार में उनके लिए एक छोटा सा बिजनेस शुरू कर दिया है. जहां अशोक सिंह बैठते हैं, साथ ही समय-समय पर अपने बगीचे और खेतों का मुआयना करते है. खेती के ज्यादातर काम अब मजदूरों के जरिए कराए जाते है. लोकल 18 से बातचीत में अशोक सिंह ने बताया कि उन्होंने शुरू से ही ठान रखा था कि वे बेटे को अधिकारी बनाएंगे. इसके लिए वे खेत में जी-जान से मेहनत करते थे और फसल बेचकर मिली कमाई बेटे की पढ़ाई पर खर्च करते थे. बाद में आटा मिल शुरू किया. लेकिन हादसे में हाथ पट्टे में फंस गया और डॉक्टरों ने हाथ काट दिया. अशोक सिंह कहते है कि इसके बाद भी उन्होंने हौसला नहीं खोया. अशोक सिंह कहते है कि उनके संघर्ष की असली पैदावार बेटे की सफलता है. जिसे देखकर उन्हें अंदर से बहुत खुशी मिलती है और अपने हाथ खोने का कोई अफसोस नहीं होता. वे किसानों से अपील करते है कि अगर खुद नौकरी नहीं कर पाए तो भी अपने बच्चों को सफल बनाने के लिए पूरी मेहनत और संघर्ष करें. उनकी हर जरूरत पूरी करें. एक दिन आपका बच्चा जरूर सफल होगा. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Chapra,Saran,Bihar Source link

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Supreme court| CJI Suryakant| जाति जनगणना का हो सकता है दुरुपयोग, याचिका...

होमताजा खबरदेश जाति जनगणना न हो, याचिका पर CJI सूर्यकांत बोले, दखल की जरूरत नहीं Last Updated:May 20, 2026, 12:57 IST सुप्रीम कोर्ट ने जाति आधारित जनगणना रोकने की याचिका खारिज कर दी है. CJI सूर्यकांत ने याच‍िका की सुनवाई के दौरान कहा क‍ि यह सरकार का नीतिगत फैसला है. पिछड़ी जातियों के आंकड़े कल्याण के लिए जरूरी हैं. जात‍ि आधारि‍त जनगणना के ख‍िलाफ सुप्रीम कोर्ट में याच‍िका को सीजेआई सूर्यकांत ने खार‍िज कर द‍िया. Supreme Court News: सुप्रीम कोट जातिगत जनगणना के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया है. अदालत ने कहा कि यह सरकार का नीतिगत फैसला है और इसमें हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं है. सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में मांग की गई थी कि आगामी जनगणना में जाति आधारित गणना को शामिल न किया जाए, क्योंकि इसका “दुरुपयोग” हो सकता है. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया और सीजेआई सूर्यकांत ने एक अहम टिप्पणी की. सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने कहा कि सरकार को यह जानना जरूरी है कि पिछड़ी जातियों में कितने लोग हैं, ताकि उनके कल्याण (के लिए योजनाएं बनाई जा सकें. अदालत ने अपने आदेश में कहा कि कि जनगणना जाति आधारित हो या नहीं, यह पूरी तरह सरकार का नीतिगत मामला है. अदालत को इसमें दखल देने की जरूरत नहीं दिखती. इसलिए जनहित याचिका (PIL) को खारिज किया जाता है. बता दें कि भारत में करीब 15 साल बाद एक अप्रैल से जनगणना 2027 की प्रक्रिया शुरू हो गई है. सरकारी स्कूलों के शिक्षक गांव-गांव जाकर जनगणना कर रहे हैं. इससे पहले 2011 में देश में जनगणना हुई थी. आमतौर पर देश में हर 10 साल पर जनगणना कराने की परंपरा रही है लेकिन 2020-2021 में कोरोना महामारी की वजह से इसे टाल दिया गया था. उसके बाद जनगणना में जाति के मसले को शामिल करने पर विवाद के कारण इसमें देरी हुई. अब इस बार की जनगणना में जाति को भी शामिल किया गया है. जनगणना की पूरी प्रक्रिया दो चरणों में पूरी की जाएगी. अंतिम रिपोर्ट 2027 में जारी होगी. इस कारण इसे जनगणना-2027 कहा जा रहा है. About the Author प्रिया गौतमSenior Correspondent Priya Gautam is an accomplished journalist currently working with Hindi.News18.com with over 14 years of extensive field reporting experience. Previously worked with Hindustan times group (Hindustan Hindi) and …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi Source link

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50°C की झुलसाती गर्मी में भी ‘कूल-कूल’! कच्चे छप्पर और देसी जुगाड़...

