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खदान में मिली 2 दिन से लापता युवक की लाश, खौफनाक मंजर...

Last Updated:May 17, 2026, 23:11 IST ओडिशा के नयागढ़ जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है. यहां पिछले दो दिनों से लापता एक 34 वर्षीय युवक का शव रविवार सुबह एक पत्थर की खदान में संदिग्ध परिस्थितियों में पड़ा मिला. मृतक की पहचान प्रताप कुमार पट्टशानी के रूप में हुई है, जो नुआपाड़ा गांव का रहने वाला था. एक स्थानीय महिला ने सबसे पहले खदान में शव को देखा और पुलिस को सूचना दी. परिजनों ने हत्या की आशंका जताते हुए शिकायत दर्ज कराई है, जिसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो संदिग्धों को हिरासत में लिया है. 19 साल के लड़के के हत्यारों के पुलिस ने गिरफ्तार किया. Odisha Crime News: ओडिशा के नयागढ़ जिले में एक खौफनाक घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है. जिले के एक पत्थर खदान (Stone Quarry) में पिछले दो दिनों से लापता एक 34 वर्षीय युवक की लाश संदिग्ध हालत में बरामद हुई है. इस घटना के बाद से मृतक के परिवार में कोहराम मचा हुआ है, वहीं इलाके के लोग भी दहशत में हैं. परिजनों का सीधा आरोप है कि उनके बेटे की बेरहमी से हत्या कर शव को खदान में फेंका गया है. इस गंभीर आरोप के बाद पुलिस भी तुरंत एक्शन में आ गई है और शक के आधार पर दो लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है. जानकारी के मुताबिक, मृतक की पहचान नुआपाड़ा गांव के रहने वाले 34 वर्षीय प्रताप कुमार पट्टशानी के रूप में हुई है. प्रताप 15 मई से ही अचानक लापता हो गए थे. परिवार वालों ने उनकी काफी खोजबीन की, लेकिन उनका कहीं कुछ सुराग नहीं मिला. रविवार की सुबह इस रहस्यमयी गुमशुदगी का एक दर्दनाक अंत हुआ. इलाके की एक स्थानीय महिला जब पत्थर खदान की तरफ गई, तो उसने वहां प्रताप का शव पड़ा हुआ देखा. शव देखते ही महिला के होश उड़ गए और उसने तुरंत इसकी सूचना गांव वालों और पुलिस को दी. पुलिस ने क्या बताया? रायगढ़ पुलिस ने 19 साल के हदीपा निखिल के किडनैपिंग और मर्डर केस के मेन आरोपी समेत नौ आरोपियों को अरेस्ट किया है. रायगढ़ SP स्वाति एस कुमार ने कहा, ‘हमने करीब नौ लोगों को अरेस्ट किया था, जिनमें से तीन औरंगाबाद, बिहार से थे… चार को विशाखापत्तनम से, एक को कालाहांडी से और एक को रायगढ़ से अरेस्ट किया गया. इन्वेस्टिगेशन में पता चला कि दोनों गैंग के बीच जुए को लेकर झगड़ा था. मरने वाले और उसके पिता ने जुए की जगह लूटी थी… आरोपियों में से एक, उमेश हियाल, पहले के 8 क्रिमिनल केस में शामिल है. बाकी की वेरिफिकेशन की जा रही है. हमने करीब 21 लोगों की पहचान की है, और यह संख्या कम या ज़्यादा हो सकती है. लेकिन हम और लोगों को अरेस्ट करने की कोशिश कर रहे हैं, और उस अरेस्ट के बाद आगे इन्वेस्टिगेशन होगी…’ घटना की सूचना मिलते ही चांदपुर पुलिस स्टेशन की टीम मौके पर पहुंची और शव को अपने कब्जे में ले लिया. पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर अपनी जांच तेज कर दी है. चांदपुर पुलिस स्टेशन के प्रभारी निरीक्षक अभय बेहरा ने इस मामले पर जानकारी देते हुए बताया, ‘हमें पहले मृतक के लापता होने की गुमशुदगी की शिकायत मिली थी.’ पुलिस अधिकारी ने आगे बताया कि परिजनों की शिकायत और शुरुआती जांच के आधार पर पुलिस ने दो संदिग्धों को तुरंत हिरासत में लिया है. फिलहाल इन दोनों से कड़ाई से पूछताछ की जा रही है, ताकि इस खौफनाक वारदात के पीछे का सच सामने आ सके. इंस्पेक्टर बेहरा ने स्पष्ट किया कि प्रताप कुमार पट्टशानी की मौत के पीछे की असली वजह क्या है, इसका आधिकारिक तौर पर खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो पाएगा. मृतक की पहचान क्या हुई है और वह कब से लापता था? मृतक की पहचान नुआपाड़ा गांव निवासी 34 वर्षीय प्रताप कुमार पट्टशानी के रूप में हुई है. वह 15 मई से लापता था. प्रताप कुमार पट्टशानी का शव कहां और किसे मिला? प्रताप कुमार पट्टशानी का शव नयागढ़ जिले की एक पत्थर की खदान (Stone quarry) में एक स्थानीय महिला को रविवार सुबह मिला. परिजनों की शिकायत के बाद पुलिस ने क्या कार्रवाई की है? परिजनों द्वारा हत्या की शिकायत दर्ज कराने के बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और दो संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है. About the Author Deep Raj DeepakSub-Editor Deep Raj Deepak working with News18 Hindi (hindi.news18.com/) Central Desk since 2022. He has strong command over national and international political news, current affairs and science and research-based news. …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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भुने बैंगन और कच्चे आम से तैयार होती है ये देसी डिश,...

Last Updated:May 17, 2026, 22:13 IST मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के चंबल संभाग के आदिवासी अंचलों में आज भी पारंपरिक खानपान की अनोखी परंपराएं जीवित हैं. यहां गर्मी के मौसम में एक खास देसी भरता तैयार किया जाता है, जिसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें तेल का बिल्कुल भी इस्तेमाल नहीं होता है. पूरी तरह प्राकृतिक तरीके से तैयार होने वाला यह भरता स्वाद के साथ सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद माना जाता है. मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के चंबल संभाग के आदिवासी अंचलों में आज भी पारंपरिक खानपान की अनोखी परंपराएं जीवित हैं. यहां गर्मी के मौसम में एक खास देसी भरता तैयार किया जाता है, जिसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें तेल का बिल्कुल भी इस्तेमाल नहीं होता है. पूरी तरह प्राकृतिक तरीके से तैयार होने वाला यह भरता स्वाद के साथ सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद माना जाता है. ग्रामीण क्षेत्रों में लोग बैंगन और कच्चे आम को सीधे आग की आंच पर भूनते हैं. अच्छी तरह पकने के बाद दोनों का छिलका उतार लिया जाता है. इसके बाद इन्हें मिट्टी के मटके के ठंडे पानी में डालकर ठंडा किया जाता है. ग्रामीणों का कहना है कि मटके के पानी की ठंडक इस भरते के स्वाद को और भी खास बना देती है. भुने बैंगन और आम का खास भरताजब बैंगन और आम अच्छी तरह ठंडे हो जाते हैं, तो इन्हें हाथों से मैश किया जाता है। इसके बाद इसमें बारीक कटा प्याज, हरी मिर्च, लाल मिर्च पाउडर, हरा धनिया और स्वादानुसार नमक मिलाया जाता है. कई जगहों पर इसमें लहसुन भी डाला जाता है, जिससे इसका स्वाद और बढ़ जाता है. यह पूरा मिश्रण केवल 5 मिनट में तैयार हो जाता है.स्थानीय आदिवासी बताते हैं कि यह भरता गर्मी में शरीर को ठंडक पहुंचाता है और पाचन के लिए भी अच्छा माना जाता है. आम की हल्की खटास और आग में भुने बैंगन का स्मोकी स्वाद इसे बेहद लजीज बना देता है. यही वजह है कि यह व्यंजन गांवों में काफी लोकप्रिय है. ग्रामीणों का कहना है कि पहले के समय में जब संसाधन कम थे, तब लोग इसी तरह बिना तेल और मसालों के देसी व्यंजन तैयार करते थे. आज भी यह परंपरा कायम है और नई पीढ़ी भी इसे पसंद कर रही है. । News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Shivpuri,Shivpuri,Madhya Pradesh Source link

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गाय का बर्थसर्टिफ‍िकेट दिखाओ…बंगाल की नई नवेली बीजेपी व‍िधायक के बयान पर...

होमताजा खबरदेश गाय का बर्थसर्टिफ‍िकेट दिखाओ…बंगाल की बीजेपी व‍िधायक के बयान पर बवाल Last Updated:May 17, 2026, 21:24 IST पश्चिम बंगाल में गाय का बर्थ सर्टिफिकेट वाला बयान सियासी बहस का नया मुद्दा बन गया है. बीजेपी व‍िधायक रेखा पात्रा ने कथित अवैध पशु तस्करी रोकने के दौरान कहा कि अगर कोई गायों को ले जा रहा है, तो उसे यह साबित करना होगा कि उनकी उम्र 14 साल से ज्यादा है और इसके लिए बर्थ सर्टिफिकेट दिखाना पड़ेगा. इस पर टीएमसी से घेरा है. बंगाल बीजेपी एमएलए रेखा पात्रा पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस समय गाय का बर्थ सर्टिफिकेट वाला बयान चर्चा का बड़ा मुद्दा बन गया है. मामला तब शुरू हुआ जब बीजेपी की नई व‍िधायक रेखा पात्रा ने कथित तौर पर मवेशियों से भरे एक वाहन को रोक लिया और कहा कि अगर कोई गायों को ले जा रहा है तो उसे यह साबित करना होगा कि उनकी उम्र 14 साल से ज्यादा है. इसके लिए गाय का बर्थ सर्टिफिकेट दिखाना पड़ेगा. टीएमसी ने इसे लेकर मजाक उड़ाया है. घटना पश्चिम बंगाल के हिंगलगंज इलाके की है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, मवेशियों से भरे वाहन को रोकने के बाद रेखा पात्रा ने गायों को नीचे उतरवाया. फिर उन्हें सड़क किनारे पेड़ से बांधा गया और उनके लिए भूसे और पानी की व्यवस्था भी कराई गई. रेखा पात्रा ने कहा कि राज्य में अवैध पशु तस्करी के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं. उन्होंने दावा किया कि सरकार की नई गाइडलाइन के मुताबिक 14 साल से कम उम्र की गायों का वध नहीं किया जा सकता. उनका कहना था, अगर कोई अवैध तरीके से गायों को ले जाता मिला तो हमें उन्हें पकड़ना होगा और गायों का बर्थ सर्टिफिकेट मांगना होगा. अगर कोई बर्थ सर्टिफिकेट नहीं दिखा पाएगा तो कानून के तहत कार्रवाई होगी. बस, यही बयान अब राजनीतिक बहस का कारण बन गया है. टीएमसी बोले-पहले बीजेपी वाले द‍िखाएं तृणमूल कांग्रेस ने बीजेपी विधायक के बयान पर तंज कसते हुए सवाल उठाया कि आखिर गाय का जन्म प्रमाण पत्र होता कहां है? तृणमूल विधायक कुणाल घोष ने कहा कि बीजेपी को पहले किसी डबल इंजन राज्य से गाय का ऐसा बर्थ सर्टिफिकेट दिखाना चाहिए. उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि अगर बीजेपी ऐसा कोई प्रमाण पत्र दिखा दे तो यह भी देखना पड़ेगा कि उसे जारी करने का अधिकार किसके पास है. पशुओं की होती है टैग‍िंग इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई. कुछ लोग इसे अवैध पशु तस्करी रोकने की कोशिश बता रहे हैं, जबकि कई लोग गाय के बर्थ सर्टिफिकेट वाली मांग का मजाक उड़ा रहे हैं. दरअसल, भारत में मवेशियों की पहचान के लिए टैगिंग, पशु पंजीकरण और स्वास्थ्य रिकॉर्ड जैसी व्यवस्थाएं कई राज्यों में मौजूद हैं, लेकिन इंसानों की तरह जन्म प्रमाण पत्र का कोई सामान्य सिस्टम नहीं है. यही वजह है कि रेखा पात्रा का बयान राजनीतिक विवाद में बदल गया. About the Author Gyanendra Mishra Mr. Gyanendra Kumar Mishra is associated with hindi.news18.com. working on home page. He has 20 yrs of rich experience in journalism. He Started his career with Amar Ujala then worked for ‘Hindustan Times Group…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Kolkata,West Bengal Source link

