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वेस्ट मटेरियल से स्मार्ट होम, ब्लाइंड स्टिक तक, सरकारी विद्यालय के बच्चे...

Last Updated:May 31, 2026, 18:01 IST अमेठी जिले के प्राथमिक विद्यालय घाटकोर की छात्रा रुचि ने स्मार्टहोम तैयार किया है. जो घर में एलपीजी लीकेज के होते ही अलार्म का संकेत देगा और बड़ी दुर्घटना को नही होनें देगा. सुरक्षित करेगा इसी तरीके से अमेठी जिले के एक छात्र ने ब्लाइंड स्ट्रिक्ट तैयार किया है. जो दिव्यांगों के काम आएगी कहीं पर भी दिव्यांग जा रहे हैं. वह स्टिक उनके हाथ में आते ही 10 से 15 मीटर दूर कोई अनहोनी कोई गड्ढा या फिर अन्य समस्या की होती. अमेठी: सरकारी विद्यालय में अक्सर सुविधाओं का अभाव देखा जाता है, लेकिन अगर वही सरकारी विद्यालय के बच्चे हुंअरबाज और अकलमंद होते जाएं. यह आंकड़े कहीं ना कहीं आश्चर्यचकित करेंगे कुछ ऐसा ही कहानी है. अमेठी की सरकारी विद्यालय के अलग-अलग बच्चों की जहां पर बच्चे यूनिक प्रोजेक्ट बनाकर अपने हुनर और अपनी बुद्धिमता की पारदर्शिता को और मजबूत कर रहे हैं. छोटे से छोटे और बड़े से बड़े प्रोजेक्ट जो आम जनमानस के साथ अन्य लोगों के काम आ सके उन्हें बच्चों द्वारा तैयार किया जा रहा है. ब्लाइंड स्टिक से लेकर स्मार्ट होम तक अलग-अलग प्रोजेक्ट अमेठी जिले के प्राथमिक विद्यालय घाटकोर की छात्रा रुचि ने स्मार्टहोम तैयार किया है. जो घर में एलपीजी लीकेज के होते ही अलार्म का संकेत देगा और बड़ी दुर्घटना को नही होनें देगा. सुरक्षित करेगा इसी तरीके से अमेठी जिले के एक छात्र ने ब्लाइंड स्ट्रिक्ट तैयार किया है. जो दिव्यांगों के काम आएगी कहीं पर भी दिव्यांग जा रहे हैं. वह स्टिक उनके हाथ में आते ही 10 से 15 मीटर दूर कोई अनहोनी कोई गड्ढा या फिर अन्य समस्या की होती. उन्हें तुरंत संकेत करेगी और उन्हें सुरक्षित करेगी इसी तरीके से वेस्ट मटेरियल का भी इस्तेमाल प्रोजेक्ट बनाने में किया गया है. अलग-अलग बड़े पर्यटन स्थल जैसे केदारनाथ राम मंदिर जैसे यूनिक प्रोजेक्ट भी बच्चे तैयार कर रहे हैं. जिन्हें मंडल स्तर पर प्रदेश स्तर पर भेजा जा चुका है और बच्चों को सम्मानित भी किया जा रहा है. समय-समय पर अधिकारी दे रहे निर्देश आपको बता दें कि प्रोजेक्ट डिपार्टमेंट के प्रमुख मंसाराम मौर्य बताते हैं कि बच्चों को समय-समय पर अधिकारियों के निर्देश पर किताबी ज्ञान के साथ-साथ प्रोजेक्ट बनाना भी सिखाया जाता है. वेस्ट मटेरियल से तैयार होने वाले प्रोजेक्ट से दो फायदे हैं एक तो उसका सदुपयोग हो जाता है. दूसरा हम जब उपयोगी प्रोजेक्ट बच्चों द्वारा तैयार करते हैं तो उसके जरिए बच्चों की बुद्धिमत्ता उनके शारीरिक विकास के साथ मानसिक विकास भी होता है. उन्होंने कहा कि अब तक बच्चे कई ऐसे प्रोजेक्ट बना चुके हैं. जो आम जन को सीधा फायदा दे रहे हैं और इन प्रोजेक्ट को मंडल स्तर और प्रदेश स्तर पर भी भेजा जा चुका है. इससे बच्चों को भी प्रोत्साहन मिल रहा है इसके साथ ही उन्हें आगे भी प्रोजेक्ट बनाने में एक हौसला मिलेगा. About the Author Rajneesh Kumar Yadav मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Amethi,Sultanpur,Uttar Pradesh Source link

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मॉडल सिटी के रूप में डेवलप हो रहा सुल्तानपुर, 27 लगाए जाएंगे...

Last Updated:May 31, 2026, 16:41 IST Sultanpur news: नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी लालचंद सरोज ने लोकल 18 से बताया कि सुल्तानपुर शहर को मॉडल सिटी के रूप में डेवलप किया जा रहा है और इसी के चलते अब सुल्तानपुर के 25 वार्डों में 27 जगह हाइड्रेंट लगाया जाएगा. इसका फायदा यह होगा कि किसी भी आपातकाल के समय यदि आग लगती है तो तुरंत इस हाइड्रेंट के माध्यम से दमकलों को पानी उपलब्ध हो जाएगा यानी कि अब आग लगने पर पानी के लिए दमकल गाड़ियों को इधर-उधर भटकना नहीं होगा ख़बरें फटाफट सुल्तानपुरः उत्तर प्रदेश का सुल्तानपुर शहर अब विकसित शहर की ओर तेजी से बढ़ रहा है. यहां पर कई ऐसे विकास कार्य जा रहे हैं, जो सुल्तानपुर शहर को मॉडल सिटी के रूप में सामने लेकर आ रहा है. इसी क्रम में सुल्तानपुर शहर में 27 के 27 वार्डों में हाइड्रेंट लगाया जाएगा. जिससे आग पर काबू मिनटों में पा लिया जाएगा क्योंकि अभी तक दमकल को पानी मिलने में असुविधा होती थी. ऐसे में सभी वार्डों में हाइड्रेंट लगाए जाने से अब पानी की किल्लत दूर होगी और आपातकाल में आग लगने के दौरान आग पर काबू पाने में आसानी होगी. ऐसे में आइए जानते हैं क्या होता है हाइड्रेंट और इसको लगाने से सुल्तानपुर में किस तरह से लोगों को फायदा होगा. 25 वार्डों में 27 जगह हाइड्रेंट लगाया जाएगा नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी लालचंद सरोज ने लोकल 18 से बताया कि सुल्तानपुर शहर को मॉडल सिटी के रूप में डेवलप किया जा रहा है और इसी के चलते अब सुल्तानपुर के 25 वार्डों में 27 जगह हाइड्रेंट लगाया जाएगा. इसका फायदा यह होगा कि किसी भी आपातकाल के समय यदि आग लगती है तो तुरंत इस हाइड्रेंट के माध्यम से दमकलों को पानी उपलब्ध हो जाएगा यानी कि अब आग लगने पर पानी के लिए दमकल गाड़ियों को इधर-उधर भटकना नहीं होगा बल्कि वार्ड में लगे हाइड्रेंट से सीधा वह गाड़ी में पानी भर सकेंगे और इससे आग पर काबू पाए जा सकेगा. आपातकाल में मिलेगा फायदा आपातकाल के समय आग लगने पर लोगों को आसानी से पानी उपलब्ध हो जाएगा और इसके लिए 27 स्थलों का चयन किया गया है. जहां पर हाइड्रेंट लगाकर उसे मॉडल तरीके से डेवलप किया जाएगा. हाइड्रेंट के लगने से अभी तक किसी समय जब आग लगने की आपात स्थिति पैदा होती थी उसे दरमियां दमकल गाड़ियों को किसी के घर से पानी भरने के लिए मोटर का सहारा लेना पड़ता था या फिर कहीं अन्य जगह हुई टंकी से पानी भरते थे ऐसे में काफी देर हो जाती थी और आग की लपटें ज्यादा बढ़ जाती थी. 27 जगह हुए चिन्हित ऐसे में सुल्तानपुर नगरपालिका द्वारा 27 जगह पर हाइड्रेंट लगाया जा रहा है जिससे आज पर काबू पाने का समय कम हो जाएगा. इन स्थलों पर आपातकालीन इस मॉडल व्यवस्था से सुल्तानपुर के लोगों को आपात स्थिति में निपटने के लिए काफी फायदा होने वाला है बढ़िया वीर के रहने वाले अभिषेक कुमार बताते हैं कि हाइड्रेंट लगने से आपात स्थिति में निपटा जा सकता है या सुल्तानपुर शहर को मॉडल तरीके से डेवलप करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका है. About the Author Rajneesh Kumar Yadav मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Sultanpur,Uttar Pradesh Source link

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NEET UG CUET 2026 LIVE: एनटीए का सर्वर क्यों डाउन हुआ? नीट...

नई दिल्ली (NEET UG CUET 2026 LIVE). देश की दो सबसे बड़ी परीक्षाओं- नीट यूजी और सीयूईटी यूजी को लेकर लाखों उम्मीदवारों और अभिभावकों के बीच बेचैनी का माहौल है. नीट परीक्षा में हुए कथित पेपर लीक विवाद के बाद आखिरकार नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने बड़ा कदम उठाते हुए री-टेस्ट की तारीख का ऐलान कर दिया है. अब यह परीक्षा 21 जून 2026 को होगी. इस फैसले ने इंसाफ की मांग कर रहे अभ्यर्थियों को राहत दी है लेकिन कम समय में दोबारा तैयारी करने का दबाव भी बढ़ा दिया है. लीक की परतें खोलने के लिए जांच एजेंसियां लगातार छापेमारी कर रही हैं. CUET UG 2026 LIVE: सीयूईटी के दूरदराज से आए छात्रों का बड़ा नुकसान सीयूईटी यूजी 2026 लाइव: सीयूईटी परीक्षा देने के लिए कई उम्मीदवार अपने गांवों से 100-150 किलोमीटर दूर शहरों के केंद्रों पर आए थे. परीक्षा रद्द होने के कारण उन्हें अब दोबारा आने-जाने और ठहरने का भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा, जिससे वे बेहद नाराज हैं. NEET UG Paper Leak Case LIVE: नीट सुरक्षा के लिए सख्त नियम लागू नीट यूजी पेपर लीक मामला लाइव: सूत्रों के अनुसार, 21 जून को होने वाली नीट री-परीक्षा में सुरक्षा के बेहद सख्त इंतजाम रहेंगे. परीक्षा केंद्रों पर जैमर्स की संख्या बढ़ाई जाएगी और बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन को दो चरणों में पूरा किया जाएगा. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कैमरों के जरिए हर एक क्लासरूम पर नजर रखी जाएगी. NEET UG Paper Leak Case LIVE: नीट को लेकर शिक्षा मंत्रालय की हाई-लेवल मीटिंग नीट यूजी पेपर लीक मामला लाइव: दिल्ली में शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों और एनटीए के चेयरमैन के बीच कई हाई-लेवल मीटिंग हुई हैं. इस बैठक का मुख्य एजेंडा 21 जून को होने वाले नीट री-टेस्ट को पूरी तरह फुलप्रूफ बनाना है जिससे दोबारा ऐसी कोई चूक न हो. CUET UG 2026 LIVE: सीयूईटी छात्रों का आरोप- पानी तक की व्यवस्था नहीं थी सीयूईटी यूजी 2026 लाइव: परीक्षा केंद्रों के बाहर प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने आरोप लगाया कि चिलचिलाती गर्मी के बावजूद सेंटर्स के अंदर पीने के पानी और बैठने की कोई सही व्यवस्था नहीं थी. घंटों इंतजार करने के कारण कई छात्राओं की तबीयत भी बिगड़ गई. NEET UG Paper Leak Case LIVE: नीट कोचिंग सेंटर्स ने बदली स्ट्रैटेजी नीट यूजी पेपर लीक मामला लाइव: कोटा और पटना के प्रमुख कोचिंग संस्थानों ने नीट री-टेस्ट की तारीख आते ही अपने क्रैश कोर्स और टेस्ट सीरीज का शेड्यूल बदल दिया है. अगले 20 दिनों के लिए छात्रों को केवल मॉक टेस्ट और पिछले सालों के जरूरी सवालों का अभ्यास कराने पर जोर दिया जा रहा है. CUET UG 2026 LIVE: नोएडा के सीयूईटी सेंटर्स पर सबसे ज्यादा हंगामा सीयूईटी यूजी 2026 लाइव: दिल्ली-एनसीआर के नोएडा सेक्टर 62 और आस-पास के कुछ परीक्षा केंद्रों पर कल सबसे ज्यादा हंगामा देखने को मिला. यहां दोपहर की शिफ्ट के छात्रों को शाम तक इंतजार कराने के बाद बताया गया कि आज उनकी परीक्षा नहीं हो पाएगी. NEET UG Paper Leak Case LIVE: नीट अभिभावकों की बढ़ीं चिंताएं नीट यूजी पेपर लीक मामला लाइव: बच्चों के साथ-साथ उनके माता-पिता भी इस फैसले से बेहद तनाव में हैं. कई पेरेंट्स का कहना है कि उनके बच्चों ने सालों मेहनत की थी और अब कुछ भ्रष्ट लोगों की वजह से उन्हें दोबारा इस परीक्षा के डर से गुजरना पड़ रहा है. पेरेंट्स ने परीक्षा सेंटर्स पर सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है. CUET UG 2026 LIVE: क्या दोबारा डाउनलोड करना होगा सीयूईटी एडमिट कार्ड? सीयूईटी यूजी 2026 लाइव: जिन छात्रों की सीयूईटी परीक्षा कल रद्द हुई है, उन्हें दोबारा परीक्षा में बैठने के लिए एनटीए की वेबसाइट से नया एडमिट कार्ड डाउनलोड करना होगा. नए एडमिट कार्ड पर परीक्षा की नई तारीख, समय और केंद्र का नाम दर्ज होगा. NEET UG Paper Leak Case LIVE: नीट के छात्रों में मिली-जुली प्रतिक्रिया नीट यूजी पेपर लीक मामला लाइव: नीट री-टेस्ट के फैसले पर स्टूडेंट्स की मिली-जुली प्रतिक्रिया आ रही है. दिल्ली के एक कोचिंग हब में पढ़ रहे छात्र ने कहा कि पेपर लीक के खिलाफ यह जरूरी था, लेकिन महज 20 दिनों के भीतर दोबारा पूरी बायोलॉजी, फिजिक्स और केमिस्ट्री का रिवीजन करना किसी मानसिक तनाव से कम नहीं है. CUET UG 2026 LIVE: रद्द हुई सीयूईटी परीक्षा कब होगी दोबारा? सीयूईटी यूजी 2026 लाइव: एनटीए ने कल रात जारी नोटिफिकेशन में कहा है कि जिन केंद्रों पर सीयूईटी परीक्षा कल रद्द की गई थी, वहां के प्रभावित छात्रों के लिए जल्द ही नई तारीखों की घोषणा की जाएगी. इन छात्रों को पूरी तरह नए सिरे से सूचित किया जाएगा. NEET UG Paper Leak Case LIVE: क्या नीट के परीक्षा केंद्र बदल जाएंगे? नीट यूजी पेपर लीक मामला लाइव: नीट पेपर लीक गिरोह का नेटवर्क देखते हुए एनटीए इस बार परीक्षा केंद्रों की सूची में बड़ा फेरबदल करने जा रहा है. जिन सेंटर्स पर जरा सा भी संदेह था, उन्हें ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है. छात्रों को इस बार पूरी तरह नए और बेहद सुरक्षित केंद्रों पर भेजा जा सकता है. CUET UG 2026 LIVE: एनटीए का सर्वर क्यों फेल हुआ? सीयूईटी यूजी 2026 लाइव: सूत्रों के मुताबिक, सीयूईटी में एक साथ लाखों छात्रों के लॉगिन करने के कारण मेन सर्वर पर अचानक लोड बहुत ज्यादा बढ़ गया. इसके अलावा, कई सब-सेंटर्स पर इंटरनेट स्पीड और लोकल हार्डवेयर सिस्टम अप टू डेट नहीं थे, जिससे पूरा सिस्टम क्रैश हो गया. NEET UG Paper Leak Case LIVE: नीट के एडमिट कार्ड कब होंगे जारी? नीट यूजी पेपर लीक मामला लाइव: नीट उम्मीदवारों के मन में सबसे बड़ा सवाल है कि 21 जून के री-टेस्ट के लिए नए एडमिट कार्ड कब आएंगे. रिपोर्ट्स की मानें तो एनटीए जून के दूसरे हफ्ते के अंत तक यानी 12 से 15 जून के बीच ऑफिशियल वेबसाइट पर नए हॉल टिकट डाउनलोड करने का लिंक एक्टिव कर देगा. NEET UG Paper Leak Case LIVE: क्या सभी छात्रों को देना होगा री-टेस्ट नीट यूजी पेपर लीक मामला लाइव: एनटीए के नए नोटिफिकेशन के मुताबिक, 21 जून को होने वाली यह परीक्षा उन सभी रजिस्टर्ड उम्मीदवारों के लिए अनिवार्य होगी जो पहले नीट यूजी 2026 में शामिल हुए थे. किसी भी उम्मीदवार को पुराना स्कोरकार्ड इस्तेमाल करने की अनुमति

