भारतन्यूज़ – टॉप हेडर
News Menu Bar

ताज़ा खबर

ताज़ा खबर

रणदीप सुरजेवाला की अग्नि परीक्षा, कर्नाटक संकट से उबरेगी कांग्रेस या फिर...

Karnataka Congress Crisis: कर्नाटक कांग्रेस एक बार फिर सत्ता से ज्यादा अंदरूनी सियासत को लेकर चर्चा में है. राज्य में मुख्यमंत्री बदलने की अटकलों के बीच पार्टी नेतृत्व पर दबाव बढ़ता जा रहा है. चर्चा है कि कांग्रेस हाईकमान अब सिद्दारमैया की जगह डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंपने की तैयारी कर रहा है. इसी मुद्दे पर दिल्ली में कांग्रेस नेतृत्व के साथ अहम बैठक चल रही है, जिसमें दोनों दिग्गज नेता मौजूद हैं. लेकिन इस पूरी कवायद के केंद्र में एक और चेहरा है. वो हैं रणदीप सिंह सुरजेवावला. कर्नाटक कांग्रेस के प्रभारी के तौर पर सुरजेवाला पिछले कई महीनों से सिद्दारमैया और डीके शिवकुमार गुट के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं. अब जबकि नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा तेज है, उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि सत्ता परिवर्तन हो भी जाए तो पार्टी टूटे नहीं और सरकार स्थिर बनी रहे. दरअसल, 2023 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद ही मुख्यमंत्री पद को लेकर खींचतान सामने आ गई थी. सिद्दारमैया और डीके शिवकुमार दोनों ही मुख्यमंत्री बनना चाहते थे. आखिरकार हाईकमान ने समझौते का रास्ता निकाला और सिद्दारमैया को मुख्यमंत्री, जबकि डीके शिवकुमार को डिप्टी सीएम बनाया गया. उसी समय यह चर्चा भी चली थी कि ढाई-ढाई साल का फॉर्मूला लागू हो सकता है, हालांकि पार्टी ने कभी आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की. सरकार के कार्यकाल का आधा से अधिक समय पूरा अब सरकार के कार्यकाल का आधा से अधिक समय पूरा हो गया है तो एक बार फिर सत्ता परिवर्तन की चर्चा ने जोर पकड़ लिया है. डीके शिवकुमार समर्थक खुलकर यह दावा कर रहे हैं कि अब वादा निभाने का समय आ गया है. दूसरी तरफ सिद्दारमैया खेमे का मानना है कि उनकी लोकप्रियता और प्रशासनिक पकड़ अभी भी कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा आधार है. ऐसे में उन्हें हटाना राजनीतिक जोखिम साबित हो सकता है. यहीं से रणदीप सुरजेवाला की असली परीक्षा शुरू होती है. अगर वह दोनों गुटों को संतुष्ट रखते हुए नेतृत्व परिवर्तन कराने में सफल हो जाते हैं, तो यह उनकी बड़ी राजनीतिक उपलब्धि मानी जाएगी. इससे यह संदेश भी जाएगा कि कांग्रेस हाईकमान अब भी राज्यों में संगठन और सत्ता दोनों पर नियंत्रण बनाए रखने में सक्षम है. लेकिन अगर मामला बिगड़ता है, तो इसके दूरगामी असर हो सकते हैं. सिद्दारमैया केवल एक मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि कर्नाटक में कांग्रेस का सबसे बड़ा जनाधार रखने वाले नेता माने जाते हैं. विशेष रूप से ओबीसी, अल्पसंख्यक और ग्रामीण वोट बैंक पर उनकी मजबूत पकड़ है. अगर उन्हें अपमानजनक तरीके से हटाया गया या उनकी सहमति के बिना फैसला लिया गया, तो पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ सकता है. शिवकुमार भी कांग्रेस के लिए बेहद अहम दूसरी तरफ डीके शिवकुमार भी कांग्रेस के लिए बेहद अहम हैं. संगठन को मजबूत करने, संसाधन जुटाने और चुनावी रणनीति तैयार करने में उनकी भूमिका निर्णायक रही है. कांग्रेस की 2023 की जीत में उनकी मेहनत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. ऐसे में अगर उन्हें फिर इंतजार करने को कहा गया, तो उनके समर्थकों में नाराजगी बढ़ना तय माना जा रहा है. कांग्रेस की सबसे बड़ी चिंता यह है कि कहीं यह नेतृत्व परिवर्तन राजस्थान जैसी स्थिति न पैदा कर दे, जहां सत्ता और संगठन की लड़ाई लंबे समय तक पार्टी को नुकसान पहुंचाती रही. पार्टी हाईकमान इस बार कोई खुला टकराव नहीं चाहता. इसलिए सुरजेवाला लगातार दोनों नेताओं से संवाद बनाए हुए हैं. असल चुनौती केवल मुख्यमंत्री बदलने की नहीं, बल्कि सत्ता संतुलन बनाए रखने की है. कांग्रेस जानती है कि कर्नाटक फिलहाल दक्षिण भारत में उसका सबसे मजबूत राज्य है. अगर यहां भी गुटबाजी खुलकर सामने आई, तो इसका असर सिर्फ राज्य तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी पार्टी की छवि प्रभावित होगी. इसलिए दिल्ली में चल रही बैठकों को केवल नेतृत्व परिवर्तन की कवायद के तौर पर नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे कांग्रेस की राजनीतिक प्रबंधन क्षमता की बड़ी परीक्षा माना जा रहा है. आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि रणदीप सुरजेवाला इस संकट को सुलझाने में सफल होते हैं या फिर कर्नाटक कांग्रेस एक नए शक्ति संघर्ष की ओर बढ़ती है. Source link

ताज़ा खबर

अब रेस कोर्स की जमीन भी होगी खाली, 150 एकड़ में फैला...

