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गर्मियों में छाछ और बेसन से बनती है ये देसी डिश, स्वाद...

Last Updated:May 17, 2026, 18:10 IST गर्मी के मौसम में छाछ और बेसन से खड़ई बनाई जाती थी. ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी इनको पारंपरिक तरीके से तैयार किया जाता है. जो भी इसका स्वाद जानता है वे हमेशा से ही इसके दीवाने रहे हैं, वयस्कों की बात हो या फिर युवाओं की अगर एक बार इसका स्वाद चक लेते हैं. फिर बार-बार इसको खाने से रोक नहीं पाए जबकि बुजुर्गों के लिए तो यह गर्मी का सबसे अच्छा खाना होता है. बुंदेलखंड हमेशा से ही कम पानी और पिछड़ी पान के लिए जाना जाता है. पहले के समय में जब गर्मियों के मौसम में सब्जियां नहीं होती थी तब यहां के लोगों के द्वारा सब्जी के विकल्प के रूप में अलग-अलग तरह की चीजों को बनाया जाता था. जो सब्जी से अच्छी होने के साथ-साथ स्वाद में तो बेहतर होती ही थी. स्वास्थ्य के लिए भी काफी फायदेमंद हुआ करती थी. ऐसे ही गर्मी के मौसम में छाछ और बेसन से खड़ई बनाई जाती थी. ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी इनको पारंपरिक तरीके से तैयार किया जाता है. जो भी इसका स्वाद जानता है वे हमेशा से ही इसके दीवाने रहे हैं, वयस्कों की बात हो या फिर युवाओं की अगर एक बार इसका स्वाद चक लेते हैं. फिर बार-बार इसको खाने से रोक नहीं पाए जबकि बुजुर्गों के लिए तो यह गर्मी का सबसे अच्छा खाना होता है. इसको बनाने के लिए दो अलग-अलग तरह से मसाले तैयार किए जाते हैं. फिर इनको मिक्स करना पड़ता है सबसे पहले अगर छाछ की बात करें तो इसमें झोंका लगाने की आवश्यकता होती है. जिसके लिए रिफाइंड तेल, काला नमक सफेद नमक मिर्ची धनिया जीरा, सरसों की आवश्यकता होती है. इसमें झोंक दो तरह से लगाया जाता है जिसमें एक तो मिट्टी के दीपक को चूल्हे की आग में पकाया जाता है उसमें तेल और अन्य मसाले स्वाद के अनुसार डालते हैं. जिसके बाद इस दीपक को छाछ के अंदर डाल देते हैं. इस तरह से यह छाछ तैयार होती है. यह केवल यही तक सीमित नहीं रहता है. बेसन से भी एक डिश तैयार करनी पड़ती है. छाछ और बेसन से बनी शानदार डिशइसके लिए बेसन नमक मिर्च जीरा हींग जैसी चीजों की जरूरत होती है इसमें अगर हम एक कटोरी बेसन को लेते हैं तो सबसे पहले कढ़ाई में गर्म तेल के साथ झोंका तैयार करते हैं जिसमें नमक मिर्च जीरा हींग जैसी चीजों को डालते हैं. फिर इसमें बेसन को डालकर पानी लगते हैं और फिर इसको पकाने के लिए रखते हैं जब यह हलवे के जैसा हो जाता है तब इसको थाली में रख देते हैं. फिर चाकू से बर्फी की तरह कटिंग करते हैं थोड़ी देर बाद इन्हीं टुकड़ों को जो हमारी पहले से तैयार की हुई छांछ होती है. उसमें डाल देते हैं. फिर कुछ समय में इनको अपने भोजन के साथ सब्जी या अन्य डिश के साथ इस्तेमाल करते हैं. इसको बुंदेलखंड में खड़ई के नाम से जाना जाता है. गर्मी के मौसम में इसको खाना काफी अच्छा माना जाता है. जो छाछ होती है. वह शरीर को इम्यूनिटी के साथ-साथ ठंडक भी देती है और जो बेसन से तैयार की गई डिश होती है. वह पेट को साफ रखने में मदद करती है यानी कि इससे अच्छा डाइजेशन होता है. बुंदेलखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में दशकों से लोग इसको बनाते आ रहे हैं. गर्मी से शुरू होकर बरसात तक के मौसम तक यह चलती है. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Sagar,Madhya Pradesh Source link

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सड़क पर नमाज की ज‍िद से सुलगा कोलकाता, चले-ईंट पत्‍थर, लगाई गई...

