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हम विलय नहीं कर रहे… राहुल-अभिषेक मुलाकात के बाद टीएमसी ने अटकलों...

होमताजा खबरदेश हम विलय नहीं कर रहे… राहुल-अभिषेक मुलाकात के बाद TMC ने अटकलों को किया खारिज Last Updated:June 11, 2026, 05:46 IST TMC Rejects Speculation Of Merger With Congress: टीएमसी ने कांग्रेस में विलय की अटकलें खारिज कर दी है. बुधवार को राहुल गांधी और अभिषेक बनर्जी की डेढ़ घंटे से अधिक चली मीटिंग में विपक्षी एकता पर चर्चा हुई. अभिषेक बनर्जी और राहुल गांधी. तृणमूल कांग्रेस ने कांग्रेस में पार्टी के संभावित विलय की अटकलों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के बीच हुई मुलाकात में इस तरह का कोई प्रस्ताव या चर्चा नहीं हुई. पार्टी ने इन खबरों को अफवाह और तथ्यहीन बताया है. राहुल गांधी और अभिषेक बनर्जी के बीच बुधवार को 10 जनपथ में करीब डेढ़ घंटे तक बैठक हुई. यह बैठक ऐसे समय में हुई जब एक दिन पहले ही पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने कांग्रेस संसदीय दल (CPP) की अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की थी. दोनों बैठकों के बाद राजनीतिक गलियारों में टीएमसी और कांग्रेस के बीच संभावित नजदीकियों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थीं. हालांकि टीएमसी सूत्रों ने साफ कहा कि कांग्रेस में पार्टी के विलय को लेकर कोई बातचीत नहीं हुई. कांग्रेस की ओर से भी इस तरह की किसी भी संभावना से इनकार किया गया है. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी सोशल मीडिया पर कहा कि सोनिया गांधी और ममता बनर्जी की मुलाकात को लेकर मीडिया में चल रही कई खबरें पूरी तरह गलत हैं. उन्होंने बताया कि दोनों नेताओं के बीच लंबे समय से व्यक्तिगत संबंध रहे हैं और मुलाकात बेहद सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई. सूत्रों के अनुसार राहुल गांधी और अभिषेक बनर्जी की बैठक में पश्चिम बंगाल की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों, राज्य में कांग्रेस और टीएमसी के बीच संभावित समन्वय तथा विपक्षी एकता को मजबूत करने के मुद्दों पर चर्चा हुई. इसके अलावा 2029 के लोकसभा चुनाव और इंडिया गठबंधन को अधिक प्रभावी बनाने की रणनीति पर भी विचार-विमर्श किया गया. बैठक के बाद टीएमसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक तस्वीर साझा करते हुए कहा कि दोनों नेताओं की मुलाकात लोकतंत्र की रक्षा, संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करने और देश के नागरिकों के हितों के लिए साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है. पार्टी ने अपने संदेश में कहा कि टीएमसी गठबंधन एकजुट है. इस बीच TMC के भीतर जारी असंतोष और बगावती सुरों ने भी राजनीतिक चर्चाओं को हवा दी है. कुछ बागी नेताओं के खेमे से यह दावा किया गया है कि लोकसभा में पार्टी के 28 सांसदों में से कम से कम 19 सांसद उनके संपर्क में हैं. हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है. उधर, शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने सुझाव दिया कि टीएमसी और एनसीपी (शरद पवार गुट) जैसी पार्टियां, जो कभी कांग्रेस से निकली थीं, उन्हें फिर से एकजुट होकर कांग्रेस को मजबूत करना चाहिए. उन्होंने इसे वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों की जरूरत बताया. इसी बीच टीएमसी को एक और झटका तब लगा जब राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने पार्टी और राज्यसभा दोनों से इस्तीफा दे दिया. इससे पहले राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर राय भी पार्टी छोड़ चुके हैं. About the Author संतोष कुमार न्यूज18 हिंदी में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत. मीडिया में करीब दो दशक का अनुभव. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आईएएनएस, बीबीसी, अमर उजाला, जी समूह सहित कई अन्य संस्थानों में कार्य करने का मौका मिला. माखनलाल यूनिवर्स…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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bus fare increased farmers and passengers angry in purnia public opinion

