भारतन्यूज़ – टॉप हेडर
News Menu Bar

ताज़ा खबर

ताज़ा खबर

केरल में बनेगी महिला मुख्यमंत्री? चुनावी नतीजों से पहले ही LDF का...

कन्नूर. सीपीआई (एम) की वरिष्ठ नेता और पेरावूर विधानसभा क्षेत्र से एलडीएफ उम्मीदवार केके शैलजा ने इस बात पर भरोसा जताया है कि लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) केरल में लगातार तीसरी बार सत्ता में आएगा. उन्होंने पिछले एक दशक में हुए लगातार विकास कार्यों और सामाजिक कल्याण के बढ़े हुए उपायों का हवाला दिया. आईएएनएस के साथ एक खास इंटरव्यू में, केके शैलजा ने एलडीएफ की चुनावी संभावनाओं, एग्जिट पोल की विश्वसनीयता, कोविड-19 महामारी के दौरान अपने काम, केरल में भाजपा की मौजूदगी, और महिला मुख्यमंत्री बनने की अटकलों पर बात की. पेश है इंटरव्यू के प्रमुख अंश. आप केरल विधानसभा चुनावों में एलडीएफ की संभावनाओं को कैसे देखती हैं हमारी उम्मीदें बहुत ज्यादा हैं. एलडीएफ का मानना ​​है कि वह लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी कर सकता है, क्योंकि पिछले 10 सालों में केरल में काफी विकास हुआ है. इसमें इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास और बड़े पैमाने पर सामाजिक कल्याण की पहलें, दोनों शामिल हैं. केरल इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट फंड बोर्ड (केआईआईएफबी) के जरिए पूंजीगत खर्च के तौर पर 90,000 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च किए गए हैं. सामाजिक कल्याण पेंशन को 2016 में 1,200 रुपए से बढ़ाकर 2,600 रुपए कर दिया गया. इन योजनाओं से करीब 62 लाख परिवारों को फ़ायदा मिल रहा है. हमने ‘हरित केरल’ जैसे मिशन, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा के विकास की पहलें, और एलआईएफई (आजीविका समावेशन और वित्तीय सशक्तीकरण) मिशन भी लागू किए हैं, जिनके जरिए पांच लाख से ज्यादा घर बनाए गए हैं. हमें विश्वास है कि लोग इन बातों को समझेंगे और एक बार फिर हमारा साथ देंगे. एग्जिट पोल यूडीएफ की जीत का अनुमान लगा रहे हैं. आप इन भविष्यवाणियों को कैसे देखती हैं मैं एग्जिट पोल पर ज्यादा भरोसा नहीं करती. पिछले चुनावों में भी कई भविष्यवाणियां गलत साबित हुई थीं. मेरे पिछले विधानसभा क्षेत्र में, उन्होंने मेरी बहुत कम अंतर से हार का अनुमान लगाया था, लेकिन मैं 60,000 से ज्यादा वोटों से जीती थी. दूसरे विधानसभा क्षेत्रों में भी इसी तरह की गलतियां देखने को मिली थीं. इसलिए, हमें एग्जिट पोल पर निर्भर रहने के बजाय असली नतीजों का इंतज़ार करना चाहिए. महामारी के दौरान आपके काम की काफी तारीफ हुई थी. क्या आपको लगता है कि आपकी वह छवि इस चुनाव में आपके लिए मददगार साबित हो रही है स्वास्थ्य मंत्री के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान, हमने बहुत मेहनत की और अहम नतीजे हासिल किए. मिसाल के तौर पर, 2016 में शिशु मृत्यु दर हर 1,000 जीवित जन्मों पर 12 थी, जो 2020 तक घटकर 5 हो गई. जहां कुछ लोगों को इन उपलब्धियों के बारे में पता है, वहीं कुछ को शायद न पता हो. आखिर में, लोग कुल मिलाकर विकास को ही देखते हैं. पेरावूर में, और ज्यादा विकास की जोरदार मांग है, और कई लोगों ने मेरे लिए अपना समर्थन जाहिर किया है, इस उम्मीद में कि दूसरे निर्वाचन क्षेत्रों की तरह यहां भी तरक्की होगी. मुझे अच्छे नतीजों की उम्मीद है. केरल में एक उभरती हुई ताकत के तौर पर आप भाजपा को कैसे देखती हैं भाजपा लंबे समय से केरल में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही है. पहले, उनके पास एक एमएलए था, लेकिन उन्होंने वह सीट भी गंवा दी. इस बार, वे बड़े पैमाने पर चुनाव लड़ रहे हैं और कुछ खास निर्वाचन क्षेत्रों पर ध्यान दे रहे हैं. हालांकि वे कड़ी मेहनत कर रहे हैं, लेकिन वामपंथी दल भी मजबूत है. मुझे नहीं लगता कि भाजपा कोई सीट जीत पाएगी, लेकिन हमें नतीजों का इंतज़ार करना होगा. केरल में एक महिला मुख्यमंत्री को लेकर चर्चाएं हो रही हैं. इस पर आपकी क्या राय है नेतृत्व सिर्फ महिला या पुरुष के बारे में नहीं होता. सबसे ज्यादा मायने नीतियां रखती हैं. अगर कोई महिला मुख्यमंत्री बन भी जाती है, तो भी जब तक नीतियां सही नहीं होंगी, तब तक कोई बदलाव नहीं आएगा. फिलहाल, हमारी पार्टी मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के नेतृत्व में चुनाव लड़ रही है. वे हमारी पार्टी के एक अनुभवी नेता हैं और पिछले दस सालों से उन्होंने राज्य का प्रभावी ढंग से नेतृत्व किया है. अभी भी, हमारी पार्टी ने फैसला किया है कि चुनाव कॉमरेड पिनाराई के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा, और वे धर्मदम निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हैं, और वे जीतेंगे. इसलिए, अभी इस चर्चा की कोई ज़रूरत नहीं है. क्या आप मुख्यमंत्री के पद की दावेदार हैं नहीं, मैंने कभी ऐसे किसी पद के बारे में नहीं सोचा. पार्टी ने मुझसे चुनाव लड़ने के लिए कहा है, और मैं वही कर रही हूं. अगर मैं जीतती हूं, तो मैं एक एमएलए के तौर पर काम करूंगी. नेतृत्व और मंत्री पदों से जुड़े फैसले पार्टी सही समय पर लेती है, और मैं उन फैसलों का पालन करूंगी. Source link

ताज़ा खबर

डिजिटल युग में सौंफ-सोपारी से पिथौरागढ़ में दिया जाता है शादी का...

