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Aaj ka Vrishchik Rashi: वृश्चिक राशि वालों को मिलने वाली है बड़ी...

Last Updated:May 26, 2026, 00:06 IST Aaj ka Vrishchik Rashifal 26 may 2026: वृश्चिक राशि वालों के लिए 26 मई का दिन तरक्की और मुनाफे की सौगात लेकर आ रहा है. जहां एक ओर नौकरी में नई जिम्मेदारी और अचानक धन लाभ के योग बन रहे हैं. वहीं दूसरी ओर विवादों से दूरी बनाए रखना ही आज आपकी सफलता की कुंजी होगी. जानिए आज के खास उपाय. सीतामढ़ी: आज यानी 26 मई 2026 का दिन वृश्चिक राशि के जातकों के लिए एक बहुत बड़ा और सकारात्मक संकेत लेकर आया है. ग्रहों की विशेष स्थिति के कारण आज आपकी छुपी हुई प्रतिभा और ताकत दुनिया के सामने उजागर हो सकती है. समाज और कार्यक्षेत्र में आपका मान-सम्मान बढ़ेगा और लोग आपकी क्षमताओं का लोहा मानेंगे. यदि आप लंबे समय से किसी बड़े बदलाव का इंतजार कर रहे थे. तो आज आपकी आंतरिक ऊर्जा आपको सफलता के एक नए शिखर पर ले जाने के लिए पूरी तरह तैयार है. ऐसा रहेगा करियर और व्यापारकरियर और व्यापार की दृष्टिकोण से आज का दिन बेहद भाग्यशाली रहने वाला है. जाने-माने ज्योतिषाचार्य रूपेश चौबे के अनुसार, आज नौकरीपेशा और व्यापारी दोनों ही वर्ग के लोगों को उन्नति के शानदार अवसर प्राप्त हो सकते हैं. कार्यस्थल पर आपको कोई नई और बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है, जो भविष्य में आपके पद और प्रतिष्ठा में वृद्धि करेगी. व्यापार में भी नए सौदे और बड़ा मुनाफा मिलने के मजबूत योग बन रहे हैं. हालांकि, आपको सहकर्मियों या साझेदारों के साथ किसी भी तरह की व्यर्थ बहसबाजी से बचना होगा. नहीं तो हाथ आया मौका निकल सकता है. आज होगा अचानक धन लाभआर्थिक मोर्चे पर आज का दिन आपके पक्ष में झुका हुआ दिखाई दे रहा है. वृश्चिक राशि के जातकों को आज अचानक कहीं से धन लाभ हो सकता है या फिर लंबे समय से अटका हुआ पुराना पैसा वापस मिल सकता है. आर्थिक स्थिति मजबूत होने से मन प्रसन्न रहेगा. लेकिन इसके साथ ही सितारों की यह भी चेतावनी है कि आज के दिन किसी भी प्रकार का बड़ा जोखिम लेने से सख्त परहेज करें. सट्टेबाजी या बिना सोचे-समझे किए गए निवेश से आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है, इसलिए सतर्कता बनाए रखें. कैसा रहेगा पारिवारिक और प्रेम संबंध?पारिवारिक जीवन और प्रेम संबंधों की बात करें तो आज आपके घर-परिवार में खुशियों का माहौल बना रहेगा.  जीवनसाथी और परिवार के सदस्यों के साथ आपसी तालमेल और प्रेम गहरा होगा. जिससे मानसिक शांति मिलेगी. आज के दिन को और अधिक शुभ बनाने के लिए आपका लकी रंग लाल और लकी नंबर 8 रहेगा. आज के विशेष उपाय के रूप में आपको हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए और काले कुत्ते को रोटी खिलानी चाहिए. अंत में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यदि आज आप पूरे दिन अपना आत्मविश्वास बनाए रखते हैं, तो हर परिस्थिति आपके फेवर में रहेगी. About the Author Amit ranjan मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Sitamarhi,Bihar Source link

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plant these auspicious tree during nautapa for prosperity | नौतपा में इन...

