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Liquor Price Hike: बीयर ₹40 और शराब ₹90 महंगी, सरकारी खजाने में...

होमफोटोदेश बीयर ₹40 और शराब ₹90 महंगी, लेकिन जेब पर असर नहीं! विजय सरकार का नया प्लान Last Updated:June 11, 2026, 14:54 IST Liquor Price Hike: तमिलनाडु सरकार ने शराब और बीयर कंपनियों पर नया अतिरिक्त शुल्क लगा दिया है. अब शराब की हर पेटी पर कंपनियों को TASMAC को ज्यादा रकम चुकानी होगी. स्पिरिट पर 90 रुपए, बीयर पर 40 रुपए और वाइन पर 20 रुपए अतिरिक्त लिए जाएंगे. सरकार का दावा है कि इससे हर साल करीब 1000 करोड़ रुपए का अतिरिक्त राजस्व मिलेगा. हालांकि ग्राहकों के लिए राहत की बात यह है कि शराब की दुकानों पर कीमतें नहीं बढ़ेंगी और आम लोगों को अतिरिक्त पैसा नहीं देना होगा. तमिलनाडु सरकार ने शराब कारोबार को लेकर ऐसा दांव चला है जिसने शराब कंपनियों की टेंशन बढ़ा दी है, लेकिन आम ग्राहकों को फिलहाल राहत मिली हुई है. राज्य सरकार ने बीयर और शराब बनाने वाली कंपनियों पर नया अतिरिक्त शुल्क लगा दिया है. अब TASMAC यानी तमिलनाडु स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन को सप्लाई की जाने वाली हर शराब की पेटी पर कंपनियों को ज्यादा पैसे चुकाने होंगे. खास बात यह है कि सरकार ने साफ कर दिया है कि दुकानों पर शराब खरीदने वाले लोगों को इसके लिए एक भी रुपया अतिरिक्त नहीं देना पड़ेगा. यानी झटका कंपनियों को लगेगा, ग्राहक को नहीं. तमिलनाडु देश के उन राज्यों में शामिल है जहां शराब की बिक्री पूरी तरह सरकारी नियंत्रण में होती है. TASMAC राज्यभर में 4 हजार से ज्यादा शराब की दुकानों का संचालन करता है. अब नई नीति के तहत स्पिरिट यानी हार्ड शराब की हर पेटी पर कंपनियों को अतिरिक्त 90 रुपए देने होंगे. बीयर कंपनियों पर प्रति केस 40 रुपए और वाइन कंपनियों पर 20 रुपए अतिरिक्त शुल्क लगाया गया है. यह रकम सीधे सरकार के खाते में जाएगी. सरकार का मानना है कि शराब बिक्री से जुड़ा पूरा आर्थिक फायदा अब तक राज्य खजाने तक पूरी तरह नहीं पहुंच रहा था. तमिलनाडु सरकार का दावा है कि इस नए मॉडल से हर साल करीब 1000 करोड़ रुपए का अतिरिक्त राजस्व मिलेगा. दिलचस्प बात यह है कि सरकार ने टैक्स बढ़ाने या MRP में बदलाव करने के बजाय पूरा बोझ कंपनियों पर डाल दिया है. इससे आम ग्राहकों के बीच नाराजगी का खतरा भी कम रहेगा. राजनीतिक जानकार इसे ‘राजस्व बढ़ाओ लेकिन जनता को नाराज मत करो’ वाली रणनीति बता रहे हैं. Add News18 as Preferred Source on Google राज्य सरकार ने साफ किया है कि TASMAC दुकानों पर शराब और बीयर की कीमतें फिलहाल नहीं बढ़ेंगी. यानी अगर कोई ग्राहक पहले जितने पैसे देकर बीयर या शराब खरीद रहा था, उसे आगे भी उतने ही पैसे देने होंगे. हालांकि बाजार विशेषज्ञ मानते हैं कि लंबे समय में कंपनियां इस अतिरिक्त बोझ की भरपाई दूसरे तरीकों से करने की कोशिश कर सकती हैं. फिलहाल सरकार और कंपनियों के बीच इस फैसले को लेकर अंदरखाने चर्चाएं तेज हो गई हैं. तमिलनाडु में शराब कारोबार हमेशा से बड़ा राजनीतिक और आर्थिक मुद्दा रहा है. TASMAC के जरिए हर साल हजारों करोड़ रुपए की कमाई होती है. राज्य की करीब 4048 सरकारी दुकानों में सिर्फ लाइसेंस प्राप्त कंपनियों की शराब बिकती है. सरकार का कहना है कि नया शुल्क मॉडल शराब वितरण व्यवस्था को ज्यादा पारदर्शी और राजस्व केंद्रित बनाएगा. इससे राज्य की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में मदद मिलेगी. देशभर में कई राज्य नए राजस्व स्रोत तलाश रहे हैं. ऐसे समय में तमिलनाडु का यह मॉडल दूसरे राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकता है. खासकर वे राज्य जहां शराब बिक्री सरकारी नियंत्रण में है, वहां इस तरह के अतिरिक्त शुल्क मॉडल पर चर्चा शुरू हो सकती है. सरकारें चाहती हैं कि टैक्स सीधे जनता पर डाले बिना खजाना मजबूत किया जाए और यही वजह है कि कंपनियों पर आर्थिक दबाव बढ़ाया जा रहा है. फिलहाल शराब कंपनियों के लिए यह फैसला बड़ा झटका माना जा रहा है. एक तरफ बिक्री पहले से सरकारी नियंत्रण में है और दूसरी तरफ अब अतिरिक्त शुल्क का बोझ भी बढ़ गया है. लेकिन सरकार को उम्मीद है कि इससे राज्य की कमाई बढ़ेगी और आम लोगों पर सीधा असर नहीं पड़ेगा. आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि कंपनियां इस फैसले को कैसे संभालती हैं और क्या भविष्य में इसका असर शराब बाजार की रणनीतियों पर भी दिखाई देगा. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

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TMC Crisis Live: TMC का एक और विकेट गिरा, राज्यसभा सांसद प्रकाश...