Last Updated:May 03, 2026, 15:26 IST जब किसी घर में शादी या कोई शुभ काम होता है, तो परिवार का कोई सदस्य खुद गांव के हर घर जाता है. वह अपने हाथों से सौफ और सुपारी देता है और उसी के साथ प्यार भरा निमंत्रण भी. ये तरीका भले ही साधारण लगे, लेकिन इसमें जो अपनापन होता है, वो किसी कार्ड या मैसेज में नहीं मिल सकता. इस परंपरा की खास बात यही है कि इसमें रिश्तों की गर्माहट साफ महसूस होती है. जब कोई खुद आपके घर आकर आपको बुलाता है, तो आपको लगता है कि आपकी अहमियत है पिथौरागढ़ः आज के समय में सब कुछ डिजिटल हो गया है. शादी हो या जनेऊ, लोग व्हाट्सऐप मैसेज या छपे हुए कार्ड से निमंत्रण भेज देते हैं, लेकिन पहाड़ो में खासकर उत्तराखंड में इसका तरीका थोड़ा अलग और खास है. पहाड़ी इलाकों में आज भी एक ऐसी खूबसूरत परंपरा जिंदा है, जो सीधे दिल से जुड़ती है. यहां आज भी लोगों को न्योता देने के लिए सौफ और सुपारी दी जाती है. सौफ और सुपारी से दिया जाता है निमंत्रण जब किसी घर में शादी या कोई शुभ काम होता है, तो परिवार का कोई सदस्य खुद गांव के हर घर जाता है. वह अपने हाथों से सौफ और सुपारी देता है और उसी के साथ प्यार भरा निमंत्रण भी. ये तरीका भले ही साधारण लगे, लेकिन इसमें जो अपनापन होता है, वो किसी कार्ड या मैसेज में नहीं मिल सकता. इस परंपरा की खास बात यही है कि इसमें रिश्तों की गर्माहट साफ महसूस होती है. जब कोई खुद आपके घर आकर आपको बुलाता है, तो आपको लगता है कि आपकी अहमियत है, आपको दिल से याद किया गया है. यही वजह है कि लोग इस परंपरा को आज भी निभा रहे हैं. आज की इस डिजिटल दुनिया में भी पहाड़ के लोगों ने अपनी परम्परा और रीति रिवाजों को कायम रखा हुआ है. पूरे परिवार को दिया जाता है निमंत्रण इसी बात पर गांव की पहाड़ी महिला हेमवंती देवी लोकल 18 से बात करते हुए कहती हैं कि, हमारे यहां तो यही रिवाज है. जब हमारे घर शादी होती है तो हम खुद सभी के घर सौफ सुपारी लेकर जाते है और उनके पूरे परिवार को आमंत्रित करते है. ये पुराने जमाने से चली आ रही रीति है क्योंकि उस जमाने में कार्ड और फोन जैसी चीजें नहीं होती है. जब तक हम लोग खुद जाकर न्योता नहीं देते, तब तक मन नहीं मानता. सौफ-सुपारी देना हमारे लिए सिर्फ बुलावा नहीं, बल्कि सम्मान दिखाने का तरीका है. आज भले ही दुनिया तेजी से बदल रही हो, लेकिन पहाड़ों में ये परंपरा लोगों को अपनी जड़ों से जोड़े हुए है. ये हमें याद दिलाती है कि असली खुशी और अपनापन छोटे-छोटे तरीकों में छुपा होता है. शायद यही वजह है कि इतनी पुरानी परंपरा आज भी उतनी ही खूबसूरती से निभाई जा रही है. About the Author Rajneesh Kumar Yadav मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Pithoragarh,Uttarakhand Source link

ताज़ा खबर

न घुसपैठ, न गोलीबारी… ISI ने बदला भारत में जासूसी का तरीका,...

होमवीडियोदेश न घुसपैठ, न गोलीबारी… ISI ने बदला भारत में जासूसी का तरीका, देखें बॉर्डर, बुटीक और साजिश का जाल X न घुसपैठ, न गोलीबारी… ISI ने बदला भारत में जासूसी का तरीका, देखें बॉर्डर, बुटीक और साजिश का जाल   पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने भारत में जासूसी का तरीका पूरी तरह से बदल दिया है. अब ना घुसपैठ, ना बंदूक बल्कि डिजिटल निगरानी का जाल बिछाया जा रहा है. गाजियाबाद, दिल्ली और अब पंजाब चीनी CCTV कैमरों के जरिये सेना के ठिकानों की लाइव फुटेज पाकिस्तान भेजी जा रही थी. ऐसे में बड़ा सवाल है कि क्या भारत में अब कैमरों के जरिये जासूसी का नया खतरा खड़ा हो चुका है? देखिए News18 इंडिया के संवाददाता आनंद तिवारी की ये रिपोर्ट… न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

ताज़ा खबर

कभी दिल्ली की गर्मी से बचने के लिए यहां आते थे ‘गवर्नर...

