नई दिल्ली: हिंद महासागर जियोपॉलिटिक्स का सेंटर बन गया है क्योंकि यहीं से दुनिया का लगभग 60-70 फीसदी समुद्री व्यापार गुजरता है. इस समंदर में जो देश जितना ताकतवर होगा, दुनिया में उसी की तूती बोलेगी. यही वजह है कि चीन यहां लगातार चालबाजियां बढ़ाने में लगा है लेकिन भारत भी हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठा है. ड्रैगन पर लगाम कसने को भारत ने दिल्ली से सटे गुरुग्राम में एक ऐसा हाई-टेक ‘वॉर रूम’ खड़ा कर दिया है, जो समंदर में चीन की हर चाल, हर गुस्ताखी पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रखता है. इसके साथ ही समंदर की रियल-टाइम सूचनाएं सीधे वॉशिंगटन से लेकर ऑस्ट्रेलिया तक भेजी जाती हैं.
समंदर की ‘तीसरी आंख’ है गुरुग्राम का IMAC और IFC-IOR सेंटर
गुरुग्राम के इस बेहद सुरक्षित और आधुनिक परिसर में दो मुख्य सेंटर एक साथ काम करते हैं. पहला है IMAC (Information Management and Analysis Centre) और दूसरा है IFC-IOR (Information Fusion Centre – Indian Ocean Region). 2008 के मुंबई आतंकी हमले के बाद भारत ने अपनी तटीय सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए IMAC की शुरुआत की थी. इसे भारतीय नौसेना और कोस्ट गार्ड मिलकर चलाते हैं.
ये सेंटर देश की 7,500 किलोमीटर लंबी तटरेखा की सुरक्षा करने वाला ‘नेशनल कमांड, कंट्रोल, कम्युनिकेशन एंड इंटेलिजेंस’ नेटवर्क का मुख्य दिमाग है. ये सेंटर हर साल दुनिया के 1,20,000 से ज्यादा कमर्शियल और गैर-सैन्य जहाजों को ट्रैक करता है, जिसे ‘व्हाइट शिपिंग’ डेटा कहा जाता है. तटीय रडार, अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट्स और जहाजों के ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) से मिलने वाले डेटा को यहां प्रोसेस किया जाता है, जिससे समंदर की एक-एक हलचल साफ दिखाई देती है.
भारत से वॉशिंगटन से ऑस्ट्रेलिया तक चीन का रियल टाइम डेटा
इसी परिसर में मौजूद IFC-IOR भारत की वैश्विक ताकत का सबसे बड़ा प्रतीक है. इसे साल 2018 में स्थापित किया गया था ताकि दुनिया के मित्र देशों के साथ मिलकर समुद्री खतरों से निपटा जा सके. इस सेंटर की सबसे बड़ी खासियत ये है कि यहां दुनिया के 15 से ज्यादा देशों के ‘इंटरनेशनल लायजन ऑफिसर्स’ यानी सैन्य अधिकारी हर वक्त तैनात रहते हैं.
इन देशों में अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान, फ्रांस, यूके, सिंगापुर और इटली जैसे बड़े और शक्तिशाली देश शामिल हैं. जब भी हिंद महासागर या उसके आसपास चीन की कोई संदिग्ध पनडुब्बी, जासूसी जहाज या कोई अवैध गतिविधि दिखती है, तो यहां बैठे अधिकारी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक एनालिटिक्स की मदद से सेकंडों में उसकी पहचान कर लेते हैं.
ये सूचना रियल-टाइम में सीधे वॉशिंगटन और कैनबरा जैसे वैश्विक केंद्रों तक पहुंचा दी जाती है. हाल ही में क्वाड देशों के साथ मिलकर शुरू किए गए ‘इंडो-पैसिफिक पार्टनरशिप फॉर मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस’ प्रोग्राम ने इस सेंटर को दुनिया का सबसे खतरनाक सूचना केंद्र बना दिया है.
भारत का मैरीटाइम सर्विलांस सेंटर (फोटो क्रेडिट- https://ifcior.indiannavy.gov.in/)
चीन के ‘डार्क शिपिंग’ के खेल को कैसे फेल करता है भारत?
चीन और उसके इशारे पर काम करने वाले कई अवैध जहाज समंदर में अपनी पहचान छिपाने के लिए अपना ऑटोमैटिक ट्रैकिंग सिस्टम (AIS) बंद कर देते हैं. डिफेंस की भाषा में इसे ‘डार्क शिपिंग’ कहा जाता है. चीन को लगता है कि सिस्टम बंद करके वो भारत और उसके साथियों की नजरों से बच जाएगा, लेकिन गुरुग्राम का ये सेंटर उसकी इसी चालाकी को पकड़ने में माहिर है.
यहां की आधुनिक सेंसर-ड्रिवन टेक्नोलॉजी और सर्विलांस सिस्टम समंदर के ऊपर, नीचे और सतह पर होने वाली किसी भी विसंगति को तुरंत भांप लेते हैं. अगर कोई जहाज अपने तय रास्ते से जरा सा भी भटकता है या अपना सिग्नल गलत दिखाता है यानी किसी तरह की ‘स्पूफिंग’ करता है तो गुरुग्राम में तुरंत रेड अलर्ट जारी हो जाता है. इसके साथ ही भारत ने अब अंडर-वाटर सर्विलांस यानी पानी के अंदर की सर्विलांस सिस्टम को भी बेहद मजबूत कर लिया है, जिससे चीनी पनडुब्बियों का छिपकर निकलना अब नामुमकिन हो चुका है.
हिंद महासागर में चीन का जहाज
ड्रैगन की हर गुस्ताखी का ऑन-स्पॉट इलाज
साउथ चाइना सी से लेकर हिंद महासागर तक चीन जिस तरह से छोटे देशों को डराकर अपने बेस बना रहा है, उसे रोकने में गुरुग्राम का ये सेंटर मील का पत्थर साबित हो रहा है. ये सेंटर न सिर्फ चीन की नौसैनिक हरकतों पर नजर रखता है, बल्कि समुद्री डकैती, ह्यूमन ट्रैफिकिंग, हथियारों की तस्करी, और चीन की अवैध फिशिंग को भी ट्रैक करता है.
आज ये सेंटर 30 से ज्यादा देशों के साथ सीधे तालमेल बिठाकर काम कर रहा है. भारत की इस ‘मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस’ यानी समुद्री निगरानी क्षमता ने चीन को उसके ही जाल में घेर लिया है. जिनपिंग की सेना चाहे जितनी कोशिश कर लें लेकिन गुरुग्राम में बैठे भारतीय नौसेना के जांबाज और आधुनिक कंप्यूटर उनके हर चक्रव्यूह को पल भर में डिकोड कर देते हैं.