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Dhanu Rashifal: पैतृक संपत्ति का सुख, ऑफिस में बढ़ेगा रुतबा! धनु वाले...

Last Updated:May 23, 2026, 00:03 IST Aaj ka Dhanu Rashifal 23 may 2026: धनु राशि के जातकों को आज ऑफिस में मान-सम्मान और पैतृक संपत्ति का बड़ा लाभ मिल सकता है. आर्थिक रूप से दिन मजबूत है, लेकिन सितारों की चाल को देखते हुए आज किसी भी तरह के निवेश से बचने की सलाह दी जाती है. पारिवारिक शांति के लिए गुस्से पर काबू रखें और भगवान विष्णु की पूजा करें. जानें राशिफल. जमुई. 23 मई 2026 के दिन कई राशि के जातकों पर ग्रहों का शुभ योग का असर पड़ने वाला है. ज्योतिषाचार्य पंडित शत्रुघ्न झा बताते हैं कि आज के दिन धन लाभ के कई अवसर मिलेंगे. जबकि आज कार्यस्थल पर बड़ी कामयाबी मिलने की भी संभावना है. ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि धनु राशि के जातकों पर आज गुरु, शुक्र, सूर्यदेव और बुध की मजबूत स्थिति का असर पड़ेगा. उन्होंने बताया कि आज आप अपने जीवन के कई बड़े फैसले भी कर सकते हैं. आर्थिक रूप से धनु राशि के जातकों का आज का दिन काफी अच्छा गुजरने वाला है. आज आपको अपने बिजनेस या पार्टनर बिजनेस के जरिए कोई बड़ा धन लाभ हो सकता है. आज आपको जल्दबाजी या गुस्से में आकर पैसा खर्च करने से बचना चाहिए. ऑफिस ने बना रहेगा अच्छा माहौल ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि धनु राशि के जातक जहां काम करते हैं वहां आज काफी अच्छा माहौल बना रहेगा. आज आप अपने बातचीत की शैली से बड़ी मुश्किलों को सुलझा सकेंगे, जिस कारण आज आप ऑफिस में काफी प्रतिष्ठा भी प्राप्त करेंगे. अगर आप पढ़ाई-लिखाई करते हैं या किसी तरह की तैयारी से जुड़े हुए हैं, तो आज आप काफी शानदार प्रदर्शन करेंगे और आप अपने लक्ष्य को हासिल करने की तरफ और आगे बढ़ जाएंगे. ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि धनु राशि के जातकों को आज के दिन किसी भी तरह के निवेश इत्यादि से बचना चाहिए. आज आपको पैतृक संपत्ति का लाभ मिलेगा. अगर आपका कोई मामला कोर्ट-कचहरी के चक्कर में पड़ा हुआ है, तब आज उसमें आपको जीत मिल सकती है. धनु राशि के जातकों को आज किसी भी तरह के गृह कलह में नहीं पड़ना चाहिए.  सेहत और प्यार के लिए रहना होगा सावधान ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि धनु राशि के जातकों को आज अपने सेहत के प्रति काफी सावधान रहने की जरूरत है. साथ ही आप अपने लाइफ लाइफ को लेकर भी आज काफी धैर्यवान बन कर रहे. ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि धनु राशि के जातकों के पारिवारिक और वैवाहिक जीवन में किसी बात को लेकर आज विवाद पैदा हो सकता है. उन्होंने बताया कि आज आपको एक दूसरे के साथ काफी सामंजस्य बना कर काम करना चाहिए तथा आज अपने गुस्से पर पूर्ण नियंत्रण रखना चाहिए. धनु राशि के जातकों को आज अपने आंगन में तुलसी का पौधा लगाना चाहिए और उसकी पूजा करनी चाहिए. साथ ही भगवान विष्णु की पूजा करने से आज आपको सफलता मिल सकती है. धनु राशि के जातकों के लिए आज का शुभ अंक 5 रहने वाला है. About the Author Amit ranjan मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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धान की खेती में किसान करें गोबर खाद का इस्तेमाल, सालों तक...

होमताजा खबरकृषि धान की खेती में किसान करें गोबर खाद का इस्तेमाल, सालों तक उपजाऊ रहेगी मिट्टी Last Updated:May 22, 2026, 23:10 IST कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. शैलेंद्र गौतम अनुसार अगर मई महीने में किसान गोबर की सड़ी हुई खाद का सही तरीके से उपयोग करें तो मिट्टी की उर्वरक क्षमता बढ़ती है. धान की फसल बेहतर होती है. जैविक खाद से न सिर्फ जमीन की गुणवत्ता सुधरती है बल्कि उत्पादन भी बढ़ता है. मध्य प्रदेश में किसानों ने खरीफ सीजन की तैयारी शुरू कर दी है. जून के शुरुआती सप्ताह से धान की नर्सरी और बीज की बुवाई शुरू होने वाली है. ऐसे में कृषि विशेषज्ञ किसानों को खेत तैयार करते समय सड़ी हुई गोबर खाद के इस्तेमाल की सलाह दे रहे हैं. यदि किसान अभी से खेतों में जैविक खाद डालें तो मिट्टी की उर्वरक क्षमता बढ़ेगी और धान की फसल बेहतर उत्पादन देगी. सीधी कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. शैलेंद्र गौतम ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि धान की खेती के लिए खेत तैयार करते समय प्रति एकड़ करीब 200 से 250 क्विंटल सड़ी हुई गोबर खाद डालना फायदेमंद रहता है। इससे मिट्टी में सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी नहीं होती. फसल को प्राकृतिक रूप से पोषण मिलता है. उन्होंने कहा कि गोबर प्राकृतिक खाद का सबसे अच्छा स्रोत माना जाता है, जो मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने के साथ उसकी जल धारण क्षमता भी बढ़ाता है. धान की खेती में जैविक खाद का कमालडॉ. गौतम के अनुसार किसान ताजा गोबर सीधे खेत में डालने से बचें, क्योंकि इससे खेत में अधिक गर्मी पैदा हो सकती है. पौधों को नुकसान पहुंच सकता है. उन्होंने सलाह दी कि गोबर को कम से कम 2 से 3 महीने तक गड्ढे में सड़ाकर जैविक खाद तैयार करें. गेहूं की कटाई के बाद खाली खेतों में इस खाद को फैलाकर हल्की जुताई कर मिट्टी में मिला देना चाहिए. इससे खाद के पोषक तत्व सीधे जमीन तक पहुंचते हैं. मिट्टी अधिक उपजाऊ बनती है. मोड़ी गांव के किसान रामाशंकर कुशवाहा ने लोकल 18 को बताया कि किसान गोबर की खाद के साथ ढैंचा और सन जैसी हरी खाद वाली फसलें भी बो सकते हैं. कुछ समय बाद इन फसलों को खेत में पलट देने से मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है. इससे रासायनिक खाद की जरूरत कम होती है और खेती की लागत भी घटती है. मिट्टी रहेगी सालों तक उपजाऊउन्होंने कहा कि लगातार रासायनिक खाद के इस्तेमाल से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है, जबकि गोबर की खाद मिट्टी को फिर से उपजाऊ बनाने में मदद करती है.किसानों का मानना है कि जैविक खाद के इस्तेमाल से खेत में केंचुए और सूक्ष्म जीवों की संख्या बढ़ती है, जो मिट्टी को प्राकृतिक रूप से उपजाऊ बनाते हैं. वहीं प्रोफेसर अनुपम दुबे के अनुसार धान रोपाई से पहले यदि किसान गोबर की खाद का सही उपयोग करें तो फसल मजबूत होती है. उत्पादन में भी बढ़ोतरी देखने को मिलती है. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि जैविक खेती की ओर बढ़ना आने वाले समय में किसानों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Sidhi,Madhya Pradesh Source link

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पुलिस पर चली थीं तलवारें, अब सरकार ने हटा लिए केस! दंगाइयों...

होमताजा खबरदेश पुलिस पर चली थीं तलवारें, सरकार ने हटाए केस! दंगाइयों पर मेहरबान सिद्धारमैया Last Updated:May 22, 2026, 22:18 IST कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार एक बड़े विवाद में घिर गई है. साल 2022 में कलबुर्गी के अलंद में हुए ‘लाडले मशक दरगाह’ दंगों से जुड़े 7 गंभीर आपराधिक मामलों को सरकार ने वापस ले लिया है. इन मामलों में पुलिस पर जानलेवा हमला, हत्या का प्रयास और दंगा भड़काने जैसे संगीन आरोप शामिल थे. स्पीकर यूटी खादर की सिफारिश पर लिए गए इस फैसले से 100 से अधिक आरोपियों को राहत मिलेगी. इस कदम के बाद बीजेपी आक्रामक हो गई है और कांग्रेस सरकार पर अपराधियों और दंगाइयों को बचाने का गंभीर आरोप लगाया है. पुलिस पर तलवार चलाने वालों के केस वापस लिए सिद्धारमैया सरकार. बेंगलुरु: कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है. मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने एक ऐसा फैसला लिया है, जिस पर भारी सियासी घमासान मच गया है. सरकार ने साल 2022 में अलंद कस्बे के ‘लाडले मशक दरगाह’ में हुए भीषण दंगों से जुड़े 7 गंभीर आपराधिक मामलों को वापस लेने का आदेश दिया है. इस फैसले से दंगा भड़काने और पुलिस पर जानलेवा हमला करने के 100 से अधिक आरोपियों के खिलाफ दर्ज केस खत्म हो जाएंगे. यह विवाद मार्च 2022 का है. कैबिनेट के गोपनीय दस्तावेजों के मुताबिक, अलंद कस्बे में तनाव के दौरान बंदोबस्त में लगे पुलिस अधिकारियों पर हथियारों से लैस उग्र भीड़ ने हमला कर दिया था. भीड़ के हाथों में लोहे की रॉड, तलवारें और लाठियां थीं, और वे धार्मिक नारे लगाते हुए पुलिस की तरफ बढ़े थे. इस जानलेवा हमले (Attempt to murder) में एक डीएसपी (DSP) और एक कांस्टेबल गंभीर रूप से घायल हो गए थे. इसी मामले में मुख्य आरोपियों में से एक आकिब अंसारी पर हिंसा के दौरान पुलिस को धमकाने का भी आरोप है. स्पीकर यू.टी. खादर की सिफारिश पर एक्शन आश्चर्यजनक रूप से, इन संगीन मामलों को वापस लेने की सिफारिश कर्नाटक विधानसभा के स्पीकर यू.टी. खादर (U.T. Khader) द्वारा की गई थी. इन मामलों में दंगा करने (Rioting), हत्या का प्रयास और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसी गंभीर धाराएं लगी हुई थीं. आलोचकों का आरोप है कि राज्य सरकार ने बिना किसी शोर-शराबे के इन दंगा मामलों को ‘विरोध-प्रदर्शन’ से जुड़े सामान्य मामलों के साथ क्लब कर दिया, ताकि किसी का ध्यान इस पर न जाए. बीजेपी का सरकार पर तीखा हमला इस फैसले के सामने आते ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने सिद्धारमैया सरकार पर चौतरफा हमला बोल दिया है. बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया है कि यह पहली बार नहीं है जब कांग्रेस सरकार अपराधियों और दंगाइयों का बचाव कर रही है. बीजेपी का कहना है कि सरकार तुष्टिकरण की राजनीति के तहत पुलिस का मनोबल गिरा रही है और कानून व्यवस्था से खिलवाड़ कर रही है. वहीं दूसरी ओर, राज्य के गृह मंत्री ने इस फैसले का बचाव करते हुए इसे एक सामान्य कानूनी प्रक्रिया बताया है. कर्नाटक सरकार ने हाल ही में कौन से विवादित आपराधिक मामले वापस लिए हैं? कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार ने साल 2022 में कलबुर्गी जिले के अलंद कस्बे में हुए ‘लाडले मशक दरगाह’ दंगों से जुड़े 7 गंभीर आपराधिक मामलों को वापस ले लिया है. अलंद दंगे में आरोपियों पर किस तरह के आरोप लगे थे? कैबिनेट दस्तावेजों के अनुसार, आरोपियों पर तलवारों और रॉड से लैस होकर ड्यूटी पर तैनात पुलिस अधिकारियों पर जानलेवा हमला करने, हत्या का प्रयास करने और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के गंभीर आरोप थे. इन दंगा मामलों को वापस लेने की सिफारिश किसने की थी? इन मामलों को वापस लेने की सिफारिश कर्नाटक विधानसभा के स्पीकर यू.टी. खादर (U.T. Khader) द्वारा की गई थी. इस फैसले पर बीजेपी की क्या प्रतिक्रिया रही है? बीजेपी ने इस फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए कांग्रेस सरकार पर तुष्टिकरण की राजनीति करने और अपराधियों व दंगाइयों का समर्थन कर पुलिस का मनोबल गिराने का आरोप लगाया है. About the Author Deep Raj DeepakSub-Editor Deep Raj Deepak working with News18 Hindi (hindi.news18.com/) Central Desk since 2022. He has strong command over national and international political news, current affairs and science and research-based news. …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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22 साल पहले बनी मिसाइल आज भी उतनी ही घातक, सेना ने...