West Bengal Politics Live: पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस इस वक्त अपने सबसे बड़े राजनीतिक संकट से गुजर रही है. चुनावी हार के बाद शुरू हुई अंदरूनी कलह अब खुली बगावत में बदलती दिखाई दे रही है. राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बराइक के इस्तीफे ने पार्टी नेतृत्व की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं. इससे पहले भी कई सांसद और विधायक नेतृत्व के खिलाफ खुलकर नाराजगी जता चुके हैं. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि आने वाले दिनों में और बड़े चेहरे पार्टी छोड़ सकते हैं. ममता बनर्जी के करीबी माने जाने वाले कई नेता और सेलिब्रिटी चेहरे भी असंतुष्ट बताए जा रहे हैं. इस बीच पार्टी को बचाने के लिए ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी लगातार सियासी डैमेज कंट्रोल में जुटे हैं. सोनिया गांधी और राहुल गांधी के साथ हुई मुलाकातों ने भी बंगाल की राजनीति में नए समीकरणों की अटकलें तेज कर दी हैं. TMC में बढ़ती टूट के बीच कांग्रेस में विलय की चर्चाओं ने भी राजनीतिक माहौल गर्म कर दिया. हालांकि TMC और कांग्रेस दोनों ने इन खबरों को पूरी तरह खारिज किया है. जयराम रमेश ने सोनिया गांधी और ममता बनर्जी की मुलाकात को सिर्फ सौहार्दपूर्ण बातचीत बताया, जबकि TMC नेताओं ने विलय की खबरों को ‘बेबुनियाद’ कहा. दूसरी ओर बाबुल सुप्रियो ने भी बयान जारी कर साफ किया कि वह अपनी पार्टी और वर्तमान नेतृत्व के साथ खड़े हैं. उन्होंने कहा कि जनता के जनादेश का सम्मान करना लोकतांत्रिक जिम्मेदारी है और वह राज्य सरकार के साथ मिलकर अपने क्षेत्र के विकास पर काम करते रहेंगे. लेकिन लगातार इस्तीफों और बागी गतिविधियों ने साफ कर दिया है कि TMC के भीतर संकट अभी खत्म नहीं हुआ है. TMC सांसद प्रकाश चिक बराइक के राज्यसभा से इस्तीफे को पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. वह अपना इस्तीफा उपराष्ट्रपति को सौंपने पहुंचे हैं. इससे पहले भी कई नेताओं के इस्तीफे और बगावती तेवर सामने आ चुके हैं. सूत्रों के मुताबिक पार्टी के भीतर असंतोष लगातार गहरा रहा है और कई नेता भविष्य की राजनीतिक संभावनाएं तलाश रहे हैं. पार्टी के भीतर टूट को रोकने के लिए ममता बनर्जी रणनीति बनाने में जुटी हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि TMC नेतृत्व अब कानूनी और तकनीकी आधार पर बागी नेताओं की गतिविधियों को चुनौती देकर समय हासिल करने की कोशिश कर सकता है. माना जा रहा है कि लोकसभा स्पीकर के सामने बागी गुट के दस्तावेजों और हस्ताक्षरों की वैधता पर सवाल उठाए जा सकते हैं. इसी बीच TMC के कई बड़े नेताओं के नाम चर्चा में हैं. डेरेक ओ’ब्रायन, डोला सेन, समीरुल इस्लाम, सागरिका घोष और बाबुल सुप्रियो जैसे नेता फिलहाल पार्टी के साथ दिखाई दे रहे हैं. लेकिन बंगाल की राजनीति में जिस तेजी से घटनाक्रम बदल रहे हैं, उसने ममता बनर्जी के लिए आने वाले दिनों को बेहद चुनौतीपूर्ण बना दिया है. TMC Crisis Live: TMC सांसद सौगत रॉय बोले- कांग्रेस के साथ काम करना जरूरी West Bengal Politics Live: कांग्रेस और TMC के संभावित गठबंधन या विलय की चर्चाओं के बीच TMC सांसद सौगत रॉय का बड़ा बयान सामने आया है. उन्होंने कहा, ‘हमारे लिए कांग्रेस के साथ काम करना जरूरी है’ फिलहाल मैं इतना ही कह सकता हूं. आगे देखा जाएगा कि गठबंधन होता है या विलय.’ उनके इस बयान के बाद बंगाल की राजनीति में अटकलें और तेज हो गई हैं. West Bengal Politics Live: सिग्नेचर फर्जीवाड़ा केस में अभिषेक बनर्जी को अंतरिम राहत TMC Crisis Live: कलकत्ता हाई कोर्ट ने सिग्नेचर फर्जीवाड़ा मामले में तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी को बड़ी राहत देते हुए तीन हफ्तों तक गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण दे दिया है. हालांकि कोर्ट ने जांच में सहयोग करने और जांच एजेंसी के सामने पेश होने के निर्देश भी दिए हैं. TMC Crisis Live: हस्ताक्षर जालसाजी केस में TMC की कलह खुलकर सामने आई, आमने-सामने कल्याण बनर्जी और अभिषेक West Bengal Politics Live: कोलकाता के हस्ताक्षर जालसाजी मामले में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सामने आ गई है. सूत्रों के मुताबिक सांसद अभिषेक बनर्जी के कथित अहंकारी रवैये से नाराज होकर वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी ने खुद को इस केस से अलग कर लिया है. वहीं कलकत्ता हाई कोर्ट ने अभिषेक बनर्जी को राहत देने से इनकार करते हुए उन्हें आज ही भवानी भवन स्थित CID कार्यालय में पेश होने का सख्त निर्देश दिया है. West Bengal Politics Live: TMC में बढ़ी बगावत, प्रसून बनर्जी भी ‘काकोली ग्रुप’ में शामिल TMC Crisis Live: तृणमूल कांग्रेस (TMC) में जारी सियासी बगावत लगातार गहराती जा रही है. बुधवार तक ममता बनर्जी के साथ खड़े दिख रहे लोकसभा सांसद प्रसून बनर्जी ने अब बागी सांसदों के ‘काकोली ग्रुप’ का दामन थाम लिया है. जानकारी के मुताबिक प्रसून बनर्जी ने संसद में अलग गुट को मान्यता दिलाने की मांग वाले पत्र पर अपने हस्ताक्षर भी कर दिए हैं. TMC के भीतर सक्रिय बागी गुट अब लोकसभा में खुद को अलग ब्लॉक के तौर पर मान्यता दिलाने की कोशिश में जुटा है. सूत्रों के अनुसार इस गुट में अब तक प्रसून बनर्जी समेत 20 लोकसभा सांसद शामिल हो चुके हैं, जबकि ममता बनर्जी के खेमे में केवल 8 सांसद बचे बताए जा रहे हैं. बागी गुट लगातार अन्य सांसदों को भी अपने साथ जोड़ने में लगा है. हावड़ा से लगातार तीसरी बार सांसद बने प्रसून बनर्जी खेल और राजनीति दोनों क्षेत्रों में बड़ा नाम माने जाते हैं. TMC Crisis Live: MLA सिग्नेचर फर्जीवाड़ा केस में अभिषेक बनर्जी को हाई कोर्ट का नोटिस West Bengal Politics Live: कलकत्ता हाई कोर्ट ने TMC सांसद अभिषेक बनर्जी को MLA सिग्नेचर फर्जीवाड़ा मामले में आज शाम 6 बजे जांच एजेंसी के सामने पेश होने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने कहा कि अभिषेक बनर्जी को कथित फर्जी दस्तावेज पेश करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच एजेंसी को दस्तावेज कानूनी प्रक्रिया के तहत सर्च और सीजर के जरिए हासिल करने होंगे. West Bengal Politics Live: TMC संकट के बीच बाबुल सुप्रियो बोले- मैं पार्टी और नेतृत्व के साथ TMC Crisis Live: पश्चिम बंगाल में चुनावी हार के बाद TMC में जारी सियासी उथल-पुथल के बीच राज्यसभा सांसद बाबुल सुप्रियो ने

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जालौर का नया टूरिस्ट हॉटस्पॉट! स्पिरिचुअल म्यूजियम और मनोरंजन का अनोखा संगम,...

Last Updated:June 11, 2026, 12:52 IST Jalore Tourist Spot: जालौर जिले में स्थित वकाऊ थीम पार्क तेजी से पर्यटकों के बीच लोकप्रिय हो रहा है. यह नया पर्यटन स्थल आध्यात्मिकता, संस्कृति और मनोरंजन का अनूठा संगम प्रस्तुत करता है. पार्क का सबसे बड़ा आकर्षण यहां बना स्पिरिचुअल म्यूजियम है, जहां भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और आध्यात्मिक विरासत को आधुनिक शैली में प्रदर्शित किया गया है. इसके अलावा पार्क में परिवार और बच्चों के लिए कई मनोरंजक गतिविधियां और आकर्षक स्थल विकसित किए गए हैं, जो इसे एक आदर्श वीकेंड डेस्टिनेशन बनाते हैं. प्राकृतिक वातावरण, सुंदर डिजाइन और शांत माहौल पर्यटकों को खास अनुभव प्रदान करते हैं. स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूर-दराज से आने वाले पर्यटक भी इस नई जगह को देखने पहुंच रहे हैं. ख़बरें फटाफट जालौर: जालौर जिले के भीनमाल क्षेत्र में स्थित वकाऊ थीम पार्क इन दिनों स्थानीय पर्यटन का एक उभरता हुआ नया केंद्र बनता जा रहा है. भीषण गर्मी के इस मौसम में जहां लोग घर से बाहर निकलने से बचते हैं, वहीं यह थीम पार्क लोगों के लिए मनोरंजन और राहत का एक बेहतर विकल्प साबित हो रहा है. यहां आने वाले पर्यटकों के लिए सबसे खास आकर्षण है इसका अनोखा स्पिरिचुअल म्यूज़ियम. इस म्यूज़ियम में वैक्स से बने पुतलों को आधुनिक मशीनरी के जरिए इस तरह प्रस्तुत किया गया है कि वे जीवंत प्रतीत होते हैं। ये पुतले और उनके माध्यम से दिखाए जाने वाले दृश्य लोगों को एक अलग ही अनुभव देते हैं, जो सिर्फ मनोरंजन ही नहीं बल्कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संदेश भी देते हैं. यही वजह है कि यहां आने वाले लोग इसे एक साधारण पार्क नहीं, बल्कि एक अनुभवात्मक स्थल मानकर लौटते हैं. इसके अलावा पार्क में बच्चों के लिए विशेष किड्स ज़ोन बनाया गया है, जहां झूले, खेलने के साधन और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध है. परिवारों के लिए यह जगह एक परफेक्ट पिकनिक स्पॉट बनकर उभरी है, जहां बच्चे खुलकर मस्ती करते हैं और बड़े लोग आराम से समय बिता सकते हैं. पार्क में बैठने की सुविधा, रेस्ट एरिया और खाने-पीने की व्यवस्था भी लोगों के अनुभव को और बेहतर बनाती है. लोगों के लिए एक पर्यटन स्थलगर्मी की छुट्टियों और वीकेंड के दौरान यहां लगातार लोगों की भीड़ देखी जा रही है. जालौर जिले के साथ-साथ आसपास के गांवों और कस्बों से परिवार यहां पहुंच रहे हैं. इससे यह साफ दिखाई देता है कि यह जगह अब केवल भीनमाल तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे जिले के लोगों के लिए एक प्रमुख पर्यटन स्थल बनती जा रही है. गर्मी की छुट्टियों और वीकेंड के दौरान यहां लगातार लोगों की भीड़ देखी जा रही है. जालौर जिले के साथ-साथ आसपास के गांवों और कस्बों से परिवार यहां पहुंच रहे हैं. इससे यह साफ दिखाई देता है कि यह जगह अब केवल भीनमाल तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे जिले के लोगों के लिए एक प्रमुख पर्यटन स्थल बनती जा रही है. सुंधा माता मार्ग पर स्थित होने के कारण इसकी लोकेशन भी काफी आसान और सुगम है, जिससे पर्यटक बिना किसी परेशानी के यहां पहुंच सकते हैं. सड़क मार्ग से जुड़ा होने के कारण यह आसपास के इलाकों के लिए भी एक सुविधाजनक डेस्टिनेशन बन चुका है. परिवार के साथ समय बिताने का अच्छा माहौलयहां घूमकर आए पर्यटक विधि सोनी ने लोकल18 के साथ जानकारी साझा करते हुए बताया कि यहां आकर हमें बहुत अच्छा अनुभव मिला. बच्चों के लिए झूले और खेलने की अच्छी सुविधा है, और स्पिरिचुअल म्यूज़ियम में वैक्स पुतलों के जरिए जो दृश्य दिखाए गए हैं, वे काफी अलग और आकर्षक हैं. यहां परिवार के साथ समय बिताने का अच्छा माहौल है और गर्मी में घूमने के लिए यह एक बेहतरीन जगह है. About the Author Jagriti Dubey Hi, I am Jagriti Dubey, a media professional with 6 years of experience in social media and content creation. I started my career with an internship at Gbn 24 news channel in 2019 and have worked with many repu…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Jalor,Rajasthan Source link

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Inspiring story of Metro man E Sreedharan: देश की रफ्तार बढ़ाने वाले...