देहरादून में गर्मियों के मौसम में हजारों पर्यटक ठंडी आबोहवा का आनंद लेने पहुंचते हैं. ब्रिटिश काल से ही देहरादून गर्मियों की छुट्टियां बिताने और आराम करने का प्रमुख केंद्र रहा है. यहां केवल अंग्रेज ही नहीं, बल्कि उनके घोड़े भी गर्मियों में आराम के लिए लाए जाते थे. उस समय दिल्ली में भीषण गर्मी पड़ती थी, इसलिए देहरादून के राजपुर रोड पर ब्रिटिश गवर्नर-जनरल के अंगरक्षक दल के घोड़ों के लिए ग्रीष्मकालीन शिविर स्थापित किया गया था, जहां वे गर्मियों के दौरान रहते थे. साल 1838 में किया गया था तैयार साल 1838 में तैयार किया गया यह अस्तबल आज भी मौजूद है, जिसे अब राष्ट्रपति निकेतन के नाम से जाना जाता है. यहां देश के राष्ट्रपति जब भी देहरादून आते हैं, ठहरते हैं. यहां उनके चित्र और ऐतिहासिक वस्तुएं भी सुरक्षित रखी गई हैं. यदि आप गर्मियों में अपने परिवार के साथ बगीचों की सैर करना चाहते हैं या शहर की गर्मी से दूर ठंडी हवाओं में सुकून के पल बिताना चाहते हैं, तो राष्ट्रपति निकेतन एक बेहतर विकल्प है. राष्ट्रपति निकेतन के नाम से है मशहूर राष्ट्रपति निकेतन को राष्ट्रपति का विश्रामगृह भी कहा जाता है, क्योंकि यहां राष्ट्रपति ठहरते हैं. आजादी के बाद लगभग हर राष्ट्रपति यहां ठहर चुका है, हालांकि जानकारी के अनुसार डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम यहां नहीं ठहरे थे. देहरादून निवासी डॉ. संजीव शर्मा, जो पिछले 48 वर्षों से यहां रह रहे हैं, बताते हैं कि पहले उन्हें इस स्थान के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी. वे केवल इतना जानते थे कि यहां राष्ट्रपति ठहरते हैं. पहले यह स्थान आम लोगों के लिए खुला नहीं था, इसलिए लोग इसे देख नहीं पाते थे, लेकिन अब इसे आम जनता के लिए खोल दिया गया है. अब लोग अपने परिवार के साथ यहां घूमने आते हैं और स्कूलों के बच्चों को भी शैक्षिक भ्रमण के लिए लाया जाता है. डॉ. शर्मा के अनुसार, यह वास्तव में एक विश्व धरोहर जैसा स्थल है, जिसे बहुत अच्छे से संरक्षित किया गया है. राष्ट्रपति निकेतन परिसर में केवल बगीचे और पेड़-पौधे ही नहीं हैं, बल्कि एक संग्रहालय भी बनाया गया है. इस संग्रहालय में अब तक के सभी राष्ट्रपतियों की तस्वीरें और उनसे जुड़ी वस्तुएं प्रदर्शित की गई हैं. यहां पुराना फर्नीचर, रेडियो, टेलीफोन और एक बड़ा भाला भी रखा गया है, जिसका उपयोग राष्ट्रपति के अंगरक्षक किया करते थे. यहां बहुत कुछ है खास पर्यटकों को उत्तराखंड की संस्कृति से परिचित कराने के लिए यहां कई कलाकृतियां और हस्तशिल्प भी प्रदर्शित किए गए हैं, ताकि स्थानीय कारीगरों की कला को भी पहचान मिल सके. बताया जाता है कि 1920 के दशक में यहां घुड़साल बनाई गई थी, जिसे बाद में इकाई के कमांडेंट के निवास के रूप में स्थापित किया गया. भारत में राष्ट्रपति के तीन विश्राम स्थल हैं, जिनमें देहरादून के अलावा हैदराबाद और शिमला शामिल हैं. ब्रिटिश काल में, लगभग 1938 के आसपास, दिल्ली की गर्मी से बचाने के लिए ब्रिटिश गवर्नर-जनरल के अंगरक्षकों के घोड़ों को यहां के अस्तबल में रखा जाता था. यह ऐतिहासिक अस्तबल आज भी यहां मौजूद है. इस जगर को पिछले वर्ष ही आम जनता के लिए खोला गया है. यहां एट्री फीस प्रति व्यक्ति 50 रुपये का टिकट निर्धारित किया गया है. Source link

ताज़ा खबर

High Paying Offbeat Careers: डॉक्टर-इंजीनियर छोड़िए, इन 5 अजब-गजब Jobs में जमकर...