होमताजा खबरदेश सड़क पर नमाज की ज‍िद से सुलगा कोलकाता, चले-ईंट पत्‍थर, RAF ने संभाला मोर्चा Last Updated:May 17, 2026, 17:09 IST Kolkata Protest: कोलकाता में अवैध कब्जे के खिलाफ प्रशासन का एक्शन शुरु हो चुका है. इसी बीच खबर आ रही है कि 7-प्वाइंट (पार्क सर्कस) क्रॉसिंग पर भीड़ और पुलिस के आमने सामने से हालात तब बेकाबू हो गए है. दरअसल, माइनॉरिटी समुदाय के लोग सड़क पर नमाज़ पढ़ने पर पाबंदी और बुलडोज़र की कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं. उग्र प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हिंसक झड़प की खबर आ रही है. पुलिस ने नमाजियों को जब रोकने की कोशिश की, तो उग्र भीड़ ने अचानक ईंट-पत्थर बरसाने शुरू कर दिए. स्थिति को संभालने के लिए मौके पर भारी पुलिस बल और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) को तैनात किया गया है. कोलकाता में भीड़ ने काटा गदर. Kolkata Protest: पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में पुलिस के एक्शन के बाद बवाल मच गया है. शहर के सबसे व्यस्त इलाकों में से एक 7-प्वाइंट क्रॉसिंग (पार्क सर्कस क्षेत्र) के पास प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हिंसक झड़प की खबर सामने आई है. यह बवाल सड़क पर नमाज़ पढ़ने पर लगी पाबंदी और हाल ही में प्रशासन द्वारा की गई हवड़ा स्टेशन इलाके में बुलडोजर कार्रवाई के विरोध में शुरू हुआ, जिसने देखते ही देखते हिंसक रूप ले लिया. मिली जानकारी के अनुसार, इलाके के लगभग 200 से 250 अल्पसंख्यक प्रदर्शनकारी प्रशासन के बुलडोज़र अभियान का विरोध करने के लिए इकट्ठा हुए थे. प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग थी कि उन्हें सड़क पर नमाज़ अदा करने की अनुमति दी जाए. वे इलाके के अन्य लोगों से भी इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की अपील कर रहे थे. मौलाना का सरकारी आदेश पालन करने की अपील कोलकाता की नखोदा मस्जिद के इमाम मौलाना शफीक कासमी ने सड़कों पर नमाज पढ़ने पर रोक लगाने और केवल विशेष अनुमति से ही इसकी इजाजत देने के सरकारी फैसले का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि  सड़क परिवहन के लिए है, नमाज पढ़ने के लिए नहीं. सरकारी आदेश का पालन करें. पुलिस ने रोका तो शुरू हुआ पथराव हालात तब पूरी तरह बेकाबू हो गए जब पुलिस ने भीड़ को सड़क पर प्रदर्शन करने और नमाज पढ़ने से रोकने का प्रयास किया. पुलिस की इस कार्रवाई से प्रदर्शनकारी उग्र हो गए और उन्होंने कानून हाथ में लेते हुए पुलिस बल पर ईंट-पत्थर से हमला कर दिया. बीच सड़क पर अचानक हुए इस पथराव से इलाके में अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया और राहगीरों में दहशत फैल गई. RAF ने संभाला मोर्चा हिंसा और पथराव की सूचना मिलते ही भारी पुलिस बल और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की टीमें तुरंत घटनास्थल पर पहुंच गईं. सुरक्षा बलों ने मुस्तैदी से मोर्चा संभालते हुए भीड़ को तितर-बितर किया और स्थिति को अपने नियंत्रण में लिया. फिलहाल इलाके में भारी पुलिस बल तैनात है और हालात तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में बताए जा रहे हैं. कोलकाता में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हिंसक झड़प कहां हुई? यह हिंसक झड़प कोलकाता के प्रसिद्ध 7-प्वाइंट (पार्क सर्कस) इलाके के पास हुई. प्रदर्शनकारी सड़क पर उतरकर किस बात का विरोध कर रहे थे? प्रदर्शनकारी प्रशासन द्वारा की गई बुलडोज़र कार्रवाई और सड़क पर नमाज़ पढ़ने पर लगाई गई पाबंदी का कड़ा विरोध कर रहे थे. पुलिस के रोकने पर उग्र भीड़ ने क्या प्रतिक्रिया दी? जब पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की, तो उग्र भीड़ ने पुलिस टीम पर ईंट-पत्थर बरसाने शुरू कर दिए. हालात को काबू में करने के लिए प्रशासन ने किसे तैनात किया? पथराव और हिंसा की सूचना मिलते ही स्थिति को नियंत्रित करने के लिए तुरंत भारी पुलिस बल के साथ-साथ रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) को मौके पर तैनात किया गया. About the Author Deep Raj DeepakSub-Editor Deep Raj Deepak working with News18 Hindi (hindi.news18.com/) Central Desk since 2022. He has strong command over national and international political news, current affairs and science and research-based news. …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Kolkata,West Bengal Source link

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NASA में नौकरी कैसे मिलेगी: दुनिया की सबसे एडवांस्ड लैब और करोड़ों...

Last Updated:May 17, 2026, 16:19 IST How to Join NASA: क्या कोई भारतीय नासा में साइंटिस्ट बन सकता है? जानिए भारत से नासा पहुंचने का रास्ता, जरूरी कोर्सेस, नागरिकता के नियम, जॉब रोल्स और करोड़ों के सैलरी पैकेज की पूरी ए-टू-जेड जानकारी. How to Join NASA: भारतीय भी नासा में नौकरी के लिए आवेदन कर सकते हैं, जानें कैसे नई दिल्ली (How to Join NASA). ज्यादातर साइंस स्टूडेंट्स का एक अल्टीमेट सपना होता है- ब्रह्मांड के रहस्यों को सुलझाने और अंतरिक्ष की गहराइयों को नापने वाली दुनिया की सबसे बड़ी स्पेस एजेंसी ‘नासा’ में काम करना. जब भी अंतरिक्ष, रॉकेट या नए ग्रहों की खोज की बात होती है तो दिमाग में सबसे पहला नाम नासा का ही आता है. कई लोगों को लगता है कि नासा में सिर्फ अमेरिकी नागरिक ही नौकरी पा सकते हैं और भारतीयों के लिए इसके दरवाजे बंद हैं. लेकिन यह पूरी तरह सच नहीं है. भारतीय मूल के कई वैज्ञानिक और इंजीनियर (जैसे कल्पना चावला, सुनीता विलियम्स) नासा में कामयाबी का परचम लहरा चुके हैं. अगर आप भारत में रहकर तारों और सितारों की दुनिया के सपने देख रहे हैं तो आपके लिए भी नासा तक पहुंचने का रास्ता खुला है. यह रास्ता थोड़ा चैलेंजिंग है क्योंकि इसके लिए आपको सिर्फ किताबी कीड़ा नहीं, बल्कि लीक से हटकर सोचने वाला इनोवेटर बनना होगा. नासा में एंट्री पाने के कई रूट हैं- चाहे अमेरिकी नागरिकता के जरिए हो, टॉप ग्लोबल यूनिवर्सिटीज के जरिए हो या इसरो (ISRO) और नासा के जॉइंट प्रोजेक्ट के माध्यम से. जानिए भारतीय स्टूडेंट के रूप में आप नासा में कैसे जगह बना सकते हैं, आपको कौन से कोर्स करने होंगे, क्या योग्यता चाहिए और वहां कितनी सैलरी मिलती है. नासा में नौकरी कैसे मिलेगी? नासा में सिर्फ अंतरिक्ष यात्री (Astronauts) ही नहीं होते, बल्कि वहां वैज्ञानिक, इंजीनियर, डेटा एक्सपर्ट और टेक्नीशियन की बहुत बड़ी टीम काम करती है. नासा में नौकरी के लिए STEM (Science, Technology, Engineering, and Mathematics) फील्ड की पढ़ाई करना जरूरी है. इंजीनियरिंग कोर्स: एयरोस्पेस इंजीनियरिंग, मैकेनिकल इंजीनियरिंग, कंप्यूटर साइंस, इलेक्ट्रिकल या रोबोटिक्स इंजीनियरिंग. साइंटिफिक कोर्स: एस्ट्रोफिजिक्स (Astro-physics), एस्ट्रोनॉमी, जियोलॉजी, डेटा साइंस या क्वांटम फिजिक्स. हाइर एजुकेशन जरूरी: नासा में रिसर्च पदों के लिए सिर्फ बैचलर डिग्री काफी नहीं होती. इसके लिए किसी टॉप संस्थान से मास्टर डिग्री (M.Tech/MS) या पीएचडी (Ph.D.) करनी चाहिए. NASA Eligibility Criteria: नागरिकता का नियम नासा में सीधे परमानेंट नौकरी (Federal Job) पाने के लिए अमेरिकी नागरिकता (US Citizenship) होना अनिवार्य है. यह नासा का सख्त नियम है. लेकिन भारतीय नागरिकों के लिए भी यहां रास्ते खुले हैं: ग्रीन कार्ड और नागरिकता: कई भारतीय स्टूडेंट्स पहले अमेरिका की टॉप यूनिवर्सिटीज (जैसे MIT, स्टैनफोर्ड, कैलटेक) से एमएस या पीएचडी करते हैं. इसके बाद वे वहां काम करते हुए ग्रीन कार्ड और फिर अमेरिकी नागरिकता हासिल करके नासा के लिए आवेदन करते हैं. नासा कॉन्ट्रैक्टर: नासा कई निजी कंपनियों (जैसे स्पेसएक्स, बोइंग, लॉकहीड मार्टिन) और रिसर्च लैब के साथ मिलकर काम करता है. इन कंपनियों में विदेशी नागरिकों को नौकरी मिल सकती है और इनके जरिए आप नासा के प्रोजेक्ट्स पर काम कर सकते हैं. नासा में नौकरी के लिए आवेदन कैसे करें? नासा में नौकरी के लिए आप नीचे बताए गए तीन तरीकों से आवेदन कर सकते हैं: USAJOBS पोर्टल: अगर आपके पास अमेरिकी नागरिकता या वैध वर्क परमिट है तो आप अमेरिका सरकार की ऑफिशियल वेबसाइट usajobs.gov पर जाकर सीधे नासा की वैकेंसीज के लिए अप्लाई कर सकते हैं. नासा इंटरनेशनल इंटर्नशिप (NASA I2): नासा चुनिंदा देशों के स्टूडेंट्स के लिए इंटर्नशिप प्रोग्राम चलाता है. इसके लिए नासा की ऑफिशियल वेबसाइट के इंटरनेशनल इंटर्नशिप पेज पर नजर रखें. इसरो (ISRO) के जरिए: भारत की अपनी स्पेस एजेंसी इसरो और नासा कई जॉइंट मिशन (जैसे NISAR सैटेलाइट प्रोजेक्ट) पर काम करते हैं. इसरो में वैज्ञानिक बनकर भी नासा के साथ काम करने का गौरव पा सकते हैं. NASA Jobs: नासा में किस पोस्ट पर नौकरी मिलेगी? नासा में आपकी योग्यता के हिसाब से बेहतरीन रोल्स पर नौकरी मिल सकती है: मिशन स्पेशलिस्ट/एस्ट्रोनॉट: अंतरिक्ष मिशन पर जाने वाले और स्पेस स्टेशन को संभालने वाले. एयरोस्पेस इंजीनियर: रॉकेट, सैटेलाइट और स्पेसक्राफ्ट का डिजाइन तैयार करने वाले. डेटा साइंटिस्ट: अंतरिक्ष से आने वाले सिग्नल्स, तस्वीरों और विशाल डेटा का एनालिसिस करने वाले. प्लैनेटरी साइंटिस्ट: दूसरे ग्रहों के वातावरण, मिट्टी और वहां जीवन की संभावनाओं पर रिसर्च करने वाले. नासा में कितनी सैलरी मिलती है? नासा में सैलरी अमेरिकी सरकार के ‘जनरल शेड्यूल’ (GS) पे-स्केल के आधार पर तय होती है। यहाँ शुरुआती सैलरी भी बेहद शानदार होती है: शुरुआती सैलरी (इंजीनियर/वैज्ञानिक): लगभग $65,000 से $90,000 सालाना (यानी करीब 54 लाख से 75 लाख रुपये). अनुभवी वैज्ञानिक/सीनियर रोल्स: सीनियर वैज्ञानिकों और एस्ट्रोनॉट्स की सैलरी $120,000 से $160,000+ सालाना (यानी 1 करोड़ से 1.35 करोड़ रुपये से अधिक) तक जाती है. इसके साथ ही वर्ल्ड क्लास हेल्थ इंश्योरेंस, रिसर्च फंड्स और दुनिया की सबसे एडवांस्ड लैब्स में काम करने का मौका मिलता है. नासा में नौकरी और करियर ऑप्शंस के लिए ऑफिशियल वेबसाइट nasa.gov/careers/ पर अपडेट्स चेक करते रहें. About the Author Deepali PorwalSenior Sub Editor Deepali Porwal is a seasoned bilingual journalist with 11 years of experience in the media industry. She currently works with News18 Hindi, focusing on the Education and Career desk. She is known for her versat…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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Adhik Maas Food Rules Tips 2026 what to eat and not to...

