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Ranchi Doctor Nikita’s Motivational Story: रांची की डेंटिस्ट डॉ. निकिता उन सभी महिलाओं के लिए प्रेरणा हैं, जो समाज के ताने सुन अपने कदम पीछे कर लेती हैं. निकिता ने इतनी आर्थिक तंगी झेली, समाज की बातें सुनी लेकिन कदम पीछे नहीं किए. एक समय था जब वे बच्ची के साथ क्लीनिक जाती थीं और आज उनके पास घर, गाड़ी सब है और वह भी अपने पैसे से कमाया हुआ.
रांची. झारखंड की राजधानी रांची की डॉक्टर निकिता पेशे से डेंटिस्ट हैं. उन्होंने बताया, ‘पढ़ाई के तुरंत बाद ही शादी हो गई थी और फिर बच्चे भी. लेकिन जिंदगी में मुश्किलों ने कम होने का नाम नहीं लिया. कई सारी चीजों का सामना करना पड़ा, आर्थिक तंगी से लेकर मानसिक दबाव, हर एक चीज. लेकिन मैंने हार नहीं मानी और आज एक सफल डेंटिस्ट के तौर पर जानी जाती हूं.
आर्थिक तंगी ऐसी थी कि बच्चों के भविष्य और उनके दूध के लिए भी मुझे सोचना पड़ता था. ऐसे में मैंने 1 साल की बेटी को गोद में उठाकर क्लीनिक में काम करना शुरू कर दिया. कई-कई रात तो नींद नहीं आती थी, इतनी सारी चुनौती थी. लेकिन मैंने भी हार नहीं मानी. एक हाथ में बच्चा तो एक हाथ से मरीजों को देखना, मैंने दोनों चीजों को बैलेंस किया. और आज रांची में तीन जगह बूटी मोड, लालपुर और हनुमान नगर में तीन क्लीनिक चलती हैं.’
सोसाइटी का डर हमेशा रहता
निकिता ने बताया, ‘प्रताड़ना झेलना कोई मेरा शौक नहीं था. लेकिन महिलाओं के लिए समाज एक बहुत बड़ी चुनौती बन जाता है. क्योंकि, आप भले सही क्यों न हों लेकिन समाज अधिकतर लड़कियों को ही गलत ठहराता है. अगर मैं मायके जाऊं तो समाज कहेगा, इसी में कोई दोष है. मैं तो सुनूंगी, साथ में परिवार वाले भी सुनते हैं. लेकिन आखिर आप कब तक बर्दाश्त करेंगे, हर चीज की एक सीमा होती है.
आपके लिए कोई स्टैंड लेने वाला नहीं होता. आपको अपने लिए स्टैंड लेना होगा और यही मैंने भी किया. क्योंकि, मेरे आगे मेरी दो बच्चियों का भविष्य था. मैं एक-एक पैसे के लिए तरसी हूं. दिमागी रूप से भी काफी प्रताड़ना झेली है. कई बार तो जिंदगी भी बोझ लगने लगती थी. लेकिन जब दोनों बच्चियों को देखती थी, तो फिर से हौसला आ जाता था. मेरी बेटियां भी आज मुझ पर गर्व करती हैं.’
दो बेटियों के लिए भी सुनने पड़े ताने
‘मुझे अपनी दो बेटियों के लिए भी समाज का ताना झेलना पड़ा कि मैंने बेटा पैदा नहीं किया. लेकिन इन सब चीजों पर ध्यान नहीं दिया और सिर्फ और सिर्फ अपने काम पर फोकस किया. और आज आलम यह है कि अपना फ्लैट और अपनी गाड़ी, आज हर एक चीज है और सिंगल मदर होकर अपनी दोनों बेटियों को अच्छी शिक्षा दे रही हूं और अन्य महिलाओं से भी कहती हूं कि अपने लिए आवाज उठाएं, गलत को गलत कहें. उस समय थोड़ी तकलीफ तो होगी. लेकिन इससे आपका फ्यूचर सुरक्षित होगा.’
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बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें