युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन, साइबर वॉरफेयर और अत्याधुनिक हथियारों के दौर में सिर्फ तकनीक विकसित करना ही काफी नहीं है, बल्कि उसे समय पर सेना तक पहुंचाना भी उतना ही जरूरी है. इसी को लेकर भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने बड़ी चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि ‘टेक्नोलॉजी में देरी, असल में टेक्नोलॉजी से वंचित होने के बराबर है.’
कर्नाटक के कारवार में INS मालवन के कमीशनिंग समारोह के दौरान एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने आत्मनिर्भर रक्षा प्रणाली की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि अगर कोई देश तकनीक विकसित करने में इतना समय लगा दे कि तब तक दुनिया उससे आगे निकल जाए, तो ऐसी तकनीक का कोई मतलब नहीं रह जाता.
‘दुनिया से पीछे न छूट जाएं’
वायुसेना प्रमुख ने कहा कि स्वदेशी तकनीक विकसित करना बेहद जरूरी है, लेकिन उसकी गति भी उतनी ही महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़े सभी क्षेत्रों को यह समझना होगा कि भविष्य के युद्धों में वही देश आगे रहेगा, जो समय के साथ तकनीकी रूप से खुद को अपडेट करता रहेगा.
उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत अपने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने पर जोर दे रहा है. हालांकि, कई बड़े रक्षा प्रोजेक्ट्स में देरी को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं.
नौसेना से सीख लेने की जरूरत
एयर चीफ मार्शल सिंह ने भारतीय नौसेना की स्वदेशी युद्धपोत निर्माण क्षमता की जमकर तारीफ की. उन्होंने कहा कि नौसेना ने जिस तरह जहाज निर्माण की प्रक्रिया में अपने अधिकारियों को शुरुआत से ही शामिल किया, उससे आत्मनिर्भरता को मजबूती मिली है. उन्होंने कहा कि थलसेना और वायुसेना को भी इस मॉडल से सीख लेनी चाहिए. नौसेना के अधिकारी शुरुआत से शिपयार्ड के साथ काम करते हैं और समय के साथ उसी व्यवस्था का हिस्सा बन जाते हैं. ऐसा मॉडल विमानन क्षेत्र में भी अपनाया जा सकता है, ताकि भारत तेजी से आत्मनिर्भर बन सके.
तेजस में देरी पर पहले भी जता चुके हैं नाराजगी
गौरतलब है कि एयर चीफ मार्शल एपी सिंह इससे पहले भी हल्के लड़ाकू विमान तेजस की डिलीवरी और अपग्रेड में हो रही देरी पर चिंता जता चुके हैं. उन्होंने साफ किया है कि आधुनिक युद्ध में देरी की कीमत बहुत ज्यादा हो सकती है.
वायुसेना प्रमुख ने भविष्य के युद्धों में तीनों सेनाओं के बीच तालमेल यानी जॉइंटनेस को बेहद जरूरी बताया. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में कोई भी युद्ध केवल एक सेना के दम पर नहीं जीता जा सकता. उन्होंने कहा कि सेना, नौसेना और वायुसेना को एक साथ मिलकर काम करना होगा. ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियानों में तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल देखने को मिला है और भविष्य में इसे और मजबूत करना होगा.
हिंद महासागर में भारत की भूमिका अहम
एयर चीफ मार्शल सिंह ने समुद्री सुरक्षा के महत्व पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि समुद्री रास्ते किसी देश के व्यापार और आर्थिक भविष्य को तय करते हैं. हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती चुनौतियों के बीच समुद्री मार्गों की सुरक्षा बेहद जरूरी है.
उन्होंने कहा कि अगर समुद्री व्यापार बाधित होता है तो इसका सीधा असर किसी भी देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है. इसलिए भारत को अपनी समुद्री क्षमता और रक्षा तकनीक दोनों को तेजी से मजबूत करना होगा.