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Abhishek Banerjee Assault Case : अभिषेक बनर्जी पर अटैक मामले में नया...

तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले के मामले में अब एक नया ट्विस्ट सामने आया है. सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में गिरफ्तार किए गए कुछ आरोपियों के तार कभी टीएमसी से जुड़े नेताओं के साथ जुड़े रहे हैं. इस खुलासे के बाद हमले को लेकर कई नए सवाल खड़े हो गए हैं और राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है. सूत्रों के अनुसार, अभिषेक बनर्जी पर हमले के आरोप में गिरफ्तार किए गए कम से कम चार आरोपी कभी टीएमसी की पूर्व विधायक अरुंधति मैत्रा (लवली मैत्रा) के करीबी माने जाते थे. इनमें तपन माइती, निर्मल्या सेनगुप्ता उर्फ जॉय, काजल दास और देबाशीष दत्ता के नाम शामिल बताए जा रहे हैं. इन चारों को पुलिस ने अभिषेक बनर्जी के ऊपर हुए हमले के मामले में गिरफ्तार किया है. ‘टीएमसी कार्यकर्ता था मेरा बेटा’ वहीं इस घटना के सिलसिले में गिरफ़्तार एक अन्य आरोपी आकाश गायेन इलाके में तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता के तौर पर जाना जाता है. उसकी मां ने माना कि वह पार्टी से जुड़ा हुआ था और दावा किया कि वह चुनावों के दौरान नियमित रूप से टीएमसी के बूथों पर बैठता था. उसने कहा कि उसके बेटे के पास अभिषेक बनर्जी के खिलाफ रंजिश रखने का कोई कारण नहीं था. आकाश की मां के अनुसार, शुक्रवार दोपहर को घटना के बाद आकाश हमेशा की तरह घर लौटा और बाद में पास के एक मैदान में फुटबॉल खेलने चला गया. उन्होंने बताया कि पुलिस ने उसी रात बाद में उसे उठा लिया. आकाश की मां ने यह भी कहा कि परिवार को उसकी गिरफ़्तारी के पीछे की सही वजह के बारे में नहीं बताया गया है. आकाश के पिता रिक्शा वैन चालक के तौर पर काम करते हैं, जबकि आकाश खुद बेरोज़गार था. यह घटना दक्षिण 24 परगना के सोनारपुर में हुई, जहां अभिषेक बनर्जी बंगाल चुनाव के बाद हुई हिंसा के पीड़ितों से मिलने गए थे. रिपोर्टों के अनुसार, इस दौरे के दौरान भीड़ ने उन पर हमला कर दिया, जिससे राज्य में एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया. तृणमूल कांग्रेस सहित विपक्षी दलों ने इस हमले के लिए राज्य की बीजेपी सरकार को जिम्मेदार ठहराया है. जांच एजेंसियां अब इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि क्या इन राजनीतिक संबंधों का हमले से कोई सीधा संबंध है या फिर यह महज संयोग है. फिलहाल पुलिस किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से बच रही है और पूरे घटनाक्रम की हर एंगल से जांच की जा रही है. अभिषेक बनर्जी ने राहुल गांधी को कहा शुक्रिया इस बीच अभिषेक बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक लंबा पोस्ट लिखकर अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी का समर्थन और चिंता जताने के लिए धन्यवाद दिया. अपने पोस्ट में अभिषेक बनर्जी ने कहा कि वे लोकतंत्र, संविधान और देश की संस्थाओं की रक्षा के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेंगे. अभिषेक ने लिखा कि पिछले वर्ष उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के तहत सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्य के रूप में पांच देशों का दौरा किया था और भारत का पक्ष मजबूती से रखा था. उन्होंने कहा कि आज वह राजनीतिक हिंसा और ‘राज्य प्रायोजित आतंक’ के शिकार बने हैं. बीजेपी पर साधा निशाना टीएमसी सांसद ने अपने पोस्ट में भारतीय जनता पार्टी पर भी निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग बीजेपी का समर्थन करते हैं उन्हें देशभक्त बताया जाता है, जबकि सवाल उठाने वालों को निशाना बनाया जाता है. उन्होंने कहा कि वह अपने सिद्धांतों से समझौता करने के बजाय लोकतंत्र की रक्षा के लिए दबाव और धमकियों का सामना करना पसंद करेंगे. अभिषेक बनर्जी ने अपने संदेश में यह भी कहा कि सत्ता अस्थायी होती है लेकिन जनता की इच्छा स्थायी होती है. उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी लोकतंत्र को कमजोर करने और समाज को बांटने वाली ताकतों के खिलाफ संघर्ष जारी रखेगी. उधर, हमले के पीछे की वास्तविक वजह क्या थी, इसे लेकर जांच अभी जारी है. पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है और उनके राजनीतिक, सामाजिक तथा व्यक्तिगत संबंधों की भी पड़ताल की जा रही है. इस नए खुलासे ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है और आने वाले दिनों में जांच से और अहम तथ्य सामने आ सकते हैं. कल्याण बनर्जी पर भी हुआ हमला उधर पश्चिम बंगाल के हुगली जिले में तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद कल्याण बनर्जी पर कथित हमले का मामला सामने आया है. जानकारी के अनुसार, कल्याण बनर्जी अपने पार्टी कार्यकर्ताओं की रिहाई की मांग को लेकर एक ज्ञापन सौंपने थाने पहुंचे थे. इसी दौरान वहां मौजूद भीड़ ने उनके साथ धक्का-मुक्की की और स्थिति तनावपूर्ण हो गई. घटना के बाद इलाके में राजनीतिक माहौल गरमा गया है. कल्याण बनर्जी ने इस हमले के लिए भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं को जिम्मेदार ठहराया है. उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी समर्थकों ने सुनियोजित तरीके से उन पर हमला कराया. फिलहाल मामले की जांच की जा रही है और पुलिस घटनास्थल के वीडियो फुटेज भी खंगाल रही है. Source link

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9 आतंकी, निशाने पर दिल्ली-मुंबई… एक ‘डॉन’ की गिरफ्तारी से कैसे पकड़ा...