Adhik Maas Food Rules Tips 2026: अधिकमास की शुरुआत 17 मई से हो गई है और समापन 15 जून को होगा, यह दो महीने का होने वाला दुर्लभ ज्येष्ठ अधिकमास है. हिंदू धर्म में अधिकमास को विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व के साथ देखा जाता है. अधिकमास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है और यह लगभग हर तीन साल में एक बार आता है. इस पूरे मास में भगवान नारायण की पूजा-अर्चना, दान-पुण्य और आध्यात्मिक साधना का विशेष महत्व बताया गया है. मान्यता है कि इस महीने में की गई भक्ति और सत्कर्मों का फल कई गुना बढ़कर मिलता है. शास्त्रों में अधिकमास को लेकर कुछ नियम बताए गए हैं और इन नियमों में खान-पान से जुड़े नियम भी शामिल हैं. आइए जानते हैं कैसे बनता है यह अधिकमास और इस मास में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं… कैसे बनता है अधिकमास?हिंदू पंचांग चंद्र और सूर्य की गति पर आधारित होता है. चंद्र वर्ष लगभग 354 दिनों का होता है, जबकि सूर्य वर्ष 365 दिनों का. दोनों के बीच लगभग 11 दिनों का अंतर आ जाता है. यही अंतर हर तीन साल में लगभग एक महीने के बराबर हो जाता है. इस संतुलन को बनाए रखने के लिए हिंदू कैलेंडर में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे अधिकमास कहा जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इस मास को भगवान विष्णु ने अपना नाम ‘पुरुषोत्तम मास’ देकर विशेष महत्व प्रदान किया था. अधिकमास में खान-पान को लेकर नियमअधिकमास की शुरुआत के साथ ही लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि इस पवित्र अवधि में क्या खाएं और क्या नहीं. मान्यता है कि अधिकमास भगवान की साधना, दान और सात्त्विक लाइफस्टाइल के लिए विशेष माना जाता है, इसलिए खानपान पर भी संयम रखना जरूरी बताया जाता है. धार्मिक परंपराओं के अनुसार इस दौरान ताजा, हल्का और सुपाच्य भोजन जैसे फल, मौसमी सब्ज़ियां, घर का बना सादा खाना, दालें और कम मसाले वाले व्यंजन सेवन करने की सलाह दी जाती है. वहीं, तला-भुना, अत्यधिक मसालेदार, जंक फूड, मांसाहार और शराब से दूर रहने की बात कही जाती है. कई श्रद्धालु इस महीने में लहसुन-प्याज का भी परहेज करते हैं और व्रत रखकर फलाहार या केवल एक समय भोजन करते हैं. आस्थावान लोग मानते हैं कि अधिकमास में शुद्ध और सात्त्विक भोजन ना केवल शरीर को हल्का रखता है बल्कि मन को भी शांत और भक्ति में एकाग्र करता है. अधिकमास में क्या ना खाएं?अधिकमास के दौरान, दाल, मूली, प्याज, लहसुन, फूलगोभी, मूंगफली, सोयाबीन, उड़द दाल, बैंगन, शहद, चंदन, चुकंदर, सब्जियां, औषधियां, मछली, मांस, अंडे, कोई भी तामसिक भोजन, तिल का तेल और गाजर खाने से बचना चाहिए. इन सभी चीजों के साथ पराया अन्न, तंबाकू, मदिरा हमेशा-हमेशा के लिए त्याग दें. अधिकमास में क्या खाएं?महर्षि वाल्मीकि के अनुसार, अधिकमास में गेहूं, चावल, गाय का घी, मूंग, जौ, मटर, तिल, कटहल आदि चीजों का सेवन करना चाहिए. वहीं आम, केला, आंवला, ककड़ी, बथुआ, जीरा, सौंठ और सेंधा नमक का सेवन करना चाहिए. Source link

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‘मुसलमान न कभी झुका है और न कभी झुकेगा’ , अरशद मदनी...

जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी ने आरोप लगाया है कि देश को योजनाबद्ध तरीके से एक वैचारिक राष्ट्र में बदलने की कोशिश की जा रही है. मदनी ने दावा किया कि पहले केवल मुसलमान निशाने पर थे. अब इस्लाम को भी निशाना बनाया जा रहा है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि मुसलमान न कभी झुका है और न कभी झुकेगा. अरशद मदनी ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जमीयत उलमा-ए-हिंद की कार्यसमिति की दो दिवसीय बैठक का घोषणापत्र जारी किया. मदनी ने कहा, ‘देश के वर्तमान हालात, बढ़ती सांप्रदायिकता, संवैधानिक संस्थाओं की चुप्पी, मुसलमानों और इस्लामी प्रतीकों के खिलाफ बढ़ते कदम तथा नफरत आधारित राजनीति अत्यंत चिंताजनक है. हालांकि मुसलमान न कभी झुका है और न कभी झुकेगा. वह प्रेम से झुक सकता है, लेकिन ताकत, धमकी और अत्याचार के सामने उसे कभी झुकाया नहीं जा सकता.’ मदनी ने पोस्ट में लिखा, ‘देश में नफरत की राजनीति अब धमकी की राजनीति में बदल चुकी है, जिसका उद्देश्य मुसलमानों को भयभीत करके उन्हें अपनी शर्तों पर जीवन बिताने के लिए मजबूर करना है. सत्ता प्राप्ति के लिए अमन और एकता के साथ खतरनाक खिलवाड़ किया जा रहा है, जिसके परिणामस्वरूप धार्मिक उन्माद और नफरत लगातार बढ़ रही है, जबकि कानून के रखवाले मूकदर्शक बने हुए हैं. हालिया चुनावों के बाद कुछ राजनीतिज्ञों में नफरत के आधार पर सत्ता हासिल करने का चलन और बढ़ गई है. बहुसंख्यक समुदाय को अल्पसंख्यकों के विरुद्ध खड़ा करने के लिए धार्मिक भावनाओं को भड़काया जा रहा है, जबकि सरकारें भय और धमकी से नहीं बल्कि न्याय और इंसाफ से चलती हैं.’ अरशद मदनी ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के बयान का जिक्र किया. मदनी ने कहा, ‘पश्चिम बंगाल के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री का यह बयान कि वे ‘सिर्फ हिंदुओं के लिए काम करेंगे’ संवैधानिक और लोकतांत्रिक मूल्यों के पूरी तरह विरुद्ध है, क्योंकि हर मुख्यमंत्री शपथ लेकर सभी नागरिकों के साथ न्याय करने का संकल्प लेता है. सत्ता में बैठे लोगों की जिम्मेदारी हर नागरिक के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना है, न कि किसी विशेष वर्ग के खिलाफ नफरत और विभाजन की राजनीति करना.’ इसके साथ ही, मदनी ने ‘एक्स’ पोस्ट में कहा, ‘देश को योजनाबद्ध तरीके से एक वैचारिक राष्ट्र में बदलने की कोशिश की जा रही है. समान नागरिक संहिता, वंदे मातरम को अनिवार्य बनाना, मस्जिदों और मदरसों के खिलाफ कार्रवाइयां व एसआईआर की आड़ में वास्तविक नागरिकों को मताधिकार से वंचित करने जैसे कदम इसी सिलसिले की कड़ियां हैं.’ मदनी ने कहा कि जमीयत उलमा-ए-हिंद इन सभी कदमों के खिलाफ अपनी कानूनी और लोकतांत्रिक लड़ाई जारी रखेगी. मदनी ने यह भी कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों ने भी मुसलमानों को सामाजिक, शैक्षिक, राजनीतिक और आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचाया, लेकिन आज हालात उससे कहीं अधिक गंभीर हो चुके हैं. पहले केवल मुसलमान निशाने पर थे. अब इस्लाम को भी निशाना बनाया जा रहा है. अरशद मदनी ने कहा, ‘वर्ष 2014 के बाद बनाए गए कानूनों और हालिया कदमों इस बात का स्पष्ट प्रमाण हैं कि वर्तमान सरकार केवल मुसलमानों ही नहीं, बल्कि इस्लाम को भी नुकसान पहुंचाना चाहती है.’ जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष ने अपने पोस्ट के आखिर में लिखा, ‘हम सभी न्यायप्रिय दलों, सामाजिक संगठनों और देशहित में सोचने वाले नागरिकों से अपील करते हैं कि वे एकजुट होकर सांप्रदायिक और फासीवादी ताकतों का लोकतांत्रिक और सामाजिक स्तर पर मुकाबला करें व देश में भाईचारा, सहिष्णुता, न्याय और संविधान की सर्वोच्चता के लिए संयुक्त संघर्ष करें.’ Source link

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NEET Paper Leak Biwal Family Rajasthan: 12वीं में बमुश्किल पास हुए थे...