Inspiring story of Metro man E Sreedharan: आज हम मेट्रो में सफर करते हैं और 5 म‍िनट की भी देरी बर्दाश्‍त नहीं करते. वहीं जब मेट्रो नहीं थी तो ट्रेनों में घंटों की लेट-लतीफी झेलते थे. द‍िल्‍ली की सड़कों पर भीषण जाम झेलते थे. क्‍या आपको पता है क‍ि द‍िल्‍ली-एनसीआर की लाइफलाइन द‍िल्‍ली मेट्रो के जनक कौन हैं? हो सकता है आप नाम जानते भी हों ई-श्रीधरन, ज‍िन्‍हें भारत सरकार पद्म व‍िभूषण से भी सम्‍मान‍ित कर चुकी है, लेक‍िन क्‍या आपको पता है क‍ि गांव के सरकारी स्‍कूल से पढ़े और फ‍िर इंजीनि‍यर ई श्रीधरन ने मेट्रो मेन बनने का सफर कैसे तय क‍िया? आइए जानते हैं उनकी प्रेरक कहानी.. ई. श्रीधरन ऐसे ही दूरदर्शी इंज‍ीन‍ियर हैं, जिन्होंने अपनी प्रतिभा, अनुशासन और नेतृत्व क्षमता से न केवल भारत के बुनियादी ढांचे को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया बल्‍क‍ि आधुनिक परिवहन व्यवस्था की तस्वीर ही बदल दी. उन्‍हीं की बदौलत आज दिल्‍ली मेट्रो में सफर करते हुए हम म‍िनटों का ह‍िसाब रखते हैं. साल 1932 में 12 जून को केरल के करुकापुथुर में जन्मे एल्लाट्टुवलपिल श्रीधरन आज उस पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिसने अनुशासन, ईमानदारी और समयबद्धता को सफलता का सबसे बड़ा मंत्र बनाया. भारत के प्रसिद्ध सिविल इंजीनियर और ‘मेट्रो मैन’ के नाम से विख्यात श्रीधरन का जीवन इस बात का प्रमाण है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और स्पष्ट कार्यप्रणाली से असंभव दिखने वाले सपनों को भी साकार किया जा सकता है. श्रीधरन की प्राथमिक शिक्षा पलक्कड़ जिले के पट्टांबी के निकट सरकारी लोअर प्राइमरी स्कूल, चथन्नूर में हुई. इसके बाद उन्होंने बेसल इवेंजेलिकल मिशन हायर सेकेंडरी स्कूल से उच्च माध्यमिक शिक्षा प्राप्त की और फिर पालघर के विक्टोरिया कॉलेज में अध्ययन किया. बाद में उन्होंने काकीनाडा के सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज से सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की. उनकी कार्यशैली की सबसे बड़ी पहचान निर्धारित समय सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण कार्य पूरा करना रहा है. अपनी इसी पहचान की बदौलत उन्होंने सार्वजनिक परिवहन का चेहरा बदल दिया. साल 1963 में रामेश्वरम और तमिलनाडु को जोड़ने वाला पम्बन पुल टूट गया था. रेलवे ने इसके पुनर्निर्माण के लिए छह महीने का लक्ष्य तय किया था. बाद में यह समय सीमा घटाकर तीन महीने कर दी गई और इसकी जिम्मेदारी श्रीधरन को दी गई. चुनौती को स्वीकार करते हुए उन्होंने मात्र 45 दिनों में पुल का पुनर्निर्माण कर दिखाया. यह उपलब्धि उनकी असाधारण कार्यक्षमता और नेतृत्व क्षमता का शुरुआती परिचय थी. उनकी उल्लेखनीय उपलब्धियों में से एक कोंकण रेलवे परियोजना भी रही. भारत के पश्चिमी तट के साथ 760 किलोमीटर लंबी इस रेलवे लाइन का निर्माण आसान नहीं था. बेहद चुनौतीपूर्ण भूभाग, 150 से अधिक पुलों और कई तकनीकी कठिनाइयों के बावजूद इस परियोजना को महज सात वर्षों में पूरा कर लिया गया. साल 1995 में दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) के प्रबंध निदेशक के रूप में नियुक्त हुए श्रीधरन ने राष्ट्रीय राजधानी के सार्वजनिक परिवहन के सपने को वैश्विक सफलता की कहानी में बदल दिया. 1995 से 2012 तक दिल्ली मेट्रो का नेतृत्व करते हुए उन्होंने पहले चरण का निर्माण निर्धारित समय से पहले और तय बजट के भीतर पूरा कर दिखाया. दिल्ली मेट्रो की सफलता ने देशभर के शहरों को प्रेरित किया. लखनऊ मेट्रो, कोच्चि मेट्रो जैसी परियोजनाओं के लिए यह एक आदर्श बनी, वहीं जयपुर और हैदराबाद जैसे शहरों ने भी मेट्रो रेल नेटवर्क अपनाने की दिशा में कदम बढ़ाए. कोलकाता मेट्रो की योजना को आकार देने में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा. सेवानिवृत्ति के बाद भी उनका योगदान थमा नहीं. वे राष्ट्रीय विकास से जुड़े मुद्दों पर सलाहकार और अग्रणी विचारक के रूप में सक्रिय बने रहे. वर्ष 2015 में संयुक्त राष्ट्र के तत्कालीन महासचिव बान की-मून ने उन्हें सतत परिवहन पर संयुक्त राष्ट्र के उच्चस्तरीय सलाहकार समूह (एचएलएजी-एसटी) का सदस्य नियुक्त किया. देश और दुनिया ने उनके योगदान को अनेक सम्मानों से सम्मानित किया. भारत सरकार ने ई श्रीधरन को 2001 में पद्म श्री और 2008 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया. फ्रांस सरकार ने 2005 में शेवेलियर डे ला लेगियोन डी’होनूर प्रदान किया. टाइम पत्रिका ने 2003 में उन्हें एशिया का हीरो और दुनिया के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों में शामिल किया. वर्ष 2013 में जापान ने उन्हें अपने राष्ट्रीय सम्मान ऑर्डर ऑफ द राइजिंग सन- गोल्ड एंड सिल्वर स्टार से नवाजा. वर्ष 2011 में दिल्ली मेट्रो में उनके उत्तराधिकारी के रूप में मंगू सिंह की नियुक्ति की गई, लेकिन उनके द्वारा स्थापित कार्य संस्कृति और मानक आज भी भारतीय बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए प्रेरणा बने हुए हैं. Source link

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कभी बच्चों को डराते हैं, तो कभी छीन लेते हैं दुकानदारों से...