Last Updated:May 20, 2026, 12:01 IST Summer Desi Tips: भीषण गर्मी और 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचते तापमान के बीच जहां शहरों में लोग एसी और कूलर के बिना परेशान हैं, वहीं गांवों में देसी जुगाड़ और पारंपरिक ज्ञान लोगों को राहत दे रहा है. ग्रामीण इलाकों में कच्चे छप्पर, मिट्टी की दीवारें और प्राकृतिक वेंटिलेशन वाली पारंपरिक निर्माण शैली आज भी घरों को ठंडा बनाए रखती हैं. स्थानीय लोग बताते हैं कि पुराने समय से अपनाए जा रहे ये देसी तरीके गर्म हवाओं को अंदर आने से रोकते हैं और घर का तापमान सामान्य बनाए रखते हैं. कई गांवों में लोग पेड़ों की छांव, मिट्टी के घड़ों का पानी और देसी निर्माण तकनीकों के जरिए बिना बिजली के भी आरामदायक जीवन जी रहे हैं. ख़बरें फटाफट बाड़मेर. भीषण गर्मी ने आमजन का जीना मुश्किल कर दिया है. शहरों में एसी और कूलर भी जवाब देने लगे हैं लेकिन रेगिस्तान के कई गांवों में आज भी लोग पारंपरिक तरीके अपनाकर गर्मी से राहत पा रहे हैं. कच्चे छप्पर, मिट्टी की दीवारें, देशी पंखे (पान), देशी खानपान और घरों का पारंपरिक निर्माण उन्हें तपती गर्मी में भी सुकून दे रहा है. जहां एक तरफ 50 डिग्री तापमान में लोग घरों से बाहर निकलने से बच रहे हैं वहीं रेगिस्तानी इलाकों में लोग आज भी कच्चे छप्पर और देसी पंखों के सहारे गर्मी को मात दे रहे हैं. मिट्टी के घर, खान पान और परंपरागत जीवनशैली उन्हें बिना एसी-कूलर भी राहत दे रही है. गांवों में कई घर ऐसे हैं जहां टीनशेड या सीमेंट की छत के बजाय घास-फूस, लकड़ी और मिट्टी से बने कच्चे छप्पर हैं. ये छप्पर दिनभर की तेज धूप को सीधे अंदर नहीं आने देते है जिससे घर के अंदर का तापमान बाहर की तुलना में काफी कम रहता है. मिट्टी के घर रखते हैं ठंडक बरकरारखडीन निवासी बुजुर्ग पन्नाराम बताते है कि मिट्टी की दीवारों में प्राकृतिक इंसुलेशन होता है. दिन में यह बाहरी गर्मी को काफी हद तक रोकती हैं और रात में ठंडक बनाए रखने में मदद करती हैं. यही वजह है कि कई बुजुर्ग आज भी पक्के मकानों की बजाय कच्चे घरों को गर्मी के मौसम में ज्यादा आरामदायक मानते हैं. बदलती जीवनशैली में भी कायम परंपरागांवों में भी पक्के मकानों और आधुनिक उपकरणों का चलन बढ़ा है लेकिन भीषण गर्मी पड़ने पर लोग आज भी पुराने देसी तरीकों को ज्यादा कारगर मानते हैं. बुजुर्ग भैराराम बताते है कि कि “पहले एसी-कूलर नहीं थे फिर भी लोग इतनी गर्मी में आराम से रहते थे घर और रहन-सहन मौसम के हिसाब से बनाते थे. पारंपरिक पहनावा भी है गर्मी से बचने का राजइतना ही बाड़मेर जैसे रेगिस्तानी इलाको में सुबह जल्दी कामकाज निपटाकर घरों की ओर लौट रहे है. इसके अलावा  मटके का ठंडा पानी, छाछ-राबड़ी और दोपहर में कम आवाजाही जैसी आदतें भी लोगों को लू और गर्मी से बचाने में मदद कर रही हैं. बुजुर्ग रतनाराम सेजू बताते है कि पश्चिम राजस्थान में पारंपरिक पहनावा जैसे धोती-कुर्ता, तेवटा, साफा और सूती कपड़ा ज्यादा पहनते है जिससे गर्मी का असर कम रहता है. पेड़ो की छांव और झोपडी की गोद में मिलता है सुकूनबाड़मेर निवासी रमेश कुमार गर्ग बताते है कि जहां शहरों में लोग 50 डिग्री तापमान से राहत पाने के लिए AC-कूलर का सहारा ले रहे हैं वहीं रेगिस्तान के गांवों में आज भी खेजड़ी,जाल की घनी छांव, खुले झोंपे और कच्चे छप्पर लोगों के लिए