नई दिल्ली (High Paying Offbeat Careers). करियर की दुनिया अब डॉक्टर, इंजीनियर या सरकारी नौकरी तक सीमित नहीं है. आज के समय में ‘हटके’ सोचने वालों के लिए ऐसे रास्ते खुल गए हैं जिनके बारे में कुछ साल पहले तक किसी ने सुना भी नहीं था. क्या आपने कभी सोचा है कि सोने के लिए या रंगों के बारे में सलाह देने के लिए कोई आपको लाखों रुपये दे सकता है? स्लीप डॉक्टर और कलर कंसल्टेंट जैसे करियर अब न केवल चर्चा में हैं, बल्कि इनमें मिलने वाला पैसा किसी बड़ी कॉरपोरेट जॉब से कम नहीं है. इन अजब-गजब करियर ऑप्शन की सबसे बड़ी खासियत है कि यहां कॉम्पिटिशन कम है और डिमांड बहुत ज्यादा. जैसे-जैसे लोगों की लाइफस्टाइल बदल रही है और मेंटल हेल्थ-पर्सनल ब्रांडिंग पर फोकस बढ़ रहा है, वैसे-वैसे इन प्रोफेशनल्स की डिमांड भी बढ़ रही है. अगर आप बोरिंग 9-टु-5 की डेस्क जॉब से तंग आ चुके हैं और कुछ रोमांचक करना चाहते हैं, जिससे कमाई भी तगड़ी हो तो ये करियर ऑप्शन आपके लिए ही हैं. जानिए 5 ऑफबीट करियर के बारे में, जिनमें सालाना पैकेज 20 लाख रुपये तक मिल सकता है. लाखों की सैलरी वाले ऑफबीट करियर ऑप्शन कई ऑफबीट करियर ऑप्शन सुनने में बहुत अजीब लगते हैं, लेकिन उनमें सैलरी जबरदस्त मिलती है. अगर आप भी इंजीनियरिंग, बैंकिंग या मेडिकल जैसी रूटीन जॉब से हटकर कुछ नया करना चाहते हैं तो ये करियर ऑप्शन आपके काम आ सकते हैं- 1. स्लीप डॉक्टर (Sleep Consultant) आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में कई लोगों के लिए ‘नींद’ जैसी बेसिक चीज भी लग्जरी बन गई है. लोग चैन से सोने के लिए तरस रहे हैं. यहीं स्लीप डॉक्टर या कंसल्टेंट का काम शुरू होता है. ये एक्सपर्ट्स लोगों की नींद न आने की समस्या को समझते हैं, उनकी लाइफस्टाइल एनालाइज करते हैं और उन्हें बेहतर नींद के तरीके बताते हैं. कॉर्पोरेट जगत में बढ़ते तनाव के कारण इनकी डिमांड काफी बढ़ गई है. अनुभवी स्लीप कंसल्टेंट सालाना 20 से 30 लाख रुपये तक आराम से कमा लेता है. 2. कलर कंसल्टेंट (Color Consultant) क्या आप जानते हैं कि आपके घर की दीवारों का रंग या आपके कपड़ों का चुनाव आपके मूड और व्यक्तित्व पर कितना बड़ा असर डालता है? कलर कंसल्टेंट यही काम करते हैं. वे ब्रांड्स, आर्किटेक्ट्स और सेलिब्रिटीज को सही रंगों के चुनाव में मदद करते हैं. मार्केटिंग और इंटीरियर डिजाइनिंग के क्षेत्र में इनकी भारी मांग है. इस क्रिएटिव जॉब के लिए आपका माइंड भी क्रिएटिव होना चाहिए और आपको बदलते यानी लेटेस्ट ट्रेंड्स की जानकारी भी होनी चाहिए. इस क्षेत्र में माहिर लोग 25 लाख रुपये तक का पैकेज लेते हैं. 3. फूड स्टाइलिस्ट (Food Stylist) सोशल मीडिया और विज्ञापनों में जो खाना हमें इतना स्वादिष्ट और सुंदर दिखता है, उसे सजाने का काम फूड स्टाइलिस्ट करते हैं. इनका काम सिर्फ खाना बनाना नहीं, बल्कि उसे कैमरे के सामने ‘हीरो’ की तरह पेश करना है. बड़े होटल्स, कुकरी शो और मैगजीन्स के लिए ये प्रोफेशनल्स अनिवार्य हैं. टॉप-रेटेड फूड स्टाइलिस्ट की सालाना कमाई 20 लाख के पार होना आम बात है. इस फील्ड में करियर की अपार संभावनाएं हैं और आप भी इसमें बढ़िया भविष्य बना सकते हैं. 4. फ्रेगरेंस केमिस्ट (Fragrance Chemist/Perfumer) अगर आपकी सूंघने की शक्ति तेज है और आपको खुशबुओं से प्यार है तो यह करियर आपके लिए है. फ्रेगरेंस केमिस्ट इत्र, साबुन, लोशन और यहां तक कि खाने की खुशबू भी तैयार करते हैं. यह विज्ञान और कला का अनोखा कॉम्बिनेशन है. कॉस्मेटिक इंडस्ट्री में इन ‘नोज’ (Nose) की इतनी कद्र है कि इनका पैकेज 30-40 लाख रुपये तक जा सकता है. 5. एथिकल हैकर (Ethical Hacker) सुनने में यह थोड़ा टेक्निकल लग सकता है, लेकिन यह पारंपरिक करियर ऑप्शन से बहुत अलग है. एथिकल हैकर्स कंपनियों के डेटा को साइबर हमलों से बचाने के लिए खुद सिस्टम को हैक करने की कोशिश करते हैं. साइबर सिक्योरिटी के इस दौर में बैंक और टेक जाइंट्स के लिए ये सबसे जरूरी लोग हैं. एथिकल हैकर का शुरुआती पैकेज ही तकरीबन 15-20 लाख रुपये के आस-पास होता है, जो कुछ सालों के अनुभव के साथ काफी ऊपर चला जाता है. Source link

