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5 Essential Temples In Deoghar: सावन में अगर आप बोलबम लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम आ रहे हैं, तो सिर्फ ज्योतिर्लिंग के दर्शन ही नहीं, मंदिर परिसर के इन 5 प्रमुख मंदिरों में पूजा करना भी धार्मिक परंपरा में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है.आइए जानते हैं तीर्थपुरोहित प्रमोद श्रृंगारी से, आखिर क्यों इन मंदिरों के दर्शन के बिना बोलबम यात्रा अधूरी मानी जाती है.
12 ज्योतिर्लिंग मे से एक ज्योतिर्लिंग बाबा बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग है. इस ज्योतिर्लिंग मे कई ऐसी परम्परा है जो शायद अन्य किसी ज्योतिर्लिंग मे देखने को नहीं मिलता है. यह ज्योतिर्लिंग होने के साथ साथ शक्तिपीठ भी है जिस वजह से इस ज्योतिर्लिंग का महत्वा कई गुणा बढ़ जाता है. माता सती का ह्रदय गिरने की वजह से इस ज्योतिर्लिंग को हृदयपीठ और मनोकामना लिंग भी कहाँ जाता है.
देवघर के बैद्यनाथ मंदिर के ज्योतिर्लिंग के प्रसिद्ध तीर्थपुरोहित प्रमोद श्रृंगारी ने लोकल 18 के संवाददाता से बातचित करते हुए कहाँ की सावन के महीने में लाखों कांवरिया और श्रद्धालु बाबा बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग में जलाभिषेक और पूजा-अर्चना करने के लिए देवघर पहुंचते हैं. लेकिन बहुत कम लोगों को यह जानकारी होती है कि केवल बाबा बैद्यनाथ के दर्शन कर लौट जाना ही पर्याप्त नहीं माना जाता. बैद्यनाथधाम की प्राचीन धार्मिक परंपरा के अनुसार मंदिर परिसर में स्थित पांच प्रमुख मंदिरों में भी दर्शन-पूजन का विशेष महत्व बताया गया है. बाबा बैद्यनाथ मंदिर के तीर्थपुरोहित प्रमोद श्रृंगारी बताते हैं कि इन पांच मंदिरों में श्रद्धापूर्वक पूजा करने के बाद ही श्रद्धालु की बोलबम यात्रा पूर्ण मानी जाती है. आइए जानते हैं तीर्थपुरोहित प्रमोद श्रृंगारी से इन मंदिरों का धार्मिक महत्व.
तीर्थपुरोहित प्रमोद श्रृंगारी बताते हैं कि बाबा बैद्यनाथ धाम केवल एक ज्योतिर्लिंग ही नहीं, बल्कि एक शक्तिपीठ भी है.धार्मिक मान्यता के अनुसार यहां माता सती शक्ति स्वरूप मां दुर्गा के रूप में मां पार्वती मंदिर में विराजमान हैं. यही कारण है कि बैद्यनाथधाम को शिव-शक्ति ज्योतिर्लिंग कहा जाता है. श्रद्धालु पहले बाबा बैद्यनाथ के दर्शन करते हैं और उसके बाद मां पार्वती के चरणों में माथा टेकते हैं. मान्यता है कि शिव और शक्ति दोनों का आशीर्वाद एक साथ प्राप्त होने से जीवन में सुख, शांति, वैवाहिक सौभाग्य और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है. इसलिए बाबा के दर्शन के बाद मां पार्वती के दर्शन को अत्यंत आवश्यक माना जाता है.
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तीर्थपुरोहित बताते है की बैद्यनाथधाम में स्थित मां संध्या मंदिर का अपना विशेष आध्यात्मिक महत्व है. धार्मिक मान्यता है कि जब माता सती का हृदय इस पावन भूमि पर गिरा, तब उसकी रक्षा के लिए मां कामाख्या, मां संध्या के रूप में नीलचक्र पर विराजमान होकर बैद्यनाथधाम पहुंचीं और यहीं स्थापित हुईं. तभी से मां संध्या इस शक्तिपीठ की दिव्य शक्ति के रूप में पूजी जाती हैं. श्रद्धालु बाबा और मां पार्वती के दर्शन के बाद मां संध्या की पूजा कर शक्ति, रक्षा और आध्यात्मिक कृपा की कामना करते हैं. सावन में यहां विशेष रूप से श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है.
मंदिर परिसर में स्थित मां बगला का मंदिर भी अत्यंत सिद्ध और प्राचीन माना जाता है. तीर्थपुरोहित प्रमोद श्रृंगारी बताते हैं कि देवी पुराण में मां बगला का उल्लेख मिलता है और इन्हें बाबा बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग की अधिष्ठात्री माता कहा जाता है. धार्मिक मान्यता है कि मां बगला की आराधना करने से शत्रु बाधा दूर होती है, रोगों से मुक्ति मिलती है, दुख और संकट समाप्त होते हैं तथा साधक को विजय और संरक्षण का आशीर्वाद प्राप्त होता है. यही कारण है कि बाबा बैद्यनाथ के दर्शन के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां बगला के मंदिर में भी पूजा-अर्चना करते हैं.
तीर्थपुरोहित प्रमोद श्रृंगारी बताते हैं कि बैद्यनाथधाम को प्राचीन ग्रंथों में चिताभूमि भी कहा गया है.श्मशान भूमि की प्रमुख अधिष्ठात्री देवी होने के कारण यहां मां काली का विशेष स्थान और महत्व माना जाता है. धार्मिक परंपरा के अनुसार किसी भी मंदिर में पूजा-अर्चना करने से पहले मां काली का स्मरण और पूजन शुभ माना जाता है.श्रद्धालुओं का विश्वास है कि मां काली अपने भक्तों के भय, संकट और नकारात्मक शक्तियों का नाश कर उन्हें साहस और सुरक्षा का आशीर्वाद देती हैं. इसलिए सावन में मां काली मंदिर में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं.
तीर्थपुरोहित प्रमोद श्रृंगारी के अनुसार धार्मिक मान्यता है कि बाबा बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग की स्थापना स्वयं भगवान विष्णु के हाथों हुई थी. इसी कारण मंदिर परिसर में स्थित लक्ष्मी-नारायण मंदिर का विशेष महत्व माना जाता है. श्रद्धालु बाबा बैद्यनाथ के दर्शन के बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना कर अपने जीवन में सुख, समृद्धि, वैभव और परिवार के कल्याण की कामना करते हैं. मान्यता है कि शिव के साथ विष्णु और माता लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होने से तीर्थयात्रा पूर्ण फलदायी होती है.