सुकून का ठिकाना बने हुए हैं. दोपहर की तपती धूप में ग्रामीण पेड़ों के नीचे बैठकर आराम करते हैं. वही झोपड़ी में आराम करने से लोगो को लू व गर्मी से राहत मिलती है. About the Author Jagriti Dubey Hi, I am Jagriti Dubey, a media professional with 6 years of experience in social media and content creation. I started my career with an internship at Gbn 24 news channel in 2019 and have worked with many repu…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Barmer,Rajasthan Source link

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पेट्रोल-डीजल-LPG…सबका टंटा खत्म, होर्मुज का सीना चीरने को तैयार भारतीय टैंकर, जयशंकर...

होमताजा खबरदेश पेट्रोल-डीजल-LPG…सबका टंटा खत्म, होर्मुज का सीना चीरने को तैयार भारतीय टैंकर Last Updated:May 20, 2026, 11:03 IST india prepares to send oil tankers through strait of hormuz for new oil lpg supplies: ईरान अमेरिका जंग से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद है. इस कारण दुनिया के तमाम देशों में तेल के दाम बढ़ गए हैं. इस बीच भारत ने अपनी रणनीति बदल दी है. शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के टैंकर सरकार और नौसेना की अंतिम मंजूरी के बाद होर्मुज को चीरकर मध्य पूर्व के देश तक जाने को तैयार हैं. भारत ने होर्मुज में अपने शिप को भेजने की तैयारी कर ली है. India Prepares To Send Tankers Through Hormuz: ईरान-अमेरिका के बीच जंग और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने के कारण भारत सहित पूरी दुनिया में तेल का संकट पैदा हो गया है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का दाम काफी बढ़ गया है. इसका असर तमाम देशों के घरेलू बाजारों पर भी पड़ा है. खुद अमेरिका में पेट्रोल-डीजल के दाम में 50 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है. इस बीच भारत में भी पेट्रोल-डीजल के रेट बढ़ाने पड़े हैं. इस संकट का एलपीजी की सप्लाई पर भी असर पड़ा है. लेकिन, भारत अब कुछ बड़ा करने जा रहा है. दरअसल, भारत ने तय किया है कि वह अपने तेल टैंकर होर्मुज का सीना चीरकर उसके आर-पार भेजेगा. वह अमेरिका और ईरान की धमकियों को दरकिनार कर ऐसा करने जा रहा है. क्योंकि एक तरफ अमेरिका और दूसरी तरफ ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को कंट्रोल करने की कोशिश कर रहे हैं. ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक सरकारी कंपनी शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के टैंकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते फारस की खाड़ी में जाने को तैयार हैं. बस उन्हें भारतीय नौसेना और ऑयल रिफाइनरियों से मंजूरी का इंतजार है. ब्लूमबर्ग ने एक बेहद प्रभावी सूत्र के हवाले से यह खबर दी है. मध्य पूर्व के सप्लायर देशों से तेल लाएंगे ये टैंकर ये टैंकर मध्य पूर्व के तेल सप्लायर देशों से तेल लेने जाएंगे. इस पूरे मामले से जुड़े लोगों के हवाले से ब्लूमबर्ग ने लिखा है कि ईरान-अमेरिका- इजरायल जंग भड़कने के बाद से ऐसा पहली बार होने जा रहा है. इसको लेकर पूरी योजना तैयार कर ली गई है और जैसे ही सरकार की ओर से अंतिम मंजूरी मिल जाती है तो भारतीय जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की ओर बढ़ने लगेंगे. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि शीर्ष स्तर पर इसको लेकर गंभीर चर्चा हुई है. हालांकि अभी जहाजों की टाइमिंग और उनकी संख्या के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का एक सबसे व्यस्त तेल रूट है. इसी रास्ते दुनिया के करीब 20 फीसदी तेल की ढुलाई होती है. ईरान जंग की वजह से यह रूट करीब तीन महीने बाधित है. इस कारण पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट की स्थिति बनने लगी है. इसका असर भारत पर भी पड़ा है. भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक देश है. चीन और अमेरिका पहले-दूसरे नंबर पर हैं. सरकार ने मंजूरी दी या नहीं… यह स्पष्ट नहीं अभी यह स्पष्ट नहीं है कि भारत के इस योजना को अमेरिका और ईरान में किसी एक या फिर दोनों ने मंजूरी दी है या नहीं. क्योंकि ये दोनों देश इस वक्त स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में आमने सामने हैं. माना जा रहा है कि उनकी मंजूरी के बिना स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जाना खतरनाक हो सकता है. इस बीच बीते दिनों नई दिल्ली आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ मीटिंग की थी. भारत अपने पारंपरिक मध्य पूर्व के देशों से तेल आयात जारी रखना चाहता है. क्योंकि वैकल्पिक स्रोतों से तेल मंगाने में समय लगता है और दूरी अधिक होने के कारण वह आयात महंगा भी पड़ता है. उधर, भारतीय नौसेना ने इस इलाके में अपने युद्धपोतों की संख्या डबल कर दी है. ताकि वह इलाके की स्थिति पर पैनी नजर रख सके. ये युद्ध पोत भारतीय झंडे के साथ चल रहे टैंकरों को सुरक्षा प्रदान कर रहे हैं. हालांकि इस पूरी योजना के बारे में भारत के पोर्ट, शिपिंग और जलमार्ग मंत्रालय और भारतीय नौसेना ने कोई टिप्पणी नहीं की है. About the Author संतोष कुमार न्यूज18 हिंदी में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत. मीडिया में करीब दो दशक का अनुभव. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आईएएनएस, बीबीसी, अमर उजाला, जी समूह सहित कई अन्य संस्थानों में कार्य करने का मौका मिला. माखनलाल यूनिवर्स…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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Husband-wife dispute| delhi news| जहांगीरपुरी में पत्नी से विवाद के बाद पति...

उत्तर-पश्चिम दिल्ली के जहांगीरपुरी इलाके से दिल दहलाने वाली घटना सामने आई है. यहां एक पति ने किराए के मकान में रह रही पत्नी के घर के सामने खुद को आग लगा ली. युवक की मौके पर ही मौत हो गई. बता दें कि जहांगीरपुरी इलाके में सोमवार रात करीब 8:30 बजे एक 29 वर्षीय युवक ने खुद को आग के हवाले कर दिया. उससे पहले वह पत्नी को मनाने के लिए उसके घर में घुसा लेकिन जब पत्नी नहीं मानी तो उसने घरेलू विवाद के चलते घर के बाहर निकलकर पहले अपने ऊपर कुछ डाला और आग लगा दी. लपटों में घिरे युवक की मौके पर ही मौत हो गई. पुलिस के अनुसार, उसने घटना से पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश भी रिकॉर्ड किया था, जिसमें उसने अपनी पत्नी और सास पर आरोप लगाए थे. बताया जा रहा है कि खुद को आग लगाने से पहले युवक ने जहर भी खा लिया था. आग की लपटों को देखकर जब तक आस-पास के लोग उसे रोकने की कोशिश करते वह नीचे गिर गया