ताज़ा खबर

नागौर में सड़कों का होगा कायाकल्प! 12.50 करोड़ से हर विधानसभा क्षेत्र...

Last Updated:May 03, 2026, 10:59 IST Nagaur Road Repair Project: नागौर जिले में सड़क व्यवस्था को सुधारने के लिए एक बड़ी योजना शुरू की जा रही है. इसके तहत हर विधानसभा क्षेत्र में खराब और जर्जर सड़कों की मरम्मत की जाएगी, जिसके लिए करीब 12.50 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है. इस परियोजना का उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आवागमन को सुगम बनाना और लोगों को बेहतर सड़क सुविधाएं प्रदान करना है. लंबे समय से खराब सड़कों के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था, जिसे ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है. प्रशासन के अनुसार, जल्द ही मरम्मत कार्य शुरू किया जाएगा. नागौर जिले में सड़क विकास को लेकर एक बड़ा निर्णय लिया गया है. जिला मुख्यालय को गांवों और विधानसभा क्षेत्र से जोड़ने के लिए जिले के सभी पांचों विधानसभा क्षेत्रों में सड़क निर्माण और सुधार कार्य किए जाएंगे. इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी स्थापित करना है, ताकि लोगों को आवागमन में किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े और विकास की गति तेज हो सके. वहीं, 7 करोड़ रुपये की लागत से नई सड़कों का निर्माण किया जाएगा. यह नई सड़कें उन क्षेत्रों में बनाई जाएंगी जहां अब तक सड़क सुविधा उपलब्ध नहीं है या बहुत सीमित है. इससे दूर-दराज के गांवों को मुख्य मार्गों से जोड़ा जाएगा, जिससे विकास के नए अवसर पैदा होंगे और शहरों से गांवों की कनेक्टिविटी भी मजबूत होगी. अभी नागौर से बहुत से ऐसे गांव हैं जहां सड़के नहीं बनी है या टूट चुकी है. जानकारी के अनुसार, 5.5 करोड़ रुपये की राशि से उन सड़कों की मरम्मत की जाएगी जो लंबे समय से खराब स्थिति में हैं या जिनका संपर्क अन्य मार्गों से टूटा हुआ है. इन सड़कों को सुधारकर यातायात को सुगम बनाया जाएगा, जिससे स्थानीय लोगों के साथ-साथ किसानों और व्यापारियों को भी फायदा होगा. Add News18 as Preferred Source on Google सरकार ने इस योजना के तहत प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के लिए 12.50 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है. इस राशि का उपयोग मिसिंग लिंक सड़कों को सुधारने और नई सड़कों के निर्माण के लिए किया जाएगा. इससे उन क्षेत्रों को विशेष लाभ मिलेगा जहां अब तक सड़क सुविधा पूरी तरह विकसित नहीं हो पाई है. सरकार ने इन प्रस्तावों को भेजने का समय भी निर्धारित किया है. इसके बाद प्रस्तावों की स्वीकृति मिलने पर निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा. इससे यह सुनिश्चित होगा कि सभी कार्य तय समयसीमा में पूरे हों और लोगों को जल्द से जल्द बेहतर सड़क सुविधा मिल सके. इस योजना के तहत नागौर जिले में कुल लगभग 375 किलोमीटर सड़कों का निर्माण और सुधार किया जाएगा. इस पूरी प्रक्रिया को व्यवस्थित तरीके से पूरा करने के लिए जिला कलेक्टर को जिम्मेदारी सौंपी गई है. कलेक्टर एक तीन सदस्यीय समिति के साथ मिलकर इन सड़कों के प्रस्ताव तैयार करेंगे और सरकार को भेजेंगे. इस समिति में पीडब्ल्यूडी के अधीक्षण अभियंता और अधिशासी अभियंता भी शामिल होंगे, जो तकनीकी पहलुओं का ध्यान रखेंगे. सरकार के अनुसार नागौर के मेड़ता, खींवसर, जायल, डेगाना और नागौर विधानसभा क्षेत्रों में कुल 63 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. यह परियोजना जिले के विकास में अहम भूमिका निभाएगी और क्षेत्र की आर्थिक व सामाजिक स्थिति को मजबूत बनाएगी. आपको बता दें नागौर के कई क्षेत्र में लोग सड़के बनाने की मांग कर रहे थे. अलग-अलग क्षेत्र की मांग के अनुसार सरकार ने नागौर के संपूर्ण विधानसभा क्षेत्र में नई सड़के और सड़कों के मरम्मत के कार्य को लेकर यह योजना बनाई है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। राजस्थान की ताजा खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें| Source link

