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India Monsoon Rain | China Clean Air Effect On India Weather |...


नई दिल्ली: मानसून की बारिश का संबंध सिर्फ हमारे देश के मौसम से नहीं है. यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि दुनिया के किस हिस्से में हवा कितनी साफ हो रही है. खास तौर पर चीन और पूर्वी एशिया में प्रदूषण कम होने का असर हमारे मानसून पर पड़ रहा है. यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग की एक नई रिसर्च में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. रिसर्च बताती है कि अगर चीन अपनी हवा साफ करता है, तो भारत के कुछ हिस्सों में बारिश कम हो सकती है. इसके अलावा भारत के उत्तरी राज्यों में इन दिनों एक अलग ही मौसमी परेशानी चल रही है. दिल्ली-एनसीआर और यूपी में मानसून अचानक थम गया है. इसे ब्रेक मानसून कहा जा रहा है.

क्या चीन की साफ हवा छीन लेगी भारत की बारिश?

यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग की यह रिसर्च हाल ही में ‘एनवायर्नमेंटल रिसर्च: क्लाइमेट’ जर्नल में पब्लिश हुई है. इसमें बताया गया है कि दुनिया भर में पॉल्यूशन कम होने से भारत के मानसून में शानदार बारिश हो सकती है. लेकिन अगर सिर्फ कोई एक रीजन जैसे चीन अपनी हवा साफ करता है, तो इसका उल्टा असर भी हो सकता है.

चीन और पूर्वी एशिया में जब पॉल्यूशन कम होता है, तो वहां की जमीन ज्यादा गर्म होती है. इससे वहां मानसून का सर्कुलेशन मजबूत होता है और बारिश बढ़ जाती है. चीन में गर्मियों के मानसून के दौरान हर दिन 0.20 मिलीमीटर बारिश बढ़ जाती है. लेकिन भारत के लिए यही बात नुकसानदायक साबित हो रही है.

क्या चीन की साफ हवा निगल रही है भारत की बारिश? दुनिया के प्रदूषण ने मानसून के साथ किया भयंकर खेल. (फाइल फोटो : PTI)

हवा के पैटर्न हजारों मील दूर तक जुड़े होते हैं. इस वजह से चीन में पॉल्यूशन कम होने से मध्य-पश्चिम और पूर्वी भारत में हर दिन 0.2 से 0.6 मिलीमीटर तक बारिश कम हो सकती है.

पॉल्यूशन का मानसून और सूरज की रोशनी से क्या है कनेक्शन?

पॉल्यूशन और बारिश के बीच का साइंस समझना बहुत जरूरी है.

  1. असल में हवा में मौजूद पॉल्यूशन सूरज की एनर्जी को जमीन और समुद्र तक पहुंचने से रोकता है. जब सूरज की रोशनी कम पहुंचती है, तो सतह ठंडी रहती है और इससे बारिश कमजोर पड़ जाती है.
  2. जब कोई इलाका अपना पॉल्यूशन कम करता है, तो सूरज की ज्यादा रोशनी सीधे जमीन पर आती है. इससे सतह का तापमान बढ़ता है और मानसून का सिस्टम मजबूत होता है.
इस स्टडी के लीड ऑथर अंकित भांडेकर ने कहा, ‘पॉल्यूशन कम होना लगभग हर जगह अच्छी खबर है. लेकिन हमारी फाइंडिंग्स दिखाती हैं कि एक देश का क्लीन-एयर प्लान चुपचाप दूसरे देश की बारिश को कम कर सकता है.’

यह बताता है कि ग्लोबल लेवल पर तालमेल कितना जरूरी है. भारत के लाखों किसान मानसून की बारिश पर निर्भर हैं. यह बारिश उन फैसलों से तय होती है जो हजारों मील दूर लिए जाते हैं.

ग्लोबल बनाम रीजनल पॉल्यूशन… भारत के लिए कौन सा मॉडल है सबसे बेहतर?

  • भारत और चीन दोनों को अपने एयर क्वालिटी प्लान पर एक साथ काम करने की जरूरत है. अगर वे अलग-अलग काम करेंगे, तो इसके अनचाहे नुकसान उठाने पड़ सकते हैं. साइंटिस्ट्स ने भारतीय मानसून पर पड़ने वाले असर को टेस्ट करने के लिए 10 क्लाइमेट मॉडल्स का इस्तेमाल किया.
  • इस बड़े प्रोजेक्ट को RAMIP (रैमिप) नाम दिया गया है. इसमें दुनिया भर की टीमों ने हजारों कंप्यूटर रन किए हैं. रिसर्च में पाया गया है कि अगर पूरी दुनिया में पॉल्यूशन कम होता है, तो भारत में बारिश काफी बढ़ जाएगी. यह बढ़ोतरी सिर्फ साउथ एशिया में पॉल्यूशन कम होने की तुलना में 50 प्रतिशत ज्यादा होगी.
  • अगर पूरी दुनिया में हवा साफ होती है, तो पूरे भारत में हर दिन 0.28 मिलीमीटर बारिश बढ़ती है. वहीं अगर सिर्फ साउथ एशिया अपनी हवा साफ करता है, तो यह बढ़ोतरी केवल 0.19 मिलीमीटर प्रति दिन होती है. इसका सबसे ज्यादा फायदा उत्तरी बंगाल की खाड़ी, वेस्टर्न घाट और इंडो-गैंजेटिक प्लेन्स को मिलेगा. यह इलाका पाकिस्तान से लेकर उत्तर भारत होते हुए बांग्लादेश तक फैला है.

