Maoist Misir Besra Arrest: साल था 2009… जब बिहार पुलिस एक शख्स को लेकर लखीसराय के सिविल कोर्ट पहुंची, जहां उसे पेश होना था. लेकिन थोड़ी ही देर में पूरे अदालत परिसर का मंजर बदल गया. एक दुस्साहसी हमले में, लगभग 50 हथियारबंद माओवादियों ने पटना से लगभग 165 किलोमीटर दूर लखीसराय में सिविल कोर्ट परिसर पर हमला किया, बम फोड़े और गोलीबारी की. माओवादियों ने लॉक-अप का ताला तोड़कर गिरिडीह के अपने कमांडर को छुड़ा लिया. दरअसल, ये सब किया गया था टॉप माओवादी नेता मिसिर बेसरा को पुलिस कैद से आजाद कराने के लिए.
इस घटना का जिक्र इसलिए क्योंकि अब 17 साल बाद मिसिर बेसरा फिर से पुलिस की गिरफ्त में है. झारखंड के धनबाद जिले से शीर्ष माओवादी मिसिर बेसरा को 28 जुलाई की शाम गिरफ्तार कर लिया गया. बेसरा पर एक करोड़ रुपये से अधिक का इनाम था. पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि बेसरा झारखंड और ओडिशा समेत कई राज्यों में माओवादी गतिविधियों से जुड़े कई मामलों में वॉन्टेड था. अधिकारी के मुताबिक, गिरिडीह जिले के हरलाडीह निवासी बेसरा को धनबाद जिले के बरवाअड्डा थाना क्षेत्र के मनियाडीह इलाके से गिरफ्तार किया गया.
मिसिर बेसरा कौन हैं?
मिसिर बेसरा, जिन्हें भास्कर और सागर जैसे नामों से भी जाना जाता है, झारखंड के इकलौते माओवादी पोलित ब्यूरो सदस्य हैं. उन्हें CPI (माओवादी) के वैचारिक और ऑपरेशनल कमांड स्ट्रक्चर में एक अहम व्यक्ति माना जाता है. 66 साल के यह नेता लगभग दो दशकों तक फरार रहे. उन्हें आखिरी बार 2007 में झारखंड में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन 2009 में वे बिहार पुलिस की कस्टडी से भाग निकले. यह घटना तब हुई जब माओवादी कैडरों ने लखीसराय जिले में कोर्ट परिसर पर हमला किया, जहां उन्हें प्रोडक्शन रिमांड पर लाया गया था.
सुरक्षा बल कई सालों से बेसरा की तलाश कर रहे थे; पुलिस अधिकारी उसे माओवादी पोलित ब्यूरो के बचे हुए आखिरी सीनियर सदस्यों में से एक मानते थे. इस ग्रुप की टॉप लीडरशिप के बाकी सदस्य या तो सरेंडर कर चुके हैं या फिर छत्तीसगढ़, तेलंगाना, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश में हुए एनकाउंटर में मारे जा चुके हैं.
16 माओवादियों ने भी किया सरेंडर
इससे पहले मंगलवार को झारखंड पुलिस के समक्ष 16 माओवादियों ने सरेंडर किया था. इनमें से छह माओवादियों पर कुल 39 लाख रुपये का इनाम घोषित था. अधिकारी के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वालों में संतोष महतो उर्फ वासुदेव दा उर्फ दिलीप भी शामिल था, जो 128 मामलों में वॉन्टेड था और उस पर 15 लाख रुपये का इनाम था. उन्होंने बताया कि सरेंडर 10 लाख रुपये का इनामी जोनल कमेटी सदस्य चंदन लोहरा, पांच-पांच लाख रुपये के इनामी सब-जोनल कमेटी सदस्य अनिल तुरी उर्फ उज्ज्वल और सुखलाल बिरंजिया उर्फ अकेला, दो-दो लाख रुपये के इनामी एरिया कमेटी सदस्य सुदेश होनहागा उर्फ सोनाराम और रिसिव सोय शामिल हैं.
एके-47 राइफल और एचके-33 राइफल बरामद
इसके अलावा संतोष मांझी उर्फ जगबंधु, जयकांत मुंडा उर्फ गूंगा उर्फ बंगाली, राजनाथ हांसदा उर्फ गुना हांसदा, एतवारी मांझी उर्फ सोनोत उर्फ संत, देवान मुर्मू उर्फ शनिचरवा, सुमित्रा सुरीन, चंपा मंझियाइन उर्फ गुड़िया, सालमी मुंडा उर्फ पारूल, मुन्नी सुरीन उर्फ मुरीन सुरीन और सीता मुंडा ने भी हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया. देवान मुर्मू को एक करोड़ रुपये के इनामी शीर्ष माओवादी नेता मिसिर बेसरा का मुख्य अंगरक्षक माना जाता रहा है. आत्मसमर्पण के दौरान नक्सलियों ने छह इंसास राइफल, दो एके-47 राइफल, एक एचके-33 राइफल, एक यूएस कार्बाइन और एक एम-16 राइफल समेत कुल 11 आधुनिक हथियार जमा किए. इसके अलावा 38 मैगजीन और 1,562 जीवित कारतूस भी सुरक्षा बलों को सौंपे गए.