ताज़ा खबर

Bengal Chunav Results 2026 LIVE | Falta Seat Repolling | BJP vs...

Bengal Chunav Results 2026 LIVE: भारत निर्वाचन आयोग ने शनिवार को पश्चिम बंगाल की फाल्टा विधानसभा सीट के सभी मतदान केंद्रों पर पुनर्मतदान का आदेश दिया है. इस सीट पर 29 अप्रैल को हुए मतदान के दौरान गंभीर चुनावी अपराध और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का उल्लंघन पाए जाने के बाद दोबारा चुनाव कराए जाने की घोषणा चुनाव आयोग ने की है. टीएमसी के दबंग नेता जहांगीर खान इसी विधानसभा सीट से प्रत्‍याशी हैं. फाल्‍टा में फिर से वोटिंग कराने के चुनाव आयोग के आदेश के बाद भाजपा और टीएमसी में ठन गई है. आयोग के आदेश के बाद भाजपा नेता अमित मालवीय ने X पर पोस्‍ट जारी कहा कि पश्चिम बंगाल में डायमंड हार्बर मॉडल ध्‍वस्‍त हो गया है. इसपर टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी ने काफी तीखा रिप्‍लाई देते हुए अमित मालवीय से कहा कि वे दिल्‍ली से अपने गॉडफादर को ले आएं और फाल्‍टा से चुनाव लड़वा लें. दरअसल, चुनाव आयोग ने अपने आदेश में कहा, ‘पश्चिम बंगाल के 144 फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में 29 अप्रैल को बड़ी संख्या में मतदान केंद्रों पर मतदान के दौरान गंभीर चुनावी अपराधों और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के उल्लंघन हुआ था, इसलिए चुनाव आयोग निर्देश देता है कि सहायक मतदान केंद्रों सहित सभी 285 मतदान केंद्रों पर नए सिरे से मतदान कराया जाए. सभी मतदान केंद्रों पर 21 मई को सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक नए सिरे से मतदान होगा, जबकि मतगणना 24 मई को होगी.’ यह घोषणा दक्षिण 24 परगना जिले के इस निर्वाचन क्षेत्र में स्थानीय लोगों के व्यापक विरोध प्रदर्शन के कुछ घंटों बाद आई है. मतगणना के बाद सैकड़ों ग्रामीणों ने सुरक्षा व्यवस्था की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन किया और क्षेत्र में दोबारा मतदान कराने की मांग की थी. हासिमनगर गांव में तनाव बढ़ने के साथ ही भाजपा के झंडे लिए महिलाओं समेत बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों ने सड़क जाम कर दिया था. इसके तुरंत बाद केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवानों को भारी संख्या में मौके पर तैनात किया गया और उन्होंने निवासियों को पर्याप्त सुरक्षा उपायों का आश्वासन दिया. पश्चिम बंगाल में इस बार दो चरणों में हुए विधानसभा चुनावों में स्वतंत्रता के बाद से सबसे अधिक मतदान हुआ, जिसमें 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को हुए दोनों चरणों में औसत मतदान प्रतिशत लगभग 93 प्रतिशत रहा. राष्ट्रीय स्तर पर इससे पहले सबसे अधिक मतदान 2013 में त्रिपुरा में हुआ था, जब मतदान प्रतिशत 91.82 प्रतिशत था. पश्चिम बंगाल में इससे पहले सबसे अधिक मतदान 2011 के विधानसभा चुनावों में हुआ था, जिसने 34 साल के वाम मोर्चा शासन के अंत और ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार की शुरुआत को चिह्नित किया था. मतगणना 4 मई को होगी और परिणाम उसी दिन घोषित किए जाएंगे. इस बार कुछ को छोड़कर अधिकांश एग्जिट पोल ने तृणमूल कांग्रेस के 15 साल के शासन के अंत और राज्य में सत्ता परिवर्तन की भविष्यवाणी की है. Bengal Chunav Results LIVE: भाजपा अगर 500-700 वोटों से आगे हो, तो दोबारा गिनती की मांग करें – सीएम ममता पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम लाइव: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने शनिवार को पार्टी के काउंटिंग एजेंटों को निर्देश दिया कि वे उन बूथों पर तत्काल दोबारा गिनती की मांग करें, जहां भाजपा 500 से 700 वोटों के अंतर से आगे चल रही हो. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सभी 294 विधानसभा क्षेत्रों के पार्टी नेताओं और मतगणना एजेंटों के साथ हुई एक वर्चुअल बैठक के दौरान ये निर्देश जारी किए. उन्होंने मतगणना एजेंटों को सलाह दी कि वे रविवार रात मतगणना केंद्रों के पास ही रुकें, ताकि सोमवार को वे समय पर वहां पहुंच सकें. डेढ़ घंटे चली इस बैठक के दौरान उन्होंने तालमेल और सतर्कता की आवश्यकता पर जोर दिया. सीएम ने पार्टी कार्यकर्ताओं से मतगणना केंद्रों पर समय से पहले पहुंचने और एकजुट होकर काम करने को कहा. उन्होंने मतगणना प्रक्रिया के दौरान ध्यान रखने योग्य प्रमुख बातों के बारे में भी उन्हें जानकारी दी. टीएमसी सूत्रों के अनुसार, ममता बनर्जी ने मतगणना के दौरान कड़ी निगरानी पर विशेष जोर दिया. उन्होंने कहा कि जिन बूथों पर भाजपा 500-700 वोटों से लेकर 1 हजार वोटों तक के अंतर से आगे चल रही है, वहां तत्काल वोटों की दोबारा गिनती की मांग उठाई जानी चाहिए. Bengal Chunav Results LIVE: चुनाव आयोग ने फाल्‍टा में पोलिंग बूथ को लेकर उठाए गंभीर सवाल पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम लाइव: चुनाव आयोग (ECI) और राज्य के विशेष पर्यवेक्षक की रिपोर्ट ने चुनाव प्रक्रिया में भारी अनियमितताओं और प्रशासनिक विफलता की पुष्टि की है. करीब 60 मतदान केंद्रों (कुल संख्या का 21%) पर EVM की बैलेट यूनिट पर काली टेप और गोंद चिपकाया गया था, ताकि मतदाता अपनी पसंद के उम्मीदवार को वोट न दे सकें. एक हैरान करने वाले खुलासे में यह पाया गया कि बैलेट यूनिट के बटनों पर इत्र लगाया गया था, ताकि यह पहचान की जा सके कि किस मतदाता ने किस विशेष उम्मीदवार को वोट दिया है. चुनाव आयोग ने कहा है कि EVM के साथ की गई इस संगठित छेड़छाड़ ने वास्तविक जनादेश का पता लगाना असंभव बना दिया है. Bengal Chunav Results LIVE: बंगाल में इस बार भाजपा की होगी जीत भाजपा कैंडिडेट राकेश सिंह पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम लाइव: पोर्ट विधानसभा सीट से बीजेपी उम्मीदवार राकेश सिंह ने चुनाव प्रचार के बीच मां काली मंदिर में पूजा-अर्चना कर जीत का आशीर्वाद मांगा. उन्होंने कहा कि उनकी प्रार्थना है कि पश्चिम बंगाल में शांति बनी रहे. राकेश सिंह ने दावा किया कि इस बार हिंदू मतदाता एकजुट होकर मतदान करेंगे और बीजेपी को जीत मिलेगी. उन्‍होंने कहा कि इस बार हिन्‍दू दो और दो मिलकर 22 हुए हैं, ऐसे में इस बार जीत होगी. उल्लेखनीय है कि कोलकाता पोर्ट सीट पर तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता फिरहाद हकीम वर्तमान विधायक हैं, जो 2016 और 2021 में लगातार दो बार यहां से चुनाव जीत चुके हैं. इस सीट पर मुकाबला इस बार काफी दिलचस्प माना जा रहा है. Bengal Eletion Repolling LIVE: फाल्‍टा में हिन्‍दुओं को डराया-धमकाया जाता है – बीजेपी सांसद जगन्‍नाथ सरकार पश्चिम बंगाल पुनर्मतदान लाइव: पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम लाइव: फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में पुनर्मतदान पर बीजेपी