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'मैं आपका दर्द समझता हूं…' NEET छात्रों की आत्महत्या से आहत अरविंद...

Arvind Kejriwal NEET Video: दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने NEET परीक्षा में हुई धांधली और इसके रद्द होने की आशंकाओं के बीच तनावग्रस्त छात्रों के लिए एक भावुक वीडियो संदेश जारी किया है. केजरीवाल ने देश के अलग-अलग हिस्सों (गोवा, सीकर, दिल्ली और लखीमपुर) में चार छात्रों द्वारा आत्महत्या किए जाने की घटनाओं पर गहरी चिंता और दुख व्यक्त किया है. खुद आईआईटी (IIT) और यूपीएससी (UPSC) जैसी कठिन परीक्षाओं से गुजर चुके केजरीवाल ने छात्रों से अपील की है कि वे हताश न हों और आत्महत्या जैसा चरम कदम न उठाएं. उन्होंने छात्रों को सांत्वना देते हुए कहा, ‘मैं आपकी एंग्जायटी (घबराहट) को समझता हूं, लेकिन यह किसी भी समस्या का समाधान नहीं है.’ मुख्यमंत्री ने छात्रों से अपनी भावनाएं और सुझाव सोशल मीडिया (कमेंट्स या डीएम) के जरिए साझा करने का आग्रह किया है, ताकि इस संकट का कोई सामूहिक और सार्थक समाधान निकाला जा सके. Source link

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समोसे बेचकर खड़ा किया 4 मंजिला होटल, खरीदी महंगी कारें और जमीन,...

Last Updated:May 17, 2026, 19:00 IST छतरपुर जिले के लवकुश नगर के राजेंद्र प्रसाद चौरसिया जिन्होंने आज से 20 साल पहले अपने छोटे भाई के साथ मिलकर कम पूंजी में समोसे की एक छोटी सी दुकान खोली थी. दोनों भाइयों ने लगातार 20 साल मेहनत की.आज इन्होंने अपनी मेहनत की बदौलत करोड़ों रुपए का होटल खड़ा कर दिया है. छतरपुर जिले के लवकुश नगर के राजेंद्र प्रसाद चौरसिया जिन्होंने आज से 20 साल पहले अपने छोटे भाई के साथ मिलकर कम पूंजी में समोसे की एक छोटी सी दुकान खोली थी. दोनों भाइयों ने लगातार 20 साल मेहनत की.आज इन्होंने अपनी मेहनत की बदौलत करोड़ों रुपए का होटल खड़ा कर दिया है. राजेंद्र के मुताबिक इस मुकाम तक पहुंचने के लिए हम दोनों भाइयों ने बहुत मेहनत की है. अगर आप ईमानदारी से अपने काम को करते हैं तो किसी भी मुकाम को हासिल किया जा सकता है. उनके घर में गरीबी थी. वह बहुत संघर्ष कर रहे थे. उस दौरान उन्होंने सबकुछ किया जिसमें पैसे मिलते थे. उन्होंने बचपन से ही काम करना शुरू कर दिया था. उन्होंने अपने कंधों में भूसा की बोरी भी ढोई, नाली भी साफ की, 5 रुपए कमाने के लिए मथुरा भी गए. दूसरों की दुकानों में काम भी किया लेकिन फिर भी घर खर्च नहीं चल पा रहा था. राजेंद्र बताते हैं कि लवकुश नगर में वह पहले पान बरेजा लगाते थे. पान की खेती करते थे लेकिन किसी ने बरेजा में ही आग लगा दी थी. इसके बाद हम पूरी तरह से बेरोजगार हो गए. इसके बाद हमने हर तरह का काम किया. लेकिन जब स्थायी काम नहीं मिला तो फिर समोसा की दुकान में ही काम करने लगे. यहां से आइडिया आया कि हम भी समोसा बनाकर बेच सकते हैं. जब समोसे बनाना का अनुभव ले लिया तो फिर मैंने छोटे भाई बब्बी के साथ एक डिब्बे (गुमटी) से ही समोसा बनाकर बेचना शुरू कर दिया. अपने खुद के इस धंधे में थोड़ा सुकून मिला. धीरे-धीरे ग्राहकी बढ़ती गई. कुछ सालों बाद हमनें किराए में 2 कमरों की दुकान ले ली. समोसे को साथ मीठा-मिष्ठान भी बनाने लगे. इसके बाद हमारा ये बिजनेस बढ़ता ही चला गया. 4 फ्लोर की बिल्डिंग में बनाया होटल राजेंद्र बताते हैं कि लोगों की भीड़ ज्यादा होने लगी थी. दुकान छोटी थी मैनेज नहीं हो पा रहा था तो फिर खुद ही नई बिल्डिंग बनवा ली. भगवान के आशीर्वाद से समोसे बेचकर ही होटल बनाने का सोच लिया. इस होटल को बनवाने में करोड़ रुपए से भी ज्यादा खर्च हो गया है. राजेंद्र बताते हैं कि आप अपनी मेहनत से सबकुछ पा सकते हैं. एक समय था हम काम की तलाश में रहते थे. लेकिन आज हमनें दूसरों को रोजगार दे रखा है. हमारे इस होटल में शादी-ब्याह, जन्मदिवस कार्यक्रम में भी होते हैं. यहां ठहरने की उत्तम व्यवस्था भी है. समोसे बेचकर खड़ा किया करोड़ों का साम्राज्यराजेंद्र बताते हैं कि समोसे बेचकर ही उन्होंने कई प्लॉट खरीद लिए और 20 बीघा जमीन खरीद ली. साथ ही 20 लाख की कार भी बच्चों को दिलाई है. इस समोसे ही उन्होंने जीवन की सभी शौक़ पूरी कर ली हैं. अपनी सफलता का बताया मंत्र राजेंद्र का मानना है कि अगर आप अपने काम को पूरी ईमानदारी और अनुशासित तरीके से करते हैं तो आपको सफलता जरूर मिलती है. बिजनेस में अगर आपको आगे बढ़ना है तो आपको अपने स्वभाव में विनम्रता रखनी होगी. आज हमारे पास भले ही लाखों करोड़ों रुपए की संपत्ति है लेकिन आज भी हमारा वही स्वभाव है जो संघर्ष के दिनों में था. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Chhatarpur,Madhya Pradesh Source link

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गर्मियों में छाछ और बेसन से बनती है ये देसी डिश, स्वाद...

Last Updated:May 17, 2026, 18:10 IST गर्मी के मौसम में छाछ और बेसन से खड़ई बनाई जाती थी. ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी इनको पारंपरिक तरीके से तैयार किया जाता है. जो भी इसका स्वाद जानता है वे हमेशा से ही इसके दीवाने रहे हैं, वयस्कों की बात हो या फिर युवाओं की अगर एक बार इसका स्वाद चक लेते हैं. फिर बार-बार इसको खाने से रोक नहीं पाए जबकि बुजुर्गों के लिए तो यह गर्मी का सबसे अच्छा खाना होता है. बुंदेलखंड हमेशा से ही कम पानी और पिछड़ी पान के लिए जाना जाता है. पहले के समय में जब गर्मियों के मौसम में सब्जियां नहीं होती थी तब यहां के लोगों के द्वारा सब्जी के विकल्प के रूप में अलग-अलग तरह की चीजों को बनाया जाता था. जो सब्जी से अच्छी होने के साथ-साथ स्वाद में तो बेहतर होती ही थी. स्वास्थ्य के लिए भी काफी फायदेमंद हुआ करती थी. ऐसे ही गर्मी के मौसम में छाछ और बेसन से खड़ई बनाई जाती थी. ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी इनको पारंपरिक तरीके से तैयार किया जाता है. जो भी इसका स्वाद जानता है वे हमेशा से ही इसके दीवाने रहे हैं, वयस्कों की बात हो या फिर युवाओं की अगर एक बार इसका स्वाद चक लेते हैं. फिर बार-बार इसको खाने से रोक नहीं पाए जबकि बुजुर्गों के लिए तो यह गर्मी का सबसे अच्छा खाना होता है. इसको बनाने के लिए दो अलग-अलग तरह से मसाले तैयार किए जाते हैं. फिर इनको मिक्स करना पड़ता है सबसे पहले अगर छाछ की बात करें तो इसमें झोंका लगाने की आवश्यकता होती है. जिसके लिए रिफाइंड तेल, काला नमक सफेद नमक मिर्ची धनिया जीरा, सरसों की आवश्यकता होती है. इसमें झोंक दो तरह से लगाया जाता है जिसमें एक तो मिट्टी के दीपक को चूल्हे की आग में पकाया जाता है उसमें तेल और अन्य मसाले स्वाद के अनुसार डालते हैं. जिसके बाद इस दीपक को छाछ के अंदर डाल देते हैं. इस तरह से यह छाछ तैयार होती है. यह केवल यही तक सीमित नहीं रहता है. बेसन से भी एक डिश तैयार करनी पड़ती है. छाछ और बेसन से बनी शानदार डिशइसके लिए बेसन नमक मिर्च जीरा हींग जैसी चीजों की जरूरत होती है इसमें अगर हम एक कटोरी बेसन को लेते हैं तो सबसे पहले कढ़ाई में गर्म तेल के साथ झोंका तैयार करते हैं जिसमें नमक मिर्च जीरा हींग जैसी चीजों को डालते हैं. फिर इसमें बेसन को डालकर पानी लगते हैं और फिर इसको पकाने के लिए रखते हैं जब यह हलवे के जैसा हो जाता है तब इसको थाली में रख देते हैं. फिर चाकू से बर्फी की तरह कटिंग करते हैं थोड़ी देर बाद इन्हीं टुकड़ों को जो हमारी पहले से तैयार की हुई छांछ होती है. उसमें डाल देते हैं. फिर कुछ समय में इनको अपने भोजन के साथ सब्जी या अन्य डिश के साथ इस्तेमाल करते हैं. इसको बुंदेलखंड में खड़ई के नाम से जाना जाता है. गर्मी के मौसम में इसको खाना काफी अच्छा माना जाता है. जो छाछ होती है. वह शरीर को इम्यूनिटी के साथ-साथ ठंडक भी देती है और जो बेसन से तैयार की गई डिश होती है. वह पेट को साफ रखने में मदद करती है यानी कि इससे अच्छा डाइजेशन होता है. बुंदेलखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में दशकों से लोग इसको बनाते आ रहे हैं. गर्मी से शुरू होकर बरसात तक के मौसम तक यह चलती है. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Sagar,Madhya Pradesh Source link

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सड़क पर नमाज की ज‍िद से सुलगा कोलकाता, चले-ईंट पत्‍थर, लगाई गई...

