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America Tariff : अमेरिका ने एक बार फिर भारत पर टैरिफ लगाने की बात कही है. इस बार भी रूस से तेल और गैस खरीदने को लेकर टैरिफ लगाने की बात कही जा रही है. अमेरिका ने कहा है कि जो भी देश रूस से तेल और गैस खरीदते हैं, उन्हें 100 फीसदी टैरिफ चुकाना होगा. अमेरिका ने इस मामले में यूरोपीय देशों को छूट दे दी है.
अमेरिका ने रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर टैरिफ लगाने की बात कही है.
नई दिल्ली. अभी कुछ ही दिनों पहले खबर आई थी कि रूस से तेल और गैस मंगाने पर माल ढुलाई का खर्चा काफी कम हो गया है. इसका मतलब हुआ कि भारत के लिए रूस से ईंधन की खरीद और सस्ती हो गई है. लेकिन इस दोस्ती के बीच एक बार फिर अमेरिका दरार डालने जा रहा है. इस बार तो सीधे 100 फीसदी टैरिफ लगाने की बात कही जा रही है. अमेरिका ने ऐसे देशों पर दबाव डालना शुरू कर दिया है, जो रूस से तेल और गैस खरीदते हैं. अब यह बात तो दुनिया जाती है कि भारत और चीन सबसे ज्यादा रूसी तेल खरीदते हैं.
अमेरिका एक तरफ तो भारत के साथ ट्रेड डील पर बातचीत कर रहा है और इसके जल्द फाइनल होने का दावा भी कर रहा है, लेकिन दूसरी तरफ वह भारत पर नया टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहा है. अमेरिका इस बार भी टैरिफ लगाने में दोहरा रवैया अपना रहा है. उसकी निगाह 5 देशों पर है, जो आज भी रूस से तेल की खरीद करते हैं. हालांकि, यूरोपियन देशों को इस टैरिफ से छूट दी जा रही है. यूरोप के तमाम देश आज भी रूस से नेचुरल गैस खरीदते हैं, लेकिन उन पर टैरिफ नहीं लगाया जाएगा. यह कदम सिर्फ भारत-चीन सिहत 5 देशों के खिलाफ उठाने की तैयारी है.
अमेरिका ने क्यों चली ऐसी चाल
अमेरिका के 60 सीनेटर्स ने इस बात पर सहमति जताई है कि रूस को तेल से आ रहे रेवेन्यू पर रोक लगाई जाए. इस बारे में एक बार फिर टैरिफ को ही हथियार बनाया जा रहा है. साल 2022 के बाद से ही चीन और भारत सबसे ज्यादा रूसी तेल खरीद रहे हैं, क्योंकि पश्चिमी देशों ने प्रतिबंध लगा रखा है और रूस हमें सस्ता तेल उपलब्ध करा रहा है. अमेरिका के नए बिल में कहा जा रहा है कि भारत और चीन के अलावा तीन और देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने की तैयारी है, जो रूस से सबसे ज्यादा तेल खरीदते हैं. हालांकि, अभी कांग्रेस की ओर से इस पर मंजूरी मिलना बाकी है.
फिर यूरोप को क्यों दे रहे ढील
अमेरिका एक तरफ तो रूसी तेल खरीदने को लेकर भारत और अमेरिका पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने की बात कर रहा है तो दूसरी ओर यूरोपीय देशों को इससे छूट दी जा रही है. अमेरिका के बिल में कहा जा रहा है कि रूस से नेचुरल गैस खरीदने वाले यूरोपीय देशों को टैरिफ से छूट दी जा रही है, जबकि कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर टैरिफ लगाया जाएगा. अमेरिका का यह कदम रूस की आमदनी पर रोक लगाने के लिए उठाया जा रहा है. जबसे यूक्रेन युद्ध शुरू हुआ है, उसके बाद से ही भारत और चीन जैसे देश रूसी तेल के सबसे बड़े खरीदार बने हुए हैं. जाहिर है कि इसका सबसे ज्यादा असर भी इन दोनों पर ही होगा.
भारत के लिए इसके क्या मायने
अमेरिका की टैरिफ लगाने की ताजा कोशिश भारत के लिए दोहरी मुश्किल पैदा कर सकती है. एक तो अमेरिका के साथ होने वाले निर्यात पर इसका असर दिखेगा, अगर 100 फीसदी टैरिफ लगाया जाता है. दूसरी ओर, अगर टैरिफ के दबाव में आकर रूसी तेल की खरीद कम या बंद की जाती है तो ईरान युद्ध के मौजूदा हालात में यह भारत की ईंधन जरूरतों पर परेशानी पैदा कर सकता है. हैरानी बात ये है कि पाकिस्तान को इस टैरिफ से पूरी तरह छूट दी जा रही है. वैसे भी भारत अपनी जरूरत का 50 फीसदी से ज्यादा तेल रूस से खरीद रहा है, जबकि पाकिस्तान इस मामले में कहीं पीछे है.
भारत का क्या रुख
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जैसवाल का कहना है कि 100 फीसदी टैरिफ लगाने के मामले पर नजर रखी जा रही है. सरकार इस कदम को लेकर पूरी तरह जागरुक है और स्थिति पर नजर रखी जा रही है. भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए दुनिया के तमाम देशों से तेल आयात कर रहा है, जिसमें रूस भी शामिल है. इस मामले में भारत अपनी बात मजबूती के साथ रखेगा.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें