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Gardening Tips: क्या इंसानों की तरह पौधों को भी लगती है लू?...

Last Updated:May 17, 2026, 11:13 IST Plants Heatwave Tips: गर्मियों में बढ़ता तापमान और तेज लू सिर्फ इंसानों को ही नहीं, बल्कि पौधों को भी प्रभावित करती है. अत्यधिक गर्मी के कारण पौधों की पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं, मिट्टी जल्दी सूख जाती है और पौधों की वृद्धि रुक सकती है. ऐसे में कुछ आसान और देसी उपाय अपनाकर पौधों को सुरक्षित रखा जा सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार सुबह जल्दी या शाम के समय पौधों में पानी देना सबसे बेहतर माना जाता है, ताकि पानी जल्दी न सूखे. मिट्टी की नमी बनाए रखने के लिए सूखी पत्तियां, भूसा या नारियल की भूसी का इस्तेमाल किया जा सकता है. तेज धूप के समय पौधों को हल्की छांव देना भी फायदेमंद रहता है. ख़बरें फटाफट भीलवाड़ा: राजस्थान सहित भीलवाड़ा में तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है और भीलवाड़ा के तापमान की बात की जाए तो भीलवाड़ा में भी तापमान अब 40 से 45 डिग्री के बीच पहुंच गया है. गर्मी में हम सबसे पहले यही सोचते हैं कि अपने आप को और अपने पशुओं को लू लगने से कैसे बचा सकते हैं और इसके लिए कई तरह के जतन भी करते हैं लेकिन क्या आप यह बात जानते हैं कि अपने किचन गार्डन में पौधों को भी लू लग सकती है. भीषण गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान का असर अब केवल इंसानों पर ही नहीं, बल्कि पौधों पर भी साफ दिखाई देने लगा है. तेज धूप और लू के कारण पौधों में “हीट स्ट्रेस” की स्थिति बन जाती है, जिससे उनकी ग्रोथ पर बुरा असर पड़ता है. तेज गर्मी के कारण पौधों की पत्तियां मुरझाने लगती हैं और कई बार उनके किनारे जलने जैसे नजर आते हैं. पानी की कमी के चलते पौधे सूखने लगते हैं और फूल-फल भी झड़ सकते हैं. खासकर गमलों में लगे पौधे ज्यादा प्रभावित होते हैं क्योंकि उनमें मिट्टी जल्दी सूख जाती है. पौधों को लू से बचाने के लिए सुबह या शाम के समय ही पानी देना चाहिए और उन्हें सीधी धूप से बचाना जरूरी है. इसके अलावा मिट्टी में नमी बनाए रखने के लिए मल्चिंग करना भी फायदेमंद होता है. थोड़ी सी सावधानी से पौधों को गर्मी से सुरक्षित रखा जा सकता है. पौधों में लगे फूल और छोटे-छोटे फल झड़ने लगतेरूपेंद्र सिंह ने बताया कि जब तापमान बहुत ज्यादा बढ़ जाता है और मिट्टी में नमी की कमी हो जाती है, तब पौधों में हीट स्ट्रेस की स्थिति बनती है. इस दौरान पौधों की पत्तियां मुरझाने लगती हैं और कई बार उनके किनारे जले हुए जैसे दिखते हैं. यदि समय रहते ध्यान नहीं दिया जाए तो पौधे सूख भी सकते हैं. इसका असर सबसे ज्यादा गमलों में लगे पौधों पर होता है, क्योंकि उनमें मिट्टी जल्दी सूख जाती है और जड़ों को पर्याप्त नमी नहीं मिल पाती. भीषण गर्मी का असर पौधों के फूल और फलों पर भी पड़ता है. तापमान ज्यादा होने पर पौधों में लगे फूल और छोटे-छोटे फल झड़ने लगते हैं, जिससे उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है. ऐसे में किचन गार्डन संभालने वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है, ताकि उनकी मेहनत पर पानी न फिर जाए और पौधे स्वस्थ बने रहें. इंसानों के साथ-साथ पौधों का ख्याल रखना भी जरूरीपौधों को लू से बचाने के लिए कुछ आसान उपाय अपनाए जा सकते हैं. सबसे पहले पौधों को सुबह जल्दी या शाम के समय ही पानी देना चाहिए, ताकि पानी जल्दी सूखे नहीं और जड़ों तक सही तरीके से पहुंच सके. इसके अलावा पौधों को सीधी तेज धूप से बचाने के लिए शेड या जाल का उपयोग करना फायदेमंद रहता है. मिट्टी की नमी बनाए रखने के लिए मल्चिंग करना भी एक कारगर तरीका है, जिससे पौधों को लंबे समय तक नमी मिलती रहती है.  थोड़ी सी सावधानी और सही देखभाल से पौधों को भीषण गर्मी और लू से बचाया जा सकता है. यदि समय-समय पर पानी, छाया और पोषण का ध्यान रखा जाए तो किचन गार्डन के पौधे न केवल सुरक्षित रहेंगे, बल्कि अच्छी ग्रोथ भी करेंगे. ऐसे में गर्मी के इस दौर में इंसानों के साथ-साथ पौधों का ख्याल रखना भी बेहद जरूरी हो गया है. About the Author Jagriti Dubey Hi, I am Jagriti Dubey, a media professional with 6 years of experience in social media and content creation. I started my career with an internship at Gbn 24 news channel in 2019 and have worked with many repu…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Bhilwara,Rajasthan Source link

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महिलाओं के कपड़े फाड़े, बाल काटे और चप्पलों की माला पहनाकर 2...

Last Updated:May 17, 2026, 10:11 IST यह विवाद एक परिवार के मंदिर में प्रवेश को लेकर शुरू हुआ. स्थानीय पंचायत ने उस परिवार के मंदिर आने पर आपत्ति जताई थी, लेकिन परिवार ने इस प्रतिबंध का विरोध किया और मंदिर जाने पर अड़ा रहा. बताया जा रहा है कि घटना वाले दिन मंदिर परिसर में धार्मिक कार्यक्रम और सामुदायिक भोज का आयोजन किया गया था. इसी दौरान पीड़ित परिवार के एक युवक ने मंदिर में प्रवेश पर रोक का विरोध किया. घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. महाराष्ट्र के उल्हासनगर से इंसानियत को शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है. यहां मंदिर में प्रवेश को लेकर हुए विवाद के बाद कुछ महिलाओं के साथ कथित तौर पर बेरहमी से मारपीट की गई, उनके कपड़े फाड़े गए, बाल काटे गए और उन्हें चप्पलों की माला पहनाकर सड़क पर घुमाया गया. घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. पुलिस के मुताबिक, विवाद एक परिवार के मंदिर में प्रवेश को लेकर शुरू हुआ. स्थानीय पंचायत ने उस परिवार के मंदिर आने पर आपत्ति जताई थी, लेकिन परिवार ने इस प्रतिबंध का विरोध किया और मंदिर जाने पर अड़ा रहा. बताया जा रहा है कि घटना वाले दिन मंदिर परिसर में धार्मिक कार्यक्रम और सामुदायिक भोज का आयोजन किया गया था. इसी दौरान पीड़ित परिवार के एक युवक ने मंदिर में प्रवेश पर रोक का विरोध किया. युवक का कहना था कि उसके परिवार ने कोई गलत काम नहीं किया है, इसलिए उन्हें मंदिर में जाने से नहीं रोका जा सकता. इसके बाद वह मंदिर परिसर में चला गया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, युवक के मंदिर में जाने से वहां मौजूद दूसरे पक्ष के लोग भड़क गए. आरोप है कि बाद में कुछ लोगों ने पीड़ित परिवार के घर पर लाठी-डंडों और लोहे की रॉड से हमला कर दिया. पहले परिवार के पुरुषों के साथ मारपीट की गई और फिर महिलाओं को निशाना बनाया गया. आरोप है कि महिलाओं को घर से घसीटकर सड़क पर लाया गया, उनके कपड़े फाड़े गए, उन्हें अर्धनग्न किया गया और कैंची से उनके बाल काट दिए गए. इतना ही नहीं, महिलाओं को चप्पलों की माला पहनाकर करीब दो किलोमीटर तक सड़क पर घुमाया गया. आरोपियों ने रास्ते में कई लोगों को महिलाओं के पैर छूने के लिए भी मजबूर किया. घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस पर कार्रवाई का दबाव बढ़ा. वीडियो में महिलाएं सड़क पर अपमानित होती नजर आ रही हैं जबकि आसपास लोग खड़े दिखाई दे रहे हैं. पुलिस का कहना है कि पीड़ित और आरोपी दोनों परिवार एक ही समुदाय से जुड़े हैं. बताया जा रहा है कि इससे पहले भी पीड़ित परिवार पर कुछ आरोप लगाए गए थे, जिसके बाद कथित तौर पर उनका सामाजिक बहिष्कार किया गया था. उल्हासनगर एसीपी शैलेश काले ने बताया कि इस मामले में सात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है और अब तक दो महिलाओं को गिरफ्तार किया जा चुका है. पुलिस के मुताबिक, दोनों पक्षों के बीच मंदिर में प्रवेश को लेकर विवाद था और दोनों परिवारों के खिलाफ अलग-अलग मामले दर्ज किए गए हैं. वहीं पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने शुरुआत में मामले को गंभीरता से नहीं लिया. परिवार का कहना है कि घटना महिलाओं की गरिमा और मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन थी, लेकिन पुलिस ने पहले मामूली धाराओं में केस दर्ज किया. फिलहाल पुलिस मुख्य आरोपियों समेत फरार अन्य लोगों की तलाश में जुटी हुई है. About the Author Saad Omar साद बिन उमर को पत्रकारिता के क्षेत्र में 15 साल से अधिक का अनुभव है, जिनमें से 12 साल उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता को दिए है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने आज तक, एनडीटीवी, पीटीआई और नया इंडिया जैसे प्र…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Ulhasnagar,Thane,Maharashtra Source link

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क्या बिहार में नई पॉलिटिकल लाइन खींच दी गई? सम्राट चौधरी को...

पटना. “जब नीतीश कुमार ने बिहार के मुख्यमंत्री पद की कमान छोड़ने का फैसला किया, तो उन्होंने अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी भी खुद तय किया था. नीतीश जी ने सम्राट चौधरी के हाथों में अपना उत्तराधिकार सौंपा था.” अपने इसी संबोधन में ललन सिंह ने आगे जोड़ा कि “सम्राट चौधरी सिर्फ भाजपा की पसंद नहीं थे, बल्कि उन्हें खुद नीतीश कुमार ने आशीर्वाद दिया था. सम्राट चौधरी ने भी संकल्प लिया है कि वे नीतीश कुमार के दिखाए विकास के रास्ते पर ही बिहार को आगे बढ़ाएंगे.” लखीसराय के एक दिवसीय दौरे पर पहुंचे केंद्रीय पंचायती राज मंत्री ललन सिंह ने खुले मंच से जैसे ही बिहार के वर्तमान और भावी नेतृत्व को लेकर जेडीयू का रुख साफ किया, उनके इस बयान ने बिहार की राजनीति में अचानक ही गर्माहट ला दी है. दरअसल, बिहार की सियासत में ‘उत्तराधिकार’ का सवाल हमेशा से सबसे जटिल और संवेदनशील रहा है. ऐसे में राजनीति के जानकारों की नजर में ललन सिंह का दिया गया बयान जेडीयू और बीजेपी के शीर्ष स्तर पर तय की गई एक बेहद गहरी रणनीतिक बिसात का हिस्सा माना जा रहा है. ललन सिंह का यह बयान इसलिए भी अहम है, क्योंकि बिहार में हाल ही में नेतृत्व परिवर्तन हुआ और सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री बने हैं. इसको लेकर विपक्ष लगातार यह आरोप लगाता रहा कि मुख्यमंत्री चयन भाजपा का एकतरफा फैसला था और जेडीयू की भूमिका सीमित हो गई है. अब जब उन्होंने सार्वजनिक तौर पर इसकी घोषणा की है तो ललन सिंह के इस बयान को सिर्फ एक राजनीतिक प्रशंसा भर नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे बिहार NDA की भविष्य की राजनीति का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है. ललन सिंह के बयान के कई राजनीतिक मायने ललन सिंह ने जब यह कहा कि सम्राट चौधरी ने भी यह संकल्प लिया है कि वे नीतीश कुमार द्वारा दिखाए गए रास्ते पर चलते हुए बिहार के विकास को आगे बढ़ाएंगे. साफ है कि उनके इस बयान को बिहार एनडीए की भविष्य की राजनीति का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है. वरिष्ठ पत्रकार अशोक कुमार शर्मा कहते हैं कि नीतीश कुमार के सक्रिय राजनीति से पीछे हटने के बाद बिहार एनडीए के भीतर जो नए शक्ति केंद्र उभर रहे हैं, ललन सिंह का यह बयान उन समीकरणों को एक नया आकार देता हुआ प्रतीत हो रहा है. ललन सिंह के बयान ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि सम्राट चौधरी को सिर्फ भाजपा का समर्थन नहीं, बल्कि खुद नीतीश कुमार की सहमति और भरोसा भी प्राप्त था. निशांत कुमार बनाम सम्राट चौधरी ललन सिंह का यह बयान अचानक नहीं आया है, इसके पीछे हालिया सियासी घटनाक्रम है. मार्च 2026 में जब नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से हटने के संकेत दिए, तो उनके बेटे निशांत कुमार आधिकारिक तौर पर जेडीयू में शामिल हो गए थे. इसके बाद 15 अप्रैल 2026 में एनडीए गठबंधन के तहत भाजपा के सम्राट चौधरी को बिहार का नया मुख्यमंत्री बनाया गया. इसके बाद मंत्रिपरिषद विस्तार में बीते 7 मई को निशांत कुमार को उनके मंत्रिमंडल में स्वास्थ्य मंत्री की जिम्मेदारी दी गई. इसके बावजूद, जेडीयू के अंदर और राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा आम थी कि क्या नीतीश कुमार अपनी पारिवारिक विरासत को ही आगे बढ़ाएंगे. लेकिन, लखीसराय में ललन सिंह ने ‘उत्तराधिकारी’ शब्द का इस्तेमाल करके यह साफ संदेश देने की कोशिश की है कि नीतीश कुमार की राजनीतिक विरासत का नेतृत्व अब भाजपा के सम्राट चौधरी के हाथों में है, न कि उनके बेटे निशांत कुमार के पास. लव-कुश समीकरण की मजबूरी बिहार में नीतीश कुमार की राजनीति का सबसे बड़ा आधार ‘लव-कुश’ (कुर्मी और कोइरी) वोट बैंक रहा है. नीतीश कुमार खुद कुर्मी जाति से आते हैं, जबकि वर्तमान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी कोइरी (कुशवाहा) समाज के बड़े चेहरे हैं. नीतीश कुमार के हटने के बाद इस बात का बड़ा डर था कि यह वोट बैंक बिखर सकता है. ललन सिंह ने सम्राट चौधरी को नीतीश का उत्तराधिकारी बताकर इस पारंपरिक वोट बैंक को एकजुट रखने की रणनीतिक चाल चली है. वे संदेश देना चाहते हैं कि नीतीश कुमार के जाने के बाद भी ‘लव-कुश’ एकता की सरकार बिहार में मजबूती से काम कर रही है. क्यों अहम है ललन सिंह का बयान? बिहार में करीब दो दशक तक सत्ता के केंद्र में रहे नीतीश कुमार की राजनीति हमेशा इस सवाल से जुड़ी रही कि उनके बाद नेतृत्व किसके हाथ में जाएगा. जेडीयू के भीतर भी कभी किसी नेता को खुलकर उत्तराधिकारी नहीं बताया गया. ऐसे में ललन सिंह जैसे वरिष्ठ नेता का सार्वजनिक मंच से सम्राट चौधरी को उत्तराधिकारी बताना राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. ललन सिंह का बयान इसलिए भी खास यह बयान इसलिए भी अहम है क्योंकि बिहार में हाल ही में नेतृत्व परिवर्तन हुआ और सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री बने. विपक्ष लगातार यह आरोप लगाता रहा कि मुख्यमंत्री चयन भाजपा का एकतरफा फैसला था और जेडीयू की भूमिका सीमित हो गई थी. लेकिन ललन सिंह के बयान ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि सम्राट चौधरी को सिर्फ भाजपा का समर्थन नहीं बल्कि खुद नीतीश कुमार की सहमति और भरोसा भी प्राप्त था. NDA में संतुलन साधने की कोशिश राजनीति के जानकारों का मानना है कि यह बयान एनडीए के भीतर संतुलन बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है. बिहार में भाजपा और जेडीयू के रिश्ते हमेशा राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार बदलते रहे हैं. ऐसे में सम्राट चौधरी को “नीतीश मॉडल” का विस्तार बताना जेडीयू समर्थकों को यह भरोसा देने की कोशिश है कि सत्ता परिवर्तन के बावजूद शासन की दिशा नहीं बदलेगी. क्या आंतरिक खींचतान पर मरहम है बयान? सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद बिहार भाजपा के भीतर भी कई तरह की आंतरिक खींचतान की खबरें चर्चा में आ रही थीं. राजनीति के जानकारों का मानना है कि ललन सिंह ने यह बयान देकर सम्राट चौधरी की स्थिति को और मजबूत किया है. उन्होंने विपक्ष और भाजपा के विरोधी धड़े को यह संदेश दिया है कि मौजूदा सरकार और सम्राट चौधरी के पीछे नीतीश कुमार का पूरा नैतिक और राजनीतिक समर्थन खड़ा है. बिहार में अनुकंपा बनाम जनता की राजनीति बहरहाल, लखीसराय में दिया

