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‘हे मेरी आत्मा…’ इधर सुवेंदु अधिकारी ले रहे थे शपथ, उधर ममता...

होमताजा खबरदेश ‘हे मेरी आत्मा…’ इधर सुवेंदु अधिकारी ले रहे थे शपथ, उधर ममता बनर्जी लिख रही थीं पोस्ट Last Updated:May 09, 2026, 11:46 IST Suvendu Adhikari vs Mamata Banerjee: ‘हे मेरी आत्मा…’ इधर सुवेंदु अधिकारी ले रहे थे शपथ, उधर ममता बनर्जी लिख रही थीं पोस्ट ‘हे मेरी आत्मा…’ इधर सुवेंदु अधिकारी ले रहे थे शपथ, उधर ममता बनर्जी लिख रही थीं पोस्ट ममता बनर्जी ने एक्स पर पोस्ट किया, ‘बैशाख की पच्चीसवीं तारीख के इस पावन दिवस पर मैं विश्व-विख्यात परम विचारक और कवि-सम्राट गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर के चरणों में अपनी अनंत वंदना अर्पित करती हूं. हमारे लिए रवींद्र जयंती बंगाली भाषा, संस्कृति और विरासत के पुनर्जन्म का एक भव्य उत्सव है. उनका जीवन-दर्शन हमारी दैनिक यात्रा के लिए एक शाश्वत मार्गदर्शक प्रकाश का कार्य करता है. उन्होंने हमें यह शिक्षा दी है कि विभाजन सत्य नहीं है; एकता ही सत्य है. उग्र राष्ट्रवाद के उन्माद से ऊपर उठकर, उन्होंने संपूर्ण मानव सभ्यता को एकता का महान मंत्र प्रदान किया है. ‘हे मेरे हृदय, इस पावन तीर्थ-स्थल पर धीरे-धीरे जाग्रत हो,भारत की इस महान आत्मा के सागर-तट पर.’ इस विश्व-विख्यात कवि के शाश्वत आदर्श, उनकी दूरगामी विचार-धाराएं, जाग्रत चेतना और सृजनात्मक प्रतिभा, विश्व भर के लोगों के मन-मस्तिष्क में और भी अधिक प्रखरता से आलोकित हों.’ यह ख़बर बिल्कुल अभी आई है और इसे सबसे पहले आप News18Hindi पर पढ़ रहे हैं. जैसे-जैसे जानकारी मिल रही है, हम इसे अपडेट कर रहे हैं. ज्यादा बेहतर एक्सपीरिएंस के लिए आप इस खबर को रीफ्रेश करते रहें, ताकि सभी अपडेट आपको तुरंत मिल सकें. आप हमारे साथ बने रहिए और पाइए हर सही ख़बर, सबसे पहले सिर्फ Hindi.News18.com पर… News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

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2005 की घटना ने बदली आशीष की सोच, अब तक करा चुके...

Last Updated:May 09, 2026, 10:53 IST चित्रकूट जिले के लोहदा गांव निवासी आशीष सिंह रघुवंशी आज क्षेत्र में गरीब बेटियों के मसीहा के रूप में पहचाने जाते हैं. वे अब तक 17 जरूरतमंद लड़कियों की शादी करवा चुके हैं और उनका पूरा खर्च खुद उठाते हैं.उनका मानना है जब तक उनके अंदर जान है वह यह सेवा करते रहेंगे. उनकी इस सेवा की शुरुआत एक भावुक घटना से हुई थी. वर्ष 2005 में उनका काम सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पहाड़ी में चल रहा था. वहां कई मजदूर और मिस्त्री काम कर रहे थे, उन्हीं में एक गरीब लड़की भी मजदूरी करने आती थी. ख़बरें फटाफट चित्रकूटः समाज सेवा के कई रूप आपने देखे और सुने होंगे. कोई गरीबों को भोजन कराता है तो कोई शिक्षा और इलाज में मदद करता है, लेकिन बुंदेलखंड के चित्रकूट में एक ऐसा समाजसेवी भी है, जिसने गरीब और बेसहारा बेटियों की जिंदगी संवारने का बीड़ा उठाया है. चित्रकूट जिले के लोहदा गांव निवासी आशीष सिंह रघुवंशी आज क्षेत्र में गरीब बेटियों के मसीहा के रूप में पहचाने जाते हैं. वे अब तक 17 जरूरतमंद लड़कियों की शादी करवा चुके हैं और उनका पूरा खर्च खुद उठाते हैं. 2005 की घटना ने आशीष को किया था भावुक आशीष सिंह रघुवंशी ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि उनकी इस सेवा की शुरुआत एक भावुक घटना से हुई थी. वर्ष 2005 में उनका काम सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पहाड़ी में चल रहा था. वहां कई मजदूर और मिस्त्री काम कर रहे थे, उन्हीं में एक गरीब लड़की भी मजदूरी करने आती थी. एक दिन काम के दौरान अचानक उसकी तबीयत खराब हो गई और उसे चक्कर आने लगे. जब मैने उससे उसके परिवार के बारे में पूछा तो लड़की ने बताया कि उसके माता-पिता नहीं हैं और उसका भाई भी बीमार रहता है. घर की जिम्मेदारी उसी के कंधों पर थी और मजदूरी करके वह अपने भाई की दवा और परिवार का खर्च चलाती है. लड़की की बातें सुन आशीष हुए थे भावुक उनका कहना है कि लड़की की यह कहानी सुनकर मैं एक दम भावुक हो गया था और उस परिवार की मदद करने का फैसला किया. इसके बाद मैने लड़की के भाई और भाभी से बातचीत की और वर्ष 2006 में उस लड़की की शादी करवाई थी. शादी का पूरा खर्च मैने खुद उठाया था. यही घटना मेरे जीवन का टर्निंग प्वाइंट बन गई है. उन्होंने आगे की जानकारी में बताया कि उस लड़की की शादी करवाने के बाद से मैने मन में ठान लिया था कि वे गरीब और बेसहारा बेटियों की शादी में सहयोग करेंगे. ोतब से लेकर अब तक यानी 2006 से 2026 के बीच वे 17 लड़कियों का कन्यादान कर चुके हैं.खास बात यह है कि शादी में लगने वाला हर खर्च, जैसे कपड़े, जेवर, भोजन और दहेज का सामान तक, उनकी ओर से उपलब्ध कराया जाता है. About the Author Rajneesh Kumar Yadav मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Chitrakoot,Uttar Pradesh Source link

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Board Results 2026: 6वीं में छूटी थी पढ़ाई, अब बेटे के साथ...