होमताजा खबरदेश 22 साल पहले बनी मिसाइल आज भी उतनी ही घातक, सेना ने किया ‘फिटनेस टेस्‍ट’ Last Updated:May 22, 2026, 21:12 IST Agni-1 Test: भारत ने ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से शॉर्ट रेंज बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-1 का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है. सेना की स्ट्रैटेजिक फोर्सेज कमांड की देखरेख में 22 मई 2026 को हुए इस लॉन्च में मिसाइल के सभी तकनीकी और ऑपरेशनल मानक पूरी तरह खरे उतरे. यह परीक्षण देश की रणनीतिक हथियार क्षमता को मजबूत करने और दुश्मनों के खिलाफ मारक क्षमता को अचूक बनाने की दिशा में बड़ा कदम है. ख़बरें फटाफट अग्नि मिसाइल का सफल टेस्‍ट हुआ. साल 2004 में जब देश ने पहली बार अग्नि मिसाइल की ताकत देखी थी, तब से लेकर आज तक सरहद के पार न जाने कितने हुक्मरान बदल गए, दुश्मन ने कितनी ही नई चालें चल दीं. लेकिन भारत का यह पहला ‘परमाणु दूत’ आज 22 साल बाद भी उतना ही जवान, उतना ही खूंखार और उतना ही घातक है. शुक्रवार को ओडिशा के चांदीपुर में जब सेना की स्ट्रैटेजिक फोर्सेज कमांड ने अचानक इस मिसाइल को डिपो से निकालकर इसका कड़ा ‘फिटनेस टेस्ट’ लिया तो आसमान चीरती इसकी रफ्तार देखकर शायद पाकिस्तान के मिलिट्री हेडक्वार्टर में सन्नाटा पसर गया होगा. लोग सोच रहे थे कि यह मिसाइल पुरानी हो चुकी है लेकिन DRDO ने इसके भीतर नए जमाने का ऐसा ‘डिजिटल दिमाग’ और अचूक नेविगेशन फिट कर दिया है कि यह आज भी पलक झपकते ही पूरे पाकिस्तान को धूल चटाने का पूरा दम रखती है. युद्ध के मुहाने पर खड़े इस दौर में अग्नि-1 का यह दहाड़ना इस बात का सबूत है कि भारत का यह पुराना ब्रह्मास्त्र आज के आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम की धज्जियां उड़ाने के लिए पूरी तरह तैयार है. रक्षा मंत्रालय और स्ट्रैटेजिक फोर्सेज कमांड (SFC) की देखरेख में हुआ यह सफल परीक्षण सिर्फ एक मिसाइल का लॉन्च नहीं है बल्कि भारत के उस अटूट भरोसे और सैन्य आत्मनिर्भरता का प्रतीक है जो नो फर्स्ट यूज की नीति के बावजूद पलक झपकते ही दुश्मनों को राख करने का दम रखती है. भारत ने सैन्य क्षेत्र में अपनी मारक क्षमता का लोहा मनवाते हुए शुक्रवार, 22 मई 2026 को शॉर्ट रेंज बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-1 का इंटीग्रेटिड परीक्षण रेंज (ITR) से सफलतापूर्वक परीक्षण किया. रक्षा मंत्रालय द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार इस हाई-प्रोफाइल लॉन्च को सेना के स्ट्रैटेजिक फोर्सेज कमांड की देखरेख में अंजाम दिया गया. इस यूजर ट्रायल के दौरान मिसाइल सिस्‍टम्‍ के सभी ऑपरेशनल और तकनीकी मानकों को पूरी सटीकता के साथ परखा गया जो हर कसौटी पर पूरी तरह खरे उतरे. क्यों खास है अग्नि-1 का यह सफल परीक्षण?रक्षा अधिकारियों के मुताबिक, इस सफल परीक्षण ने अग्नि-1 सिस्‍टम की विश्वसनीयता और परिचालन तत्परता की पुष्टि की है. रक्षा मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर इस ऐतिहासिक उपलब्धि की घोषणा करते हुए कहा कि इस लॉन्च ने देश के रणनीतिक हथियारों की क्षमता और समग्र प्रतिरोधक मुद्रा में सेना के विश्वास को और मजबूत किया है. अग्नि-1 मिसाइल अपनी श्रेणी में बेहद घातक और कम समय में तैनात होने वाली मिसाइल है, जो दुश्मनों के ठिकानों को पल भर में तबाह करने की क्षमता रखती है. Short Range Ballistic Missile ‘Agni-1’ was successfully test-launched from the Integrated Test Range, Chandipur, Odisha on May 22, 2026. Conducted under the aegis of the Strategic Forces Command, the launch validated all operational and technical parameters, reaffirming the… — Ministry of Defence, Government of India (@SpokespersonMoD) May 22, 2026 Source link

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Harbhajan Singh Rajya Sabha controversy। ‘मैं बताऊंगा किसको कितना चढ़ावा गया’, गद्दार...