Last Updated:June 11, 2026, 10:51 IST बल्लभगढ़ के सिटी पार्क में इन दिनों बंदरों को लेकर लोगों की राय बंटी हुई है. कुछ लोग बच्चों और दुकानदारों के लिए इसे बड़ी समस्या बता रहे हैं, जबकि कई लोगों का मानना है कि बंदर तभी आक्रामक होते हैं जब उन्हें छेड़ा जाए. बढ़ती शिकायतों के बीच पार्क में आने वाले लोग स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं. विकास झा/फरीदाबाद: बल्लभगढ़ का सिटी पार्क शहर की पहचान बन चुका है. सुबह की ताजी हवा हो, शाम की सैर हो या दोपहर का खाली समय, हर वक्त यहां लोगों की चहल-पहल देखने को मिल जाती है. बच्चे झूलों पर खेलते नजर आते हैं बुजुर्ग टहलते हैं और युवा अपने दोस्तों के साथ समय बिताने पहुंचते हैं. लेकिन इन दिनों इस पार्क में एक ऐसी समस्या चर्चा का विषय बनी हुई है जिसने आने वाले लोगों की चिंता बढ़ा दी है. कई लोगों का कहना है कि पार्क में बंदरों का आतंक लगातार बढ़ रहा है जबकि कुछ लोग मानते हैं कि बंदर तभी हमला करते हैं जब उन्हें छेड़ा जाए. Local18 से बातचीत में पार्क आने वाले लोगों ने बंदरों को लेकर अलग-अलग अनुभव साझा किए. कुछ लोगों ने इसे गंभीर समस्या बताया तो कुछ ने इंसानों की गलती को इसकी वजह माना. बंदरों का आतंक सुबह-शाम ज्यादा मनोज कुमार बताते हैं मैं अक्सर यहां सिटी पार्क आता रहता हूं. बंदरों का जो आतंक है वो सुबह-शाम ज्यादा देखने को मिलता है. अभी गर्मी ज्यादा है तो दिन में कम निकलते हैं, लेकिन शाम करीब 5 से 6 बजे के बाद काफी संख्या में दिखाई देने लगते हैं. कई बार खेलते हुए बच्चों को पकड़ लेते हैं नाखून मार देते हैं और कभी-कभी काट भी लेते हैं. यह समस्या कई सालों से बनी हुई है. यहां एक-दो बार जाल भी लगाए गए थे लेकिन अभी तक कोई स्थायी समाधान नहीं हुआ. कई बार शिकायत भी की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई. भेलपुरी बेचने वाले हैं परेशान पार्क में भेलपुरी बेचने वाले अशोक बताते हैं यहां बंदरों का बहुत आतंक है. मेरा टमाटर, प्याज और खाने का सामान उठाकर भाग जाते हैं. इनका कोई टाइम टेबल नहीं है. जब मन करता है तब आ जाते हैं. एक साथ 8 से 10 बंदर घूमते रहते हैं. हम बेचने वालों को काफी परेशानी होती है. कई बार ग्राहक भी डर जाते हैं. जब कोई उन्हें छेड़ेगा तो वो बंदर काटेंगे ही यासीन सैफी बताते हैं मैं सिटी पार्क में अक्सर घूमने के लिए जाता हूं. मेरे हिसाब से बंदरों का आतंक नहीं है. आदमी खुद बंदरों को परेशान करता है. जब कोई उन्हें छेड़ेगा तो वो बंदर काटेंगे ही काटेंगे अगर बंदर आपस में लड़ रहे हों तो उनसे दूरी बनाकर रखनी चाहिए. जेपी कौशिक बताते हैं मैं बल्लभगढ़ का रहने वाला हूं और अक्सर यहां घूमने आता हूं. मेरे को लगता है जैसे कोई मुझे तंग करेगा तो मैं भी जवाब दूंगा. बंदर भी तभी काटते हैं जब कोई उन्हें छेड़ता है. ऐसे बिना वजह किसी को परेशान नहीं करते. About the Author Vivek Kumar विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Faridabad,Faridabad,Haryana Source link

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तेल के लिए अंडमान के बाद यहां होगी ड्रिलिंग, समंदर में उतरी...

Oil India Ultra Deepwater Drilling: देश में तेल की कमी दूर करने के लिए अब देसी संसाधनों पर फोकस किया जा रहा है. इस दिशा में देसी कंपनियां कमर कसकर उतर चुकी हैं. इसमें सरकारी तेल एवं गैस कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) बड़ी भूमिका निभाने जा रही है. दरअसल, समंदर की गहराइयों में नए हाइड्रोकार्बन भंडारों की तलाश तेज कर दी गई है. अंडमान सागर में चल रहे खोज अभियानों के बीच अब ऑयल इंडिया की नजर देश के पूर्वी तट पर स्थित कृष्णा-गोदावरी और महानदी बेसिन के अल्ट्रा-डीपवॉटर क्षेत्रों पर है. आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार ऑयल इंडिया 2027 से इन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर खोजी ड्रिलिंग अभियान शुरू करने की तैयारी कर रही है. इसके लिए आवश्यक लॉजिस्टिक्स और तकनीकी ढांचे को विकसित करने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है. 2027 से शुरू होगी नई खोज ऑयल इंडिया को ओपन एक्रेज लाइसेंसिंग पॉलिसी (OALP)-IX के तहत चार अपतटीय ब्लॉक आवंटित किए गए हैं. इनमें महानदी बेसिन के दो और कृष्णा-गोदावरी बेसिन के दो अल्ट्रा-डीपवॉटर ब्लॉक शामिल हैं. कंपनी फरवरी 2027 से इन ब्लॉकों में खोजी ड्रिलिंग शुरू करने की योजना पर काम कर रही है. सूत्रों के मुताबिक महानदी बेसिन में पहला स्ट्रेटिग्राफिक कुआं अप्रैल 2027 के आसपास ड्रिल किया जा सकता है. इस तरह की ड्रिलिंग का उद्देश्य सीधे उत्पादन शुरू करना नहीं होता, बल्कि समुद्र के नीचे मौजूद भूगर्भीय संरचनाओं का अध्ययन करना और तेल-गैस की संभावनाओं का आकलन करना होता है. अंडमान बेसिन में पहले से जारी है अभियान पूर्वी तट पर विस्तार की तैयारी के साथ-साथ ऑयल इंडिया अंडमान और निकोबार क्षेत्र में भी अपने खोज अभियान को आगे बढ़ा रही है. कंपनी वर्तमान में अंडमान सागर के दो अपतटीय ब्लॉकों में काम कर रही है. दस्तावेजों के अनुसार, यहां अब तक तीन खोजी कुओं की ड्रिलिंग पूरी की जा चुकी है, जबकि दो और कुएं ड्रिल करने की तैयारी चल रही है. ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि अंडमान बेसिन भारत के लिए भविष्य का बड़ा हाइड्रोकार्बन क्षेत्र साबित हो सकता है. दरअसल, इस क्षेत्र की भूगर्भीय संरचना दक्षिण-पूर्व एशिया के उन इलाकों से काफी मिलती-जुलती है, जहां तेल और गैस के विशाल भंडार मौजूद हैं. यदि यहां व्यावसायिक स्तर पर तेल या गैस की खोज सफल होती है, तो यह भारत के ऊर्जा क्षेत्र की तस्वीर बदल सकती है. क्यों महत्वपूर्ण हैं कृष्णा-गोदावरी और महानदी बेसिन? भारत के पूर्वी तट पर स्थित कृष्णा-गोदावरी बेसिन पहले भी देश को कई बड़े गैस भंडार दे चुका है. इसे भारत के सबसे महत्वपूर्ण अपतटीय ऊर्जा क्षेत्रों में गिना जाता है. वहीं, इसके उत्तर में स्थित महानदी बेसिन अभी अपेक्षाकृत कम खोजा गया क्षेत्र है. विशेषज्ञों का मानना है कि महानदी बेसिन में बड़े ऊर्जा संसाधनों की संभावना मौजूद है, लेकिन इसकी वास्तविक क्षमता का आकलन अभी पूरी तरह नहीं हो पाया है. ऐसे में ऑयल इंडिया का आगामी अभियान भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. समुद्र के बीच संचालन के लिए हेलीकॉप्टर सेवा अल्ट्रा-डीपवॉटर क्षेत्रों में ड्रिलिंग आसान काम नहीं है. ड्रिलिंग यूनिट्स अक्सर तट से सैकड़ों समुद्री मील दूर स्थित होती हैं. ऐसे में कर्मचारियों और जरूरी उपकरणों की आवाजाही के लिए विशेष व्यवस्थाओं की जरूरत पड़ती है. इसी को ध्यान में रखते हुए ऑयल इंडिया ने समर्पित हेलीकॉप्टर सेवाएं लेने की प्रक्रिया शुरू की है. इन हेलीकॉप्टरों का उपयोग तटीय बेस और समुद्र में मौजूद ड्रिलिंग प्लेटफॉर्म के बीच कर्मियों और आवश्यक सामग्रियों के परिवहन के लिए किया जाएगा. ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम ऑयल इंडिया की यह दोहरी रणनीति- एक ओर अंडमान सागर में फ्रंटियर एक्सप्लोरेशन और दूसरी ओर पूर्वी तट के अल्ट्रा-डीपवॉटर क्षेत्रों में नई खोज कंपनी के इतिहास के सबसे महत्वाकांक्षी विस्तार अभियानों में से एक मानी जा रही है. भारत अपनी कुल तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है. ऐसे में घरेलू भंडारों की खोज और उत्पादन बढ़ाना सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है. यदि अंडमान, कृष्णा-गोदावरी और महानदी बेसिन में ऑयल इंडिया को सफलता मिलती है, तो इससे न केवल देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी बल्कि आयात बिल में भी उल्लेखनीय कमी आ सकती है. समुद्र की गहराइयों में छिपे ऊर्जा संसाधनों की यह खोज आने वाले वर्षों में भारत को ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लक्ष्य के और करीब ले जा सकती है. Source link