Last Updated:June 10, 2026, 22:08 IST Purnia Public Opinion: 1 जून से बसों के किराए में 10-15% की वृद्धि के बाद पूर्णिया की जनता का बजट बिगड़ गया है. यात्रियों का कहना है कि काम की मजबूरी में सफर तो करना ही पड़ेगा, लेकिन सरकार ने बोझ बढ़ा दिया है. सबसे ज्यादा आक्रोशित किसान हैं. जिनका कहना है कि फसल का दाम तो नहीं बढ़ा, लेकिन किराया बढ़ गया. बस संचालकों के अनुसार, बढ़े किराए के कारण बसों में यात्री कम मिल रहे हैं. ख़बरें फटाफट पूर्णिया: बिहार सरकार द्वारा 1 जून से बस के किराए में 10 से 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी का असर पूर्णिया में साफ दिखने लगा है. इस फैसले पर आम जनता की राय बंटी हुई है. कुछ इसे महंगाई के दौर में जरूरी मान रहे हैं, तो कुछ इसे सीधे तौर पर अपनी जेब पर बोझ बता रहे हैं. लेकिन, इस पूरे मामले में पूर्णिया के किसानों ने जो बात कही है, वह हर किसी को सोचने पर मजबूर कर रही है. अनाज के दाम स्थिर, फिर किराया क्यों बढ़ा?लोकल 18 की टीम ने जब पूर्णिया बस स्टैंड पर यात्रियों, बस संचालकों और किसानों से बातचीत की. तो लोगों का दर्द छलक पड़ा. जहां कुछ यात्रियों ने महंगाई को देखते हुए किराए की वृद्धि को सही बताया. वहीं मीनू झा, पुष्कर कुमार और राजेश कुमार जैसे नियमित यात्रियों का कहना है कि 10-15 प्रतिशत की बढ़ोतरी आम आदमी के बजट से बाहर है. सबसे तीखी प्रतिक्रिया किसानों की रही. किसानों का कहना है कि सरकार हमारे द्वारा उपजाए गए फसलों का तो उचित मूल्य नहीं बढ़ाती, लेकिन किराया बढ़ाने में तनिक भी देरी नहीं करती. अनाज के दाम तो वैसे ही हैं, लेकिन हर जरूरी सेवा महंगी होती जा रही है. काम है तो जाना पड़ेगा, चाहे किराया कितना भी होबस स्टैंड पर मौजूद लोगों का कहना है कि सरकारी फैसले के कारण किराया तो बढ़ गया है. लेकिन लोगों की मजबूरी कम नहीं हुई है. यात्रियों का कहना है कि काम के सिलसिले में सफर तो करना ही पड़ेगा. चाहे किराया कितना भी क्यों न हो जाए. हालांकि लोगों ने यह जरूर कहा कि सरकार को 15-20 प्रतिशत तक की वृद्धि के बजाय 5 प्रतिशत ही किराया बढ़ाना चाहिए था. उदाहरण के तौर पर जिस रूट का किराया पहले 120 रुपये था. अब उसके लिए 140 से 150 रुपये तक चुकाने पड़ रहे हैं. सवारी के इंतजार में खाली खड़ी बसेंकिराया बढ़ने का सीधा असर बस ऑपरेटरों पर भी पड़ा है. बस चालकों और कंडक्टरों की मानें तो किराया वृद्धि के बाद यात्रियों की संख्या में भारी कमी आई है. पूर्णिया से भागलपुर रूट पर चलने वाली बसों में भी सीटें खाली रह रही हैं. बस संचालकों का कहना है कि लोग अब लंबी दूरी की यात्रा करने से कतराने लगे हैं. इस मामले पर पूर्णिया के प्रमंडलीय परिवहन अधिकारी प्रतीक कुमार ने कहा कि सरकार के आदेशानुसार ही किराए में बढ़ोतरी की गई है. उन्होंने यात्रियों को आश्वस्त किया कि अलग-अलग रूटों पर परिवहन सेवाओं का संचालन सुचारू रूप से जारी रहेगा. About the Author Amit ranjan मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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Amit Shah jhalmuri TMC remark: अमित शाह ने खाई झालमुड़ी, ल‍िखा Tangy,...

Last Updated:June 10, 2026, 22:17 IST भारत मंडपम में NDA की बैठक के दौरान अमित शाह ने बंगाल की मशहूर झालमुड़ी का स्वाद लिया और सोशल मीडिया पर उसकी तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा- Tangy, Masaledar and Crunchy. बस फिर क्या था, इंटरनेट ने इन तीन शब्दों के पहले अक्षरों को जोड़कर TMC बना दिया और इसे तृणमूल कांग्रेस पर सियासी तंज बताने लगा. अमित शाह ने राजनाथ सिंह के साथ खाई झालमुड़ी. गृहमंत्री अमित शाह कई बार संकतों में ऐसी बातें कह जाते हैं, जो बाद में सच साबित होता ही है. लेकिन इस बार कहानी कुछ अलग है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रिकॉर्ड कार्यकाल के जश्न मनाने का मौका था और भारत मंडपम में NDA नेताओं की मीटिंग चल रही थी. देशभर के राज्यों की झलक दिखाने वाले स्टॉल लगे थे. पश्चिम बंगाल के स्टॉल पर परोसी जा रही थी बंगाल की मशहूर झालमुड़ी. वहीं पहुंचे गृह मंत्री अमित शाह. झालमुड़ी खाई, फोटो खिंचवाई और फिर सोशल मीडिया पर तस्वीरें पोस्ट कर दीं. लेकिन असली कहानी तस्वीरों से ज्यादा उनके कैप्शन में छिपी थी. Source link

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‘आगे भी महान उपलब्‍ध‍ियां हास‍िल करेंगे मेरे दोस्‍त’, पीएम मोदी के ल‍िए...

सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने पर अमेर‍िकी राष्‍ट्रपत‍ि डोनाल्‍ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई दी. ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर पीएम मोदी के ल‍िए स्‍पेशल मैसेज लिखा, मेरे मित्र, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले प्रधानमंत्री बनने पर बधाई. और वह एक महान प्रधानमंत्री हैं. वे मजबूत, स्वस्थ और बुद्धिमान व्यक्ति हैं तथा आने वाले वर्षों में भी महान उपलब्धियां और सफलता हासिल करेंगे. ट्रंप का यह संदेश ऐसे वक्‍त में आया है, जब दोनों देशों के र‍िश्तों में उतार चढ़ाव चल रहा है. ट्रेड डील काफी हद तक पूरी हो चुकी है और उस पर मुहर लगना बाकी है. एक्‍स्‍पोर्ट और तेल खरीद के मुद्दे पर खींचतान चल रही है. हालांक‍ि, ट्रंप लगातार पीएम मोदी को अपना सबसे अच्‍छा दोस्‍त बताते रहे हैं और तारीफ करते रहे हैं. कहा ये भी जा रहा है कि जी20 समिट में शामिल होने के लिए पीएम मोदी जब फ्रांस जाएंगे तो उनकी मुलाकात राष्‍ट्रपत‍ि ट्रंप से हो सकती है. ट्रंप के संदेश पर पीएम मोदी का जवाब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्रंप के बधाई संदेश का जवाब देते हुए लिखा, राष्ट्रपति ट्रंप, आपकी हार्दिक शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद. मैं भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को और आगे बढ़ाने के लिए आपके साथ मिलकर काम करने को उत्सुक हूं. यह साझेदारी हमारे दोनों देशों और पूरी दुनिया के हित में है. कई राष्‍ट्राध्‍यक्षों ने दी शुभकामनाएं श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायकेयह उपलब्धि केवल आपके लंबे कार्यकाल का प्रमाण नहीं है, बल्कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की जनता द्वारा आपके नेतृत्व पर बार-बार जताए गए विश्वास और भरोसे का भी प्रतीक है. भारत में हुए आर्थिक और सामाजिक परिवर्तन तथा मोदी की दूरदर्शी सोच ने भारत के बाहर भी अनेक लोगों को प्रेरित किया है. मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिमप्रधानमंत्री मोदी को भारत के सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर हार्दिक बधाई. यह उपलब्धि भारत के विकास, समृद्धि और वैश्विक प्रतिष्ठा को आगे बढ़ाने के लिए उनके समर्पित सार्वजनिक जीवन और नेतृत्व का प्रमाण है. मैं प्रधानमंत्री मोदी की निरंतर सफलता तथा भारत की जनता के लिए शांति, प्रगति और समृद्धि की कामना करता हूं. रूस की ओर से बधाईक्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने मोदी को इस उपलब्धि पर बधाई देते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में करोड़ों लोग गरीबी से बाहर निकले हैं और भारत दुनिया की प्रमुख आर्थिक शक्तियों में शामिल हुआ है. रूस ने भारत-रूस साझेदारी को और मजबूत होने की उम्मीद भी जताई. इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री Narendra Modi को बधाई देते हुए भारत-इज़राइल मित्रता और उनके नेतृत्व की सराहना की. उन्होंने कहा कि मोदी के नेतृत्व में भारत ने उल्लेखनीय प्रगति की है और दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी आगे भी मजबूत होती रहेगी. कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी मार्क कार्नी ने मोदी को भारत के सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने पर बधाई देते हुए लोकतांत्रिक जनादेश और भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने भारत-कनाडा संबंधों को आगे बढ़ाने और साझा हितों पर मिलकर काम करने की इच्छा भी जताई. इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी ने दोनों देशों के लोगों के लिए नए अवसर पैदा करने में प्रधानमंत्री मोदी के साथ काम करने की इच्‍छा व्यक्त की. साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलाइड्स ने कहा कि यह उपलब्धि प्रधानमंत्री मोदी की वर्षों की समर्पित सेवा और नेतृत्व को दर्शाती है. उन्होंने भारत और साइप्रस के बीच संबंधों को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की. डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने श्री मोदी को बधाई दी और द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के लिए उनके साथ काम जारी रखने की इच्‍छा व्यक्त की। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने अपनी शुभकामनाएं देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने वर्षों से भारत की आर्थिक और विकासात्मक प्रगति का मार्गदर्शन किया है और भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी एबॉट ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली सरकार में भारत ने बुनियादी ढांचे, सूचना प्रौद्योगिकी, बिजली और स्वच्छता के क्षेत्र में काफी सुधार किया है. ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने भी प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए उन्हें एक सच्चा राजनेता बताया, जिन्होंने भारत की अर्थव्यवस्था और विश्व में इसकी प्रतिष्ठा को बदल दिया है. Source link

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कांग्रेस में शामिल होगी टीएमसी? ममता बनर्जी और सोनिया गांधी की मुलाकात...