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NEET UG Paper Leak CBI Investigation: ‘यही आएगा..’ NEET UG से पहले...

नई दिल्ली (NEET UG Paper Leak). नीट यूजी में हुए पेपर लीक मामले की परतें धीरे-धीरे खुलने लगी हैं. CBI की ताबड़तोड़ कार्रवाई ने इस रैकेट के पीछे काम कर रहे बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है. सीबीआई ने पुणे से बॉटनी की टीचर मनीषा गुरुनाथ मंधारे को गिरफ्तार किया है. इस मामले में पकड़े गए आरोपियों की कुल संख्या 9 हो गई है. जांच में सामने आया है कि यह कोई छिटपुट घटना नहीं थी, बल्कि बेहद सुनियोजित तरीके से चलाया जा रहा पूरा रैकेट था, जिसमें सरकारी व्यवस्था से जुड़े लोग ही सेंधमारी कर रहे थे. जांच एजेंसी के मुताबिक, इस पूरे खेल की स्क्रिप्ट अप्रैल में ही लिख दी गई थी. परीक्षा कराने वाली संस्था एनटीए (NTA) की तरफ से नियुक्त होने के बाद, आरोपी शिक्षिका ने अन्य बिचौलियों के साथ मिलकर छात्रों को फंसाना शुरू किया. इसके बाद उन्हें अपने घर पर ‘स्पेशल कोचिंग’ के नाम पर बुलाया और सीधे वही सवाल रटवाए गए, जो नीट यूजी परीक्षा में आने वाले थे. सीबीआई की इस कार्रवाई से शिक्षा जगत और लाखों उम्मीदवारों के बीच हड़कंप मच गया है क्योंकि अब लीक के पुख्ता सबूत सामने आ रहे हैं. CBI की जांच: पुणे की बॉटनी टीचर का सनसनीखेज कनेक्शन सीबीआई की जांच में सामने आया है कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने मनीषा गुरुनाथ मंधारे को परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े कामों के लिए नियुक्त किया था. लेकिन जिम्मेदारी संभालने के बजाय उसने इसका फायदा उठाया. अप्रैल में मनीषा ने पुणे की ही एक अन्य आरोपी मनीषा वागमारे के जरिए उन उम्मीदवारों से संपर्क किया, जो नीट की तैयारी कर रहे थे. इसके बाद उम्मीदवारों को झांसा देकर मंधारे के घर पर ही सीक्रेट तरीके से कोचिंग देना शुरू कर दिया गया. कोचिंग के नाम पर रटवाए ‘हूबहू’ वही सवाल पूछताछ में सीबीआई ने जो खुलासा किया है, वह बेहद चौंकाने वाला है. आरोपी शिक्षिका ने कोचिंग के दौरान स्टूडेंट्स को बॉटनी (वनस्पति विज्ञान) और जूलॉजी (प्राणी विज्ञान) के कुछ खास और महत्वपूर्ण सवाल अपनी नोटबुक में लिखने को कहा था. इतना ही नहीं, उसने स्टूडेंट्स से अपनी किताबों में भी उन सवालों पर विशेष निशान (मार्क) लगवाए थे. जब 3 मई को नीट यूजी की वास्तविक परीक्षा हुई तो छात्र हैरान रह गए- शिक्षिका की तरफ से नोट करवाए गए ज्यादातर सवाल असली प्रश्नपत्र से हूबहू मेल खा रहे थे. देशभर में छापेमारी: लैपटॉप, मोबाइल और बैंक स्टेटमेंट जब्त इस मामले की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सीबीआई ने पिछले 24 घंटों में देश के 6 अलग-अलग ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की है. इस दौरान जांच एजेंसी ने कई आपत्तिजनक दस्तावेज, लैपटॉप, मोबाइल फोन और संदिग्ध बैंक स्टेटमेंट जब्त किए हैं. इन इलेक्ट्रॉनिक सबूतों का फॉरेंसिक एनालिसिस किया जा रहा है, जिससे पता लगाया जा सके कि इस खेल में और कितने लोग शामिल हैं और पैसों का लेनदेन कहां-कहां हुआ. केमिस्ट्री लेक्चरर कुलकर्णी था मुख्य सूत्रधार! इस पूरे रैकेट का मुख्य केंद्र केमिस्ट्री और बायोलॉजी के पेपर लीक से जुड़ा है. सीबीआई ने इससे पहले इस मामले के मास्टरमाइंड पीवी कुलकर्णी को गिरफ्तार किया था. कुलकर्णी एनटीए की तरफ से परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ा केमिस्ट्री का लेक्चरर है, जिसके पास प्रश्न पत्रों तक सीधी पहुंच थी. जांच में पता चला है कि अप्रैल के आखिरी हफ्ते में कुलकर्णी ने ही मनीषा वाघमारे के साथ मिलकर पुणे में अपने घर पर चुनिंदा स्टूडेंट्स के लिए ‘स्पेशल सीक्रेट सेशन’ रखा था, जहां केमिस्ट्री का पेपर लीक किया गया था. 6 शहरों तक फैला नेटवर्क, 9 आरोपी गिरफ्तार सीबीआई अब तक इस मामले में दिल्ली, जयपुर, गुरुग्राम, नासिक, पुणे और अहिलियानगर जैसे बड़े शहरों से कुल 9 लोगों को दबोच चुकी है. इनमें से 5 आरोपियों को कोर्ट ने 7 दिनों की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है. पुणे से गिरफ्तार की गईं दोनों महिला आरोपियों को दिल्ली लाया जा रहा है, जहां मुख्य आरोपियों के सामने बिठाकर उनसे कड़ी पूछताछ की जाएगी, जिससे इस पूरे रैकेट के अंतिम छोर तक पहुंचा जा सके. नीट यूजी री-टेस्ट अब 21 जून 2026 को होगा. Source link