होमताजा खबरदेश सड़क पर नमाज की ज‍िद से सुलगा कोलकाता, चले-ईंट पत्‍थर, RAF ने संभाला मोर्चा Last Updated:May 17, 2026, 17:09 IST Kolkata Protest: कोलकाता में अवैध कब्जे के खिलाफ प्रशासन का एक्शन शुरु हो चुका है. इसी बीच खबर आ रही है कि 7-प्वाइंट (पार्क सर्कस) क्रॉसिंग पर भीड़ और पुलिस के आमने सामने से हालात तब बेकाबू हो गए है. दरअसल, माइनॉरिटी समुदाय के लोग सड़क पर नमाज़ पढ़ने पर पाबंदी और बुलडोज़र की कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं. उग्र प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हिंसक झड़प की खबर आ रही है. पुलिस ने नमाजियों को जब रोकने की कोशिश की, तो उग्र भीड़ ने अचानक ईंट-पत्थर बरसाने शुरू कर दिए. स्थिति को संभालने के लिए मौके पर भारी पुलिस बल और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) को तैनात किया गया है. कोलकाता में भीड़ ने काटा गदर. Kolkata Protest: पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में पुलिस के एक्शन के बाद बवाल मच गया है. शहर के सबसे व्यस्त इलाकों में से एक 7-प्वाइंट क्रॉसिंग (पार्क सर्कस क्षेत्र) के पास प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हिंसक झड़प की खबर सामने आई है. यह बवाल सड़क पर नमाज़ पढ़ने पर लगी पाबंदी और हाल ही में प्रशासन द्वारा की गई हवड़ा स्टेशन इलाके में बुलडोजर कार्रवाई के विरोध में शुरू हुआ, जिसने देखते ही देखते हिंसक रूप ले लिया. मिली जानकारी के अनुसार, इलाके के लगभग 200 से 250 अल्पसंख्यक प्रदर्शनकारी प्रशासन के बुलडोज़र अभियान का विरोध करने के लिए इकट्ठा हुए थे. प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग थी कि उन्हें सड़क पर नमाज़ अदा करने की अनुमति दी जाए. वे इलाके के अन्य लोगों से भी इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की अपील कर रहे थे. मौलाना का सरकारी आदेश पालन करने की अपील कोलकाता की नखोदा मस्जिद के इमाम मौलाना शफीक कासमी ने सड़कों पर नमाज पढ़ने पर रोक लगाने और केवल विशेष अनुमति से ही इसकी इजाजत देने के सरकारी फैसले का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि  सड़क परिवहन के लिए है, नमाज पढ़ने के लिए नहीं. सरकारी आदेश का पालन करें. पुलिस ने रोका तो शुरू हुआ पथराव हालात तब पूरी तरह बेकाबू हो गए जब पुलिस ने भीड़ को सड़क पर प्रदर्शन करने और नमाज पढ़ने से रोकने का प्रयास किया. पुलिस की इस कार्रवाई से प्रदर्शनकारी उग्र हो गए और उन्होंने कानून हाथ में लेते हुए पुलिस बल पर ईंट-पत्थर से हमला कर दिया. बीच सड़क पर अचानक हुए इस पथराव से इलाके में अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया और राहगीरों में दहशत फैल गई. RAF ने संभाला मोर्चा हिंसा और पथराव की सूचना मिलते ही भारी पुलिस बल और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की टीमें तुरंत घटनास्थल पर पहुंच गईं. सुरक्षा बलों ने मुस्तैदी से मोर्चा संभालते हुए भीड़ को तितर-बितर किया और स्थिति को अपने नियंत्रण में लिया. फिलहाल इलाके में भारी पुलिस बल तैनात है और हालात तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में बताए जा रहे हैं. कोलकाता में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हिंसक झड़प कहां हुई? यह हिंसक झड़प कोलकाता के प्रसिद्ध 7-प्वाइंट (पार्क सर्कस) इलाके के पास हुई. प्रदर्शनकारी सड़क पर उतरकर किस बात का विरोध कर रहे थे? प्रदर्शनकारी प्रशासन द्वारा की गई बुलडोज़र कार्रवाई और सड़क पर नमाज़ पढ़ने पर लगाई गई पाबंदी का कड़ा विरोध कर रहे थे. पुलिस के रोकने पर उग्र भीड़ ने क्या प्रतिक्रिया दी? जब पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की, तो उग्र भीड़ ने पुलिस टीम पर ईंट-पत्थर बरसाने शुरू कर दिए. हालात को काबू में करने के लिए प्रशासन ने किसे तैनात किया? पथराव और हिंसा की सूचना मिलते ही स्थिति को नियंत्रित करने के लिए तुरंत भारी पुलिस बल के साथ-साथ रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) को मौके पर तैनात किया गया. About the Author Deep Raj DeepakSub-Editor Deep Raj Deepak working with News18 Hindi (hindi.news18.com/) Central Desk since 2022. He has strong command over national and international political news, current affairs and science and research-based news. …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Kolkata,West Bengal Source link

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NASA में नौकरी कैसे मिलेगी: दुनिया की सबसे एडवांस्ड लैब और करोड़ों...