होमताजा खबरदेश कांग्रेस में शामिल होगी TMC? ममता-सोनिया की मुलाकात का जयराम रमेश ने खोला राज Last Updated:June 10, 2026, 23:55 IST ममता बनर्जी के कोलकाता लौटने के बाद नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर इंतजार कर रहे मीडियाकर्मियों ने उनसे तृणमूल कांग्रेस के कांग्रेस में पुनर्विलय की संभावना के बारे में पूछा. हालांकि, पूर्व मुख्यमंत्री बिना कुछ कहे जल्दी से अपनी गाड़ी में बैठकर वहां से प्रस्थान कर गईं. ख़बरें फटाफट टीएमसी और कांग्रेस के विलय की अटकले लगाई जा रही थीं. (पीटीआई) नई दिल्ली. कांग्रेस ने बुधवार को उन खबरों को पूरी तरह से गलत करार दिया, जिनमें दावा किया गया है कि पार्टी संसदीय दाल की अध्यक्ष सोनिया गांधी और तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी के बीच हुई मुलाकात के दौरान विलय संबंधी विषय पर चर्चा हुई थी. पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि दोनों नेताओं ने अपने व्यक्तिगत विषयों को लेकर चर्चा की थी. टीएमसी में बगावत के बीच ममता बनर्जी ने मंगलवार को सोनिया गांधी से उनके आवास पर मुलाकात की थी. कुछ खबरों में दावा किया गया है कि दोनों नेताओं की मुलाकात के दौरान कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की तरफ से यह प्रस्ताव दिया गया कि ममता अपनी पार्टी का विलय कांग्रेस में कर दें. रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘सोनिया गांधी और ममता बनर्जी के बीच हुई मुलाकात के बाद आई कुछ पूरी तरह से गलत हैं. यह बैठक बहुत सौहार्दपूर्ण रही और उनके लंबे समय से चले आ रहे संबंधों को देखते हुए कई व्यक्तिगत विषयों पर बातचीत हुई.’ ममता बनर्जी ने 1 जनवरी, 1998 को कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की. उन्होंने देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी के नेतृत्व पर पश्चिम बंगाल में तत्कालीन सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाली वाम मोर्चा सरकार के खिलाफ आंदोलन संगठित करने में अनिच्छा का आरोप लगाया था. हालांकि, पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस विधायक दल के नवगठित लेकिन बहुमत वाले गुट के नेता और सदन में विपक्ष के आधिकारिक नेता ऋतब्रत बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस के पुनर्मिलन की किसी भी संभावना से स्पष्ट रूप से इनकार किया. ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि हमारा गुट पश्चिम बंगाल विधानसभा में मुख्य तृणमूल कांग्रेस है. हमने 58 विधायकों के साथ शुरुआत की थी, और आज यह संख्या 64 है. मैंने सुना है कि तृणमूल कांग्रेस के 28 लोकसभा सदस्यों में से अधिकांश अब बागी गुट में हैं. हम मुख्य तृणमूल कांग्रेस हैं, इसलिए हमारी पार्टी के कांग्रेस में विलय का कोई सवाल ही नहीं उठता. पश्चिम बंगाल में भी राज्य कांग्रेस नेताओं ने तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस के पुनर्विलय की संभावना पर संशय जताया. पश्चिम बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार के अनुसार ऐसी संभावना में दो प्रमुख कारक शामिल हैं. सरकार ने कहा कि पहला, जो भी कांग्रेस में वापस आना चाहेगा, उसे राहुल गांधी को अपना सर्वोच्च नेता स्वीकार करना होगा. दूसरा, यदि कोई यह सोचता है कि वह अपने भ्रष्टाचार के पुराने कृत्यों के कारण कानूनी पेचीदगियों से बचने के लिए कांग्रेस का इस्तेमाल ढाल के रूप में करेगा, तो यह स्वीकार्य नहीं होगा. About the Author Rakesh Ranjan Kumar राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Source link

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aaj ka Dhanu rashifal 11 june 2026 Sagittarius horoscope in hindi career...

Last Updated:June 11, 2026, 00:03 IST Aaj ka Dhanu Rashifal 11 june 2026: आज का दिन धनु राशि वालों के लिए उत्साह और उपलब्धियों से भरा रहने वाला है. ग्रहों की चाल आपके पक्ष में है, जो आपको करियर और कार्यक्षेत्र में नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकेत दे रही है. अपनी प्रतिभा और कार्यशैली के दम पर लोग दूसरों को प्रभावित करने में सफल रहेंगे. धार्मिक गतिविधियों की ओर भी रुझान बढ़ेगा और पूजा-पाठ, हवन या आध्यात्मिक कार्यक्रमों में भाग लेने का अवसर मिल सकता है. जमुई. आज यानी 11 जून 2026 का दिन धनु राशि के जातकों के लिए आर्थिक, व्यावसायिक और करियर के लिहाज से सकारात्मक परिणाम लेकर आने वाला है. ज्योतिषाचार्य पंडित शत्रुघ्न झा बताते हैं कि आज चंद्रमा और मंगल की युति मेष राशि में होने से जातकों के आत्मविश्वास, ऊर्जा और कार्यक्षमता में वृद्धि होगी. लंबे समय से रुके हुए कार्यों में गति आने की संभावना है और भाग्य का भी पूरा सहयोग मिलने के संकेत हैं. उन्होंने बताया कि आज विशेष रूप से मीडिया, मार्केटिंग, शिक्षा, लेखन और रचनात्मक क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए यह दिन उपलब्धियां दिलाने वाला साबित हो सकता है. अपनी प्रतिभा और कार्यशैली के दम पर लोग दूसरों को प्रभावित करने में सफल रहेंगे. धार्मिक गतिविधियों की ओर भी रुझान बढ़ेगा और पूजा-पाठ, हवन या आध्यात्मिक कार्यक्रमों में भाग लेने का अवसर मिल सकता है. कोर्ट-कचहरी से जुड़े मामलों में भी अनुकूल परिणाम मिलने की संभावना दिखाई दे रही है. आज खर्चों पर करना पड़ेगा पूरा कंट्रोलज्योतिषाचार्य ने बताया कि धनु राशि के जातकों को आज आर्थिक मामलों में संतुलन रखना होगा. आज आपके लाभ के अवसर सामने आएंगे. आज आप निवेश कर सकते हैं, लेकिन किसी भी निर्णय में भावनाओं को हावी नहीं होने दें. व्यवसाय से जुड़े लोगों को आज विशेष सावधानी बरतनी चाहिए. उन्होंने बताया कि आज के दिन आपको बिजनेस में किसी पर आंख बंद कर भरोसा नहीं करना चाहिए. यह आपके लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है. ज्योतिषाचार्य ने बताया कि नौकरीपेशा लोगों के लिए दिन उत्साह से भरा रहेगा. आज आपके कार्यस्थल पर आपके काम की सराहना हो सकती है. पदोन्नति या नई जिम्मेदारी मिलने के संकेत भी बन रहे हैं. करियर के क्षेत्र में भाग्य का सहयोग मिलने से कई अटके हुए काम पूरे हो सकते हैं. आज के दिन सेहत भी रहेगा सामान्यज्योतिषाचार्य ने बताया कि सेहत के मामले में धनु वालों का दिन सामान्य रहने की संभावना है, लेकिन खानपान में लापरवाही परेशानी बढ़ा सकती है. आज के दिन आपको अपने प्रेम संबंधों में भी संयम और समझदारी बनाए रखने की जरूरत है. दिनभर की व्यस्तता के बीच परिवार के लिए समय निकालना रिश्तों को और मजबूत करेगा. आपके लिए आज का दिन का शुभ अंक 2 और शुभ रंग पीला रहने वाला है. ज्योतिषाचार्य पंडित शत्रुघ्न झा बताते हैं कि आज आपको घर में पूजा या हवन करना चाहिए, ऐसा करना आपके शुभ फलदायी रहेगा. About the Author Amit ranjan मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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दिल्ली में किआ कार का तांडव, ट्रैफिक पुलिस कर्मी को रौंदा, हुई...

होमवीडियोदेश दिल्ली में किआ कार का तांडव, ट्रैफिक पुलिस कर्मी को रौंदा, हुई फरार! X दिल्ली में किआ कार का तांडव, ट्रैफिक पुलिस कर्मी को रौंदा, हुई फरार!   नई दिल्ली. दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के सराय जुलेना रेड लाइट पर ड्यूटी कर रहे एक ट्रैफिक पुलिसकर्मी को तेज रफ्तार कार ने टक्कर मार दी. हादसे के बाद आरोपी चालक वाहन समेत मौके से फरार हो गया. घायल पुलिसकर्मी का अस्पताल में इलाज चल रहा है. पुलिस के अनुसार, 10 जून को फोर्टिस एस्कॉर्ट्स अस्पताल से न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी थाने को एक एमएलसी की सूचना मिली. इसके बाद पुलिस टीम अस्पताल पहुंची, जहां ट्रैफिक पुलिस के हेड कांस्टेबल राहुल कुमार का इलाज चल रहा था. राहुल कुमार ने बताया कि वह सुबह करीब 10:30 बजे सराय जुलेना रेड लाइट पर ड्यूटी कर रहे थे. इसी दौरान एक काले रंग की कार गलत दिशा से तेज रफ्तार में आई और उन्हें टक्कर मार दी. टक्कर के बाद चालक मौके से भाग निकला. घायल पुलिसकर्मी को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार किया गया. मामले में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं और मोटर वाहन अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज कर ली है. पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज की मदद से कार की पहचान कर ली है. पुलिस अब फरार चालक की तलाश कर रही है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

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Oman Tanker Attack : India Summons US Diplomat | टैंकर पर हुआ...

होमताजा खबरदेश टैंकर पर हुआ अटैक तो भारत ने US डिप्लोमैट को बुलाकर हड़काया, 3 भारतीय लापता Last Updated:June 10, 2026, 22:30 IST ओमान के तट के पास समंदर में एक तेल टैंकर ‘सेटोबेलो’ पर हुए भयंकर हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भारी भूचाल आ गया है. इस हमले के बाद जहाज पर सवार चालक दल के 3 भारतीय नागरिक अचानक लापता हो गए हैं, जिससे उनकी सलामती को लेकर डर और सस्पेंस लगातार बढ़ता जा रहा है. जैसे ही ये खबर नई दिल्ली पहुंची, भारत सरकार ने अमेरिकी कार्यवाहक राजदूत जेसन मीक्स को तुरंत विदेश मंत्रालय तलब किया गया और उन्हें बंद कमरे में बहुत ही सख्त लहजे में हड़काते हुए दोटूक कह दिया गया कि अपने लोगों की सुरक्षा के साथ भारत कोई भी समझौता बर्दाश्त नहीं करेगा. ओमान में भारतीय क्रू वाले जहाज पर अटैक नई दिल्ली: ओमान के तट के पास समंदर में एक तेल टैंकर पर हुए हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भयंकर उबाल आ गया है. इस हमले में जहाज पर मौजूद चालक दल के 3 भारतीय नागरिक अभी भी लापता हैं, जिनकी तलाश बहुत तेजी से की जा रही है. जैसे ही ये खबर नई दिल्ली पहुंची, भारत सरकार ने बेहद कड़ा रुख अपनाया. दिल्ली में तुरंत अमेरिकी कार्यवाहक राजदूत जेसन मीक्स को विदेश मंत्रालय तलब किया. भारत ने अमेरिका को हड़काते हुए दोटूक कह दिया है कि ऐसे हमले किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे. ओमान में तेल टैंकर पर अटैक के बाद US डिप्लोमैट तलब ओमान के तट के पास हमेशा की तरह जहाजों की आवाजाही जारी थी, लेकिन अचानक वहां शांति भंग हो गई जब पलाऊ के झंडे वाले एक बड़े तेल टैंकर ‘सेटोबेलो’ पर हमला हो गया और इसका इंजन रूम आग का गोला बन गया. जहाज पर 24 भारतीय चालक दल सवार थे, जिसमें से अब तक 21 भारतीयों को बचा लिया गया है, जबकि 3 भारतीय अभी तक लापता हैं. जैसे ही ये खबर फैली, वैसे ही दिल्ली के साउथ ब्लॉक से लेकर वॉशिंगटन के व्हाइट हाउस तक फोन घनघनाने लगे. ये कोई मामूली समुद्री हादसा नहीं था, बल्कि एक सोची-समझी सैन्य कार्रवाई जैसी घटना थी जिसने अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग की सुरक्षा पर बहुत बड़ा खतरा पैदा कर दिया है. भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए ये खबर किसी बड़े झटके से कम नहीं थी क्योंकि जहाज पर उनके अपने नागरिक मौजूद थे. भारत ने अमेरिका को दी चेतावनी भारत आमतौर पर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में बहुत सधे हुए और शांत शब्दों का इस्तेमाल करता है, लेकिन जब बात नागरिकों की आती है तब कोई ढिलाई बर्दाश्त नहीं होती. ओमान तट पर हुए इस हमले के पीछे जब अमेरिकी लिंक सामने आया तो भारत सरकार ने जरा भी ढील नहीं बरती. दिल्ली में तैनात अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर इस वक्त भारत में मौजूद नहीं थे, इसलिए सरकार ने तुरंत उनके कार्यवाहक राजदूत जेसन मीक्स को सम्मन भेजकर तलब कर लिया. विदेशी राजनयिक को इस तरह अचानक बुलाना अपने आप में बहुत बड़ा और कड़ा संदेश होता है. बंद कमरे में भारतीय अधिकारियों ने जेसन मीक्स के सामने इस घटना को लेकर अपनी गहरी नाराजगी और कड़ा विरोध जाहिर किया. भारत ने साफ किया कि वो अपने लोगों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं कर सकता. अमेरिकी कार्यवाहक राजदूत को विदेश मंत्रालय बुलाकर केवल औपचारिक बातचीत नहीं की गई, बल्कि उन्हें बहुत ही सख्त लहजे में समझा दिया गया कि भारत इस हरकत को हल्के में नहीं ले रहा है. भारत ने अमेरिकी डिप्लोमैट के सामने साफ-साफ कह दिया कि समंदर के इस अंतरराष्ट्रीय रास्ते में व्यापारिक जहाजों पर ऐसे हमले किसी भी पैमाने पर सही नहीं ठहराए जा सकते. 3 भारतीय क्रू मेंबर्स लापता इस तेल टैंकर पर मौजूद चालक दल के 3 भारतीय नागरिक हमले के बाद से अचानक गायब हैं. शुरुआती रिपोर्ट्स में दो लोगों के लापता होने की बात कही गई थी और उनकी राष्ट्रीयता साफ नहीं थी, लेकिन अब ये कन्फर्म हो चुका है कि 3 भारतीय क्रू मेंबर्स का अभी तक कुछ पता नहीं चल पाया है. समंदर की लहरों के बीच वे कहां हैं और किस हाल में हैं, इसे लेकर सस्पेंस और डर लगातार बढ़ता जा रहा है. ओमान में मौजूद भारतीय दूतावास ने भी इस बात की पुष्टि की है कि वे स्थानीय अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में हैं और लापता भारतीयों की तलाश के लिए हर मुमकिन कोशिश की जा रही है. About the Author Utkarsha Srivastava Utkarsha Srivastava is seasoned digital journalist specializing in geo-politics issues, currently writing for World section of News18 Hindi. With over a decade of extensive experience in hindi digital media, sh…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Source link