नई दिल्ली (NEET Paper Leak 2026). नीट यूजी परीक्षा में हुए कथित पेपर लीक मामले की परतें जैसे-जैसे खुल रही हैं, वैसे-वैसे बेहद चौंकाने वाले और दिलचस्प मामले सामने आ रहे हैं. CBI की रडार पर इस समय राजस्थान के सवाई माधोपुर का एक ऐसा परिवार है, जिसके 5 बच्चों ने इस बेहद कठिन परीक्षा में ‘असाधारण’ स्कोर हासिल किया. ‘बिवाल परिवार’ के नाम से चर्चित इस कुनबे के 3 सदस्यों- दिनेश बिवाल, मांगीलाल बिवाल और विकास बिवाल को सीबीआई पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है. जांच में सामने आया कि इस परिवार के जो बच्चे स्कूल-कॉलेज की सामान्य परीक्षाओं में बमुश्किल पास होते थे, उन्होंने नीट जैसी मेडिकल प्रवेश परीक्षा में टॉपर्स वाले नंबर हासिल कर लिए. CBI के हाथ लगे सबूत इशारा करते हैं कि यह सफलता किसी कड़ी मेहनत का नतीजा नहीं, बल्कि पेपर लीक और सॉल्वर गैंग के सुनियोजित खेल की देन थी. दिनेश और मांगीलाल बिवाल पर आरोप है कि उन्होंने मोटी रकम के बदले न केवल अपने परिवार के बच्चों को लीक प्रश्नपत्र मुहैया कराया, बल्कि पूरा सिंडिकेट भी चलाया. हॉस्टल से गायब हुए बिवाल परिवार के बच्चे हिंदुस्तान में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, बिवाल परिवार को लेकर हुए खुलासे के बाद जांच की आंच जैसे ही उनके बच्चों तक पहुंची, परिवार के कई सदस्य और छात्र अचानक अपने-अपने मेडिकल कॉलेज और हॉस्टल से गायब हो गए हैं. इस मामले ने परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा और प्रामाणिकता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. 12वीं में 55% और नीट में धमाका: विकास बिवाल की कहानी सीबीआई की गिरफ्त में आए इस परिवार के एक छात्र विकास बिवाल का रिकॉर्ड सबसे ज्यादा हैरान करने वाला है. विकास का 12वीं कक्षा में शैक्षणिक रिकॉर्ड बेहद सामान्य था और उसने केवल 55 प्रतिशत अंक हासिल किए थे. लेकिन जब नीट का रिजल्ट आया तो उसने अचानक 86 प्रतिशत अंक हासिल कर सबको चौंका दिया और सवाई माधोपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेज में सीट सुरक्षित कर ली. मेडिकल कॉलेज में खुली पोल: 30% नंबर लाना भी भारी नीट में असाधारण स्कोर करने वाले विकास की असलियत तब सामने आई, जब उसने मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई शुरू की. कॉलेज प्रिंसिपल के मुताबिक, विकास पढ़ाई में बेहद कमजोर छात्र साबित हुआ और कॉलेज की इंटरनल परीक्षाओं में वह औसतन केवल 30 प्रतिशत अंक ही ला पाता था. पोल खुलने और चाचा की गिरफ्तारी के डर से विकास जनवरी महीने से ही बिना किसी सूचना के मेडिकल कॉलेज से गायब है. टॉपर भतीजी पलक और बेटी प्रगति भी रडार पर इस खेल में केवल विकास शामिल नहीं था. दिनेश बिवाल की भतीजी पलक ने नीट में 98.61 जैसे भारी-भरकम परसेंटाइल हासिल किए थे. उसे जयपुर का प्रतिष्ठित एसएमएस (SMS) मेडिकल कॉलेज मिला था. स्कूल में मेधावी रहने वाली पलक मेडिकल कॉलेज के टेस्ट में औसत छात्रा साबित हुई. अपने परिवार पर सीबीआई का शिकंजा कसते ही पलक भी अचानक हॉस्टल छोड़कर फरार हो गई है. इसी तरह मांगीलाल की बेटी प्रगति भी (नीट में 89% अंक) पिता की गिरफ्तारी वाले दिन से ही कॉलेज से छुट्टी पर चली गई है. ग्रेस मार्क्स से पास होने वाले भी डॉक्टर बनने की रेस में! इस परिवार का फर्जीवाड़ा यहीं नहीं रुका. इस साल नीट की परीक्षा में बैठने वाले परिवार के दो अन्य छात्र ऋषि और अमन का रिकॉर्ड तो और भी खराब है. इनमें से ऋषि ने अपनी 12वीं की परीक्षा बेहद मुश्किल से ग्रेस मार्क्स (कृपांक) के सहारे केवल 50% अंकों के साथ पास की थी. सीबीआई को अंदेशा है कि इन दोनों को भी परीक्षा पास कराने के लिए इसी शॉर्टकट और लीक पेपर का सहारा दिया जा रहा था. कैसे काम करता था बिवाल परिवार का ‘पारिवारिक रैकेट’? सीबीआई की जांच में यह बात साफ हो रही है कि दिनेश और मांगीलाल बिवाल केवल अपने बच्चों का भविष्य नहीं संवार रहे थे, बल्कि वे इस पेपर लीक नेटवर्क के मुख्य बिचौलिए थे. वे अन्य कमजोर और औसत छात्रों के अभिभावकों से संपर्क साधते थे और लाखों रुपये लेकर उन्हें परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र और सॉल्वर गैंग के कोड्स उपलब्ध कराते थे. जांच एजेंसियां अब इस परिवार के पुराने रिकॉर्ड और बैंक खातों को खंगाल रही हैं ताकि पता चल सके कि यह खेल कितने सालों से चल रहा था. Source link

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गर्मियों में कौन-सी रोटी खाना है सबसे फायदेमंद? डाइटिशियन ने दी सलाह