Auspicious Plants During Nautapa: सूर्यदेव के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते ही नौतपा की शुरुआत हो चुकी है. नौतपा गर्मियों के नौ सबसे गर्म दिनों का समय होता है, जो ना केवल मौसम की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं बल्कि ज्योतिष और वास्तु शास्त्र में भी इसका विशेष महत्व है. इस दौरान कुछ खास पौधों को लगाना बेहद शुभ माना जाता है, क्योंकि ये पौधे ना सिर्फ पर्यावरण को शुद्ध करते हैं बल्कि घर में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा भी लाते हैं. इन पौधों को लगाने से आर्थिक स्थिरता, स्वास्थ्य लाभ और पारिवारिक सौहार्द में वृद्धि होती है. साथ ही, ये पौधे घर को ठंडक प्रदान करते हैं और नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर वास्तु दोषों को कम करने में मदद करते हैं. 2 जून तक चलेगा नौतपानौतपा 25 जून से शुरू होकर 2 जून तक चलने वाला है. जब सूर्यदेव रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं. इस साल 25 मई को सुबह 3:27 बजे सूर्यदेव रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश कर चुके हैं और वह इस नक्षत्र में 8 जून तक रहेंगे. इसके बाद वह मृगशिरा नक्षत्र में प्रवेश कर जाएंगे. सूर्यदेव रोहिणी नक्षत्र में लगभग 15 दिन तक रहेंगे लेकिन शुरुआती नौ दिन सूर्य देव की तपिश पृथ्वी पर अधिक पड़ती है, जिससे मौसम में गर्मी बढ़ जाती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि नौतपा में कुछ खास पौधे लगाने से घर में सुख-समृद्धि आती है और जीवन की कई समस्याएं दूर हो सकती हैं? आइए जानते हैं इन शुभ पौधों के बारे में. पीपल का पेड़: ज्योतिष शास्त्र में पीपल को बेहद पवित्र माना जाता है. मान्यता है कि इसमें भगवान विष्णु, ब्रह्मा और शिव का वास होता है. नौतपा में पीपल का पेड़ लगाने से पितरों का आशीर्वाद मिलता है और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है. शमी का पौधा: शमी को शनिदेव का प्रतीक माना जाता है और नौतपा में लगाने की सलाह दी जाती है. शमी का पौधा लगाने से कुंडली में शनि की स्थिति मजबूत होती है और जीवन की परेशानियां कम होती हैं. तुलसी का पौधा: सनातन धर्म में तुलसी को मां लक्ष्मी का रूप माना जाता है. वास्तु विशेषज्ञों के मुताबिक तुलसी का पौधा नौतपा में लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है. घर में तुलसी लगाने से आर्थिक स्थिति मजबूत होती है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है. आंवला का पेड़: आंवला में भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी का वास माना जाता है. इसे लगाने से अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य मिलता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. केले का पेड़: ज्योतिषाचार्यों के अनुसार केले का पौधा लगाने से भगवान विष्णु और गुरु ग्रह की कृपा प्राप्त होती है. इससे घर में समृद्धि और वैवाहिक सुख बढ़ता है. वहीं चमेली और मोगरा जैसे सुगंधित पौधे वातावरण को शुद्ध करने के साथ मानसिक शांति भी प्रदान करते हैं. इन पेड़ को भी लगाएंइसके अलावा, नौतपा में नीम, बिल्वपत्र, बरगद, अशोक, इमली और आम के पेड़ लगाने से भी पापों से मुक्ति मिलती है, जिससे जीवन की समस्याएं कम होती हैं. ये पौधे ना केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि पर्यावरण को भी शुद्ध रखते हैं. उग्र रूप में होते हैं सूर्यदेवबता दें कि नौतपा के दौरान सूर्यदेव अपने उग्र रूप में होते हैं, जिससे धरती पर गर्मी बढ़ जाती है, लेकिन यह समय आध्यात्मिक और पर्यावरणीय दृष्टि से भी खास है. इन पौधों को लगाकर आप ना केवल अपने घर को हरा-भरा बना सकते हैं, बल्कि सुख, समृद्धि और सकारात्मकता भी ला सकते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि नौतपा के दौरान पौधों की नियमित देखभाल और जल अर्पित करने से शुभ फल और अधिक बढ़ जाते हैं. धार्मिक दृष्टि से यह समय प्रकृति से जुड़ने और हरियाली बढ़ाने के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण माना गया है. Source link

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शुरू हो चुका नौतपा! अब से 2 जून तक अपने चरम पर...

होमवीडियोधर्म शुरू हो चुका नौतपा! अब से 2 जून तक अपने चरम पर रहेगी गर्मी, अगले 9 दिन संभलकर   Nautapa 2026: देश भर में गर्मी अपने चरम पर है और इसी बीच शुरू हो चुका है नौतपा, यानी साल का सबसे तपता हुआ दौर. माना जाता है कि ये 9 दिन प्रकृति के लिए बेहद अहम होते हैं, जब सूरज की तपिश खेतों, फसलों और मौसम के मिजाज को तय करती है. नौतपा 25 जून से शुरू हो चुका है और 2 जून तक रहेगा. नौतपा हिंदू पंचांग और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार साल के वे 9 दिन होते हैं, जब भीषण गर्मी पड़ती है. इस दौरान सूर्य देव पृथ्वी के सबसे नजदीक होते हैं, जिससे तापमान अपने चरम पर पहुंच जाता है. ज्योतिषीय गणना के अनुसार, जब सूर्य देव रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तब से नौतपा की शुरुआत होती है. सूर्य इस नक्षत्र में कुल 15 दिनों तक रहते हैं, लेकिन शुरुआती 9 दिनों में सूर्य का प्रभाव सबसे खतरनाक होता है, इसलिए इसे नौतपा कहा जाता है देखिए रिपोर्ट… न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

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जम्मू में ‘लुंगी गैंग’ की दहशत, रात में करते हैं घरों की...