दिल्ली-एनसीआर और यूपी में अचानक क्यों गायब हो गई बारिश?

अब बात करते हैं भारत के मौजूदा मौसम की. जुलाई की शुरुआत लगातार और भारी बारिश के साथ हुई थी. इससे लोगों को झुलसाने वाली गर्मी से बड़ी राहत मिली थी. लेकिन एक शानदार शुरुआत के बाद उत्तर-पश्चिम भारत में मानसून ने अचानक अपनी रफ्तार खो दी है. दिल्ली-एनसीआर और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश पूरी तरह रुक गई है.

यूपी और दिल्ली-एनसीआर में अचानक क्यों गायब हो गई बारिश? (फाइल फोटो : PTI)

आसमान से घने काले बादल गायब हो गए हैं. उनकी जगह साफ आसमान और तेज धूप ने ले ली है. हवा में उमस लगातार ऊपर-नीचे हो रही है. तापमान एक बार फिर से ऊपर चढ़ने लगा है. लोग गर्मी और पसीने से बेहाल हैं. मौसम एक्सपर्ट्स का कहना है कि मानसून के इस धीमेपन के पीछे एक खास मेटियोरोलॉजिकल फेनोमेना है. इसे ब्रेक मानसून कंडीशन कहा जाता है. इसके साथ ही मानसून ट्रफ में भी बड़ा बदलाव आया है.

मानसून ट्रफ क्या है और इसके शिफ्ट होने से कैसे बदलता है पूरा मौसम?

  1. भारतीय मौसम के संदर्भ में ट्रफ को समझना काफी दिलचस्प है. ट्रफ असल में लो एटमॉस्फेरिक प्रेशर का एक लंबा इलाका होता है. वेदर मैप पर इसे एक डैश वाली लाइन के रूप में दिखाया जाता है. यह ट्रफ अपने साथ भारी बादल, नमी और बारिश लेकर आता है. यह गर्म और नमी वाली हवा को ऊपर उठने के लिए मजबूर करता है.
  2. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) मुख्य रूप से दो तरह के ट्रफ ट्रैक करता है. पहला मानसून ट्रफ और दूसरा ऑफशोर ट्रफ. मानसून ट्रफ एक लो-प्रेशर बेल्ट है जो पूरे देश में फैला होता है. यह बारिश लाने वाली हवाओं के लिए एक हाईवे की तरह काम करता है.
  3. एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह ट्रफ अब उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों से दूर जा चुका है. आईएमडी लखनऊ के साइंटिस्ट एम दानिश ने इस शिफ्टिंग को लेकर अहम जानकारी दी है. एम दानिश ने कहा, ‘मानसून बेल्ट उत्तर प्रदेश के उत्तरी हिस्से में तराई बेल्ट की तरफ शिफ्ट हो गया है. इस वजह से केवल उत्तरी हिस्से में ही बारिश हो रही है.’

ब्रेक मानसून क्या होता है और इसकी वजह से कैसे बढ़ती है गर्मी?

ट्रफ के हिमालय की तलहटी की ओर खिसकने से बारिश का पैटर्न पूरी तरह बदल गया है. अब बारिश यूपी के उत्तरी हिस्सों जैसे गोरखपुर, बलरामपुर और कुशीनगर में हो रही है. इसके अलावा पूर्वी भारत में भी अच्छी बारिश दर्ज की जा रही है. लेकिन दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी यूपी पूरी तरह सूखे रह गए हैं. इस सूखे की सबसे बड़ी वजह ब्रेक मानसून की स्थिति है.

स्काईमेट वेदर के मेटियोरोलॉजी और क्लाइमेट चेंज के वाइस-प्रेसिडेंट महेश पलावत ने इसे अच्छे से समझाया है. महेश पलावत ने कहा, ‘पिछले कुछ दिनों से दिल्ली सहित उत्तर-पश्चिम भारत में मौसम पूरी तरह सूखा बना हुआ है. इसके पीछे का कारण ब्रेक मानसून कंडीशन का शुरू होना है.’