होमताजा खबरदेश ‘मैं बताऊंगा किसको कितना चढ़ावा गया’, गद्दार कहने पर चिढ़े भज्‍जी, क्‍या बोले? Last Updated:May 22, 2026, 20:06 IST Harbhajan Singh Gaddar Controversy: पूर्व क्रिकेटर और पंजाब से राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह ने आम आदमी पार्टी (AAP) पर बड़ा हमला बोलते हुए दावा किया है कि पंजाब की राज्यसभा सीटें बेची गई थीं. सोशल मीडिया पर ट्रोल किए जाने के बाद हरभजन ने तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि समय आने पर वह खुद खुलासा करेंगे कि किसको कितना चढ़ावा गया था और पंजाब को लूटने के लिए किसे कैसे मंत्री-संतरी बनाया गया. ख़बरें फटाफट हरभजन सिंह ने अपनी बात कही. क्रिकेट के मैदान में जब एक ‘टर्बिनेटर’ अपनी फिरकी छोड़ता है तो बड़े-बड़े सूरमाओं के पैर उखड़ जाते हैं. लेकिन इस बार पिच क्रिकेट की नहीं बल्कि राजनीति की है और हाथ में गेंद नहीं बल्कि सोशल मीडिया पर दागा गया एक ऐसा बारूद है जिसने पंजाब से लेकर दिल्ली तक के सियासी गलियारों को हिलाकर रख दिया है. बीजेपी नेता और राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह पर अपनी ही पुरानी पार्टी के वफादार ‘गद्दार’ होने का ठप्पा लगाते हैं. अब जवाब में भज्जी ने एक ऐसा पलटवार किया जो सीधे पार्टी के सबसे बड़े ‘सच’ और शुचिता के दावों पर सवाल खड़े करता है. हरभजन सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर खुद को ‘गद्दार’ कहे जाने पर सीधे आप के शीर्ष नेतृत्व को कटघरे में खड़ा करते हुए दावा किया है कि पंजाब की राज्यसभा सीटें भारी-भरकम रकम लेकर बेची गई थीं. हरभजन सिंह (भज्जी) ने विरोधी ट्रोलर्स और पार्टी कार्यकर्ताओं को खुली चुनौती दी है कि यदि उनके लोगों ने सच नहीं उगला तो वे खुद जनता के सामने इस बात का पर्दाफाश करेंगे कि राज्यसभा टिकट के बदले किसको कितना चढ़ावा और किसकी तरफ से गया था. इस सनसनीखेज खुलासे के बाद पंजाब से लेकर दिल्ली तक की सियासत में भूचाल आ गया है. गद्दार के टैग पर भज्जी का पलटवारदरअसल, इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब सोशल मीडिया पर देवेंदर यादव नाम के एक आप कार्यकर्ता ने हरभजन सिंह को ‘गद्दार’ बताते हुए सीधे निशाना साधा. पोस्ट में हरभजन सिंह से तीखा सवाल पूछा गया था कि, “जिस नेता को आप दिन-रात गाली देते हैं, उसकी दी हुई राज्यसभा सीट से आपने इस्तीफा क्यों नहीं दिया? भाजपा में जाने की आपकी क्या मजबूरी थी?” इसके साथ ही सोशल मीडिया पर हरभजन सिंह पर करोड़ों रुपये की बोली लगाए जाने के आरोप भी मढ़े गए. इन आरोपों पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए हरभजन सिंह ने पलटवार किया और लिखा, “समय आने पर तुम्हारे एक-एक शब्द का जवाब दिया जाएगा. मैंने तुम्हारे किसी नेता को गाली नहीं दी है. मैं अपनी जुबान क्यों गंदी करूं?” समय आने पर आपकी हर बात का जवाब दिया जाएगा । और मैं आपके किसी लीडर को गाली नहीं दी । अपनी जुबान क्यों गंदी करूँ मै । और मुझे ग़द्दार कहने वालो पहले अपने लोगो से पूछो पंजाब की राज्य सभा सीट कितने मे बेची थी । अगर ना बताए तो मैं आपको बताऊंगा किसको कितना चढ़ावा गया था और किसकी तरफ से… https://t.co/5sd2sxQDO7 Source link

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Ebola Outbreak 2026: कोरोना से कम संक्रामक पर 50% मृत्यु दर, इबोला...

नई दिल्ली: सेंट्रल अफ्रीका में फैले नए इबोला वायरस ने पूरी दुनिया को डरा दिया है. डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) और युगांडा में इंफेक्शन बहुत तेजी से पैर पसार रहा है. सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है और मामलों का ग्राफ लगातार ऊपर जा रहा है. एक्सपर्ट्स को डर है कि मई की शुरुआत में हुई एक ‘सुपर स्प्रेडर’ घटना के बाद यह वायरस कई देशों में फैल सकता है. इसी बीच वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के डायरेक्टर जनरल डॉ. टेड्रोस एडहानोम गेब्रिएसस ने एक ऐसी घोषणा की है, जिसने सबको चिंता में डाल दिया है. उनका कहना है कि इस नए इबोला आउटब्रेक से निपटने के लिए अगले 6 से 9 महीने तक कोई भी वैक्सीन उपलब्ध नहीं हो पाएगी. जब दुनिया के पास पहले से ही इबोला की वैक्सीन मौजूद है, तो इस बार ऐसा क्यों हो रहा है. आखिर क्यों मौजूदा मेडिकल साइंस इस नए खतरे के सामने बेबस नजर आ रही है. इसके पीछे एक बहुत बड़ा वैज्ञानिक कारण है, जिसे समझना बेहद जरूरी है. इबोला का इतिहास क्या है? इबोला वायरस की खोज पहली बार साल 1976 में हुई थी. यह एक बेहद खतरनाक और जानलेवा बीमारी है, जो इंसानों और प्राइमेट्स (जैसे चिंपैंजी और गोरिल्ला) को अपना शिकार बनाती है. WHO की रिपोर्ट बताती है कि यह वायरस चमगादड़, साही और प्राइमेट्स के जरिए इंसानों में आता है. इसके बाद यह मरीजों के खून, शारीरिक तरल पदार्थ (बॉडी फ्लूइड्स) और उनके कपड़ों के संपर्क में आने से दूसरे इंसानों में फैलता है. इस बीमारी की औसतन मृत्यु दर लगभग 50 परसेंट है. आज से करीब एक दशक पहले साल 2014 में वेस्ट अफ्रीका में इबोला का सबसे खतरनाक हमला हुआ था. उस आउटब्रेक में दुनिया भर में 11,000 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी. उस समय तबाही मचाने वाला वायरस इबोला का ‘जायरे स्ट्रेन’ (Zaire strain) था. वह इतिहास का सबसे बड़ा आउटब्रेक था, जो गिनी से शुरू होकर सिएरा लियोन और लाइबेरिया तक फैल गया था. जायरे स्ट्रेन का इलाज न होने पर मृत्यु दर 90 परसेंट तक पहुंच जाता है. यही वजह थी कि वैज्ञानिकों ने रात-दिन एक करके इस खास स्ट्रेन के खिलाफ दो बेहतरीन वैक्सीन और मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज तैयार कर ली थीं. बुंडिबुग्यो स्ट्रेन क्या है और यह क्यों खतरनाक है? मौजूदा संकट के पीछे असली विलेन इबोला का एक बिल्कुल अलग रूप है, जिसे ‘बुंडिबुग्यो स्ट्रेन’ (Bundibugyo strain) कहा जाता है. इंसानों को बीमार करने वाले इबोला के मुख्य रूप से चार स्ट्रेन हैं, जिनमें जायरे और बुंडिबुग्यो शामिल हैं. बुंडिबुग्यो स्ट्रेन का इतिहास बहुत छोटा है. इतिहास में इसके सिर्फ दो आउटब्रेक देखे गए हैं. पहला साल 2007 में युगांडा में और दूसरा साल 2012 में कांगो में हुआ था. इस स्ट्रेन की चपेट में आने वाले करीब एक-तिहाई मरीजों की मौत हो जाती है. सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि हमारे पास जो 5 लाख से ज्यादा वैक्सीन डोज (जैसे एरवेबो वैक्सीन) का स्टॉक मौजूद है, वह जायरे स्ट्रेन के लिए बना है. बुंडिबुग्यो स्ट्रेन पर वह वैक्सीन काम करेगी या नहीं, इसका कोई ठोस सबूत नहीं है. वायरस की बनावट अलग होने के कारण पुरानी वैक्सीन इस नए आउटब्रेक को रोकने में नाकाम साबित हो रही है. नई वैक्सीन आने में 9 महीने का समय क्यों लगेगा? WHO के एडवाइजर डॉ. वासी मूंथी के मुताबिक, बुंडिबुग्यो इबोला के खिलाफ दो ‘कैंडिडेट वैक्सीन’ पर काम चल रहा है, लेकिन अभी तक इनका इंसानों पर ट्रायल (क्लीनिकल ट्रायल) नहीं हुआ है. पहली वैक्सीन उसी रीकॉम्बीनेंट वेसिकुलर स्टोमेटाइटिस वायरस (rVSV) प्लेटफॉर्म पर आधारित है, जिससे जायरे स्ट्रेन की सफल वैक्सीन बनी थी. इसे सबसे ज्यादा उम्मीद जगाने वाली वैक्सीन माना जा रहा है, लेकिन इसके क्लीनिकल ट्रायल में 6 से 9 महीने का समय लगना तय है. दूसरी वैक्सीन को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) मिलकर तैयार कर रहे हैं. यह एस्ट्राजेनेका की कोविड वैक्सीन की तरह ChAdOx प्लेटफॉर्म पर काम करती है. यह वैक्सीन अगले दो से तीन महीनों में क्लीनिकल ट्रायल के लिए तैयार हो सकती है. हालांकि, अभी तक इसका जानवरों पर भी पूरी तरह टेस्ट नहीं हुआ है, जिससे इसकी सफलता को लेकर काफी अनिश्चितता बनी हुई है. जानवरों के टेस्ट सफल होने के बाद ही इसे इंसानों के ट्रायल के लिए मंजूरी मिलेगी. इसी वजह से WHO ने वैक्सीन उपलब्ध होने के लिए 6 से 9 महीने की समयसीमा तय की है. इस पूरे मामले पर एक्सपर्ट्स का क्या कहना है? हेल्थ एक्सपर्ट्स इस स्थिति को बेहद गंभीर मान रहे हैं. डलास की यूटी साउथवेस्टर्न मेडिकल सेंटर की एसोसिएट प्रोफेसर कृतिका कुप्पल्ली कहती हैं कि भले ही बुंडिबुग्यो के आउटब्रेक पहले कम हुए हों, लेकिन यह एक बेहद घातक पैथोजन (बीमारी फैलाने वाला वायरस) है. इस बार स्थिति इसलिए ज्यादा डरावनी है क्योंकि हमारे पास इसके लिए कोई मान्यता प्राप्त वैक्सीन या खास दवा उपलब्ध नहीं है. स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के फिजिशियन डॉ. अबरार करन इसे ‘परफेक्ट स्टॉर्म’ यानी एक बहुत बड़ी मुसीबत की शुरुआत बताते हैं. हालांकि, राहत की बात यह है कि इबोला हवा के जरिए नहीं फैलता. इसलिए यह कोविड-19 या खसरे (Measles) जितना संक्रामक नहीं है. इबोला के मरीजों का इलाज कर चुकीं डॉ. नाहिद भदेलिया बताती हैं कि इबोला का एक मरीज औसतन दो लोगों को संक्रमित करता है, जबकि खसरे का एक मरीज 18 लोगों को बीमार कर सकता है. भले ही यह कम फैलता हो, लेकिन इसकी मृत्यु दर बहुत ज्यादा है. इस आउटब्रेक को लेकर क्या राजनीति हो रही है? इस महामारी के बीच अंतरराष्ट्रीय राजनीति भी शुरू हो गई है. अमेरिका के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मार्को रुबियो ने आरोप लगाया है कि WHO ने इस आउटब्रेक को संभालने में काफी देर कर दी. दूसरी तरफ, कांगो के इस संकट के बीच अमेरिकी प्रशासन ने वहां 50 इबोला ट्रीटमेंट क्लिनिक बनाने के लिए 23 मिलियन डॉलर की मदद का एलान किया है. इसके साथ ही संयुक्त राष्ट्र (UN) ने भी आपातकालीन फंड से 60 मिलियन डॉलर जारी किए हैं. हालांकि, युगांडा के अधिकारियों का कहना है कि उन्हें अमेरिका की तरफ से ऐसे किसी ट्रीटमेंट सेंटर बनाए जाने की कोई जानकारी नहीं मिली है. मार्को रुबियो के आरोपों का

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Chennakeshava Temple in Karnataka A unique star shaped temple dedicated to lord...