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Aaj Ka Tula Rashifal: तुला राशि वालों सावधान! आज रिश्तों में दूरियां...

Last Updated:May 17, 2026, 07:07 IST Aaj Ka Tula Rashifal 17 May 2026: आज का दिन तुला राशि वालों के लिए संतुलन और समझदारी के साथ आगे बढ़ने का संकेत दे रहा है. ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार संयम और धैर्य से लिए गए फैसले भविष्य में लाभदायक साबित हो सकते हैं. आज आपका ध्यान भविष्य की योजनाओं, निवेश और करियर से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों पर केंद्रित रहेगा. नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं, जबकि व्यापार से जुड़े लोगों के लिए भी दिन सकारात्मक संकेत दे रहा है. आर्थिक मामलों में जल्दबाजी से बचने की सलाह दी गई है. पारिवारिक और वैवाहिक जीवन में सामान्य माहौल बना रहेगा तथा रिश्तों में आपसी समझ बढ़ेगी. स्वास्थ्य के लिहाज से दिन सामान्य रहेगा, लेकिन मानसिक तनाव से बचने और पर्याप्त आराम करने की जरूरत है. ख़बरें फटाफट अजमेर. तुला राशि के जातकों के लिए 17 मई यानी आज का दिन गहराई से सोचने और जीवन के कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं को समझने का संकेत दे रहा है. चंद्रमा आज भी आपकी राशि से अष्टम भाव यानी वृषभ राशि में गोचर कर रहे हैं. ज्योतिष में अष्टम भाव को रहस्य, शोध, आध्यात्म, परिवर्तन और छिपे हुए ज्ञान का भाव माना जाता है. ऐसे में आज आपका मन सामान्य दिनचर्या से हटकर किसी गहरी और ज्ञानवर्धक विषय की ओर आकर्षित हो सकता है. तुला राशि वालों का भविष्य की योजनाओं पर ध्यान रहेगा अजमेर के प्रसिद्ध ज्योतिष हिमांशु दाधीच के अनुसार कार्य और व्यापार की बात करें तो वीकेंड होने के बावजूद आपका ध्यान भविष्य की योजनाओं, रिसर्च और नई जानकारियां जुटाने में लगा रह सकता है. खासतौर पर ज्योतिष, आध्यात्म, योग, ध्यान या किसी प्रेरणादायक पुस्तक को पढ़ने में रुचि बढ़ेगी. अगर आप किसी नई योजना पर काम कर रहे हैं तो फिलहाल उसे खुद तक सीमित रखें. शांत रहकर उसकी रणनीति और तैयारी को मजबूत बनाना आपके लिए अधिक लाभदायक रहेगा. तुला राशि वालों का चिंता करने से तनाव बढ़ सकता हैस्वास्थ्य की दृष्टि से मानसिक शांति बनाए रखना बेहद जरूरी होगा. अधिक सोच-विचार या छोटी-छोटी बातों को लेकर चिंता करने से तनाव बढ़ सकता है. मेडिटेशन, योग और एकांत में कुछ समय बिताना आपके मन को संतुलित करेगा. परिवार और रिश्तों में भी स्पष्ट संवाद बनाए रखें. किसी की कही-सुनी बातों पर तुरंत विश्वास करने से गलतफहमी पैदा हो सकती है. तुला राशि वाले आज यह सावधानी जरूर रखें आज की सावधानी यही है कि वाहन चलाते समय ट्रैफिक नियमों का पूरी तरह पालन करें और जल्दबाजी से बचें. संयम और सतर्कता आज आपके दिन को बेहतर बनाएगी. तुला राशि करें ये अचूक उपाय आज रविवार का दिन है जो भगवान सूर्य देव को समर्पित है. इसलिए तांबे के लोटे में जल रोली लाल पुष्प मिलाकर सूर्य देव को अर्पित करें. सूर्य देव आपकी सभी मनोकामना पूरी करेंगे और रुकावटें को भी दूर करेंगे. About the Author Jagriti Dubey Hi, I am Jagriti Dubey, a media professional with 6 years of experience in social media and content creation. I started my career with an internship at Gbn 24 news channel in 2019 and have worked with many repu…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Ajmer,Rajasthan Source link

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Adhik Maas आज से शुरू: जानिए कैसे बनता है पुरुषोत्तम मास? जानें...