Last Updated:May 17, 2026, 12:14 IST गर्मी में खानपान को लेकर डॉक्टरों ने सलाह दी है कि हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन ही सबसे बेहतर है. फरीदाबाद की डाइटिशियन डॉ. मीना के अनुसार गेहूं, जौ और मल्टीग्रेन रोटी सीमित मात्रा में लें… जबकि बाजरा-मक्का थोड़ी भारी होती हैं. ज्यादा तेल-घी और ओवरईटिंग से बचना जरूरी है. फरीदाबाद: गर्मी बढ़ते ही खानपान में जरा सी लापरवाही भी सेहत पर भारी पड़ सकती है. ऐसे में डॉक्टर सलाह दे रहे हैं कि इस मौसम में हल्का और आसानी से पचने वाला खाना ही सबसे बेहतर होता है खासकर रोटी को लेकर लोगों के मन में अक्सर सवाल रहता है. कि कौन-सी रोटी खाएं और कितनी मात्रा में खाएं, ताकि पेट भी ठीक रहे और गर्मी का असर भी कम हो. रोटी जितनी सादी और हल्की होगी उतनी ही सेहत के लिए अच्छी इसी मुद्दे पर फरीदाबाद के सर्वोदय हॉस्पिटल की चीफ डाइटिशियन डॉक्टर मीना ने Local18 चैनल से बातचीत में बताती हैं गर्मियों में रोटी जितनी सादी और हल्की होगी उतनी ही सेहत के लिए अच्छी रहेगी. डॉक्टर मीना कहती हैं रोटी में ज्यादा मसाले, तेल या घी का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए क्योंकि इससे पाचन पर असर पड़ता है और गर्मी में अपच की समस्या बढ़ सकती है. क्या गर्मी में बाजरे-मक्के की रोटी खा सकते हैं डॉक्टर मीना बताती हैं मक्के और बाजरे जैसी मोटे अनाज की रोटियां पूरी तरह नुकसानदायक नहीं हैं, लेकिन ये थोड़ी भारी होती हैं. अगर इन्हें सीमित मात्रा में खाया जाए और साथ में छाछ या फाइबर युक्त चीजें ली जाएं तो ये आसानी से पच जाती हैं और शरीर पर गर्मी का असर भी कम होता है. मैं हमेशा लोगों को सलाह देती हूं इन रोटियों को पूरी तरह छोड़ने की जरूरत नहीं है बस मात्रा यानि क्वांटिटी पर ध्यान रखना जरूरी है. गर्मियों में कौन-सी रोटी सबसे बेहतर डॉक्टर मीना बताती हैं वहीं अक्सर लोग यह भी पूछते हैं गर्मियों में कौन-सी रोटी सबसे बेहतर है. इस पर मैं यही कहना चाहूंगी गेहूं, जौ या मल्टीग्रेन आटे की रोटी सामान्य रूप से सबसे अच्छा विकल्प है. लेकिन असली फर्क रोटी की किस्म से ज्यादा इस बात पर पड़ता है कि आप कितनी रोटी खा रहे हैं. जरूरत से ज्यादा खाना, चाहे वह कोई भी रोटी हो पाचन को बिगाड़ सकता है. लस्सी या फाइबर युक्त ड्रिंक पीएं डॉक्टर मीना बताती हैं मैदा और मल्टीग्रेन को लेकर भी लोग अक्सर कन्फ्यूज रहते हैं. डॉक्टर मीना बताती हैं मैदा भले ही हल्का लगता है, लेकिन बाद में भारीपन महसूस करा सकता है. जबकि मल्टीग्रेन रोटी में फाइबर ज्यादा होता है जो पेट के लिए फायदेमंद है. इसे भी लस्सी या फाइबर युक्त ड्रिंक के साथ लेना बेहतर रहता है. डॉक्टर मीना बताती हैं गर्मियों में गैस, कब्ज या एसिडिटी की समस्या सिर्फ रोटी की वजह से नहीं होती बल्कि कई बार बासी या ज्यादा पकी हुई रोटी या फिर जरूरत से बड़ी और ज्यादा मात्रा में रोटी खाना भी इसका कारण बन सकता है. इसलिए ताजा, सीमित और ठीक मात्रा में रोटी खाना ही सबसे सही तरीका है. सही तरीके से खाते हैं तो कोई नुकसान नहीं होगा. About the Author Vivek Kumar विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Faridabad,Faridabad,Haryana Source link

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Gardening Tips: क्या इंसानों की तरह पौधों को भी लगती है लू?...

Last Updated:May 17, 2026, 11:13 IST Plants Heatwave Tips: गर्मियों में बढ़ता तापमान और तेज लू सिर्फ इंसानों को ही नहीं, बल्कि पौधों को भी प्रभावित करती है. अत्यधिक गर्मी के कारण पौधों की पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं, मिट्टी जल्दी सूख जाती है और पौधों की वृद्धि रुक सकती है. ऐसे में कुछ आसान और देसी उपाय अपनाकर पौधों को सुरक्षित रखा जा सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार सुबह जल्दी या शाम के समय पौधों में पानी देना सबसे बेहतर माना जाता है, ताकि पानी जल्दी न सूखे. मिट्टी की नमी बनाए रखने के लिए सूखी पत्तियां, भूसा या नारियल की भूसी का इस्तेमाल किया जा सकता है. तेज धूप के समय पौधों को हल्की छांव देना भी फायदेमंद रहता है. ख़बरें फटाफट भीलवाड़ा: राजस्थान सहित भीलवाड़ा में तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है और भीलवाड़ा के तापमान की बात की जाए तो भीलवाड़ा में भी तापमान अब 40 से 45 डिग्री के बीच पहुंच गया है. गर्मी में हम सबसे पहले यही सोचते हैं कि अपने आप को और अपने पशुओं को लू लगने से कैसे बचा सकते हैं और इसके लिए कई तरह के जतन भी करते हैं लेकिन क्या आप यह बात जानते हैं कि अपने किचन गार्डन में पौधों को भी लू लग सकती है. भीषण गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान का असर अब केवल इंसानों पर ही नहीं, बल्कि पौधों पर भी साफ दिखाई देने लगा है. तेज धूप और लू के कारण पौधों में “हीट स्ट्रेस” की स्थिति बन जाती है, जिससे उनकी ग्रोथ पर बुरा असर पड़ता है. तेज गर्मी के कारण पौधों की पत्तियां मुरझाने लगती हैं और कई बार उनके किनारे जलने जैसे नजर आते हैं. पानी की कमी के चलते पौधे सूखने लगते हैं और फूल-फल भी झड़ सकते हैं. खासकर गमलों में लगे पौधे ज्यादा प्रभावित होते हैं क्योंकि उनमें मिट्टी जल्दी सूख जाती है. पौधों को लू से बचाने के लिए सुबह या शाम के समय ही पानी देना चाहिए और उन्हें सीधी धूप से बचाना जरूरी है. इसके अलावा मिट्टी में नमी बनाए रखने के लिए मल्चिंग करना भी फायदेमंद होता है. थोड़ी सी सावधानी से पौधों को गर्मी से सुरक्षित रखा जा सकता है. पौधों में लगे फूल और छोटे-छोटे फल झड़ने लगतेरूपेंद्र सिंह ने बताया कि जब तापमान बहुत ज्यादा बढ़ जाता है और मिट्टी में नमी की कमी हो जाती है, तब पौधों में हीट स्ट्रेस की स्थिति बनती है. इस दौरान पौधों की पत्तियां मुरझाने लगती हैं और कई बार उनके किनारे जले हुए जैसे दिखते हैं. यदि समय रहते ध्यान नहीं दिया जाए तो पौधे सूख भी सकते हैं. इसका असर सबसे ज्यादा गमलों में लगे पौधों पर होता है, क्योंकि उनमें मिट्टी जल्दी सूख जाती है और जड़ों को पर्याप्त नमी नहीं मिल पाती. भीषण गर्मी का असर पौधों के फूल और फलों पर भी पड़ता है. तापमान ज्यादा होने पर पौधों में लगे फूल और छोटे-छोटे फल झड़ने लगते हैं, जिससे उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है. ऐसे में किचन गार्डन संभालने वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है, ताकि उनकी मेहनत पर पानी न फिर जाए और पौधे स्वस्थ बने रहें. इंसानों के साथ-साथ पौधों का ख्याल रखना भी जरूरीपौधों को लू से बचाने के लिए कुछ आसान उपाय अपनाए जा सकते हैं. सबसे पहले पौधों को सुबह जल्दी या शाम के समय ही पानी देना चाहिए, ताकि पानी जल्दी सूखे नहीं और जड़ों तक सही तरीके से पहुंच सके. इसके अलावा पौधों को सीधी तेज धूप से बचाने के लिए शेड या जाल का उपयोग करना फायदेमंद रहता है. मिट्टी की नमी बनाए रखने के लिए मल्चिंग करना भी एक कारगर तरीका है, जिससे पौधों को लंबे समय तक नमी मिलती रहती है.  थोड़ी सी सावधानी और सही देखभाल से पौधों को भीषण गर्मी और लू से बचाया जा सकता है. यदि समय-समय पर पानी, छाया और पोषण का ध्यान रखा जाए तो किचन गार्डन के पौधे न केवल सुरक्षित रहेंगे, बल्कि अच्छी ग्रोथ भी करेंगे. ऐसे में गर्मी के इस दौर में इंसानों के साथ-साथ पौधों का ख्याल रखना भी बेहद जरूरी हो गया है. About the Author Jagriti Dubey Hi, I am Jagriti Dubey, a media professional with 6 years of experience in social media and content creation. I started my career with an internship at Gbn 24 news channel in 2019 and have worked with many repu…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Bhilwara,Rajasthan Source link