होमताजा खबरदेश एक ‘डॉन’ की गिरफ्तारी, और पकड़ा गया ISI-D कंपनी का खतरनाक टेरर प्लान Last Updated:May 31, 2026, 13:43 IST Pakistan Terror Module: आतंकियों का यह मॉड्यूल दिल्ली, मुंबई और अन्य शहरों में महत्वपूर्ण सरकारी प्रतिष्ठानों, सुरक्षा एजेंसियों के ठिकानों, पुलिसकर्मियों और धार्मिक स्थलों को निशाना बनाने की तैयारी कर रहा था. शुरुआती जांच में सामने आया है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI अंडरवर्ल्ड नेटवर्क के जरिए भारत में बड़े हमलों की साजिश रच रही थी. पुलिस ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और अंडरवर्ल्ड से जुड़े एक संदिग्ध आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ करते हुए 8 लोगों को गिरफ्तार किया है. दिल्ली और मुंबई समेत देश के कई बड़े शहरों को दहलाने की कथित साजिश को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने समय रहते नाकाम कर दिया. पुलिस ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और अंडरवर्ल्ड से जुड़े एक संदिग्ध आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ करते हुए 8 लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक अन्य को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है. गिरफ्तार आरोपियों में एक नेपाली नागरिक भी शामिल है. पुलिस के मुताबिक यह मॉड्यूल दिल्ली, मुंबई और अन्य शहरों में महत्वपूर्ण सरकारी प्रतिष्ठानों, सुरक्षा एजेंसियों के ठिकानों, पुलिसकर्मियों और धार्मिक स्थलों को निशाना बनाने की तैयारी कर रहा था. शुरुआती जांच में सामने आया है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI अंडरवर्ल्ड नेटवर्क के जरिए भारत में बड़े हमलों की साजिश रच रही थी. इस पूरे मामले में सबसे बड़ी सफलता तब मिली, जब दिल्ली पुलिस ने कुख्यात शार्पशूटर विजय उर्फ ‘डॉन’ को पुणे से गिरफ्तार किया. पूछताछ के दौरान उसके खुलासों के आधार पर झारखंड के साहिबगंज से एक और आरोपी को पकड़ा गया. जांच में पता चला कि दोनों सीधे पाकिस्तान में बैठे शाहजाद भट्टी के संपर्क में थे. पुलिस का दावा है कि पूछताछ में यह भी सामने आया कि हथियारों और विस्फोटकों की खेप ड्रोन के जरिए भारत में पहुंचाई गई थी. इससे यह संकेत मिला कि ISI और अंडरवर्ल्ड नेटवर्क हमले की तैयारियां लगभग पूरी कर चुके थे. स्पेशल सेल की जांच में चार मुख्य हैंडलर्स के नाम सामने आए हैं. इनमें मुन्ना झिंगाड़ा, दिलावर खान, शाहजाद भट्टी और आमिर जट्ट शामिल हैं. ये सभी इस नेटवर्क को संचालित कर रहे थे और भारत में मौजूद अपने गुर्गों को निर्देश दे रहे थे. स्पेशल सेल के विशेष पुलिस आयुक्त अनिल शुक्ला के अनुसार, यह ऑपरेशन खुफिया एजेंसियों और दिल्ली पुलिस की संयुक्त कार्रवाई का हिस्सा था. जांच में यह भी सामने आया कि मुंबई में गिरफ्तार किए गए तौकीर शेख और अरबाज खान भी इसी नेटवर्क से जुड़े हुए थे. पुलिस के अनुसार, हमले से पहले आरोपी दिल्ली और मुंबई में कई स्थानों की रेकी कर चुके थे. मुंबई में दादर रेलवे स्टेशन, पुलों और पार्कों के वीडियो बनाए गए थे, जबकि दिल्ली में कई महत्वपूर्ण इमारतों की वीडियो रिकॉर्डिंग की गई थी. जांच एजेंसियों का मानना है कि इन वीडियो का इस्तेमाल हमलों की योजना तैयार करने में किया जाना था. About the Author Saad Omar साद बिन उमर को पत्रकारिता के क्षेत्र में 15 साल से अधिक का अनुभव है, जिनमें से 12 साल उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता को दिए है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने आज तक, एनडीटीवी, पीटीआई और नया इंडिया जैसे प्र…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi पुलिस का दावा है कि पूछताछ में यह भी सामने आया कि हथियारों और विस्फोटकों की खेप ड्रोन के जरिए भारत में पहुंचाई गई थी. इससे यह संकेत मिला कि ISI और अंडरवर्ल्ड नेटवर्क हमले की तैयारियां लगभग पूरी कर चुके थे. स्पेशल सेल की जांच में चार मुख्य हैंडलर्स के नाम सामने आए हैं. इनमें मुन्ना झिंगाड़ा, दिलावर खान, शाहजाद भट्टी और आमिर जट्ट शामिल हैं. ये सभी इस नेटवर्क को संचालित कर रहे थे और भारत में मौजूद अपने गुर्गों को निर्देश दे रहे थे. स्पेशल सेल के विशेष पुलिस आयुक्त अनिल शुक्ला के अनुसार, यह ऑपरेशन खुफिया एजेंसियों और दिल्ली पुलिस की संयुक्त कार्रवाई का हिस्सा था. जांच में यह भी सामने आया कि मुंबई में गिरफ्तार किए गए तौकीर शेख और अरबाज खान भी इसी नेटवर्क से जुड़े हुए थे. पुलिस के अनुसार, हमले से पहले आरोपी दिल्ली और मुंबई में कई स्थानों की रेकी कर चुके थे. मुंबई में दादर रेलवे स्टेशन, पुलों और पार्कों के वीडियो बनाए गए थे, जबकि दिल्ली में कई महत्वपूर्ण इमारतों की वीडियो रिकॉर्डिंग की गई थी. जांच एजेंसियों का मानना है कि इन वीडियो का इस्तेमाल हमलों की योजना तैयार करने में किया जाना था. छापेमारी के दौरान पुलिस ने चार जिंदा हैंड ग्रेनेड बरामद किए, जिन्हें बाद में एनएसजी की टीम ने सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय किया. इसके अलावा 25 कारतूस भी बरामद हुए हैं, जिनके पाकिस्तानी मूल के होने की आशंका जताई जा रही है. एक ग्लॉक पिस्तौल भी जब्त की गई है. जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि 66 वर्षीय नेपाली नागरिक मुन्ना झिंगाड़ा का अंडरवर्ल्ड से पुराना संबंध रहा है. उस पर दाऊद इब्राहिम के इशारे पर साल 2000 में बैंकॉक में गैंगस्टर छोटा राजन पर हमला करने का आरोप है. वह थाईलैंड की जेल में 17 साल सजा काट चुका है और बाद में पाकिस्तान भाग गया था. फिलहाल उसके कराची में होने की जानकारी सामने आई है. दिल्ली पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है. जांच एजेंसियां अब आरोपियों के देश और विदेश में मौजूद संपर्कों, फंडिंग नेटवर्क, अंडरवर्ल्ड कनेक्शन और ISI से जुड़े लिंक की गहन जांच कर रही हैं. पुलिस को आशंका है कि इस नेटवर्क से जुड़े कुछ अन्य लोग अभी भी फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है. खबरें पढ़ने का बेहतरीन अनुभव QR स्कैन करें, डाउनलोड करें News18 ऐप या वेबसाइट पर जारी रखने के लिए यहां क्लिक करें login Source link

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Abhishek Banerjee Attack news | bengal politic | अभिषेक बनर्जी पर हमले...