होमताजा खबरधर्म तारे के आकार का नारायण को समर्पित विशेष मंदिर, देवालय में विराजमान सुंदर केशव Last Updated:May 22, 2026, 17:59 IST Chennakeshava Temple: वैसे तो भगवान नारायण के देशभर में कई मंदिर हैं लेकिन आज हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बताएंगे, जो तारे के आकार का है. बताया जाता है कि इस मंदिर का निर्माण 1258 ईस्वी में करवाया गया था. बताया जाता है कि होयसला काल की इस उत्कृष्ट कृति को देखने के लिए देश-विदेश से हजारों पर्यटक और श्रद्धालु पहुंचते हैं. आइए जानते हैं मंदिर की खास बातें… Chennakeshava Temple: दुनिया भर में भगवान नारायण को समर्पित कई देवालय हैं, जिनकी बनावट मनमोहक है तो भक्ति से भरी कथा भक्तों के विश्वास को और भी मजबूत बनाती है. ऐसा ही एक देवालय कर्नाटक राज्य के मैसूर में है. तारे के आकार के नारायण को समर्पित मंदिर का निर्माण 1258 ईस्वी में हुआ है और इस प्रसिद्ध मंदिर में तीन गर्भगृह हैं. बताया जाता है कि इस मंदिर में दर्शन करने मात्र से भक्तों की सभी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं और सभी तरह के दोषों से मुक्ति भी मिलती है. मंदिर की उत्कृष्ट कृति को देखने के लिए देश-विदेश से हजारों पर्यटक और श्रद्धालु पहुंचते हैं. आइए जानते हैं तारे के आकार का नारायण को समर्पित विशेष मंदिर के बारे में… मंदिर में तीन अलग-अलग गर्भगृहकर्नाटक के मैसूर से करीब 35 किलोमीटर दूर कावेरी नदी के तट पर स्थित सोमनाथपुर का चेन्नाकेशव मंदिर भारत की अद्भुत वास्तुकला का एक शानदार नमूना है. यह मंदिर तारे के आकार में बना है और भगवान विष्णु के सुंदर रूप चेन्ना केशव को समर्पित है. 1258 ईस्वी में निर्मित इस मंदिर में तीन अलग-अलग गर्भगृह हैं, जहां भगवान केशव, वेणुगोपाल और जनार्दन विराजमान हैं. इसे 2023 में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा मिला है. होयसला काल की इस उत्कृष्ट कृति को देखने के लिए देश-विदेश से हजारों पर्यटक और श्रद्धालु पहुंचते हैं. सेनापति ने 1258 ईस्वी में कराया था निर्माणचेन्ना केशव मंदिर को सोमनाथपुर मंदिर भी कहा जाता है, जिसका निर्माण होयसला राजा नरसिम्हा तृतीय के सेनापति सोमनाथ दंडनायक ने 1258 ईस्वी में कराया था. यह मंदिर होयसला राजवंश की कला और भक्ति का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण कहा जा सकता है. यह मंदिर आज भी अपने मूल स्वरूप में मौजूद है, जो उस समय की उत्कृष्ट कारीगरी को पेश करता है. चेन्नाकेशव का अर्थ है सुंदर केशव. मंदिर का पूरा नाम ही इसकी सुंदरता को व्यक्त करता है. तारे के आकार का नारायण मंदिरचेन्ना केशव मंदिर तारे के आकार के पांच-स्तरीय चबूतरे पर बना है, जो होयसला शैली की खासियत है. इस अनोखे डिजाइन की वजह से मंदिर की दीवारों पर हजारों मूर्तियां और नक्काशी आसानी से दिखाई देती हैं. मंदिर की हर इंच जगह पर बारीक नक्काशी की गई है. यहां देवी-देवताओं, पौराणिक कथाओं, दैनिक जीवन के दृश्यों, फूलों, जानवरों और ज्यामितीय पैटर्न्स को सूक्ष्मता से उकेरा गया है. तीनों मूर्तियां बेहद सुंदर और कलात्मकमंदिर की सबसे खास बात इसका त्रिकूट डिजाइन है. इसमें तीन अलग-अलग गर्भगृह हैं, मध्य गर्भगृह में भगवान केशव, एक में वेणुगोपाल यानी बांसुरी बजाते कृष्ण और तीसरे में जनार्दन विराजमान हैं. तीनों ही मूर्तियां बेहद सुंदर और कलात्मक हैं. मंदिर के खंभे, छत और द्वारों पर भी अद्भुत नक्काशी है. केंद्रीय छत पर कमल के आकार का भव्य मंडलम है. मंदिर के आसपास ये खास जगहेंमंदिर संरक्षित स्मारक है, जहां बैकुंठ एकादशी और जन्माष्टमी जैसे पर्व पर विशेष आयोजन होते हैं. सोमनाथपुर मंदिर मैसूर की सांस्कृतिक यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा है. इसके पास ही भव्य मैसूर पैलेस, चामुंडेश्वरी मंदिर (चामुंडी पहाड़ी) और सेंट फिलोमेना चर्च जैसे दर्शनीय स्थल हैं. About the Author Parag SharmaChief Sub Editor पराग शर्मा Hindi News18 Digital में Chief Sub Editor के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, ग्रह-नक्षत्र, राशि और वास्तु से जुड़ी खबरों पर काम कर रहे हैं. भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेद…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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Desi Khajoor: गर्मी आते ही भरतपुर में शुरू हुआ देसी खजूर का...