नई दिल्ली (Board Results 2026). देशभर में कल यानी 10 मई 2026 को मदर्स डे मनाया जाएगा. मदर्स डे से पहले मां-बेटे की उस जोड़ी की कहानी वायरल हो रही है, जिसने एक साथ 10वीं की बोर्ड परीक्षा में सफलता हासिल की. यह कहानी केवल एक रिजल्ट की नहीं, बल्कि उस अटूट हौसले की है जो उम्र की बंदिशों को नहीं मानता. बी. लक्ष्मी हरि (B. Lakshmi Hari) ने जब दशकों पहले छठी कक्षा में स्कूल छोड़ा था, तब उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन वह फिर से परीक्षा हॉल में बैठेंगी. शादी, घर की जिम्मेदारियों और समय की मार ने उनके सपनों पर धूल जमा दी थी. लेकिन शिक्षा की लौ कभी बुझती नहीं है, बस उसे एक सही चिंगारी की जरूरत होती है. इस कहानी में वह चिंगारी बना उनका बेटा विजय, जिसने अपनी मां को न केवल प्रोत्साहित किया बल्कि उनका ‘स्टडी पार्टनर’ बनकर इस सफर को मुमकिन बनाया. आज के दौर में जहां करियर और डिग्री की भागदौड़ में लोग हार मान लेते हैं, वहां लक्ष्मी और विजय की जोड़ी मिसाल बनकर उभरी है. पढ़िए मां-बेटे की सक्सेस स्टोरी. सोशल मीडिया पर वायरल मां-बेटे का वीडियो सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है. उसमें मां अपने बेटे के साथ एक ही लैपटॉप पर अपना रिजल्ट देख रही है. यह लम्हा किसी भी फिल्म के क्लाइमेक्स से ज्यादा भावुक है. लक्ष्मी का 10वीं की परीक्षा पास करना साबित करता है कि सीखने की कोई एक्सपायरी डेट नहीं होती. यह सक्सेस स्टोरी उन हजारों महिलाओं और स्टूडेंट्स के लिए है जो किसी वजह से अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ चुके हैं – यह संदेश देने के लिए कि फिर से शुरुआत करने के लिए कभी बहुत देर नहीं होती. Cutest Video on The Internet Today! B Lakshmi Hari discontinued her education after 6th grade & after marriage and two kids could never go back to school or pursue education. मजबूरी में छूटा स्कूल और खो गए सपने लक्ष्मी हरि की कहानी आज से कई साल पहले शुरू हुई थी, जब पारिवारिक और व्यक्तिगत परिस्थितियों के कारण उन्हें छठी कक्षा में ही अपनी पढ़ाई को तिलांजलि देनी पड़ी. एक छोटा सा बच्चा जिस उम्र में बड़े सपने देखता है, लक्ष्मी उस उम्र में घर की जिम्मेदारियों में उलझ गईं. साल बीतते गए, शादी हुई, बच्चे हुए, लेकिन उनके मन के किसी कोने में अधूरी पढ़ाई का मलाल हमेशा जिंदा रहा. उन्होंने मान लिया था कि अब किताबें उठाने का वक्त निकल चुका है. विजय ने मां को बनाया क्लासमेट कहानी में मोड़ तब आया जब लक्ष्मी के बेटे विजय ने 10वीं कक्षा में एडमिशन लिया. विजय ने देखा कि उसकी मां आज भी पढ़ने की इच्छा रखती हैं. उसने अपनी मां से एक अनोखा वादा लिया- मां, अगर मैं परीक्षा दूंगा तो आप भी मेरे साथ बैठेंगी. शुरुआत में लक्ष्मी को झिझक हुई, लेकिन बेटे के भरोसे ने उन्हें हिम्मत दी. विजय ने अपनी मां को कोचिंग दी, मुश्किल सवाल हल करना सिखाया और दोनों एक साथ रात-रात भर जागकर पढ़ाई करने लगे. मां का रिजल्ट देख ज्यादा खुश हुआ बेटा यह वायरल वीडियो तेलंगाना का बताया जा रहा है. जब बोर्ड परीक्षा के नतीजे आए तो पूरा परिवार दंग रह गया. विजय ने 10वीं बोर्ड परीक्षा 2026 में 600 में से 562 अंक (93.6%) हासिल कर अपनी मेधा साबित की, लेकिन असली जीत लक्ष्मी की थी. लक्ष्मी ने 360 अंकों के साथ 10वीं की बाधा पार कर ली. पास होने की खबर मिलते ही मां-बेटे के आंसू छलक आए. उनके लिए यह केवल अंकों का खेल नहीं था, बल्कि खोए हुए आत्मसम्मान को वापस पाने की लड़ाई थी. लक्ष्मी हरि की सफलता उन लोगों के चेहरे पर तमाचा है जो मानते हैं कि उम्र बढ़ने के साथ याददाश्त या सीखने की क्षमता कम हो जाती है. नोट- यह सक्सेस स्टोरी वायरल वीडियो के आधार पर है. News18 हिंदी इसकी पुष्टि नहीं करता है. Source link

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Suvendu Adhikari Shapath Grahan Live | Bengal CM Oath Ceremony LIVE |...