होमताजा खबरदेश जम्मू में ‘लुंगी गैंग’ की दहशत, रात में करते हैं घरों की रेकी, फ‍िर… Last Updated:May 25, 2026, 20:41 IST जम्मू में इन दिनों संदिग्ध ‘लुंगी गैंग’ को लेकर दहशत का माहौल है. आरोप है कि यह गैंग रात के अंधेरे में कॉलोनियों और घरों की रेकी करता है और मौका मिलते ही वारदात को अंजाम देता है. कई इलाकों में लोगों ने संदिग्ध गतिविधियों के वीडियो भी शेयर किए हैं, जिसके बाद पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं. जम्‍मू में लुंगी गैंग की दशहत है. जम्मू के सैनिक कॉलोनी इलाके में बीती रात कुछ संदिग्ध युवक लुंगी पहनकर गलियों और घरों के आसपास घूमते नजर आए, जिसके बाद इलाके में दहशत का माहौल बन गया. स्थानीय लोगों का आरोप है कि ये युवक घरों की रेकी कर रहे थे और देर रात संदिग्ध गतिविधियों में शामिल थे. इलाके के लोगों ने बताया कि कुछ युवक घरों के बाहर रुक-रुक कर इधर-उधर देख रहे थे, जिसके बाद लोगों को शक हुआ. कई लोगों ने इनकी वीडियो और तस्वीरें भी अपने मोबाइल में रिकॉर्ड की हैं. घटना के बाद स्थानीय लोग सतर्क हो गए हैं और रात के समय गश्त बढ़ाने की मांग कर रहे हैं. निवासियों ने पुलिस प्रशासन से इलाके में पेट्रोलिंग तेज करने और संदिग्ध लोगों की पहचान कर कार्रवाई करने की मांग की है. फिलहाल पुलिस की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लोगों को सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना देने की अपील की जा रही है. दो साल पहले यूपी में भी द‍िखा था खौफ इस तरह की घटनाओं को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में पहले भी अफवाहें और डर का माहौल बनता रहा है. साल 2018 में मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक में “लुंगी गैंग” को लेकर कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे, जिनमें दावा किया गया था कि कुछ लोग रात में कॉलोनियों की रेकी कर चोरी और लूटपाट की वारदातों को अंजाम देते हैं. वहीं 2022 में उत्तर प्रदेश के कुछ शहरों और दिल्ली-एनसीआर के इलाकों में भी इसी तरह के संदिग्ध गिरोह की चर्चाएं सामने आई थीं. हालांकि कई मामलों में पुलिस जांच के बाद अफवाह और वास्तविक घटनाओं में फर्क भी सामने आया था, लेकिन रात में संदिग्ध तरीके से घूमते लोगों ने स्थानीय निवासियों में डर जरूर पैदा किया था. युवाओं की टीमें कर रहीं गश्त जम्मू के सैनिक कॉलोनी इलाके में सामने आई ताजा घटना के बाद लोगों ने खुद ही रात में निगरानी बढ़ानी शुरू कर दी है. कई मोहल्लों में युवकों की टीमें बनाकर रात के समय गश्त की जा रही है ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत नजर रखी जा सके. स्थानीय लोगों का कहना है कि हाल के दिनों में चोरी और रेकी की घटनाओं की खबरों के कारण लोग पहले से ही सतर्क हैं, ऐसे में देर रात अज्ञात युवकों का गलियों में घूमना चिंता बढ़ाने वाला है. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद आसपास के इलाकों में भी लोग अलर्ट हो गए हैं. वायरल वीड‍ियो की पड़ताल फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है और वायरल वीडियो की पड़ताल की जा रही है. अधिकारियों का कहना है कि बिना पुष्टि के किसी भी तरह की अफवाह फैलाने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे अनावश्यक दहशत फैल सकती है. पुलिस ने लोगों से अपील की है कि अगर कोई संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि दिखाई दे तो तुरंत स्थानीय थाने या कंट्रोल रूम को सूचना दें. साथ ही रात के समय अकेले बाहर निकलने से बचने और मोहल्लों में सीसीटीवी व सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रखने की सलाह भी दी गई है. About the Author Gyanendra Mishra Mr. Gyanendra Kumar Mishra is associated with hindi.news18.com. working on home page. He has 20 yrs of rich experience in journalism. He Started his career with Amar Ujala then worked for ‘Hindustan Times Group…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Jammu,Jammu,Jammu and Kashmir Source link

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why black tshirt feels hotter but black umbrella protects from sun rays...

Last Updated:May 25, 2026, 19:56 IST Black Clothes vs Black Umbrella Summer: ब्लैक टीशर्ट पहनना अपने आप में गर्मी को सोखने के बराबर है. लेकिन दूसरी तरफ जब धूप से बचने की बात आती है तो बाजार में सबसे ज्यादा काले रंग के छाते नजर आते हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि अगर ब्लैक रंग गर्मी बढ़ाता है तो फिर छाता काला क्यों बनाया जाता है? पटना: गर्मी शुरू होते ही अक्सर लोगों को सलाह दी जाती है कि काले रंग के कपड़े पहनने से बचें, क्योंकि ब्लैक रंग ज्यादा गर्मी सोखता है. नौतपा में तो धूप बहुत तेज होती है. ऐसे में ब्लैक टीशर्ट पहनना अपने आप में गर्मी को सोखने के बराबर है. लेकिन दूसरी तरफ जब धूप से बचने की बात आती है तो बाजार में सबसे ज्यादा काले रंग के छाते नजर आते हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि अगर ब्लैक रंग गर्मी बढ़ाता है तो फिर छाता काला क्यों बनाया जाता है? इस सवाल का जवाब खोजने के लिए लोकल 18 ने पटना साइंस कॉलेज के अस्सिटेंट प्रोफेसर डॉ. अखिलेश कुमार ने बातचीत की. उन्होंने बताया कि इस सवाल का जवाब साइंस में छिपा है. ब्लैक टीशर्ट और ब्लैक छाते का काम अलग-अलग होता है, इसलिए दोनों का असर भी अलग होता है. आखिर क्या है इसके पीछे का साइंस प्रोफेसर डॉ. अखिलेश कुमार ने बताया कि काला रंग सूरज की रोशनी और अल्ट्रावॉयलेट किरणों को सबसे ज्यादा अवशोषित करता है. जब कोई व्यक्ति ब्लैक टीशर्ट पहनता है तो कपड़ा शरीर से सटा होता है. ऐसे में सूरज की गर्मी सीधे कपड़े से शरीर तक पहुंचती है और इंसान को ज्यादा गर्मी महसूस होती है. लेकिन छाते के मामले में स्थिति अलग होती है काला छाता धूप और यूवी किरणों को खुद सोख लेता है और उन्हें सीधे शरीर तक पहुंचने नहीं देता. चूंकि छाता सिर से कुछ दूरी पर होता है, इसलिए उसकी सतह पर जमा गर्मी सीधे शरीर को प्रभावित नहीं कर पाती. यही वजह है कि काला छाता धूप रोकने में ज्यादा असरदार माना जाता है. काला छाता ज्यादा कारगर डॉ. अखिलेश कुमार आगी बताते हैं कि काले रंग का छाता हल्के रंग के मुकाबले ज्यादा यूवी प्रोटेक्शन देता है. हमारे शरीर से कुछ फिट की ऊंचाई पर होता है. इसीलिए हमलोगों को गर्मी महसूस नहीं होने देता जबकि टीशर्ट हमारे शरीर से बिल्कुल सटा हुआ है. यही वजह है कि चिलचिलाती धूप में लोग भले ही ब्लैक टीशर्ट पहनने से बचें, लेकिन काले छाते को सबसे भरोसेमंद साथी मानते हैं. हल्के रंग और कॉटन फैब्रिक बेस्ट एक्सपर्ट के मुताबिक भीषण गर्मी में हल्के रंग और कॉटन के कपड़े सबसे बेहतर माने जाते हैं. कॉटन का फैब्रिक शरीर से निकलने वाले पसीने को आसानी से सोख लेता है. इससे त्वचा पर चिपचिपाहट कम होती है. वहीं जब हल्की हवा चलती है तो पसीना जल्दी सूखता है और शरीर को ठंडक महसूस होती है. इसके अलावा सफेद, क्रीम या अन्य हल्के रंग के कपड़े सूरज की किरणों को काफी हद तक रिफ्लेक्ट कर देते हैं. इससे शरीर कम गर्म होता है और तेज धूप में भी राहत मिलती है. यही कारण है कि गर्मियों में लोग लाइट कलर और सूती कपड़ों को ज्यादा प्राथमिकता देते हैं. About the Author Amit ranjan मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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Padma Awards 2026 Live: धर्मेंद्र, अलका याग्निक, ममूटी, शिबू सोरेन… 131 हस्तियां...

होमताजा खबरदेश धर्मेंद्र, शिबू सोरेन.. 131 हस्तियां को पद्म सम्‍मान, जानें लिस्‍ट में और कौन Last Updated:May 25, 2026, 18:28 IST Padma Awards 2026: देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शामिल पद्म पुरस्कार आज राष्ट्रपति भवन में आयोजित भव्य समारोह में प्रदान किया जा रहा है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली हस्तियों को पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री से सम्मानित कर रही हैं. इस साल कुल 131 पद्म पुरस्कारों को मंजूरी दी गई है, जिनमें 5 पद्म विभूषण, 13 पद्म भूषण और 113 पद्म श्री शामिल हैं. सूची में 19 महिलाएं और 16 मरणोपरांत सम्मान शामिल हैं. इसके अलावा, विदेशी, एनआरआई, पीआईओ, ओसीआई श्रेणी के 6 नाम भी शामिल हैं. Padma Awards 2026 Live: देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शामिल पद्म पुरस्कार 2026 आज राष्ट्रपति भवन में आयोजित भव्य समारोह में प्रदान किए जा रहे हैं. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली हस्तियों को पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित कर रही हैं. हर साल गणतंत्र दिवस के अवसर पर घोषित होने वाले ये सम्मान देश की प्रतिष्ठित उपलब्धियों का प्रतीक माने जाते हैं. इस वर्ष कुल 131 पद्म पुरस्कारों को मंजूरी दी गई है. इनमें 5 पद्म विभूषण, 13 पद्म भूषण और 113 पद्म श्री पुरस्कार शामिल हैं. इस सूची में 19 महिलाएं भी शामिल हैं. इसके अलावा 6 विदेशी, एनआरआई, पीआईओ और ओसीआई श्रेणी के लोगों को भी सम्मानित किया जाएगा. 16 पुरस्कार मरणोपरांत दिए जा रहे हैं, जो अपने क्षेत्र में असाधारण योगदान देने वाले व्यक्तियों को समर्पित हैं. पद्म पुरस्कार कला, साहित्य, शिक्षा, चिकित्सा, विज्ञान, सामाजिक कार्य, खेल, व्यापार, उद्योग और सिविल सेवा समेत कई क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोगों को दिए जाते हैं. पद्म विभूषण असाधारण और विशिष्ट सेवा के लिए, पद्म भूषण उच्च कोटि की विशिष्ट सेवा के लिए तथा पद्म श्री किसी भी क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया जाता है. About the Author Anoop Kumar MishraAssistant Editor Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at News18 Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation, defence, paramilitary forces, international security affairs…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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Rajouri Encounter LIVE। Rajouri Security Forces Operation Live। LIVE: राजौरी के जंगलों...