होमताजा खबरदेश अब रेस कोर्स की जमीन होगी खाली, 150 एकड़ में फैला है क्लब, HC ने दी हरी झंडी Last Updated:May 26, 2026, 11:31 IST दिल्ली हाईकोर्ट डिवीजन बेंच ने दिल्ली रेस क्लब को मिली अंतरिम राहत हटाई, केंद्र के कारण बताओ नोटिस पर रोक खत्म, अब सरकार कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ा सकेगी. दिल्ली हाईकोर्ट ने रेस कोर्स क्लब की जमीन खाली कराने का रास्ता साफ कर दिया है. Delhi Race Course Club Case: दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली रेस क्लब मामले में केंद्र सरकार को बड़ी राहत दी है. कोर्ट उस अंतरिम आदेश को रद्द कर दिया है, जिसके तहत सार्वजनिक परिसर कानून के तहत जारी कारण बताओ नोटिस पर रोक लगाई गई थी. अदालत ने केंद्र सरकार की अपील स्वीकार करते हुए अपने ही सिंगल बेंच के फैसले को पलट दिया. मामला दिल्ली रेस क्लब को केंद्र सरकार द्वारा जारी किए गए नोटिस से जुड़ा है. केंद्र ने क्लब को सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत कब्जाधारियों की बेदखली) अधिनियम के तहत कारण बताओ नोटिस जारी किया था. इस नोटिस में क्लब से पूछा गया था कि उसे संबंधित जमीन और परिसर से बेदखल क्यों न किया जाए. यह क्लब करीब 150 एकड़ जमीन में फैला हुआ है. इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने क्लब को अंतरिम राहत देते हुए नोटिस पर रोक लगा दी थी और केंद्र सरकार को तत्काल कार्रवाई से रोका था. अदालत ने उस समय कहा था कि बिना उचित कानूनी प्रक्रिया अपनाए किसी संस्थान को जबरन बेदखल नहीं किया जा सकता. हालांकि अब डिवीजन बेंच ने केंद्र सरकार की दलीलों को स्वीकार करते हुए कहा कि कारण बताओ नोटिस पर शुरुआती स्तर पर रोक लगाना उचित नहीं था. अदालत ने माना कि संबंधित प्राधिकरण को कानून के तहत अपनी प्रक्रिया पूरी करने का अधिकार है और नोटिस जारी करना केवल प्रारंभिक कार्रवाई है. जमीन की लीज काफी पहले समाप्त हो चुकी है सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार ने अदालत में कहा कि दिल्ली रेस क्लब जिस जमीन पर संचालित हो रहा है, उसकी लीज काफी पहले समाप्त हो चुकी है और क्लब का कब्जा अब वैधानिक जांच के दायरे में है. सरकार ने यह भी तर्क दिया कि सार्वजनिक संपत्ति से जुड़े मामलों में प्रशासनिक प्रक्रिया को बीच में रोकना उचित नहीं होगा. इस मामले में पहले भी हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा था कि यदि वह क्लब को हटाना चाहती है तो ड्यू प्रोसेस ऑफ लॉ यानी विधिसम्मत प्रक्रिया का पालन करना होगा. अदालत ने मार्च में केंद्र को जबरन कब्जा लेने से रोका था. दिल्ली रेस क्लब का कहना है कि वह लंबे समय से वैध रूप से परिसर का उपयोग कर रहा है और नियमित रूप से ग्राउंड रेंट का भुगतान करता रहा है. क्लब ने यह भी दलील दी थी कि उसका मामला होल्डिंग ओवर टेनेंसी के तहत आता है, इसलिए अचानक बेदखली की कार्रवाई गैरकानूनी होगी. अब डिवीजन बेंच के ताजा फैसले के बाद केंद्र सरकार को आगे की कार्रवाई करने का रास्ता साफ हो गया है. हालांकि इसका मतलब तत्काल बेदखली नहीं है, बल्कि अब संबंधित प्राधिकरण कानून के तहत सुनवाई और अन्य प्रक्रियाएं आगे बढ़ा सकेगा. दिल्ली रेस क्लब का यह मामला राजधानी के कई पुराने और प्रतिष्ठित संस्थानों से जुड़ी जमीनों और लीज विवादों के बीच अहम माना जा रहा है. हाल के महीनों में केंद्र सरकार ने कई प्रमुख क्लबों और संस्थानों की जमीनों की समीक्षा शुरू की है. About the Author संतोष कुमार न्यूज18 हिंदी में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत. मीडिया में करीब दो दशक का अनुभव. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आईएएनएस, बीबीसी, अमर उजाला, जी समूह सहित कई अन्य संस्थानों में कार्य करने का मौका मिला. माखनलाल यूनिवर्स…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