Last Updated:May 09, 2026, 08:53 IST Bengal CM Oath LIVE: पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी ने लेफ्ट फ्रंट के गढ़ को ध्‍वस्‍त कर टीएमसी की सरकार बनाई थी. अब समय का पहिया घूम चुका है. भाजपा ने अब उन्‍हीं ममता बनर्जी के 15 साल के शासनकाल को समाप्‍त कर दि…और पढ़ें सुवेंदु अधिकारी शनिवार 9 मई 2026 को पश्चिम बंगाल के मुख्‍यमंत्री पद की शपथ लेंगे. Bengal CM Oath LIVE: भाजपा के दिग्‍गज नेता सुवेंदु अधिकारी शनिवार 9 मई 2026 को पश्चिम बंगाल के मुख्‍यमंत्री पद की शपथ लेंगे. इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मौजूद रहेंगे. इससे पहले पश्चिम बंगाल की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव के बीच भारतीय जनता पार्टी ने पहली बार राज्य में सरकार गठन की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाते हुए वरिष्ठ नेता Suvendu Adhikari को विधानसभा दल का नेता चुना गया था. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने शुक्रवार को कोलकाता में आयोजित भाजपा विधायक दल की बैठक के बाद इसकी औपचारिक घोषणा की. अमित शाह ने कहा कि सुवेंदु अधिकारी को सर्वसम्मति से पश्चिम बंगाल भाजपा विधायक दल का नेता चुना गया है. इसके तुरंत बाद अधिकारी ने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आरएन रव‍ि से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया. इस दौरान भाजपा के वरिष्ठ नेता दिलीप घोष, लॉकेट चटर्जी और तापस रॉय भी मौजूद थे. विधानमंडल दल का नेता चुने जाने के बाद सुवेंदु अधिकारी ने भाजपा नेतृत्व का आभार जताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आशीर्वाद और पार्टी नेतृत्व के विश्वास से उन्हें यह जिम्मेदारी मिली है. उन्होंने कहा कि भाजपा में लोकतंत्र है और सभी विधायकों ने उनका समर्थन किया है. अधिकारी ने भरोसा दिलाया कि चुनाव के दौरान जनता से किए गए सभी वादों को पूरा किया जाएगा. भाजपा नेता अग्निमित्रा पॉल (Agnimitra Paul) ने सुवेंदु अधिकारी को मुख्यमंत्री पद के लिए सबसे उपयुक्त चेहरा बताया. उन्होंने कहा कि अधिकारी ने पिछले पांच वर्षों में विधानसभा के भीतर और बाहर लगातार संघर्ष किया है. उन्होंने कहा कि 207 भाजपा विधायकों को अब चौबीसों घंटे काम करके बंगाल के लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरना होगा. वहीं भाजपा नेता खगेन मुर्मू ने इस जीत को भाजपा कार्यकर्ताओं के बलिदान की जीत बताया. उन्होंने दावा किया कि चुनावी हिंसा में मारे गए 321 लोगों के बलिदान की बदौलत भाजपा सत्ता तक पहुंची है. उन्होंने कहा कि बंगाल की जनता ने घुसपैठ, अत्याचार और महिलाओं पर हिंसा के खिलाफ वोट दिया है. भाजपा सांसद सौमित्र खान ने कहा कि सही विचारधारा की जीत हुई है. वहीं, दिलीप घोष ने कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था बहाल करना नई सरकार की पहली प्राथमिकता होगी. भाजपा विधायक दल के अन्य नेताओं ने भी इसे पश्चिम बंगाल के लिए ऐतिहासिक दिन बताया. विकसित भारत का संकल्‍प उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भी सुवेंदु अधिकारी को बधाई देते हुए कहा कि अब पश्चिम बंगाल विकसित भारत के संकल्प को मजबूत करेगा. उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस शासन में राज्य की कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी थी. हालांकि, सरकार गठन के बीच राज्य में राजनीतिक तनाव भी बना हुआ है. सुवेंदु अधिकारी के निजी सहायक और पूर्व वायुसेना कर्मी चंद्रनाथ रथ की बुधवार रात मध्यग्राम के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई. अधिकारी ने इसे सुनियोजित हत्या बताते हुए भाजपा कार्यकर्ताओं से शांति बनाए रखने की अपील की है. पश्चिम बंगाल पुलिस और सीआईडी मामले की जांच में जुटी हुई है. सुवेंदु अधिकारी शनिवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे. दिलचस्प बात यह है कि शपथ ग्रहण समारोह गुरुदेव Rabindranath Tagore की जयंती के दिन आयोजित होगा. ऐत‍िहासिक जीत 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 207 सीटें जीतकर ऐतिहासिक बहुमत हासिल किया, जबकि पिछले 15 वर्षों से सत्ता में रही तृणमूल कांग्रेस 80 सीटों पर सिमट गई. सुवेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम और भवानीपुर सीट से चुनाव लड़ा था और भवानीपुर में तत्कालीन मुख्यमंत्री Mamata Banerjee को 15 हजार से अधिक मतों से हराकर बड़ा राजनीतिक उलटफेर किया. Suvendu Adhikari Shapath Grahan Live: जहां खूब मतदाता जुड़े वहां जीती टीएमसी – अमित मालवीय सुवेंदु अधिकारी शपथ ग्रहण लाइव: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत के बाद मतदाता सूची में गड़बड़ी को लेकर तृणमूल कांग्रेस (TMC) द्वारा लगाए गए आरोपों पर बीजेपी आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने पलटवार किया है. अमित मालवीय ने दावा किया कि उपलब्ध आंकड़े टीएमसी के सभी आरोपों को झूठा साबित करते हैं. उन्होंने कहा कि टीएमसी ने दो बड़े आरोप लगाए थे. पहला, विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया (SIR) के दौरान मतदाताओं के नाम हटाए गए और दूसरा, उत्तर प्रदेश एवं बिहार से फर्जी मतदाताओं को जोड़ा गया. मालवीय के अनुसार, जिन पांच सीटों पर सबसे अधिक मतदाता हटाए गए, वे सभी सीटें टीएमसी ने जीतीं, जबकि सबसे कम हटाए गए मतदाताओं वाली सीटों पर बीजेपी विजयी रही. उन्होंने यह भी कहा कि जिन सीटों पर सबसे अधिक नए मतदाता जुड़े, उनमें चार सीटें टीएमसी और एक कांग्रेस के खाते में गई. बीजेपी ने दावा किया कि यदि 27 लाख लंबित मामलों को भी जोड़ दिया जाए और मान लिया जाए कि सभी वोट टीएमसी को मिलें, तब भी बीजेपी 181 सीटों पर बढ़त बनाए रखती. मालवीय ने कहा कि बंगाल की जनता ने ममता बनर्जी और टीएमसी को नकार दिया है. Suvendu Adhikari Shapath Grahan Live: सुवेंदु अधिकारी के साथ कितने मंत्री लेंगे शपथ? सुवेंदु अधिकारी शपथ ग्रहण लाइव: पश्चिम बंगाल भाजपा के लिए आज का दिन काफी ऐतिहासिक है. आजादी के बाद यह पहला मौका है जब बंगाल में बीजेपी की सरकार बनने जा रही है. सुवेंदु अधिकारी बंगाल के पहले भाजपाई मुख्‍यमंत्री होंगे. वे कुछ ही देर में सीएम पद की शपथ लेंगे. सूत्रों का कहना है कि सुवेंदु के साथ 5 मंत्री शपथ ले सकते हैं. बाद में कैबिनेट का विस्‍तार किया जाएगा. Suvendu Adhikari Shapath Grahan Live: अब बंगाल में सुशासन और विकास के नए दौर की शुरुआत होगी – सीएम मोहन यादव सुवेंदु अधिकारी शपथ ग्रहण लाइव: कोलकाता में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने पहुंचे मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने को ऐतिहासिक क्षण बताया. उन्होंने कहा

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सुबह के नाश्ते में खाये हेल्दी पनीर पराठा, पूरे दिन रहेंगे तरोताजा,...