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मानसून में घूमने का है प्लान? हैदराबाद के पास ये 5 झरने...

Last Updated:June 11, 2026, 08:42 IST Places to Visit in Hyderabad During Monsoon: अगर आप मानसून में हैदराबाद के आसपास प्राकृतिक खूबसूरती का आनंद लेना चाहते हैं, तो तेलंगाना के प्रसिद्ध झरने आपकी यात्रा को यादगार बना सकते हैं. कुंतला और बोगाथा जैसे विशाल झरनों से लेकर मल्लेला तीर्थम और गायत्री जैसे शांत प्राकृतिक स्थलों तक, हर जगह अलग अनुभव मिलता है. बारिश के बाद इन झरनों का जलप्रवाह बढ़ जाता है और आसपास का इलाका हरियाली व कोहरे से भर जाता है. कुछ झरनों तक पहुंचने के लिए ट्रेकिंग और सीढ़ियों का सफर भी करना पड़ता है, जो एडवेंचर प्रेमियों के लिए अतिरिक्त आकर्षण बन जाता है हैदराबाद और तेलंगाना के आसपास मानसून की पहली बारिश होते ही प्रकृति का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है. जंगलों, पहाड़ियों और घाटियों के बीच छिपे झरने पूरी तरह जीवंत हो उठते हैं. सूखी चट्टानों से बहता दूधिया सफेद पानी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है. बारिश के बाद इन झरनों की सुंदरता कई गुना बढ़ जाती है और आसपास का वातावरण हरियाली से भर जाता है. वीकेंड ट्रिप और प्रकृति प्रेमियों के लिए यह समय सबसे खास माना जाता है. मानसून के दौरान हैदराबाद के करीब स्थित एथीपोतला, कुंतला, बोगाथा, मल्लेला तीर्थम और गायत्री झरने घूमने के लिए बेहतरीन विकल्प हैं. कुंतला वॉटरफॉल तेलंगाना का सबसे ऊंचा और सबसे प्रसिद्ध झरना माना जाता है. मानसून की शुरुआती बारिश के बाद इसका रूप बेहद आकर्षक और विशाल हो जाता है. यह सह्याद्रि पर्वत श्रृंखला के घने जंगलों के बीच कदम नदी पर स्थित है. झरने तक पहुंचने के लिए प्रवेश द्वार से करीब 400 सीढ़ियां नीचे उतरनी पड़ती हैं, जो यात्रा को रोमांचक बना देती हैं. लगभग 147 से 200 फीट की ऊंचाई से गिरता पानी दो चरणों में नीचे आता है और मनमोहक दृश्य प्रस्तुत करता है. हैदराबाद से करीब 260 किलोमीटर दूर स्थित यह झरना मानसून में प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों की पहली पसंद बन जाता है. भोगता (बोगाथा) वॉटरफॉल अपनी विशाल चौड़ाई और आकर्षक चट्टानी संरचना के कारण “तेलंगाना का नियाग्रा” कहलाता है. मानसून की पहली बारिश के बाद इसका जलप्रवाह काफी बढ़ जाता है, जिससे झरना और भी भव्य दिखाई देता है. इस दौरान आसपास की घाटियां घने कोहरे और हरियाली की चादर से ढक जाती हैं, जो पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देती हैं. यहां आने वाले पर्यटकों के लिए सुंदर पार्क, बैठने की व्यवस्था और कई व्यू-पॉइंट्स भी विकसित किए गए हैं. हैदराबाद से करीब 280 किलोमीटर दूर स्थित यह झरना वीकेंड रोड ट्रिप के लिए बेहतरीन पर्यटन स्थलों में गिना जाता है. Add News18 as Preferred Source on Google पोचेरा वॉटर फॉल्स तेलंगाना के सबसे खूबसूरत प्राकृतिक झरनों में से एक है. यह कुंतला जलप्रपात के करीब कदम नदी पर स्थित है और अपनी गहराई तथा चौड़े जलप्रवाह के लिए जाना जाता है. मानसून की शुरुआती बारिश के बाद इसका पानी पथरीले रास्तों और प्राकृतिक सीढ़ियों जैसी चट्टानों से होकर नीचे गिरता है, जो बेहद मनमोहक दृश्य प्रस्तुत करता है. आसपास का शांत वातावरण और हरियाली इसकी सुंदरता को और बढ़ा देती है. हैदराबाद से लगभग 257 किलोमीटर दूर स्थित इस स्थल पर तेलंगाना पर्यटन विभाग ने पार्क और बैठने की बेहतर व्यवस्था विकसित की है, जिससे पर्यटकों को सुखद अनुभव मिलता है. मल्लेला तीर्थम वॉटरफॉल नल्लामला के घने जंगलों के बीच स्थित एक खूबसूरत और शांत प्राकृतिक स्थल है. जो लोग हैदराबाद से ज्यादा दूर यात्रा नहीं करना चाहते, उनके लिए यह बेहतरीन विकल्प माना जाता है. यह झरना कृष्णा नदी की एक सहायक धारा से बनता है और चारों ओर फैली हरियाली इसकी सुंदरता को और बढ़ा देती है. यहां पहुंचने के लिए करीब 350 सीढ़ियां उतरनी पड़ती हैं, जिसके दौरान जंगल का मनमोहक दृश्य देखने को मिलता है. धुंध और ठंडी फुहारों से भरा वातावरण पर्यटकों को आकर्षित करता है. हैदराबाद से लगभग 185 किलोमीटर दूर होने के कारण यह एक शानदार वीकेंड ट्रिप डेस्टिनेशन है. गायत्री वॉटरफॉल (गदिधा गुंडम) उन पर्यटकों के लिए खास आकर्षण है, जो भीड़भाड़ से दूर प्रकृति के बीच सुकून भरे पल बिताना चाहते हैं. कदम वन क्षेत्र के भीतर स्थित यह झरना अपनी प्राकृतिक और अछूती खूबसूरती के लिए जाना जाता है. यहां तक पहुंचने के लिए पर्यटकों को छोटा-सा जंगल ट्रेक करना पड़ता है, जो यात्रा को और रोमांचक बना देता है. मानसून की पहली बारिश के बाद झरने का जलप्रवाह बढ़ जाता है और आसपास का क्षेत्र हरियाली से भर उठता है. हैदराबाद से करीब 270 किलोमीटर दूर स्थित यह स्थल एडवेंचर और नेचर लवर्स के लिए बेहतरीन डेस्टिनेशन माना जाता है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

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एथेनॉल वाले पेट्रोल पर एक्‍साइज ड्यूटी खत्‍म, ग्राहक से लेकर कंपनियों तक...

Last Updated:June 11, 2026, 07:42 IST Excise Duty Petrol Waived: ईरन जंग की वजह से वेस्‍ट एशिया में हालात सामान्‍य नहीं रह गए हैं. एनर्जी कॉरिडोर के नाम से विख्‍यात होर्मुज स्‍ट्रेट से LPG, पेट्रोल और डीजल लदे जहाजों की आवाजाही लगभग ठप पड़ी हुई है. इसका असर एशिया से लेकर यूरोप तक के देशों पर पड़ रहा है. कई देशों में तो एनर्जी क्राइसिस जैसी स्थिति पैदा हो गई है. सरकार ने एथेनॉल ब्‍लेंडेड पेट्रोल पर लगने वाले एक्‍साइज ड्यूटी को शून्‍य करने का फैसला किया है. (फोटो: Reuters) Petrol Excise Duty Waived: सरकार ने एथेनॉल मिले पेट्रोल पर लगने वाले एक्‍साइज ड्यूटी को खत्‍म कर दिया है. सरकार के इस फैसले से ग्राहकों से लेकर तेल कंपनियों और आम किसानों को भी फायदा होने की उम्‍मीद है. बता दें कि सरकार ने एथेनॉल मिक्‍स पेट्रोल पर एक्‍साइज ड्यूटी को ऐसे समय में खत्‍म या शून्‍य करने का फैसला किया है, जब ईरान जंग की वजह से एनर्जी कॉरिडोर के नाम से मशहूर होर्मुज स्‍ट्रेट से गैस के साथ ही पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति भी बाधित हुई है. ऐसे में एनर्जी सिक्‍योरिटी को लेकर नई नीति अपनाई जा रही है, ताकि ऊर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित किया जा सके. जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार ने पेट्रोल में अधिक मात्रा में एथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 22 प्रतिशत से 30 प्रतिशत तक एथेनॉल ब्‍लेंडेड पेट्रोल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) और कुछ अन्य सेस यानी उपकर में छूट देने का फैसला किया है. इस संबंध में सरकार ने गजट नोटिफिकेशन जारी कर दिया. इसके तहत E22, E25, E27 और E30 श्रेणी के पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी शून्य कर दी गई है. तीसरा बाड़ा आयातक देश भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक और उपभोक्ता देश है. ऐसे में सरकार लंबे समय से पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने की नीति पर काम कर रही है. अब तक E20 यानी 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर सबसे ज्यादा जोर दिया जा रहा था, लेकिन नए फैसले से इससे अधिक मिश्रण वाले ईंधन को भी बढ़ावा मिलेगा. ईंधन की कीमतों को स्थिर रखने में सहायता विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से भविष्य में ईंधन कीमतों को स्थिर रखने में सहायता मिल सकती है. साथ ही एथेनॉल उत्पादन के लिए कृषि क्षेत्र में मांग बढ़ेगी, जिससे किसानों को लाभ होगा. हालांकि, अधिक एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का उपयोग सभी वाहनों में तुरंत संभव नहीं होगा. इसके लिए वाहन निर्माताओं को ऐसे इंजन विकसित करने होंगे जो उच्च एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन के अनुकूल हों. किसानों की आय बढ़ाने में मदद एथेनॉल एक जैव-ईंधन (बायोफ्यूल) है, जिसे मुख्य रूप से गन्ने, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है. पेट्रोल में इसके उपयोग से कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने, कार्बन उत्सर्जन घटाने और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है. सरकार का यह कदम ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने और हरित ईंधन को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. एक्‍साइज ड्यूटी क्‍या है? एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) वह कर है, जो किसी देश के भीतर निर्मित या उत्पादित वस्तुओं पर सरकार द्वारा लगाया जाता है. भारत में यह कर केंद्र सरकार के राजस्व का एक महत्वपूर्ण स्रोत रहा है. पेट्रोल, डीजल, तंबाकू उत्पाद और कुछ अन्य वस्तुओं पर केंद्र सरकार एक्साइज ड्यूटी वसूलती है. पेट्रोलियम उत्पादों के मामले में एक्साइज ड्यूटी का भुगतान आमतौर पर रिफाइनरियों या तेल कंपनियों द्वारा किया जाता है, लेकिन इसका भार अंततः उपभोक्ताओं तक पहुंचता है और यह ईंधन की खुदरा कीमतों में शामिल होता है. सरकार समय-समय पर राजस्व आवश्यकताओं, महंगाई नियंत्रण और ऊर्जा नीति के अनुसार एक्साइज ड्यूटी की दरों में बदलाव करती है. एक्साइज ड्यूटी में छूट या कटौती का सीधा असर ईंधन की कीमतों और उपभोक्ताओं की लागत पर पड़ सकता है. About the Author Manish Kumar बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Source link

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गर्मी में आप भी पशुओं को खिला रहे हैं हरी चरी, तो...