ताज़ा खबर

26 मई: पंडित नेहरू का अंतिम दिन, एक युग का मार्मिक सूर्यास्त

May 26, 1964: Jawaharlal Nehru Last Journey:  26 मई 1964. राजधानी दिल्ली की गर्म हवाएं तीन मूर्ति भवन के बगीचों में सरसराती हुईं, लेकिन उस दिन की शांति में एक अजीब-सी उदासी छाई हुई थी. पंडित जवाहरलाल नेहरू मात्र कुछ घंटे पहले देहरादून से हेलीकॉप्टर से लौटे थे. यह उनकी दिल्ली से बाहर की अंतिम यात्रा थी. वे वहां पर डॉक्टरों की सलाह पर स्वास्थ्य सुधार के लिए गए थे. उनकी उम्र 74 वर्ष हो चुकी थी. जनवरी 1964 में भुवनेश्वर कांग्रेस पार्टी के सत्र में आए गंभीर स्ट्रोक के बाद उनकी तबीयत लगातार नाजुक बनी हुई थी. शरीर थका हुआ था, लेकिन इच्छाशक्ति और देश के प्रति समर्पण अभी भी अटूट था. नेहरू जी 23 मई को स्वास्थ्य लाभ के लिए देहरादून गए थे. वे सर्किट हाउस (अब लोकभवन) में ठहरे. यह जगह उनके लिए जानी पहचानी थी. वे यहां पहले भी कई बार आराम कर चुके थे. वहां वे बगीचों में टहलते, अपने पसंदीदा किसी पेड़ के नीचे घंटों चुपचाप बैठे रहते, पक्षियों की चहचहाहट सुनते और कभी-कभी पढ़ते-लिखते. 25 मई को उन्होंने अपने पुराने मित्र और सहयोगी श्री प्रकाश, जो गवर्नर भी रहे से मुलाकात की. उनके साथ दोपहर का भोजन किया. श्री प्रकाश ने नेहरू की सेहत देखकर सलाह दी कि वे अब आराम करें, लेकिन नेहरू ने मुस्कुराते हुए इसे टाल दिया. 26 मई को विदाई के समय देहरादून के कंटोनमेंट पोलो ग्राउंड पर कुछ स्थानीय सिविल और सैन्य अधिकारी, कांग्रेस कार्यकर्ता तथा पत्रकार उपस्थित थे. जिला मजिस्ट्रेट एपी दीक्षित ने बाद में अपनी किताब अंतिम चरण में इस यात्रा का मार्मिक वर्णन किया है. दीक्षित ने नेहरू को देहरादून में और रुकने का सुझाव दिया था, लेकिन नेहरू दिल्ली लौटना चाहते थे. तीन मूर्ति भवन में कई मीटिंग की तीन मूर्ति भवन पहुंचने के बाद नेहरू ने अपनी दिनचर्या संभाली. दोपहर और शाम में कुछ राजनीतिक सहयोगी और सरकारी अधिकारी उनसे मिलने आए. मुलाकातें संक्षिप्त रहीं. देश की स्थिति और कुछ फाइलों पर चर्चा हुई. शाम को उन्होंने बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर जापान के एक बौद्ध भिक्षु को पत्र लिखा, जिसमें शांति, एशियाई एकता और मानवता के आदर्शों का उल्लेख था. यह उनका अंतिम लिखित संदेश माना जाता है. रात करीब 11:30 बजे वे सोने चले गए. सर्वप्पली गोपाल की क्लासिक कृति Jawaharlal Nehru: A Biography, Volume 3 (1956–1964) में इन अंतिम दिनों का गहरा और मार्मिक चित्रण मिलता है. गोपाल, जो उनकी जीवनी के सबसे आधिकारिक लेखक माने जाते हैं, लिखते हैं कि नेहरू स्वास्थ्य की कमजोरी के बावजूद काम कर रहे थे. गोपाल के अनुसार, 26 मई का दिन नेहरू के पूरे जीवन का प्रतीक था. वे उस दिन भी पूरी कर्मठता, संवेदनशीलता और अथक समर्पण से कामकाज करते रहे. नेहरू की तबीयत उनके अंतिम दिनों में ठीक नहीं रह रही थी. रात में नेहरू पीठ में दर्द से कई बार जागे. 27 मई की सुबह 6:25 बजे शयनकक्ष से जुड़े बाथरूम से लौटते समय एक और स्ट्रोक आया. वे बेहोश होकर गिर पड़े. घरेलू कर्मचारियों ने उन्हें खून के निशानों के साथ पाया. इंदिरा गांधी तुरंत उनके पास पहुंचीं. विलिंग्डन अस्पताल (अब राम मनोहर लोहिया अस्पताल) के डॉक्टर बुलाए गए. उनमें डॉ. आरके करौली भी थे. नेहरू को दोबारा होश में लाने के प्रयास सफल नहीं हुए. दोपहर 1:44 बजे उनका निधन हो गया. कारण: हृदयाघात, आंतरिक रक्तस्राव और पक्षाघात. यह क्षण पूरे राष्ट्र के लिए अपार दुख का था. राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने कहा, “ज्योति बुझ गई है हमारे जीवन की.” लाखों लोग तीन मूर्ति भवन पहुंचे. नेहरू का अंतिम सफर शांतिवन तक हुआ. 26 मई का दिन इसलिए विशेष रूप से मार्मिक है क्योंकि यह नेहरू की अंतिम सक्रियता का दिन था. देहरादून के शांत वातावरण से लौटकर वे थके थे, फिर भी देश की चिंता उन्हें चैन नहीं लेने दे रही थी. सर्किट हाउस की ठंडी हवाएं, श्री प्रकाश के साथ दोपहर का भोजन, कपूर के पेड़ की छांव, और अंत में तीन मूर्ति भवन की दीवारें गवाह हैं उस अंतिम दिन के. 1962 का चीन युद्ध उन्हें तोड़ गया नेहरू का जीवन 1889 से शुरू हुआ था. स्वतंत्रता संग्राम, जेल यात्राएं, डिस्कवरी ऑफ इंडिया और 17 वर्षों का प्रधानमंत्रित्व काल. 1962 का चीन युद्ध उन्हें तोड़ गया. गोपाल की जीवनी के तीसरे खंड में इन अंतिम वर्षों को इतनी गहराई से छुआ गया है कि वे कितने अकेले, कितने थके, लेकिन कितने समर्पित थे. इस बीच, कल 27 मई को पंडित जवाहरलाल नेहरू की पुण्यतिथि पर दिल्ली के शांति वन में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पडे़गी. शांति वन का माहौल इतना शांत और पवित्र है कि मन स्वतः ही शांति का अनुभव करने लगता है. सुबह के वक्त शांति वन अत्यंत मनोरम और आकर्षक लगता है. पक्षियों की मीठी चहचहाहट, सुबह की कोमल हवा और यमुना के बहते पानी की मंद ध्वनि मिलकर इसे बेजोड़ हैं. इसी शांति वन में पंडित नेहरू की अंत्येष्टि हुई थी. शांति वन नाम उनके शांतिप्रिय स्वभाव, समावेशी सोच और अहिंसक दृष्टिकोण का प्रतीक है. यह 52.6 एकड़ में फैला हरा-भरा उद्यान दिल्ली के बीचों-बीच स्थित है. यहां सैकड़ों पेड़ों पर हजारों पक्षी रहते हैं, जो भोर से ही गुनगुनाने लगते हैं. पूरे दिन गिलहरियां पेड़ों से पेड़ों तक दौड़ती नजर आती हैं. इधर 14 नवंबर और 27 मई को यहां सर्वधर्म प्रार्थना सभा का आयोजन होता है, जिसमें ब्रदर सोलोमन जॉर्ज बाइबल के पवित्र अंश पढ़ते हैं. वे अक्सर यहां आकर शांति वन की हरियाली में कुछ पल शांति से बैठते हैं. यह उद्यान अपनी सादगी, प्राकृतिक सुंदरता और प्रतीकात्मक महत्व के लिए जाना जाता है. यहां कोई भव्य इमारत या आडंबर नहीं है. Source link

ताज़ा खबर

Delhi Gymkhana Club Row Explained : अरबों की जमीन, कौड़ियों में किराया...