होमताजा खबरधर्म Adhik Maas आज से शुरू, जानें कैसे बनता यह मास? जानें क्या करें, क्या ना करें Last Updated:May 17, 2026, 05:46 IST Adhik Maas 2026: आज से पंचांग में अधिकमास की शुरुआत हो गई है, जिसे हिंदू धर्म में विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व के साथ देखा जाता है. सामान्य तौर पर हर 3 वर्ष में आने वाला यह अतिरिक्त मास सनातन परंपरा में आत्मचिंतन, साधना, दान-पुण्य और ईश्वर आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इस महीने में की गई भक्ति और सत्कर्मों का फल कई गुना बढ़कर मिलता है. Adhik Maas 2026: आज से अधिकमास की शुरुआत हो रही है और 15 जून को इसका समापन होगा, यह दो महीने का होने वाला दुर्लभ ज्येष्ठ अधिकमास है. हिंदू धर्म में अधिकमास को बेहद पवित्र और पुण्यदायी माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जब किसी चंद्र मास में सूर्य का संक्रांति परिवर्तन नहीं होता, तब उस अतिरिक्त महीने को अधिकमास कहा जाता है. इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है और यह लगभग हर तीन साल में एक बार आता है. इस पूरे महीने भगवान विष्णु की पूजा, दान-पुण्य और आध्यात्मिक साधना का विशेष महत्व बताया गया है. ज्योतिष और धर्म शास्त्रों में अधिकमास को आत्मशुद्धि, भक्ति और पुण्य कमाने का श्रेष्ठ समय माना गया है. कैसे बनता है अधिकमास?हिंदू पंचांग चंद्र और सूर्य की गति पर आधारित होता है. चंद्र वर्ष लगभग 354 दिनों का होता है, जबकि सूर्य वर्ष 365 दिनों का. दोनों के बीच लगभग 11 दिनों का अंतर आ जाता है. यही अंतर हर तीन साल में लगभग एक महीने के बराबर हो जाता है. इस संतुलन को बनाए रखने के लिए हिंदू कैलेंडर में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे अधिकमास कहा जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इस मास को भगवान विष्णु ने अपना नाम ‘पुरुषोत्तम मास’ देकर विशेष महत्व प्रदान किया था. इसलिए इस दौरान पूजा-पाठ और भक्ति करने से कई गुना अधिक फल प्राप्त होता है. अधिकमास में क्या करें?अधिकमास के दौरान धार्मिक कार्यों और आध्यात्मिक गतिविधियों को विशेष महत्व दिया गया है. इस महीने में भगवान विष्णु, श्रीकृष्ण और राम नाम का जाप करना शुभ माना जाता है. प्रतिदिन सुबह स्नान करके भगवान विष्णु की पूजा करें. गीता, रामचरितमानस और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें. जरूरतमंदों को दान करें और गरीबों की सहायता करें. व्रत, भजन-कीर्तन और सत्संग में भाग लें. तुलसी पूजा और दीपदान करना भी शुभ माना गया है. अधिकमास में क्या ना करें?अधिकमास को सांसारिक सुखों से दूरी बनाकर भक्ति और साधना का समय माना गया है। इसलिए इस दौरान कुछ कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है। विवाह, गृह प्रवेश और मुंडन जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते. विवाद, क्रोध और अपशब्दों से दूर रहना चाहिए. तामसिक भोजन और नशे से बचना शुभ माना गया है. किसी का अपमान या अनादर करने से बचें. झूठ और गलत कार्यों से दूरी बनाए रखें. अधिकमास में किन चीजों का करें दान?अधिकमास में दान-पुण्य का विशेष महत्व बताया गया है. इस दौरान अन्न, वस्त्र और जरूरत की चीजों का दान करना शुभ माना जाता है. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार श्रद्धा और सच्चे मन से किया गया दान जीवन में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा लाता है. साथ ही भगवान नारायण की कृपा प्राप्त होती है और सभी ग्रहों के अशुभ प्रभाव में भी कमी आती है. गेहूं, चावल और दाल का दान करें. पीले वस्त्र, फल और घी दान करना लाभकारी माना गया है. गरीबों को भोजन कराना पुण्यदायी माना जाता है. धार्मिक पुस्तकों और जल से भरे पात्र का दान भी शुभ माना गया है. About the Author Parag SharmaChief Sub Editor पराग शर्मा Hindi News18 Digital में Chief Sub Editor के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, ग्रह-नक्षत्र, राशि और वास्तु से जुड़ी खबरों पर काम कर रहे हैं. भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेद…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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काशी, मथुरा, संभल और भोजशाला… अदालतों में इतिहास, आस्था और कानून की...

