बीजेपी में विलय करेंगे ममता के सांसद, या नया बनाएंगे गुट, शताब्दी...
होमताजा खबरदेश बीजेपी में विलय करेंगे ममता के सांसद? शताब्दी रॉय के घर क्या हुई चर्चा Last Updated:June 09, 2026, 01:40 IST टीएमसी के दो तिहाई से ज्यादा सांसद और विधायक ममता बनर्जी के खिलाफ बगावत कर नया गुट बनाने की तैयारी कर रहे हैं. लेकिन इसमें नया मोड़ तब आ गया जब सोमवार शाम सांसद शताब्दी रॉय के घर सांसदों की मीटिंग हुई और उसमें सुवेंदु अधिकारी पहुंचे. सवाल ये कि क्या सांसद बीजेपी में विलय करने जा रहे हैं? टीएमसी में टूट के बाद सवाल कि क्या बागी गुट बीजेपी में विलय करेगा. ममता बनर्जी को अकेला छोड़कर बागी हुए टीएमसी के सांसदों ने सोमवार देर रात तक शताब्दी रॉय के घर पर चर्चा की. इस मीटिंग में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी भी शामिल हुए. हालांकि , सुवेंदु कुछ ही देर में सांसदों से मिलकर निकल गए, लेकिन बाद में जो बातें सामने आईं, वह काफी कुछ कह रही हैं. सूत्रों का कहना है कि टीएमसी के बागी सांसदों ने इस बात पर लंबी चर्चा की है कि बीजेपी में विलय करना चाहिए, या फिर पार्टी पर दावा ठोककर उसे एनडीए का हिस्सा बनाना चाहिए. सूत्रों का कहना है कि सभी सांसद मंगलवार को एक साथ फिर मीटिंग करेंगे और बाद में मीडिया के सामने अपने फैसले का ऐलान करेंगे. इस बात की चर्चा है कि पहले ये सांसद नया गुट बनाएंगे और फिर बीजेपी में विलय कर जाएंगे. हालांकि, इस पर आखिरी फैसला सांसदों को खुद लेना है और मंगलवार को वे मीडिया से इस बारे में बात कर सकते हैं. जिसकी संख्या ज्यादा, उसका चुनाव चिह्न कोलकाता के बाद अब दिल्ली में भी तृणमूल कांग्रेस दो हिस्सों में बंट गई है. लोकसभा में तृणमूल के दो-तिहाई से अधिक सांसदों ने ममता बनर्जी के खिलाफ बगावत का ऐलान कर दिया है. नतीजतन, अब यह अटकलें लगने लगी हैं कि कोलकाता और दिल्ली में मिले इन दोहरे झटकों में ममता बनर्जी अपनी पार्टी और चुनाव चिह्न दोनों खो देंगी. विधानसभा में तृणमूल के दो-तिहाई से अधिक विधायक ऋतब्रता बनर्जी के नेतृत्व वाले विपक्षी खेमे में शामिल हो चुके हैं. इनकी संख्या 60 से अधिक हो गई है. विधानसभा चुनावों के बाद, लोकसभा के दो-तिहाई से अधिक सांसदों ने भी बगावत का ऐलान कर दिया है. लोकसभा में तृणमूल के 28 सांसद थे. इनमें से कम से कम 20 से 22 सांसद बागी खेमे में शामिल हो चुके हैं. … तो पार्टी पर भी होगा बागियों का कब्जा विधानसभा और लोकसभा के बाद, अगर राज्यसभा में भी तृणमूल सांसदों के दो-तिहाई सदस्य बगावत कर देते हैं, तो ममता बनर्जी का दबाव और बढ़ जाएगा. क्योंकि चुनाव आयोग के नियम के अनुसार, अगर विधानसभा, लोकसभा, राज्यसभा और नगर एवं पंचायत स्तर पर तृणमूल के अधिकांश जन प्रतिनिधि बागी खेमे का समर्थन करते हैं, तो पीड़ित पक्ष चुनाव आयोग से तृणमूल पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह मांग सकते हैं. साथ ही, पार्टी पदाधिकारियों का समर्थन भी बागियों के साथ होना चाहिए. About the Author Gyanendra Mishra Mr. Gyanendra Kumar Mishra is associated with hindi.news18.com. working on home page. He has 20 yrs of rich experience in journalism. He Started his career with Amar Ujala then worked for ‘Hindustan Times Group…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi Source link