होमताजा खबरwest bengalKolkata हेलमेट नहीं होता तो क्या अभिषेक की जान चली जाती? ममता को अब राहुल लगने अच्छे! Last Updated:May 31, 2026, 12:58 IST Abhishek Banerjee Attack Latest News: पश्चिम बंगाल के सोनारपुर में टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले के बाद पिछले 24 घंटों में बंगाल से लेकर दिल्ली तक की सियासत में भूचाल आ चुका है. राहुल गांधी और अखिलेश य…और पढ़ें अभिषेक बनर्जी पर हमला के बाद सुवेंदु सरकार पर हो रहा है चौतरफा हमला. कोलकाता/नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल के सोनारपुर में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले के बाद पिछले 20-24 घंटों के भीतर पूरे देश की राजनीति में एक बड़ा उबाल आ गया है. इस घटना ने बंगाल के उस हिंसक इतिहास की यादें ताजा कर दी हैं, जब ठीक दो-तीन दशक पहले वामपंथी शासन के दौरान तत्कालीन युवा नेता ममता बनर्जी पर जानलेवा हमले हुए थे. राजनीतिक गलियारों में अब यह गंभीर सवाल तैर रहा है कि ‘अगर अभिषेक बनर्जी ने समय रहते हेलमेट नहीं पहना होता, तो क्या उनकी जान चली जाती?’ इस घटना के बाद से टीएमसी समर्थकों में भारी आक्रोश है, वहीं राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बंगाल की कानून-व्यवस्था को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है. राहुल गांधी और अखिलेश यादव ने केंद्र व राज्य सरकार को घेरा अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले के तुरंत बाद ‘इंडिया’ गठबंधन के शीर्ष नेताओं ने सुवेंदु अधिकारी की सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. राहुल गांधी का बयान: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है. राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा, “लोकतंत्र में हिंसा का कोई स्थान नहीं है. विपक्ष के एक प्रमुख युवा सांसद पर सरेआम इस तरह का हिंसक हमला बेहद चिंताजनक है. राज्य प्रशासन को राजनीतिक प्रतिशोध से ऊपर उठकर तुरंत दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए और विपक्ष के नेताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए.” अखिलेश यादव का तीखा हमला: समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने इसे एक गहरी राजनीतिक साजिश करार दिया. उन्होंने कहा, “यह हमला केवल अभिषेक बनर्जी पर नहीं, बल्कि बंगाल की लोकतांत्रिक चेतना पर है. जब सरकारी एजेंसियां ED, CBI किसी को झुका नहीं पातीं, तो इस तरह की हिंसक ताकतों को आगे कर दिया जाता है. यह बेहद निंदनीय है और देश की जनता इस तानाशाही को देख रही है.” क्या बंगाल में टीएमसी नेताओं पर जानबूझकर हो रहे हैं हमले? सोनारपुर की घटना के बाद यह नैरेटिव तेजी से मजबूत हो रहा है कि राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद टीएमसी नेताओं को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है. टीएमसी प्रवक्ता कुणाल घोष और खुद ममता बनर्जी ने इसे सुवेंदु सरकार की शह पर रची गई एक ‘पूर्व-नियोजित साजिश’ बताया है. टीएमसी का आरोप है कि पुलिस और स्थानीय प्रशासन मूकदर्शक बने रहे, जिससे उग्र भीड़ को सांसद के बिल्कुल करीब जाने और उनके कपड़े फाड़ने का मौका मिल गया. बीजेपी ने हमले पर क्या कहा? इसके विपरीत, सत्तारूढ़ भाजपा का तर्क है कि यह कोई प्रायोजित हमला नहीं था, बल्कि पिछले 15 वर्षों के सिंडिकेट राज, कट-मनी और भ्रष्टाचार के खिलाफ स्थानीय जनता का आक्रोश था, जो अब सड़कों पर फूट रहा है. संसद से सड़क तक प्रदर्शन की तैयारी: दिल्ली में टीएमसी के सांसदों ने इस घटना के खिलाफ संसद परिसर में गांधी प्रतिमा के सामने बड़े विरोध प्रदर्शन की रूपरेखा तैयार की है. विपक्षी दल इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने जा रहे हैं. इंटरनेशनल मीडिया की नजर: बीबीसी, अल जज़ीरा और अन्य अंतरराष्ट्रीय समाचार माध्यमों ने बंगाल की इस घटना को ‘भारत के एक प्रमुख राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद बढ़ती राजनीतिक अस्थिरता और हिंसा’ के रूप में रिपोर्ट किया है. विदेशी विश्लेषकों का मानना है कि यदि बंगाल में इस तरह की राजनीतिक हिंसा नहीं थमी, तो इसका सीधा असर राज्य में आने वाले औद्योगिक निवेश पर पड़ेगा. मानवाधिकार संगठनों की चिंता: कई नागरिक अधिकार और मानवाधिकार संगठनों ने बंगाल के बदलते राजनीतिक परिदृश्य पर चिंता जताते हुए दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने और लोकतंत्र की मर्यादा का पालन करने की अपील की है. अभिषेक बनर्जी फिलहाल कोलकाता के अपोलो अस्पताल में उपचाराधीन हैं, जहां उनकी सुरक्षा को ‘जेड प्लस’ (Z+) स्तर तक बढ़ा दिया गया है. लेकिन पिछले 24 घंटों का यह घटनाक्रम साफ इशारा कर रहा है कि बंगाल की राजनीति एक बार फिर उसी पुराने दौर में लौट रही है, जहां सत्ता और विपक्ष का फैसला अब बैलेट बॉक्स के साथ-साथ सड़कों पर पत्थरों, अंडों और लाठियों से होने लगा है. Abhishek Banerjee Attack Row : ‘अभिषेक को एडमिट न करने के लिए डॉक्टरों को दी जा रही थी धमकी’: ममता बनर्जी का सुवेंदु सरकार पर बेहद सनसनीखेज आरोप! Abhishek Banerjee Attack Row : अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले के बाद राज्य की राजनीति अब एक बेहद खतरनाक और अप्रत्याशित मोड़ पर पहुंच गई है। घायल अभिषेक बनर्जी से मुलाकात करने कल शाम कोलकाता के अपोलो अस्पताल पहुंचीं पूर्व मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की सरकार और भारतीय जनता पार्टी के नेताओं पर बेहद सनसनीखेज और गंभीर आरोप लगाए थे. आज ममता के आरोप पर देश के अलग-अलग पार्टियों के नेताओं का रिक्शन आना शुरू हो गया है. पहले सुनें कल ममता ने बंगाल के सुवेंदु सरकार में क्या-क्या आरोप लगाए थे. VIDEO | Kolkata: Reacting to the attack on TMC MP Abhishek Banerjee, Former West Bengal Chief Minister Mamata Banerjee says, “When I was sitting with Mr Tandon, the administrator of the hospital, he was requesting me because he was allegedly receiving threat calls from the police… pic.twitter.com/RZpk2XSEMW — Press Trust of India (@PTI_News) May 30, 2026 Location : Kolkata,West Bengal Source link

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Kalyan Banerjee Attacked | अभिषेक बनर्जी के बाद टीएमसी के एक और...

होमताजा खबरदेश अभिषेक बनर्जी के बाद TMC के एक और बड़े नेता पर हमला, कल्याण बनर्जी से मारपीट Last Updated:May 31, 2026, 11:55 IST Kalyan Banerjee Attacked: टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी के साथ हुगली जिले में कथित तौर पर मारपीट की गई. प्रदर्शनकारियों ने उन्हें काले झंडे दिखाए और उनके खिलाफ नारेबाजी की. आरोप है कि इसी दौरान स्थिति अचानक तनावपूर्ण हो गई और सांसद के साथ धक्का-मुक्की तथा मारपीट की गई. ख़बरें फटाफट पश्चिम बंगाल में सियासी तनाव के बीच तृणमूल कांग्रेस (TMC) के एक और वरिष्ठ नेता पर हमले की खबर सामने आई है. टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी के साथ हुगली जिले में कथित तौर पर मारपीट की गई. घटना उस समय हुई जब वह चंडीतला थाने में एक प्रतिनिधिमंडल के साथ ज्ञापन सौंपने जा रहे थे. प्राप्त जानकारी के मुताबिक, रास्ते में कुछ प्रदर्शनकारियों ने कल्याण बनर्जी का विरोध किया. प्रदर्शनकारियों ने उन्हें काले झंडे दिखाए और उनके खिलाफ नारेबाजी की. आरोप है कि इसी दौरान स्थिति अचानक तनावपूर्ण हो गई और सांसद के साथ धक्का-मुक्की तथा मारपीट की गई. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, विरोध प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने कल्याण बनर्जी को घेर लिया, जिसके बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया. घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और सुरक्षा कर्मियों ने हस्तक्षेप कर हालात को नियंत्रित किया. यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब शनिवार को ही में तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी के साथ मारपीट की घटना सामने आई थी. अब पार्टी के एक और बड़े चेहरे कल्याण बनर्जी पर हुए हमले ने राज्य की राजनीति का तापमान बढ़ा दिया है. टीएमसी नेताओं ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला बताया है. वहीं पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गई है और घटना से जुड़े वीडियो फुटेज व अन्य साक्ष्यों की पड़ताल की जा रही है. यह ख़बर बिल्कुल अभी आई है और इसे सबसे पहले आप News18Hindi पर पढ़ रहे हैं. जैसे-जैसे जानकारी मिल रही है, हम इसे अपडेट कर रहे हैं. ज्यादा बेहतर एक्सपीरिएंस के लिए आप इस खबर को रीफ्रेश करते रहें, ताकि सभी अपडेट आपको तुरंत मिल सकें. आप हमारे साथ बने रहिए और पाइए हर सही ख़बर, सबसे पहले सिर्फ Hindi.News18.com पर… About the Author Saad Omar साद बिन उमर को पत्रकारिता के क्षेत्र में 15 साल से अधिक का अनुभव है, जिनमें से 12 साल उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता को दिए है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने आज तक, एनडीटीवी, पीटीआई और नया इंडिया जैसे प्र…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Source link

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IAS Officers LBSNAA Training: LBSNAA में ट्रेनिंग, JNU से डिग्री, पोस्टिंग से...

Last Updated:May 31, 2026, 10:51 IST IAS Officers LBSNAA Training: क्या आप जानते हैं कि मसूरी में स्थित LBSNAA में कठिन ट्रेनिंग पूरी करने के बाद देश के आईएएस अफसरों को एक खास मास्टर डिग्री भी मिलती है? यह डिग्री दिल्ली की मशहूर जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) देती है. जानिए इसका नियम. IAS Officers LBSNAA Training: आईएएस अफसरों को जेएनयू का डिग्री कोर्स भी पूरा करना होता है नई दिल्ली (IAS Officers LBSNAA Training). संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक है. इसे पास करने के बाद देश के होनहार युवा मसूरी स्थित ‘लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी’ (LBSNAA) में ट्रेनिंग लेते हैं. यहां अफसरों को देश चलाने के तौर-तरीके, कानून और प्रशासनिक बारीकियां सिखाई जाती हैं. क्या आप जानते हैं कि 2 साल की बेहद कठिन ट्रेनिंग को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद आईएएस अफसरों को बाकायदा ‘मास्टर्स डिग्री’ भी मिलती है? पहाड़ों की रानी मसूरी में होने वाली आईएएस ट्रेनिंग की डिग्री का कनेक्शन देश की सबसे चर्चित और प्रतिष्ठित दिल्ली की ‘जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी’ (JNU) से है. एलबीएसएनएए (LBSNAA) से पास आउट होने वाले हर डायरेक्ट रिक्रूट आईएएस अधिकारी को जेएनयू की तरफ से खास पोस्ट ग्रेजुएशन डिग्री दी जाती है. जानिए आईएएस अधिकारियों को ट्रेनिंग के बाद कौन सी डिग्री दी जाती है और क्यों. सबसे रोचक बात है कि यह डिग्री आईपीएस या आईएफएस अधिकारी को नहीं मिलती है. आईएएस अधिकारी को कौन सी डिग्री मिलती है? मसूरी स्थित LBSNAA में 2 साल की इंडक्शन ट्रेनिंग पूरी करने के बाद आईएएस ऑफिसर ट्रेनीज को जेएनयू की एमए इन पब्लिक मैनेजमेंट की डिग्री दी जाती है. इस व्यवस्था की शुरुआत साल 2015 में जेएनयू की एग्जीक्यूटिव काउंसिल की मंजूरी के बाद हुई थी. इसका मकसद था कि सभी आईएएस अधिकारी अपनी दो साल की ट्रेनिंग के दौरान जो एकेडमिक और प्रैक्टिकल नॉलेज हासिल करते हैं, उसे ग्लोबल और शैक्षणिक मान्यता मिल सके. जेएनयू का ’64 क्रेडिट’ वाला फॉर्मूला जेएनयू की यह डिग्री पाना इतना आसान भी नहीं है. इसके लिए बकायदा कॉलेज की तरह पढ़ाई और परीक्षाएं देनी होती हैं. जेएनयू के नियमित कोर्सेस की तरह ही इस प्रोग्राम को भी 64 क्रेडिट्स में बांटा गया है, जो चार अलग-अलग सेमेस्टर्स में फैले होते हैं. पहला सेमेस्टर (16 क्रेडिट): इसमें फाउंडेशन कोर्स के दौरान थ्योरी, लॉ और इकोनॉमिक्स की बुनियादी बातें सिखाई जाती हैं. दूसरा सेमेस्टर (20 क्रेडिट): इसमें प्रशासनिक बारीकियां और भारत दर्शन (Winter Study Tour) शामिल होता है. तीसरा सेमेस्टर (12 क्रेडिट): यह सबसे अहम है, जो एक साल की ‘डिस्ट्रिक्ट ट्रेनिंग’ (फील्ड पोस्टिंग) के दौरान पूरा होता है. चौथा सेमेस्टर (16 क्रेडिट): ट्रेनिंग के आखिरी फेज-2 में जब अफसर वापस एकेडमी लौटते हैं तो अपने प्रैक्टिकल अनुभवों पर रिसर्च पेपर सौंपते हैं, जिसके बाद यह कोर्स पूरा होता है. सिर्फ IAS अफसर को ही डिग्री क्यों दी जाती है? LBSNAA के ‘फाउंडेशन कोर्स’ में आईएएस के साथ-साथ आईपीएस (IPS) और आईएफएस (IFS) जैसी अन्य सेवाओं के अधिकारी भी हिस्सा लेते हैं. लेकिन दो साल की ‘एमए इन पब्लिक मैनेजमेंट’ की डिग्री सिर्फ और सिर्फ आईएएस कैडर के अधिकारियों के लिए ही आरक्षित है. इसका कारण है कि अन्य सेवाओं के अधिकारी शुरुआती कुछ हफ्तों के बाद अपने-अपने स्टाफ कॉलेजों (जैसे हैदराबाद की पुलिस अकादमी) में चले जाते हैं, जबकि आईएएस अधिकारी पूरे 2 साल तक इस सैंडविच पैटर्न वाले कोर्स का हिस्सा बने रहते हैं. जेएनयू ही क्यों देता है यह डिग्री? जेएनयू का देश के कई प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ पुराना नाता है. उदाहरण के लिए, नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA), इंडियन मिलिट्री एकेडमी (IMA) और काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (CSIR) के तहत होने वाली कई ट्रेनिंग और कोर्सेस को भी जेएनयू ही एकेडमिक मान्यता और डिग्रियां देता है. इसी कड़ी में देश के नीति-निर्माताओं यानी आईएएस को भी इसके तहत जोड़ा गया है. तो अगली बार जब आप किसी आईएएस अफसर को देखें तो समझ जाएं कि वह सिर्फ सिविल सेवा परीक्षा पास करके नहीं आया, बल्कि वह पब्लिक मैनेजमेंट का क्वॉलिफाइड मास्टर भी है! About the Author Deepali PorwalSenior Sub Editor Deepali Porwal is a seasoned bilingual journalist with 11 years of experience in the media industry. She currently works with News18 Hindi, focusing on the Education and Career desk. She is known for her versat…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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…जब सिद्दारमैया से मात खा गए मल्लिकार्जुन खरगे, 3 बार खंड-खंड हुआ...

