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झारखंड के पलामू में कम बारिश से किसान परेशान हैं. ऐसे में कृषि वैज्ञानिक डॉ. दिलीप पांडे ने उपाय बताए हैं. किसान कम अवधि (100-110 दिन) वाले धान चुनें. पोटाश के प्रयोग से पौधे सूखा सह सकेंगे. पोटाश का घोल बनाकर छिड़काव करने से नमी की कमी से बचाव होगा.
पलामूः इस खरीफ सीजन में मौसम की बेरुखी का असर इस साल झारखंड में खेती पर साफ देखने को मिल रहा है. जहां कम बारिश के कारण धान की खेती करने वाले किसानों की चिंता बढ़ गई है. पलामू जिले में भी पर्याप्त बारिश नहीं होने से कई खेतों में नमी की कमी की स्थिति बनी हुई है. वहीं धान ऐसी फसल है, जिसे शुरुआती अवस्था में पर्याप्त पानी और नमी की जरूरत होती है. खेत में पानी की कमी होने पर पौधों की बढ़वार प्रभावित होती है, कल्ले कम निकलते हैं और पौधों का विकास रुकने लगता है. लंबे समय तक सूखे की स्थिति रहने पर फूल और दाना बनने की प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है, जिससे उत्पादन में कमी आने की आशंका रहती है.
क्या कहते हैं कृषि वैज्ञानिक?
कृषि वैज्ञानिक डॉ. दिलीप पांडे ने लोकल18 को बताया कि धान पलामू जिले की प्रमुख खाद्यान्न फसलों में शामिल है. किसान इसकी खेती मुख्य रूप से अपने भोजन के साथ-साथ पशुओं के लिए चारे की जरूरत पूरी करने के लिए भी करते हैं. ऐसे में कम बारिश के बावजूद किसानों के लिए धान की खेती से बेहतर उत्पादन लेना जरूरी है. इसके लिए किसान कम अवधि में तैयार होने वाले धान के प्रभेदों का चयन कर सकते है. ऐसे में 100 से 110 दिनों में तैयार होने वाले प्रभेदों की खेती कम बारिश की स्थिति में किसानों के लिए बेहतर विकल्प हो सकती है. इससे फसल कम समय में तैयार हो जाती है और पानी की आवश्यकता भी अपेक्षाकृत कम अवधि तक रहती है.
उन्होंने कहा कि कम बारिश की स्थिति में पौधों को सूखे के प्रभाव से बचाने के लिए पोटाश का प्रयोग भी उपयोगी हो सकता है. किसान एक कट्ठा खेत में करीब 500 से 600 ग्राम पोटाश का प्रयोग कर सकते हैं. पोटाश पौधों में सूखा सहने की क्षमता बढ़ाने में मदद करता है और पौधों के विकास के लिए भी महत्वपूर्ण पोषक तत्व है. हालांकि उर्वरक का प्रयोग मिट्टी की जांच और स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार करना बेहतर रहेगा.
खेत में नमी की कमी है तो करें ये उपाय
आगे बताया कि यदि खेत में नमी की कमी लगातार बनी हुई है, तो किसान पोटाश का घोल बनाकर पत्तियों पर छिड़काव कर सकते हैं. इसके लिए एक लीटर पानी में करीब 10 ग्राम पोटाश का घोल बनाकर 15 से 20 दिन के अंतराल पर छिड़काव किया जा सकता है. इससे पौधों में पोटाश की कमी को दूर करने में मदद मिल सकती है.
उन्होंने यह भी कहा कि कम बारिश में किसान खेत की नमी को बनाए रखने पर भी विशेष ध्यान दें. अनावश्यक पानी की बर्बादी न करें और उपलब्ध सिंचाई पानी का जरूरत के अनुसार उपयोग करें. धान की फसल में समय पर पोषक तत्व प्रबंधन, खरपतवार नियंत्रण और रोग-कीट की निगरानी भी जरूरी है. मौसम की स्थिति को देखते हुए किसान कम अवधि वाले धान के प्रभेद, संतुलित पोषण और नमी संरक्षण की तकनीक अपनाकर कम बारिश की चुनौती के बीच भी बेहतर उत्पादन लेने की कोशिश कर सकते हैं.
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प्रसून सिंह को मीडिया में 7 साल काम करने का अनुभव है. खबरों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रोचक अंजाद में पेश करना खासियत है. दैनिक भास्कर अखबार में इंटर्नशिप के साथ करियर की शुरुआत हुई.
इसके बाद ETV Bharat (बिहार)…
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