Last Updated:May 17, 2026, 16:19 IST How to Join NASA: क्या कोई भारतीय नासा में साइंटिस्ट बन सकता है? जानिए भारत से नासा पहुंचने का रास्ता, जरूरी कोर्सेस, नागरिकता के नियम, जॉब रोल्स और करोड़ों के सैलरी पैकेज की पूरी ए-टू-जेड जानकारी. How to Join NASA: भारतीय भी नासा में नौकरी के लिए आवेदन कर सकते हैं, जानें कैसे नई दिल्ली (How to Join NASA). ज्यादातर साइंस स्टूडेंट्स का एक अल्टीमेट सपना होता है- ब्रह्मांड के रहस्यों को सुलझाने और अंतरिक्ष की गहराइयों को नापने वाली दुनिया की सबसे बड़ी स्पेस एजेंसी ‘नासा’ में काम करना. जब भी अंतरिक्ष, रॉकेट या नए ग्रहों की खोज की बात होती है तो दिमाग में सबसे पहला नाम नासा का ही आता है. कई लोगों को लगता है कि नासा में सिर्फ अमेरिकी नागरिक ही नौकरी पा सकते हैं और भारतीयों के लिए इसके दरवाजे बंद हैं. लेकिन यह पूरी तरह सच नहीं है. भारतीय मूल के कई वैज्ञानिक और इंजीनियर (जैसे कल्पना चावला, सुनीता विलियम्स) नासा में कामयाबी का परचम लहरा चुके हैं. अगर आप भारत में रहकर तारों और सितारों की दुनिया के सपने देख रहे हैं तो आपके लिए भी नासा तक पहुंचने का रास्ता खुला है. यह रास्ता थोड़ा चैलेंजिंग है क्योंकि इसके लिए आपको सिर्फ किताबी कीड़ा नहीं, बल्कि लीक से हटकर सोचने वाला इनोवेटर बनना होगा. नासा में एंट्री पाने के कई रूट हैं- चाहे अमेरिकी नागरिकता के जरिए हो, टॉप ग्लोबल यूनिवर्सिटीज के जरिए हो या इसरो (ISRO) और नासा के जॉइंट प्रोजेक्ट के माध्यम से. जानिए भारतीय स्टूडेंट के रूप में आप नासा में कैसे जगह बना सकते हैं, आपको कौन से कोर्स करने होंगे, क्या योग्यता चाहिए और वहां कितनी सैलरी मिलती है. नासा में नौकरी कैसे मिलेगी? नासा में सिर्फ अंतरिक्ष यात्री (Astronauts) ही नहीं होते, बल्कि वहां वैज्ञानिक, इंजीनियर, डेटा एक्सपर्ट और टेक्नीशियन की बहुत बड़ी टीम काम करती है. नासा में नौकरी के लिए STEM (Science, Technology, Engineering, and Mathematics) फील्ड की पढ़ाई करना जरूरी है. इंजीनियरिंग कोर्स: एयरोस्पेस इंजीनियरिंग, मैकेनिकल इंजीनियरिंग, कंप्यूटर साइंस, इलेक्ट्रिकल या रोबोटिक्स इंजीनियरिंग. साइंटिफिक कोर्स: एस्ट्रोफिजिक्स (Astro-physics), एस्ट्रोनॉमी, जियोलॉजी, डेटा साइंस या क्वांटम फिजिक्स. हाइर एजुकेशन जरूरी: नासा में रिसर्च पदों के लिए सिर्फ बैचलर डिग्री काफी नहीं होती. इसके लिए किसी टॉप संस्थान से मास्टर डिग्री (M.Tech/MS) या पीएचडी (Ph.D.) करनी चाहिए. NASA Eligibility Criteria: नागरिकता का नियम नासा में सीधे परमानेंट नौकरी (Federal Job) पाने के लिए अमेरिकी नागरिकता (US Citizenship) होना अनिवार्य है. यह नासा का सख्त नियम है. लेकिन भारतीय नागरिकों के लिए भी यहां रास्ते खुले हैं: ग्रीन कार्ड और नागरिकता: कई भारतीय स्टूडेंट्स पहले अमेरिका की टॉप यूनिवर्सिटीज (जैसे MIT, स्टैनफोर्ड, कैलटेक) से एमएस या पीएचडी करते हैं. इसके बाद वे वहां काम करते हुए ग्रीन कार्ड और फिर अमेरिकी नागरिकता हासिल करके नासा के लिए आवेदन करते हैं. नासा कॉन्ट्रैक्टर: नासा कई निजी कंपनियों (जैसे स्पेसएक्स, बोइंग, लॉकहीड मार्टिन) और रिसर्च लैब के साथ मिलकर काम करता है. इन कंपनियों में विदेशी नागरिकों को नौकरी मिल सकती है और इनके जरिए आप नासा के प्रोजेक्ट्स पर काम कर सकते हैं. नासा में नौकरी के लिए आवेदन कैसे करें? नासा में नौकरी के लिए आप नीचे बताए गए तीन तरीकों से आवेदन कर सकते हैं: USAJOBS पोर्टल: अगर आपके पास अमेरिकी नागरिकता या वैध वर्क परमिट है तो आप अमेरिका सरकार की ऑफिशियल वेबसाइट usajobs.gov पर जाकर सीधे नासा की वैकेंसीज के लिए अप्लाई कर सकते हैं. नासा इंटरनेशनल इंटर्नशिप (NASA I2): नासा चुनिंदा देशों के स्टूडेंट्स के लिए इंटर्नशिप प्रोग्राम चलाता है. इसके लिए नासा की ऑफिशियल वेबसाइट के इंटरनेशनल इंटर्नशिप पेज पर नजर रखें. इसरो (ISRO) के जरिए: भारत की अपनी स्पेस एजेंसी इसरो और नासा कई जॉइंट मिशन (जैसे NISAR सैटेलाइट प्रोजेक्ट) पर काम करते हैं. इसरो में वैज्ञानिक बनकर भी नासा के साथ काम करने का गौरव पा सकते हैं. NASA Jobs: नासा में किस पोस्ट पर नौकरी मिलेगी? नासा में आपकी योग्यता के हिसाब से बेहतरीन रोल्स पर नौकरी मिल सकती है: मिशन स्पेशलिस्ट/एस्ट्रोनॉट: अंतरिक्ष मिशन पर जाने वाले और स्पेस स्टेशन को संभालने वाले. एयरोस्पेस इंजीनियर: रॉकेट, सैटेलाइट और स्पेसक्राफ्ट का डिजाइन तैयार करने वाले. डेटा साइंटिस्ट: अंतरिक्ष से आने वाले सिग्नल्स, तस्वीरों और विशाल डेटा का एनालिसिस करने वाले. प्लैनेटरी साइंटिस्ट: दूसरे ग्रहों के वातावरण, मिट्टी और वहां जीवन की संभावनाओं पर रिसर्च करने वाले. नासा में कितनी सैलरी मिलती है? नासा में सैलरी अमेरिकी सरकार के ‘जनरल शेड्यूल’ (GS) पे-स्केल के आधार पर तय होती है। यहाँ शुरुआती सैलरी भी बेहद शानदार होती है: शुरुआती सैलरी (इंजीनियर/वैज्ञानिक): लगभग $65,000 से $90,000 सालाना (यानी करीब 54 लाख से 75 लाख रुपये). अनुभवी वैज्ञानिक/सीनियर रोल्स: सीनियर वैज्ञानिकों और एस्ट्रोनॉट्स की सैलरी $120,000 से $160,000+ सालाना (यानी 1 करोड़ से 1.35 करोड़ रुपये से अधिक) तक जाती है. इसके साथ ही वर्ल्ड क्लास हेल्थ इंश्योरेंस, रिसर्च फंड्स और दुनिया की सबसे एडवांस्ड लैब्स में काम करने का मौका मिलता है. नासा में नौकरी और करियर ऑप्शंस के लिए ऑफिशियल वेबसाइट nasa.gov/careers/ पर अपडेट्स चेक करते रहें. About the Author Deepali PorwalSenior Sub Editor Deepali Porwal is a seasoned bilingual journalist with 11 years of experience in the media industry. She currently works with News18 Hindi, focusing on the Education and Career desk. She is known for her versat…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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Adhik Maas Food Rules Tips 2026 what to eat and not to...

