नीट सहित देश की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और इसे लेकर छात्रों के आंदोलन को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है. कांग्रेस प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इसे लेकर बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि पेपर लीक सिर्फ एक परीक्षा की समस्या नहीं है, बल्कि यह देश की शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के भविष्य से जुड़ा गंभीर संकट है. राहुल गांधी ने दावा किया कि पिछले 10 वर्षों में करीब 152 पेपर लीक के मामले सामने आए हैं, लेकिन किसी भी मामले में दोषियों को सजा नहीं मिली.
राहुल गांधी ने कहा कि लाखों छात्र महीनों और वर्षों तक मेहनत करते हैं, परिवार अपनी कमाई खर्च करते हैं, लेकिन परीक्षा से ठीक पहले पेपर लीक होने से उनकी सारी मेहनत बेकार हो जाती है. उन्होंने कहा, ‘करीब 7.5 करोड़ छात्र और उनके परिवार पेपर लीक से प्रभावित हुए हैं. ये ज्यादातर मध्यम वर्ग और गरीब परिवार हैं, जो अपनी मेहनत की कमाई लगाते हैं. लेकिन सरकार की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं दिखती.’
‘शिक्षा व्यवस्था हो गई है फिक्स्ड’
कांग्रेस सासंद ने आरोप लगाया कि देश की शिक्षा व्यवस्था अब निष्पक्ष नहीं रह गई है. उन्होंने कहा कि पहले भारतीय शिक्षा प्रणाली को दुनिया की बेहतरीन व्यवस्थाओं में गिना जाता था, लेकिन आज यह ‘फिक्स्ड सिस्टम’ बन चुकी है. उन्होंने कहा कि जिन छात्रों को परीक्षा के लिए महीनों तैयारी करनी पड़ती है, उन्हें आखिरी समय में पता चलता है कि पेपर लीक हो गया. इससे छात्रों पर मानसिक दबाव बढ़ता है और कई युवा आत्महत्या तक जैसे कदम उठा लेते हैं.
राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों की मांग बिल्कुल जायज है और सरकार को उनकी बात सुननी चाहिए.
‘NEET परीक्षा पर 1.32 लाख करोड़ रुपये खर्च’
कांग्रेस नेता ने शिक्षा के बढ़ते खर्च पर भी सवाल उठाए. उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार का सालाना शिक्षा बजट करीब 1.4 लाख करोड़ रुपये है, जबकि NEET परीक्षा की तैयारी और उससे जुड़ी प्रक्रिया में परिवार करीब 1.32 लाख करोड़ रुपये खर्च करते हैं.
उन्होंने कहा, ‘सरकार बच्चों के भविष्य के लिए जितना खर्च करती है, लगभग उतना ही पैसा परिवार एक परीक्षा के लिए लगा देते हैं. इसके बाद अगर पेपर लीक हो जाए तो यह उन परिवारों के साथ अन्याय है.’
‘युवाओं के पास सिर्फ सरकारी नौकरी का रास्ता बचा’
राहुल गांधी ने पेपर लीक के मुद्दे को बेरोजगारी और रोजगार संकट से भी जोड़ा. उन्होंने कहा कि देश में युवाओं के सामने रोजगार के विकल्प लगातार कम हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर कमजोर हुआ है, छोटे और मध्यम उद्योगों को नुकसान पहुंचा है, उद्यमिता के लिए युवाओं को पर्याप्त मदद नहीं मिल रही और कॉरपोरेट नौकरियों पर भी दबाव है.
उन्होंने कहा, ‘जब रोजगार के बाकी रास्ते बंद हो जाते हैं तो युवाओं के पास सरकारी नौकरी की तैयारी के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता. ऐसे में परीक्षा में गड़बड़ी उनके पूरे भविष्य को प्रभावित करती है.’
राहुल गांधी ने रखीं तीन मांगें…
राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में छात्रों की ओर से तीन प्रमुख मांगें रखीं…
- पहली मांग: उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाने की मांग की. राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि लगातार पेपर लीक की घटनाओं के लिए जिम्मेदारी तय होनी चाहिए.
- दूसरी मांग: उन्होंने प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कार्रवाई करने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग की. उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बल प्रयोग नहीं होना चाहिए.
- तीसरी मांग: उन्होंने प्रधानमंत्री और सरकार से छात्रों से माफी मांगने की अपील की. राहुल गांधी ने कहा कि सरकार को स्वीकार करना चाहिए कि छात्रों के साथ अन्याय हुआ है.
‘छात्र आतंकवादी नहीं, देश का भविष्य हैं’
प्रदर्शनकारी छात्रों पर कार्रवाई को लेकर राहुल गांधी ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जो छात्र अपनी मांगों को लेकर आवाज उठा रहे हैं, वे देश के दुश्मन नहीं हैं. उन्होंने कहा, ‘ये आतंकवादी नहीं हैं, ये हिंदुस्तान का भविष्य हैं. इनकी आवाज सुनी जानी चाहिए.’ उन्होंने छात्रों के आंदोलन को अपना समर्थन देते हुए कहा कि कांग्रेस हर छात्र की मांग के साथ खड़ी है.
NEET पेपर लीक विवाद के बीच राहुल गांधी के इस हमले से राजनीतिक बहस और तेज हो गई है. विपक्ष लगातार परीक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और छात्रों के भविष्य को लेकर सरकार को घेर रहा है. वहीं सरकार की ओर से मामले की जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही जा रही है.