Last Updated:May 22, 2026, 16:59 IST Bharatpur Desi Khajoor: राजस्थान के भरतपुर जिले के गांवों में गर्मी के मौसम के साथ एक बार फिर देसी मिठास लौट आई है. यहां पेड़ों पर लगने वाले अनोखे देसी खजूर लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं. स्वाद में बेहद मीठे और प्राकृतिक गुणों से भरपूर ये खजूर ग्रामीण इलाकों में काफी पसंद किए जाते हैं. स्थानीय लोग बताते हैं कि गर्मियों में देसी खजूर सिर्फ स्वाद ही नहीं बल्कि शरीर को ऊर्जा देने का भी काम करते हैं. बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक इसे बड़े चाव से खाते हैं. खास बात यह है कि बाजार में मिलने वाले महंगे ड्राई फ्रूट्स के मुकाबले लोग आज भी इन पारंपरिक देसी फलों को ज्यादा पसंद करते हैं. ख़बरें फटाफट भरतपुर: भरतपुर जिले के ग्रामीण इलाकों में जैसे-जैसे गर्मी का मौसम तेज होता जा रहा है. वैसे-वैसे एक खास देसी फल भी पेड़ों पर नजर आने लगा है. यह फल है देसी खजूर जो इन दिनों गांवों में खूब दिखाई दे रहा है. खास बात यह है कि यह खजूर बाजार में मिलने वाले सामान्य खजूर से बिल्कुल अलग होता है. यह पूरी तरह प्राकृतिक रूप से स्थानीय स्तर पर उगता है और इसमें किसी प्रकार की कृत्रिम प्रक्रिया का उपयोग नहीं किया जाता है. ग्रामीण क्षेत्रों में इस देसी खजूर की अपनी अलग पहचान है. इसका स्वाद बेहद मीठा, ताजा और लाजवाब होता है. जिसके चलते यह लोगों की पहली पसंद बन जाता है. गांवों में बच्चे, बुजुर्ग और युवा सभी इस फल का बड़े चाव से इंतजार करते हैं. जैसे ही पेड़ों पर यह खजूर पकने लगता है. लोग इसे तोड़कर सीधे ताजा ही खाने का आनंद लेते हैं. इन दिनों भरतपुर के कई गांवों में खजूर के पेड़ों की भरमार देखने को मिल रही है. पेड़ों पर यह फल खूब लग रहाजो अभी धीरे-धीरे पकेगा खेतों के किनारे और घरों के आसपास लगे पेड़ों पर यह फल खूब लग रहा है. ग्रामीणों के अनुसार यह देसी खजूर न केवल स्वाद में बेहतरीन होता है. बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद माना जाता है. इसमें प्राकृतिक मिठास के साथ-साथ ऊर्जा देने वाले गुण भी पाए जाते हैं, जो गर्मी के मौसम में शरीर को राहत देते हैं. पहले के समय में यह देसी खजूर गांवों की पहचान हुआ करता था लेकिन समय के साथ इसकी संख्या कुछ कम हो गई थी. खजूर सिर्फ एक फल नहीं बल्कि परंपराअब एक बार फिर यह परंपरा लौटती नजर आ रही है और लोग इसे बड़े उत्साह के साथ अपना रहे हैं. कुल मिलाकर भरतपुर के गांवों में देसी खजूर सिर्फ एक फल नहीं बल्कि परंपरा स्वाद और प्राकृतिक जीवनशैली का प्रतीक बन गया है. गर्मी के मौसम में इसकी मिठास लोगों के जीवन में एक खास ताजगी और खुशी लेकर आती है. About the Author Jagriti Dubey Hi, I am Jagriti Dubey, a media professional with 6 years of experience in social media and content creation. I started my career with an internship at Gbn 24 news channel in 2019 and have worked with many repu…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Bharatpur,Rajasthan Source link

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महाकाल की नगरी उज्जैन में सिंहस्थ 2028 होगा खास, वन विभाग बनाएगा...

Last Updated:May 22, 2026, 15:48 IST सिंहस्थ 2028 को देश का सबसे बड़ा ग्रीन महाकुंभ बनाने की तैयारी शुरू हो गई है. प्लास्टिक और थर्माकोल की जगह पत्तल-दोने, बांस के टेंट और प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग होगा. भीषण गर्मी से राहत के लिए शहर में हरित वन-उपवन और छायादार विश्राम स्थल बनाए जाएंगे. इस बार सिंहस्थ में आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संगम देखने को मिलेगा. धार्मिक नगरी उज्जैन मे 2028 मे सिंहस्थ महाकुम्भ का आयोजन होने वाला है. जिसमे करोड़ो की संख्या मे श्रद्धांलुओ का आस्था का सैलाब उमड़ेगा. इस बार सिंहस्थ महाकुंभ 2028 को एक नई और अनोखी पहचान देने की तैयारी शुरू हो चुकी है. आयोजन को पूरी तरह पर्यावरण के अनुकूल बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है, ताकि आस्था के साथ प्रकृति संरक्षण का संदेश भी दिया जा सके. वन विभाग ने “ग्रीन सिंहस्थ मॉडल” पर काम शुरू कर दिया है, जिसमें परंपरा, सुविधाएं और पर्यावरण का संतुलित संगम देखने को मिलेगा. आयोजन के दौरान प्लास्टिक और लकड़ी के उपयोग को न्यूनतम रखा जाएगा और प्राकृतिक संसाधनों को प्राथमिकता दी जाएगी. भीषण गर्मी को ध्यान में रखते हुए श्रद्धालुओं के लिए हरित क्षेत्र और प्राकृतिक छांव की व्यवस्थाएं भी की जाएंगी. दावा किया जा रहा है कि सिंहस्थ 2028 देश का सबसे बड़ा और सबसे ईको फ्रेंडली महाकुंभ बनकर नई मिसाल पेश करेगा. साधु-संतो के डेरे बनेंगे आकृष्ण का केंद्र इस बार आने वाले 2028 सिंहस्थ (महाकुंभ) मे आस्था के साथ प्रकृति संरक्षण की अनूठी मिसाल देखने को मिलेगी. भोजनशालाओं में प्लास्टिक और थर्माकोल की जगह खाखरे और इलायची के पत्तों से बने दोने-पत्तलों का उपयोग किया जाएगा, जिससे प्रदूषण पर नियंत्रण मिलेगा. साधु-संतों के डेरे भी बांस और प्राकृतिक सामग्रियों से तैयार किए जाएंगे. श्रद्धालुओं को भीषण गर्मी से राहत देने के लिए शहर में वन-उपवन और हरित छांव विकसित की जाएगी. वन विभाग हरदा और बालाघाट से बड़े पैमाने पर बांस मंगाने की तैयारी में जुटा है, जबकि धार्मिक अनुष्ठानों के लिए आवश्यक सामग्रियों की व्यवस्था भी की जा रही है, ताकि सिंहस्थ में आस्था और पर्यावरण का अद्भुत संगम दिखाई दे. गर्मी से राहत के लिए बनेंगे वन-उपवनडीएफओ अनुराग तिवारी ने बताया सिंहस्थ महापर्व 2028 को ध्यान में रखते हुए श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए खास तैयारियां शुरू हो गई हैं. आयोजन भीषण गर्मी के मौसम में होने वाला है, इसलिए शहर और आसपास के क्षेत्रों में अस्थायी और स्थायी वन-उपवन विकसित किए जाएंगे. श्रद्धालुओं को राहत देने के लिए बड़े-बड़े पेड़, हरित छांव और प्राकृतिक विश्राम स्थल तैयार होंगे. इन हरित क्षेत्रों में आने वाले लोग गर्मी से राहत के साथ प्रकृति की शांति और सुकून का भी अनुभव कर सकेंगे. साधु-संतो के साथ पर्यटको को मिलेगी विशेष सुविधा सिंहस्थ 2028 केवल आस्था का महापर्व नहीं, बल्कि प्रकृति संरक्षण का भी बड़ा संदेश बनेगा. वन विभाग इसे देश-दुनिया के सामने “ग्रीन महाकुंभ” के रूप में प्रस्तुत करने की तैयारी में जुटा है, जहां पर्यावरण और धार्मिक परंपराओं का अनोखा संगम देखने को मिलेगा. संत समाज और अखाड़ों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए चंदन, बिल्वपत्र, तुलसी और अन्य पूजन सामग्री की पर्याप्त व्यवस्था भी सुनिश्चित की जा रही है. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Ujjain,Madhya Pradesh Source link

