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Deoghar News: श्रावणी मेले ने बदली देवघर के किसानों की तकदीर, फूलों...


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श्रावणी मेले ने बदली देवघर के किसानों की तकदीर, फूलों की खेती से बढ़ी कमाई

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Deoghar Flower farming: देवघर में श्रावणी मेले के दौरान फूलों की मांग बढ़ने से ग्रामीण किसानों को अच्छी कमाई का मौका मिल रहा है. मोहनपुर प्रखंड के कई गांवों में किसान पारंपरिक फसलों के साथ फूलों की खेती कर रहे हैं. किसान फूल बेचने के अलावा उनसे माला तैयार कर भी अतिरिक्त आमदनी कमा रहे हैं. इस काम में परिवार के दूसरे सदस्य और महिलाएं भी सहयोग कर रही हैं. मंदिरों और पूजा-पाठ में पूरे साल फूलों की मांग रहने से फूलों की खेती अब किसानों के लिए सिर्फ मौसमी कमाई नहीं, बल्कि अतिरिक्त आय का जरिया बनती जा रही है.

देवघर: झारखंड के देवघर में श्रावणी मेला सिर्फ बाबा बैद्यनाथ के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र नहीं है. इस मेले ने ग्रामीण इलाकों में रोजगार और कमाई के नए रास्ते भी खोले हैं. मेले के दौरान फूलों की मांग काफी बढ़ जाती है. इसका सीधा फायदा अब गांवों के किसानों को मिल रहा है. बाबा बैद्यनाथ मंदिर से लेकर बासुकीनाथ धाम तक रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं. श्रद्धालु भगवान शिव को चढ़ाने के लिए फूल और माला खरीदते हैं. इसके चलते देवघर के आसपास के गांवों में फूलों की खेती करने वाले किसानों के चेहरे पर भी खुशी है. कई किसान अब धान और दूसरी पारंपरिक फसलों के साथ फूलों की खेती को भी अच्छी कमाई का जरिया मानने लगे हैं.

पहले अनाज उगाते थे, अब फूलों की खेती पर जोर
झारखंड देवघर के मोहनपुर प्रखंड के कनिया पोखर, मल्हारा और जरिया सहित आसपास के कई गांवों में खेतों का नजारा बदल गया है. जहां पहले खेतों में अनाज और दूसरी मौसमी फसलें नजर आती थीं, वहीं अब कई खेतों में फूलों की खेती दिखाई दे रही है. किसान फूलों को सिर्फ खेत से तोड़कर बाजार में नहीं बेच रहे हैं. परिवार के सदस्य मिलकर फूलों की माला भी तैयार कर रहे हैं. इससे एक ही फसल से कमाई के दो रास्ते बन रहे हैं. एक तरफ खेत से फूल बेचे जा रहे हैं. दूसरी तरफ उन्हीं फूलों से तैयार मालाओं को बाजार में बेचकर अतिरिक्त आमदनी हो रही है. इस काम में किसान परिवार के दूसरे सदस्य भी जुड़ जाते हैं. घर की महिलाएं भी माला तैयार करने में मदद करती हैं. इससे खेती के साथ घरेलू स्तर पर रोजगार का अवसर भी बन रहा है.

श्रावणी मेले में बढ़ जाती है फूलों की मांग
श्रावणी मेले के दौरान फूलों की मांग सामान्य दिनों के मुकाबले काफी बढ़ जाती है. दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु मंदिर में पूजा के लिए फूल, माला और अन्य पूजन सामग्री खरीदते हैं. सुबह से ही बाजारों में फूल और मालाओं की दुकानें सज जाती हैं. दिन बढ़ने के साथ बिक्री भी तेज हो जाती है. ऐसे में स्थानीय किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए दूर के बाजारों का रुख नहीं करना पड़ता. आसपास के बाजारों और मंदिर क्षेत्र में ही फूलों की अच्छी खपत हो जाती है. इससे किसानों का परिवहन खर्च बचता है. समय भी कम लगता है. साथ ही उन्हें अपनी उपज के लिए स्थानीय स्तर पर ही बाजार मिल जाता है.

क्या कहते हैं किसान
फूलों की खेती करने वाले किसानों का कहना है कि श्रावणी मेले का समय उनके लिए काफी महत्वपूर्ण होता है. इस दौरान मांग बढ़ने से अच्छी गुणवत्ता वाले फूल आसानी से बिक जाते हैं. किसान प्रमोद पुजहर के मुताबिक, श्रावणी मेले में फूलों की मांग बढ़ने की जानकारी किसानों को पहले से रहती है. इसलिए वे इसकी तैयारी भी पहले से शुरू कर देते हैं. फूलों की खेती से लेकर उन्हें तोड़ने और माला बनाने तक परिवार के सदस्य मिलकर काम करते हैं. उन्होंने बताया कि इससे खेती के साथ अतिरिक्त कमाई का मौका मिलता है. इस काम में सिर्फ किसान ही नहीं, बल्कि परिवार की महिलाएं और अन्य सदस्य भी योगदान देते हैं. इससे पूरे परिवार की भागीदारी बढ़ जाती है.

आमदनी का जरिया बनी फूलों की खेती
श्रावणी मेला खत्म होने के बाद भी फूलों की खेती किसानों के लिए फायदेमंद रह सकती है. मंदिरों और पूजा-पाठ में फूलों की मांग पूरे साल बनी रहती है. इसलिए किसानों को सिर्फ मेले के मौसम पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है. देवघर के ग्रामीण इलाकों में फूलों की खेती अब धीरे-धीरे मौसमी कमाई से आगे बढ़ रही है. यह किसानों की अतिरिक्त आमदनी का साधन बनती जा रही है.

देवघर में बढ़ रही है फूलों की मांग
अगर किसानों को फूलों की खेती की बेहतर तकनीक, बाजार और अच्छी बिक्री व्यवस्था मिले, तो आने वाले समय में यह काम ग्रामीण परिवारों के लिए छोटे घरेलू उद्योग का रूप ले सकता है. बाबा बैद्यनाथ की नगरी में श्रद्धालुओं की आस्था से फूलों की मांग बढ़ रही है. इस बढ़ती मांग का फायदा अब गांवों के किसानों को भी मिल रहा है. खेतों में खिल रहे फूल उनकी मेहनत के साथ-साथ परिवार की आमदनी में भी खुशहाली के रंग भर रहे हैं.

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Amita kishor

न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…

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