दिल्ली जिमख़ाना को लेकर बवाल मचा तो पब्लिक को भी पता चल रहा है कि अफसर लोग सुविधाओं के नाम पर कैसे-कैसे लुत्फ उठाते रहते हैं. और ये तो दिल्ली जिमख़ाना सुर्खियों में आया है, क्योंकि सरकार के विभाग ने उसको कह दिया है कि प्रधानमंत्री के आवास के बिलकुल बगल की जबरदस्त लोकेशन को छोडकर दूसरी जगह चले जाओ. तो हाय-तौबा मची हुई है कि ऐसे-कैसे चले जाएं? क्योंकि ये जो जिमख़ाना जैसी जगहें होती हैं ये तो बडे साहब लोगों की वो जगहें होती हैं, जहां आम पब्लिक तो जा भी नहीं सकती. लेकिन अब बवाल मच ही गया है तो इसी बहाने समझ तो लेना चाहिए कि ये जिमख़ाना होता क्या है? तो पहली बात तो ये नाम कैसा है? जिमख़ाना? असल मे ये अंग्रजों ने बनाए थे ये सब ठिकाने अपने अफसरों के लिए. अंग्रेजों से पहले मुगल थे, तो मुगलों के टाइम दरबार में फारसी भाषा चलती थी. और फारसी में किसी ठिकाने को या जगह को ख़ाना कहते हैं. जैसे दवाख़ाना, बावरचीख़ाना, कारख़ाना, पागलख़ाना, डाकख़ाना. तो अंग्रेज अफसर आए तो उनको अपने खेलने वगैरह के लिए, कसरत के लिए और मनोरंजन वगैरह के लिए जगह बनानी थी. वो लोग खेलते थे जिमनेजियम में. आजकल भी तो कसरत के लिए जिम जाते हैं ना लोग. वो असल में जिमनैस्टिक्स करने की जगह को कहते हैं जिमनेजियम. उसी जिमनेजियम को शॉर्ट कर के लोग बोलने लगे जिम. और आजकल एक्सरसाइज करनी की जगह को जिम ही कहने लग गए हैं. अंग्रेजों ने कई जगह खोले जिमखाने उस जमाने में अंग्रेजों को असल में एक क्लब चाहिए था, जहां वो क्रिकेट टेनिस वगैरह खेल भी सकें और शाम को पार्टी वगैरह भी कर सकें. तो जिमनेजियम के जिम और फारसी के खाना को जोड़कर उन्होंने शब्द बना दिया जिमख़ाना. और कई जगह जिमखाने खोल दिए. सबसे पहले 1861 में रुडकी में जिमख़ाना बनाया. फिर 1875 में बॉम्बे जिमख़ाना, 1882 में पूना जिमख़ाना क्लब, 1884 में मद्रास जिमख़ाना क्लब, डिब्रूगढ जिमख़ाना क्लब, 1885 में अहमदाबाद जिमख़ाना क्लब, 1886 में कराची जिमख़ाना, करते-करते कई जिमखाने खोल दिए. अंग्रेजों का राज था. जमीन देखते थे और बड़े-बड़े ये क्लब बना देते थे अपने गोरे अफसरों के लिए. ताकि भारतीयों से अलग रहकर अपना वही लाइफस्टाइल चलाएं जैसा इंग्लैंड में रईसों का होता था. भारतीयों को तो अंदर घुसने तक नहीं दिया जाता था. ऐसे-ऐसे ड्रेस कोड लगा रखे थे जो कपड़े वो इंग्लैंड में पहना करते थे. भले ही भारत की तपती गर्मी में वो सूट-बूट ना चलते हों लेकिन अपने आप को यहां के लोगों से ऊपर दिखाने के लिए ये सब करते रहते थे वो. भारतीयों की एंट्री ही बंद थी. नौकर ज़रूर भारतीय होते थे. पंखा झलने के लिए. शराब परोसने के लिए. खाना परोसने के लिए. बाकी साफ-सफाई के लिए. बाग़बानी के लिए. और गोरे अंग्रेज़ खेलते थे क्रिकेट, पोलो, और पत्तों की गेम ब्रिज. व्हिस्की पीते थे, स्कॉच का चस्का भारत में वहीं से लगा. ब्रिटिश राज की ताक़त दिखाने का जरिया था जिमखाना मतलब ये जिमख़ाने ब्रिटिश राज की ताक़त दिखाने का भी एक ज़रिया थे कि गोरे लोग साहब लोग हैं, और बाक़ी जो भारतीय हैं चाहे कितने ही रईस हों वो भी उनसे तो नीचे ही हैं. वर्ष 1911 में किंग जॉर्ज भारत आए तो घोषणा की गई कि ब्रिटिश इंडिया की राजधानी कलकत्ते से दिल्ली शिफ़्ट की जाएगी. तब तक कलकत्ता राजधानी होती थी. तो नई दिल्ली बनाई गई नई राजधानी. और यहां तो फिर सबसे बड़े अफ़सर आने वाले थे अंग्रेज़ों के. तो उनके लिए 1913 में बनाया गया इंपीरियल दिल्ली जिमख़ाना क्लब. और ये बन गया गोरे लोगों का वो ठिकाना जहां सिर्फ़ नौकर ही भारतीय होते थे. और ये तो खैर अंग्रेज़ों के सारे क्लबों में ऐसा ही था. चटगांव में भी एक यूरोपियन क्लब था. वहां का क़िस्सा आपने सुना हो शायद. वहां तो बाहर ही बोर्ड लगा रखा था कि ‘डॉग्ज़ ऐंड इंडियंज़ नॉट अलाउड’, कुत्तों और भारतीयों का आना मना है. ये जो अंग्रेज़ आजकल दुनिया को सलीके के पाठ पढ़ाते रहते हैं, ऊंच-नीच के पाठ पढ़ाते रहते है, अधिकारों के पाठ पढ़ाते रहते हैं ये बोर्ड लगाते थे कुत्ते और भारतीय अंदर नहीं आ सकते. तो चटगांव में सूर्या सेन की टीम में एक क्रांतिकारी थीं प्रीतिलता वड्डेदार. उन्होंने चटगांव में यूरोपियन क्लब को आग लगा दी थी. कि ये लिखोगे कि कुत्ते और भारतीय नहीं आ सकते? उन्होंन क्लब ही फूंक डाला था और पुलिस ने जब उनको घेर लिया था तो सायनाइड खाकर जान दे दी थी. प्रीतिलता ज़िंदा पुलिस के हाथ नहीं आईं थीं. मतलब इतना रोष होता था अंग्रेज़ों के इन क्लबों को लेकर पब्लिक में कि हमारी ही ज़मीन पर क़ब्ज़ा करके अपनी ऐश के लिए ये ठिकाने बनाए जा रहे हैं और भारतीय को नौकर बनाकर रखा हुआ है. लेकिन अंग्रेज़ तो चले गए. 1947 में देश आज़ाद हो गया. फिर क्या हुआ इन जिमख़ानों का? ये हमारे अफ़सरों ने घेर लिए. सरकार और सेना के अफ़सरों के हो गए ये. देशभर में जितने भी ये जिमख़ाने और क्लब थे वो अब इन अफ़सरों ने घेर लिए वैसे ही जैसे अंग्रेज़ अफ़सरों के ये हुआ करते थे. बस ग़नीमत रही कि इन्होंने बोर्ड नहीं लगाया कि कुत्ते और आम पब्लिक अंदर नहीं आ सकती. दिल्ली में भी इंपीरियल जिमख़ाना से इंपीरियल नाम हट गया और वो सिर्फ़ दिल्ली जिमख़ाना हो गया. और आम पब्लिक इसमें फिर भी नहीं जा सकती थी. वही अंग्रेज़ों वाले रिवाज चलते रहे. कुर्ते साड़ी वगैरह तो बाद में इन लोगों ने अलाउ कर दिये. लेकिन चोंचले इनके वही चलते रहे. कि ये नहीं पहन सकते, वो नहीं पहन सकते. लेकिन अंग्रेज़ो का तो राज था. तो उन्होंने 1928 में दिल्ली की सबसे प्राइम 27 एकड़ ज़मीन हमेशा के लिए अपने अफ़सरों के लिए लीज़ पर दी थी. लेकिन आज़ादी के बाद तो ये पब्लिक की ज़मीन हुई ना. हमारे अफ़सरों को देकर गए थे क्या अंग्रज़? साल का किराया एक हज़ार रुपये? अरबों की जमीन, कौड़ियों में किराया चले गए ना अंग्रेज़. ये हमारे वाले अफ़सर अब भारत सरकार को सिर्फ़ एक हज़ार रुपये किराया क्यों देंगे ये सवाल उठ रहा है

ताज़ा खबर

QUAD Meet Live: क्वाड मीट में जयशंकर से मिलेंगे तीन यार, चीन...