नई दिल्ली. मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का भोजशाला-कमल मौला मस्जिद विवाद पर आया फैसला केवल एक स्थानीय धार्मिक विवाद का निर्णय नहीं है, बल्कि यह भारत में धार्मिक स्थलों की ऐतिहासिक पहचान, संवैधानिक अधिकारों और 1991 के उपासना स्थल कानून पर चल रही राष्ट्रीय बहस को फिर से केंद्र में ले आया है. अदालत ने धार स्थित विवादित परिसर को देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर माना और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के उस पुराने आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें केवल मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार की नमाज की अनुमति दी गई थी, जबकि हिंदुओं की पूजा सीमित कर दी गई थी. यह फैसला कई मायनों में महत्वपूर्ण है. पहला, अदालत ने ऐतिहासिक और पुरातात्विक साक्ष्यों को आधार बनाते हुए धार्मिक स्वरूप पर टिप्पणी की है. दूसरा, इसने यह संदेश दिया कि प्रशासनिक आदेश संवैधानिक अधिकारों और ऐतिहासिक तथ्यों से ऊपर नहीं हो सकते. तीसरा, इस फैसले ने 1991 के ‘उपासना स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम’ पर नई बहस छेड़ दी है. यह वही कानून है, जिसके तहत 15 अगस्त 1947 को किसी धार्मिक स्थल की जो स्थिति थी, उसे यथावत बनाए रखने का प्रावधान किया गया था. अयोध्या विवाद को इस कानून से बाहर रखा गया था, लेकिन अब काशी, मथुरा और भोजशाला जैसे मामलों में यही कानून सबसे बड़ा कानूनी हथियार बना हुआ है. सुप्रीम कोर्ट में इस कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली कई याचिकाएं लंबित हैं. ऐसे में भोजशाला पर हाईकोर्ट का फैसला भविष्य की न्यायिक और राजनीतिक दिशा तय करने वाला संकेत माना जा रहा है. इस पूरे विवाद का राजनीतिक प्रभाव भी गहरा हो सकता है. अयोध्या के बाद हिंदुत्व की राजनीति में धार्मिक स्थलों के ऐतिहासिक पुनरुद्धार का मुद्दा लगातार उभरता रहा है. भोजशाला का मामला भी उसी व्यापक विमर्श का हिस्सा बनता दिख रहा है, जहां ऐतिहासिक दावों, धार्मिक आस्था और संवैधानिक प्रावधानों के बीच संतुलन तलाशने की कोशिश हो रही है. वर्ष 1991 के कानून के विभिन्न प्रावधानों को चुनौती देने वाली छह से अधिक याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं… कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद, मथुरा, उत्तर प्रदेशयह मामला मथुरा में स्थित 13.37 एकड़ के परिसर से संबंधित है, जिसमें भगवान कृष्ण का जन्मस्थान माना जाने वाला कृष्ण जन्मभूमि मंदिर परिसर और शाही ईदगाह मस्जिद शामिल हैं. जहां एक ओर हिंदू समुदाय का दावा है कि शाही ईदगाह मस्जिद का निर्माण मुगल सम्राट औरंगजेब के शासनकाल में 17वीं शताब्दी के दौरान देवता के जन्मस्थान पर स्थित एक पुराने मंदिर के ऊपर किया गया था, वहीं मुस्लिम पक्ष ने उपासना स्थल अधिनियम, 1991 का हवाला दिया है. देवता के ‘अगले मित्र’ कहे जाने वाले हिंदू उपासकों और संगठनों द्वारा जमीन पर कब्जा पाने और मंदिर को बहाल करने के लिए दायर किए गए 18 मुकदमे इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित हैं. हाईकोर्ट ने 1 अगस्त, 2024 को मुस्लिम पक्ष की उन अर्जियों को खारिज कर दिया, जिनमें हिंदू उपासकों के मुकदमों की वैधता को चुनौती दी गई थी. इसी आदेश में अदालत ने यह भी कहा कि ये मुकदमे परिसीमा अधिनियम, वक्फ अधिनियम और उपासना स्थल अधिनियम, 1991 द्वारा वर्जित नहीं हैं. काशी विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी मस्जिद, वाराणसी, उत्तर प्रदेशवाराणसी में एक-दूसरे से सटे दो धार्मिक स्थलों को लेकर जारी विवाद, अयोध्या और मथुरा के साथ-साथ तीन सबसे चर्चित मामलों में से एक है. हिंदू पक्ष का दावा है कि मूल काशी विश्वनाथ मंदिर को औरंगजेब के शासनकाल के दौरान ध्वस्त कर दिया गया था और उसके ऊपर ज्ञानवापी मस्जिद का निर्माण किया गया था. मुस्लिम पक्ष का कहना है कि यह विवाद उपासना स्थल अधिनियम के तहत वर्जित है, क्योंकि वे सदियों से लगातार मस्जिद में नमाज अदा करते आ रहे हैं. वर्ष 2021 में, पांच महिलाओं ने वाराणसी की एक अदालत में प्रार्थना करने की अनुमति मांगने के लिए मुकदमा दायर किया. बाद में किए गए सर्वेक्षण में वज़ूखाने के अंदर एक ‘शिवलिंग’ मिला, जिसे मुस्लिम पक्ष एक फव्वारे की व्यवस्था का हिस्सा बताता है. वर्ष 2022 में, शीर्ष अदालत ने उस स्थान को संरक्षित किया जहां ‘शिवलिंग’ मिला था और साथ ही यह निर्देश भी दिया कि मुस्लिम उपासकों को मस्जिद तक पहुंचने में कोई बाधा नहीं डाली जानी चाहिए. इसने 2024 में, वाराणसी अदालत के उस आदेश पर रोक लगाने से भी इनकार कर दिया था जिसमें मस्जिद के अंदर ‘व्यास जी का तहखाना’ में एक हिंदू पुजारी को दैनिक रूप से पूजा-अर्चना करने की अनुमति दी गई थी. शाही जामा मस्जिद, संभल, उत्तर प्रदेशवर्ष 2024 में, संभल जिला एक विवाद का केंद्र बन गया जब एक स्थानीय अदालत ने एक हिंदू श्रद्धालु द्वारा दायर मुकदमे पर शाही जामा मस्जिद का सर्वेक्षण करने का आदेश दिया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि यह एक प्राचीन हिंदू मंदिर के स्थल पर बनाई गई थी. हिंदू पक्ष का दावा है कि शाही जामा मस्जिद का निर्माण मुगल सम्राट बाबर के शासनकाल के दौरान 1526 में भगवान विष्णु के अंतिम अवतार कल्कि को समर्पित हरिहर मंदिर को नष्ट करने के बाद किया गया था. सर्वेक्षण के दूसरे दौर के दौरान, प्रदर्शनकारी स्थानीय लोगों की सुरक्षाकर्मियों के साथ झड़प हुई, जिसके परिणामस्वरूप चार लोगों की मौत हो गई और दर्जनों लोग घायल हो गए. मुस्लिम पक्ष ने इस आधार पर सर्वेक्षण का विरोध किया कि इसे मस्जिद समिति की उचित सुनवाई किए बिना जल्दबाजी में कराया गया था. उसने उपासना स्थल अधिनियम के उल्लंघन का भी आरोप लगाया. बाद में, सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा सर्वेक्षण कार्यवाही पर रोक लगाने से इनकार किए जाने को चुनौती देने वाली विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई करते हुए विवादित स्थल पर यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया. कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद, दिल्लीहिंदू और जैन श्रद्धालुओं ने 2021 में दिल्ली की एक दीवानी अदालत में कुतुब मीनार परिसर के अंदर हिंदू और जैन देवी-देवताओं की पुनर्स्थापना के लिए एक मुकदमा दायर किया, जिसमें दावा किया गया कि मोहम्मद गौरी की सेना के एक जनरल कुतुबदीन ऐबक द्वारा 27 मंदिरों को आंशिक रूप से ध्वस्त कर दिया गया था और उसी सामग्री का पुन: उपयोग करके परिसर के अंदर कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद का निर्माण किया गया था. एएसआई ने कहा कि मस्जिद कुतुब परिसर के अंदर स्थित है, जो एक संरक्षित स्मारक है, और वर्तमान में वहां किसी भी प्रकार की धार्मिक

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सिंह राशि वालें आज रहे सावधान, गुस्से से बिगड़ सकता है काम,...