होमफोटोलाइफ़फूड नाश्ते में खाये हेल्दी पनीर पराठा, पूरे दिन रहेंगे तरोताजा, जानिए आसान रेसिपी Last Updated:May 09, 2026, 07:50 IST हर कोई रोजाना हेल्दी और टेस्टी नाश्ता करना चाहता है, लेकिन भागदौड़ वाले समय में ऐसा नहीं कर पाता है, लेकिन अगर आप सुबह के नाश्ते में पनीर पराठा खायेंगे, तो आपका पूरा दिन एनर्जेटिक बना रहेगा. पनीर का उपयोग सिर्फ सब्जियों में ही नहीं, बल्कि कई फूड डिशेस में किया जाता है. पनीर से बनने वाला पराठा भी स्वाद से भरपूर होता है. आज हम आपको पनीर पराठा बनाने की आसान रेसिपी बताने जा रहे हैं, जिसे आप ब्रेकफास्ट, लंच या डिनर कभी भी बना सकते हैं. पराठा एक ऐसी फूड डिश है, जिसे ब्रेकफास्ट, लंच या डिनर किसी भी वक्त खाया जा सकता है. पराठे कई तरीकों से तैयार किए जा सकते हैं. दरअसल, पनीर का उपयोग सब्जी बनाने और कई फूड डिशेस का स्वाद बढ़ाने के लिए किया जाता है. वहीं, दूसरी ओर पनीर से बनने वाला पराठा भी काफी लजीज होता है और इसका स्वाद सभी को पसंद आता है. अब इस गोले को हल्का सा दबाकर पराठे को गोलाकार बेल लें. इसके बाद तवे पर थोड़ा सा तेल डालकर चारों ओर फैला दें और पराठा डालकर मीडियम आंच पर सेकें. थोड़ी देर बाद पराठा पलट दें और उस पर तेल लगाएं. पराठा तब तक सेकें, जब तक कि दोनों ओर से सुनहरा न हो जाए. इसके बाद प्लेट में उतार लें. इसी तरह सारी लोई से पराठे तैयार कर लें. आपके स्वादिष्ट पनीर पराठे तैयार हैं, इन्हें चटनी या टमाटर सॉस के साथ सर्व करें. Add News18 as Preferred Source on Google आप चाहें तो पनीर पराठा बच्चों के टिफिन में भी रख सकते हैं. ये आसानी से तैयार होने वाली रेसिपी है. पंजाबी खान-पान में पनीर पराठा अलग ही स्थान रखता है. आप भी अगर पराठा खाने के शौकीन हैं, तो पनीर पराठा की रेसिपी ट्राई कर सकते हैं. पनीर पराठा प्रोटीन से भरपूर रेसिपी है, जो सेहत के लिए भी फायदेमंद है. पनीर पराठा बनाने के लिए सबसे पहले एक मिक्सिंग बाउल या परात में गेहूं का आटा छान लें. इसके बाद उसमें थोड़ा सा तेल और नमक डालकर अच्छी तरह से मिला लें. अब थोड़ा-थोड़ा पानी डालते हुए आटा गूंथे. ध्यान रहे कि पानी इतना डालना है, जिससे नरम आटा गूंथा जा सके. इसके बाद आटे की सतह पर थोड़ा सा तेल लगाकर उसे 20-25 मिनट के लिए कपड़े से ढाककर रख दें. अब एक मीडियम साइज मिक्सिंग बाउल लें और उसमें कद्दूकस किया पनीर डालकर इसको अच्छी तरह से मैश करें. इसके बाद इसमें कटी हरी मिर्च, अदरक, हरी धनिया पत्ती, जीरा पाउडर, धनिया पाउडर, गरम मसाला, लाल मिर्च पाउडर डालकर सभी सामग्रियों को अच्छी तरह से मिलाएं. इसके बाद मसाले में पुदीना पत्ते और अमचूर पाउडर डालकर स्वादानुसार नमक मिक्स कर दें. इस तरह पराठे का मसाला तैयार हो गया है. अब आटे को लेकर एक बार और गूंथ लें. इसके बाद उसकी लोइयां बना लें. इसके बाद एक नॉनस्टिक पैन/तवे को मीडियम आंच पर गर्म करने के लिए रख दें. जब तक तवा गर्म हो रहा है. एक लोई लेकर उसे बेलें. पूरी के आकार की होने के बाद उसमें पनीर की तैयार स्टफिंग भरें और किनारों को बीच में लाकर स्टफिंग बंद कर दें. इसके बाद इसे गोले का आकार दें. स्वादिष्ट पनीर पराठा बनाने के लिए 3 कप आटा और 2 कप कद्दूकस किया हुआ पनीर लें. स्वाद बढ़ाने के लिए 1 टी स्पून कद्दूकस अदरक, 2–3 बारीक कटी हरी मिर्च, 1/2–1/2 टी स्पून जीरा पाउडर, धनिया पाउडर, लाल मिर्च पाउडर और 1/4 टी स्पून गरम मसाला मिलाएं. ताजगी के लिए 2 टेबलस्पून हरा धनिया और इच्छानुसार 1 टेबलस्पून पुदीना डालें. हल्की खटास हेतु 1/2 टी स्पून अमचूर और स्वादानुसार नमक मिलाएं. पराठे सेंकने के लिए 2–3 टेबलस्पून बटर या तेल का उपयोग करें. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

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फतह-3 सच में ब्रह्मोस का सौतेला भाई या सुतली बम? पाकिस्‍तान की...