Siddaramaiah Vs Mallikarjun Kharge in Karnataka Politics: कर्नाटक की राजनीति में कई ऐसे मोड़ आए हैं, जिसने राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तक बदल दी. ऐसा ही एक मोड़ था 2013 का विधानसभा चुनाव, जब कांग्रेस की सत्ता में वापसी के साथ मुख्यमंत्री पद की लड़ाई ने दो बड़े नेताओं- सिद्दारमैया और मल्लिकार्जुन खरगे को आमने-सामने ला खड़ा किया. यह सिर्फ दो नेताओं के बीच की प्रतिस्पर्धा नहीं थी, बल्कि कांग्रेस के भीतर बदलते सामाजिक समीकरणों, संगठनात्मक रणनीति और सोनिया गांधी के नेतृत्व में लिए गए राजनीतिक फैसलों की कहानी भी थी. इसी लड़ाई ने एक ओर सिद्दारमैया को कर्नाटक का सबसे प्रभावशाली नेता बना दिया, तो दूसरी ओर मल्लिकार्जुन खरगे का मुख्यमंत्री बनने का सपना एक बार फिर अधूरा रह गया. कांग्रेस में सिद्दारमैया की एंट्री: अहमद पटेल का मास्टरस्ट्रोक सिद्दारमैया मूल रूप से जनता दल परिवार की राजनीति से निकले नेता थे. वे एचडी देवेगौड़ा के करीबी माने जाते थे और जनता दल (सेक्युलर) में तेजी से उभरे थे. लेकिन 2005-06 में देवेगौड़ा परिवार के साथ उनका टकराव बढ़ गया. अंततः उन्हें जेडी (एस) से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया. पार्टी से निष्कासन के बाद सिद्दारमैया ने ऑल इंडिया प्रोग्रेसिव जनता दल (AIPJD) नाम से अलग राजनीतिक मंच बनाने की कोशिश की, लेकिन स्थानीय निकाय चुनावों में अपेक्षित सफलता नहीं मिली. यहीं से उन्हें एहसास हुआ कि क्षेत्रीय दल के सहारे राजनीतिक भविष्य सुरक्षित करना आसान नहीं होगा. इसी दौरान उन्होंने दिल्ली में कांग्रेस नेतृत्व से संपर्क साधा. इस पूरी प्रक्रिया के सूत्रधार थे सोनिया गांधी के सबसे भरोसेमंद रणनीतिकार अहमद पटेल. उन्होंने सिद्दारमैया की राजनीतिक उपयोगिता को समझा. खासकर पिछड़े वर्ग, दलितों और अल्पसंख्यकों के बीच उनकी पकड़ को देखते हुए कांग्रेस नेतृत्व को लगा कि कर्नाटक में भाजपा और जेडी(एस) के खिलाफ एक बड़ा सामाजिक गठबंधन तैयार किया जा सकता है. अहमद पटेल ने सिद्दारमैया की मुलाकात सोनिया गांधी से कराई. वरिष्ठ नेता एके एंटनी को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया गया. अंततः 2006 में बेंगलुरु में आयोजित एक बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम में सोनिया गांधी ने स्वयं सिद्दारमैया का कांग्रेस में स्वागत किया. यह सिर्फ एक राजनीतिक कदम नहीं था, बल्कि कांग्रेस की भविष्य की रणनीति का हिस्सा था. कांग्रेस में तेजी से बढ़ता कद कांग्रेस में आने के बाद सिद्दारमैया ने खुद को केवल एक पूर्व जेडी(एस) नेता तक सीमित नहीं रखा. उन्होंने अपने पुराने सामाजिक आधार को कांग्रेस के साथ जोड़ना शुरू किया. उनका सबसे बड़ा राजनीतिक हथियार था अहिंदा फार्मूला. यानी अल्पसंख्यक, पिछड़ा वर्ग और दलित. यही वह सामाजिक गठबंधन था जिसने उन्हें कांग्रेस के पारंपरिक नेताओं से अलग पहचान दी. धीरे-धीरे वे राज्य में कांग्रेस के सबसे लोकप्रिय जननेता बन गए. विपक्ष में रहते हुए उन्होंने भाजपा सरकारों के खिलाफ आक्रामक अभियान चलाया और जनता के बीच अपनी स्वीकार्यता बढ़ाई. इस दौरान कांग्रेस में कई दिग्गज नेता मौजूद थे- मल्लिकार्जुन खरगे, जी. परमेश्वर, डी.के. शिवकुमार और अन्य वरिष्ठ चेहरे. लेकिन जनाधार और जनसभाओं में भीड़ जुटाने की क्षमता के मामले में सिद्दारमैया लगातार आगे निकलते गए. 2013: मुख्यमंत्री पद की निर्णायक लड़ाई 2013 का विधानसभा चुनाव कांग्रेस के लिए बेहद महत्वपूर्ण था. भाजपा आंतरिक कलह से जूझ रही थी और कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत मिला. लेकिन जीत के बाद सबसे बड़ा सवाल था- मुख्यमंत्री कौन बनेगा? मुख्यमंत्री पद की दौड़ में मुख्य रूप से तीन नाम थे- मल्लिकार्जुन खरगे, जी. परमेश्वर और सिद्दारमैया. खरगे उस समय कांग्रेस के सबसे वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते थे. वे पहले भी कई बार मुख्यमंत्री पद के करीब पहुंचे थे. 1999 में कांग्रेस की जीत के बाद उन्हें मौका नहीं मिला और एसएम कृष्णा मुख्यमंत्री बने. 2004 में भी वे मजबूत दावेदार थे, लेकिन समझौते के उम्मीदवार के रूप में एन. धरम सिंह को चुना गया. 2013 में उन्हें लगा कि तीसरी बार शायद किस्मत उनका साथ देगी. लेकिन राजनीतिक समीकरण बदल चुके थे. सिद्दारमैया के पक्ष में सबसे बड़ी ताकत थी विधायकों का समर्थन. कांग्रेस विधायक दल के भीतर उनका प्रभाव लगातार बढ़ा था. माना जाता है कि केंद्रीय नेतृत्व के स्तर पर हुई रायशुमारी और आंतरिक मतदान में भी उन्हें बढ़त मिली. सोनिया गांधी और कांग्रेस हाईकमान के सामने यह साफ था कि चुनावी जीत में सिद्दारमैया की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है. अंततः मुख्यमंत्री पद की बाजी सिद्दारमैया के नाम रही और खरगे एक बार फिर पीछे रह गए. खरगे को दिल्ली भेजने की रणनीति 2013 का फैसला केवल मुख्यमंत्री चुनने का मामला नहीं था. कांग्रेस नेतृत्व को यह भी पता था कि मल्लिकार्जुन खरगे जैसे वरिष्ठ दलित नेता को पूरी तरह नजरअंदाज करना राजनीतिक रूप से नुकसानदेह हो सकता है. यही कारण था कि धीरे-धीरे खरगे को राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी भूमिका दी गई. 2014 में वह अपनी कुलबर्गी सीट से जीतकर लोकसभा पहुंचे. उन्हें लोकसभा में कांग्रेस का नेता बनाया गया. बाद में वे राज्यसभा पहुंचे, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने और आज पार्टी संगठन के सर्वोच्च पद पर हैं. एक तरह से कहा जाए तो 2013 में मुख्यमंत्री पद गंवाने वाले खरगे को कांग्रेस ने राष्ट्रीय राजनीति में उससे भी बड़ी भूमिका देकर संतुलन साधने की कोशिश की. सोनिया गांधी की निर्णायक भूमिका पूरे घटनाक्रम में सोनिया गांधी की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रही. सिद्दारमैया को कांग्रेस में लाने से लेकर उन्हें मुख्यमंत्री बनाने तक हर चरण में हाईकमान की मंजूरी निर्णायक रही. सोनिया गांधी ने 2006 में सिद्दारमैया के प्रवेश को केवल एक नेता की भर्ती के रूप में नहीं देखा, बल्कि उसे कर्नाटक में कांग्रेस के सामाजिक विस्तार की रणनीति का हिस्सा बनाया. बाद के वर्षों में जब सिद्दारमैया ने अपनी उपयोगिता साबित कर दी, तब उन्हें मुख्यमंत्री बनाने का फैसला भी उसी रणनीतिक सोच का परिणाम था. यानी सिद्दारमैया का कांग्रेस में उभार केवल व्यक्तिगत करिश्मे की कहानी नहीं, बल्कि सोनिया गांधी और अहमद पटेल की दीर्घकालिक राजनीतिक योजना की सफलता भी था. अब विदाई की ओर बढ़ते सिद्दारमैया? वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन हो रहा है. सिद्दारमैया सीएम पद छोड़ चुके हैं. अब सीएम की कुर्सी पर डीके शिवकुमार की ताजपोशी होने जा रही है. हालांकि सिद्दारमैया की लोकप्रियता अब भी बरकरार है, लेकिन पार्टी के भीतर नई पीढ़ी और अन्य नेताओं की दावेदारी भी मजबूत हुई है. सिद्दारमैया को कांग्रेस में