Last Updated:May 17, 2026, 03:50 IST Aaj ka Singh Rashifal, Leo Horoscope Today: खरगोन के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य डॉ. बसंत सोनी के अनुसार, सिंह राशि वालों के लिए रविवार का दिन सावधानी से बिताने वाला रहेगा. 17 मई 2026 को वृषभ लग्न की पत्रिका बन रही है. लग्न में सूर्य और चंद्रमा की युति बनी हुई है, जबकि बुध पहले से मौजूद है. इस ग्रह स्थिति के कारण सिंह राशि के जातकों का मन अस्थिर रह सकता है. खरगोन के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य डॉ. बसंत सोनी के अनुसार, सिंह राशि वालों के लिए रविवार का दिन सावधानी से बिताने वाला रहेगा. 17 मई 2026 को वृषभ लग्न की पत्रिका बन रही है. लग्न में सूर्य और चंद्रमा की युति बनी हुई है, जबकि बुध पहले से मौजूद है. इस ग्रह स्थिति के कारण सिंह राशि के जातकों का मन अस्थिर रह सकता है. दिनभर किसी ना किसी बात को लेकर भ्रम की स्थिति बनी रहेगी. इसलिए हर निर्णय बहुत सोच-समझकर लेने की जरूरत है. ऐसे में आज किसी भी काम में जल्दबाजी करने से बचना होगा. खासतौर पर आर्थिक मामलों और रिश्तों में सोच-समझकर कदम उठाना जरूरी रहेगा. सिंह राशि करियर राशिफल करियर की बात करें तो नौकरीपेशा लोगों को आज कार्यस्थल पर अतिरिक्त सतर्कता बरतनी होगी. ग्रहण योग के प्रभाव से मानसिक दबाव बढ़ सकता है और काम में मन कम लगेगा. कई बार मेहनत करने के बाद भी मनचाहा परिणाम नहीं मिलेगा. ऐसे में गुस्से या तनाव में आकर सहकर्मियों और अधिकारियों से विवाद करने से बचना चाहिए. शांत रहकर काम करने से स्थिति संभल सकती है. वहीं, विद्यार्थियों के लिए भी दिन सामान्य रहने वाला है. पढ़ाई में एकाग्रता की कमी महसूस हो सकती है. प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को आज बड़े फैसले लेने से बचना चाहिए. व्यापार और आर्थिक स्थिति व्यापार और आर्थिक मामलों में भी सिंह राशि वालों को सतर्क रहने की जरूरत है. कारोबार से जुड़े बड़े फैसले आज टालना ही बेहतर रहेगा. किसी नई डील, निवेश या साझेदारी में जल्दबाजी करना आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है. खासकर लेन-देन के मामलों में पूरी जांच-पड़ताल करने के बाद ही आगे बढ़ें. आज जोखिम लेने की बजाय पुराने कामों पर ध्यान देना ज्यादा लाभकारी रहेगा. सिंह राशि स्वास्थ्य राशिफल स्वास्थ्य के लिहाज से भी दिन थोड़ा कमजोर रह सकता है. पेट से जुड़ी परेशानियां जैसे गैस, एसिडिटी या अपच की समस्या बढ़ सकती है. इसलिए खानपान पर विशेष ध्यान देना जरूरी होगा. तला-भुना और बाहर का खाना खाने से बचें. नियमित रूप से पैदल चलना और हल्का भोजन करना सेहत के लिए फायदेमंद रहेगा. पारिवारिक जीवन रहेगा सुखदपारिवारिक जीवन में सामान्य स्थिति बनी रहेगी, लेकिन वाणी पर नियंत्रण रखना बेहद जरूरी होगा. छोटी-छोटी बातों पर विवाद होने की संभावना है. पति-पत्नी के बीच गलतफहमी बढ़ सकती है. वहीं लव लाइफ में भी अनबन की स्थिति बन सकती है. ऐसे में कम बोलना और शांत रहना ही बेहतर रहेगा. आज का शुभ अंक अंक ज्योतिष के अनुसार आज सिंह राशि के लिए 5 अंक विशेष रूप से शुभ माना गया है. इसके अलावा 1, 2, और 8 अंक भी लाभकारी रहेंगे. महत्वपूर्ण कार्यों में इन अंकों का उपयोग करना शुभ फल दे सकता है. इन बातों का रखें ध्यानज्योतिषाचार्य डॉ. बसंत सोनी के अनुसार, आज सिंह राशि के जातक किसी की बात का बुरा नहीं मानना चाहिए और जल्दबाजी से बचना चाहिए. मछलियों को मीठे आटे की गोलियां या चने खिलाना शुभ रहेगा. साथ ही घर की छत पर पक्षियों के लिए दाना-पानी रखना सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने में सहायक सिद्ध हो सकता है. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Khargone,Madhya Pradesh Source link

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aaj ka Dhanu rashifal 17 may 2026 Sagittarius horoscope in hindi today...

Last Updated:May 17, 2026, 00:05 IST Aaj ka Vrishchik Rashifal 17 may 2026: वृश्चिक राशि वाले आज सावधान रहें. आज अनजान लोगों के वादों पर भरोसा न करें. आर्थिक नुकसान से बचने के लिए धन के लेन-देन और बड़े निवेश से दूरी बनाएं. अपनी गुप्त योजनाएं किसी से शेयर न करें. लकी रंग सफेद और शुभ अंक 2 है. सीतामढ़ी: वृश्चिक राशि के जातकों के लिए आज का दिन बेहद सतर्क और सजग रहने का संकेत दे रहा है. ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति के अनुसार, आज आपके आस-पास के लोग या कोई करीबी व्यक्ति आपकी धैर्य और क्षमता की परीक्षा लेने की कोशिश कर सकता है. प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य रूपेश चौबे के मुताबिक आज के दिन आपको हर मुस्कुराते चेहरे पर आंख मूंदकर भरोसा करने से बचना होगा. जरूरी नहीं है कि जो व्यक्ति आपके सामने सकारात्मक दिख रहा है. वह वास्तव में आपके पक्ष में ही हो. इसलिए अपनी आंतरिक समझ को जागृत रखें और किसी भी बहकावे में आने से बचें. सुबह के वादों और मीठी बातों से दूरी बनाएंसुबह की शुरुआत में आपको किसी व्यक्ति से बेहद मीठी बात सुनने को मिल सकती है या कोई बड़ा लोकलुभावन वादा मिल सकता है. ऐसे में आपका मन तुरंत उस पर भरोसा करने और भावुक होने के लिए प्रेरित होगा. लेकिन आज का मूल मंत्र यही है कि भरोसा धीरे करें और समझ जल्दी रखें. कार्यक्षेत्र और पेशेवर जीवन की बात करें तो आज आपको अपने आगामी प्लान, गुप्त रणनीतियां या व्यावसायिक योजनाएं हर किसी के साथ साझा करने से साफ बचना चाहिए. आज आप जितना शांत रहकर और बिना ढिंढोरा पीटे अपने काम को अंजाम देंगे. उतना ही अधिक मुनाफे और सफलता में रहेंगे. आर्थिक मामलों और लेन-देन में बरतें सावधानीधन और निवेश के मामलों में आज का दिन विशेष रूप से संभलकर चलने का है. किसी के भी बहकावे में आकर या किसी के भारी दबाव में आकर बड़ा पूंजी निवेश न करें. ज्योतिषाचार्य रूपेश चौबे का कहना है कि आज किसी को भी धन उधार देने से बचें, क्योंकि आज दिया गया पैसा वापस मिलने की संभावना काफी कम है. व्यक्तिगत और पारिवारिक रिश्तों की बात करें तो आज करीबियों से उम्मीदें थोड़ी कम ही रखें. जब आप दूसरों से अपेक्षाएं सीमित रखेंगे, तो आपका मन शांत रहेगा और किसी भी तरह के मानसिक तनाव या निराशा से आप खुद को पूरी तरह सुरक्षित रख पाएंगे. नकारात्मकता दूर करने का अचूक और विशेष उपायआज के दिन को भाग्यशाली और सकारात्मक बनाने के लिए कुछ विशेष ज्योतिषीय संकेत और उपाय दिए गए हैं. आज के लिए आपका लकी नंबर 2 और लकी कलर सफेद है. दिनभर की नकारात्मक ऊर्जा और नजर दोष से बचने के लिए एक अचूक उपाय अवश्य करें. सुबह के समय एक साबुत लौंग अपने पास सुरक्षित रख लें. पूरे दिन उसे अपने साथ ही रहने दें. इसके बाद शाम के समय उस लौंग को किसी साफ बहते हुए पानी में प्रवाहित कर दें. यह छोटा सा उपाय आपके आस-पास की नकारात्मकता को सोख लेगा और आपकी समझदारी आज आपको किसी भी बड़े नुकसान से बचा लेगी. About the Author Amit ranjan मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Sitamarhi,Bihar Source link

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‘पुष्पा’ और ‘सिंघम’ की जंग: TMC के जहांगीर खान पर बरसे CM...