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‘सिर तन से जुदा’ को लेकर ऐसे भड़के लोग, दंगों की आग...

होमदुनियायूरोप सिर तन से जुदा पर दंगों से झुलसा बेलफास्‍ट, नहीं देखना चाहते मुस्लिम, क्‍यों? Last Updated:June 10, 2026, 21:04 IST Belfast Violence Explainer: उत्तरी आयरलैंड के बेलफास्ट में भड़की हिंसा को केवल एक दर्दनाक वारदात से जोड़कर नहीं देखा जा सकता है. इसके पीछे वर्षों से जमा सामाजिक असुरक्षा, तेजी से बदलती जनसांख्यिकी, शरणार्थी मुस्लिमों को लेकर बढ़ती नाराजगी, संसाधनों पर दबाव और कमजोर पड़ती कानून-व्यवस्था जैसी कई कारण हैं. स्थानीय समुदायों में अपने इलाकों पर नियंत्रण खोने का डर बढ़ रहा है, जबकि सोशल मीडिया पर कुछ समूह इस माहौल को और भड़का रहे हैं. नार्थ आयरलैंड की राजधानी बेलफास्‍ट में अब दंगे बेकाबू हो चले हैं. Belfast Violence Explainer: आयरलैंड की राजधानी बेलफास्ट में 8 जून 2026 की रात दर्दनाक वारदात के बाद से पूरा शहर दंगे की आग में धधक रहा है. दरअसल, एक अपार्टमेंट के बाहर एक बुजुर्ग व्‍यक्ति पर एक शख्‍स ने चाकू से अंधाधुंध वार करना शुरू कर दिया. बुजुर्ग व्‍यक्ति के सिर, गर्दन और पीठ पर चाकू से कई वार किए गए. मौके से गुजर रहे कुछ लोगों ने हमलावर को काबू कर बुजुर्ग व्‍यक्ति को बचाने की कोशिश की. इसी बीच स्‍थानीय पुलिस भी मौके पर पहुंच गई. पुलिस ने 30 साल के इस हमलावर को गिरफ्तार कर लिया. वहीं, इस पूरी वारदात का सीसीटीवी फुटेज अगले कुछ घंटों में पूरे बेलफास्‍ट में वायरल हो गया. साथ ही, लोगों को यह भी पता लग गया कि हमलावर सूडान मूल का एक शरणार्थी है. हमलावर की पहचान पता चलते ही स्‍थानीय लोगों के दिल में सालों से धधकती आग आक्रोश बनकर बाहर आने लगे. देखते ही देखते बेलफास्‍ट की तमाम इलाके दंगों की आग में धधकने लगे. 9 जून की शाम होते-होते उत्तरी आयरलैंड की राजधानी बेलफास्ट की सड़कों पर नकाबपोश युवकों की भारी भीड़ उतर आई. इन नकाबपोशों ने ग्लाइडर बसों और सड़क से गुजरती कारों को आग में झोंकना शुरू कर दिया. ये दंगे यही तक सीमित नहीं रहे, बल्कि बेलफास्‍ट में रहने वाले शरणार्थी मुस्मिल समुदाय की घरों और दुकानों को भी निशाना बनाया जाने लगा. देर रात तक पूरे शहर में हाहाकार मच चुका था. कानून और व्‍यवस्‍था लगभग पूरी तरह से पुलिस के कंट्रोल से बाहर जा चुकी थी. सतही तौर पर देखने पर भले ही यह मामला एक दर्दनाक वारदात से जुड़ा हुआ लगता है. लेकिन, इसकी सतह पर जाएं तो चाकूबाजी इस वारदात ने स्‍थानीय नागरिकों के लिए ट्रिगर का काम किया है. ‘सिर तन से जुदा’ के नारा देने वाले मुस्मिल शरणार्थियों को लेकर लोगों का गुस्‍सा तो बेलफास्ट की गलियों में पिछले कई सालों से जमा हो रहा था. लेकिन इस वारदात के बाद ऐसा लगा जैसे उनके सब्र का बांध अब टूट चुका है. नतीजा, पूरी दुनिया बेलफास्‍ट के दंगों के तौर पर देख रहा है. इंटरनेशनल रिपोर्ट की मानें तो बेलफास्‍ट के हालत कुछ ऐसे हैं कि वहां के स्‍थानीय निवासी अब एक भी प्रवासी मुसलमान को अपनी शहर में नहीं देखना चाह रहे हैं. बेलफास्‍ट इलाके में नकाबपोश दंगाई शरणार्थी इलाकों की दुकानों, मकानों के साथ कारों और बसों को भी आग के हवाले कर