उन्होंने बताया कि जब मानसून ट्रफ का एक्सिस हिमालय की तलहटी में शिफ्ट हो जाता है, तो ऐसा होता है. इसके नतीजे में ट्रफ के दक्षिण में हवाएं पश्चिम से चलने लगती हैं. ये हवाएं बहुत सूखी होती हैं. इसलिए नमी का स्तर तेजी से नीचे गिर जाता है. नमी कम होने से बारिश रुक जाती है, बादल बनना बंद हो जाते हैं और तापमान बढ़ जाता है.

भारत की बारिश का दुनिया के पॉल्यूशन से क्या है कनेक्शन, जानें मानसून पर इसका गहरा और सीधा असर. (फाइल फोटो : PTI)

क्या अल नीनो के कारण 12 दिनों तक खिंच गया है मानसून ब्रेक?

  • भले ही उत्तर-पश्चिम भारत सूखे का सामना कर रहा है, लेकिन पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में भारी बारिश हो रही है. महेश पलावत बताते हैं कि नॉर्थईस्ट बिहार, बांग्लादेश और असम के ऊपर कई साइक्लोनिक सर्कुलेशन बने हुए हैं. ये सिस्टम बंगाल की खाड़ी से सारी नमी अपनी तरफ खींच रहे हैं.
  • मानसून में ब्रेक आना वैसे तो एक नॉर्मल मौसमी घटना है. लेकिन इस बार का सूखा स्पेल आम ब्रेक से कहीं ज्यादा लंबा खिंच गया है. आमतौर पर मानसून ब्रेक 4 से 6 दिनों तक चलता है. लेकिन इस बार एक्सपर्ट्स इसके पीछे ग्लोबल क्लाइमेट से जुड़े बड़े कारणों को देख रहे हैं.
  • पलावत ने कहा, ‘यह ब्रेक मानसून कंडीशन आमतौर पर जुलाई और अगस्त में एक या दो बार होती है. यह 4 से 5 दिन या ज्यादा से ज्यादा 6 दिनों तक रहती है.’ उन्होंने आगे कहा, ‘लेकिन इस बार हम 11 से 12 दिनों का एक असामान्य रूप से लंबा ब्रेक देख रहे हैं. हम इसका कारण अल नीनो के प्रभाव को मान सकते हैं, जो अब हावी होने लगा है.’
  • जुलाई के दूसरे हाफ में अल नीनो का असर साफ दिख रहा है. इसका सीधा असर भारत के कुल बारिश के आंकड़ों पर पड़ा है. 9 जुलाई तक अच्छी बारिश ने मानसून के घाटे को कम करके सिर्फ 12 प्रतिशत कर दिया था. लेकिन सिर्फ तीन दिनों के भीतर यह कमी वापस बढ़कर 18 प्रतिशत हो गई है.

उत्तर भारत में कब होगी झमाझम बारिश और लोगों को कब मिलेगी राहत?

इन तमाम मुश्किलों के बीच एक अच्छी खबर भी है. यह ब्रेक मानसून केवल कुछ समय के लिए है. आईएमडी और प्राइवेट फोरकास्टर्स दोनों का मानना है कि मानसून ट्रफ अंततः वापस दक्षिण की ओर आएगा. इससे सूखे इलाकों में एक बार फिर बारिश का दौर शुरू होगा.

  1. आईएमडी के अनुसार अगले तीन से चार दिनों के दौरान उत्तर-पश्चिम, पूर्व और पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों में भारी बारिश जारी रहने की उम्मीद है. दिल्ली में फिलहाल आंशिक रूप से बादल छाए रहने की संभावना है. अभी कोई बड़ी बारिश का अलर्ट नहीं है.
  2. आईएमडी लखनऊ के एम दानिश को उम्मीद है कि वेदर सिस्टम धीरे-धीरे नीचे की ओर खिसकेगा. एम दानिश ने कहा, ‘बेल्ट के उत्तरी हिस्से में जो भी ट्रफ लाइन थी, अब वह दक्षिण की ओर बढ़ने लगी है. इसलिए अब हम मानसून के रिवाइवल की बात कह सकते हैं.’
  3. स्काईमेट के महेश पलावत ने भी बारिश की वापसी को लेकर एक क्लियर टाइमलाइन दी है. उन्होंने कहा, ’20 जुलाई के बाद जब मानसून ट्रफ का यह एक्सिस दक्षिण की ओर बढ़ना शुरू करेगा, तो बारिश की एक्टिविटी फिर से तेज होने की उम्मीद है.’

पलावत ने साफ किया कि अभी एक हफ्ते का ब्रेक है. इसके बाद पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बारिश फिर से शुरू हो जाएगी. इससे तापमान एक बार फिर नीचे गिरेगा. फिलहाल दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी यूपी के लोगों को कुछ दिन और गर्म और उमस भरे मौसम का सामना करना पड़ेगा. लेकिन महीने के आखिरी दस दिनों में राहत जरूर मिलेगी.



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