Adhik Maas Food Rules Tips 2026: अधिकमास की शुरुआत 17 मई से हो गई है और समापन 15 जून को होगा, यह दो महीने का होने वाला दुर्लभ ज्येष्ठ अधिकमास है. हिंदू धर्म में अधिकमास को विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व के साथ देखा जाता है. अधिकमास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है और यह लगभग हर तीन साल में एक बार आता है. इस पूरे मास में भगवान नारायण की पूजा-अर्चना, दान-पुण्य और आध्यात्मिक साधना का विशेष महत्व बताया गया है. मान्यता है कि इस महीने में की गई भक्ति और सत्कर्मों का फल कई गुना बढ़कर मिलता है. शास्त्रों में अधिकमास को लेकर कुछ नियम बताए गए हैं और इन नियमों में खान-पान से जुड़े नियम भी शामिल हैं. आइए जानते हैं कैसे बनता है यह अधिकमास और इस मास में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं… कैसे बनता है अधिकमास?हिंदू पंचांग चंद्र और सूर्य की गति पर आधारित होता है. चंद्र वर्ष लगभग 354 दिनों का होता है, जबकि सूर्य वर्ष 365 दिनों का. दोनों के बीच लगभग 11 दिनों का अंतर आ जाता है. यही अंतर हर तीन साल में लगभग एक महीने के बराबर हो जाता है. इस संतुलन को बनाए रखने के लिए हिंदू कैलेंडर में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे अधिकमास कहा जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इस मास को भगवान विष्णु ने अपना नाम ‘पुरुषोत्तम मास’ देकर विशेष महत्व प्रदान किया था. अधिकमास में खान-पान को लेकर नियमअधिकमास की शुरुआत के साथ ही लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि इस पवित्र अवधि में क्या खाएं और क्या नहीं. मान्यता है कि अधिकमास भगवान की साधना, दान और सात्त्विक लाइफस्टाइल के लिए विशेष माना जाता है, इसलिए खानपान पर भी संयम रखना जरूरी बताया जाता है. धार्मिक परंपराओं के अनुसार इस दौरान ताजा, हल्का और सुपाच्य भोजन जैसे फल, मौसमी सब्ज़ियां, घर का बना सादा खाना, दालें और कम मसाले वाले व्यंजन सेवन करने की सलाह दी जाती है. वहीं, तला-भुना, अत्यधिक मसालेदार, जंक फूड, मांसाहार और शराब से दूर रहने की बात कही जाती है. कई श्रद्धालु इस महीने में लहसुन-प्याज का भी परहेज करते हैं और व्रत रखकर फलाहार या केवल एक समय भोजन करते हैं. आस्थावान लोग मानते हैं कि अधिकमास में शुद्ध और सात्त्विक भोजन ना केवल शरीर को हल्का रखता है बल्कि मन को भी शांत और भक्ति में एकाग्र करता है. अधिकमास में क्या ना खाएं?अधिकमास के दौरान, दाल, मूली, प्याज, लहसुन, फूलगोभी, मूंगफली, सोयाबीन, उड़द दाल, बैंगन, शहद, चंदन, चुकंदर, सब्जियां, औषधियां, मछली, मांस, अंडे, कोई भी तामसिक भोजन, तिल का तेल और गाजर खाने से बचना चाहिए. इन सभी चीजों के साथ पराया अन्न, तंबाकू, मदिरा हमेशा-हमेशा के लिए त्याग दें. अधिकमास में क्या खाएं?महर्षि वाल्मीकि के अनुसार, अधिकमास में गेहूं, चावल, गाय का घी, मूंग, जौ, मटर, तिल, कटहल आदि चीजों का सेवन करना चाहिए. वहीं आम, केला, आंवला, ककड़ी, बथुआ, जीरा, सौंठ और सेंधा नमक का सेवन करना चाहिए. Source link