होमताजा खबरदेश क्वाड मीट में जयशंकर से मिलेंगे 3 यार, चीन की निकालेंगे काट, तेल-गैस पर भी बात Last Updated:May 26, 2026, 08:27 IST राजधानी दिल्ली के हैदराबाद हाउस में आज क्वाड देशों (QUAD Meet) के विदेश मंत्रियों की अहम बैठक होने जा रही है. इस बैठक में हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा, समुद्री मार्गों की आजादी, सप्लाई चेन को मजबूत बनाने, ऊर…और पढ़ें क्वाड मीट में एस जयशंकर , मार्को रुबियो, ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री पेनी वांग और जापान के विदेश मंत्री तोसीमित्सु मोतेगी बैठक करेंगे. राजधानी दिल्ली में आज क्वाड देशों (QUAD Meet) के विदेश मंत्रियों की अहम बैठक होने जा रही है. हैदराबाद हाउस में होने वाली इस बैठक में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री शामिल होंगे. यह बैठक सुबह 9 बजे शुरू होगी, जिसके बाद करीब 9:50 बजे संयुक्त बयान जारी किया जाएगा. इस बैठक में हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा, समुद्री मार्गों की आजादी, सप्लाई चेन को मजबूत बनाने, ऊर्जा सुरक्षा और आतंकवाद जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होगी. माना जा रहा है कि बैठक का सबसे बड़ा फोकस चीन के बढ़ते प्रभाव और खासकर क्रिटिकल मिनरल्स सेक्टर में उसके दबदबे को चुनौती देना होगा. दरअसल, पिछले साल क्वाड क्रिटिकल मिनरल्स पहल शुरू की गई थी. अब इस बैठक में सप्लाई चेन को विविध बनाने और आर्थिक सुरक्षा मजबूत करने के लिए कई बड़े कदमों का ऐलान हो सकता है. अमेरिका इस पहल की अगुवाई कर रहा है और माना जा रहा है कि QUAD देश मिलकर चीन पर निर्भरता कम करने की रणनीति तैयार कर रहे हैं. इस बैठक में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की मौजूदा स्थिति पर भी चर्चा होगी. पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर उसके असर को देखते हुए क्वाड देश ऊर्जा सुरक्षा को लेकर साझा रणनीति बना सकते हैं. इसके अलावा समुद्री सुरक्षा, ट्रांसनेशनल क्राइम, मानवीय सहायता और आपदा प्रबंधन जैसे मुद्दे भी एजेंडे में शामिल हैं. QUAD Meet Live: क्वाड के सामने सबसे बड़ी चुनौती चीन QUAD इस समय इंडो-पैसिफिक क्षेत्र का सबसे अहम रणनीतिक मंच माना जाता है, लेकिन इसके सामने आज की तारीख में कई बडी चुनौतियां भी हैं. QUAD की सबसे बडी चुनौती चीन है. चीन इसे अपने खिलाफ रणनीतिक घेराबंदी के रूप में देखता है. दक्षिण चीन सागर, ताइवान स्ट्रेट और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की सैन्य और आर्थिक सक्रियता लगातार बढ रही है. ऐसे में QUAD देशों को संतुलन बनाए रखने के साथ टकराव से भी बचना पडता है. QUAD Meet Live: चीन की गतिविधियों को लेकर चिंता में कई देश क्वाड की यह बैठक ऐसे समय हो रही है, जब दक्षिण चीन सागर और पूर्वी चीन सागर में चीन की गतिविधियों को लेकर कई देशों की चिंता बढ़ी हुई है. ऐसे में QUAD देशों की ओर से ‘फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक’ पर जोर दिए जाने की उम्मीद है. संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून (UNCLOS) के तहत समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता और निर्बाध व्यापार पर भी जोर दिया जा सकता है. दिल्ली में होने वाली यह बैठक इसलिए भी अहम मानी जा रही है, क्योंकि इसे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव के खिलाफ QUAD की नई रणनीतिक तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है. Location : New Delhi,Delhi Source link

ताज़ा खबर

CNG Price Hike | CNG New Price | महंगाई का एक और...

Last Updated:May 26, 2026, 07:25 IST CNG Price Hike: दिल्ली में सीएनजी की कीमत 2 रुपये बढ़कर 83.09 रुपये प्रति किलो हुई. बीते 12 दिनों में दिल्ली में सीएनजी की कीमत 77.09 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 83.09 रुपये प्रति किलो पहुंच गई है. यानी इस दौरान कुल 6 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है. ख़बरें फटाफट पेट्रोल-़डीजल के बाद सीएनजी फिर हुई महंगी. दिल्ली में आम लोगों को एक बार फिर महंगाई का झटका लगा है. पेट्रोल-डीजल के बाद दिल्ली में अब सीएनजी (CNG Price Hike) की कीमतों में 2 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी कर दी गई है. नए दाम तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं, जिसके बाद अब दिल्ली में सीएनजी की नई कीमत 83.09 रुपये प्रति किलो हो गई है. दिल्ली-एनसीआर में बड़ी संख्या में लोग सीएनजी वाहनों का इस्तेमाल करते हैं. ऐसे में इस बढ़ोतरी का सीधा असर लाखों उपभोक्ताओं पर पड़ेगा. 15 मई से अब तक यह चौथी बार है जब सीएनजी के दाम बढ़ाए गए हैं. बीते 12 दिनों में दिल्ली में सीएनजी की कीमत 77.09 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 83.09 रुपये प्रति किलो पहुंच गई है. यानी इस दौरान कुल 6 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है. इससे पहले 15 मई को सीएनजी के दाम में 2 रुपये प्रति किलो का इजाफा किया गया था. इसके बाद 17 मई को 1 रुपये और 23 मई को फिर 1 रुपये प्रति किलो कीमत बढ़ाई गई थी. अब एक बार फिर 2 रुपये की बढ़ोतरी ने लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया है. लगातार बढ़ रही कीमतों ने आम लोगों, खासकर ऑटो, टैक्सी और कमर्शियल वाहन चालकों की चिंता बढ़ा दी है. इसका असर सीधे तौर पर सार्वजनिक परिवहन और रोजमर्रा के खर्च पर पड़ सकता है. माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में ऑटो और कैब किराए में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. About the Author Saad Omar साद बिन उमर को पत्रकारिता के क्षेत्र में 15 साल से अधिक का अनुभव है, जिनमें से 12 साल उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता को दिए है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने आज तक, एनडीटीवी, पीटीआई और नया इंडिया जैसे प्र…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,New Delhi,Delhi Source link

ताज़ा खबर

बलिया के जगदीशपुर समेत कई कॉलोनियों में बिजली-पानी की किल्लत, यहां एक...