ताज़ा खबर

Delhi Judge Death Reason | ‘बहुत परेशान हूं…’ पत्नी, साली और… दिल्ली...

होमताजा खबरदेश बीवी, साली और… 30 साल के जज ने क्यों दे दी जान? जानें इनसाइड स्टोरी Last Updated:May 03, 2026, 08:53 IST Delhi Judge Death News: दिल्ली के कड़कड़डूमा कोर्ट में तैनात 30 वर्षीय जज अमन कुमार शर्मा सफदरजंग एन्क्लेव इलाके में रहते थे. उनकी मौत को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं. चलिये जानते हैं इस जज के जान देने की असल वजह… जज अमन कुमार महज 30 साल के थे. राजधानी दिल्ली से एक युवा जज के कथित आत्महत्या मामले में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है. 30 साल के इस न्यायिक अधिकारी का शव शनिवार को दक्षिण दिल्ली स्थित उनके घर में बाथरूम के अंदर फंदे से लटका मिला था. इस घटना को लेकर पूरे न्यायिक और प्रशासनिक हलकों में शोक और हैरानी का माहौल है. जानकारी के मुताबिक, जज अमन कुमार शर्मा कड़कड़डूमा कोर्ट में तैनात थे और ग्रीन पार्क मेन स्थित अपने फ्लैट की दूसरी मंजिल पर रहते थे. वह शनिवार को बाथरूम गए थे. फिर जब काफी देर तक वहां का दरवाजा नहीं खुला, तो परिजनों और बिल्डिंग स्टाफ को अनहोनी का शक हुआ और उन्होंने पुलिस को खबर दी. इसके बाद वे यूटिलिटी शाफ्ट के जरिए अंदर पहुंचे और खिड़की तोड़कर बाथरूम में दाखिल हुए. जज को तुरंत सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. फिलहाल पुलिस ने मौत के कारण को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन परिजनों ने घरेलू विवाद को इसकी वजह बताया है. एक रिश्तेदार के मुताबिक, जज पिछले दो महीनों से अपनी पत्नी के साथ तनाव में थे और मानसिक रूप से परेशान चल रहे थे. क्या बता रहे परिजन? जज अमन कुमार शर्मा की बहन के ससुर ने बताया कि ‘कल रात लगभग 10 बजे अमन ने अपने पिता को फोन किया था और कहा कि वह परेशान है और उसके लिए जीना मुश्किल हो गया है. उसके पिता उसी समय अलवर से रवाना हुए और रात लगभग 12 बजे यहां पहुंचे. पहुंचने पर उन्हें पता चला कि अमन का अपनी पत्नी से झगड़ा चल रहा था. उसने अपने पिता को बताया कि पिछले दो महीनों से उसे परेशान किया जा रहा था. अमन का कहना था कि उसकी साली उसके घरेलू जीवन में दखल दे रही थी और उसके घर को कंट्रोल कर रही थी… अमन के पिता ने कहा कि उनकी बहू ने उनसे कहा कि अगर आप यहां से नहीं जाते हैं, तो वह पुलिस को बुला लेगी… अगली सुबह, अमन के पिता ने अपनी बहू के माता-पिता से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने उनका फोन ब्लॉक कर दिया था… तभी घर में झगड़ा शुरू हो गया. इसलिए अमन के पिता दूसरे कमरे में चले गए.’ उनके अनुसार, ‘स्वाति बहुत गुस्से में चिल्ला रही थी, जबकि अमन रो रहा था. थोड़ी देर बाद शोर बंद हो गया. उन्होंने सोचा कि झगड़ा सुलझ गया होगा और कुछ देर इंतजार किया. कुछ देर बाद जब वे उन्हें देखने गए, तो उन्होंने स्वाति से अमन के बारे में पूछा, जिस पर उसने कहा कि उसे नहीं पता. जब उन्होंने अमन के मोबाइल पर कॉल किया, तो उन्हें बाथरूम के अंदर घंटी बजने की आवाज सुनाई दी. उन्होंने बाथरूम के दरवाजे पर दस्तक दी और उसे दरवाजा खोलने के लिए कहा. इसी दौरान अमन के चाचा ससुर और साली भी आ गए. काफी देर तक दरवाजा नहीं खुलने पर गार्ड खिड़की तोड़कर अंदर घुसा और उसने अमन को लटका हुआ पाया… वह 30 साल का था…’ क्या बता रही पुलिस? पुलिस के मुताबिक, उन्हें घटना की सूचना परिजनों से मिली थी, जिसके बाद वे मौके पर पहुंचे. शुरुआती जांच में किसी तरह की साजिश के संकेत नहीं मिले हैं, लेकिन सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है. शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है. बताया जा रहा है कि परिजन शव को अंतिम संस्कार के लिए राजस्थान के अलवर ले गए हैं. अमन शर्मा 19 जून 2021 को दिल्ली न्यायिक सेवा में शामिल हुए थे. उन्होंने पुणे के सिम्बायोसिस लॉ स्कूल से कानून की पढ़ाई की थी और अपने कार्यकाल में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी और सिविल जज के रूप में सेवाएं दी थीं. वह 2025 से कड़कड़डूमा कोर्ट में सेवाएं दे रहे थे. फिलहाल इस पूरे मामले में पुलिस जांच जारी है और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद ही मौत की असली वजह साफ हो पाएगी. About the Author Saad Omar साद बिन उमर को पत्रकारिता के क्षेत्र में 15 साल से अधिक का अनुभव है, जिनमें से 12 साल उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता को दिए है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने आज तक, एनडीटीवी, पीटीआई और नया इंडिया जैसे प्र…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Source link

ताज़ा खबर

सिर्फ कुछ गज में फैला ये मार्केट, लेकिन सामान ऐसा कि बड़े...