और बुरी तरह जल गया. कुछ लोगों ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन उसकी हालत गंभीर थी और उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया. हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक पुलिस उपायुक्त (नॉर्थवेस्ट) अकांक्षा यादव ने बताया कि प्रारंभिक जांच में पत्नी और सास की भूमिका साफ नहीं पाई गई. दोनों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया था लेकिन बाद में छोड़ दिया गया. दंपति जनवरी 2026 से अलग-अलग रह रहे थे. घरेलू विवाद को लेकर पहले CAW सेल में शिकायत दर्ज हुई थी. घटना वाले द‍िन क्‍या हुआ था ? बता दें कि पति और पत्नी में अनबन रहती थी. घरेलू झगड़ों और विवाद के चलते पत्नी जनवरी 2026 में घर छोड़कर आ गई थी और जहांगीरपुरी के इस इलाके में किराए पर घर लेकर रह रही थी. घटना के दिन युवक अपनी पत्नी को मनाने के लिए उसके घर आया था. उसने पत्नी से वापस घर चलने को कहा, लेकिन पत्नी ने इनकार कर दिया और तलाक की मांग की. इससे गुस्साए युवक ने पत्नी के घर के बाहर निकलकर खुद को आग लगा ली. परिवार के एक सदस्य ने नाम उजागर न करने की शर्त पर बताया कि युवक ने शादी के समय अपनी नौकरी, परिवार, मकान और कमाई के बारे में झूठ बोला था. बाद में वह पत्नी के साथ मारपीट करने लगा और धमकी देने लगा. जनवरी में पत्नी ने इस सब को लेकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी. वहीं मकान मालिक ने बताया, ‘शुरुआत में लगा कि किसी फ्लैट में आग लगी है. बाद में पता चला कि आग बाहर एक युवक के शरीर से निकल रही थी.’ फिलहाल पुलिस पड़ोसियों, परिचितों और परिवार के अन्य सदस्यों से पूछताछ कर रही है. युवक का परिवार उत्तर प्रदेश से दिल्ली आ रहा है.अभी तक इस मामले में कोई शिकायत दर्ज नहीं हुई है. वहीं पत्नी ने इस मामले पर कोई बयान देने से इनकार कर दिया, जबकि उसकी मां ने सभी आरोपों से इनकार किया और कहा कि पूरा मामला सीसीटीवी कैमरों की नजर में हुआ है. यह घटना बताती है कि घरेलू कलह और वैवाहिक संबंधों में बढ़ता तनाव कैसे जानलेवा हो रहा है. Source link

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ट्विशा, दीपिका के बाद अब ऐश्वर्या… दहेज ने ली एक और जान,...

होमताजा खबरदेश ट्विशा, दीपिका के बाद अब ऐश्वर्या… दहेज ने ली एक और जान, पति करता था टॉर्चर Last Updated:May 20, 2026, 09:01 IST Aishwarya Death News- भोपाल में ट्विशा और नोएडा में दीपिका के बाद अब दहेज प्रताड़ता और घरेलू हिंसा ने ऐश्‍वर्या की जान ले ली है. कर्नाटका के बेल्‍लारी में डॉक्‍टर पति और ससुराल वालों के टॉर्चर से परेशान होकर 24 साल की ऐश्‍वर्या फांसी लगा ली. भोपाल और नोएडा में हाल ही में दहेज प्रताड़ना की वजह से ट्विशा और दीपिका ने जान दी है. बेंगलुरु. भोपाल में ट्विशा और नोएडा में दीपिका के बाद अब दहेज प्रताड़ता और घरेलू हिंसा ने ऐश्‍वर्या की जान ले ली है. कर्नाटका के बेल्‍लारी में डॉक्‍टर पति और ससुराल वालों के टॉर्चर से परेशान होकर 24 साल की ऐश्‍वर्या फांसी लगा ली. पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. ऐश्‍वर्या ने मायके आकर यह खौफनाक कदम उठाया है. टाइम्‍स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार मध्‍य प्रदेश के भोपाल और उत्‍तर प्रदेश के नोएडा के बाद कर्नाटका में दहेज