बलिया: दिन में चिलचिलाती धूप और रात की उमस भरी गर्मी ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है. इस बीच अगर पानी भी न मिले, तो परेशानी कितनी बढ़ जाती है, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है. आपको बताते चलें कि इस भीषण गर्मी में जगदीशपुर समेत कई कॉलोनियां जल संकट से जूझ रही हैं. पानी के बिना घरेलू कामकाज भी समय से नहीं हो पा रहा है. ऊपर से बिजली विभाग की लापरवाही ने जनता की समस्या को दोगुना कर दिया है. धरातल पर जनता त्रस्त है और बेपरवाह नगर पालिका मस्त है. तीन से चार दिनों से पानी की स्थिति बहुत बदतर जगदीशपुर निवासी रितेश श्रीवास्तव ने बताया कि प्रशासन को ग्राउंड पर ध्यान देने की जरूरत है. हालांकि, प्रार्थना पत्र देने का भी अब कोई मतलब नहीं रह गया है, क्योंकि कोई सुनवाई ही नहीं होती. पिछले तीन से चार दिनों से पानी की स्थिति बहुत बदतर हो गई है. एक हैंडपंप के सहारे हजारों लोगों का काम चल रहा है. भागमनी देवी ने भावुक होकर कहा कि पानी की बहुत समस्या है. गर्मी इतनी है कि पूरे शरीर में घमौरियां निकल आई हैं. अभी कुछ दिनों पहले आंख का इलाज हुआ है, ऐसे में नल चलाना बड़ी चुनौती है. इस स्थिति में यह बुजुर्ग महिला कैसे नल चलाएं, स्नान करें और घर के लिए पानी ढोकर लाएं? उन्होंने बताया कि मजबूरी में नल चलाना पड़ता है, जिससे बांह में बहुत दर्द होता है. उक्त महिला की उम्र 65 वर्ष हो चुकी है. मिनरल वाटर खरीदकर काम चला रहा है बबलू ने कहा कि इस समय जगदीशपुर समेत कई कॉलोनियां जल संकट से जूझ रही हैं. इस समस्या पर किसी का ध्यान नहीं है. एक हैंडपंप है, जिसे चलाते-चलाते हालत खराब हो जाती है. इस जल संकट से कम से कम 5 से 6 हजार की आबादी प्रभावित है. जिसके पास पैसा है, वह मिनरल वाटर खरीदकर काम चला रहा है और जो गरीब हैं, वे तमाम समस्याओं का सामना कर रहे हैं. हर गर्मी में यही हाल होता है. गर्मी बीतते ही अधिकारी और जनता सब भूल जाते हैं. आशा ने कहा कि कई दिनों से पानी की समस्या बनी हुई है. मजबूरी में चापाकल (हैंडपंप) से काम चलाना पड़ रहा है. पानी के बिना अब स्थिति असहनीय होती जा रही है. ऊपर से बिजली भी हर समय परेशान कर रही है. कभी भी बिजली सही से नहीं मिल रही है. बिजली ने भी कर रखा है परेशान छोटी बच्ची सृष्टि ने कहा कि मम्मी चापाकल चलाती हैं, तभी वह नहा पाती हैं. गर्मी बहुत ज्यादा है. बच्ची पसीने से तरबतर हो जाती है और बिजली भी बहुत कम आ रही है. प्रिया ने कहा कि पानी की बहुत ज्यादा दिक्कत है. ऊपर से बिजली भी नहीं रह रही है. रात में उमस भरी गर्मी, बिजली कटौती और पानी की कमी लोगों को बहुत परेशान कर रही है. सबसे ज्यादा दिक्कत छोटे-छोटे बच्चों और बुजुर्गों को हो रही है. रात में गर्मी की वजह से बच्चे रोने लगते हैं. Source link

ताज़ा खबर

‘कांग्रेस की खुद की गलती से छिटका दलित वोट बैंक’, मायावती का...

होमताजा खबरदेश ‘कांग्रेस की गलती से छिटका दलित वोट बैंक’, राहुल गांधी ने बोल दिया कड़वा सच Last Updated:May 26, 2026, 05:01 IST कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दलित वोट बैंक को लेकर अपनी ही पार्टी की पुरानी नीतियों पर सवाल उठाए हैं और उन्‍हें ठीक करने की बात कही है. दलित विभाग की बैठक में उन्होंने माना कि 80-90 के दशक में कांग्रेस की उदासीनता के कारण दलित समुदाय पार्टी से दूर हुआ और उसी खाली जगह को कांशीराम और मायावती जैसे नेताओं ने भर दिया. राहुल गांधी. यूपी में चुनाव होने वाले हैं, उससे पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दल‍ित की बात छेड़ दी है. कांग्रेस के दलित विभाग के जिलाध्यक्षों की बैठक में राहुल गांधी ने साफ कहा कि 80 और 90 के दशक में कांग्रेस दलितों के मुद्दों को लेकर उदासीन हो गई थी. उसी खाली जगह को कांशी राम और बाद में मायावती जैसे नेताओं ने भरा. यानी जिस दलित वोट बैंक को कांग्रेस अपना नेचुरल सपोर्ट बेस मानती थी, उसके खिसकने के लिए अब राहुल गांधी खुद अपनी पार्टी की नीतियों को जिम्मेदार बता रहे हैं.उस पर सवाल उठा रहे हैं. दरअसल, आजादी के बाद लंबे समय तक दलित वोट कांग्रेस के साथ मजबूती से जुड़ा रहा. कांग्रेस खुद को सामाजिक न्याय और समावेशी राजनीति की पार्टी बताती रही. लेकिन 1980 के दशक के बाद हालात बदलने लगे. मंडल राजनीति, सामाजिक न्याय की नई बहस और क्षेत्रीय दलों के उभार ने भारतीय राजनीति का समीकरण बदल दिया. इसी दौर में कांशीराम ने ‘जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी’ का नारा देकर दलित राजनीति को नई दिशा दी. कांग्रेस जहां दलितों को अपने पारंपरिक वोटर की तरह देख रही थी, वहीं बहुजन समाज पार्टी ने उन्हें राजनीतिक ताकत और सत्ता में हिस्सेदारी का सपना दिखाया. खुलकर मान रही कांग्रेस राहुल गांधी का बयान इसलिए भी अहम है क्योंकि कांग्रेस अब खुलकर मान रही है कि उसने दलित नेतृत्व को सिर्फ प्रतीकात्मक जगह दी, असली राजनीतिक ताकत नहीं. यही वजह रही कि उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में दलित वोट तेजी से बीएसपी की तरफ गया. मायावती का आगे आना सिर्फ एक नेता का उभार नहीं था, बल्कि कांग्रेस मॉडल के खिलाफ दलित असंतोष की राजनीति भी था. मायावती ने दलित समाज को यह भरोसा दिलाया कि सत्ता में उनकी सीधी हिस्सेदारी हो सकती है, सिर्फ वोटर बने रहने से बात नहीं चलेगी. कांग्रेस के भीतर उठते रहे हैं सवाल कांग्रेस के भीतर भी लंबे समय से यह सवाल उठता रहा है कि पार्टी दलित चेहरों को आगे तो करती है, लेकिन निर्णायक भूमिका कम देती है. हाल के दिनों में भाजपा भी इसी मुद्दे पर कांग्रेस को घेरती रही है. भाजपा नेता बार-बार कहते रहे हैं कि कांग्रेस में दलित नेताओं का इस्तेमाल सिर्फ चुनावी संतुलन के लिए होता है. राहुल गांधी का बयान कहीं न कहीं भाजपा के इसी हमले को मजबूती देता दिख रहा है, क्योंकि उन्होंने खुद स्वीकार किया कि कांग्रेस ने दलितों के मुद्दों को गंभीरता से नहीं लिया. हालांकि कांग्रेस अब इसे सुधार की प्रक्रिया के तौर पर पेश कर रही है. दल‍ितों को मौका देने का भरोसा राहुल गांधी ने यह भी कहा कि अब पार्टी चीजें बदल रही है और दलितों को मुख्य भूमिका में लाया जाएगा. एससी विभाग के अध्यक्ष राजेंद्र पाल गौतम ने भी राहुल को भरोसा दिलाया कि पार्टी उनके बताए रास्ते पर आगे बढ़ रही है. लेकिन असली चुनौती सिर्फ बयान देने की नहीं, बल्कि संगठन और सत्ता दोनों में दलित नेतृत्व को वास्तविक हिस्सेदारी देने की होगी. क्योंकि आज दलित राजनीति सिर्फ प्रतीकवाद से आगे निकल चुकी है. दलित वोटर अब यह देखता है कि कौन सी पार्टी उसे टिकट, नेतृत्व और फैसले लेने की ताकत दे रही है. नई तैयारी का संकेत यही वजह है कि राहुल गांधी का यह बयान राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. यह सिर्फ कांग्रेस की पुरानी गलतियों की स्वीकारोक्ति नहीं, बल्कि 2029 की राजनीति की तैयारी का संकेत भी है. कांग्रेस समझ चुकी है कि अगर उसे दलित वोट बैंक वापस चाहिए, तो सिर्फ संविधान और सामाजिक न्याय की बातें करने से काम नहीं चलेगा. उसे संगठन से लेकर सत्ता तक दलित नेताओं को वास्तविक ताकत देनी होगी. वरना जिस राजनीतिक जमीन पर कभी कांग्रेस का दबदबा था, वहां क्षेत्रीय दल और भाजपा दोनों अपनी पकड़ और मजबूत करते रहेंगे. About the Author Gyanendra Mishra Mr. Gyanendra Kumar Mishra is associated with hindi.news18.com. working on home page. He has 20 yrs of rich experience in journalism. He Started his career with Amar Ujala then worked for ‘Hindustan Times Group…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi Source link