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ज्योतिरादित्य सिंधिया ने खोला दरबार, टेलीकॉम मिनिस्‍टर का एक अनूठा प्रयोग

होमताजा खबरदेश ज्योतिरादित्य सिंधिया ने खोला दरबार, टेलीकॉम मिनिस्‍टर का एक अनूठा प्रयोग Last Updated:May 22, 2026, 15:02 IST टेलीकॉम मिनिस्‍टर ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने कार्यालय कुछ ऐसा कायाकल्प किया है कि कर्मचारी भी तारीफ करते नही थक रहे कि ऐसा खुला दरबार नहीं  देखा.आफिस के दरवाजे शीशे के, खिडि़कियां शीशे की, दीवारें शीशे की, जहां मंत्री बैठक करते हैं, सब कुछ. टीम का हाल और मंत्री का मूड बाहर से भी नजर आ सकता है. ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पूरा आफिस कांच का बनवा दिया, जिससे पूरी पारदर्शिता बनी रहे. नई दिल्‍ली. सरकार की पारदर्शिता तो पीएम मोदी सरकार की पहचान बन गयी है. लेकिन इसी पारदर्शिता का एक ऐसा उदाहरण है जो वाकई आम आदमी को अचरज में जरूर डाल देगा.  इस पूरी तरह से पारदर्शी कमरे की तस्वीर को देखिए. शीशे के अंदर बैठे मंत्री क्या कर रहे हैं, वहां से गुजरता हर कर्मचारी और मंत्री से मिलने पहुंचा व्यक्ति देख सकता है. अब कहा तो ये भी जा सकता है कि अंदर बैठे मंत्री बाहर चल रही हर हरकत पर नजर पर रख रहे हैं. आलम ये है कि अगर कोई मिलने वाला बाहर से इशारा भी कर दे तो मंत्री चाहे तो उसे अंदर बुलाकर दो बातें कर सकते हैं. जी हां, हम बात कर हैं संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के संचार भवन के कार्यालय की. संचार मंत्री का पद संभालने के बाद सिंधिया ने अपने इस आफिस कुछ ऐसा कायाकल्प किया है कि कर्मचारी भी तारीफ करते नही थक रहे कि ऐसा खुला दरबार नहीं देखा. संचार मंत्री का पद संभालने का बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया जब संचार मंत्रालय पहुंचे तो इसे चारों तरफ से बंद पाया. संचार मंत्रालय में मंत्री के आफिस स्थित कमरे का आलम ये था कि कहीं से हवा धूप पहुंच ही नहीं पाती थी. ऊपर से कमरे के अंदर ही एक कमरा रेस्ट रूम भी बनाया हुआ था, जो दशकों से चला आ रहा था. चारों तरफ इतने ज्यादा फर्नीचर लगे थे कि खाली स्थान नजर नहीं आता था. ऐसे में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सबसे पहले ये फैसला लिया कि अब कमरा ऐसा बंद कोठरी जैसा नजर नहीं आना चाहिए, जहां न तो धूप आए और न ही हवा.  सिंधिया को लगा कि ऐसे बंद वाले माहौल में सिर्फ दम ही घुटता है. इसलिए फैसला ये हुआ कि संचार भवन के पहले माले का पूरा का पूरा कायाकल्प जल्दी से जल्दी हो. मिलने वाले लोग बाहर से देख सकते हैं कि मंत्री मीटिंग में व्‍यस्‍त हैं या अंदर जा सकते हैं. जल्द ही मंत्री के कमरे का पूरा ढांचा बदल गया. कमरे के सामने बना कांफ्रेंस रूम भी अब पूरी तरह से शीशे का बना दिया गया है. दरवाजे शीशे के, खिडि़कियां शीशे की, दीवारें शीशे की, जहां मंत्री बैठक भी करते हैं, सबकुछ. मंत्री का मूड बाहर से भी नजर आ सकता है. वहां उनसे मिलने आए लोगों को भी ये पता चल जाता है कि मंत्री जी कितने व्यस्त हैं कि उनसे मिल सकते हैं. संचार भवन के कर्मचारी अब बाहर से ही देख सकते है की ज्योतिरादित्य सिंधिया क्या कर रहे हैं. स्टाफ अब नजर बचा कर इधर उधर भी नहीं जा सकता. ये पारदर्शिता सिर्फ काम में ही नही अनुशासन में भी पारदर्शिता ला रही है. इस कायाकल्प का फायदा ये हुआ कि पूरे दिन पूरे मंत्रालय में धूप खिली नजर आती है. इस बदलाव के बारे में सिंधिया से पूछा तो तपाक से जवाब आया कि वो पहले भी नागरिक उड्डयन मंत्रालय में ये प्रयोग कर चुके थे, लेकिन संचार मंत्रालय में उससे बड़ा प्रयोग किया. ज्योतिरादित्य सिंधिया ग्वालियर के महाराजा परिवार से आते हैं, लेकिन जनता के बीच से चुन कर लोकसभा भी आते हैं. उनकी कार्यशैली का आलम ये है कि अब कॉल ड्रॉप की शिकायतें कम होने लगीं हैं और साथ ही बीएसएनएल और कुछ टेलीकॉम कंपनियां भी मुनाफे मे जाने लगीं हैं. पोस्टल विभाग के कायाकल्प में भी सिंधिया लग गए हैं. इसलिए ये पारदर्शिता उनकी कार्यशैली पर ही असर नहीं डाल रही, बल्कि उनकी लोकप्रियता को भी खासा बढ़ा रही है. About the Author Sharad Pandeyविशेष संवाददाता करीब 20 साल का पत्रकारिता का अनुभव है. नेटवर्क 18 से जुड़ने से पहले कई अखबारों के नेशनल ब्‍यूरो में काम कर चुके हैं. रेलवे, एविएशन, रोड ट्रांसपोर्ट और एग्रीकल्चर जैसी महत्वपूर्ण बीट्स पर रिपोर्टिंग की. कैंब्रिज…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,New Delhi,Delhi Source link

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