होमताजा खबरदेश LIVE: राजौरी के जंगलों में गुरिल्ला वॉर… छिप-छिपकर गांव बदल रहे आतंकी Last Updated:May 25, 2026, 17:21 IST Rajouri Encounter Live Update: जम्मू-कश्मीर के राजौरी में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच भीषण मुठभेड़ जारी है. आतंकी सेना को छकाने के लिए गम्भीर गली और मंजकोट के जंगलों के रास्ते लगातार अपना ठिकाना बदलकर ‘थ अड्डा’ इलाके में पहुंच गए हैं. लगातार लोकेशन बदलने से सेना की चुनौतियां बढ़ गई हैं. फिलहाल सुरक्षाबलों ने 2-3 आतंकियों को चारों तरफ से घेर लिया है और दोनों ओर से ताबड़तोड़ गोलीबारी जारी है. सेना ऑपरेशन चला रही है. (Representational Picture) जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में आतंकियों के खिलाफ सुरक्षाबलों का बड़ा ऑपरेशन चल रहा है, लेकिन घने जंगलों और पहाड़ों का फायदा उठाकर आतंकी लगातार अपनी लोकेशन बदल रहे हैं. पिछले तीन दिनों के भीतर आतंकियों ने सेना को छकाने के लिए एक बार फिर अपना ठिकाना (इलाका) बदल लिया है. सुरक्षा सूत्रों के मुताबिक, आतंकी गम्भीर गली के रास्ते मंजकोट इलाके में दाखिल हुए और फिर घने जंगलों का सहारा लेते हुए ‘थ अड्डा’ क्षेत्र की तरफ बढ़ गए हैं. आतंकियों द्वारा लगातार गांव और ठिकाने बदलने की इस रणनीति ने सुरक्षाबलों के लिए चुनौतियां काफी बढ़ा दी हैं. इस बीच सेना और स्थानीय पुलिस ने पूरे इलाके को चारों तरफ से घेर लिया है और दोनों ओर से रह-रह कर ताबड़तोड़ गोलीबारी हो रही है. राजौरी एनकाउंटर लाइव अपडेट्स आतंकियों की पैंतरेबाज़ी: राजौरी के घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ियों का फायदा उठाकर आतंकी लगातार अपनी लोकेशन बदल रहे हैं. पिछले तीन दिनों में गम्भीर गली के रास्ते मंजकोट होते हुए वे ‘थ अड्डा’ इलाके में जा छिपे हैं, जिससे सेना की मुश्किलें बढ़ गई हैं जंगलों में भारी घेराबंदी: आतंकियों के लगातार गांव और ठिकाने बदलने की रणनीति को नाकाम करने के लिए सेना और स्थानीय पुलिस ने पूरे क्षेत्र को चारों तरफ से कॉर्डन कर लिया है. सुरक्षा एजेंसियों ने आतंकियों के भागने के सभी रास्ते बंद कर दिए हैं. इलाके में भारी दहशत: जंगलों में दोनों ओर से रुक-रुक कर हो रही ताबड़तोड़ गोलीबारी और धमाकों की गूंज से पूरा इलाका दहल उठा है. मुठभेड़ वाली जगह के आसपास के गांवों में रहने वाले स्थानीय नागरिक इस गोलाबारी से बेहद डरे और सहमे हुए हैं. शनिवार से जारी तलाश: सैन्य अधिकारियों के मुताबिक इन आतंकियों से सुरक्षाबलों का पहला सामना बीते शनिवार को हुआ था, जब वे एक प्राकृतिक हाइडआउट में छिपे थे. तब वे घने कोहरे की आड़ में भाग निकले थे, लेकिन सेना लगातार उनका पीछा कर रही थी. राजौरी के जंगलों में एक बार फिर सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच भीषण मुठभेड़ शुरू हो गई है. ताबड़तोड़ गोलियों की गूंज से पूरा इलाका दहल उठा है और आसपास के गांवों में रहने वाले स्थानीय लोगों के बीच गहरे डर का माहौल बना हुआ है. सैन्य अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षाबलों ने घने जंगलों में छिपे 2 से 3 आतंकियों को पूरी तरह से घेर लिया है. बताया जा रहा है कि बीते शनिवार को भी इसी क्षेत्र में आतंकियों के साथ पहली मुठभेड़ हुई थी, जहां आतंकी जंगल के बीच प्राकृतिक गुफाओं और पेड़ों की आड़ में बने एक हाइडआउट (ठिकाने) में छिपे हुए थे. शनिवार की मुठभेड़ के बाद आतंकी घने कोहरे और जंगलों का फायदा उठाकर वहां से खिसक गए थे, लेकिन सुरक्षाबलों ने हार नहीं मानी और खोजी कुत्तों व आधुनिक उपकरणों की मदद से लगातार उनका पीछा किया. आज एक बार फिर सुरक्षाबलों का आतंकियों से आमना-सामना यानी संपर्क स्थापित हो गया, जिसके तुरंत बाद पूरे इलाके में सर्च ऑपरेशन को और अधिक तेज कर दिया गया है. आतंकी लगातार एक छोर से दूसरे छोर भाग रहे हैं, जिससे सेना को हर कदम फूंक-फूंक कर रखना पड़ रहा है. सुरक्षा एजेंसियां अतिरिक्त कुमुद बुलाकर घेराबंदी को मजबूत कर रही हैं ताकि आतंकियों को भागने का कोई रास्ता न मिले. About the Author Sandeep GuptaChief Sub Editor डिजिटल पत्रकारिता में खबरों की गहरी समझ रखने वाले संदीप गुप्ता वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. 16 वर्षों से सुदीर्घ पत्रकारीय सफर में इन्होंने अपनी कलम से जटिल विषयों को …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi Source link

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Inspiring Story: मजदूर बना मसीहा! ई-रिक्शा को बनाया स्कूल बस, बदल दी...