ताज़ा खबर

मीन राशि के जातक पर आज बरसेंगी हनुमान जी की कृपा, करियर-कारोबार...

Last Updated:May 26, 2026, 03:23 IST Aaj Ka Meen Rashifal March 2026: मीन राशि वालों के लिए आज का दिन शुभ संकेत लेकर आया है. परिवार में प्रेम और सामंजस्य का माहौल रहेगा, जिससे मन प्रसन्न रहेगा.सेहत भी बढ़िया रहेगी और आप ऊर्जा से भरपूर नजर आएंगे. व्यापारीयों को विदेश यात्रा के योग्य बन रहे है.  आज मीन राशि वालों के लिए दिन सकारात्मक ऊर्जा और सफलता से भरा रहने वाला है. कार्यक्षेत्र में नए अवसर आपके कदम चूम सकते हैं और मेहनत का अच्छा परिणाम मिलने की संभावना है. नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं, जो आगे चलकर तरक्की का कारण बनेंगी. सम्मान और उपलब्धि के योग भी बन रहे हैं. आर्थिक पक्ष मजबूत रहेगा और निवेश से लाभ के संकेत हैं. आज कोई अच्छी खबर आपका दिन और खास बना सकती है. उज्जैन के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य आनंद भारद्वाज के अनुसार मंगलवार का दिन मीन राशि वालों के लिए बेहद शुभ संकेत लेकर आया है. प्रेम जीवन में नजदीकियां बढ़ेंगी और रिश्तों में विश्वास मजबूत होगा. पार्टनर के साथ बेहतर बातचीत से संबंध और गहरे होंगे. ज्येष्ठ माह का यह मंगलवार का दिन आपके लिए खुशियां और सौभाग्य लेकर आया है मीन राशि वालों का करियर राशिफलआज मीन राशि वालों के लिए सफलता की कुंजी समझदारी और बेहतर तालमेल साबित होगी. कार्यक्षेत्र में सहकर्मियों का पूरा सहयोग मिलेगा, जिससे आपके अधूरे काम तेजी से पूरे हो सकते हैं. आपका शांत स्वभाव और सकारात्मक सोच लोगों को प्रभावित करेगी. टीम के साथ मिलकर किए गए प्रयास अच्छे परिणाम देंगे और कार्यस्थल पर आपकी पहचान और सम्मान में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. दिन ऊर्जा और उत्साह से भरा रहेगा. मीन राशि वालों का व्यापार राशिफलआज मीन राशि के व्यापारियों के लिए दिन सफलता और नए अवसरों की सौगात लेकर आया है. विदेश यात्रा के प्रबल योग बन रहे हैं, जो भविष्य के लिए लाभदायक साबित हो सकते हैं. कारोबार में तेजी आएगी और नए रास्ते खुलते नजर आएंगे. किसी भरोसेमंद मित्र या पार्टनर का साथ आपको बड़ी उपलब्धि दिला सकता है. आर्थिक लाभ के मजबूत संकेत हैं और कोई बड़ा सौदा या ऑर्डर आपके व्यवसाय को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है. मीन राशि वालों का स्वास्थ राशिफलमीन राशि वालों के लिए आज सेहत के लिहाज से अच्छा दिन रहेगा. शरीर में फुर्ती और ताजगी बनी रहेगी, वहीं पुराने रोगों में राहत मिल सकती है. संतुलित और पौष्टिक भोजन से ऊर्जा और बढ़ेगी। बच्चों की सेहत भी ठीक रहेगी. कुल मिलाकर आज स्वास्थ्य को लेकर संतोष और सकारात्मकता महसूस होगी. मीन राशि वालों का आर्थिक राशिफलआज आर्थिक मामलों में दिन राहत और खुशखबरी लेकर आ सकता है. यदि किसी वजह से धन की जरूरत महसूस होती है, तो करीबी दोस्त और सहयोगी आपके साथ मजबूती से खड़े नजर आएंगे. पहले किए गए निवेश से लाभ मिलने की संभावना बन रही है. साथ ही नए निवेश के अवसर भी सामने आ सकते हैं. समझदारी से लिया गया फैसला भविष्य में आर्थिक स्थिति को और मजबूत बनाने में सहायक साबित होगा. मीन राशि वालों का लव लाइफ राशिफलमीन राशि वालों के लिए आज का दिन प्रेम और दांपत्य जीवन में खुशियां लेकर आएगा. शादीशुदा लोगों के रिश्तों में नजदीकियां बढ़ेंगी और आपसी तालमेल बेहतर होगा, जिससे संबंध और मजबूत बनेंगे. वहीं लव लाइफ में जुड़े लोगों के लिए दिन रोमांटिक रहेगा, साथी के साथ बिताया समय खास यादें बनाएगा. जो लोग अभी सिंगल हैं, उन्हें भी आज अच्छे संकेत मिल सकते हैं.किसी खास से मुलाकात या प्रेम प्रस्ताव मिलने की संभावना बन रही है. मीन राशिफल वाले जरूर करेंयह उपाय आज आपके लिए लकी नंबर 7 रहेगा. यह अंक आपको सफलता और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करेगा. जो जातक धर्म-कर्म में रुचि रखते हैं, वे आज हनुमान जी महाराज के मंदिर जाकर भगवान को सिंदूर अर्पित करे. उसके बाद गरीबों को लाल वस्तु का दान करें. यह उपाय मानसिक शांति देगा और आत्मविश्वास बढ़ाएगा. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Ujjain,Madhya Pradesh Source link

ताज़ा खबर

aaj ka panchang 26 May 2026 | आज का पंचांग, 26 मई...