प्रताड़ता का बड़ा मामला सामने आया है. कर्नाटक पुलिस के अनुसार ऐश्वर्या का शव 17 मई को बल्लारी जिले के कम्पली कस्बे में उसके माता-पिता के घर में पंखे से लटका मिला. शुरुआती जांच में सामने आया है कि वह पिछले कुछ समय से मानसिक तनाव में थी. पुलिस ने इस मामले में उसके पति प्रदीप कुमार को गिरफ्तार कर लिया है. प्रदीप कुमार पशुपालन विभाग में पशु चिकित्सक है. सुसाइड नोट भी छोड़ा पुलिस के अनुसार ऐश्‍वर्या ने आत्महत्‍या से पहले सुसाइड नोट भी छोड़ा है, जिसमें उसने डॉक्‍टर पति और ससुराल पक्ष पर उत्पीड़न और दहेज को लेकर प्रताड़ित करने के आरोप लगाए हैं. पुलिस का कहना है कि सुसाइड नोट की जांच की जा रही है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर मामले की पड़ताल की जा रही है. डेढ़ साल पहले लव मैरिज की थी पुलिस के अनुसार ऐश्‍वर्या और प्रदीप कुमार ने करीब डेढ़ साल पहले लव मैरिज की थी. पूछताछ में पता चला है कि बीते कुछ महीनों से दोनों के बीच विवाद बढ़ गए थे. मानसिक प्रताड़ना से परेशान होकर ऐश्‍वर्या 14 मई को पति का घर छोड़कर मायके आ गई थी. इसके तीन दिन बाद उसने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. पुलिस ने मामला दर्ज कर हिरासत में लिया ऐश्‍वर्या के पिता की शिकायत के आधार पर पुलिस ने पति और ससुराल वालों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 80 (दहेज मृत्यु), धारा 85 (पति या रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता) और दहेज निषेध अधिनियम की अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है. पुलिस अधिकारी सुमन डी पेन्‍न्‍कार ने बताया कि मामला दर्ज होने के बाद में पति को हिरासत में लिया गया है और मामले की जांच की जा रही है. दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. About the Author Sharad Pandeyविशेष संवाददाता करीब 20 साल का पत्रकारिता का अनुभव है. नेटवर्क 18 से जुड़ने से पहले कई अखबारों के नेशनल ब्‍यूरो में काम कर चुके हैं. रेलवे, एविएशन, रोड ट्रांसपोर्ट और एग्रीकल्चर जैसी महत्वपूर्ण बीट्स पर रिपोर्टिंग की. कैंब्रिज…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,New Delhi,Delhi Source link

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neet re exam 2026| NEET-UG Paper Leak LIVE: CBI जांच में बड़ा...

Last Updated:May 20, 2026, 07:58 IST NEET-UG Paper Leak LIVE: NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में जांच लगातार तेज होती जा रही है. अब तक CBI इस केस में 10 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिनमें रिटायर्ड प्रोफेसर, कोचिंग संचालक, मेडिकल स्टूडेंट और अन्य आर…और पढ़ें NEET-UG Paper Leak LIVE, neet 2026, neet ug 2026, neet paper leak live: नीट पेपर लीक मामले में क्‍या अपडेट है? NEET-UG Paper Leak LIVE: NEET-UG 2026 पेपर लीक मामला अब सिर्फ बाहरी गैंग या कोचिंग नेटवर्क तक सीमित नहीं रह गया है. जांच अब सीधे NTA सिस्टम के अंदर तक पहुंचती दिख रही है. जांच एजेंसियों को शक है कि पेपर लीक में परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े कुछ अंदरूनी लोगों की भूमिका हो सकती है. सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ है कि जिस कथित ‘गेस पेपर’ को परीक्षा से