होमफोटोदेश फतह-3 ब्रह्मोस का सौतेला भाई या सुतली बम? नकलची पाक की ऐसे पकड़ी गई चोरी Last Updated:May 09, 2026, 06:51 IST Brahmos vs Fatah-3 Cruise Missile: ब्रह्मोस के प्रहार से दहला पाकिस्‍तान अब भारत की बराबरी करने की हर संभव कोशिश में जुटा है. मिसाइल से फाइटर जेट तक को लेकर पड़ोसी देश की तरफ से अनेक तरह के अनाप-शनाप दावे किए जा रहे हैं. हकीकत यह है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पड़ोसी देश के लिए न तो मिसाइल काम आई और न ही एयर डिफेंस सिस्‍टम ब्रह्मोस को रोक पाया. अब बताया जा रहा है कि पाकिस्‍तान ने फतह-3 सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण करने का दावा किया है. इसे ब्रह्मोस का जोड़ीदार भी बताया जा रहा है. सच्‍चाई यह है कि फतह-3 चीन के HD-1 क्रूज मिसाइल की कॉपी है. दावा यह भी किया जा रहा है कि फतह-3 क्रूज मिसाइल इतनी कम ऊंचाई पर उड़ान भरने में सक्षम है, जिससे एडवांस रडार सिस्‍टम के लिए भी उसे डिटेक्‍ट और इंटरसेप्‍ट करना मुश्किल है. तो क्‍या फतह-3 S-400 एयर डिफेंस सिस्‍टम को भी धता बताते हुए टार्गेट को तबाह कर सकती है? विविध वजहों के चलते पाकिस्‍तान के इस दावे पर भरोसा करना मुश्किल है. एचडी-1 और फतह-3 अभी शुरुआती चरण में दिखाई देते हैं, वहीं ब्रह्मोस लंबे समय से ऑपरेशनल तैनाती में है. ब्रह्मोस का वजन लगभग 2500 से 3000 किलोग्राम के बीच है और यह 200 से 300 किलोग्राम तक का वारहेड ले जाने में सक्षम है. इसकी लंबाई करीब 8.4 मीटर है और इसे भूमि, समुद्र तथा हवा—तीनों माध्यमों से दागा जा सकता है. चीनी सैन्य विश्लेषकों ने एचडी-1 और उससे जुड़े सिस्टम की क्षमताओं को काफी बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया है. बीजिंग स्थित सैन्य विशेषज्ञ वेई डोंगसू ने दावा किया कि इसकी तेज गति और कम ऊंचाई पर उड़ान इसे इंटरसेप्ट करना बेहद कठिन बनाती है. उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में मिसाइलों के संयुक्त हमले से विमानवाहक पोत समूहों की वायु रक्षा प्रणाली पर भारी दबाव डाला जा सकता है. हालांकि कई रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि ब्रह्मोस का लंबे समय का परिचालन अनुभव और युद्धक विश्वसनीयता उसे अभी भी बढ़त दिलाते हैं. भारत और रूस द्वारा संयुक्त रूप से विकसित सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ‘ब्रह्मोस’ दुनिया की सबसे तेज और घातक मिसाइल सिस्‍टम्‍स में गिनी जाती है. भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और रूस की एनपीओ मशीनोस्त्रोयेनीया के सहयोग से तैयार की गई यह मिसाइल अपनी अत्याधुनिक तकनीक, सटीक निशानेबाजी और मल्‍टी-प्‍लेटफॉर्म लॉन्च कैपेबिलिटी के लिए जानी जाती है. ब्रह्मोस मिसाइल की सबसे बड़ी खासियत इसकी रफ्तार है. यह मिसाइल मैक 2.8 से 3.0 (अधिकतम 3700 KMPH की रफ्तार) की गति से उड़ान भर सकती है, जो सामान्य सबसोनिक मिसाइलों की तुलना में लगभग तीन गुना तेज है. इसकी उच्च गति दुश्मन की एयर डिफेंस प्रणाली के लिए इसे रोकना बेहद कठिन बना देती है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ब्रह्मोस की ताकत पाकिस्‍तान के साथ पूरी दुनिया ने देखी थी. अब पाकिस्‍तान ने फतह-3 सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल लॉन्‍च कर ब्रह्मोस की बराबरी करने का दावा किया है. (फाइल फोटो/Reuters) ब्रह्मोस मिसाइल फायर एंड फॉरगेट तकनीक पर आधारित है, यानी लक्ष्य निर्धारित करने के बाद इसे नियंत्रित करने की आवश्यकता नहीं होती. ब्रह्मोस को थल, जल, पनडुब्बी और वायु चारों प्लेटफॉर्म से दागा जा सकता है. भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना तीनों में इसकी तैनाती हो चुकी है. वायुसेना के Su-30MKI फाइटर जेट से भी इसका सफल परीक्षण किया जा चुका है. दूसरी तरफ, पाकिस्‍तान की ओर से लॉन्‍च फतह-3 क्रूज मिसाइल को लेकर ज्‍यादा जानकारी नहीं दी गई है. इसे कितने प्‍लेटफॉर्म से लॉन्‍च किया जा सकता है, इसको लेकर भी तस्‍वीर साफ नहीं है. सबसे खास बात यह है कि बैटलफील्‍ड में इसकी आजमाइश नहीं हुई है, जिससे इसको लेकर किए जा रहे दावों और सच्‍चाई में फर्क करना बेहद मुश्किल है. (फाइल फोटो/Reuters) Add News18 as Preferred Source on Google ब्रह्मोस की मारक क्षमता 290 से 450 किलोमीटर तक मानी जाती है, जबकि इसके विस्तारित रेंज वाले संस्करणों पर भी काम चल रहा है. एक्‍सटेंडेड रेंज वाली ब्रह्मोस की मारक क्षमता 1500 किलोमीटर तक होने की संभावना जताई जा रही है. यह मिसाइल अंतिम चरण में समुद्र तल से महज 5 मीटर की ऊंचाई पर उड़ान भर सकती है, जिससे दुश्मन के रडार इसे आसानी से पकड़ नहीं पाते. इसकी सटीकता भी बेहद उच्च स्तर की है और इसका सर्कुलर एरर प्रोबेबल (CEP) 5 मीटर से कम बताया जाता है. बता दें कि ब्रह्मोस एयरोस्पेस की स्थापना 5 दिसंबर 1995 को भारत-रूस संयुक्त उद्यम के रूप में हुई थी. समय के साथ इसके कई संस्करण विकसित किए गए हैं, जिनमें लैंड-अटैक, शिप-लॉन्च, सबमरीन-लॉन्च और एयर-लॉन्च वेरिएंट शामिल हैं. (फाइल फोटो/Reuters) भारत अब ब्रह्मोस मिसाइल का निर्यात भी शुरू कर चुका है. फिलीपींस को ब्रह्मोस की आपूर्ति की जा रही है, जबकि वियतनाम समेत कई अन्य देशों के साथ भी बातचीत चल रही है. इसके अलावा छोटे और हल्के संस्करण ‘ब्रह्मोस-एनजी’ के विकास पर भी तेजी से काम हो रहा है, जिसे आधुनिक लड़ाकू विमानों और युद्धपोतों पर अधिक प्रभावी ढंग से तैनात किया जा सकेगा. ब्रह्मोस भारत की सामरिक ताकत और रक्षा क्षमता का महत्वपूर्ण प्रतीक बनी हुई है. दूसरी तरफ, फतह-3 को अभी कई चुनौतियों का सामना करना है. (फाइल फोटो/Reuters) रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि फतह-3 मिसाइल चीन की HD-1 सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल पर आधारित है और इसे भारत की ब्रह्मोस मिसाइल के जवाब के रूप में विकसित किया गया है. पाकिस्तान की यह नई मिसाइल उसके फतह मिसाइल परिवार का सबसे उन्नत संस्करण मानी जा रही है, जो तेज गति, कम ऊंचाई पर उड़ान और सटीक हमले जैसी क्षमताओं से लैस है. रिपोर्टों के मुताबिक फतह-3 को 8×8 ऑल-व्हील ड्राइव ट्रांसपोर्टर इरेक्टर लॉन्चर (TEL) पर तैनात किया गया है. इस मोबाइल प्लेटफॉर्म पर दो मिसाइल कैनिस्टर लगाए गए हैं, जिससे इसे युद्धक्षेत्र में तेजी से स्थान बदलने और लॉन्च करने की क्षमता मिलती है. पाकिस्तानी और चीनी रक्षा स्रोतों के अनुसार यह मिसाइल मैक-3 से मैक-4 (अधिकतम 4900 KMPH की स्‍पीड) की रफ्तार हासिल कर सकती है. इसकी मारक क्षमता 290 किलोमीटर से लेकर 450 किलोमीटर तक बताई जा रही है, जो

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100 KM रेंज, 500 KG पेलोड… अमेरिकी JDAM और इजरायली SPICE को...

आधुनिक युद्ध के मैदान में अब जीत उसकी नहीं होगी जिसके पास सबसे भारी बम हैं बल्कि उसकी होगी जिसके पास सबसे चतुर बम हैं. भारतीय वायुसेना के बेड़े में एक ऐसे ही वेपन की एंट्री होने जा रही है, जिसे रक्षा विशेषज्ञ तारा (TARA) कह रहे हैं. कल्पना कीजिए, एक लड़ाकू विमान दुश्मन की सीमा से 100 किलोमीटर दूर सुरक्षित उड़ रहा है और अचानक एक देसी बम हवा में अपने पंख फैलाता है, किसी बाज की तरह शिकार को ट्रैक करता है और बिना शोर किए सीधे दुश्मन के कमांड सेंटर को मलबे के ढेर में तब्दील कर देता है. डीआरडीओ का यह स्वदेशी ग्लाइड बम महज एक हथियार नहीं बल्कि भारत की उस ताकत का प्रदर्शन है जो दुश्मन को संभलने का मौका तक नहीं देती. इसे रडार पकड़ नहीं सकते और इसकी सटीकता ऐसी है कि यह मीलों दूर से भी खिड़की के रास्ते बंकर के अंदर घुस सकता है. तारा के आने के बाद अब भारत को सर्जिकल स्ट्राइक जैसे मिशनों के लिए विदेशी तकनीक की तरफ देखने की जरूरत नहीं होगी. अब भारत का अपना तारा आसमान से मौत बनकर बरसेगा. डीआरडीओ का तारा एक ऐसा स्वदेशी हथियार है जिसने भारत को स्मार्ट बम बनाने वाले दुनिया के चुनिंदा देशों की कतार में खड़ा कर दिया है. इसे लांग रेंज गाइडेड बॉम्‍ब (LRGB) भी कहा जाता है. तारा का अर्थ है टारगेटिड आर्टिलरी रॉकेट असिस्‍टेड बम. 1. रेंज और मारक क्षमतातारा बम की सबसे बड़ी ताकत इसकी 70 से 100 किलोमीटर की रेंज है. · स्टैंड-ऑफ हथियार: यह एक स्टैंड-ऑफ हथियार है यानी भारतीय फाइटर जेट को दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम (जैसे मिसाइल या रडार) की रेंज में जाने की जरूरत नहीं है. विमान सुरक्षित दूरी से इसे रिलीज कर सकता है. 2. पेलोड और वजनयह बम काफी शक्तिशाली है और भारी तबाही मचाने में सक्षम है: · वजन: इसका वजन लगभग 500 किलोग्राम (1000 पाउंड) की श्रेणी में आता है. · विस्फोटक: इसमें हाई-एक्सप्लोसिव वॉरहेड होता है जो कंक्रीट के मोटे बंकरों, रनवे और दुश्मन के रडार स्टेशनों को मिट्टी में मिलाने की ताकत रखता है. 3. नेविगेशन और सटीकतायह कोई साधारण गिरता हुआ गोला नहीं है, बल्कि एक ‘दिमाग वाला बम’ है: · NavIC सपोर्ट: इसमें भारत का अपना जीपीएस (NavIC) लगा है. विदेशी जीपीएस पर निर्भरता खत्म होने से युद्ध के समय इसे कोई जाम नहीं कर पाएगा. · सटीकता: इसकी ‘सर्कुलर एरर प्रोबेबिलिटी’ (CEP) बहुत कम है, जिसका मतलब है कि यह अपने लक्ष्य से कुछ ही मीटर के अंतर पर सटीक वार करता है. 4. लागत और तुलना· लागत: इजरायल के स्पाइस-2000 बम की कीमत करोड़ों में है जबकि तारा स्वदेशी होने के कारण लगभग आधी से भी कम कीमत पर तैयार हो जाता है. · तुलना: यह अमेरिका के ‘JDAM’ (Joint Direct Attack Munition) और इजरायल के ‘SPICE’ बमों को सीधी टक्कर देता है. सामरिक विश्लेषणतारा के आने से भारत की सर्जिकल स्ट्राइक करने की क्षमता कई गुना बढ़ गई है. अब हमें बालाकोट जैसे मिशनों के लिए विदेशी बमों का इंतजार नहीं करना होगा. यह विशेष रूप से चीन और पाकिस्तान की सीमाओं पर तैनात सुखोई Su-30MKI और तेजस विमानों के लिए एक घातक वरदान है. इसके पंख रिलीज के बाद खुलते हैं जिससे यह हवा में तैरते हुए लंबी दूरी तय करता है. सवाल-जवाब क्या ‘तारा’ को रडार से पकड़ा जा सकता है? इसका आकार छोटा है और इसमें कोई इंजन नहीं होता (यह सिर्फ हवा में तैरता है), इसलिए रडार के लिए इसे ट्रैक करना और मिसाइल से गिराना बेहद मुश्किल होता है. यह मिसाइल से कैसे अलग है? मिसाइल में इंजन और फ्यूल होता है जो उसे आगे बढ़ाता है, जबकि ‘तारा’ एक ‘ग्लाइड बम’ है जो विमान की गति और ऊंचाई का उपयोग करके अपने पंखों के सहारे लक्ष्य तक पहुँचता है. ‘तारा’ को किन विमानों में फिट किया जा सकता है? इसे मुख्य रूप से सुखोई Su-30MKI, मिराज-2000, जगुआर और स्वदेशी ‘तेजस’ (LCA Tejas) फाइटर जेट्स के लिए डिजाइन किया गया है. इसकी सबसे बड़ी खासियत क्या है? इसकी सबसे बड़ी खासियत स्वदेशी NavIC सिस्टम और कम लागत है, जो भारत को युद्ध की स्थिति में आत्मनिर्भर बनाती है. Source link