Last Updated:May 03, 2026, 07:41 IST Bhilwara Famous Market: राजस्थान के भीलवाड़ा शहर में एक ऐसा अनोखा मार्केट है, जो क्षेत्रफल में भले ही छोटा हो, लेकिन यहां मिलने वाले सामान की विविधता किसी बड़े बाजार से कम नहीं है. यह बाजार स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहर से आने वाले ग्राहकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. कम जगह में सैकड़ों दुकानों के जरिए कपड़े, घरेलू सामान, एक्सेसरीज और अन्य जरूरत की चीजें आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं. इस मार्केट की खासियत यह है कि यहां उचित दाम पर अच्छा सामान मिल जाता है, जिससे यह आम लोगों के लिए पसंदीदा शॉपिंग डेस्टिनेशन बन चुका है. भीलवाड़ा. भीलवाड़ा शहर का यूआईटी मार्केट क्षेत्रफल में भले ही छोटा हो, लेकिन यहां मिलने वाले साउंड सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की रेंज इसे बड़े बाजारों की कतार में खड़ा कर देती है. इस बाजार ने अपनी खास पहचान मेहनत, भरोसे और क्वालिटी के दम पर बनाई है. शहर ही नहीं बल्कि जिले के दूर-दराज के गांवों से भी लोग यहां खरीदारी करने के लिए पहुंचते हैं. खास बात यह है कि यहां ग्राहकों को उनकी जरूरत और बजट के हिसाब से हर तरह का सामान आसानी से मिल जाता है, जिससे यह मार्केट लगातार लोकप्रिय होता जा रहा है. ग्रामीण इलाकों से आने वाले लोगों के लिए भी यह मार्केट किसी वरदान से कम नहीं है. उन्हें एक ही जगह पर हर जरूरी साउंड उपकरण मिल जाता है, जिससे समय और पैसे दोनों की बचत होती है. कई बार लोग बड़े शहरों में जाने की बजाय भीलवाड़ा के इसी मार्केट को प्राथमिकता देते हैं. इससे न केवल स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि शहर की आर्थिक गतिविधियों में भी तेजी देखने को मिल रही है. यूआईटी मार्केट को खास तौर पर साउंड सिस्टम के हब के रूप में जाना जाता है. यहां डीजे सेटअप से लेकर छोटे घरेलू स्पीकर तक हर तरह के प्रोडक्ट उपलब्ध हैं. शादी-ब्याह, धार्मिक कार्यक्रम और अन्य आयोजनों के लिए जरूरी साउंड इक्विपमेंट खरीदने के लिए लोग सबसे पहले इसी बाजार का रुख करते हैं. दुकानदार भी ग्राहकों को नई तकनीक और बेहतर क्वालिटी के विकल्प दिखाते हैं, जिससे यहां का व्यापार लगातार बढ़ता जा रहा है और मार्केट की प्रतिष्ठा मजबूत होती जा रही है. Add News18 as Preferred Source on Google त्योहारों और शादी के सीजन में इस बाजार की रौनक और भी बढ़ जाती है. दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ उमड़ पड़ती है और साउंड सिस्टम की बिक्री में जबरदस्त उछाल देखने को मिलता है. इस दौरान दुकानदार भी ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए नई-नई स्कीम और ऑफर लेकर आते हैं. यही कारण है कि यह छोटा सा बाजार बड़े स्तर पर व्यापार करने में सक्षम हो पाया है. यूआईटी मार्केट में दुकानों की संख्या भले ही सीमित हो, लेकिन यहां की हर दुकान अपने आप में खास है. दुकानदारों के पास वर्षों का अनुभव है और वे ग्राहकों को सही सलाह देने में भी माहिर हैं. यही कारण है कि यहां आने वाले ग्राहक एक बार खरीदारी करने के बाद बार-बार इसी बाजार का रुख करते हैं. दुकानदार और ग्राहकों के बीच बना यह विश्वास इस बाजार की सबसे बड़ी ताकत बन चुका है. इस बाजार की एक बड़ी खासियत यह भी है कि यहां केवल सामान की बिक्री ही नहीं होती, बल्कि रिपेयरिंग की बेहतरीन सुविधा भी मिलती है. कई अनुभवी तकनीशियन वर्षों से यहां काम कर रहे हैं, जो खराब साउंड सिस्टम को फिर से नया जैसा बना देते हैं. इससे ग्राहकों को नया सामान खरीदने की जरूरत कम पड़ती है और पुराने उपकरण भी लंबे समय तक उपयोग में आ जाते हैं. यही वजह है कि लोग भरोसे के साथ अपने महंगे उपकरण भी यहां ठीक कराने लाते हैं. भीलवाड़ा का यूआईटी मार्केट इस बात का बेहतरीन उदाहरण है कि आकार नहीं, बल्कि गुणवत्ता और भरोसा ही किसी बाजार की असली पहचान बनाते हैं. सीमित क्षेत्र में फैला यह बाजार आज जिलेभर के लोगों के लिए साउंड सिस्टम की पहली पसंद बन चुका है. आने वाले समय में भी इस बाजार के और अधिक विकसित होने की संभावनाएं जताई जा रही हैं, जिससे यह और भी ज्यादा प्रसिद्धि हासिल कर सकता है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। राजस्थान की ताजा खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें| Source link

ताज़ा खबर

यात्रीगण कृपया ध्यान दें! अब 31 मई तक चलेगी दानापुर-एसएमवीटी बंगलुरू स्पेशल...

Last Updated:May 03, 2026, 06:27 IST ट्रेनों में यात्रियों की अतिरिक्त भीड़ को देखते हुए दानापुर और एसएमवीटी बंगलूरू के बीच चल रही स्पेशल ट्रेन के परिचालन अवधि को बढ़ाया गया है. अब यह ट्रेन 31 मई तक चलेगी. इससे दक्षिण भारत जाने वाले यात्रियों को सुविधा होगी. ट्रेनों में यात्रियों की लगातार बढ़ती भीड़ को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने दानापुर और एसएमवीटी बेंगलूरू के बीच चलने वाली स्पेशल ट्रेन की परिचालन अवधि बढ़ाने का निर्णय लिया है. अब यह विशेष ट्रेन 31 मई तक संचालित की जाएगी, जिससे दक्षिण भारत की यात्रा करने वाले यात्रियों को काफी राहत मिलेगी. गर्मियों के मौसम और छुट्टियों के कारण इस रूट पर यात्रियों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है, जिसके चलते यह कदम उठाया गया है. 31 मई तक जारी रहेगी सेवाएं पूर्व मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी सरस्वती चंद्र ने जानकारी देते हुए बताया कि ट्रेन संख्या 03251, जो दानापुर से एसएमवीटी बेंगलूरू के लिए चलती है, अब 31 मई तक अपनी सेवाएं जारी रखेगी. यह स्पेशल ट्रेन दानापुर से दोपहर 3 बजे प्रस्थान करेगी और रास्ते में विभिन्न प्रमुख स्टेशनों पर ठहराव करते हुए तीसरे दिन दोपहर 2:30 बजे एसएमवीटी बेंगलूरू पहुंचेगी. यह समय-सारिणी यात्रियों को सुविधाजनक यात्रा का अवसर प्रदान करती है. इन स्टेशनों पर रुकेगी ये ट्रेन  वहीं, वापसी दिशा में ट्रेन संख्या 03252, जो एसएमवीटी बेंगलूरू से दानापुर के लिए चलाई जाती है, उसका परिचालन 2 जून तक जारी रहेगा. यह ट्रेन रात 11:50 बजे एसएमवीटी बेंगलूरू से खुलेगी और तीसरे दिन रात 11:55 बजे दानापुर पहुंचेगी. इस प्रकार दोनों दिशाओं में यात्रियों को अतिरिक्त सुविधा उपलब्ध कराई गई है. यह स्पेशल ट्रेन अप और डाउन दोनों दिशाओं में कई महत्वपूर्ण स्टेशनों पर ठहरती है, जिनमें आरा, बक्सर, पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन, प्रयागराज छिवकी, सतना और जबलपुर शामिल हैं. इन प्रमुख स्टेशनों पर रुकने से विभिन्न शहरों के यात्रियों को इस सेवा का लाभ मिलेगा. बता दें कि रेलवे का यह निर्णय विशेष रूप से उन यात्रियों के लिए लाभकारी साबित होगा, जो बिहार और उत्तर भारत से दक्षिण भारत की यात्रा करते हैं. इससे न केवल भीड़ का दबाव कम होगा, बल्कि यात्रियों को सुरक्षित और आरामदायक यात्रा का विकल्प भी मिलेगा. About the Author Vivek Kumar विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Chandauli,Chandauli,Uttar Pradesh Source link

Scroll to Top