पहले शेयर किया गया था उसमें मौजूद केमिस्ट्री के सभी सवाल असली NEET पेपर से पूरी तरह मैच कर गए. इसके बाद NTA ने अपने स्तर पर जांच शुरू की और केमिस्ट्री पेपर तैयार करने वाले प्रोफेसरों और ट्रांसलेटर्स के नाम CBI को सौंप दिए. अब तक इस मामले में 10 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं और जांच कई राज्यों तक फैल चुकी है. ‘गेस पेपर’ से खुला पूरा मामला सूत्रों के मुताबिक NEET परीक्षा 3 मई को हुई थी. इसके चार दिन बाद यानी 7 मई को NTA को राजस्थान के सीकर से एक व्हिसलब्लोअर का ईमेल मिला.बताया गया कि इस शख्स ने पहले पेपर लीक की जानकारी NTA को दी और बाद में लीक पेपर का PDF भी भेजा. जब NTA ने इस PDF की असली प्रश्नपत्र से तुलना की तो अधिकारियों के भी होश उड़ गए.जांच में पाया गया कि केमिस्ट्री सेक्शन के 100 प्रतिशत सवाल असली पेपर से मैच कर रहे थे. वहीं बायोलॉजी के भी कई सवाल समान पाए गए. NTA ने सौंपी पेपर तैयार करने वालों की सूची  इस खुलासे के बाद NTA ने अपनी आंतरिक जांच शुरू की. सूत्रों के अनुसार एजेंसी को शक हुआ कि पेपर लीक का स्रोत कहीं न कहीं परीक्षा तैयार करने वाली आंतरिक प्रक्रिया से जुड़ा हो सकता है.इसके बाद NTA ने केमिस्ट्री पेपर तैयार करने वाले सभी पेपर सेटर्स और ट्रांसलेटर्स की सूची CBI को सौंप दी. बताया जा रहा है कि इस सूची में करीब 26-27 लोगों के नाम शामिल हैं.इनमें ज्यादातर ट्रांसलेटर्स हैं, जबकि कुछ लोग फिजिकल, ऑर्गेनिक और इनऑर्गेनिक केमिस्ट्री के पेपर सेटर्स बताए जा रहे हैं. कई भाषाओं में होता है पेपर ट्रांसलेशन NEET परीक्षा देशभर में कई भाषाओं में आयोजित की जाती है. इसी वजह से NTA अलग-अलग भाषाओं के लिए ट्रांसलेटर्स नियुक्त करता है.प्रक्रिया के तहत एक ट्रांसलेटर अंग्रेजी से दूसरी भाषा में पेपर ट्रांसलेट करता है, जबकि दूसरा ट्रांसलेटर उसी भाषा से वापस अंग्रेजी में ट्रांसलेशन करता है ताकि सवालों का अर्थ न बदले.सूत्रों का कहना है कि पूरा सिस्टम भरोसे पर चलता है और इसी भरोसे के टूटने से इतनी बड़ी गड़बड़ी सामने आई. NEET-UG 2026 Paper Leak LIVE: एनटीए ने सीबीआई को दी 26 लोगों की लिस्‍ट NEET Paper Leak LIVE:नीट पेपर लीक मामले में अब एनटीए तक जांच पहुंच चुकी है.केमिस्‍ट्री के सवालों के हूबहू मिलने के बाद बाद NTA ने अपनी आंतरिक जांच शुरू कर दी है. सूत्रों के अनुसार एजेंसी को शक हुआ कि पेपर लीक का स्रोत कहीं न कहीं परीक्षा तैयार करने वाली आंतरिक प्रक्रिया से जुड़ा हो सकता है.इसकी जांच के लिए NTA ने केमिस्ट्री पेपर तैयार करने वाले सभी पेपर सेटर्स और ट्रांसलेटर्स की सूची CBI को सौंप दी है.बताया जा रहा है कि इस सूची में करीब 26-27 लोगों के नाम शामिल हैं. NEET-UG 2026 Paper Leak LIVE: केमिस्ट्री के सभी सवाल कैसे हुए मैच? NEET-UG 2026 Paper Leak LIVE: नीट पेपर लीक मामले में जैसे जैसे सीबीआई जांच आगे बढ रही है नए नए खुलासे हो रहे हैं. इस मामले में अब तक CBI ने 10 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें रिटायर्ड प्रोफेसर, कोचिंग संचालक, मेडिकल स्टूडेंट और अन्य आरोपी शामिल हैं. जांच में बड़ा खुलासा हुआ है कि लीक हुए ‘गेस पेपर’ में मौजूद केमिस्ट्री के सभी सवाल असली NEET पेपर से मैच कर गए थे. Source link

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