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लाखों-करोड़ों दिल्‍लीवालों की मनचाही मुराद पूरी, 230 दिनों के बाद आई खुशखबरी...

होमताजा खबरDelhi लाखों-करोड़ों दिल्‍लीवालों की मनचाही मुराद पूरी, 230 दिनों के बाद आई खुशखबरी Last Updated:May 31, 2026, 08:41 IST Delhi AQI Report: दिल्‍ली-एनसीआर के साथ ही देश के अन्‍य हिस्‍सों में नौतपा के दौरान मौसम का अलग ही तेवर देखने को मिला है. तेज हवा के साथ बारिश की वजह से तापमान में उल्‍लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है. वहीं, दिल्‍ली में वायु प्रदूषण से लोगों को फौरी राहत मिली है. मौसम विज्ञानियों का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने की वजह से वेदर में इस तरह का बदलाव हुआ है. देश की राजधानी में बारिश और तेज हवा ने वायु प्रदूषण को काफी कम कर दिया है, जिससे लाखों-करोड़ों दिल्‍लीवालों ने राहत की सांस ली है. (फोटो: PTI) Delhi AQI Report: देशभर में इन दिनों नौतपा का दौर चल रहा है. यानी भीषण गर्मी का समय. ऐसे वक्‍त में देश के विभिन्‍न हिस्‍सों में मौसम ने गजब तरीके से करवट बदला है. बंगाल की खाड़ी से लेकर अरब सागर के तटवर्ती इलाकों के साथ ही बिहार, उत्‍तर प्रदेश, दिल्‍ली-एनसीआर समेत अनेक हिस्‍सों में अलग-अलग मौसमी दशाओं की वजह से आंधी-तूफान के साथ बारिश हो रही है. मौसम विभाग ने आने वाले एक-दो दिन तक मौसम का यही रुख रहने का पूर्वानुमान जताया है. दिल्‍ली में भी तेज हवा के साथ बारिश हुई है, जिससे तापमान में 8 से 9 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई है. पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव के चलते तेज हवा के साथ हुई बारिश का एक और सुखद परिणाम सामने आया है. दिल्‍लीवालों ने 230 दिनों के बाद सबसे साफ और स्‍वच्‍छ हवा में सांस लिया. मई की भीषण गर्मी और नौतपा की तल्‍खी से जूझ रही दिल्ली को लगातार दूसरे दिन मौसम ने बड़ी राहत दी. शनिवार को राजधानी में तेज हवाएं, बादल और हल्की बारिश दर्ज की गई, जिसके चलते तापमान सामान्य से काफी नीचे रहा. मौसम में आए इस बदलाव का असर केवल गर्मी पर ही नहीं बल्कि वायु गुणवत्ता पर भी दिखाई दिया. बारिश और तेज हवाओं के कारण दिल्ली ने पिछले 230 दिनों में सबसे स्वच्छ हवा का दिन दर्ज किया. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार शनिवार को दिल्ली का अधिकतम तापमान 37.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से तीन डिग्री से अधिक कम रहा. वहीं, न्यूनतम तापमान 24.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया. मौसम विभाग का अनुमान है कि रविवार को भी अधिकतम तापमान 36 से 38 डिग्री सेल्सियस के बीच रहेगा. AQI में सुधार राजधानी का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) शनिवार को गिरकर 85 पर पहुंच गया, जो संतोषजनक श्रेणी में आता है. यह 8 अक्टूबर के बाद सबसे कम AQI है. उस समय यह 80 दर्ज किया गया था. मई महीने में यह चौथा अवसर है, जब दिल्ली की हवा संतोषजनक कैटेगरी में रही. इससे पहले 4, 5 और 8 मई को AQI 88, 86 और 100 दर्ज किया गया था. शनिवार सुबह IMD ने बारिश और तेज हवाओं को लेकर येलो अलर्ट जारी किया था. दोपहर 2:30 बजे से शाम 5:30 बजे के बीच शहर के विभिन्न हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हुई. मयूर विहार में सबसे अधिक 4 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जबकि लोधी रोड में 3.8 मिमी और सफदरजंग में 0.9 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई. इसके अलावा पीतमपुरा, पूसा, रिज और अयानगर में भी हल्की वर्षा हुई. 230 दिन के लंबे इंतजार के बाद दिल्‍ली का AQI 85 रिकॉर्ड किया गया है. हालांकि, बारिश की वजह से यातायात पर भी असर पड़ा. (फोटो: PTI) मौसम का बदला तेवर शाम 4:17 बजे मौसम विभाग ने उत्तर दिल्ली, उत्तर-पश्चिम दिल्ली और पश्चिमी क्षेत्रों के लिए रेड अलर्ट जारी किया. इस दौरान 60 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और आंधी-तूफान की चेतावनी दी गई. नोएडा सहित एनसीआर के कई इलाकों में भी बिजली गिरने, तेज हवाओं और बारिश को लेकर फ्लैश अलर्ट जारी किया गया. मौसम के प्रतिकूल प्रभाव का असर हवाई यातायात पर भी पड़ा. खराब मौसम के कारण इंदौर, लेह और बेंगलुरु से दिल्ली आने वाली तीन उड़ानों को लखनऊ की ओर डायवर्ट करना पड़ा. सोमवार से फिर झुलसाने वाली गर्मी यह राहत लंबे समय तक नहीं रहने वाली है. IMD के अनुसार, सोमवार 1 जून 2026 से तापमान में धीरे-धीरे वृद्धि शुरू होगी और 4 जून तक अधिकतम तापमान 40 से 42 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है. मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि जून के दौरान कभी-कभार लू की स्थिति बन सकती है, लेकिन प्री-मानसून गतिविधियों के चलते बीच-बीच में बारिश और गरज-चमक के साथ तूफान आते रहेंगे, जिससे लोगों को गर्मी से अस्थायी राहत मिलती रहेगी. About the Author Manish Kumar बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Source link

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