Inspiring Story: जमुई के एक टोला सेवक ने महादलित बच्चों की शिक्षा को लेकर जो किया वो एक नजीर बन गया है. जयकांत ने मुश्किल से अपनी पढ़ाई की, लेकिन वह नहीं चाहता कि उसके समाज के और बच्चों को भी पढ़ाई में मुश्किल आए. इसलिए उसने खुद के पैसों से एक ई-रिक्शा खरीद ली और उस से वह हर रोज बच्चों को घर से स्कूल लाता है और स्कूल से घर छोड़ने जाता है.  Source link

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Monday History Explained: आखिर मंडे को Monday क्यों कहते हैं? Moon और...

Last Updated:May 25, 2026, 14:57 IST मंडे यानी सोमवार… एक ऐसा दिन जिसे भारत में भगवान शिव और चंद्रदेव से जोड़ा जाता है, जबकि पश्चिमी दुनिया में इसका रिश्ता रोमन देवी लूना से रहा है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर सोमवार या मंडे शब्द की शुरुआत कहां से हुई? आइए जानें, अंग्रेजी के मंडे के नाम के पीछे छिपी पूरी ऐतिहासिक, धार्मिक और वैज्ञानिक कहानी. सोमवार सप्‍ताह का पहला दिन है या दूसरा, कहां से आया यह नाम, रोमन देवी से क्‍या है इसका कनेक्‍शन, बड़ी रोचक है पूरी कहानी. Monday Ka Itihas: मंडे यानी सोमवार… भारत में यह दिन भगवान शिव की आराधना का दिन माना जाता है. दूसरी तरफ यूरोप की बात करें, तो वहां कभी इस दिन को रोमन देवी ‘लूना’ से जोड़कर देखा जाता है. यूरोप में देवी लूना का मान्‍यता चंद्र देवी की है. वहीं आज की GenZ पीढ़ी की बात करें तो उनके लिए सोमवार का दिन ‘मंडे ब्‍लूज (Monday Blues)’ है. मंडे ब्‍लूज यानी जेंजीज का वह मनहूस दिन, जिस दिन उनकी वीकेंड की मस्‍ती खत्‍म हो गई है और काम का बोझ उनका इंतजार कर रहा है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर इस एक दिन को लेकर पूरी दुनिया की सोच इतनी अलग होने के बावजूद उसका आधार एक जैसा क्यों है? धर्म अलग, भाषा अलग, परंपराएं अलग… लेकिन मंडे का रिश्ता लगभग हर जगह चंद्रमा से ही जुड़ा हुआ है. भारत में यह ‘सोमवार’ कैसे बना और अंग्रेजी में ‘मंडे’ नाम कहां से आया? क्या यह नाम हमेशा से ऐसा ही था या समय के साथ बदलता गया? दिलचस्प बात यह है कि इस दिन की कहानी सिर्फ कैलेंडर तक सीमित नहीं है. इसके पीछे हजारों साल पुराना इतिहास छिपा है. कभी बेबीलोन के खगोलविदों ने ग्रहों और चंद्रमा के हिसाब से दिनों के नाम तय किए थे. फिर रोमन साम्राज्य ने इसे अपनी देवी ‘लूना’ से जोड़ दिया. बाद में जर्मनिक सभ्यताओं ने अपने हिसाब से इसका नाम बदला और धीरे-धीरे ‘मोनांडेग (Monandæg)’ से यह ‘Monday’ बन गया. वहीं भारत में यह दिन सदियों से ‘सोमवार’ के नाम से जाना जाता रहा. आइए अब जानते हैं कि आखिर ‘Monday’ नाम की शुरुआत कैसे हुई और क्यों पूरी दुनिया में इसका रिश्ता चंद्रमा से जुड़ गया. सोमवार यानी मंडे से जुड़ी 5 खास बातें आपको कर देंगी हैरान बेबीलोन से आए ये सात दिन: सात दिनों के सप्ताह की अवधारणा सबसे पहले मेसोपोटामिया में बेबीलोनियन खगोलविदों ने विकसित की थी. लगभग 600 ईसा पूर्व में उन्होंने सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र और शनि नामक सात ग्रहों के नाम पर सात दिनों के नाम रखे थे. यह पद्धति इतनी वैज्ञानिक थी कि बाद में रोमन और यूनानियों ने इसे अपना लिया और अपने देवताओं से जोड़ दिया. इसमें चंद्रमा को सबसे पहले स्‍थान में रखा गया, लिहाजा सप्‍ताह के पहले