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महिलाओं के कपड़े फाड़े, बाल काटे और चप्पलों की माला पहनाकर 2...

Last Updated:May 17, 2026, 10:11 IST यह विवाद एक परिवार के मंदिर में प्रवेश को लेकर शुरू हुआ. स्थानीय पंचायत ने उस परिवार के मंदिर आने पर आपत्ति जताई थी, लेकिन परिवार ने इस प्रतिबंध का विरोध किया और मंदिर जाने पर अड़ा रहा. बताया जा रहा है कि घटना वाले दिन मंदिर परिसर में धार्मिक कार्यक्रम और सामुदायिक भोज का आयोजन किया गया था. इसी दौरान पीड़ित परिवार के एक युवक ने मंदिर में प्रवेश पर रोक का विरोध किया. घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. महाराष्ट्र के उल्हासनगर से इंसानियत को शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है. यहां मंदिर में प्रवेश को लेकर हुए विवाद के बाद कुछ महिलाओं के साथ कथित तौर पर बेरहमी से मारपीट की गई, उनके कपड़े फाड़े गए, बाल काटे गए और उन्हें चप्पलों की माला पहनाकर सड़क पर घुमाया गया. घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. पुलिस के मुताबिक, विवाद एक परिवार के मंदिर में प्रवेश को लेकर शुरू हुआ. स्थानीय पंचायत ने उस परिवार के मंदिर आने पर आपत्ति जताई थी, लेकिन परिवार ने इस प्रतिबंध का विरोध किया और मंदिर जाने पर अड़ा रहा. बताया जा रहा है कि घटना वाले दिन मंदिर परिसर में धार्मिक कार्यक्रम और सामुदायिक भोज का आयोजन किया गया था. इसी दौरान पीड़ित परिवार के एक युवक ने मंदिर में प्रवेश पर रोक का विरोध किया. युवक का कहना था कि उसके परिवार ने कोई गलत काम नहीं किया है, इसलिए उन्हें मंदिर में जाने से नहीं रोका जा सकता. इसके बाद वह मंदिर परिसर में चला गया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, युवक के मंदिर में जाने से वहां मौजूद दूसरे पक्ष के लोग भड़क गए. आरोप है कि बाद में कुछ लोगों ने पीड़ित परिवार के घर पर लाठी-डंडों और लोहे की रॉड से हमला कर दिया. पहले परिवार के पुरुषों के साथ मारपीट की गई और फिर महिलाओं को निशाना बनाया गया. आरोप है कि महिलाओं को घर से घसीटकर सड़क पर लाया गया, उनके कपड़े फाड़े गए, उन्हें अर्धनग्न किया गया और कैंची से उनके बाल काट दिए गए. इतना ही नहीं, महिलाओं को चप्पलों की माला पहनाकर करीब दो किलोमीटर तक सड़क पर घुमाया गया. आरोपियों ने रास्ते में कई लोगों को महिलाओं के पैर छूने के लिए भी मजबूर किया. घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस पर कार्रवाई का दबाव बढ़ा. वीडियो में महिलाएं सड़क पर अपमानित होती नजर आ रही हैं जबकि आसपास लोग खड़े दिखाई दे रहे हैं. पुलिस का कहना है कि पीड़ित और आरोपी दोनों परिवार एक ही समुदाय से जुड़े हैं. बताया जा रहा है कि इससे पहले भी पीड़ित परिवार पर कुछ आरोप लगाए गए थे, जिसके बाद कथित तौर पर उनका सामाजिक बहिष्कार किया गया था. उल्हासनगर एसीपी शैलेश काले ने बताया कि इस मामले में सात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है और अब तक दो महिलाओं को गिरफ्तार किया जा चुका है. पुलिस के मुताबिक, दोनों पक्षों के बीच मंदिर में प्रवेश को लेकर विवाद था और दोनों परिवारों के खिलाफ अलग-अलग मामले दर्ज किए गए हैं. वहीं पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने शुरुआत में मामले को गंभीरता से नहीं लिया. परिवार का कहना है कि घटना महिलाओं की गरिमा और मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन थी, लेकिन पुलिस ने पहले मामूली धाराओं में केस दर्ज किया. फिलहाल पुलिस मुख्य आरोपियों समेत फरार अन्य लोगों की तलाश में जुटी हुई है. About the Author Saad Omar साद बिन उमर को पत्रकारिता के क्षेत्र में 15 साल से अधिक का अनुभव है, जिनमें से 12 साल उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता को दिए है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने आज तक, एनडीटीवी, पीटीआई और नया इंडिया जैसे प्र…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Ulhasnagar,Thane,Maharashtra Source link

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क्या बिहार में नई पॉलिटिकल लाइन खींच दी गई? सम्राट चौधरी को...