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Last Updated:May 09, 2026, 04:08 IST Fish Disease Diagnosis NSPAD App: मछली पालन में नुकसान से बचना है तो डिजिटल खेती अपनाएं. पूसा विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की सलाह है कि मछलियों में घाव या दाग दिखते ही खुद डॉक्टर न बनें. बल्कि NSPDT ऐप का सहारा लें. ऐप पर फोटो अपलोड करते समय तालाब का सही साइज और पानी के रंग की जानकारी जरूर दें. ताकि वैज्ञानिक सटीक दवा बता सकें. याद रखें, सही समय पर सही सलाह ही आपके उत्पादन को दोगुना कर सकती है. बेवजह की महंगी दवाओं का खर्च बचा सकती है. समस्तीपुर: बिहार समेत देश के कई हिस्सों में मछली पालन तेजी से किसानों की आमदनी बढ़ाने वाला व्यवसाय बनता जा रहा है. बड़ी उम्मीद और मेहनत के साथ किसान तालाबों में मछली पालन करते हैं, लेकिन कई बार अचानक मछलियों में बीमारी फैलने से उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ता है. सबसे बड़ी परेशानी यह होती है कि किसानों को बीमारी की सही पहचान और इलाज की जानकारी समय पर नहीं मिल पाती. ऐसे में कई लोग दवा दुकानदारों के भरोसे इलाज करते हैं, जिससे नुकसान और बढ़ जाता है. इसी समस्या को दूर करने के लिए समस्तीपुर स्थित डॉ.राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा के वैज्ञानिकों की टीम ने एनएसपीडीटी ऐप पर विशेष नजर रखती है. इस ऐप के जरिए मछली पालक अब अपने मोबाइल से बीमारी की फोटो अपलोड कर सीधे वैज्ञानिकों से सलाह प्राप्त कर सकेंगे. फोटो अपलोड करते ही वैज्ञानिकों तक पहुंचेगी जानकारीविश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने बताया कि यह ऐप मछली पालकों के लिए काफी उपयोगी साबित होगा. तालाब में अगर किसी मछली के शरीर पर दाग, फफूंदी, घाव या किसी अन्य तरह की बीमारी दिखाई देती है तो किसान उसकी तस्वीर खींचकर ऐप पर अपलोड कर सकते हैं. फोटो अपलोड होते ही जानकारी विशेषज्ञों की टीम तक पहुंच जाएगी. इसके बाद वैज्ञानिक बीमारी की पहचान कर उसके इलाज और बचाव के उपाय बताएंगे. इससे किसानों को सही समय पर सही दवा और उचित सलाह मिल सकेगी. वैज्ञानिकों का मानना है कि समय पर उपचार मिलने से मछलियों की मौत कम होगी और उत्पादन में भी बढ़ोतरी होगी. साथ ही गलत दवा के उपयोग से होने वाले नुकसान से भी बचाव हो सकेगा. ऐप डाउनलोड करने की प्रक्रिया भी आसानमत्स्य पालन विभाग के वैज्ञानिक डॉ. राजीव कुमार ब्रह्मचारी ने बताया कि किसान भाई सबसे पहले अपने मोबाइल के प्ले स्टोर में जाकर NSPAD लिखकर ऐप डाउनलोड करें. इसके बाद मोबाइल नंबर के जरिए रजिस्ट्रेशन करना होगा. ओटीपी सत्यापन के बाद किसान अपनी पसंद की भाषा चुन सकते हैं. ऐप में मछली, झींगा और अन्य जलीय जीवों के अलग-अलग विकल्प दिए गए हैं. किसान अपनी जरूरत के अनुसार विकल्प चुनकर समस्या से जुड़ी फोटो या वीडियो अपलोड कर सकते हैं. इसके साथ तालाब का आकार, प्रभावित मछलियों की संख्या और बीमारी से जुड़ी अन्य जानकारी भी दर्ज करनी होगी. जानकारी अपलोड होने के बाद वैज्ञानिकों की टीम मामले का अध्ययन करेगी और किसान से संपर्क कर उचित उपचार बताएगी. जरूरत पड़ने पर गांव तक पहुंचेगी वैज्ञानिकों की टीमडॉ. राजीव कुमार ब्रह्मचारी ने कहा कि कई बार किसान बीमारी की सही जानकारी नहीं मिलने के कारण गलत दवा का उपयोग कर लेते हैं. इससे मछलियों को नुकसान होने के साथ-साथ बाद में उसका सेवन करने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ सकता है. उन्होंने कहा कि इस ऐप का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक और सुरक्षित सलाह उपलब्ध कराना है.दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर, वैशाली समेत आसपास के जिलों में अगर किसी तालाब में बीमारी की गंभीर स्थिति सामने आती है तो विश्वविद्यालय की टीम मौके पर पहुंचकर जांच भी करती है. वैज्ञानिक खुद तालाब का निरीक्षण कर बीमारी की वजह पता लगाते हैं और फिर उपचार की सही सलाह देते हैं. विश्वविद्यालय की यह पहल मछली पालकों के लिए राहत भरी साबित हो रही है और इससे किसानों को कम नुकसान के साथ बेहतर उत्पादन मिलने की उम्मीद बढ़ गई है. About the Author Amit ranjan मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Samastipur,Bihar Source link

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CPM लीडर के आरोपों से हुई नवीन बाबू की मौत? कई अनसुलझे...