दिन का नाम सोमवार यानी मंडे हुआ. रोमन देवी लूना का दिन: जब रोमन साम्राज्य ने सात दिनों वाले सप्ताह की व्यवस्था को अपनाया, तब उन्होंने सोमवार को अपनी चंद्र देवी ‘लूना’ को समर्पित कर दिया. रोमन मान्यता के अनुसार, लूना रात, शांति और चंद्रमा की शक्ति का प्रतीक थीं. लैटिन भाषा में इस दिन को ‘डाइस लूने (Dies Lunae)’ कहा गया, जिसका शाब्दिक अर्थ है ‘चंद्रमा का दिन’. माना जाता है कि इसी नाम से आगे चलकर अंग्रेजी का शब्द ‘Monday’ बना. रोमन सभ्यता में चंद्रमा को भावनाओं, ऊर्जा और नए आरंभ का प्रतीक माना जाता था, इसलिए सोमवार को एक नई शुरुआत के दिन के रूप में भी देखा जाता था. 321 ईस्वी में कानून तौर पर तय हुआ मंडे नाम: 7 मार्च, 321 ईस्वी को रोमन सम्राट कॉन्सटेंटाइन द ग्रेट ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया. उन्होंने पूरे रोमन साम्राज्य में सात दिनों का सप्ताह अनिवार्य कर दिया. साथ ही, यह तय किया कि रविवार सप्ताह का पहला दिन होगा, जबकि मंडे उसका दूसरा दिन. यह वह दौर था जब ‘डाइस लूने’ को आधिकारिक मान्यता मिली और बाद में पूरी पश्चिमी दुनिया का कैलेंडर इसी के अनुसार ढल गया. जर्मनिक देवता ‘मणि’ और ‘मोनांडेग’ का कनेक्‍शन: जब रोमन साम्राज्य का पतन हुआ और जर्मनिक जनजातियों (एंग्लो-सैक्सन) ने ब्रिटेन पर कब्जा किया, तो उन्होंने रोमन कैलेंडर को तो अपना लिया, लेकिन देवताओं को बदल दिया. रोमन लूना की जगह उनके अपने चंद्र देवता ‘मणि’ (Māni) आ गए. इस तरह लैटिन ‘Dies Lunae’ का अनुवाद पुरानी अंग्रेजी में ‘मोनांडेग (Monandæg)’ हुआ, जो आज का ‘मंडे’ है. भारत में चंद्र देवता और शिव का मिलन: जहां पश्चिम में यह नाम बदलता रहा, वहीं प्राचीन भारत में यह दिन हमेशा ‘सोमवार’ के नाम से जाना जाता था. ‘सोम’ का अर्थ चंद्र देवता से है. हिंदू धर्म में यह दिन भगवान शिव को समर्पित है, क्योंकि उनके मस्तक पर चंद्रमा विराजमान है. हजारों साल पुरानी यह परंपरा आज भी उतनी ही प्रासंगिक है. साथ ही, यह साबित करती है कि भारत में दिनों का नामकरण खगोल विज्ञान और आध्यात्मिकता का अद्भुत मिश्रण था. सोमवार के नाम और प्रभाव से जुडे़ कुछ रोचक पहलू जापान से लेकर जर्मनी तक चंद्रमा है केंद्र: क्या आपने कभी सोचा है कि जापानी या कोरियाई भाषा में सोमवार का क्या अर्थ होता है? जापानी में इसे ‘गेत्सुयोबी (Getsuyōbi)’ कहा जाता है, जिसमें ‘गेत्सु (Getsu)’ का मतलब चंद्रमा होता है. वहीं जर्मन भाषा में Monday को ‘मोंटाग (Montag)’ कहा जाता है, जो प्राचीन जर्मनिक चंद्र देवता ‘मानो (Mano)’ के नाम से जुड़ा माना जाता है. दिलचस्प बात यह है कि दुनिया की कई प्रमुख भाषाओं और संस्कृतियों ने इस दिन को चंद्रमा से जोड़कर देखा. भले ही अलग-अलग देशों में देवताओं के नाम और मान्यताएं अलग रहीं, लेकिन सोमवार और चंद्रमा का रिश्ता लगभग हर सभ्यता में किसी न किसी रूप में दिखाई देता है. पुर्तगाली और अरबी में कहा गया ‘दूसरा दिन’: सभी संस्कृतियों ने मूर्तिपूजक नामों को स्वीकार नहीं किया. ईसाई धर्म के प्रभाव के चलते पुर्तगाली भाषा में सोमवार को ‘सेगुंडा-फेइरा (Segunda-feira)’ कहा जाता है, जिसका अर्थ है ‘दूसरा दिन’ यानी रविवार के बाद आने वाला दिन. इसी तरह, अरबी में इसे ‘अल-इथनैन (Al-Ithnayn)’ कहा जाता है, जिसका मतलब भी ‘दूसरा दिन’ ही होता है. यह बदलाव जानबूझकर किया गया