पटना. “जब नीतीश कुमार ने बिहार के मुख्यमंत्री पद की कमान छोड़ने का फैसला किया, तो उन्होंने अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी भी खुद तय किया था. नीतीश जी ने सम्राट चौधरी के हाथों में अपना उत्तराधिकार सौंपा था.” अपने इसी संबोधन में ललन सिंह ने आगे जोड़ा कि “सम्राट चौधरी सिर्फ भाजपा की पसंद नहीं थे, बल्कि उन्हें खुद नीतीश कुमार ने आशीर्वाद दिया था. सम्राट चौधरी ने भी संकल्प लिया है कि वे नीतीश कुमार के दिखाए विकास के रास्ते पर ही बिहार को आगे बढ़ाएंगे.” लखीसराय के एक दिवसीय दौरे पर पहुंचे केंद्रीय पंचायती राज मंत्री ललन सिंह ने खुले मंच से जैसे ही बिहार के वर्तमान और भावी नेतृत्व को लेकर जेडीयू का रुख साफ किया, उनके इस बयान ने बिहार की राजनीति में अचानक ही गर्माहट ला दी है. दरअसल, बिहार की सियासत में ‘उत्तराधिकार’ का सवाल हमेशा से सबसे जटिल और संवेदनशील रहा है. ऐसे में राजनीति के जानकारों की नजर में ललन सिंह का दिया गया बयान जेडीयू और बीजेपी के शीर्ष स्तर पर तय की गई एक बेहद गहरी रणनीतिक बिसात का हिस्सा माना जा रहा है. ललन सिंह का यह बयान इसलिए भी अहम है, क्योंकि बिहार में हाल ही में नेतृत्व परिवर्तन हुआ और सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री बने हैं. इसको लेकर विपक्ष लगातार यह आरोप लगाता रहा कि मुख्यमंत्री चयन भाजपा का एकतरफा फैसला था और जेडीयू की भूमिका सीमित हो गई है. अब जब उन्होंने सार्वजनिक तौर पर इसकी घोषणा की है तो ललन सिंह के इस बयान को सिर्फ एक राजनीतिक प्रशंसा भर नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे बिहार NDA की भविष्य की राजनीति का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है. ललन सिंह के बयान के कई राजनीतिक मायने ललन सिंह ने जब यह कहा कि सम्राट चौधरी ने भी यह संकल्प लिया है कि वे नीतीश कुमार द्वारा दिखाए गए रास्ते पर चलते हुए बिहार के विकास को आगे बढ़ाएंगे. साफ है कि उनके इस बयान को बिहार एनडीए की भविष्य की राजनीति का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है. वरिष्ठ पत्रकार अशोक कुमार शर्मा कहते हैं कि नीतीश कुमार के सक्रिय राजनीति से पीछे हटने के बाद बिहार एनडीए के भीतर जो नए शक्ति केंद्र उभर रहे हैं, ललन सिंह का यह बयान उन समीकरणों को एक नया आकार देता हुआ प्रतीत हो रहा है. ललन सिंह के बयान ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि सम्राट चौधरी को सिर्फ भाजपा का समर्थन नहीं, बल्कि खुद नीतीश कुमार की सहमति और भरोसा भी प्राप्त था. निशांत कुमार बनाम सम्राट चौधरी ललन सिंह का यह बयान अचानक नहीं आया है, इसके पीछे हालिया सियासी घटनाक्रम है. मार्च 2026 में जब नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से हटने के संकेत दिए, तो उनके बेटे निशांत कुमार आधिकारिक तौर पर जेडीयू में शामिल हो गए थे. इसके बाद 15 अप्रैल 2026 में एनडीए गठबंधन के तहत भाजपा के सम्राट चौधरी को बिहार का नया मुख्यमंत्री बनाया गया. इसके बाद मंत्रिपरिषद विस्तार में बीते 7 मई को निशांत कुमार को उनके मंत्रिमंडल में स्वास्थ्य मंत्री की जिम्मेदारी दी गई. इसके बावजूद, जेडीयू के अंदर और राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा आम थी कि क्या नीतीश कुमार अपनी पारिवारिक विरासत को ही आगे बढ़ाएंगे. लेकिन, लखीसराय में ललन सिंह ने ‘उत्तराधिकारी’ शब्द का इस्तेमाल करके यह साफ संदेश देने की कोशिश की है कि नीतीश कुमार की राजनीतिक विरासत का नेतृत्व अब भाजपा के सम्राट चौधरी के हाथों में है, न कि उनके बेटे निशांत कुमार के पास. लव-कुश समीकरण की मजबूरी बिहार में नीतीश कुमार की राजनीति का सबसे बड़ा आधार ‘लव-कुश’ (कुर्मी और कोइरी) वोट बैंक रहा है. नीतीश कुमार खुद कुर्मी जाति से आते हैं, जबकि वर्तमान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी कोइरी (कुशवाहा) समाज के बड़े चेहरे हैं. नीतीश कुमार के हटने के बाद इस बात का बड़ा डर था कि यह वोट बैंक बिखर सकता है. ललन सिंह ने सम्राट चौधरी को नीतीश का उत्तराधिकारी बताकर इस पारंपरिक वोट बैंक को एकजुट रखने की रणनीतिक चाल चली है. वे संदेश देना चाहते हैं कि नीतीश कुमार के जाने के बाद भी ‘लव-कुश’ एकता की सरकार बिहार में मजबूती से काम कर रही है. क्यों अहम है ललन सिंह का बयान? बिहार में करीब दो दशक तक सत्ता के केंद्र में रहे नीतीश कुमार की राजनीति हमेशा इस सवाल से जुड़ी रही कि उनके बाद नेतृत्व किसके हाथ में जाएगा. जेडीयू के भीतर भी कभी किसी नेता को खुलकर उत्तराधिकारी नहीं बताया गया. ऐसे में ललन सिंह जैसे वरिष्ठ नेता का सार्वजनिक मंच से सम्राट चौधरी को उत्तराधिकारी बताना राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. ललन सिंह का बयान इसलिए भी खास यह बयान इसलिए भी अहम है क्योंकि बिहार में हाल ही में नेतृत्व परिवर्तन हुआ और सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री बने. विपक्ष लगातार यह आरोप लगाता रहा कि मुख्यमंत्री चयन भाजपा का एकतरफा फैसला था और जेडीयू की भूमिका सीमित हो गई थी. लेकिन ललन सिंह के बयान ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि सम्राट चौधरी को सिर्फ भाजपा का समर्थन नहीं बल्कि खुद नीतीश कुमार की सहमति और भरोसा भी प्राप्त था. NDA में संतुलन साधने की कोशिश राजनीति के जानकारों का मानना है कि यह बयान एनडीए के भीतर संतुलन बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है. बिहार में भाजपा और जेडीयू के रिश्ते हमेशा राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार बदलते रहे हैं. ऐसे में सम्राट चौधरी को “नीतीश मॉडल” का विस्तार बताना जेडीयू समर्थकों को यह भरोसा देने की कोशिश है कि सत्ता परिवर्तन के बावजूद शासन की दिशा नहीं बदलेगी. क्या आंतरिक खींचतान पर मरहम है बयान? सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद बिहार भाजपा के भीतर भी कई तरह की आंतरिक खींचतान की खबरें चर्चा में आ रही थीं. राजनीति के जानकारों का मानना है कि ललन सिंह ने यह बयान देकर सम्राट चौधरी की स्थिति को और मजबूत किया है. उन्होंने विपक्ष और भाजपा के विरोधी धड़े को यह संदेश दिया है कि मौजूदा सरकार और सम्राट चौधरी के पीछे नीतीश कुमार का पूरा नैतिक और राजनीतिक समर्थन खड़ा है. बिहार में अनुकंपा बनाम जनता की राजनीति बहरहाल, लखीसराय में दिया

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