रहे हैं. कैसे फैला बेलफास्‍ट में खास समुदाय के खिलाफ दंगा इस पूरी हिंसा की क्रोनोलॉजी को समझने के लिए सबसे पहले सोमवार रात की उस घटना और उसके बाद के डिजिटल नैरेटिव को देखना होगा. जैसे ही पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लिया, इस वारदात से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल होने लगा. कुछ ही घंटों में ब्रिटेन और आयरलैंड के इन्फ्लुएंसर्स और बॉट्स ने इस वीडियो को लपक लिया. इस वीडियो में साफ तौर एक एक ही संदेश दिया जा रहा था कि एक बाहरी शख्‍स ने हमारे देश में आकर हमारे नागरिक की जान लेने की कोशिश की है. इस डिजिटल मोबिलाइजेशन का नतीजा यह हुआ कि मंगलवार शाम को उत्तरी, पूर्वी और पश्चिमी बेलफास्ट के अलग-अलग हिस्सों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए. देखते ही देखते ये प्रदर्शन हिंसक दंगों में बदल गए. कामकाजी वर्ग की आबादी वाले शंकील रोड जैसे इलाकों में नकाबपोश दंगाइयों ने चुन-चुनकर मुस्लिम प्रवासी परिवारों के घरों को निशाना बनाया. एक अफ्रीकी फूड स्टोर और एक तुर्की नाई की दुकान को फूंक दिया गया. यह साफ दिखाता है कि गुस्सा किसी अपराधी के खिलाफ नहीं, बल्कि एक पूरी कम्युनिटी और पहचान के खिलाफ मोड़ दिया गया था. यहां पर है बेलफास्‍ट में फैले दंगो की असली जड़ उत्तरी आयरलैंड और उसकी राजधानी बेलफास्ट का इतिहास भी बहुत कुछ अच्‍छा नहीं है. यहां पर दशकों से दो समुदायों के बीच हिंसक संघर्ष का इतिहास रहा है. इन दो समुदायों में एक है प्रोटेस्टेंट और दूसरा है कैथोलिक. प्रोटेस्‍टेंट यूके के साथ रहना चाहते हैं और कैथोलिक आयरलैंड के साथ जाना चाहते हैं. इस संघर्ष के चलते बेलफास्ट कभी भी लंदन, बर्मिंघम या डबलिन की तरह मल्‍टी कल्‍चरल शहर नहीं बन पाया. कुछ साल पहले तक यहां पर प्रवासियों की संख्‍या ना के बराबर थी. लेकिन पिछले पांच-छह सालों में हालात तेजी से बदले हैं. ब्रिटेन की शरणार्थी नीति और रिपब्लिक ऑफ आयरलैंड के साथ खुली सीमा का फायदा उठाकर हजारों की संख्या मे मध्य-पूर्व और अफ्रीका से आए मुस्लिम शरणार्थियों को उत्तरी आयरलैंड पहुंचा दिया. यूके होम ऑफिस ने इन शरणार्थियों को ठहराने के लिए बेलफास्ट और उसके आस-पास के कामकाजी वर्ग के इलाकों के होटलों और हॉस्टलों का इस्तेमाल किया. यूके होम ऑफिस के इस कदम से स्थानीय नागरिकों का मन असुरक्षा से भर गया. स्थानीय लोगों के भीतर यह भावना बैठ गई है कि सरकार उनसे बिना पूछे उनके छोटे और सीमित संसाधनों वाले शहर में सैकड़ों अनजान लोगों को बसा रही है.इसकी वजह से सोशल हाउसिंग, हेल्‍थ सर्विसेज और स्थानीय स्कूलों पर दबाव बढ़ रहा है, जिससे खुद उनके बच्चों का हक मारा जा रहा है. उत्‍तरी आयरलैंड को मूल नागरिक खुद को अपने ही देश में अजनबी महसूस करने लगे हैं. उन्‍हें लगा कि वे अपने ही इलाके पर कंट्रोल खो रहे हैं. ऐसे में एक चिंगारी ने बड़े विस्‍फोट का काम किया और उसका नतीजा बेलफास्‍ट के दंगों के तौर पर सबके सामने हैं. बेलफास्‍ट की सड़कों पर हो रहा विरोध प्रदर्शन अब किसी घटना को लेकर

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pm modi 12 Historic Decisions | Article 370 Abrogation | Ram Mandir...