Last Updated:June 11, 2026, 06:42 IST गर्मी के मौसम में चरी दुधारू पशुओं के लिए लाभदायक है, लेकिन सही उम्र की चरी, संतुलित मात्रा और उचित प्रबंधन के साथ ही इसका पूरा फायदा मिलता है. थोड़ी सी लापरवाही पशुओं के स्वास्थ्य और दूध उत्पादन दोनों को प्रभावित कर सकती है. रायबरेली: गर्मी के मौसम में दुधारू पशुओं के लिए हरा चारा बेहद लाभदायक माना जाता है. किसान अक्सर दूध उत्पादन बढ़ाने और पशुओं को पर्याप्त पोषण देने के लिए चरी खिलाते हैं. लेकिन पशु विशेषज्ञों का कहना है कि यदि चरी को सही तरीके से और संतुलित मात्रा में नहीं खिलाया गया तो यह पशुओं के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक भी साबित हो सकती है. दरअसल, रायबरेली जिले के राजकीय पशु चिकित्सालय शिवगढ़ के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ इंद्रजीत वर्मा (MVSC मथुरा) लोकल 18 से बात करते हुए बताते हैं कि भीषण गर्मी के बीच पशुपालक अपने दुधारू पशुओं को हरा चारा देने पर जोर देते हैं. खासकर ज्वार, बाजरा और मक्का की चरी पशुओं को खूब खिलाई जाती है. हालांकि, उनका कहना है कि कम उम्र की चरी या अधिक मात्रा में हरा चारा खिलाने से पशुओं में अपच, पेट फूलने और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं. ऐसे में चरी खिलाने से पहले कुछ जरूरी सावधानियां अपनाना बेहद आवश्यक है. बरतें ये सावधानी इंद्रजीत वर्मा बताते हैं कि गर्मी के मौसम में हरे चारे के रूप में चरी पशुओं के लिए पोषण का अच्छा स्रोत है. इसमें पर्याप्त मात्रा में ऊर्जा, विटामिन और खनिज तत्व पाए जाते हैं, जो दूध उत्पादन बढ़ाने में मदद करते हैं. लेकिन चरी को काटने और खिलाने के समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए.वह बताते हैं कि ज्वार की कम उम्र वाली चरी में हाइड्रोसायनिक एसिड (HCN) की मात्रा अधिक हो सकती है, जो पशुओं के लिए विषैली साबित हो सकती है. इसलिए ज्वार की चरी को कम से कम 50 से 60 दिन की उम्र होने के बाद ही पशुओं को खिलाना चाहिए. इसके अलावा हरे चारे को कभी भी खाली पेट अधिक मात्रा में नहीं देना चाहिए.पहले पशुओं को सूखा चारा या भूसा खिलाएं, उसके बाद हरा चारा दें.इससे पाचन तंत्र पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता और पेट फूलने की समस्या से बचाव होता है. हरे चारे के साथ संतुलित आहार देना भी जरूरी  केवल चरी पर निर्भर रहने से पोषण असंतुलन हो सकता है.पशुओं को स्वच्छ और पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध कराना भी आवश्यक है, क्योंकि गर्मी के मौसम में पानी की कमी से दूध उत्पादन प्रभावित हो सकता है. आगे की जानकारी देते हुए वह बताते हैं कि चरी पर ओस या बारिश का पानी होने की स्थिति में उसे तुरंत न खिलाएं. चारा थोड़ा सूखने के बाद ही पशुओं को दें.किसी भी प्रकार की समस्या दिखाई देने पर तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सक से संपर्क करें. संतुलित मात्रा में दे गर्मी के मौसम में चरी दुधारू पशुओं के लिए लाभदायक है, लेकिन सही उम्र की चरी, संतुलित मात्रा और उचित प्रबंधन के साथ ही इसका पूरा फायदा मिलता है. थोड़ी सी लापरवाही पशुओं के स्वास्थ्य और दूध उत्पादन दोनों को प्रभावित कर सकती है. About the Author Vivek Kumar विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Rae Bareli,Rae Bareli,Uttar Pradesh Source link

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हम विलय नहीं कर रहे… राहुल-अभिषेक मुलाकात के बाद टीएमसी ने अटकलों...

होमताजा खबरदेश हम विलय नहीं कर रहे… राहुल-अभिषेक मुलाकात के बाद TMC ने अटकलों को किया खारिज Last Updated:June 11, 2026, 05:46 IST TMC Rejects Speculation Of Merger With Congress: टीएमसी ने कांग्रेस में विलय की अटकलें खारिज कर दी है. बुधवार को राहुल गांधी और अभिषेक बनर्जी की डेढ़ घंटे से अधिक चली मीटिंग में विपक्षी एकता पर चर्चा हुई. अभिषेक बनर्जी और राहुल गांधी. तृणमूल कांग्रेस ने कांग्रेस में पार्टी के संभावित विलय की अटकलों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के बीच हुई मुलाकात में इस तरह का कोई प्रस्ताव या चर्चा नहीं हुई. पार्टी ने इन खबरों को अफवाह और तथ्यहीन बताया है. राहुल गांधी और अभिषेक बनर्जी के बीच बुधवार को 10 जनपथ में करीब डेढ़ घंटे तक बैठक हुई. यह बैठक ऐसे समय में हुई जब एक दिन पहले ही पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने कांग्रेस संसदीय दल (CPP) की अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की थी. दोनों बैठकों के बाद राजनीतिक गलियारों में टीएमसी और कांग्रेस के बीच संभावित नजदीकियों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थीं. हालांकि टीएमसी सूत्रों ने साफ कहा कि कांग्रेस में पार्टी के विलय को लेकर कोई बातचीत नहीं हुई. कांग्रेस की ओर से भी इस तरह की किसी भी संभावना से इनकार किया गया है. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी सोशल मीडिया पर कहा कि सोनिया गांधी और ममता बनर्जी की मुलाकात को लेकर मीडिया में चल रही कई खबरें पूरी तरह गलत हैं. उन्होंने बताया कि दोनों नेताओं के बीच लंबे समय से व्यक्तिगत संबंध रहे हैं और मुलाकात बेहद सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई. सूत्रों के अनुसार राहुल गांधी और अभिषेक बनर्जी की बैठक में पश्चिम बंगाल की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों, राज्य में कांग्रेस और टीएमसी के बीच संभावित समन्वय तथा विपक्षी एकता को मजबूत करने के मुद्दों पर चर्चा हुई. इसके अलावा 2029 के लोकसभा चुनाव और इंडिया गठबंधन को अधिक प्रभावी बनाने की रणनीति पर भी विचार-विमर्श किया गया. बैठक के बाद टीएमसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक तस्वीर साझा करते हुए कहा कि दोनों नेताओं की मुलाकात लोकतंत्र की रक्षा, संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करने और देश के नागरिकों के हितों के लिए साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है. पार्टी ने अपने संदेश में कहा कि टीएमसी गठबंधन एकजुट है. इस बीच TMC के भीतर जारी असंतोष और बगावती सुरों ने भी राजनीतिक चर्चाओं को हवा दी है. कुछ बागी नेताओं के खेमे से यह दावा किया गया है कि लोकसभा में पार्टी के 28 सांसदों में से कम से कम 19 सांसद उनके संपर्क में हैं. हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है. उधर, शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने सुझाव दिया कि टीएमसी और एनसीपी (शरद पवार गुट) जैसी पार्टियां, जो कभी कांग्रेस से निकली थीं, उन्हें फिर से एकजुट होकर कांग्रेस को मजबूत करना चाहिए. उन्होंने इसे वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों की जरूरत बताया. इसी बीच टीएमसी को एक और झटका तब लगा जब राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने पार्टी और राज्यसभा दोनों से इस्तीफा दे दिया. इससे पहले राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर राय भी पार्टी छोड़ चुके हैं. About the Author संतोष कुमार न्यूज18 हिंदी में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत. मीडिया में करीब दो दशक का अनुभव. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आईएएनएस, बीबीसी, अमर उजाला, जी समूह सहित कई अन्य संस्थानों में कार्य करने का मौका मिला. माखनलाल यूनिवर्स…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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