कोलकाता. पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने शनिवार को आरोप लगाया कि डायमंड हार्बर के लोग एक दशक पहले स्थानीय तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी के राज्य की राजनीति में प्रवेश करने के बाद से अपने मताधिकार का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे. उन्होंने लोगों को भरोसा दिलाया कि अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं और डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली फाल्टा विधानसभा सीट पर 21 मई को होने वाला पुनर्मतदान मतदाताओं के अधिकारों को बहाल करेगा. फाल्टा में भाजपा कार्यकर्ताओं की रैली को संबोधित करते हुए अधिकारी ने भाजपा के चुनावी घोषणा पत्र में किए गए वादों से अतिरिक्त विधानसभा क्षेत्र के लिए एक विशेष विकास पैकेज की घोषणा की. मुख्यमंत्री बनने के बाद भाजपा उम्मीदवार देबांग्शू पोंडा के समर्थन में अपनी पहली राजनीतिक सभा में अधिकारी ने कहा, “फाल्टा में पुनर्मतदान के जरिये मतदाताओं के अधिकार बहाल होंगे, जहां लोग भतीजे (अभिषेक बनर्जी) के राजनीति में आने के बाद पिछले 10 वर्ष से वोट नहीं दे पा रहे.” उन्होंने कहा, “अब हालात बदल चुके हैं. मैं फाल्टा के मतदाताओं से अपील करता हूं कि वे भाजपा उम्मीदवार को एक लाख से अधिक मतों के अंतर से जिताएं.” अधिकारी ने कहा कि उनकी पार्टी और स्थानीय प्रशासन उन लोगों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करेंगे, जो चुनाव के बाद संभावित हिंसा के डर से दूसरी जगह चले गए थे. उन्होंने कहा कि लेकिन यह वापसी ‘शर्तों पर आधारित’ होगी. उन्होंने कहा, “2021 के चुनाव के बाद हुई हिंसा में भाजपा के 57 कार्यकर्ता मारे गए थे और 12,500 प्राथमिकी दर्ज की गई थीं. यदि इनमें से कोई भी फरार व्यक्ति उन प्राथमिकी में आरोपी के रूप में नामजद है, तो हम उन्हें घर लौटने की अनुमति नहीं देंगे. हम उनके बाल खींचकर उन्हें जेल में डाल देंगे.” अधिकारी ने हिंसा-मुक्त चुनाव की भी अपील की. मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें ‘लीप्स एंड बाउंड्स’ नामक निजी कंपनी की संपत्तियों से संबंधित फाइल मिल गई हैं, जो कथित रूप से बनर्जी से जुड़ी हुई है. अधिकारी ने कहा कि जल्द ही उनकी जांच शुरू की जाएगी. उन्होंने कहा, “मैंने कोलकाता नगर निगम से फाइल मांगी थीं और मुझे दक्षिण 24 परगना जिले के आमतला में स्थित ‘लीप्स एंड बाउंड्स’ के एक आलीशान कार्यालय समेत 24 संपत्तियों का विवरण मिल गया है. अब मेरे पास भतीजे की संपत्तियों की सूची है और जल्द ही मैं उनकी जांच शुरू कराऊंगा.” मुख्यमंत्री ने कहा कि वह ‘टीएमसी द्वारा भाजपा कार्यकर्ताओं पर किए गए अत्याचार’ को भूले नहीं हैं. अधिकारी ने कहा कि उन्होंने पुलिस को पुराने राजनीतिक अपराधों में प्राथमिकी दर्ज करने और केंद्रीय योजनाओं के धन के दुरुपयोग की शिकायतें दर्ज करने का निर्देश दिया है. मुख्यमंत्री ने कहा, “मैंने पुलिस को निर्देश दिया है कि वे राजनीतिक अपराधों की शिकायतें दर्ज करें, चाहे वे पांच साल पुराने हों या उससे अधिक. अपराधियों को गिरफ्तार करें और उन्हें जेल में डालें. एक भी गुंडा घर में नहीं रहना चाहिए.” उन्होंने कहा कि अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे उन लोगों की पहचान करके उन्हें जेल में डालें, जिन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना, चक्रवात अम्फन राहत, मनरेगा, सार्वजनिक शौचालय निर्माण, वृद्धावस्था और विधवा योजनाओं के लिए केंद्र द्वारा आवंटित सार्वजनिक धन का दुरुपयोग किया. अधिकारी ने कहा कि महिलाओं पर अत्याचार करने वालों के खिलाफ कड़ी पुलिस कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने कहा, “लोगों मुझे मुख्यमंत्री की कुर्सी पर सिर्फ दिखावे के लिए नहीं बिठाया. वे न्याय चाहते हैं, और मैं उन्हें वह न्याय दिलाउंगा.” उन्होंने यह भी कहा कि हिंदू देवी-देवताओँ की प्रतिमाओं को तोड़ने और अपमान से जुड़े मामलों की पुलिस फाइल फिर से खोली जाएंगी. मुख्यमंत्री ने कहा, “मां काली की प्रतिमा को जेल वैन में रखने वाले पुलिस अधिकारी के लिए बंगाल में कोई स्थान नहीं है.” उन्होंने अक्टूबर 2025 के उस विवाद की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए यह बात कही, जिसमें दक्षिण 24 परगना जिले के काकड़वीप क्षेत्र में मां काली की तोड़ी गई प्रतिमा को पुलिस ने जेल वैन में रखा था. बाद में पुलिस ने स्पष्ट किया कि यह कदम प्रतिमा की सुरक्षित रखवाली सुनिश्चित करने और भीड़ द्वारा पत्थरबाजी के खतरे के कारण किसी और नुकसान से बचाने के लिए उठाया गया था. फाल्टा से टीएमसी के उम्मीदवार जहांगीर खान का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने उन्हें ‘नामित कुख्यात अपराधी’ बताया और कहा कि वह व्यक्तिगत रूप से उसके मामले को देखेंगे. अधिकारी ने कहा, “2019 के चुनाव के बाद हुए अपराधों पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने राज्य में 19 कुख्यात अपराधियों की सूची जारी की थी. भतीजे का समर्थन प्राप्त जहांगीर उनमें से एक था. तथाकथित पुष्पा, जो अब दिखाई नहीं देता है, उसे मुझे सौंप दो. अब मैं उसे देखूंगा.” निर्वाचन आयोग द्वारा नियुक्त पुलिस पर्यवेक्षक अजय पाल शर्मा ने बंगाल में विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण से पहले चेतावनी जारी की थी, जिसके बाद फाल्टा में विरोध प्रदर्शन और तीखी राजनीतिक बहस हुई. टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान ने पलटवार करते हुए कहा था, “अगर वह (शर्मा) ‘सिंघम’ हैं, तो मैं ‘पुष्पा’ हूं.” उत्तर प्रदेश के 2011 बैच के आईपीएस अधिकारी और अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के कारण ‘सिंघम’ के नाम से प्रसिद्ध शर्मा ने खान के खिलाफ मतदाताओं को धमकाने की शिकायतें मिलने के बाद फाल्टा का दौरा किया किया था और वह खान के घर तथा पार्टी कार्यालय गए थे. निर्वाचन आयोग ने 29 अप्रैल को फाल्टा में हुए चुनाव को बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और ईवीएम से छेड़छाड़ तथा मतदाताओं को डराने-धमकाने के आरोपों के बाद रद्द कर दिया था. Source link

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