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने बीते 12 वर्षों में कई ऐसे फैसले लिए, जिन्होंने भारत की राजनीति, अर्थव्यवस्था, सुरक्षा और सामाजिक व्यवस्था पर गहरा प्रभाव डाला. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ये निर्णय आने वाली पीढ़ियों तक याद रखे जाएंगे. जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाने से लेकर राम मंदिर निर्माण, जीएसटी, तीन तलाक कानून, नई शिक्षा नीति, डिजिटल इंडिया, महिला आरक्षण और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कदमों तक, मोदी सरकार ने कई बड़े निर्णय लिए. इनमें कुछ फैसले ऐसे रहे जिन्होंने दशकों पुरानी व्यवस्थाओं को बदल दिया, जबकि कुछ ने भारत की वैश्विक छवि और रणनीतिक स्थिति को मजबूत किया. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी भी प्रधानमंत्री की विरासत केवल चुनावी जीत से नहीं, बल्कि उन फैसलों से तय होती है जो देश की दिशा बदल देते हैं. हालांकि इन फैसलों के प्रभाव और परिणामों पर बहस जारी रहेगी, लेकिन इतना तय है कि 2014 के बाद के भारत के इतिहास को लिखते समय इन निर्णयों का उल्लेख प्रमुखता से किया जाएगा. देखें पीएम मोदी के 12 अहम फैसले- 1. जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाना (2019) 5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त कर दिया. इसे स्वतंत्र भारत के सबसे बड़े संवैधानिक फैसलों में गिना जाता है. 2. राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त करना सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अयोध्या में राम मंदिर निर्माण और 2024 में प्राण प्रतिष्ठा आधुनिक भारत की सबसे बड़ी सांस्कृतिक-धार्मिक घटनाओं में से एक मानी जाती है. 3. तीन तलाक कानून मुस्लिम महिलाओं को तत्काल तीन तलाक से संरक्षण देने के लिए कानून बनाया गया. सरकार ने इसे महिला अधिकारों की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया. 4. वस्तु एवं सेवा कर (GST) पूरे देश को “एक राष्ट्र, एक कर” व्यवस्था में लाने का प्रयास किया गया. इसे स्वतंत्र भारत का सबसे बड़ा कर सुधार माना जाता है. 5. नोटबंदी (2016) 500 और 1000 रुपये के नोट बंद करने का फैसला भारतीय आर्थिक इतिहास के सबसे चर्चित और विवादित निर्णयों में शामिल है. 6. नागरिकता संशोधन कानून (CAA) लागू करना पड़ोसी देशों पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान में धार्मिक प्रताड़ना का शिकार होकर भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध और जैन अल्पसंख्यकों को भारत की नागरिकता देने के लिए सीएए कानून बनाकर लागू करना मानवीय दृष्टिकोण से एक ऐतिहासिक फैसला था. 7. नई शिक्षा नीति (NEP 2020) करीब 34 साल बाद शिक्षा नीति में व्यापक बदलाव किया गया. स्कूल से लेकर उच्च शिक्षा तक नई संरचना लागू की गई. 8. कोविड-19 वैक्सीन अभियान भारत ने दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण अभियानों में से एक चलाया और करोड़ों लोगों को वैक्सीन उपलब्ध कराई. 9. डिजिटल इंडिया और UPI क्रांति डिजिटल भुगतान व्यवस्था ने भारत को दुनिया की सबसे बड़ी रियल-टाइम पेमेंट अर्थव्यवस्थाओं में ला खड़ा किया. 10. नया संसद भवन और ‘कर्तव्य पथ’ का निर्माण गुलामी के प्रतीकों को पीछे छोड़ते हुए मोदी सरकार ने रिकॉर्ड समय में देश को नया, अत्याधुनिक ‘संसद भवन’ सौंपा. राजपथ का नाम बदलकर ‘कर्तव्य पथ’ करना और औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति दिलाना इस कालखंड की बड़ी उपलब्धि रही. 11. ऑपरेशन सिंदूर और नई सुरक्षा नीति (2025) पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ भारत की नई सैन्य और कूटनीतिक नीति को सरकार ने निर्णायक कार्रवाई के रूप में प्रस्तुत किया. 12. भारतीय न्याय संहिता (BNS): कानूनों का स्वदेशीकरण अंग्रेजों के जमाने के 150 साल से भी पुराने आईपीसी (IPC) और सीआरपीसी (CrPC) को बदलकर ‘भारतीय न्याय संहिता’ लागू करना, ताकि देश की न्याय व्यवस्था ‘दंड’ देने के बजाय ‘न्याय’ देने की अवधारणा पर काम कर सके. इसके अलावा भी कई फैसले लिए गए जैसे, सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट एयर स्ट्राइक-आतंकवाद के खिलाफ भारत की आक्रामक रणनीति का प्रदर्शन माना गया. इससे राष्ट्रीय सुरक्षा की राजनीति में बड़ा बदलाव आया. पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना जिसने देश के 80 करोड़ से अधिक जरूरतमंदों को हर महीने मुफ्त राशन की गारंटी देना. साथ ही आयुष्मान भारत योजना, जिसके तहत 60 करोड़ से अधिक गरीबों को 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज देना, जिसने वैश्विक स्तर पर कल्याणकारी योजनाओं की परिभाषा बदल दी. Source link

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