होमताजा खबरदेश CPM लीडर के आरोपों से हुई नवीन बाबू की मौत? नई कैबिनेट बनते ही फिर से जांच Last Updated:May 09, 2026, 01:25 IST नवीन बाबू की रहस्यमयी मौत के मामले में कई सवाल मौजूद हैं. पुरानी पुलिस इन्वेस्टिगेशन से लोगों का भरोसा उठ चुका है. मौत से पहले सीपीएम लीडर पीपी दिव्या ने नवीन बाबू पर घूसखोरी का आरोप लगाया था. विदाई समारोह में बिना बुलाए पहुंचकर भारी बवाल काटा गया था. यह सारे आरोप प्रशांतन नाम के एक शख्स ने लगाए थे. इन आरोपों के बाद ही नवीन बाबू की मौत का खौफनाक कांड हुआ था. ख़बरें फटाफट कन्नूर के पूर्व एडीएम नवीन बाबू के मौत की जांच फिर से शुरू हो सकती है. तिरुवनंतपुरम. केरल में कांग्रेस नीत यूडीएफ की प्रचंड चुनावी जीत के बाद पूर्व कन्नूर अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (एडीएम) नवीन बाबू की रहस्यमयी मौत का मामला एक बार फिर राजनीतिक केंद्र में लौटता दिख रहा है. संकेत मिल रहे हैं कि नई सरकार इस मामले में सीबीआई जांच या निष्पक्ष पुलिस अधिकारियों की विशेष टीम से नई जांच करा सकती है. इस मुद्दे ने तब और तूल पकड़ लिया जब केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के महासचिव और रन्नी से नवनिर्वाचित विधायक पझकुलम मधु ने कहा कि नई कैबिनेट के गठन के तुरंत बाद इस मामले को प्राथमिकता के साथ उठाया जाएगा. उन्होंने आईएएनएस से कहा, “जिस दिन यह घटना हुई थी, उसी दिन से मैं परिवार के साथ खड़ा हूं. अब नई सरकार बनने जा रही है, तो हम इस मामले को मजबूती से उठाएंगे. कांग्रेस नीत यूडीएफ लगातार सीबीआई जांच की मांग करती रही है. सरकार के शपथ लेने के बाद मैं और अन्य नेता इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाएंगे.” पझकुलम मधु उन नेताओं में शामिल रहे हैं जिन्होंने नवीन बाबू को न्याय दिलाने के लिए आंदोलन का नेतृत्व किया था. उनका कहना है कि मामले में अब भी कई सवालों के जवाब नहीं मिले हैं और पहले की जांच भरोसा पैदा करने में विफल रही. नवीन बाबू की मौत के बाद उस समय बड़ा विवाद खड़ा हो गया था, जब सीपीआई(एम) की वरिष्ठ नेता और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष पीपी दिव्या ने एक विदाई समारोह के दौरान उन पर रिश्वत लेने के आरोपों को लेकर सार्वजनिक रूप से निशाना साधा था. यह आरोप प्रशांतन नामक व्यक्ति ने लगाए थे. बताया गया था कि दिव्या बिना निमंत्रण के कार्यक्रम में पहुंची थीं. यूडीएफ और नवीन बाबू के परिवार ने लगातार आरोप लगाया है कि जांच एजेंसियों ने दिव्या और प्रशांतन के बीच संबंधों या कथित रिश्वत के लिए जुटाए गए पैसों के स्रोत की गंभीरता से जांच नहीं की. मामले से जुड़े विवादित पेट्रोल पंप को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. विपक्षी नेताओं का आरोप है कि इसमें बेनामी लेनदेन और प्रभावशाली राजनीतिक संबंधों की भूमिका हो सकती है. कांग्रेस नेताओं का मानना है कि पूरे प्रकरण के ‘असल मास्टरमाइंड’ का पता केवल विस्तृत जांच से ही चल सकता है. विधानसभा चुनाव में वाम मोर्चे की करारी हार के बाद राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नवीन बाबू मामला नई यूडीएफ सरकार की शुरुआती बड़ी परीक्षाओं में से एक बन सकता है. सीपीआई(एम) के लिए यह मामला अब भी एक असहज छाया बना हुआ है, जिसे सत्ता परिवर्तन के बाद फिर से सार्वजनिक बहस के केंद्र में लाया जा सकता है. About the Author Rakesh Ranjan Kumar राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Thiruvananthapuram,Kerala Source link

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1996 में अटल बिहारी वाजपेयी… उमर अब्दुल्ला क्या कहना चाहते हैं? नेशनल...

होमताजा खबरदेश 1996 में अटल बिहारी वाजपेयी… उमर अब्दुल्ला आखिर क्या कहना चाहते हैं? Last Updated:May 09, 2026, 01:53 IST उमर अब्दुल्ला ने कहा कि एलओपी सीएम की कुर्सी पाने का इंतजार कर रहे हैं. एनसी में भारी टूट की अफवाह फैलाकर गेम खेला जा रहा है. उमर ने कहा, ‘हमारी पार्टी में कोई एकनाथ शिंदे बिल्कुल नहीं है’. महाराष्ट्र में बीजेपी ने शिवसेना तोड़ने में शिंदे की मदद की थी. ख़बरें फटाफट उमर अब्दुल्ला ने कहा कि परिसीमन सिर्फ बीजेपी के फायदे के लिए हुआ. श्रीनगर. जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और यूटी विधानसभा में उसके नेता पर बदले की राजनीति करने का आरोप लगाया. अब्दुल्ला ने पत्रकारों से बात करते हुए आरोप लगाया कि विपक्ष के नेता (एलओपी) सुनील शर्मा किसी भी तरह से जम्मू-कश्मीर में मुख्यमंत्री की कुर्सी पाने का इंतजार कर रहे हैं. शर्मा ने कहा था कि सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) में टूट हो सकती है. उमर अब्दुल्ला ने कहा कि एलओपी को याद रखना चाहिए कि यहां 2029 से पहले चुनाव नहीं होने वाले हैं और यह कि नेशनल कॉन्फ्रेंस में कोई एकनाथ शिंदे नहीं है. कोई भी पार्टी छोड़कर नहीं जा रहा है. उनका इशारा शिवसेना के उस वरिष्ठ नेता की ओर था, जिसने पार्टी को तोड़ा था और महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महाविकास अघाड़ी सरकार के गिरने का कारण बना था. अब्दुल्ला ने कहा कि लोगों को शर्मा के बयान से भाजपा के इरादों को समझना चाहिए. एकनाथ शिंदे इसलिए चले गए, क्योंकि भाजपा ने उन्हें पार्टी छोड़ने में मदद की थी. लोगों को एलओपी के बयान के जरिए भाजपा के इरादों को समझना चाहिए. हम उनके हाथों पहले ही बहुत कुछ भुगत चुके हैं. उन्‍होंने जोर देकर कहा कि यहां परिसीमन सिर्फ भाजपा और उसके समर्थकों की मदद करने के इरादे से किया गया था. वे राज्य का दर्जा देने के मुद्दे पर लोगों को धमका रहे हैं. ऐसा नहीं लगता कि उनका जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा देने का कोई इरादा है. यहां कैबिनेट का विस्तार इसलिए नहीं किया जा रहा है, क्योंकि उन्होंने हमें राज्य का दर्जा नहीं दिया है और इस अफवाह में कोई सच्चाई नहीं है कि हम टूट के डर से कैबिनेट विस्तार में देरी कर रहे हैं. तमिलनाडु की स्थिति पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि दक्षिणी राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने का कोई कारण नहीं है. उमर अब्दुल्ला ने याद दिलाया कि 1996 में राष्ट्रपति ने अटल बिहारी वाजपेयी को सबसे बड़ी पार्टी के नेता के तौर पर केंद्र में सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया था. जब वे लोकसभा में अपना बहुमत साबित नहीं कर पाए, तो वह सरकार 13 दिनों के बाद गिर गई थी. सीएम ने पूछा कि तमिलनाडु के लिए अलग पैमाना क्यों इस्तेमाल किया जा रहा है, सिर्फ इसलिए कि वहां चुनावों में भाजपा बहुमत हासिल करने में नाकाम रही? About the Author Rakesh Ranjan Kumar राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Srinagar,Jammu and Kashmir Source link

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