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‘एक साल में गिर जाएगी मोदी सरकार’, राहुल गांधी के दावे के...

होमताजा खबरदेश ‘एक साल में गिरेगी मोदी सरकार’, राहुल गांधी के दावे में तर्क या बस हवा-हवाई? Last Updated:May 25, 2026, 14:10 IST Rahul Gandhi Claims: विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने दावा किया कि एक साल में मोदी सरकार गिर जाएगी. लेकिन वह इतनी बड़ी बात किस आधार पर कह रहे हैं. क्या वह देश में किसी अराजक स्थिति की बात कर रहे हैं? वैसे मौजूदा वक्त को देखते हुए ऐसा लग नहीं रहा कि मोदी सरकार की लोकप्रियता और एनडीए गठबंधन के भीतर ऐसा कुछ भी है जिससे सरकार पर संकट हो. राहुल गांधी की ओर से पीएम मोदी की सरकार गिरने की भविष्यवाणी बेहद बचकानी लगती है. Rahul Gandhi Claims: विपक्ष के नेता राहुल गांधी का यह दावा कि अगले एक साल में पीएम नरेंद्र मोदी की सरकार गिर जाएगी, राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है. कांग्रेस की एक बैठक में दिए गए इस बयान को बीजेपी ने पूरी तरह हवा-हवाई और राजनीतिक निराशा से जुड़ा बयान बताया है. सवाल यही है कि क्या राहुल गांधी के इस दावे के पीछे कोई ठोस राजनीतिक आधार है या फिर यह सिर्फ विपक्षी कार्यकर्ताओं में जोश भरने की कोशिश है? अगर मौजूदा राजनीतिक हालात को देखें तो राहुल गांधी का दावा जमीन से ज्यादा राजनीतिक बयानबाजी जैसा नजर आता है. इसकी सबसे बड़ी वजह है कि केंद्र में एनडीए सरकार अभी भी मजबूत संख्या बल के साथ सत्ता में बनी हुई है. बीजेपी भले अकेले दम पर पहले जैसा आंकड़ा न लाई हो, लेकिन गठबंधन के साथ सरकार पूरी तरह स्थिर दिखाई देती है. सरकार पर किसी तरह का तत्काल राजनीतिक संकट नजर नहीं आता. दरअसल, हाल के महीनों में हुए कई चुनावों ने यह संकेत दिया है कि बीजेपी का जनाधार अभी भी बेहद मजबूत है. पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्यों में पार्टी को जनता का शानदार समर्थन मिला है. खासतौर पर बंगाल में बीजेपी ने अपनी राजनीतिक मौजूदगी को बेहद मजबूत किया है. असम में भी पार्टी और उसकी सरकार की पकड़ पहले से अधिक मजबूत नजर आ रही है. इन चुनावों ने यह संदेश दिया कि बीजेपी केवल हिंदी पट्टी तक सीमित पार्टी नहीं रह गई है, बल्कि पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत में भी उसका प्रभाव लगातार बढ़ रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता आज भी बीजेपी की सबसे बड़ी ताकत है. राष्ट्रीय स्तर पर मोदी का चेहरा अभी भी विपक्ष के मुकाबले कहीं ज्यादा प्रभावी माना जाता है. विपक्ष लगातार महंगाई, बेरोजगारी और पेपर लीक जैसे मुद्दे उठा रहा है, लेकिन इसके बावजूद मोदी की व्यक्तिगत लोकप्रियता में कोई कमी नहीं दिख रही. उनमें जनता का एक अटूट भरोसा दिखता है. यही वजह है कि बीजेपी लगातार चुनावी राजनीति में भी बढ़त बनाए हुए है. राहुल गांधी अपने बयान में आर्थिक असंतोष और युवाओं की नाराजगी को सरकार के खिलाफ माहौल बनने का कारण बता रहे हैं. कांग्रेस नीट पेपर लीक और छात्रों की परेशानी जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश कर रही है. लेकिन, सरकार ने इन मुद्दों पर भी त्वरित कदम उठाते हुए परीक्षा रद्द कर दी. ऐसे में ये मुद्दे भी अब प्रभावी नहीं रहे. वैसे भी भारतीय राजनीति का अनुभव बताता है कि केवल मुद्दों के आधार पर सरकारें नहीं गिरतीं. इसके लिए सत्ता पक्ष के भीतर बड़ा विभाजन, गठबंधन में दरार या व्यापक राजनीतिक संकट होना चाहिए. फिलहाल ऐसी कोई स्थिति दिखाई नहीं देती. इसके बावजूद अगर राहुल गांधी एक मजबूत सरकार के गिरने की भविष्यवाणी कर रहे हैं तो इससे उनकी राजनीतिक समझ पर सवाल उठ सकते हैं. विपक्ष की स्थिति भी बहुत मजबूत नहीं राहुल गांधी के बेतुके दावे के साथ विपक्ष की स्थिति भी बहुत मजबूत नहीं मानी जा रही. इंडिया गठबंधन के भीतर कई दलों के अपने-अपने क्षेत्रीय हित हैं और राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष अब तक कोई स्पष्ट चेहरा या ठोस वैकल्पिक एजेंडा पेश नहीं कर पाया है. कई राज्यों में कांग्रेस का संगठन लगातार कमजोर हुआ है. ऐसे में बीजेपी के मुकाबले विपक्ष की चुनौती फिलहाल बिखरी हुई नजर आती है. बीजेपी नेताओं ने भी राहुल गांधी के बयान को इसी नजरिए से देखा है. केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और सांसद संबित पात्रा जैसे नेताओं ने कहा कि विपक्ष जनता के जनादेश को स्वीकार नहीं कर पा रहा और इसलिए इस तरह के बयान दिए जा रहे हैं. असल में राहुल गांधी का बयान ज्यादा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश लगता है. कांग्रेस अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों में यह भरोसा बनाए रखना चाहती है कि बीजेपी को चुनौती दी जा सकती है. लेकिन मौजूदा राजनीतिक समीकरण, मोदी की लोकप्रियता, एनडीए का संख्या बल और विपक्ष की कमजोरी को देखते हुए यह दावा फिलहाल वास्तविकता से ज्यादा राजनीतिक कल्पना जैसा दिखाई देता है. About the Author संतोष कुमार न्यूज18 हिंदी में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत. मीडिया में करीब दो दशक का अनुभव. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आईएएनएस, बीबीसी, अमर उजाला, जी समूह सहित कई अन्य संस्थानों में कार्य करने का मौका मिला. माखनलाल यूनिवर्स…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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