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‘मुसलमान न कभी झुका है और न कभी झुकेगा’ , अरशद मदनी...

जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी ने आरोप लगाया है कि देश को योजनाबद्ध तरीके से एक वैचारिक राष्ट्र में बदलने की कोशिश की जा रही है. मदनी ने दावा किया कि पहले केवल मुसलमान निशाने पर थे. अब इस्लाम को भी निशाना बनाया जा रहा है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि मुसलमान न कभी झुका है और न कभी झुकेगा. अरशद मदनी ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जमीयत उलमा-ए-हिंद की कार्यसमिति की दो दिवसीय बैठक का घोषणापत्र जारी किया. मदनी ने कहा, ‘देश के वर्तमान हालात, बढ़ती सांप्रदायिकता, संवैधानिक संस्थाओं की चुप्पी, मुसलमानों और इस्लामी प्रतीकों के खिलाफ बढ़ते कदम तथा नफरत आधारित राजनीति अत्यंत चिंताजनक है. हालांकि मुसलमान न कभी झुका है और न कभी झुकेगा. वह प्रेम से झुक सकता है, लेकिन ताकत, धमकी और अत्याचार के सामने उसे कभी झुकाया नहीं जा सकता.’ मदनी ने पोस्ट में लिखा, ‘देश में नफरत की राजनीति अब धमकी की राजनीति में बदल चुकी है, जिसका उद्देश्य मुसलमानों को भयभीत करके उन्हें अपनी शर्तों पर जीवन बिताने के लिए मजबूर करना है. सत्ता प्राप्ति के लिए अमन और एकता के साथ खतरनाक खिलवाड़ किया जा रहा है, जिसके परिणामस्वरूप धार्मिक उन्माद और नफरत लगातार बढ़ रही है, जबकि कानून के रखवाले मूकदर्शक बने हुए हैं. हालिया चुनावों के बाद कुछ राजनीतिज्ञों में नफरत के आधार पर सत्ता हासिल करने का चलन और बढ़ गई है. बहुसंख्यक समुदाय को अल्पसंख्यकों के विरुद्ध खड़ा करने के लिए धार्मिक भावनाओं को भड़काया जा रहा है, जबकि सरकारें भय और धमकी से नहीं बल्कि न्याय और इंसाफ से चलती हैं.’ अरशद मदनी ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के बयान का जिक्र किया. मदनी ने कहा, ‘पश्चिम बंगाल के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री का यह बयान कि वे ‘सिर्फ हिंदुओं के लिए काम करेंगे’ संवैधानिक और लोकतांत्रिक मूल्यों के पूरी तरह विरुद्ध है, क्योंकि हर मुख्यमंत्री शपथ लेकर सभी नागरिकों के साथ न्याय करने का संकल्प लेता है. सत्ता में बैठे लोगों की जिम्मेदारी हर नागरिक के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना है, न कि किसी विशेष वर्ग के खिलाफ नफरत और विभाजन की राजनीति करना.’ इसके साथ ही, मदनी ने ‘एक्स’ पोस्ट में कहा, ‘देश को योजनाबद्ध तरीके से एक वैचारिक राष्ट्र में बदलने की कोशिश की जा रही है. समान नागरिक संहिता, वंदे मातरम को अनिवार्य बनाना, मस्जिदों और मदरसों के खिलाफ कार्रवाइयां व एसआईआर की आड़ में वास्तविक नागरिकों को मताधिकार से वंचित करने जैसे कदम इसी सिलसिले की कड़ियां हैं.’ मदनी ने कहा कि जमीयत उलमा-ए-हिंद इन सभी कदमों के खिलाफ अपनी कानूनी और लोकतांत्रिक लड़ाई जारी रखेगी. मदनी ने यह भी कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों ने भी मुसलमानों को सामाजिक, शैक्षिक, राजनीतिक और आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचाया, लेकिन आज हालात उससे कहीं अधिक गंभीर हो चुके हैं. पहले केवल मुसलमान निशाने पर थे. अब इस्लाम को भी निशाना बनाया जा रहा है. अरशद मदनी ने कहा, ‘वर्ष 2014 के बाद बनाए गए कानूनों और हालिया कदमों इस बात का स्पष्ट प्रमाण हैं कि वर्तमान सरकार केवल मुसलमानों ही नहीं, बल्कि इस्लाम को भी नुकसान पहुंचाना चाहती है.’ जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष ने अपने पोस्ट के आखिर में लिखा, ‘हम सभी न्यायप्रिय दलों, सामाजिक संगठनों और देशहित में सोचने वाले नागरिकों से अपील करते हैं कि वे एकजुट होकर सांप्रदायिक और फासीवादी ताकतों का लोकतांत्रिक और सामाजिक स्तर पर मुकाबला करें व देश में भाईचारा, सहिष्णुता, न्याय और संविधान की सर्वोच्चता के लिए संयुक्त संघर्ष करें.’ Source link

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