होमताजा खबरधर्म ज्येष्ठ बुढ़वा मंगल व्रत आज, पंचांग से जानें शुभ व अशुभ मुहूर्त, दिशाशूल Last Updated:May 26, 2026, 02:23 IST Aaj Ka Panchang (आज का पंचांग), 26 May 2026: आज मंगलवार का दिन धार्मिक दृष्टि से बेहद खास माना जा रहा है. पंचांग के अनुसार आज ज्येष्ठ माह का बुढ़वा मंगल, नौतपा का दूसरा दिन और पुरुषोत्तम मास की एकादशी एक साथ पड़ने से दिन का महत्व कई गुना बढ़ गया है. आज के शुभ मुहूर्त की बात करें तो ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 3 मिनट से 4 बजकर 44 मिनट तक, अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 51 मिनट से दोपहर 12 बजकर 46 मिनट तक रहेगा. पंचांग से जानें मंगलवार 26 मई का शुभ व अशुभ मुहूर्त और योग के बारे में. Aaj Ka Panchang (आज का पंचांग), 26 May 2026: आज ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि दिन मंगलवार है. हिंदू पंचांग के अनुसार, आज नौतपा का पहला मंगलवार और ज्येष्ठ बुढ़वा मंगल का व्रत किया जाएगा. आज ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी तिथि, हस्त नक्षत्र, वणिज करण, शुक्ल पक्ष और चंद्रमा कन्या राशि में तो सूर्य वृषभ राशि में रहने वाले हैं. आज उत्तर का दिशाशूल है. पुरुषोत्तम मास की एकादशी पर अभिजीत मुहूर्त, विजय मुहूर्त और पूरे दिन रवि योग का संयोग मिल रहा है. यह दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना के लिए बेहद शुभ माना जाता है. पुरुषोत्तम मास की एकादशी तिथि व्रत, जप, ध्यान और दान के लिए अत्यंत उत्तम है. मान्यता है कि इस मास में किए गए पुण्य का लाख गुना फल मिलता है. मंगलवार को सूर्योदय 5 बजकर 25 मिनट सुबह होगा, जबकि सूर्यास्त शाम 7 बजकर 11 मिनट पर होगा. चंद्रोदय दोपहर 2 बजकर 55 मिनट पर और चंद्रास्त 27 मई की देर रात 2 बजकर 32 मिनट पर होगा. 26 मई को तिथि एकादशी पूर्ण रात्रि तक रहेगी. नक्षत्र हस्त पूर्ण रात्रि तक रहेगा. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार ज्येष्ठ माह में पड़ने वाला बुढ़वा मंगल विशेष रूप से हनुमान भक्तों के लिए शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन बजरंगबली की विधि-विधान से पूजा करने और सुंदरकांड का पाठ करने से संकट दूर होते हैं तथा जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. कई स्थानों पर भंडारे और धार्मिक आयोजनों का भी आयोजन किया जा रहा है. पंडितों के अनुसार आज ब्रह्म मुहूर्त से लेकर दिनभर पूजा-पाठ और दान-पुण्य के लिए शुभ संयोग बने हुए हैं. धार्मिक कार्यों में भाग लेने और जरूरतमंदों को दान देने से पुण्य लाभ मिलने की मान्यता है. पंचांग अनुसार, आज स्नान ध्यान करने के बाद लाल या नारंगी वस्त्र पहनकर रामभक्त हनुमानजी का ध्यान करें. इसके बाद घर के पूजा स्थल पर रामजी के साथ बजरंगबली की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें. साथ ही मंदिर में जाकर हनुमानजी को सिंदूर, चमेली का तेल, लाल फूल और गुड़-चना अर्पित किया जाता है. इसके बाद पांच चमेली के तेल के दीपक जलाकर हनुमान चालीसा, बजरंग बाण और सुंदरकांड का पाठ करना शुभ माना जाता है. तुलसी माला के साथ 108 बार ॐ हं हनुमते नमः मंत्र का जाप भी करें. तो चलिए जानते हैं कि कब से शुभ और अशुभ मुहूर्त लग रहे हैं. आज का पंचांग (Aaj Ka Panchang), 26 मई 2026आज की तिथि- एकादशी तिथि – पूर्ण रात्रि तकआज का नक्षत्र- हस्त – पूर्ण रात्रि तकआज का करण- वणिज – 05:42 पी एम तक, विष्टि – पूर्ण रात्रि तकआज का योग- सिद्धि – 03:11 ए एम, 27 मई तक, व्यतीपात योगआज का पक्ष- शुक्ल पक्षआज का दिन- मंगलवारचंद्र राशि- कन्या राशि सूर्योदय-सूर्यास्त और चंद्रोदय-चंद्रास्त का समयसूर्योदय- 05:25 ए एमसूर्यास्त- 07:11 पी एमचन्द्रोदय- 02:55 पी एमचन्द्रास्त- 02:32 ए एम, 27 मई आज के शुभ योग और मुहूर्त 26 मई 2026ब्रह्म मुहूर्त: 04:03 ए एम से 04:44 ए एमअभिजीत मुहूर्त: 11:51 ए एम से 12:46 पी एमविजय मुहूर्त: 02:36 पी एम से 03:31 पी एमगोधूलि मुहूर्त: 07:10 पी एम से 07:30 पी एमअमृत काल: 11:29 पी एम से 01:13 ए एम, 27 मईनिशिता मुहूर्त: 11:58 पी एम से 12:39 ए एम, 27 मईरवि योग: पूरे दिन शिववास: क्रीड़ा में आज के अशुभ मुहूर्त 26 मई 2026राहुकाल: 03:45 पी एम से 05:28 पी एमविडाल योग: पूरे दिनयमगण्ड: 08:52 ए एम से 10:35 ए एमदुर्मुहूर्त: 08:11 ए एम से 09:06 ए एमगुलिक काल: 12:18 पी एम से 02:02 पी एमवर्ज्य: 01:10 पी एम से 02:53 पी एमभद्रा: 05:42 पी एम से 05:25 ए एम, 27 मईदिशाशूल- उत्तर About the Author Parag SharmaChief Sub Editor पराग शर्मा Hindi News18 Digital में Chief Sub Editor के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, ग्रह-नक्षत्र, राशि और वास्तु से जुड़ी खबरों पर काम कर रहे हैं. भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेद…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

Scroll to Top